मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

हरफनमौला व्यक्तित्व को सब करते हैं सलाम

सप्ताह का इंटरव्यू

सुनील सोन्हिया

बैंकिंग, नाटक, गायन सहित विविध विधाओं में पारंगत हैं सुनील सोन्हिया

- राजकुमार सोनी
सरल स्वभाव, सुहृदय एवं मिलनसार सुनील सोन्हिया सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया इब्राहीमपुरा में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर कार्य करते हुए समाजसेवा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में संलग्न हैं। चूंकि श्री सोन्हिया बैंक में कार्यरत हैं अत: जिस शहर में जाते हैं वहां अपनी विविध गतिविधियों से अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
पूर्व में मुंबई में रहते हुए टीवी सीरियल देवी, धडक़न, बाबूजी, लेकिन वो सच था में अभिनय किया तथा सहारा टीवी के एक कार्यक्रम चि_ी आई है में एंकर की भूमिका अदा की। गायिकी के क्षेत्र में विभिन्न आर्केस्ट्रा में मुकेश की आवाज में गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत की। हाल ही में नवरात्र पर देवी गीत एलबम ‘दरबार तेरा है न्यारा’ में अतिथि गायक के रूप में दो गीत गोय तथा वीडियो एलबम में अभिनय किया। लायंस क्लब से जुड़े रहकर ‘पल्स पोलियो अभियान’ में सक्रिय योगदान दिया। श्री सोन्हिया ने निर्धन छात्रों को बैंकिंग परीक्षा की तैयारी हेतु पढ़ाने की योजना बनाई है। सोन्हिया की दो पुत्रियाँ हैं। बेटी बचाओ अभियान हेतु एक गीत लिख रहे हैं। इस सबके लिए अपनी पत्नी श्रीमती विद्या सोन्हिया को प्रेरणा मानते हैं। उन्होंने बताया कि 1992 में पहली बार लिपिक के रूप में बैंकिंग सेक्टर से कैरियर शुरू किया। 1998 में राजभाषा अधिकारी बनकर मुंबई गया। 2004 में छिंदवाड़ा, 2005 में सिवनी में शाखा प्रबंधक बना। 2009 में कटनी के बाद वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर बाड़ी परेली में 2011 में रहा। 2013 में भोपाल आया और न्यू मार्केट, नरेला शंकरी, बैरागढ़ शाखाओं में बेहतर सेवाएं दीं। बैंकिंग सेवाओं में पहले से काफी बदलाव आ रहा है। सेंट लखपति योजना सेंट्रल बैंक की चर्चित योजना है। इसी तरह ऋणी खाता धारकों के निलए सरल समझौता नीति लागू की गई है। यहां की ब्रांच की सेवाएं बेहतर होने से ग्राहक खुश हैं। सेन्हिया शीघ्र ही स्वच्छता पर शार्ट फिल्म बनाने जा रहे हैं।



Rajkumar Soni की फ़ोटो.

शनिवार, 10 सितंबर 2016

भोपाल की यंग वूमेन का जज्बा


भोपाल की यंग वूमेन का जज्बा


हर क्षेत्र में समाजसेवा

किसी देश की तरक्की में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। परिवार को संभालने वाली महिलाएं आज समाज और देश को नई दिशा दे रही हैं। ये सिलसिला आजादी के बाद से अब तक अनवरत चल रहा है। चाहे जितनी मुश्किलें हो लेकिन आगे बढऩे और खुद को स्थापित करने का जज्बा महिलाओं को कामयाब बना रहा है। ऐसी ही भोपाल की यंग वूमेन के एक ग्रुप ने हर क्षेत्र में समाजसेवा करने का संकल्प दो साल पहले लिया था। अब तक यह वूमेन हजारों गरीबों की मदद, कैंसर पीडि़त, ब्लड डोनेशन व वस्त्र वितरण, बच्चों की काउंसिलिंग सहित कई तरह की सेवाएं करने हमेशा तत्पर रहती है।

- राजकुमार सोनी


भारतीय समाज में महिलाओं का विशिष्ट स्थान रहा हैं। पत्नी को पुरूष की अर्धांगिनी माना गया है। वह एक विश्वसनीय मित्र के रूप में भी पुरुष की सदैव सहयोगी रही है। लेकिन पुरुष वर्चस्व मानसिकता वाले समाज ने महिलाओं को घर की दहलीज से बाहर कदम रखने पर पाबंदी लगाता रहा है। महान लेखिका महादेवी वर्मा ने कहा था कि ''नारी केवल एक नारी ही नहीं अपितु वह काव्य और प्रेम की प्रतिमूर्ति है। पुरुष विजय का भूखा होता हैं और नारी समर्पण की। शायद इसीलिए अपने सुनहरे भविष्य के सपने देखने वाली महिलाएं अब कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ती जा रही हैं।

सशक्त होती महिलाएं
19वीं सदी में जब पुनर्जागरण शुरू हुआ तो महिलाओं के कल्याण के कई आंदोलन हुए। भारत की आजादी की लड़ाई में महिलाओं की गौरवमयी भागीदारी रही। कस्तूरबा गांधी, विजयलक्ष्मी पंडित, कमला नेहरु, सुचेता कृपलानी, सरोजिनी नायडू जैसी महिलाओं ने भारत की आजादी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। बीसवीं सदी की शुरुआत में महिलाएं अपनी प्रगति की नई इबारत लिखना शुरू किया, वे शिक्षा से चिकित्सा के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने में लगीं। उनकी यह पहल समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका को प्रतिस्थापित कर रहा था। आजादी के बाद से महिलाएं राजनीति में नया मुकाम बनाना शुरू किया, वे लोकसभा, राज्यसभा, विधान सभाओं तथा स्थानीय निकायों का सशक्त नेतृत्व करने की भूमिका में आईं। महिला सशक्तिकरण के इस युग में महिलाओं को आगे बढऩे के लिए सरकारी प्रयास भी सफल होने लगे, महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए महिला आरक्षण भी इस प्रयास का हिस्सा है। आज बिजनेस, इंजीनियरिंग, विज्ञान-अनुसंधान, खेले के क्षेत्र महिलाएं पुरुषों से किसी स्तर पर कम नहीं हैं। पर सवाल यह है कि आज भी महिलाओं को बढऩे की आजादी समाज क्यों नहीं देता है? जबकि महिलाओं ने ये दिखा दिया कि प्रकृति रूप से पुरुष और महिला के बीच भेद वाले हजारों वर्षों की विचारधारा को झुठलाकर खुद को मजबूत और कामयाब बनाया है। लोकतंत्र सभी नागरिकों को रोजगार, सम्मान से जीने का अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने का अधिकार देता है। लेकिन महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा और लगातार महिलाओं के सम्मान और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले लोग भी इसी समाज का हिस्सा हैं। महिलाओं को भोग की वस्तु समझने वाले कथित ऐसे पुरुष मानसिकता के खिलाफ कब समाज जागेगा? महिलाओं की संरक्षा के लिए चाहे जितने कानून बना दिया जाए लेकिन सबसे बड़ी जरूरत है, महिलाओं के प्रति समाज के नजरिए में बदलाव आना।

