गुरुवार, 31 मार्च 2016

विधायक शर्मा-सिंह ने जन्मदिन पर विनय पाराशर को आशीर्वाद दिया


भोपाल। भारतीय जनता युवा मोर्चा के वरिष्ठ कार्यकर्ता विनय पाराशर के जन्मदिन पर गुरुवार को शाम 7 बजे समता चौक में आयोजित एक कार्यक्रम में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा एवं मध्य विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह ने केक काटकर उन्हें आशीर्वाद दिया और केक खिलाया। इस अवसर पर मोनू दुबे, गौरीशंकर शर्मा, दिनेश पांडेय, लिली अग्रवाल, लीलेंद्र मारण, राजेंद्र गुप्ता, सुमित पचौरी, नितिन दुबे, आदित्यनाथ सिंह, उस्मान, तेजसिंह ठाकुर, हर्षित, सुधांशु, ऋषभ, कमलेश, अंकित, गौरव सहित बड़ी संख्या में युवा मोर्चा कार्यकर्ता उपस्थित थे।


विधायक शर्मा-सिंह ने जन्मदिन पर विनय पाराशर को आशीर्वाद दिया



भोपाल। भारतीय जनता युवा मोर्चा के वरिष्ठ कार्यकर्ता विनय पाराशर के जन्मदिन पर गुरुवार को शाम 7 बजे समता चौक में आयोजित एक कार्यक्रम में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा एवं मध्य विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह ने केक काटकर उन्हें आशीर्वाद दिया और केक खिलाया। इस अवसर पर मोनू दुबे, गौरीशंकर शर्मा, दिनेश पांडेय, लिली अग्रवाल, लीलेंद्र मारण, राजेंद्र गुप्ता, सुमित पचौरी, नितिन दुबे, आदित्यनाथ सिंह, उस्मान, तेजसिंह ठाकुर, हर्षित, सुधांशु, ऋषभ, कमलेश, अंकित, गौरव सहित बड़ी संख्या में युवा मोर्चा कार्यकर्ता उपस्थित थे।

देवदर्शन से आती है दिव्यता : डॉ. निलिम्प त्रिपाठी

भोपाल। भागवताचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने आराधना नगर में चल रही श्रीमदभागवत कथा में गुरुवार को बलि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भक्तों को वामन भगवान का दर्शन करने मात्र से प्रपंचों से मुक्ति मिल जाती है।
भागवत कथा के अनुसार विष्णु ने इन्द्र का देवलोक में अधिकार पुनः स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। देवलोक असुर राजा बली ने हड़प लिया था। बली विरोचन के पुत्र तथा प्रह्लाद के पौत्र थे और एक दयालु असुर राजा के रूप में जाने जाते थे। यह भी कहा जाता है कि अपनी तपस्या तथा ताक़त के माध्यम से बली ने त्रिलोक पर आधिपत्य हासिल कर लिया था। वामन, एक बौने ब्राह्मण के वेष में बली के पास गये और उनसे अपने रहने के लिए तीन कदम के बराबर भूमि देने का आग्रह किया। उनके हाथ में एक लकड़ी का छाता था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने के बावजूद बली ने वामन को वचन दे डाला। वामन ने अपना आकार इतना बढ़ा लिया कि पहले ही कदम में पूरा भूलोक (पृथ्वी) नाप लिया। दूसरे कदम में देवलोक नाप लिया। इसके पश्चात् ब्रह्मा ने अपने कमण्डल के जल से वामन के पाँव धोये। इसी जल से गंगा उत्पन्न हुयीं। तीसरे कदम के लिए कोई भूमि बची ही नहीं। वचन के पक्के बली ने तब वामन को तीसरा कदम रखने के लिए अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। वामन बली की वचनबद्धता से अति प्रसन्न हुये। चूँकि बली के दादा प्रह्लाद विष्णु के परम् भक्त थे, वामन (विष्णु) ने बाली को पाताल लोक देने का निश्चय किया और अपना तीसरा कदम बाली के सिर में रखा जिसके फलस्वरूप बली पाताल लोक में पहुँच गये।यथा संभव रोज मंदिर जाकर देवदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुक्ति की भी युक्ति का मार्ग शास्त्र श्रवण से ही मिलता है। कथा में आज भरत चरित्र, राम जन्म तथा कृष्ण जी का अवतरण विधान पूर्वक समझाया गया। असंख्य लोगों की उपस्थिति में दैवीय कथा का रस प्रवाह मुग्ध कर देने वाला था। कथा के आयोजक अखिलेश एवं श्रीमती पूनम तिवारी ने व्यास पूजन किया। कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद एवं दिल्ली से भी आए भक्तगणों ने कथा का आनंद लिया।







पाल समाज मनाएगी होली मिलन


भोपाल। पाल सेवा समिति मप्र भोपाल द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली मिलन समारोह का अयोजन ग्राम- मेंडोरी, केरवा डेम रोड़, भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में पुष्प होली के साथ ही समिति के तत्वावधान में होने जा रहे दिनांक 17 अप्रैल 2016 रविवार को मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन की तैयारियों को लेकर समिति की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया जा रहा है जिसमें आप सभी समाज बंधुओं से निवेदन है कि अपने विवाह योग पुत्र/पुत्रीयों का सामूहिक विवाह परिपाटी के माध्यम से विवाह हेतु नि:शुल्क पंजीयन करवा सकते हैं। कार्यक्रम में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा (हुजुर), नारायण सिंह पाल प्रान्तीय अध्यक्ष पाल सेवा समिति शामिल होंगे। 03-04-2016 रविवार को ग्राम मेंडोरी, केरवा डेम मार्ग पर होली मिलन समारोह का अयोजन किया जावेगा। 
राजीव पाल 
मीडिया प्रभारी
पाल सेवा समिति मप्र भोपाल

मंगलवार, 29 मार्च 2016

पीएम आगमन की तैयारियां समय से पूर्ण कर लें


 

- कलेक्टर ने मंडी अधिकारियों को दिए निर्देश

- मंडी बोर्ड और करोंद मंडी में भी बैठक आयोजित 

 भोपाल आगामी 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित भोपाल दौरे को लेकर न केवल मंडी प्रबंधन की सक्रियता बढ़ी, बल्कि जिला प्रशासन भी इस मामले में संजीदा नजर आ रहा है। हालांकि अभी पीएम का भोपाल कार्यक्रम निश्चित नहीं हुआ है, फिर भी प्रशासन इस मामले में कोई कोताही नहीं बरतना चाहता। गौरतलब है कि नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट योजना के तहत देश की 20 कृषि उपज मंडियों को ई-मंडी के रूप में विकसित किया जाना है, जिसमें पहली ई-मंडी (पायलट मंडी)के लिए राजधानी की पं. लक्ष्मीनारायण शर्मा कृषि उपज मंडी करोंद का चयन हुआ है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा 14 अप्रैल को किया जाना प्रस्तावित है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कलेक्टर निशांत वरवड़े ने मंडी सचिव योगेश नागले को बुलाकर कार्यक्रम संबंधी तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने समय रहते सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश भी दिये। इस अवसर पर श्री नागले ने कलेक्टर को बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। उन्होंने बताया कि मंडी के प्रवेश द्वार से लेकर बिल्डिंग, मीटिंग हॉल, बैठक व्यवस्था, माइक आदि की वीआईपी व्यवस्था पूर्ण कर ली गई है। इसके अलावा मंडी परिसर की सड़क मरम्मत, पेयजल, साफ-सफाई, शेड व्यवस्था आदि भी 10 अप्रैल तक पूर्ण कर ली जाएंगी। 
दो अप्रैल को फिर आएगा केंद्रीय दल :
मंडी सचिव ने कलेक्टर बताया कि पीएम दौरे के संदर्भ में गत रविवार को दिल्ली से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने रविवार को मंडी कार्यालय में मंडी बोर्ड के अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें केंद्र सरकार की ओर से योजना के लिए अधिकृत कृषि मंत्रालय की एडीशनल सेक्रेटरी वसुधा मिश्रा, नागार्जुना फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स के अधिकारी जितेंद्र सिंह तथा दल में शामिल योगेश पुरोहित, वीके चक्रवर्ती एवं सुश्री मंजू ने यहां मंडी बोर्ड के एमडी अरुण पांडेय तथा अपर संचालक विनय निगम के साथ तैयारियों की समीक्षा की थी।  उन्होंने बताया कि आगामी 2 अप्रैल को फिर दिल्ली से अधिकारियों का एक दल भोपाल आकर तैयारियों की समीक्षा करेगा। 
मंडी बोर्ड में भी चली बैठक : 
पीएम प्रोग्राम को लेकर मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड में भी अधिकारियों की एक बैठक हुई।  बैठक में बोर्ड के एमडी अरुण पांडेय तथा अपर संचालक विनय निगम सहित अन्य अधिकारियों ने करोंद मंडी में प्रस्तावित प्रधानमंत्री कार्यक्रम के सिलसिले में सभी तैयारियों को समय रहते पूरा करने पर जोर दिया।
पीएम और सीएम के नाम पर होंगे प्रवेश द्वार :
मंडी सचिव योगेश नागले ने बताया कि ई-मंडी बनने के साथ ही करोंद मंडी के दोनों प्रवेश द्वारों का नामकरण भी किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इसमें अनाज मंडी वाला प्रमुख द्वार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर होगा, जबकि सब्जी मंडी वाला प्रवेश द्वार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नाम पर लोकार्पित किया जाएगा।

