शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

मध्यभारत की सबसे बड़ी कांवड़यात्रा 30 जुलाई से


कर्मश्री  कांवड़यात्रा का लगातार 9 वां वर्ष

7 हजार से अधिक कांवड़िए होंगे शामिल

भोपाल। राजधानी कमध्यभारत की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा 30 से

- ‘कर्मश्री’ द्वारा कांवड Þयात्रा का 9वां वर्ष

- सात हजार से अधिक कांवड़िये होंगे शामिल

 
शहर प्रतिनिधि, भोपाल
राजधानी की प्रतिष्ठित संस्था ‘कर्मश्री’ के तत्वावधान में प्रतिवर्ष श्रावण मास में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा इस बार 30 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित की जाएगी। कांवड़ यात्रा के संयोजक हुजूर विधायक एवं कर्मश्री के अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने बुधवार को पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा 30 जुलाई को  सुबह 7 बजे होशंगाबाद के सेठानी घाट से शुरू होगी। यहां से कांवड़िए अपनी कांवड़ में नर्मदा जल भरकर भोपाल की ओर रवाना होंगे तथा  तीन दिन में 111 किमी पैदल चलकर भोपाल में लालघाटी स्थित गुफा मंदिर पहुंचेंगे। गुफा मंदिर में श्रावण सोमवार 1 अगस्त को कांवड़ केजल से भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया जाएगा। श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़ यात्रा आरंभ करने से पहले 29 जुलाई को शाम 7 बजे सेठानी घाट होशंगाबाद पर नर्मदा मैया की पूजन-आरती की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि कर्मश्री की कांवड़ यात्रा का यह लगातार 9वां वर्ष है।  उन्होंने बताया कि इस यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों स्थानों से आए 7 हजार से अधिक कांवड़िये शामिल होंगे। 
 
प्रकृति और धर्म के प्रति सबकी जिम्मेदारी: 
कांवड़ यात्रा का महत्व समझाते हुए संस्था अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को सब कुछ दिया है। हम सभी प्रकृति के ऋणी हैं। कांवड़ यात्रा प्रकृति की, सृष्टि की आराधना का उत्सव है। इसमें भागीदारी कर हम प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। इसी प्रकार धर्म ही हमारा जीवन है, धर्म के बिना हमारा जीवन कुछ भी नहीं है। ‘धर्मो रक्षति रक्षित:’अर्थात जो धर्म के रक्षार्थ कार्य करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से हम पवित्र श्रावणमास में भगवान शिव के आशुतोष स्वरूप का पूजन करते हैं। शिव सृष्टि के देवता है और कांवड़ यात्रा सृष्टि की आराधना का पर्व है। अत: हर व्यक्ति को कांवड़ यात्रा में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यथासंभव भाग लेना चाहिए। 
 
111 किमी पदयात्रा में तीन पड़ाव :
श्री शर्मा ने बताया कि तीन दिवसीय इस पूरी यात्रा में कांवड़िये 111 किमी पैदल चलकर कांवड़यात्रा पूर्ण करेंगे। यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले 29 जुलाई शाम को  कांवड़िये होशंगाबाद पहुंच जाएंगे। अगले दिन 30 जुलाई को सुबह 7 बजे सेठानी घाट से कांवड़ यात्रा की विधिवत शुरुआत होगी। इसी दिन मुख्य मार्ग से होते हुए यात्रा पूर्वान्ह 11 बजे बुदनी पहुंचेगी,जहां दोपहर भोजन के बाद शाम को बरखेड़ा पहुंचेगी। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 31 जुलाई को मंडीदीप में यात्रियों का पड़ाव रहेगा। इसके बाद अगले दिन 1 अगस्त को यहां से यात्रा सुबह 7 बजे आरंभ होगी और बैरागढ़ चीचली के रास्ते भोपाल में प्रवेश करेगी। कोलार के गेहूंखेड़ा, नयापुरा, ललितानगर, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा होते हुए बीजेपी आॅफिस,  प्रगति पेट्रोल पंप, अंबेडकर चौराहा, पयार्वास भवन, जेल पहाड़ी, राजभवन, रविंद्र भवन, पॉलीटेक्निक चौराहा, रॉयल मार्केट से लालघाटी होते हुए शाम 5 बजे गुफा मंदिर पहुंचेगी, जहां सभी कावंड़ियों द्वारा कांवड़ में लाए गए नर्मदा जल से शिव का अभिषेक किया जाएगा।