बिजनेस में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी
एक सर्वे के अनुसार भारतीय महिलाओं की भागीदारी कुल उद्योगों में दस प्रतिशत हैं और यह भागीदारी निरंतर गतिशील हो रही है। बैंकिग, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कॉर्पोरेट जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं तकनीकी क्षेत्र आदि में स्किल से लैस महिलाएं भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ा रही हैं। महिलाओं के काम करने की क्षमता जैसे, नेटवर्किंग की क्षमता, काम प्रति समर्पण, सहयोगियों के साथ मधुर व्यवहार, सीखने की जिज्ञासा, सकारात्मक सोच के इन्हीं गुणों के कारण महिलाएं आज इन क्षेत्रों में सफल नेतृत्व भी कर रही हैं।

9 लाख 95144 लघु उद्योग
दूसरे सर्वे के अनुसार भारत में कुल 9 लाख 95144 लघु उद्योग उद्यमशाील महिलाओं द्बारा संचालित हैं। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं दूसरी सैकड़ों महिलाओं को अत्मनिर्भर बना रही हैं। केरल में ऐसे स्वयं सहायता समूह के कारण आज वहां सौ प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं और अपने अधिकारों के लिए सजग हैं।

परिवार में खुशहाली और आर्थिक तंगी होती है दूर
रिसर्च से ये बात सामने आया है कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने से परिवार में खुशहाली और आर्थिक तंगी भी दूर होती है, क्योंकि उस परिवार में अभी तक पुरुष ही कमाते थे और परिवार की बढ़ती जरूरतों को बमुश्किल से पूरा कर पाते हैं। ऐसे में महिलाएं का आत्मनिर्भर बनना, बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छा पोषण दोनों उपलब्ध होता है। मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ये तथ्य सामने आए हैं।

समाज सेवा को बनाया मिशन

नीलम विजयवर्गीय, समाजसेविका
नीलम विजयवर्गीय, समाजसेविका

सुख समर्पण संस्था की चेयरमैन नीलम विजयवर्गीय का मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से भी निर्भर होना चाहिए। परिवार का सही और सुचारू रूप से संचालन करने के लिए महिलाओं को हर माह बचत अवश्य करना चाहिए जो परिवार के किसी भी सदस्य के बुरे समय काम आ सकती है। दूसरों की सेवा करने से जो आत्मसंतोष व पॉजीटिव ऊर्जा मिलती है उसे हम शब्दों से बयां नहीं कर सकती। हमने दो साल पहले सुख समर्पण संस्था को बहुत छोटे पैमाने पर शुरु किया था। आज संस्था में 700 से अधिक महिलाएं समाजसेवा का काम बेहतर ढंग से कर रही हैं। संस्था गरीबों को मदद ब्लड डोनेशन, बच्चों की काउंसिलिंग में मदद करती है।

एकल परिवार धैर्य से काम लें

संगीता खुराना, व्यवसायी


पहले संयुक्त परविार हुआ करते थे आज अधिकांश एकल परिवार चल रहे हैं। यह एक बड़ी कमी है। अगर पति-पत्नी या बच्चे किसी समस्या में उलझ जाएं तो हल करना मुश्किल हो जाता है। हम पिछले दो साल से अपने व्यवसाय के साथ ही समाजसेवा से जुड़ी हूं। हमने यह देखा कि झुग्गी बस्ती के बच्चों की, सरकारी प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की, बुजुर्गों आदि की सेवा करने वाला कोई नहीं है।

 

 

संगठन में शक्ति है

नीलम मनचंदा, गृहणी

पुरुष की कामयाबी में स्त्री का हाथ होता है, उसी तरह स्त्री की कामयाबी में पुरुष का बड़ा योगदान है। महिलाओं को संगठित होकर कार्य करना चाहिए तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण का वजूद टिक पाएगा। मप्र व केंद्र सरकार ने महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं जिनका लाभ वूमेन को अधिक से अधिक उठाना चाहिए। हमें समाजसेवा का कार्य करना बहुत अच्छा लगता है।

महिलाएं हो रहीं जागरुक

वैशाली रतनानी, टीचर

जागरुकता के कारण महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इसमें संचार क्रांति का महत्वपूर्ण योगदान है। भोपाल में गैस कांड के पीडि़तों को अभी तक उचित मदद नहीं मिल पा रही है, जबकि ऐसे पात्रों को मदद मिल रही है जिनका इस कांड से वास्ता ही नहीं है। सही गैस पीडि़तों को अगर समय पर आर्थिक मदद व इलाज हो जाए तो काफी परेशानियां उन परिवारों की दूर हो जाएं जो ये दंश कई सालों से झेल रहे हैं। मेरा ऐसा मानना है कि हर महिला को गरीब, बेसहारा, जरूरत मंद लोगों की समय-समय पर मदद करते रहना चाहिए जिससे उनका भरण-पोषण हो सके।

 

बेटियों को आगे बढ़ाएं

शालिनी जैन, गृहणी

देशभर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। यह भारत के निवासियों के लिए सुखद पहलू है। मेा मानना है कि अभिभावक बेटों की तरह ही बेटियों को घर में सम्मान दें और उन्हें भी हर क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्ररित करें। अगर ऐसा होगा तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया में बेटों के साथ बेटियों का भी डंका बजेगा। आज भले ही वूमेन अपने आपको घर या बाहर असुरक्षित महसूस समझती हो लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि नारी शक्ति दुर्गा भी है और काली भी है। स्त्रियों की शक्ति को किसी भी तरह से कम नहीं आंका जा सकता। बेटियों को उच्च शिक्षित करें और समाज में उनका नाम रोशन करें। हां एक बात यह कि परिवार की गाड़ी को सामंजस्य से जिंदगी भर चलाएं, आपको अपार खुशियां मिलेंगी।

दो साल में सेवा

स्लम एरिया
5200

लड़के-लड़कियों को आर्थिक सहायता, खाद्य सामग्री, वस्त्र वितरण
कैंसर हास्पिटल
115
बच्चों को आर्थिक सहायता, खाद्य सामग्री, वस्त्र वितरण
ब्लड डोनेट
225
महिला ग्रुप के सदस्यों द्वारा
नेत्रदान
50
महिला ग्रुप के सदस्यों द्वारा सेवा सदन के माध्यम से
काउंसिलिंग
450
मन में खुदकुशी का भाव नहीं आने पाए ऐसे बच्चों को काउंसिलिंग के जरिये उन्हें जीने की प्रेरणा दी।

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला विपरीत प्रत्यंगिरा स्तोत्रम्