मंडी की बैठक में छाया रहा पीएम का प्रस्तावित कार्यक्रम
उधर कृषि उपज मंडी करोंद के कार्यालय में मंगलवार को हुई मंडी समिति की मासिक साधारण सभा की बैठक में भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम की चर्चा रही। मंडी अध्यक्ष श्यामा भागीरथ पाटीदार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एजेंडे में दिए गए सभी 25 प्रस्ताव बिना किसी आपत्ति के पारित कर दिए गए। बैठक में मंडी उपाध्यक्ष नरेश ठाकुर सहित भागीरथ पाटीदार, हाजी अब्दुल रकीब, अशोक मीना, मो. आबिद अली, राजदुलारी पाराशर तथा नर्बदी बाई कुशवाह सहित मंडी के सहायक सचिव उमेशकुमार बसेड़िया एवं अन्य मंडी कर्मचारी मौजूद थे। इस अवसर पर मजेदार बात यह थी कि पहली बार भारत माता की जय के साथ बैठक शुरू हुई और भारत माता की जय के साथ ही बैठक समाप्ति की घोषणा की गई। बैठक की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भारत माता की जय का प्रस्ताव हम्माल तुलावटी सदस्य मो. आबिद अली ने रखा था, जिसे अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों ने स्वीकार किया और तुरंत इस पर अमल भी किया। पारित प्रस्तावों में लेखा शाखा व सामान्य शाखा के दो-दो, अनुज्ञप्ति शाखा के तीन प्रस्तावों के अलावा स्थापना, न्यायालय, हम्माल तुलावटी और स्टोर शाखा का एक-एक तथा आवंटन शाखा के पांच और निर्माण शाखा के नौ प्रस्ताव पारित किए गए।

शनिवार, 26 मार्च 2016

सात साल की बच्ची को याद हैं 234 निर्वाचन क्षेत्रों के नाम




शन्मुगसुंदरम, तिरुवन्नामलाई

दूसरी क्लास में पढ़ने वाली बच्ची प्रीति तमिलनाडु में लोगों को वोट डालने के लिए जागरूक करेगी। वह इलेक्शन कमिशन द्वारा चुने गए उन सितारों में से एक है जो लोगों को मतदान अधिकार की अहमियत समझाएंगे। सात साल की प्रीति पांच मिनट से भी कम समय में राज्य के सभी 234 सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नाम गिना सकती है क्योंकि उसे ये नाम जुबानी याद हैं।

विलानल्लडपुर यूनियन मिडल स्कूल में पढ़ने वाली प्रीति को चेय्यर निर्वाचन क्षेत्र के लिए इलेक्शन कमिशन की ब्रैंड ऐंबैसडर बनाया गया है। उसका चयन गुरुवार को किया और वह जल्द ही मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बनाई जाने वाली शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग शुरू करेगी। राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर राजेश लखानी ने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया,'हम युवा प्रतिभाओं को पहचान दिला रहे हैं और उनके जरिए मतदान के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास आधिकारिक तौर पर 1,200 ऐसे ब्रैंड ऐंबैसडर हैं जिन्हें हमने कॉलेज कैंपस से चुना है। उन्होंने अपने दोस्तों को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।' निर्वाचन आयोग ने कई फिल्म सिलेब्रिटीज और खिलाड़ियों को भी ब्रैंड ऐंबैसडर बनाया है। इसमें कार्ती, सूर्या, रविचंद्रन अश्विन, दिनेश कार्तिक और दीपिका पल्लिकल भी शामिल हैं।
चेय्यर के सब कलेक्टर डॉ. टी प्रभु शंकर ने कहा,'हम प्रीति के साथ 'अपने निर्वाचन क्षेत्र को जानिए' नाम से दो विडियो बनाएंगे। इनकी शूटिंग शनिवार को चेन्नै में होगी और दो दिनों के अंदर हम इन्हें यू ट्यूब और सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे। प्रीति के पिता एक किसान हैं। वह अरिग्नर अन्ना गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज के 'वारुंगल वक्कातिप्पोम' कार्यक्रम में सबके आकर्षण का केंद्र थी। जहां कॉलेज के कई स्टूडेंट्स यह भी नहीं बता पाए कि राज्य में कितने निर्वाचन क्षेत्र हैं वहीं प्रीति सबके नाम फटाफट गिना दिए। प्रीति ने कहा कि भाइयों और बहनों आप वोट जरूर डालें और मंच से नीचे आ गई, इसके साथ ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।' सब कलेक्टर ने उसे 2,100 रुपये का कैश प्राइज भी दिया।
4 मार्च को प्रीति के स्कूल में ऐनुअल डे प्रोग्राम था जिसमें टी. प्रभु चीफ गेस्ट थे। वहीं उन्हें प्रीति के बारे में पता चला। उन्होंने कहा,'मैं उसकी प्रतिभा को शाबाशी देने के साथ ही सकारात्मक असर भी पैदा करना चाहता था।' प्रीति की मां ललिता ने कहा कि वह रोमांचित हैं। उन्होंने कहा,'जब मुझे पता चला कि अधिकारियों ने मेरी बच्ची की तारीफ की और उसे ब्रैंड ऐंबैसडर बनाया तो मेरे पास खुशी जताने के लिए शब्द ही नहीं थे।'
प्रीति ने कहा कि वह इतने लोगों के सामने निर्वाचन क्षेत्रों के नाम सुनाने के लिए उत्साहित थी। उसने बताया कि मेरे टीचर रोसैया ने मुझे सब कुछ सिखाया है। पंचायत के अध्यक्ष जे. वेंकटेसन और स्कूल के हेडमास्टर एन. पालानी ने कहा कि प्रीति ने गांव और स्कूल का नाम रोशन किया है। टीचर रोसैया ने कहा,'मुझे निर्वाचन क्षेत्रों के नाम वॉट्सऐप ग्रुप के एक मेसेज में मिले। मैंने वे नाम प्रीति को याद कराए और ऐनुअल डे पर उसने सुनाया। उसने सिर्फ 10 दिन में सारे नाम याद कर लिए थे।'
पंचायत अध्यक्ष ने गांव में तकरीबन 1,700 मतदाता हैं और उन्हें उम्मीद है कि प्रीति से प्रेरित होकर सभी लोग वोट डालेंगे।