संतनगर में निकलेगी चुनरी यात्रा :
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा के लिए होशंगाबाद रवाना होने के पूर्व आयोजक संस्था द्वारा संतनगर में चुनरी यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि चुनरी यात्रा 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे संतनगर में सीहोर नाका बीआरटीएस से शुरू होकर संत हिरदाराम जी की कुटिया पर पहुंचेगी। इस यात्रा में शामिल 7 हजार  श्रद्धालु मां नर्मदा को चढ़ाने वाली चुनरी को संतनगर रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे, जहां से वे होशंगाबाद रवाना होंगे। श्री शर्मा ने बताया कि चुनरी यात्रा में पूजन की गई चुनरी होशंगाबाद में कांवड़ यात्रा आरंभ होने के पूर्व सेठानी घाट पर मां नर्मदा को समर्पित की जाएगी। 
 
 प्रतिष्ठित संस्था कर्मश्री के तत्वावधान में प्रतिवर्ष श्रावण मास में निकाली जाने वाली कांवड़यात्रा इस बार 30 जुलाई से 1 अगस्त तक निकाली जाएगी। कांवड़यात्रा के संयोजक-हुजूर विधायक एवं ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण अध्यक्ष रामेष्वर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार की कांवड़यात्रा 30 जुलाई को अलसुबह 7 बजे होषंगाबाद के प्रसिद्ध सेठानी घाट से शुरू होगी। यहां से कांवड़िए अपनी कांवड़ में नर्मदा जल भरकर भोपाल की ओर रवाना होंगे। कांधों पर आस्था की कांवड़ उठाए कांवड़िए तीन दिनों में होषंगाबाद से 111 किमी पैदल चलकर भोपाल में लालघाटी स्थित गुफा मंदिर पहुंचेंगे। गुफा मंदिर में श्रावण सोमवार 1 अगस्त को कांवड़जल से भगवान आषुतोष का जलाभिषेक किया जाएगा। श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा आरंभ करने के पूर्व 29 जुलाई शुक्रवार को सांय 7 बजे सेठानी घाट होशंगाबाद पर नर्मदा मैया की पूजन-आरती की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण की कांवड़यात्रा का यह लगातार 9 वां वर्ष है। कांवड़यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों स्थानों से आए 7 हजार से अधिक कांवड़िए शामिल होंगे। कांवड़ियों के पंजीयन का कार्य लगातार चल रहा है, कांवड़यात्रा शुरू होने तक यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
 
प्रकृति और धर्म के प्रति सबकी जिम्मेदारी: रामेष्वर 
प्रकृति ने मनुष्य को सब कुछ दिया है। सभी मनुष्य प्रकृति के ऋणी हैं। कांवड़यात्रा प्रकृति की-सृष्टि की अराधना का उत्सव है। इसमें हमारी भागीदार से हम प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। इसी प्रकार धर्म ही हमारा जीवन है, धर्म के बिना हमारा जीवन कुछ भी नहीं है। कहा गया है कि ह्यह्यधर्मो रक्षति रक्षित:ह्णह्ण अर्थात जो धर्म के रक्षणार्थ कार्य करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। कांवड़यात्रा के माध्यम से हम पवित्र श्रावणमास में भगवान षिव के आषुतोष स्वरूप का पूजन करते हैं। शिव सृष्टि के देवता है और कांवड़ यात्रा सृष्टि की अराधना का पर्व है। कांवड़ यात्रा में शामिल कांवड़िए पवित्र नदियों का जल कांवड़ में भरकर भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए निकलते हैं तो वे भोलेनाथ  के साथ पूरी प्रकृति की अराधना कर रहे होते हैं। अत: हर व्यक्ति को कांवड़यात्रा में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से, यथासंभव बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। 



धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा की अलख जगाएंगे
कांवड़यात्रा के संयोजक विधायक रामेष्वर शर्मा ने बताया कि हर बार हम कांवड़यात्रा के माध्यम से  धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति जनजागरण के संकल्प करवाते हैं। इस बार भी पंरपरानुसार कांवड़यात्रा में शामिल कांवड़िए स्वच्छता का संदेष देते हुए चलेंगे, साथ ही बेटी-गौवंष-जल बचाओ, वृक्ष लगाओ, धर्म चेतना-राष्ट्रचेतना और नषामुक्त भारत का संदेश लेकर यात्रा करेंगे और इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लोगों को कृतसंकल्पित करने का काम करेंगे। उद्देश्यों के बारे में विस्तार से समझाते हुए उन्होंने कहा कि देष के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत का नारा दिया है। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत हो सकता है। बेटी बचाओ इसीलिए कि बेटी शक्तिस्वरूपा है, बेटी से सृष्टि का अस्तित्व है, पानी बचाओ इसीलिए क्योंकि पानी नहीं होगा तो शिव का अभिषेक कैसे होगा ? गौवंश बचाओ इसीलिए कि शिव का नंदी गौवंश से ही तो है। पेड़ लगाओ इसीलिए कि पेड़ों से ही तो शिव को अर्पित होने वाला बिल्वपत्र मिलेगा। धर्मचेतना-राष्ट्रचेतना और नषामुक्त भारत से नागरिकों में अपने धर्म और संस्कृति के प्रति प्रेम लगातार बना रहेगा और लोग भौतिकतावादी बुराईयों से दूर रह सकेंगे। उन्होनें कहा कि कांवड़यात्रा के तीन दिनों के दौरान धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा की जो अलख जगेगी वह गांव-गांव तक जाएगी और पूरे समाज को जागरूक करने का काम करेगी।
 
कांवड़यात्रा का महत्व
आयोजक संस्था के अध्यक्ष एवं हुजूर विधायक रामेष्वर शर्मा ने कांवड़यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रावण शिव का महीना है। शंकर हरियाली के प्रतीक है, वे प्रकृति के देवता है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से हम शिव की अराधना तो करते ही हैं, साथ ही संपूर्ण सृष्टि का पूजन भी करते हैं। यात्रा के धार्मिक महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन में अनमोल रत्नों के साथ अमृत और विष भी निकला था। मानवता और सृष्टि की रक्षा के लिए शिव ने विष को अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से शिव का कंठ नीला पड़ गया था और वे नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवतागण शिव का गंगाजल से अभिषेक करने लगे थे। यही वजह है कि शिव भक्त दूर-दूर से कांवड़ में पवित्र नदियों का जल भरकर लाते हैं और भगवान शिव का अभिषेक कर सदैव सृष्टि की रक्षा करने और आपदाओं से रक्षा करने की कामना व्यक्त करते हैं। उन्होने बताया कि कांवड़ यात्रा धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। कांवड़ यात्रा के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की अराधना के लिए है। पानी मनुष्य के साथ-साथ पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और पृथ्वी पर निवास करने वाले लाखों-करोड़ों जीव जंतुओं और संपूर्ण पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। मनुष्य के अनियमित क्रियाकलापों की वजह से पूरी सृष्टि में पारीस्थितिक असंतुलन की स्थिती उत्पन्न हो गई है। कांवड-यात्रा के माध्यम से हम सृष्टि के देवता शिव का जलाभिषेक कर मानवीय गलतियों की क्षमा मांगते हैं और उनसे पूरी सृष्टि में अच्छे मानसून और पारीस्थितिक संतुलन बनाए रखने की कामना करते हैं। 
 