वर्तमान कलियुग में नानाप्रकार के तापों से जातकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जातकों के मन में हमेशा अशांति का वातावरण छाया रहता है आखिर वह क्या करे जिससे मन को शांति तो मिले ही साथ ही यश, वैभव, कीर्ति, शत्रुओं से छुटकारा, ऋण से मुक्ति और ऊपरी बांधाओं से मुक्ति। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने मां भद्रकाली, दक्षिणकाली या महाकाली की घनघोर तपस्या कर जातकों को इन सभी वस्तुओं से छुटाकर कीर्ति की पताका लहराई थी। बहुत कम जातक जानते होंगे मां प्रत्यंगिरा के बारे में, मां प्रत्यंगिरा का भद्रकाली या महाकाली का ही विराट रूप है। मां प्रत्यंगिरा की गुप्तरूप से की गई आराधना, जप से अच्छों-अच्छों के झक्के छूट जाते हैं। कितना ही बड़ा काम क्यों न हो अथवा कितना बड़ा शत्रु ही क्यों न हो, सभी का मां चुटकियों में शमन कर देती हैं। आप भी मां प्रत्यंगिरा की सच्चे मन से साधना-आराधना-जप करके यश, वैभव, कीर्ति प्राप्त कर सकते हैं। स्तोत्रम प्रारंभ करने से पूर्व प्रथम पूज्य श्रीगणेश, भगवान शंकर-पार्वती, गुरुदेव, मां सरस्वती, गायत्रीदेवी, भगवान सूर्यदेव, इष्टदेव, कुलदेव तथा कुलदेवी का ध्यान अवश्य कर लें। यह स्तोत्र रात्रि 10 बजे से 2 के मध्य किया जाए तो तत्काल फल देता है।

श्री प्रत्यंगिरायै नम:
अथ विनियोग
ऊँ ऐं अंगुष्ठाभ्यां नम:। ऊँ हृी तर्जनीभ्यां नम:। ऊँ श्री मध्यमाभ्यां नम:। ऊँ प्रत्यंगिरे अनामिकाभ्यां नम:। ऊँ मां रक्ष कनिष्ठिकाभ्यां नम:। ऊँ मम शत्रून्भञ्जय करतल कर पृष्ठाभ्यां नम: एवं हृदयादिन्यास:। ऊँ भूर्भुव: स्व: इति दिग्बन्ध।
मूल मन्त्र
ऊँ ऐं हृीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम।
शत्रून्भञ्जय भन्ञ्जय फे हुँ फट् स्वाहा।।
।। विपरीत प्रत्यंगिरा स्तोत्रम्।।
अष्टोत्तरशतञ्चास्य जपं चैव प्रकीर्तितम्।
ऋषिस्तु भैरवो नाम छन्दोह्यनुष्टुप प्रकीर्तितम्।।
देवता दैशिका रक्ता वाम प्रत्यंगिरेति च।।
पूर्वबीजै: षडं्गानि कल्पयेत्साधकोत्तम:।
सर्वदृष्टोपचारैश्च ध्यायेत्प्रत्यंगिरां शुभां।।
टंकं कपालं डमरुं त्रिशूलं सम्भ्रिती चन्द्रकलावतंसा।
पिंगोध्र्वकेशाह्यसितभीमद्रंष्ट्रां भूयाद्विभूत्यै मम भद्रकाली।।
एवं ध्यात्वा जपेन्मंत्रमेकविंशतिवासरान्।
शत्रूणां नाशनं ह्येतत्प्रकाशोह्ययं सुनिश्चय:।।
अष्टम्यामर्धरात्रे तु शरदकाले महानिशि।
आधारिता चेच्छ्रीकाली तत्क्षणात् सिद्धिदानृणाम्।।
सर्वोपचारसम्पन्ना वस्त्ररत्नकलादिभि:।
पुष्पैश्च कृष्णवर्णैश्च साध्येत्कालिकां वराम्।।
वर्षादूध्र्वमजम्ममेषम्मृदं वाथ यथाविधि।
दद्यात् पूर्वं महेशानि ततश्च जपमाचरेत्।।
एकाहात् सिद्धिदा काली सत्यं सत्यं न संशय:।
मूलमन्त्रेण रात्रौ च होमं कुर्यात् समाहित:।।
मरीचलाजालवणैस्सार्षपैर्मरणं भवेत।
महाजनपदे चैव न भयं विद्यते क्वचित्।।
प्रेतपिण्डं समादाय गोलकं कारयेत्तत:।
मध्ये वामांकितं कृत्वा शत्रुरूपांश्च पुत्तलीन्।।
जीवं तत्र विधायैव चिताग्नौ जुहुयात्तत:।
तत्रायुतं जपं कुर्यात् त्रिराद्यं मारणं रिपो:।।
महाज्वाला भवेत्तस्य तद्वत्ताशलाकया।
गुदद्वारे प्रदद्यच्च सप्ताहान्मारणं रिपो:।।
प्रत्यंंगिरा मया प्रोक्ता पठिता पाठिता नरै:।
लिखित्वा च करे कण्ठे बाहौ शिरसि धारयेत्।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो नाल्पमृत्यु: कथंचन।
ग्रहा: ऋक्षास्तथा सिंहा भूता यक्षाश्च राक्षसा:।।
तस्या पीड़ां न कुर्वन्ति दिवि भुव्यन्तरिक्षगा:।
चतुष्पदेषु दुर्गेषु वनेषूपवनेषू च।।
श्मशाने दुर्गमे घोरे संग्रामे। शत्रुसंकटे।।
ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ कुं कुं कुं मां सां खां पां लां क्षां ऊँ हृीं हृीं ऊँ ऊँ हृीं बां धां मां सां रक्षां कुरु। ऊँ हृीं हृीं ऊँ स: हुँ ऊँ ऊँ क्षौं वां लां धां मां सां रक्षां कुरु। ऊँ ऊँ हुँ पुलं रक्षां कुरु। ऊँ नमो विपरीतप्रत्यंगिरायै विद्यराज्ञि त्रैलोक्यवशंकरि तुष्टिपुष्टिकरि सर्वपीड़ापहारिणि सर्वापन्नाशिनि सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिनि मोदिनि सर्वशस्त्राणां भेदिनि क्षोभिणि तथा।
परमतन्त्रमन्त्रयन्त्रविषचूर्ण-सर्वप्रयोगादीन्येषां निवर्तयित्वा यत्कृतं तन्मेह्यतु कलिपातिनि सर्वहिंसा मा कारयति अनुमोदयति मनसा वाचा कर्मणा ये देवासुरराक्षसास्तियग्योनि-सर्वहिंसका विरूपकं कुर्वन्ति मम मन्त्रतन्त्रयन्त्रविषचूर्ण-सर्वप्रयोगादीनात्महस्तेन य: करोति करिष्यति कारयिष्यति तान् सर्वानन्येषां निवर्तयित्वा पातय कारय मस्तके स्वाहा।
।। इति श्री विपरीत प्रत्यिंगरा सम्पूर्णम्।।