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

प्रभु यीशु इन्हें क्षमा करना : डॉ. अनिल मार्टिन




- सात वचनों को याद किया गया

- गोविंदपुरा चर्च में मनाया गुड फ्राइडे

भोपाल। सेंट जॉन्स इवेन्जेलिकल लूथरन चर्च गोविंदपुरा में आज दोपहर 40 दिनों से चल रहे दुखभोग के अंतिम दिन गुड फ्राइडे मनाया गया। इस दौरान रेव्ह डॉ. अनिल मार्टिन ने कहा कि मानव उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने के सात वचनों को याद किया गया।
डॉ. मार्टिन ने पहले वचन में कहा कि हे पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये जानते नहीं कि वे क्या कर रहे हैं। दूसरे वचन में पास्टर सुबन सोना ने कहा कि मैं तुझसे सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। तीसरे वचन में स्पीकर के स्वरूप ने कहा कि यीशु ने अपनी माता से कहा था - हे नारी देख यह तेरा पुत्र। तब उस चेले से कहा यह तेरी माता है। चौथे वचन में पास्टर आर. टाइटस ने कहा कि तीसरे पहर के निट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा - एली एली लमा शबक्तनी अर्थात् हे मेरे परमेश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया। पांचवे वचन में स्पीकर डॉ. श्रीमती सुमन मार्टिन ने कहा - मैं प्यासा हूं। छठे वचन में पास्टर डेनियल डेविड ने कहा कि परमेश्वर की इच्छा पूरी हुई। अंत में सातवें वचन में रेव्ह. चंद्रकांत गिडिऑन ने कहा कि हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं। इन सात वचनों को कहने के बाद प्रभु यीशु मसीह ने प्राण छोड़ दिए। डॉ. अनिल मार्टिन ने कहा कि मनुष्य मोक्ष पाने के लिए कई प्रकार के यत्न करता है लेकिन यीशु द्वारा दिया गया उद्धार सेंतमेंत दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु समीह ने हम पापियों के उद्धार के लिए क्रूस की मृत्यु सही।

क्रूस यात्रा निकाली गई
प्रभु यीशु मसीह के पवित्र शुक्रवार के मौके पर सिक्युरिटी लाइन्स से गोविंदपुरा चर्च तक क्रूस यात्रा निकाली गई जिसमें समीही समाज के लोग प्रभु यीशु के भजन व कीर्तन गाते जा रहे थे। इस मौके पर सैंकड़ों मसीही लोग उपस्थित थे।

संसार को पाप से मुक्त करने खुद सूली पर चढ़ गए
राजधानी के सभी गिरजाघरों में शोक दिवस के रूप में गुड फ्राइडे मनाया गया। राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के प्रवक्ता रिचर्ड जेम्स ने बताया कि आज के दिन प्रभु यीशु मसीह ने संसार को पाप मुक्त करने हेतु खुद को सूली पर न्यौछावर कर दिया था। प्रभु यीशु मसीह ने जो पीड़ा सही वह पूरी मानव जाति के लिए एक संदेस है कि हमें सदैव अपने जीवन में प्रेम भाईचारे एवं आत्मादान भाव को महत्व देना चाहिए। यही प्रभु यीशु मसीह ने किया था। जेम्स ने कहा कि उन्होंने संसार को इतना प्रेम किया कि उन्होंने अपनी जान सूली पर न्यौछावर कर दी, संसार को पाप के बंधन से मुक्त कराने के लिए।

शहर में निकली क्रूस यात्राएं
आज दोपहर में सभी चर्चों से कलीसिया ने क्रूस यात्राएं निकालीं जो प्रमुख मार्गों से होती हुईं विभिन्न चर्चों में पहुंचीं। रास्ते में मसीही लोग भजन-कीर्तन गाते जा रहे थे। रिचर्ड जेम्स ने बताया कि इस प्रार्थना सभा में विशेष रूप से क्रूस रास्ता निकाला गया। क्रूस रास्ता उसका प्रतीत है जिस प्रकार से प्रभु यीशु मसीह के कांधे पर भारी क्रूस लाद दिया गया था और उन्हें मारते-पीटते एवं पीड़ा देते हुए उस स्थान तक ले गया या जहां उन्हें सूली पर चढ़ाया गया। वह स्थान कलवारी पहाड़ी था, जहां प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था।

आज रात मनेगा ईस्टर
रेव्ह. डॉ. अनिल मार्टिन एवं रिचर्ड जेम्स ने बताया कि 26 मार्च को रात 10.30 बजे से प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान पर्व (ईस्टर) की प्रार्थना सभा होगी। ईस्टर का त्यौहार सम्पूर्ण ईसाई समाज के लिए महत्वपूर्ण एवं प्रमुख त्यौहारों में से एक है। गुडफ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु हुई और तीसरे दिन वे मृत्यु के बंधन को तोड़कर पुन: जी उठे।।

प्रभु यीशु इन्हें क्षमा करना : डॉ. अनिल मार्टिन


- सात वचनों को याद किया गया

- गोविंदपुरा चर्च में मनाया गुड फ्राइडे

भोपाल। सेंट जॉन्स इवेन्जेलिकल लूथरन चर्च गोविंदपुरा में आज दोपहर 40 दिनों से चल रहे दुखभोग के अंतिम दिन गुड फ्राइडे मनाया गया। इस दौरान रेव्ह डॉ. अनिल मार्टिन ने कहा कि मानव उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने के सात वचनों को याद किया गया।
डॉ. मार्टिन ने पहले वचन में कहा कि हे पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये जानते नहीं कि वे क्या कर रहे हैं। दूसरे वचन में पास्टर सुबन सोना ने कहा कि मैं तुझसे सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। तीसरे वचन में स्पीकर के स्वरूप ने कहा कि यीशु ने अपनी माता से कहा था - हे नारी देख यह तेरा पुत्र। तब उस चेले से कहा यह तेरी माता है। चौथे वचन में पास्टर आर. टाइटस ने कहा कि तीसरे पहर के निट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा - एली एली लमा शबक्तनी अर्थात् हे मेरे परमेश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया। पांचवे वचन में स्पीकर डॉ. श्रीमती सुमन मार्टिन ने कहा - मैं प्यासा हूं। छठे वचन में पास्टर डेनियल डेविड ने कहा कि परमेश्वर की इच्छा पूरी हुई। अंत में सातवें वचन में रेव्ह. चंद्रकांत गिडिऑन ने कहा कि हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं। इन सात वचनों को कहने के बाद प्रभु यीशु मसीह ने प्राण छोड़ दिए। डॉ. अनिल मार्टिन ने कहा कि मनुष्य मोक्ष पाने के लिए कई प्रकार के यत्न करता है लेकिन यीशु द्वारा दिया गया उद्धार सेंतमेंत दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु समीह ने हम पापियों के उद्धार के लिए क्रूस की मृत्यु सही।

क्रूस यात्रा निकाली गई
प्रभु यीशु मसीह के पवित्र शुक्रवार के मौके पर सिक्युरिटी लाइन्स से गोविंदपुरा चर्च तक क्रूस यात्रा निकाली गई जिसमें समीही समाज के लोग प्रभु यीशु के भजन व कीर्तन गाते जा रहे थे। इस मौके पर सैंकड़ों मसीही लोग उपस्थित थे।

संसार को पाप से मुक्त करने खुद सूली पर चढ़ गए
राजधानी के सभी गिरजाघरों में शोक दिवस के रूप में गुड फ्राइडे मनाया गया। राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के प्रवक्ता रिचर्ड जेम्स ने बताया कि आज के दिन प्रभु यीशु मसीह ने संसार को पाप मुक्त करने हेतु खुद को सूली पर न्यौछावर कर दिया था। प्रभु यीशु मसीह ने जो पीड़ा सही वह पूरी मानव जाति के लिए एक संदेस है कि हमें सदैव अपने जीवन में प्रेम भाईचारे एवं आत्मादान भाव को महत्व देना चाहिए। यही प्रभु यीशु मसीह ने किया था। जेम्स ने कहा कि उन्होंने संसार को इतना प्रेम किया कि उन्होंने अपनी जान सूली पर न्यौछावर कर दी, संसार को पाप के बंधन से मुक्त कराने के लिए।