तीन पड़ाव, 111 किमी की पैदल यात्रा
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़िए यात्रा शुरू होने के एक दिन पहले ही 29 जुलाई शाम को होषंगाबाद पहुंच जाएंगे। होषंगाबाद सेठानी घाट स्थित जगदीष मंदिर सहित अन्य स्थानों पर कांवड़ियों के रूकने की व्यवस्था की गई है। इसके अगले दिन 30 जुलाई को सुबह 7 बजे सेठानी घाट से कांवड़यात्रा की विधिवत शुरूआत होगी। इसी दिन मुख्य मार्ग से होती हुई यात्रा पूर्वान्ह 11 बजे बुदनी पहुंचेगी,जहां दोपहर भोजन होगा। दोपहर भोजन उपरांत यात्रा पुन: आरंभ होगी और सांयकाल बरखेड़ा पहुंचेगी। बरखेड़ा एवं उमरिया गुरूद्वारे में कांवडियों के रात्री विश्राम एवं रात्री भोजन की व्यवस्था की गई है। अगले दिन 31 जुलाई को सुबह 7 बजे यात्रा पुन: शुरू होगी और पूर्वान्ह 11 बजे तक औबेदुल्लागंज पहुंचेगी। इस दिन दोपहर भोजन औबेदुल्लागंज में होगा। दोपहर भोजन उपरांत यात्रा पुन: आरंभ होगी और इसी दिन सांयकाल 5 बजे मंडीदीप पहुंचेगी।  इस दिन के रात्री भोजन एवं रात्री विश्राम की व्यवस्था मंडीदीप में की गई है। यहां से अगले दिन 1 अगस्त को यात्रा सुबह 7 बजे पुन: आरंभ होगी और बैरागढ़ चिचली के रास्ते भोपाल में प्रवेश करेगी। यहां से गेहूंखेड़ा, नयापुरा, ललितानगर ,शिवमंदिर, सर्वधर्म,बीमाकुंज,महाबली,मंदाकिनी, सर्वधर्म पुल, चूनाभट्टी नहर, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा, निराला भवन, एकांत पार्क,हबीबगंज नाका, विटठल मार्केट, रविशंकर मार्केट, उत्कृष्ट विद्यालय, सुभाष चैराहा, 7 नंबर,  बीजेपी आफिस, मुखर्जी चैराहा, मानसरोवर, प्रगती पेट्रोल पंप, अंबेडकर चैराहा, गुप्त चैराहा,राजेंद्र प्रसाद चैराहा, पयार्वास भवन, जेल पहाड़ी, जिला न्यायालय, पीएचक्यू, शास्त्री चैराहा, राजभवन, केएन प्रधान चैराहा, रविंद्र भवन, पॉलीटेक्निक चैराहा, स्वर्णकार चैराहा, रॉयल मार्केट, लालघाटी आदि मार्गों से होती हुई अपरान्ह लगभग 5 बजे गुफा मंदिर पहुंचेगी जहां यात्रा में शामिल सभी कावंडियों द्वारा कांवड़ में लाए गए नर्मदा जल से शिव का अभिषेक किया जाएगा। उन्होने बताया कि इस पूरी यात्रा मे तीन दिनों के दौरान कांवड़िए 111 किमी पैदल चलकर कांवड़यात्रा पूर्ण करेंगे।