अपनी उलझी समस्याओं को सुलझाएं





शक्तियों का साक्षात चमत्कार
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि कलियुग में शक्तियों का साक्षात चमत्कार देखने को मिलता है। किसी भी जातक ने थोड़ी सी भी पूजा-अर्चना कर ली उसे तुरंत लाभ मिलता है। अगर आप भी किसी भी समस्या से घिरे हैं और तत्काल निदान चाहते हैं तो शक्तियों का अद्भुत चमत्कार अनुभव कर सकते हैं। अगर आपको बाकई ढोंगी तांत्रिकों, बाबाओं, जादू-टोना वालों से बेहद तंग और परेशान हो चुके हैं तो सच्ची शक्तियों की कृपा प्राप्त कर अपनी उलझी हुई समस्याओं का निदान प्राप्त कर जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। एक बार आपने शक्तियों की विशेष कृपा प्राप्त कर ली तो आपका जीवन धन्य हो जाएगा। हर जातक के जीवन में अनेकानेक समस्याएं आती रहती हैं उन से वह कुछ समय के लिए छुटकारा तो पा लेता है लेकिन कई समस्याएं ऐसी हैं जो जिंदगी भर जातक इनसे छुटकारा नहीं पा सकता। रोजाना का पारिवारिक कलह, पति-पत्नी में मन-मुटाव, आसपास के पड़ोसियों की द्वेष भावना, ऊपरी हवा का चक्कर, जमीन-जायदाद, कोर्ट-कचहरी, प्रेम में विफलता, तलाक की नौबत, धन की बेहद तंगी, बेरोजगार, सास-बहू में अनबन, किसी भी काम में मन नहीं लगना, बीमारियों का पीछा नहीं छूटना, शत्रुता जैसी समस्याएं हर जातक को घेरे रहती हैं। अगर आप इन सभी का सटीक निदान चाहते हैं तो एक बार जरूर संपर्क करें।

- आचार्य पंडित राज
चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान
एमआईजी-3/23, सुख सागर, फेस-2
नरेला शंकरी, भोपाल -462023 (मप्र), भारत
मोबाइल : +91-8827294576
ईमेल : panditraj259@gmail.com

Photo bhopal best man


















मंगलवार, 23 अगस्त 2016

भारत में बनेंगे एफ-16 फाइटर जेट


- भारत-अमेरिका के रक्षा संबंधों में भी सुधार होगा
- पाकिस्तान को पटखनी देना चाहते हैं पीएम नरेंद्र मोदी
- मेक-इन-इंडिया के 150 बिलियन डॉलर के प्लान के तहत भारतीय वायुसेना की बुजुर्ग फ्लीट बदलेगी
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार लड़ाकू विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी के साथ एक डील को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। लॉकहीड मार्टिन कॉर्पोरेशन एफ-16 फाइटर जेट बनाने वाली अपनी पूरी यूनिट को भारत शिफ्ट करना चाहती है, अगर ऐसा होता है तो भारत को पाकिस्तान पर महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त मिलेगी। इस प्रस्ताव से भारत और अमेरिका की तरह इस बात पर थोड़ा नियंत्रण मिलेगा कि किन देशों को फाइटर जेट्स और स्पेयर पार्ट्स बेचे जाएं। अगर यह डील सफल होती है तो भारत कई महत्वपूर्ण सप्लाई पाकिस्तान को दिए जाने से इनकार कर सकता है। पाकिस्तान दशकों से एरियल डिफेंस के लिए एफ-16 विमानों पर ही निर्भर रहा है। लॉकहीड भारत से 100 फाइटर जेट्स से ज्यादा का ऑर्डर हासिल करने की फिराक में है, इसलिए वह इस बात को रणनीतिक महत्व दे रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी मेक-इन-इंडिया के 150 बिलियन डॉलर के प्लान के तहत भारतीय वायुसेना की बुजुर्ग फ्लीट को बदलना चाहते हैं। भारत के 650 एयरक्राफ्ट वाली फ्लीट में से एक तिहाई 40 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और अगले दशक में रिटायर होने वाले हैं। इस डील से भारत-अमेरिका के रक्षा संबंधों में भी सुधार होगा और पाकिस्तान को मिर्ची लगेगी। लॉकहीड मार्टिन के एयरोनॉटिक्स बिजनेस डेवलपमेंट के डायरेक्टर रेंडाल हावर्ड ने कहा, हम भारत को सप्लाई का बेस बना रहे हैं। भारत के जेट के ऑर्डर के लिए डिफ्रेंस कंपनियों में तगड़ी प्रतिस्पर्धा है। लॉकहीड मार्टिन की प्रतिद्वंदी कंपनियां जैसे बोइंग और साब एबी भी अपना कुछ प्रोडक्शन भारत में करने को तैयार हैं। अमेरिका में एफ-16 बनाने वाली लॉकहीड मार्टिन दशकों से सफलतापूर्वक अपने जेट बेचती रही है। इसके अलावा, भारत में यूनिट लगाने से नौकरियां पैदा होंगी, जोकि बेहद जरूरी हैं। क्योंकिे 2017 में मोदी को कई राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाना है।
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राजकुमार सोनी (समय : 6.50 शाम)

सोमवार, 22 अगस्त 2016

कोलार में गूंजे भारत माता के जयकारे


- प्रकाश मीरचंदानी के नेतृत्व में निकली तिरंगा यात्रा

BL Maran,  भोपाल
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आजादी-70 ‘याद करो कुर्बानी’ के अंतर्गत राजधानी सहित प्रदेशभर में अब तिरंगा यात्राओं का दौर जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश मीरचंदानी के नेतृत्व में कोलार उपनगर में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। दोपहर करीब दो बजे कोलार थाने के सामने से शुरू हुई तिरंगा यात्रा के दौरान सैकड़ों युवा और बुजुर्ग समाजसेवियों ने हाथों तिरंगा लेकर कोलार की मुख्य सड़क सहित चौक-चौराहों और में गलियों में भारत माता के जयकारे लगाकर नागरिकों को देशभक्ति का संदेश दिया। तिरंगा यात्रा शाम करीब 6 बजे सर्वधर्म पुल तक निकाली गई, जिसमें मुख्य रूप से दिनेश मिश्रा, बसंत भारानी, दिनेश सिंह, जीवन दीक्षित सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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रविवार, 21 अगस्त 2016

राजस्व मंत्री के नेतृत्व में निकली तिरंगा यात्रा

 
B L Maran
भोपाल। राजधानी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के उपलक्ष्य में चल रहे आजादी-70 जरा याद करो कुर्बानी के रूप में तिरंगा यात्राओं का दौर अब भी जारी है। इसी कड़ी में रविवार को राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता के नेतृत्व में दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नगर निगम वार्ड-30 के विभिन्न क्षेत्रों में तिरंगा हाथ में लिए भाजपा उपाध्यक्ष लीलेंद्रसिंह मारण, राकेश सिरवैया, एलएन गौर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय और वन्दे मातरम् के नारे लगाते हुए पूरे विस क्षेत्र में धूमकर आपसी भाईचारे के साथ देश की एकता और अखंडता के लिए लोगों से आह्वान किया।
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बुधवार, 3 अगस्त 2016