शहर में निकली क्रूस यात्राएं
आज दोपहर में सभी चर्चों से कलीसिया ने क्रूस यात्राएं निकालीं जो प्रमुख मार्गों से होती हुईं विभिन्न चर्चों में पहुंचीं। रास्ते में मसीही लोग भजन-कीर्तन गाते जा रहे थे। रिचर्ड जेम्स ने बताया कि इस प्रार्थना सभा में विशेष रूप से क्रूस रास्ता निकाला गया। क्रूस रास्ता उसका प्रतीत है जिस प्रकार से प्रभु यीशु मसीह के कांधे पर भारी क्रूस लाद दिया गया था और उन्हें मारते-पीटते एवं पीड़ा देते हुए उस स्थान तक ले गया या जहां उन्हें सूली पर चढ़ाया गया। वह स्थान कलवारी पहाड़ी था, जहां प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था।

आज रात मनेगा ईस्टर
रेव्ह. डॉ. अनिल मार्टिन एवं रिचर्ड जेम्स ने बताया कि 26 मार्च को रात 10.30 बजे से प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान पर्व (ईस्टर) की प्रार्थना सभा होगी। ईस्टर का त्यौहार सम्पूर्ण ईसाई समाज के लिए महत्वपूर्ण एवं प्रमुख त्यौहारों में से एक है। गुडफ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु हुई और तीसरे दिन वे मृत्यु के बंधन को तोड़कर पुन: जी उठे।।



बुधवार, 23 मार्च 2016

बहू हमारी रजनीकांत में अनीता हंसनंदानी का कैमियो


भोपाल। लाइफ ओके के शो ‘बहू हमारी रजनीकांत’ की कहानी में मोड़ आने वाला है। मुख्य किरदारों की जल्दी ही एक दूसरे से शादी करने वाले हैं। यह शो दूसरे शोज से इस मायने में अलग है कि यहां मुख्य पुरुष किरदार एक इंसान है जबकि मुख्य महिला किरदार एक रोबोट है। अब दोनों शादी करने को तैयार हैं। पहले से ही इस आनोखी शादी में एक और सरप्राइज आने वाला है और शांन की एक्स गर्लफ्रेण्ड की एण्ट्री होने वाली है। इस किरदार को निभा रही हैं खूबसूरत अनीता हंसनंदानी।
अनीता शादी में सबसे प्रतीक्षित मेहमान थीं। वह दूल्हे के घर में उसकी एक्स गर्लफ्रेण्ड के रूप में आती हैं और उनके आने से पूरे घर में शोर शराबा मच जाता है। वह कहती हैं, ‘‘मैं इस शो को पसंद करती हूं और जब मुझे इसका हिस्सा बनने को कहा गया तो भले ही यह कैमियो हो, मैं इसे ना कह सकी। मुझे आधी रात में शूट करना पड़ा क्योंकि दिन में मुझे दूसरे कमिटमेण्ट्स पूरे करने थे। लेकिन शो इतना मजेदार है और मेरी एण्ट्री इतनी मस्त थी कि मुझे पूरा विश्वास है कि हर कोई इसका लुत्फ लेगा।’’
देखिए शान और रजनी की शादी ‘बहू हमारी रजनी कांत’ में रात 8 बजे सोमवार से शुक्रवार सिर्फ लाइफ ओके पर

मंगलवार, 22 मार्च 2016

सिकुड़ गया मानव मस्तिष्क



- राजकुमार सोनी

पुरातनकाल से मानव का मस्तिष्क एक रहस्यमी अनसुलझी गुत्थी रहा है। इसे आज तक न तो ऋषि-मुनि सुलझा पाए और न ही वैज्ञानिक। दुनियाभर के वैज्ञानिकों में आज यह होड़ मच गई है कि क्या मानव का मस्तिष्क सिकुड़ता जा रहा है। अगर ऐसा हो रहा है तो क्या मनुष्य की सोचने की क्षमता और तीक्ष्ण हो जाएगी या फिर मंद पड़ जाएगी। इस बारे में वैज्ञानिकों के अलग-अलग मत हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव मस्तिष्क दस फीसदी सिकुड़ गया है, जबकि कुछ वैज्ञानिक इसका विरोध करते हैं। मानव मस्तिष्क के इस गूढ़ रहस्य को आप भी समझिए।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सह निदेशक मार्टा लहर ने खुलासा किया है कि आधुनिक मानवों का मस्तिष्क सिकुड़ता जा रहा है। हजारों वर्षों पहले के पूर्वजों की तुलना में आज का मानव दस प्रतिशत उनसे छोटा हो गया है, इसी की वजह से मस्तिष्क भी दस पफीसदी छोटा हो गया है। लहर का मानना है कि आज से करीब दो लाख वर्ष पूर्व जो मानव (होमो सेपियन) थे, उनके दिमाग का वॉल्यूम 1500 क्यूबिक सेंटीमीटर हुआ करता था, जबकि अब यह 1350 क्यूबिक सेंटीमीटर रह गया है। उनका मानना है कि मानव का मस्तिष्क सिकुड़ता जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मनुष्य की दिमागी क्षमता में कमी हो रही है, बल्कि उसका मस्तिष्क सिकुड़ते कम्प्यूटर की तरह ज्यादा कुशल बनता जा रहा है।

