शनिवार, 14 नवंबर 2015

जिला सहकारी संघ में शुरू हुआ सहकारिता सप्ताह

 
बीएल मारण
दबंग रिपोर्टर, भोपाल
जिला सहकारी संघ कार्यालय में शनिवार को 62वां अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह शुरू हुआ।  इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में एड. संतोष मीना ने दीप प्रज्ज्वलित कर सप्ताह का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आज के सहकारिता सम्मेलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री के मार्गदर्शी सिद्धांत सहकारिता के माध्यम से ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर किया गया है। इसे अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह का वृहद रूप देकर सहकारिता के विकास में निरंतर और अपेक्षित सहयोग करना हम सभी का दायित्व है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संघ के अध्यक्ष राजीव गुलाटी ने कहा कि सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाकर जनमानस में सहकारिता के प्रति जागरूकता लाई जाए। इससे संघ को भी और सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। संघ के प्रबंधक विष्णुप्रसाद मीना ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सप्ताह के दौरान मेक इन इंडिया के तहत कौशल विकास एवं रोजगार, सहकारिता के लिए अनुकूल कानून बनाना, स्वच्छ भारत अभियान में सहकारिता की भूमिका, सहकारिताओं के बीच सहकारिता को सुदृढ़ करना, सहकारी विपणन, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन, सहकारिताओं के माध्यम से आपदा निवारण तथा वित्तीय समावेशन एवं सहकारिता आदि विषयों पर विस्तार से कार्यक्रम और चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य रूप से संघ के उपाध्यक्ष हरगोविंद मारण तथा मेहरबानसिंह गुर्जर सहित अजब सिंह, सुरेश मीना, रजनसिंह सोलंकी, छाया सैनी, ताराचंद मारण, नारायणसिंह मीना देहरी, कमलसिंह जाट, मकसूद अहमद, एड. रेखा सिंह, राकेश बाजपेयी तथा मदन हरचंदानी आदि मौजूद थे।
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भेल की स्थापना की पं. नेहरू ने दी विकास की दिशा : त्रिपाठी


 - इंटक कार्यालय में श्रद्धा से मनी चाचा नेहरू की 126वीं जयंती

दबंग रिपोर्टर, भोपाल 

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की जयंती शनिवार को भेल के इंटक कार्यालय में भी मनाई गई। इस अवसर पर पं. नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए इंटक अध्यक्ष आरडी त्रिपाठी ने कहा कि भेल कारखाने की स्थापना में उनकी महती भूमिका थी। उन्होंने वर्ष 1956 में प्रदेश की स्थापना के साथ ही भोपाल में भेल कारखाने की स्थापना करके भोपाल सहित मध्यप्रदेश और देश की आर्थिक सुदृढ़ता में बहुत बड़ा योगदान किया है। इस अवसर पर इंटक के कोषाध्यक्ष राजेश शुक्ला,  युवा सचिव दीपक गुप्ता सहित चंद्रप्रकाश साहू, कमलेश सिंह, रणजीत सिंह, आरके हुरडे, वीएस राठौर, धर्मेंद्र त्रिपाठी, अनु तिवारी, सतेंद्र शर्मा तथा अन्य पदाधिकारियों ने पं. नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण किया।