संतनगर में लगातार तीसरे वर्ष निकलेगी चुनरीयात्रा
नर्मदा मैया को समर्पित होगी यह चुनरी
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा हेतु होषंगाबाद रवाना होने के पूर्व आयोजक संस्था ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण द्वारा संतनगर में चुनरी यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि चुनरी यात्रा 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे संतनगर में सिहोर नाका बीआरटीएस से शुरू होकर संत हिरदाराम जी की कुटिया पर पहुंचेगी । इस यात्रा में शामिल 7000 श्रद्धालु माँ नर्मदा को चढ़ाने वाली चुनरी को संतनगर रेलवे स्टेषन पहुंचेंगे जहां से सभी कांवड़िए होषंगाबाद रवाना होंगे। श्री शर्मा ने बताया कि चुनरी यात्रा में पूजन की गई चुनरी होषंगाबाद में 30 जुलाई की सुबह कांवड़यात्रा आरंभ होने के पूर्व सेठानी घाट पर माँ नर्मदा को समर्पित की जाएगी। उन्होने संतनगर के निवासियों सहित सभी कांवड़ियों से अधिकाधिक संख्या में चुनरी यात्रा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है। उन्होने कहा कि जो लोग संतनगर में चुनरी पूजन में शामिल होंगे उन्हें भी माँ नर्मदा के प्रत्यक्ष पूजन के तुल्य ही पुण्य मिलेगा । संत नगर के विभिन्न व्यापारिक , सामाजिक, सांस्कृतिक , विभिन्न संस्थानों , शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लगभग 51 जगह स्वागत किया जायेगा ।

कालसर्प शांति अनुष्ठान 1 अगस्त से हबीबगंज में


भोपाल राजधानी के हबीबगंज रेलवे स्टेशन स्थित त्र्यम्बकेश्वर धाम मां भवानी शिव मंदिर में ब्रह्म शक्ति ज्योतिष संस्थान द्वारा आगामी 1 से 7 अगस्त नागपंचमी तक कालसर्प योग शांति अनुष्ठान यज्ञ किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा के आचार्यत्व में किए जा रहे इस यज्ञ अनुष्ठान में कालसर्प योग से शांति हेतु वैदिक रीति-रिवाज से शांति के प्रयास किए जाएंगे। पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि जिन व्यक्तियों की जन्मपत्रिका में कालसर्प योग है अथवा मंगल दोष है, राहू-केतु-शनि की महादशा या अंतर्दशा के कारण समय विपरीत चल रहा है उन व्यक्तियों के अभ्युदय सुख संवर्धन के लिए अपने आप में विलक्षण कालसर्प योग शांति यज्ञ का यह आयोजन किया जा रहा है। जो भी व्यक्ति कालसर्प दोष से पीड़ित है, वह इस यज्ञ में शामिल होने के लिए अपना पंजीयन करा लें। पं शर्मा ने कहा कि पूर्व जन्म कृत सर्पदोष के कारण जन्मपत्रिका में सभी गृह राहू केतु के बीच में आ जाते हैं, जिससे कालसर्प नामक कष्टकारक योग बनता है। यह व्यक्ति के लिए अनेक प्रकार से शारीरिक व मानसिक कष्ट, संतान बाधा, भाग्योदय में रुकावट, पारिवारिक क्लेश के साथ सर्प भय उत्पन्न करता है और व्यक्तियों को उनकी क्षमता एवं मेहनत के बराबर लाभ नहीं मिलता, वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्थिर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि इस अनुष्ठान के माध्यम से इन्हीं सब कष्टकारक बाधाओं से मुक्ति दिलाई जाएगी।

उभरती प्रतिभाओं की नायाब तस्वीरें

बर्लिन में आईएम फोटोग्राफी फेस्टिवल अवॉर्ड्स में उभरते कलाकारों की तस्वीरों की प्रदर्शनी हो रही है.


आईएम फ़ोटोग्राफ़ी फ़ेस्टिवल अवॉर्ड्स, उभरती प्रतिभाओं के लिए है. इस साल पांच अलग-अलग श्रेणियों के लिए 2 लाख 70 हज़ार आवेदन आए. इनमें द पोट्रेटिस्ट, द आर्किटेक्ट, द ग्रेट आउटडोर्स, द फ़ोटोजर्नलिस्ट और द स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़र शामिल हैं. ये तस्वीर नैपल्स के एक बीच में लेटी एक महिला की है जिसे माइकल लिबर्टी ने खींचा है.