अनुकृति खोपड़ी का किया अध्ययन
फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने 1868 में पेरिस के दोर्दान में एक गुफा से पाँच पुराने कंकालों के बीच मिली बीस हजार साल पुरानी एक खोपड़ी की अनुकृति का अध्ययन करने के बाद बताया है कि यह वर्तमान मनुष्य की खोपड़ी से 20 प्रतिशत तक बड़ी है। यह खोपड़ी क्रो मैगनन मानव प्रजाति से संबंधित थी। यह फ्रांस के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में रखी हुई है। वैज्ञानिक दल ने इसकी अनुकृति तैयार की है, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह आधुनिक युग के प्रारंभिक मानव की खोपड़ी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ अनुकृति है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि खोपड़ी के बड़े होने का यह मतलब नहीं है कि मनुष्य के पूर्वज ज्यादा बुद्धिमान थे। अध्ययनों से पता लगा है कि मस्तिष्क के आकार और आईक्यू (सामान्य बुद्धिमत्ता) के बीच बहुत मामूली संबंध होता है। वैज्ञानिकों के इस शोध से मानव विकास के एक महत्वपूर्ण सवाल पर रोशनी पड़ सकती है कि यदि मनुष्य का मस्तिष्क सिकुड़ता जा रहा है तो इसकी वजह क्या है? यह सवाल विशेषज्ञों को परेशान करता रहा है और इस पर उनके बीच मतभेद हैं। समझा जाता है कि यह खोपड़ी किसी सुगठित अधेड़ व्यक्ति की है, जो लगभग छह फुट लंबा था। इस खोपड़ी के बारे में दुनियाभर के वैज्ञानिक पहले से ही जानते हैं, लेकिन जल्दी ही यह और प्रसिद्ध हो जाएगी, जब वॉशिंगटन में अमेरिका के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में इसकी अनुकृति को प्रदर्शित किया जाएगा।
स्कैन कर किया तैयार
पेरिस के कुइंज विंग्ट्स अस्पताल में खोपड़ी के आंतरिक भाग का स्कैन करके इस अनुकृति को तैयार किया गया था, ताकि मस्तिष्क से तंत्रिका कपाल (न्यूरोक्रैनियम) पर पड़े प्रभाव की तस्वीर ली जा सके। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रीय प्राकृतिकविज्ञान संग्रहालय के एंतिओन बाल्शॉ ने इसे थ्रीडी तस्वीर में परिवर्तित किया और फिर एक विशेषज्ञ सॉफ्टवेयर प्रोटोटाइपिंग फर्म ने इस खोपड़ी की अनुकृति तैयार की। बाल्शॉ का कहना है कि यह अब तक की सबसे सुंदर अनुकृतियों में है। उन्होंने बताया कि क्रो मैग्नन खोपड़ी के एक प्रारंभिक आकलन से पुष्टि हुई है कि मानव का मस्तिष्क लाखों वर्षों के दौरान कुछ छोटा हुआ है। हालाँकि पहले यह माना जाता था कि मानव का मस्तिष्क बड़ा होता जा रहा है।
बड़े सिर जरूरी थे
सिकुड़ते मस्तिष्क के रहस्य को स्पष्ट करने के लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें एक सिद्धांत यह है कि अपर पैलियोलिथेक युग में सर्दी से बचने और बाहरी गतिविधियों के दौरान जिंदा रहने के लिए बड़े सिर जरूरी थे। दूसरा सिद्धांत यह है कि खरगोश, रेंडियर, लोमड़ी और घोड़े के माँस को चबाकर खाने के साथ खोपड़ी का विकास हुआ, लेकिन जैसे-जैसे भोजन करने में आसानी होती गई, मनुष्य की खोपड़ी का विकास रुक गया। कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात में मृत्यु दर अधिक होने के कारण वही जिंदा रह सकता था, जो ज्यादा से ज्यादा मजबूत हो। यह भी बड़े सिर होने का कारण हो सकता है।
महिलाओं का दिमाग भी छोटा
महिलाओं का दिमाग पुरुषों के मुकाबले छोटा होता है और उनके दिमाग के आकार में भी इतनी ही कमी आई है। यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में मिली मानव खोपडिय़ों के अवशेष की छानबीन करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के जॉन हॉक्स बताते हैं, मैं तो कहूंगा कि विकास के क्रम में पलक झपकते ही दिमाग का आकार छोटा हो गया।
नियंत्रण के लिए बड़े दिमाग की जरूरत
हालांकि, दूसरे वैज्ञानिक दिमाग के सिकुडऩे को ज्यादा हैरतअंगेज नहीं मानते। उनके मुताबिक हम जितने बड़े और मजबूत होंगे हमारे शरीर पर नियंत्रण के लिए उतने बड़े दिमाग की जरूरत होगी। आधुनिक इंसान से ठीक पहले का इंसान यानी निएंडरथाल मानव करीब 30 हजार साल पहले अज्ञात कारणों से खत्म हो गया। निएंडरथाल मानव आधुनिक मानव की तुलना में काफी बड़े आकार के थे और उनका दिमाग भी उतना ही बड़ा था। करीब 17 हजार साल पहले इंसान की जो प्रजाति थी वह क्रो मैग्नस के नाम से जानी जाती है। क्रो मैग्नस ने गुफाओं में बड़े-बड़े जानवरों की पेंटिंग बनाई और उनका दिमाग होमो सेपियंस की सारी प्रजातियों में सबसे ज्यादा बड़ा था। क्रो मैग्नस अपने बाद की पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा ताकतवर भी थे। मिसौरी यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डेविड गियर कहते हैं कि ये विशेषताएं पर्यावरण के खतरों के बीच खुद को बचाए रखने के लिए जरूरी थीं। उन्होंने 19 लाख साल से लेकर 10 हजार साल पुराने इंसान की खोपडिय़ों में हुए विकास का अध्ययन किया है। ये तो सब को पता ही है कि हमारे पूर्वजों को एक बेहद जटिल सामाजिक वातावरण में जीना पड़ा। गियर और उनके साथियों ने अपने रिसर्च के दौरान देखा कि आबादी बढऩे के साथ ही दिमाग का आकार घटता गया। गियर कहते हैं, जटिल समाज के उभरने के साथ ही इंसान के दिमाग का आकार छोटा होता गया क्योंकि तब इंसान को जीवन के लिए ज्यादा संघर्ष की जरूरत नहीं पड़ती थी और उसने जीना सीख लिया था। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इस विकास का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि इंसान बेवकूफ होता चला गया बल्कि उसने बुद्धि के विकास से जीने के

आसान तरीके सीख लिए। ड्यूक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रायन हारे ने कहा, यहां तक कि चिम्पैंजियों में भी दिमाग का आकार बड़ा था, इसी तरह भेडिय़ों की तुलना में कुत्तों का दिमाग छोटा पर ज्यादा चालाक, लचीला और समझदार होता है, साफ है कि दिमाग के आकार से समझदारी का फैसला नहीं होता।

इंसानों की अक्ल कमजोर
वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान की अक्ल दिनोंदिन कम होती जा रही है। इसका कारण बीस हजार वर्षों से मस्तिष्क का धीरे-धीरे सिकुडऩा जारी है।
एक नए शोध के मुताबिक बीस लाख वर्षों के दौरान मनुष्य की खोपड़ी का आकार बढ़ता रहा, लेकिन बीते बीस हजार वर्षों में मस्तिष्क के आकार में सिकुडऩ दर्ज की गई है।  ऐसा दुनिया के हर कोने के स्त्री-पुरुषों के साथ हुआ।
ब्रिटिश अखबार 'डेली मेल' ने डिस्कवरी पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से कहा, पिछले बीस हजार साल में पुरूष के मस्तिष्क के औसत आकार में 1,500 से 1,350 क्यूबिक सेंटीमीटर की कमी आई है।  जिससे टेनिस की गेंद के आकार के बराबर क्षति हुई है।  महिलाओं का दिमाग भी इसी अनुपात में सिकुड़ा है।
मूर्ख हो रहा है इंसान
पत्रिका में लेखिका कैथलिन मैक्ओलिफी ने डॉॅ. जान हाक्स के उस कथन पर टिप्पणी है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि मानव के मस्तिष्क के सिकुडऩे का अर्थ यह नहीं कि उसकी बुद्धि में कमी आ रही है। डॉॅ. हाक्स यूनिवर्सिटी ऑफ विसकानसिन में एंथ्रोपोलोजिस्ट (मानव विज्ञान) हैं। कुछ विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि मानव का मस्तिष्क छोटा होने के साथ निपुण होता जा रहा है।  जबकि अन्य वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित होने के साथ इंसान तेजी से मूर्ख होता जा रहा है। कई शोध दिमाग के सिकुडऩे के रहस्य के बारे में बता चुके हैं।  इनमें एक सिद्धान्त के मुताबिक प्रारम्भिक पाषाण काल में जीवित रहने के लिए बड़ा सिर जरूरी था ताकि सर्दी और बाहरी मुश्किलों से बचा जा सके। दूसरे सिद्धान्त के मुताबिक मनुष्य का खाना आसान होने के साथ उसके मस्तिष्क की वृद्धि रुक गई। हाल ही में यूनिवर्सिटी आफ मिसओरी के वैज्ञानिक डेविड गेवरी और ड्रीयू बेले ने दस हजार से 19 लाख साल पहले खोपड़ी के विकास को बदलते सामाजिक वातावरण से जोड़ा था।  उन्होंने पाया कि मानव विकास के दौरान जब 'जनसंख्या घनत्व कम था, उस समय खोपड़ी का आकार बड़ा था।  मगर जब क्षेत्र की जनसंख्या विरल से सघन हुई मनुष्य की खोपड़ी का आकार कम हो गया'।  उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि समाज के तेजी से बढऩे पर मस्तिष्क धीमी गति से बढ़ता है क्योंकि उन्हें जिंदा रहने के लिए कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ती।