दुनिया की बेहतरीन खिलौना दुकानों में से एक हैमलीस ने लांच किया इंदौर में अपना पहला स्टोर


 (राजकुमार सोनी)
भोपाल।
दुनिया भर में बेहतरीन खिलौनों के लिए मानी जाने वाली खिलौना दुकान ''हैमलीस ने 225 सालों से बच्चों के साथ ही उनके पैरेंट्स की कल्पनाओं को भी आकर्षित करते रहने में सफलता पाई है। यही आकर्षण अब इंदौर में भी हैमलीस के पहले फ्लैगशिप स्टोर के रूप में छाने जा रहा है। यह स्टोर ट्रेजर आइलैंड मॉल में आरभ होने जा रहा है। भारत में 2010 में ''हाई स्ट्रीट फीनिक्स मॉल मुंबई  में इस ब्रांड के पहले भारतीय स्टोर के शुभारभ के साथ 'रिलायंस लाइफस्टाइल होल्डिंग्स, ने ब्रिटेन स्थित हैमलीस के साथ सहयोगी के रूप में इस सफर की शुरुआत की और हैमलीस को यहाँ स्थापित होने में मदद की। आज यह प्रतिष्ठित ब्रांड देश के 10 शहरों में 21 स्टोर्स को सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है, इन स्टोर्स में नोएडा का नया स्टोर भी शामिल है जिसने भारतीय बाजार में सफलतापूर्वक 3 माह पूर्ण किये हैं।   
हैमलीस, दुनियाभर में पूरे परिवार के आनंद के लिए खिलौने बना रही है। पूरी दुनिया में संचालित हैमलीस के 79 स्टोर्स, खिलौनों को जीवन से जोडऩेए जादुई पलों को रचने और खिलौनों के साथ मिलने वाले अनुभवों को यादगार बनाने के साथ ही खिलौनों की शॉपिंग के लिए सबसे अच्छे स्थान के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर हैमलीस मात्र एक टॉय स्टोर नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्थान है। हैमलीस से मिलने वाला अनुभव उस अनूठे थियेटर और मनोरंजन वाले ब्रांड के बारे में है जो पूरे परिवार को नई खोज और कल्पनाओं के समुद्र की यात्रा पर ले जाता है। हैमलीस की दुनिया को निरंतर एक ऐसे स्थान की अवधारणा के साथ रचा गया है, जहाँ खिलौने जीवंत रूप में खिलखिलाते नजर आते है। इन स्टोर्स में खिलौनों का डेमोंस्ट्रेशन देने वालों के साथ, रोचक डेमो और अन्य इवेंट्स सभी इस प्रकार सामने आते हैं कि यह एक जादू भरा अनुभव बन जाता है, ऐसे पलों का अनुभव जहाँ कल्पनाएं और रचनात्मकताए बिना किसी बंधन के आसमान की सैर पर निकल पड़ती हैं।
इंदौर स्थित हैमलीस का स्टोर खिलौनों के अद्भुत कलेक्शन को प्रदर्शित करेगा। यहाँ बच्चों को जी भरकर खेलने के साथ ही जब के डेमोंस्ट्रेशन का हिस्सा बनने का भी अवसर मिलेगा। स्टोर में करीब तीन हजार उत्पाद ऑफर के साथ उपलब्ध होंगे जिनमें कई पीढिय़ों से बच्चों को लुभाते आ रहे ब्रांडेड खिलौनों की विस्तृत श्रृंखला भी शामिल है। साथ ही हैमलीस की ब्रांडेड श्रृंखला भी इसमें शामिल होगी जिसमें इस ब्रांड के प्रतिष्ठित, गुणवत्ता से भरपूर और खेलने का पूरा मजा देने वाले सिग्नेचर टैडी बेयर्स, टॉय सोल्जर्स तथा अन्य खिलौने सम्मिलित है। हैमलीस स्टोर पर 0-14 वर्ष की उम्र के बच्चों की पसंद और आवश्यकता के लिहाज से खिलौने उपलब्ध हैं जिनमें सॉफ्ट टॉय से लेकर आर्ट एन्ड क्राफ्ट, एजुकेशनल टॉयज, कंस्ट्रक्शन सेट्स, प्री.स्कूल टॉयज, बोर्ड गेम्सए रिमोट कंट्रोल टॉयज, एक्शन फिगर्स, राइड ऑन्स, डॉल्स और प्ले सैट्स आदि शामिल हैं।
इंदौर में हैमलीस के पहले स्टोर के लॉन्च के बारे में अधिक जानकारी देते हुए हैमलीस के बिजनेस हेड ''करनदीप सिंह ने बताया- ''हैमलीस दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित खिलौना दुकानों में से एक है और 2010 में भारत में इसके शुभारंभ के बाद से अब यह देश की सबसे बड़ी टॉय रिटेलर बन गई है। देश के विभिन्न शहरों में इसके विस्तार की हमारी योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में अपने प्रवेश को विस्तार देने की कड़ी में मुझे इंदौर में अपने पहले और देश के इक्कीसवें स्टोर के लॉन्च की घोषणा करते हुए ख़ुशी महसूस हो रही है। शहर के अपने नन्हें-मुन्ने दोस्तों के लिए अपने प्रतिष्ठित प्रोडक्ट्स की वृहद् श्रृंखला को प्रस्तुत करते हुए हम बहुत उत्साहित हैं और आशा करते हैं कि अपने विश्वस्तरीय खिलौनों और स्टोर के भीतर मौजूद मनोरंजन से हम बच्चों को ख़ुशी दे पाएंगे।

हैमलीस के इंदौर स्थित स्टोर का पता-
ट्रेजर आयलैंड,11 तुकोगंज मेन रोड, महात्मा गांधी मार्ग,
साऊथ तुकोगंज, इंदौर-452001है।


हैमलीस के बारे में
हैमलीस यूके की दुनियाभर में सबसे अच्छी खिलौना दुकान, भारत में 2010 से संचालित। मुंबई में हाई स्ट्रीट फीनिक्स में अपने पहले भारतीय स्टोर के आर?भ के साथ ही हैमलीस अब देश के 10 शहरों में 21 स्टोर्स के साथ कार्यरत है, जो कि अपनी खिलौनों की विस्तृत श्रृंखला, विशेष उत्पादों और जादुई अनुभव के साथ बच्चों की कल्पनाओं में रंग भरता है।  हैमलीस में मिलने वाला अनुभव पूरे परिवार के लिए एक तरह की ट्रीट है। यह सबके पसंदीदा पारंपरिक खिलौनों के साथ ही ब्रांडेड टॉयज और पीढिय़ों से बच्चों को लुभाते आ रहे खिलौनों और क्वर्की और अनोखे खिलौनों के खजाने की विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। इसमें हैमलीस की अपनी प्रतिष्ठित, गुणवत्तापूर्ण और खेल का पूरा आनंद देने वाली ब्रांड श्रृंखला भी शामिल है। हैमलीस का यह अनुभव इसके अनूठे थियेटर और मनोरंजन के बिना अधूरा है जो बच्चों के साथ ही बड़ों को भी मंत्रमुग्ध कर डालता है। टॉय डेमॉन्सट्रेटर्स और जादूगर, विशेष खेल प्रतियोगिताएं, रोमांचक इवेंट्स तथा अन्य एक्टिविटीज मिलकर यहाँ अनूठा जादुई अनुभव प्रदान करती हैं।