इस्तांबुल के कैन दागरस्लानी की तस्वीर को 'द पोट्रेटिस्ट' श्रेणी के लिए चुना गया है. ये तस्वीर पहचान की धारणा को दर्शाता है.


'द ग्रेट आउटडोर्स' श्रेणी में फेमी ओनीपिंला की ये तस्वीर शामिल की गई है. ये तस्वीर मोरक्को में डेजर्ट कैंप के दौरान ली गई है.


'द स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़र' श्रेणी में जादसादा इनाएक की इस तस्वीर को शामिल किया गया है जो बैंकॉक के साएम पार्क सिटी एम्यूज़मेंट पार्क की है.


'द फ़ोटोजर्नलिस्ट' श्रेणी में मेलविन एनोरे की इस तस्वीर को शामिल किया गया है जो फ़िलीपींस में गुड फ्राइडे के दौरान धार्मिक जुलूस की है.


'द फ़ोटोजर्नलिस्ट' श्रेणी में मयंक गौतम की इस तस्वीर को शामिल किया गया है जो लखनऊ में मोहर्रम जुलूस के दौरान ली गई थी.


'द फ़ोटोजर्नलिस्ट' श्रेणी में ही ज़ाचारी राबेही की शाबू की तस्वीर को शामिल किया गया है. शाबू पर उनके ही पिता ने एसिड से हमला किया था जब वो केवल एक महीने की थीं. इस हमले में उनकी मां की मौत हो गई थी. शाबू को मुंबई के एक अनाथालय ने गोद लिया है.


'द आर्किटेक्ट' श्रेणी में जॉर्ग फॉकेनबर्ग की इस तस्वीर को शामिल किया गया है जो बर्लिन स्थित एक अनोखे इमारत की है.


'द स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़र' श्रेणी में टॉड बिसकॉफ़ की इस तस्वीर को चुना गया है जो कैलिफोर्निया में खींची गई है. इसका शीर्षक दिया, "मेरी बेटी की पहली घुड़सवारी की तस्वीर".


इस प्रतियोगिता के विजेताओं का नाम 27 अगस्त को बर्लिन में 2016 आईएम फेस्टिवल एंड अवॉर्ड्स के दौरान घोषित किया जाएगा.

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

नाम : डॉ. शाकुंतल पांडे, कवयित्री


परिचय एक नजर में

नाम : डॉ. शाकुंतल पांडे, कवयित्री

जन्म : 1 जुलाई 1947
जन्म स्थान : आगर, उप्र
पता : बी-804, देवपेराडाइज कनकिया रोड, मीरा रोड, मुंबई
मोबाइल : 08655551959


शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र, एमए हिन्दी साहित्य, बीएड, एलएलबी, पत्रकारिता डिप्लोमा, प्रो. अक्षय कुमार जैन के निर्देशन में पीएचडी (हिन्दी साहित्य) विषय - महादेवी जी के गद्य-पद्य में अन्त: सूत्रता।
15 अगस्त 1980 को जबलपुर मप्र में कवयित्री महादेवी वर्मा ने मानस पुत्री वरण किया।
रचनात्मक कार्य : 1974 से 1977 तक व्याख्याता (हिन्दी), 1978 से 1984 तक जनसंपर्क अधिकारी। 1985 से स्वतंत्र लेखन - कविता, गीत, ग•ाल, देश-विदेश में काव्य पाठ एवं मंच संचालन। भारत के कोने-कोने में काव्य पाठ एवं मंच संचालन।
विदेशों में : 1987-8 जून को कोनकोडिया यूनिवर्सिटी कनाडा में राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त शताब्दी पर उनके कृतित्व, व्यक्तित्व पर लेख का पठन किया।
- भारत की आजादी की 50 वीं वर्षगांठ पर देशभक्ति के गीतों का संकलन 'काव्यांजलिÓ का प्रकाशन किया।
- 1987 में विश्व हिन्दी समिति उत्तर अमेरिका न्यूयार्क के आमंत्रण पर अमेरिका के अनेकों शहरों में काव्यपाठ किया।
- 1997 में विश्व हिन्दी समिति ने भारत का प्रतिनिधि नियुक्त किया। समिति की त्रैमासिक पत्रिका सौरभ में स्तंभ लेखन निरंतर चल रहा है।