दीपावली की पूर्व संध्या पर सब्जी विक्रेताओं पर प्रशासन की बर्बरता


- गुस्साए व्यापारियों ने लगाए ‘विधायक मुर्दाबाद’ के नारे

दबंग रिपोर्टर, भोपाल

नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों पर सत्ता का नशा इस कदर हावी है कि वे सभी मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर गरीबों के बर्बरता पर उतारू हो जाते हैं। इसका एक नजारा दीपावली की पूर्वसंध्या पर बैरसिया में उस समय दिखा, जब त्यौहार मनाने के लिए दो पैसे कमाने सब्जी-भाजी बेचने आए गरीब किसानों को प्रशासन की तानशाही कार्रवाई का शिकार होना पड़ा।  उनका कसूर इतना था कि उनके ठेलों के बीच एसडीएम का वाहन फंस गया था। जी हां, दीपावली के एक दिन पहले मंगलवार को बैरसिया में प्रशासन का अलग ही रूप देखने को मिला। अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन के एकाधिकार प्राप्त अधिकारी एसडीएम ने इन सब्जी बेचने वाले किसानों की दीपावली काली ही कर दी गई। गौरतलब है कि बैरसिया बस स्टैंड चौराहा और उसके आसपास कई साल से सब्जी विक्रेता किसान सब्जी बेचकर अपना जीवन-यापन करते हैं। मंगलवार दोपहर में अचानक प्रशासन को पता नहीं क्या सूझी कि बिना सूचना दिए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर सब्जी के ठेले पलट दिएज्ञ इतना ही नहीं, सब्जी विक्रेताओं पर पुलिस ने जमकर लाठियां भी बरसाई, जिससे दो-तीन किसानों को चोट भी आई। इसके बाद उन्हें थाने में ठेलों सहित बैठा लिया। हालांकि बाद में छोड़ दिया गया। सूत्रों की मानें तो लगभग तीन घंटे तक सब्जी विक्रेता किसानों और प्रशासन के बीच विवाद और झूमा-झटकी चली। इस अफरा-तफरी के माहौल में आक्रोशित सब्जी विक्रेताओं ने क्षेत्रीय विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष के जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए। 

खोखला निकला विधायक का आश्वासन :

सब्जी विक्रेता मोहरसिंह कुशवाह ने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक प्रत्याशी विष्णु खत्री ने हमें आश्वासन दिया था कि विधायक बनने पर मैं आप सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं के लिए सर्वसुविधायुक्त मंडी का निर्माण करवाकर दूंगा। वह विधायक तो बन गए, लेकिन आज तक उन्होंने इस मामले मेंं कोई ठोस कदम नही उठाया। 

किसानों की हालत खराब : 

इन दिनों थोक सब्जी विक्रेताओं द्वारा अदालत के पास वाले मैदान में नीलमी की जाती है। यहां अव्यवस्थाओं के चलते किसानों की हालत ख़राब है। धूल के कारण ताजी हरी सब्जी भी कुछ ही देर में खराब हो जाती है। गंदगी के चलते विक्रेताओं का नीलमी में बोली लगाना भी दूभर हो जाता है। इसी तरह फुटकर विक्रेताओं की भी विधायक द्धारा कोई व्यवस्था नहीं कराई गयी। उन्होंने बताया कि उधर नगरपालिका द्धारा भी पांच रुपए की जगह दस रुपए की अवैध वसूली भी इन फुटकर विक्रेताओं से की जाती है।

इनका कहना है : 

बैरसिया में सब्जी विक्रेताओं को किसी भी तरह की कोई उचित सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है। जो अदालत के पास इनके लिए जगह आवंटित है। उसकी हालत बेहद खराब है। टूटे-फूटे चबूतरे, बिना चादर के जर्जर शेड, नालियों से बहता हुआ गंदा पानी, बदबू और गंदगी साथ में आवारा मवेशी इन सबके बीच में इनको नीलाम बोली लगानी पड़ती है। सवाल यह उठता है कि एक तो सब्जी विक्रेताओं के लिए कोई सुविधा नहीं, ऊपर से अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन की निगरानी में इनकी बर्बरतापूर्ण पिटाई और सब्जी के ठेले पलटाकर किया गया भारी नुकसान। प्रशासन और नेताओं को क्या यह शोभा देता है? मैं शासन-प्रशासन के इस कृत्य की घोर निंदा करता हूं।
- रामभाई मेहर, कांग्रेस नेता 
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बीएल मारण

आहरण-संवितरण अधिकारियों को लॉगिन पासवर्ड बदलने के निर्देश


दबंग रिपोर्टर, भोपाल
जिला कोषालय अधिकारी ने जिले के सभी आहरण-संवितरण अधिकारियों से कहा है कि वे कोषालय द्वारा प्रदाय किए ई-मेल आईडी एवं पासवार्ड को वेबसाइट ँ३३स्र://ें्र’.ेस्र३१ीं२४१८.ॅङ्म५.्रल्ल/ङ्म६ं पर जाकर अपना लॉगिन व पासवर्ड बदल दें। यदि उन्हें कोषालय से ई-मेल लॉगिन व पासवर्ड प्राप्त नहीं हुआ है तो शीघ्र प्राप्त कर लें। इसके अलावा सभी आहरण-संवितरण अधिकारियो से यह भी कहा गया है कि वे आईएफएमआईएस साफ्टवेयर में बजट की जानकारी पूर्ण कर तत्काल प्रमाण पत्र कोषालय में जमा कराएं।