दुनिया की बेहतरीन खिलौना दुकानों में से एक हैमलीस ने लांच किया इंदौर में अपना पहला स्टोर





मंगलवार, 2 अगस्त 2016

महाराष्ट्र में मुंबई-गोवा हाइवे पर पुल टूटा, 2 बसों समेत 15 वाहन बहे, 40 लोग लापता




मुंबई
मुंबई-गोवा हाइवे पर स्थित महाड में मंगलवार देर रात एक पुराना पुल गिर जाने से कोंकण इलाके की उफनती सावित्री नदी में कई वाहन समा गए। एनडीआरएफ के मुताबिक राज्य परिवन की दो बसों में सवार 40 लोग लापता हैं। इनमें चार बस स्टाफ भी शामिल हैं। बचाव अभियान में एनडीआरएफ के अलावा सेना को भी लगा दिया गया है। लापता लोगों की तलाश के लिए नौसेना के हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस हादसे पर संसद में बयान दिया। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 12 नावों के साथ 115 जवानों वाली एनडीआरएफ की चार टीमें भेजी गई हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर पुष्टि की कि महाड में हुए हादसे में राज्य परिवहन की 2 बसें लापता हैं। सुबह से हालात पर नजर रख रहे फडणवीस ने कहा कि, 'वहां दो समानांतर पुल थे। इनमें से एक पुल नया था जबकि दूसरा अंग्रेजों के जमाना का था। पुराना वाला पुल टूटा है।' नदी में समाई बसों और अन्य वाहनों में कितने लोग सवार थे, इसकी अभी जानकारी नहीं है। लापता लोगों की तादाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे की जानकारी ली और राज्य सरकार को मदद की पेशकश की। फडणवीस ने बताया, 'प्रधानमंत्री ने बचाव और राहत अभियान में हर संभव सहायता की पेशकश की है।'
उन्होंने ट्वीट कर बताया कि राष्ट्रीय आपदा राहत बल सक्रिय हो चुका है। तटरक्षक बल का चेतक हेलिकॉप्टर पुल पर से बह गए लोगों की खोज में जुटा है। घटना के तुरंत बाद रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुवेज हक और जिलाधिकारी ने घटनास्थल दौरा किया। अंधेरा होने के कारण बचाव अभियान बाधित हो गए थे। आज सुबह बचाव अभियान फिर से शुरू कर दिया गया।

कुछ यूं बह गया पुल
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना रात साढ़े 12 बजे घटी। मुंबई-गोवा हाइवे पर महाड टोल नाका के पास राजेवाडी फाटा के नजदीक सावित्री नदी पर बना पुल अचानक भरभरा कर गिर गया। इससे पुल से गुजर रही गाड़ियां नीचे उफनती सावित्री नदी में जा गिरीं। खेड से महाड जा रही राज्य परिवहन की दो बसें भी लापता बताई जा रही हैं। घटनास्थल स्थल पर बचाव दल पहुंच गया है। भारी बारिश के कारण बचाव कार्य में मुश्किल आ रही है। बताया जा रहा है कि सावित्री नदी में भारी बाढ़ के कारण यह पुल बहा है।

पुल का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया
रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) सुवेज हक ने कहा, 'राहत और बचाव कार्य जारी है। अभी किसी के हताहत होने के बारे में टिप्पणी नहीं की जा सकती।' उन्होंने कहा कि पुणे से NDRF की टीम रवाना हो चुकी है। NDRF के DG ने कहा कि राहत कार्यों के लिए 50 लोगों की एक टीम भेजी गई हैं।

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

मध्यभारत की सबसे बड़ी कांवड़यात्रा 30 जुलाई से


कर्मश्री  कांवड़यात्रा का लगातार 9 वां वर्ष

7 हजार से अधिक कांवड़िए होंगे शामिल

भोपाल। राजधानी कमध्यभारत की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा 30 से

- ‘कर्मश्री’ द्वारा कांवड Þयात्रा का 9वां वर्ष

- सात हजार से अधिक कांवड़िये होंगे शामिल

 
शहर प्रतिनिधि, भोपाल
राजधानी की प्रतिष्ठित संस्था ‘कर्मश्री’ के तत्वावधान में प्रतिवर्ष श्रावण मास में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा इस बार 30 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित की जाएगी। कांवड़ यात्रा के संयोजक हुजूर विधायक एवं कर्मश्री के अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने बुधवार को पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा 30 जुलाई को  सुबह 7 बजे होशंगाबाद के सेठानी घाट से शुरू होगी। यहां से कांवड़िए अपनी कांवड़ में नर्मदा जल भरकर भोपाल की ओर रवाना होंगे तथा  तीन दिन में 111 किमी पैदल चलकर भोपाल में लालघाटी स्थित गुफा मंदिर पहुंचेंगे। गुफा मंदिर में श्रावण सोमवार 1 अगस्त को कांवड़ केजल से भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया जाएगा। श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़ यात्रा आरंभ करने से पहले 29 जुलाई को शाम 7 बजे सेठानी घाट होशंगाबाद पर नर्मदा मैया की पूजन-आरती की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि कर्मश्री की कांवड़ यात्रा का यह लगातार 9वां वर्ष है।  उन्होंने बताया कि इस यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों स्थानों से आए 7 हजार से अधिक कांवड़िये शामिल होंगे। 
 
प्रकृति और धर्म के प्रति सबकी जिम्मेदारी: 
कांवड़ यात्रा का महत्व समझाते हुए संस्था अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को सब कुछ दिया है। हम सभी प्रकृति के ऋणी हैं। कांवड़ यात्रा प्रकृति की, सृष्टि की आराधना का उत्सव है। इसमें भागीदारी कर हम प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। इसी प्रकार धर्म ही हमारा जीवन है, धर्म के बिना हमारा जीवन कुछ भी नहीं है। ‘धर्मो रक्षति रक्षित:’अर्थात जो धर्म के रक्षार्थ कार्य करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से हम पवित्र श्रावणमास में भगवान शिव के आशुतोष स्वरूप का पूजन करते हैं। शिव सृष्टि के देवता है और कांवड़ यात्रा सृष्टि की आराधना का पर्व है। अत: हर व्यक्ति को कांवड़ यात्रा में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यथासंभव भाग लेना चाहिए। 
 