चार दशक की आयु से परिपक्वता
प्राय: 60 वर्ष की आयु निवृत्ति की आयु मानी जाती है, जबकि वैज्ञानिक शोधों से पाया गया है कि मनुष्य में मानसिक परिपक्वता 40 वर्ष की आयु से आरम्भ होती है और लगभग 70 वर्ष की आयु तक विकसित होती रहती है। हाँ, इतना अवश्य है कि 60 वर्ष की आयु के बाद शारीरिक क्षय होने की संभावना हो जाती है। मानसिक परिपक्वता का सबसे महत्वपूर्ण कारण स्मृति में अनुभव-जन्य सूचनाओं का अधिक समावेश होना होता है, जो 40 वर्ष की अवस्था के बाद तीव्रता से संवर्धित होता है क्योंकि उस समय व्यक्ति अपने लक्ष्यों, कर्तव्यों और अवलोकनों के बारे में अधिक गंभीर हो जाता है जिससे उसका प्रत्येक अनुभव मूल्यवान होता जाता है।
शोधों से यह पाया गया है कि मानसिक अपरिपक्वता की अवस्था में व्यक्ति अपने मस्तिष्क के केवल दाएं भाग का उपयोग करता है जबकि दूसरा केवल आकस्मिक उपयोगों के लिए सुरक्षित रहता है। किन्तु परिपक्वता की स्थिति में व्यक्ति अपने मस्तिष्क के दोनों भागों का उपयोग करने लगता है। इसका प्रभाव वैसा ही होता है जैसा कि किसी कार्य करने में एक हाथ और दोनों हाथों के उपयोग में होता है। समस्त मस्तिष्क के उपयोग से व्यक्ति की दक्षता और निर्णय अधिक सशक्त होते हैं।
भूलने की आदत
परिपक्व आयु में व्यक्ति द्वारा छोटी-छोटी बातों जैसे किसी का नाम याद न आना, चाबी को कहीं रखकर भूल जाना, आदि, का भूलना उसकी निर्बलता नहीं होती अपितु इसका केवल यह तात्पर्य होता है कि व्यक्ति गंभीर विषयों पर अधिक ध्यान देता है जिससे ऐसी बातें जिनका कोई महत्व नहीं होता भुला दी जाती हैं। परिपक्व अवस्था में मस्तिष्क में मायलिन की मात्रा अधिक हो जाती है जो मस्तिष्क की नाडियों को एक दूसरे से प्रथक रखता है और सूचनाएं एक दूसरे से मिश्रित नहीं हो पातीं। इसी कारण से भारत के प्राचीन कवि घाघ ने कहा है -'मांस खाए मांस बढे, घी खाये खोपड़ाÓ।

मस्तिष्क की संरचना
मानव मस्तिष्क की संरचना अत्यन्त जटिल है और आज मनुष्य इसे बहुत ही कम समझ पाया है। प्रस्तुत है मानव मस्तिष्क के विषय में कुछ रोचक तथ्य-
सूचनाओं का भंडार:
 तकनीकी रूप से मस्तिष्क के पास अनुभव, अवलोकन, पठन, श्रवण आदि प्रत्येक वस्तु (सूचना) को संग्रह करने की क्षमता होती है। जन्म के बाद से प्रत्येक वस्तु उसमें संग्रहित होते जाती है, कुछ भी नहीं छूटता। यह अलग बात है कि मनुष्य में अपने ही मस्तिष्क में संग्रहित किसी अनेक वस्तुओं (सूचनाओं) तक वापस पहुँचने यानी कि अनेक घटनाओं को स्मरण रख पाने की क्षमता नहीं होती।
दर्द का अनुभव नहीं :
मस्तिष्क ही दर्द के संकेतों को समझ कर शरीर के अन्य भागों को पीड़ा का अनुभव करवाता है किन्तु चमत्कारिक तथ्य यह है कि वह स्वयं कभी पीड़ा का अनुभव नहीं करता।
ऑक्सीजन आवश्यकता
यद्यपि मस्तिष्क का भार पूरे शरीर के भार का लगभग दो प्रतिशत ही होता है, उसे ऑक्सीजन तथा कैलोरीज की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। साँस के द्वारा खींचे गए ऑक्सीजन का 20 प्रतिशत हिस्सा केवल मस्तिष्क के प्रयोग में आता है।
मस्तिष्क का 80 फीसदी पानी :
हमें लगता है कि मस्तिष्क अपेक्षाकृत ठोस होता है, किन्तु ऐसा नहीं है। मस्तिष्क का 80 फीसदी भाग पानी होता है।
रात्रि को अधिक सक्रिय:
चूँकि दिनभर हमारा शरीर सक्रिय रहता है और रात को सो जाने पर वह अपेक्षाकृत कम क्रियाशील रहता है, हम समझते हैं कि मस्तिष्क दिन में रात्रि की अपेक्षा अधिक सक्रिय रहता होगा जबकि वास्तविकता यह है कि मस्तिष्क दिन की अपेक्षा रात्रि में अधिक सक्रिय रहता है।
10 वाट विद्युत शक्ति की आवश्यकता:
जटिल से जटिल कार्य करने के लिए भी मस्तिष्क को अधिकतम 10 वाट विद्युत शक्ति की आवश्यकता होती है।
सपने भी अधिक दिखाई देते हैं :
जी हाँ, आपका दृढ़ जितना अधिक होगा अर्थात् आप जितने अधिक कुशाग्र बुद्धि के स्वामी होंगे उतने ही अधिक आपको सपने दिखाई देंगे। यह बात अलग है कि वे सपने आपको याद न रहें।
तरुणावस्था में बदलाव:
 तरुण अवस्था में ही मनुष्य सर्वाधिक प्रसन्न, कल्पनाशील और आकांक्षायुक्त होता है और यही वह अवस्था है जबकि उसके मस्तिष्क का आकार भी बदल जाता है। यहाँ तक कि इस अवस्था में वह जोखिम वाले कार्य करने पर भी उतारू रहता है।