उपलब्धियां
1. मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल द्वारा 1989 में सम्मानित किया गया।
2. दीपांजलि संस्था भोपाल द्वारा दीपांजलि रत्न से सम्मानित किया गया।
3. विश्व हिन्दी समिति न्यूयार्क अमेरिका द्वारा 16 अगस्त 1997 में विश्व हिन्दी गौरव की उपाधि से सम्मानित किया।
4. मुंबई उत्तर भारतीय संघ द्वारा उत्तर भारतीय रत्न गौरवमूर्ति से सम्मानित किया।
5. मुंबई ब्राह्मण समाज द्वारा विशिष्ट रूप से 2002 की समाज गौरवभूति से मस्मानित किया गया।
6. इस्कान हरे रामा हरे कृष्णा संस्थान, मुंबई द्वारा 2009 में काव्य जगत की सेवा के लिए विशिष्ट अभिनंदन से सम्मानित किया गया।
7. 12 सितंबर 2011 में राजस्थान मंडल द्वारा सम्मानित किया गया।
8. 13 सितंबर 2015 को जोधपुर में बैष्णव समाज ने सम्मानित किया।
9. मीरा माइन्दर मुंबई नगर पालिका में महापौर द्वारा 8 मार्च 2011 को महिला दिवस पर श्रेष्ठ सम्मान से पुरस्कृत किया गया।
10य 9 अप्रैल 2016 को विश्व व्यापी संस्था जीतो द्वारा पूना में जरनी ऑफ सक्सेस रीयल वूमन-रीयल सक्सेस से सम्मानित किया गया।
11. भोपाल में 10 जुलाई 2016 को राष्ट्रीय कवि संगम ने सम्मानित किया।

हिन्दी एवं साहित्य के विकास का कार्य क्षेत्र
- भोपाल में राष्ट्रभाषा परिषद की आजीवन अध्यक्ष के रूप में निरंतर 1981 से 1989 तक प्रतिवर्ष वार्षिक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के आयोजन का संचालन एवं संयोजन किया।
- मुंबई में 1990 में राष्ट्रभाषा परिषद का पंजीकरण किया तथा संस्था के द्वारा मुंबई एवं देश-विदेश में हिन्दी साहित्य के विकास के लिए प्रतिवर्ष कवि सम्मेलन एवं विचार मंच के आयोजन किए।
- मुंबई में सन् 2000 में राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा शिक्षा के विकास के लिए एमपी पब्लिक स्कूल महादेवी जी के नाम पर विद्यालय की स्थापना की।
- सन् 2001 में संस्था ने महादजेवी वर्मा पुरस्कार की स्थापना करके श्रेष्ठ गीतकारों को सम्मानित किया।
1. श्रीमती माया गोविंद
2. गोपालदास नीरज
3. वीरेंद्र कुमार जैन
4. राम मनोहर त्रिपाठी
5. सोम ठाकुर
6. बनारसीदास, अमेरिका
7. रामेश्वर अशांत, अमेरिका
8. चंद्रशेखर मिश्र
9. चंद्रसेन विराट
10. विजयकुमार मेहता
11. राजेश दीक्षित
12. श्रीमती शुक्ला शाह
13. रवीन्द्र जैन
14. राजेंद्र राजन
15. श्रीमती पदमा विनानी
16. श्रीमती किरण खेमका
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प्राी-पैक्ड पैक्स पर 67 प्रतिशत तक डाटा बेनिफिटस बढ़े


प्राी-पैक्ड पैक्स पर 67 प्रतिशत तक डाटा बेनिफिटस बढ़े



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