पोर्टल पर उपलब्ध है महत्वपूर्ण अधिनियम व नियमों की जानकारी


भोपाल। केन्द्र व राज्य के महत्वपूर्ण अधिनियम, अधिनियमों के आधार पर बनाए गए नियम व संशोधन आदि जानकारी एमपी कोड के पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। यह जानकारी विधिक क्षेत्र से जुड़े नागरिकों और   आम आदमी को पोर्टल के माध्यम से आसानी से उपलब्ध होगी। इस वेबसाइट पर राज्य में लागू किसी भी कानून अथवा उसके अंश का अवलोकन भी किया जा सकता है। यह जानकारी वेबसाइट ँ३३स्र://ूङ्मीि-ेस्र-ॅङ्म५-्रल्ल के मुख्य पृष्ठ पर वांछित शीर्षक पर क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है। 

सभी पात्र छात्र-छात्राओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के निर्देश


भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक जिले में फोटो मतदाता सूची संबंधी 2 नवंबर से चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य के तहत एक जनवरी 2016 को 18 वर्ष पूरे करने वाले शत-प्रतिशत स्कूली और महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही प्राचार्यों को इस आशय का प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके संस्थान में एक जनवरी 2016 को 18 वर्ष पूरे करने जा रहे किसी भी छात्र-छात्रा का नाम मतदाता सूची में शामिल करने भेजी गई सूची से नहीं छूटा है।

. इज्तिमा की तैयारियों पर एडीएम नाराज


- अधिकारियों को लगाई फटकार, कहा- लापरवाही नहीं चलेगी

दबंग रिपोर्टर, भोपाल

Ñर्इंटखेड़ी में 28 से 30 नवंबर तक लगने वाले 68वें सालाना तब्लीगी इज्तिमा की तैयारियों में बरती जा रही लापरवाही पर मंगलवार को एडीएम बीएस जामोद भड़क उठे। उन्होंने इस्लाम नगर की मुख्य सड़क के एक नाले पर बनाई जा रही पुलिया के काम में लेटलतीफी पर खासी नाराजगी जताई।  श्री जामोद ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारी से साफ कहा कि ऐसे काम नहीं चलेगा। यह कार्य तीन दिन के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने तत्काल ठेकेदार अशफाक को भी बुलाया और जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि यदि वह काम नहीं कर सकते हों तो बताएं, दूसरे से काम करा लिया जाए। इस फटकार का असर यह रहा कि ठेकेदार ने दोपहर में ही पुलिया निर्माण का काम शुरू कर दिया। गौरतलब है कि एडीएम बीएस जामोद व एसपी अरविंद सक्सेना मंगलवार को तब्लीगी इज्तिमा की तैयारियों का जायजा लेने मौका स्थल पहुंचे थे। यहां उन्होंने देखा कि नगर निगम और पीडब्ल्यूडी का काम अब भी काफी पिछड़ा हुआ है। नाले पर पुलिया का काम अब तक चालू न होने पर पहले तो उन्होंने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री अनंतसिंह रघुवंशी पर नाराजगी जताई। इसके बाद ठेकेदार को बुलाकर हिदायत दी कि वह तीन दिन के भीतर यह कार्य करे। उधर सड़कों के गड्ढे नहीं भरे जाने पर कार्यपालन यंत्री ने बीस नवंबर तक काम पूरा होने की बात कही है। मालूम हो कि इज्तिमा के दौरान इस बार 45 एकड़ में पांडाल लगाया जाएगा। दस एकड़ का पांडाल इस बार बढ़ाया गया है, जिसकी वजह से नाले पर तीन पुलियों का निर्माण किया गया है। इससे भीड़ को निकलने में आसानी होगी। एडीएम ने नगर निगम अधिकारियों की भी जमकर क्लास ली। उन्होंने निर्देशित किया कि वे पानी की टंकियां रखने में लेटलतीफी न करें। हर हाल में 20 नवंबर तक सभी टंकियां निर्धारित स्थान तक पहुंचा दी जाएं।
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बीएल मारण