ऐसे होगा मस्तिष्क का विकास
मायलिन चिकनाई से बना द्रव्य होता है जो दूध में पर्याप्त पाया जाता है। मस्तिष्क विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। साठ वर्ष की आयु के बाद जब मांसपेशियां शिथिल होने लगें और व्यक्ति शारीरिक सरम में थकान अनुभव करने लगे, उसे मानसिक कर्मों में अधिक लिप्त होते जाना चाहिए। इसके दो लाभ होते हैं, व्यक्ति की मानसिक परिपक्वता का उपयोग होता है, और उसकी मानसिक शक्ति उपयोग के कारण अक्षुण्य बनी रहती है। मानसिक शक्ति के अक्षुण्य बने रहने से मस्तिष्क शारीरिक और आतंरिक गतिविधियों का नियमन भली भांति करता है जिससे शरीर निरोग बना रहता है।
जानिए मस्तिष्क को
मस्तिष्क जन्तुओं के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण केन्द्र है। यह उनके आचरणों का नियमन एंव नियंत्रण करता है। स्तनधारी प्राणियों में मस्तिष्क सिर में स्थित होता है तथा खोपड़ी द्वारा सुरक्षित रहता है। यह मुख्य ज्ञानेन्द्रियों, आँख, नाक, जीभ और कान से जुड़ा हुआ, उनके करीब ही स्थित होता है। मस्तिष्क सभी रीढ़धारी प्राणियों में होता है परंतु अमेरूदण्डी प्राणियों में यह केन्द्रीय मस्तिष्क या स्वतंत्र गैंगलिया के रूप में होता है। कुछ जीवों जैसे निडारिया एंव तारा मछली में यह केन्द्रीभूत न होकर शरीर में यत्र-तत्र फैला रहता है, जबकि कुछ प्राणियों जैसे स्पंज में तो मस्तिष्क होता ही नहीं है। उच्च श्रेणी के प्राणियों जैसे मानव में मस्तिष्क अत्यंत जटिल होते हैं। मानव मस्तिष्क में लगभग 1 अरब (1,00,00,00,000) तंत्रिका कोशिकाएं होती हंै, जिनमें से प्रत्येक अन्य तंत्रिका कोशिकाओं से 10 हजार (10,000) से भी अधिक संयोग स्थापित करती हैं। मस्तिष्क सबसे जटिल अंग है।
अंगों का नियंत्रण
मस्तिष्क के द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का नियंत्रण एवं नियमन होता है। अत: मस्तिष्क को शरीर का मालिक अंग कहते हैं। इसका मुख्य कार्य ज्ञान, बुद्धि, तर्कशक्ति, स्मरण, विचार निर्णय, व्यक्तित्व आदि का नियंत्रण एवं नियमन करना है। तंत्रिका विज्ञान का क्षेत्र पूरे विश्व में बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। बडे-बड़े तंत्रिकीय रोगों से निपटने के लिए आण्विक, कोशिकीय, आनुवंशिक एवं व्यवहारिक स्तरों पर मस्तिष्क की क्रिया के संदर्भ में समग्र क्षेत्र पर विचार करने की आवश्यकता को पूरी तरह महसूस किया गया है। एक नए अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि मस्तिष्क के आकार से व्यक्तित्व की झलक मिल सकती है। वास्तव में बच्चों का जन्म एक अलग व्यक्तित्व के रूप में होता है और जैसे-जैसे उनके मस्तिष्क का विकास होता है उसके अनुरूप उनका व्यक्तित्व भी तैयार होता है।
ज्ञान का भंडार
मस्तिष्क, खोपड़ी में स्थित है। यह चेतना और स्मृति का स्थान है। सब ज्ञानेंद्रियों - नेत्र, कर्ण, नासा, जिह्रा तथा त्वचा - से आवेग यहीं पर और हैं, जिनको समझना अर्थात् ज्ञान प्राप्त करना मस्तिष्क का कम्र है। पेशियों के संकोच से गति करवाने के लिये आवेगों को तंत्रिकासूत्रों द्वारा भेजने तथा उन क्रियाओं का नियमन करने के मुख्य केंद्र मस्तिष्क में हैं, यद्यपि ये क्रियाएँ मेरूरज्जु में स्थित केंद्रों से होती रहती हैं। अनुभव से प्राप्त हुए ज्ञान को संग्रह करने, विचारने तथा विचार करके निष्कर्ष निकालने का काम भी इसी अंग का है।






शनिवार, 19 मार्च 2016

खजूर की डालियां लेकर जुलूस के रूप में निकलेंगे मसीही




गिरिजाघरों में आज मनाया जाएगा पाम संडे, दुख भोग सप्ताह शुरू
- 25 मार्च को मनाएंगे गुड फ्राइडे
- 27 मार्च को मनाया जाएगा ईस्टर


भोपाल। पाम संडे के अवसर पर रविवार सुबह 9 बजे खजूर की डालियां लेकर प्रभु यीशु मसीही के भजन गाते हुए मसीही जुलूस के रूप में निकलेंगे। इसी के साथ दुख भोग सप्ताह शुरू हो जाएगा जो 25 मार्च को गुड फ्राइडे एवं 27 मार्च को ईस्टर पर्व के साथ सम्पन्न होगा।
सेंट जोन्स इवेंजलिकल लूथरन चर्च, गोविंदपुरा के चेयरमैन रेव्ह. डॉ. अनिल मार्टिन ने बताया कि 20 मार्च को सुबह 9 बजे गोविंदपुरा स्थित सिक्युरिटी लाइन्स से एक जुलूस निकाला जाएगा जिसमें सभी मसीही खजूर की डालियां हाथों में लेकर भजन गाते हुए परमेश्वर प्रभु यीशु मसीही की महिला का गुणगान गाते हुए चर्च में प्रवेश करेंगे। उन्होंने बताया कि यह हमें प्रभु यीशु मसीह का यरूशलेम में जो स्वागत हुआ था उसका स्मरण दिलाता है। चर्च में इंवेजलिस्ट चंद्रकांत गिडीईयन मुख्य वक्ता होंगे। डॉ. मार्टिन ने बताया कि सोमवार से राजधानी की सभी प्रमुख कैथोलिक व प्रोस्टेट चर्चों में शाम 6.30 बजे से प्रार्थना सभाएं होंगी, जिनमें मुख्य वक्ता प्रभु यीशु मसीह के  स्मरण को बड़ी शिद्दत के साथ याद किया जाएगा। 25 मार्च शुक्रवार को गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। इस दिन कलीसिया के सभी सदस्य एकत्रित होकर मानवता के उद्धार के लिए प्रार्थना करेंगे। प्रभु यीशु मसीह ने हम पापियों के उद्धार के लिए क्रूस पर चढ़ाए जाते समय जो सात वचन कहे थे उन्हें प्रवक्ताओं द्वारा सुनाएंगे। 27 मार्च को ईस्टर का पर्व मनाया जाएगा।

ट्रांसपोर्ट नगर की भव्यता बढ़ाएगा गुरुद्वारा श्री अकालगढ़ साहिब



- कार सेवा में जुटा जन मानस, पुण्यलाभ ले रहे दूर-दर से आए कारसेवक

बीएल मारण 

भोपाल। राजधानी के पए बाइपास रोड स्थित कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में निर्माणाधीन गुरुद्वारा श्री अकालगढ़ साहिब इस क्षेत्र में की भव्यता और सौंदर्य में अहम भूमिका निभा रहा है। ट्रांसपोर्ट नगर के ठीक मुहाने पर बने इस भव्य धार्मिक स्थल के समीप दो जलाशय घोड़ापछाड़ डेम और हताईखेड़ा डेम यहां के मुख्य पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हैं। गुरुद्वारा के मुख्य सेवादार भाई जितेंद्रपाल सिंह गिल (जो पिछले 32 साल से रायसेन रोड आनंद नगर स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार में सेवारत रहे)बताते हैं कि गुरुद्वारा श्री अकालगढ़ साहिब में अभी कार सेवा चल रही है। कार सेवा पूर्ण हो जाने पर यह धार्मिक स्थल के साथ ही एक भव्य और रमणीक पर्यटन स्थल बन जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने जहां कोकता को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए चुना, वहीं पूर्व महापौर कृष्णा गौर के कार्यकाल में कमिश्नर मनीष सिंह के सहयोग से नगर निगम प्रशासन द्वारा मंदिर, मस्जिद के बाद गुरुद्वारा निर्माण के लिए भी जगह दी गई। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे के लिए समुचित स्थान मिलने के बाद राजधानी के सिख समाज की बैठकें हुर्इं और सर्वसम्मति से गुरुद्वारा श्री अकालगढ़ साहिब का निर्माण प्रारंभ हुआ।  आज स्थिति यह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु आकर कार सेवा कर रहे हैं। श्री गिल बताते हैं कि कार सेवा संपूर्ण होने पर यहां बाहर से आने वाले ट्रक ड्राइवर, क्लीनर और हाईवे से गुजरने जातरू के लिए ठहरने, नहाने-धोने और लंगर की अनवरत निशुल्क सुविधा रहेगी। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर के सभी 18 गुरुद्वारों और बाहर से आने वाली संगत को भी ये व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। श्री गिल ने बताया कि वह यहां पिछले 5 साल से कार सेवा में लगे हैं।
श्री अकालगढ़ साहिब क्यों :- 
मुख्य सेवादार जितेंद्र पाल सिंह गिल ने गुरुद्वारे के नाम का महत्व बतलाते हुए कहा कि ‘अकाल’ यानि काल से रहित  ‘गढ़’ यानि किला। अर्थात कालरहित उस मालिक का गढ़ जिसे हम राम, रहीम, अल्लाह, वाहे गुरू किसी भी नाम से पुकार सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते 5 साल में यहां अनेक अलौकिक देखे और महसूस किए हैं। उस परमपिता परमात्मा की दिव्य शक्तियां विराजमान हैं। श्री गिल ने कहा कि जो कोई भी सच्चे मन से उनके समक्ष अरदास करता है, वह शीघ्र पूरी हो जाती है, ऐसा मेरा मानना है। उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों से आह्वान भी किया कि वे श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ अपनी अरदास यहां लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही यहां निरंतर और अखंड लंगर की व्यवस्था भी जा  रही है। 
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गुरुवार, 17 मार्च 2016