111 किमी पदयात्रा में तीन पड़ाव :
श्री शर्मा ने बताया कि तीन दिवसीय इस पूरी यात्रा में कांवड़िये 111 किमी पैदल चलकर कांवड़यात्रा पूर्ण करेंगे। यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले 29 जुलाई शाम को  कांवड़िये होशंगाबाद पहुंच जाएंगे। अगले दिन 30 जुलाई को सुबह 7 बजे सेठानी घाट से कांवड़ यात्रा की विधिवत शुरुआत होगी। इसी दिन मुख्य मार्ग से होते हुए यात्रा पूर्वान्ह 11 बजे बुदनी पहुंचेगी,जहां दोपहर भोजन के बाद शाम को बरखेड़ा पहुंचेगी। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 31 जुलाई को मंडीदीप में यात्रियों का पड़ाव रहेगा। इसके बाद अगले दिन 1 अगस्त को यहां से यात्रा सुबह 7 बजे आरंभ होगी और बैरागढ़ चीचली के रास्ते भोपाल में प्रवेश करेगी। कोलार के गेहूंखेड़ा, नयापुरा, ललितानगर, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा होते हुए बीजेपी आॅफिस,  प्रगति पेट्रोल पंप, अंबेडकर चौराहा, पयार्वास भवन, जेल पहाड़ी, राजभवन, रविंद्र भवन, पॉलीटेक्निक चौराहा, रॉयल मार्केट से लालघाटी होते हुए शाम 5 बजे गुफा मंदिर पहुंचेगी, जहां सभी कावंड़ियों द्वारा कांवड़ में लाए गए नर्मदा जल से शिव का अभिषेक किया जाएगा।

संतनगर में निकलेगी चुनरी यात्रा :
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा के लिए होशंगाबाद रवाना होने के पूर्व आयोजक संस्था द्वारा संतनगर में चुनरी यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि चुनरी यात्रा 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे संतनगर में सीहोर नाका बीआरटीएस से शुरू होकर संत हिरदाराम जी की कुटिया पर पहुंचेगी। इस यात्रा में शामिल 7 हजार  श्रद्धालु मां नर्मदा को चढ़ाने वाली चुनरी को संतनगर रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे, जहां से वे होशंगाबाद रवाना होंगे। श्री शर्मा ने बताया कि चुनरी यात्रा में पूजन की गई चुनरी होशंगाबाद में कांवड़ यात्रा आरंभ होने के पूर्व सेठानी घाट पर मां नर्मदा को समर्पित की जाएगी। 
 
 प्रतिष्ठित संस्था कर्मश्री के तत्वावधान में प्रतिवर्ष श्रावण मास में निकाली जाने वाली कांवड़यात्रा इस बार 30 जुलाई से 1 अगस्त तक निकाली जाएगी। कांवड़यात्रा के संयोजक-हुजूर विधायक एवं ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण अध्यक्ष रामेष्वर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार की कांवड़यात्रा 30 जुलाई को अलसुबह 7 बजे होषंगाबाद के प्रसिद्ध सेठानी घाट से शुरू होगी। यहां से कांवड़िए अपनी कांवड़ में नर्मदा जल भरकर भोपाल की ओर रवाना होंगे। कांधों पर आस्था की कांवड़ उठाए कांवड़िए तीन दिनों में होषंगाबाद से 111 किमी पैदल चलकर भोपाल में लालघाटी स्थित गुफा मंदिर पहुंचेंगे। गुफा मंदिर में श्रावण सोमवार 1 अगस्त को कांवड़जल से भगवान आषुतोष का जलाभिषेक किया जाएगा। श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा आरंभ करने के पूर्व 29 जुलाई शुक्रवार को सांय 7 बजे सेठानी घाट होशंगाबाद पर नर्मदा मैया की पूजन-आरती की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण की कांवड़यात्रा का यह लगातार 9 वां वर्ष है। कांवड़यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों स्थानों से आए 7 हजार से अधिक कांवड़िए शामिल होंगे। कांवड़ियों के पंजीयन का कार्य लगातार चल रहा है, कांवड़यात्रा शुरू होने तक यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
 
प्रकृति और धर्म के प्रति सबकी जिम्मेदारी: रामेष्वर 
प्रकृति ने मनुष्य को सब कुछ दिया है। सभी मनुष्य प्रकृति के ऋणी हैं। कांवड़यात्रा प्रकृति की-सृष्टि की अराधना का उत्सव है। इसमें हमारी भागीदार से हम प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। इसी प्रकार धर्म ही हमारा जीवन है, धर्म के बिना हमारा जीवन कुछ भी नहीं है। कहा गया है कि ह्यह्यधर्मो रक्षति रक्षित:ह्णह्ण अर्थात जो धर्म के रक्षणार्थ कार्य करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। कांवड़यात्रा के माध्यम से हम पवित्र श्रावणमास में भगवान षिव के आषुतोष स्वरूप का पूजन करते हैं। शिव सृष्टि के देवता है और कांवड़ यात्रा सृष्टि की अराधना का पर्व है। कांवड़ यात्रा में शामिल कांवड़िए पवित्र नदियों का जल कांवड़ में भरकर भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए निकलते हैं तो वे भोलेनाथ  के साथ पूरी प्रकृति की अराधना कर रहे होते हैं। अत: हर व्यक्ति को कांवड़यात्रा में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से, यथासंभव बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। 



धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा की अलख जगाएंगे
कांवड़यात्रा के संयोजक विधायक रामेष्वर शर्मा ने बताया कि हर बार हम कांवड़यात्रा के माध्यम से  धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति जनजागरण के संकल्प करवाते हैं। इस बार भी पंरपरानुसार कांवड़यात्रा में शामिल कांवड़िए स्वच्छता का संदेष देते हुए चलेंगे, साथ ही बेटी-गौवंष-जल बचाओ, वृक्ष लगाओ, धर्म चेतना-राष्ट्रचेतना और नषामुक्त भारत का संदेश लेकर यात्रा करेंगे और इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लोगों को कृतसंकल्पित करने का काम करेंगे। उद्देश्यों के बारे में विस्तार से समझाते हुए उन्होंने कहा कि देष के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत का नारा दिया है। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत हो सकता है। बेटी बचाओ इसीलिए कि बेटी शक्तिस्वरूपा है, बेटी से सृष्टि का अस्तित्व है, पानी बचाओ इसीलिए क्योंकि पानी नहीं होगा तो शिव का अभिषेक कैसे होगा ? गौवंश बचाओ इसीलिए कि शिव का नंदी गौवंश से ही तो है। पेड़ लगाओ इसीलिए कि पेड़ों से ही तो शिव को अर्पित होने वाला बिल्वपत्र मिलेगा। धर्मचेतना-राष्ट्रचेतना और नषामुक्त भारत से नागरिकों में अपने धर्म और संस्कृति के प्रति प्रेम लगातार बना रहेगा और लोग भौतिकतावादी बुराईयों से दूर रह सकेंगे। उन्होनें कहा कि कांवड़यात्रा के तीन दिनों के दौरान धर्म-समाज-प्रकृति और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा की जो अलख जगेगी वह गांव-गांव तक जाएगी और पूरे समाज को जागरूक करने का काम करेगी।
 