2. निरीक्षकों की पदोन्नति को नहीं मिली सीएम की मंजूरी


- विभागीय प्रमोशन में लग सकता है और भी समय 

बीएल मारण, भोपाल

प्रदेश में उप पुलिस अधीक्षकों के सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने वाले पदों को विभागीय पदोन्नित द्वारा भरने में अभी और देरी हो सकती है। दरअसल इस संबंध में पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव को अब तक भी अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री तक नहीं भेजा जा सका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक राज्य में उप पुलिस अधीक्षकों के 250 से अधिक पद रिक्त हैं और इसीलिए पुलिस विभाग ने इन पदों को विभागीय पदोन्नति से भरने की मंजूरी तीन माह पहले ही कैबिनेट से ली थी। सूत्र बताते हैं कि पुलिस मुख्यालय से लगभग 225 निरीक्षकों को डीएसपी बनाने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है, जहां यह गृहमंत्री के पास और फिर मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। उधर गृह मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सभी रिक्त पदों के विरुद्ध पदोन्नति संभव नहीं होगी, बल्कि पात्र अफसरों की संख्या कम होने से इन पदों को दो या तीन किश्तों में भरा जाएगा। ऐसी भी विभाग में चर्चा है कि राज्य शासन सभी डीएसपी को मैदानी पद नहीं देगा, बल्कि इन्हें क्रमश: मैदानी जिम्मेदारी दी जाएगी। 

कहां से लाएं निरीक्षक : 

विभागीय पदोन्नति से भरे जाने वाले इन पदों को लेकर सरकार की मुश्किल यह भी है कि निरीक्षकों को पदोन्नत करने के बाद कई थानों में निरीक्षकों के पद रिक्त हो जाएंगे। सूत्रों के अनुसार अकेले भोपाल जिले में ही आठ निरीक्षकों को विभागीय पदोन्नति मिलने वाली है। इसी तरह अन्य शहरों और जिलों में भी यही स्थिति होगी। उधर सिंहस्थ के मद्देनजर समुचित सुरक्षा इंतजामों के लिए मैदानी अफसरों की जरूरत देखते हुए भी पुलिस मुख्यालय व गृह विभाग निरीक्षकों की पदोन्नति के बाद आने वाली समस्या का भी हल खोज रहा है। इसके लिए उप निरीक्षकों को पदोन्नत करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बताया जाता है कि फिलहाल 75 उप निरीक्षक ही पदोन्नत के पात्र मिल पा रहे हैं।