Payal started leaningBharathanatyam









Payal started leaningBharathanatyam at the age of 18, from Dr.Lata Singh Munshi one of the foremost exponents of the Kalakshertra tradition and a disciple of PadmaShriLeela Samson.  Born  in a non-musical  family, she got all the support from her mother  who struggled a lot to make her a fine dancer. 
Payal has done her graduation in B.A (Bharatnatyam) from Maharani LaxmiBai College, Bhopal (M.P) in 2008 and M.A (Bharatnatyam) from Indira Kala SangeetVishavaVidhaylay, Khairagarh (C.G) in the year 2011.
Blessed with natural flair for the art, and relentless single-minded devotion, Payal has developed into her present status as an elite performing artist. She has given many performances around the country under the noble guidance of her guru Dr.Lata Singh Munshi. She has performed at OrchaFestiva, Bandhavgad Festival, NiralaFestival ,SangeetNatyaAcdemy and had also performed on the various other prestigious stages of India. In 2012  she went to FIJI ISLAND on a dancer tour organised by ICCR with her guru.
Payal is not only a performer but also working as a teacher and a choreographer too. She has been working as a dance teacher in Army Public School, Bhopal (M.P) since last 5 years.                            

GIVEN PERFORMENCES IN:-


 Nirala Festival
21st July 2007
Cultural Hall, Damoh
Organized by- Madhya Pradesh SahityaParishad,
Govt. of Madhya Pradesh.

Bharat Parv
26th Jan 2008
Police Academy, Pachmari
Organized by SwarajBhavanSanchalnalaya,
Govt. of Madhya Pradesh.

 National Conference of Economics
7th Mar 2008
University Hall, Bhopal
Organized by Barkatulla University,
Bhopal.

 Satt Dharma Sammelan
30th Mar 2008
Arera Colony Ground Bittan Market, Bhopal
Organized by Satt Dharma MahaSabha,
Bhopal

 Vandana
19th Mar 2008
ManavSangrahalaya Auditorium, Bhopal
Organized by Indira Gandhi RashtriyaManavSangrahalaya,
Bhopal


 PadmakarSamaroh
7th July 2008
Sagar University, Sagar
Organized by Madhya Pradesh SahityaParishad.

 Udbhav
12th Oct 2008
Bharat Bhavan, Bhopal
Organized by Yaman Academy of Fine Arts,
Bhopal

 UtsavMela
23rd Jan 2009
Dusshehra Ground, Bhopal
Organized by Bhopal UtsavMelaSamity,
Bhopal


Bharat Parv
26th Jan 2009
Mela ground, Gwalior
Organized by SwarajBhavanSanchanalaya, Bhopal
Govt. of Madhya Pradesh

UstadRehmat Ali Khan SangeetSamaroh
24th Mar 2009
Bharat Bhavan, Bhopal
Organized by Ustad Hafiz Ali Khan Sangeet Academy,
Bhopal

Orcha Festival
3rd April 2009
Lord Ram Temple, Orcha
Organized by Govt. of Madhya Pradesh

NavVarshAyojan
8th April 2009
RavindraBhavan, Bhopal
Organized by Navlaya, Navankur& Art of Living,
Bhopal

Golden Jubilee Celebration
14th June 2006
ShaheedBhavan, Bhopal
Orgnized b Kalapadma Dance Academy,
Bhopal




National Dance Festival
26th June 2009
Jawahar Auditorium, Ajmer
Organized by Vividha Art & Culture Organization,
Ajmer.

International Yoga Sammelan
30th August 2009
Bharat Bhavan, Bhopal
Organized by Bhartiya Yoga Anusandhan Kendra,
Bhopal

BhartParv
26th January 2010
GauriKunj Auditorium, Khandwa
Organized by Swaraj Bhawan Sanchalnalaya, Bhopal
Govt. of Madhya Pradesh

Sangeet Natak Academy Festival
3rd Feb 2010
RavindraNatyaGraha, Jabalpur
Organized by SangeetNatak Academy,
Delhi

Bandhavgarh Festival
11th Feb 2010
Open Air Auditorium, Bandhavgarh
Organized by Govt. of Madhya Pradesh.
Dharohar
24th Mar 2010
Little Ballet Troup Auditorium, Bhopal
Organized by Kirti Ballet Troup,
Bhopal

Bharatnatyam Workshop
27th April 2010 to 30th April 2010
Soochna Kendra, Ajmer
Organized by Vividha Art & Cultural Organization, Ajmer
&SangeetNatak Academy, Rajasthan

Bharatnatyam Workshop
13th June 2010 to 28th June 2010
RavindraBhavan, Bhopal
Organized by UstadAllauddin Khan SangeetEvam Kala Academy,
Govt. of Madhya Pradesh.

International Youth Day Celebration
13th Aug 2010
ManavSangrahalaya, Bhopal
Organized by Indira Gandhi RashtriyaManavSangrahalaya,
Bhopal.


Laadli Media Award Ceremony
2010
SwarajBhavan, Bhopal
Organized by Laadli NGO,
Mumbai

Madhya Pradesh Sthapna Divas
1st of November 2010
Organized by governmentofMadhya Pradesh.
          
Mandu Festival 2011.
Organized by government of Madhya Pradesh.

BhartParvRatlam
26th 0January 2011
Organized by Swaraj Bhawan Sanchalnalaya, Bhopal
Govt. of Madhya Pradesh

25th March 2011
RavindraBhavan,bhopal
organized by Kala madir Bhopal(M.P)

Uthabhav
5th May 2011
Bharat Bhawan,Bhopal
Organized by Yaman Academy of fine Arts.

Gurupurnima
Bharat Bhavan,Bhopal
16th July 2011
Organized by Yaman Academy of fine Arts.

B.H.E.L Bhopal
25th Feb 2012
Organized by B.H.E.L Bhopal

RavatpurasarkarAsharam
30thmarch  2012
Organized byRavatpurasarkarAsharam.
                                                                
Ghorakhpur University
24th march 2012
organized by Gorakhpur University.

RavindraUtasav
11th may 2012
Bharat bhawan,Bhopal
organized by

Fiji Islands
23rdjuly to 5thaug 2012
organized by Indian Cultural Council for Relation
Delhi.


ICCR Bhopal
Shahida bhawan, Bhopal
organized byiccr Bhopal

MahakumbhaMela
Swami Awadeshanandjunaakhada
28th January 2013
Organized by Swami AvdeshanandAakhada.
 Allahabad.

OjasviniMela
9thfebuauary 2013                 
Organized by  SubhaMaliya.

BundaliDamohMahautsav
25th February 2013
Organized bySubhaMaliya.

Agaramahotsav
26th February 2013
Organized by  Uttar Pradesh tourism.

RavindraSangeet
4th may 2013
Bharat Bhawan, Bhopal. 
Organized by



World Dance Day
29th April 2013
Aazad bhawan auditorium, Delhi
Organized by Indian council for cultural relation, Delhi.

Badal Raga
8th September 2013
Bharat bhawan, Bhopal.
Organized by

Baudh Festival
12th December 2013
Sanchi, M.P
Organized by Tribal Museum, Bhopal Utasav

Madhya Marg
17th December 2013.
Tribal Museum, Bhopal
Organized byTribal Museum, Bhopal

25th Annual Function IIFM,
2nd February 2014,
Organized by Indian Institute of Forest Management, Bhopal (M.P)



32th Bharat Bhawan Foundation day,
15th February 2014
Bharat bhawan, Bhopal (M.P)
Organized bySanakritisancha