कांवड़यात्रा का महत्व
आयोजक संस्था के अध्यक्ष एवं हुजूर विधायक रामेष्वर शर्मा ने कांवड़यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रावण शिव का महीना है। शंकर हरियाली के प्रतीक है, वे प्रकृति के देवता है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से हम शिव की अराधना तो करते ही हैं, साथ ही संपूर्ण सृष्टि का पूजन भी करते हैं। यात्रा के धार्मिक महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन में अनमोल रत्नों के साथ अमृत और विष भी निकला था। मानवता और सृष्टि की रक्षा के लिए शिव ने विष को अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से शिव का कंठ नीला पड़ गया था और वे नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवतागण शिव का गंगाजल से अभिषेक करने लगे थे। यही वजह है कि शिव भक्त दूर-दूर से कांवड़ में पवित्र नदियों का जल भरकर लाते हैं और भगवान शिव का अभिषेक कर सदैव सृष्टि की रक्षा करने और आपदाओं से रक्षा करने की कामना व्यक्त करते हैं। उन्होने बताया कि कांवड़ यात्रा धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। कांवड़ यात्रा के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की अराधना के लिए है। पानी मनुष्य के साथ-साथ पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और पृथ्वी पर निवास करने वाले लाखों-करोड़ों जीव जंतुओं और संपूर्ण पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। मनुष्य के अनियमित क्रियाकलापों की वजह से पूरी सृष्टि में पारीस्थितिक असंतुलन की स्थिती उत्पन्न हो गई है। कांवड-यात्रा के माध्यम से हम सृष्टि के देवता शिव का जलाभिषेक कर मानवीय गलतियों की क्षमा मांगते हैं और उनसे पूरी सृष्टि में अच्छे मानसून और पारीस्थितिक संतुलन बनाए रखने की कामना करते हैं। 
 
तीन पड़ाव, 111 किमी की पैदल यात्रा
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़िए यात्रा शुरू होने के एक दिन पहले ही 29 जुलाई शाम को होषंगाबाद पहुंच जाएंगे। होषंगाबाद सेठानी घाट स्थित जगदीष मंदिर सहित अन्य स्थानों पर कांवड़ियों के रूकने की व्यवस्था की गई है। इसके अगले दिन 30 जुलाई को सुबह 7 बजे सेठानी घाट से कांवड़यात्रा की विधिवत शुरूआत होगी। इसी दिन मुख्य मार्ग से होती हुई यात्रा पूर्वान्ह 11 बजे बुदनी पहुंचेगी,जहां दोपहर भोजन होगा। दोपहर भोजन उपरांत यात्रा पुन: आरंभ होगी और सांयकाल बरखेड़ा पहुंचेगी। बरखेड़ा एवं उमरिया गुरूद्वारे में कांवडियों के रात्री विश्राम एवं रात्री भोजन की व्यवस्था की गई है। अगले दिन 31 जुलाई को सुबह 7 बजे यात्रा पुन: शुरू होगी और पूर्वान्ह 11 बजे तक औबेदुल्लागंज पहुंचेगी। इस दिन दोपहर भोजन औबेदुल्लागंज में होगा। दोपहर भोजन उपरांत यात्रा पुन: आरंभ होगी और इसी दिन सांयकाल 5 बजे मंडीदीप पहुंचेगी।  इस दिन के रात्री भोजन एवं रात्री विश्राम की व्यवस्था मंडीदीप में की गई है। यहां से अगले दिन 1 अगस्त को यात्रा सुबह 7 बजे पुन: आरंभ होगी और बैरागढ़ चिचली के रास्ते भोपाल में प्रवेश करेगी। यहां से गेहूंखेड़ा, नयापुरा, ललितानगर ,शिवमंदिर, सर्वधर्म,बीमाकुंज,महाबली,मंदाकिनी, सर्वधर्म पुल, चूनाभट्टी नहर, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा, निराला भवन, एकांत पार्क,हबीबगंज नाका, विटठल मार्केट, रविशंकर मार्केट, उत्कृष्ट विद्यालय, सुभाष चैराहा, 7 नंबर,  बीजेपी आफिस, मुखर्जी चैराहा, मानसरोवर, प्रगती पेट्रोल पंप, अंबेडकर चैराहा, गुप्त चैराहा,राजेंद्र प्रसाद चैराहा, पयार्वास भवन, जेल पहाड़ी, जिला न्यायालय, पीएचक्यू, शास्त्री चैराहा, राजभवन, केएन प्रधान चैराहा, रविंद्र भवन, पॉलीटेक्निक चैराहा, स्वर्णकार चैराहा, रॉयल मार्केट, लालघाटी आदि मार्गों से होती हुई अपरान्ह लगभग 5 बजे गुफा मंदिर पहुंचेगी जहां यात्रा में शामिल सभी कावंडियों द्वारा कांवड़ में लाए गए नर्मदा जल से शिव का अभिषेक किया जाएगा। उन्होने बताया कि इस पूरी यात्रा मे तीन दिनों के दौरान कांवड़िए 111 किमी पैदल चलकर कांवड़यात्रा पूर्ण करेंगे।

संतनगर में लगातार तीसरे वर्ष निकलेगी चुनरीयात्रा
नर्मदा मैया को समर्पित होगी यह चुनरी
श्री शर्मा ने बताया कि कांवड़यात्रा हेतु होषंगाबाद रवाना होने के पूर्व आयोजक संस्था ह्यह्यकर्मश्रीह्णह्ण द्वारा संतनगर में चुनरी यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि चुनरी यात्रा 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे संतनगर में सिहोर नाका बीआरटीएस से शुरू होकर संत हिरदाराम जी की कुटिया पर पहुंचेगी । इस यात्रा में शामिल 7000 श्रद्धालु माँ नर्मदा को चढ़ाने वाली चुनरी को संतनगर रेलवे स्टेषन पहुंचेंगे जहां से सभी कांवड़िए होषंगाबाद रवाना होंगे। श्री शर्मा ने बताया कि चुनरी यात्रा में पूजन की गई चुनरी होषंगाबाद में 30 जुलाई की सुबह कांवड़यात्रा आरंभ होने के पूर्व सेठानी घाट पर माँ नर्मदा को समर्पित की जाएगी। उन्होने संतनगर के निवासियों सहित सभी कांवड़ियों से अधिकाधिक संख्या में चुनरी यात्रा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है। उन्होने कहा कि जो लोग संतनगर में चुनरी पूजन में शामिल होंगे उन्हें भी माँ नर्मदा के प्रत्यक्ष पूजन के तुल्य ही पुण्य मिलेगा । संत नगर के विभिन्न व्यापारिक , सामाजिक, सांस्कृतिक , विभिन्न संस्थानों , शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लगभग 51 जगह स्वागत किया जायेगा ।