1. 80 लाख प्रॉफिट था, अब एक करोड़ का ओवर ड्यू


- निरंतर पतन की ओर अग्रसर भेल को-आॅपरेटिव सोसाइटी 

- सदस्य कर्मचारियों को सता रही संस्था के डूबने की चिंता

बीएल मारण, भेल

एक समय था, जब बीएचईएल के कर्मचारियों द्वारा कर्मचारियों के लिए ही गठित की सहकारी संस्था बीएचईई को-आॅपरेटिव सोसाइटी लगभग 80 लाख रुपए से भी अधिक का व्यवसाय कर रही थी, लेकिन वर्तमान में यह स्थिति है कि संस्था निरंतर घाटे की ओर अग्रसर है। इतना ही नहीं, संस्था की इस हालत के लिए सोसाइटी में पदस्थ सहकारिता विभाग द्वारा नियुक्त प्रशासक को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सोसाइटी के सदस्य भेलकर्मियों का कहना है कि यहां जब से अध्यक्ष को हटाकर प्रशासक की नियुक्ति की गई है, तभी से संस्था नुकसान की गिनती शुरू हो गई है। उनका मानना है कि प्रशासक के नेतृत्व में संस्था का सुचारु संचालन होना तो दूर की बात, उल्टे सदस्यों को सामग्री सहित अन्य सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। इसके अलावा संस्था के कर्मचारियों में भी वेतन, भत्ते और संस्था की ओर से मिलने वाली सुविधाओं में भी भारी कटौती किए जाने से आक्रोश पनपने लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि कुछ लोगों के आपसी मतभेद और स्वार्थपरक कारणों के चलते न केवल सदस्यों और कर्मचारियों को शोषण की चक्की में पिसना पड़ रहा है, बल्कि संस्था भी करोड़ों के घाटे में पहुंच गई है। गौरतलब है कि भेल कर्मियों तथा कारखाने के भीतर दाल, चावल से लेकर कुकिंग गैस और अन्य विभिन्न प्रकार की रोजमर्रा की उपभोक्ता सामग्री कराने के उद्देश्य से प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की इस सहकारी संस्था का गठन किया था। सोसाइटी के संचालन को लेकर प्रजातांत्रिक चुनाव प्रक्रिया से संचालक मंडल का गठन किया जाता है, जबकि संस्था के मुखिया (अध्यक्ष) का जिम्मा प्रबंधन की ओर से जीएम(एचआर) को ही सौंपा जाता है। विडंबना यह है कि लगभग चार महीने पहले गड़बड़ी की शिकायतों के चलते प्रबंधन ने अध्यक्ष को वापस बुलाया, वहीं चुनाव और आॅडिट के नाम पर संस्था का कारोबार सहकारिता रजिस्ट्रार के हाथों में सौंप दिया गया है। 

सचिव पर आरोप लगाकर किया बाहर :

भेल कर्मचारी तथा सोसाइटी के सदस्य सीआर नामदेव का कहना है कि प्रशासक की नियुक्ति से पहले यहां के कर्मचारियों को नियमित वेतन भत्ते और सभी मूलभूत सुविधाएं मिल रही थीं, लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों की साजिश के चलते जहां प्रबंधन ने जीएम चार को संस्था के अध्यक्ष पद से वापस लिया, वहीं संस्था सचिव को कतिपय आरोप लगाकर बाहर कर दिया गया। उसके बाद अध्यक्ष के स्थान पर प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई, जिन्होंने कर्मचारियों और सदस्यों के हितों को ताक में रखकर संस्था का संचालन किया।  फलस्वरूप आज संस्था करीब एक करोड़ के घाटे में चल रही है। हालांकि प्रशासक की नियुक्ति से पहले लाखों रुपए के लाभ के आंकड़े संस्था की प्रगति को दर्शा रहे थे। 

साजिश का आरोप :

सीआर नामदेव सहित करीब एक दर्जन सदस्यों ने सचिव अनिल गौर को हटाने की कार्यवाही को साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के आपसी मतभेद के कारण वर्तमान समय में को-आॅपरेटिव सोसाइटी का संचालन सहकारिता उपायुक्त के निर्देशन में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आॅडिट के नाम पर सोसाइटी की बागडोर रजिस्ट्रार ने अपने हाथों में ली है, लेकिन इनके आते ही पुरानी फाइलों के पन्ने पलटने शुरू हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने सोसाइटी के संचालन में गड़बड़ी होने की शिकायत की थी, उन्हें शायद उम्मीद थी कि कोई घोटाला सामने आएगा और अगर नहीं आया तो भी वर्तमान संचालन समिति की इमेज तो खराब हो ही जाएगी। हालांकि इसका खामियाजा भी उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। उधर समिति के सचिव अनिल गौर इन सबसे बेपरवाह नजर आ रहे हैं। दरअसल उन्होंने संस्था का पहले ही गवर्नमेंट संस्था से विधिवत आॅडिट करा लिया है। ऐसे में अगर कोई अंतर आता भी है तो उसका जवाब सरकारी आॅडिटर देगा।

रसोई गैस को तरसे लोग : 

संस्था की वर्तमान कार्यप्रणाली से असंतुष्ट कई भेलकर्मियों ने कहा कि प्रशासक की नियुक्ति से फायदा किसका हुआ ये तो नहीं पता, लेकिन सभी सदस्य कर्मचारियों का नुकसान जरूर हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले जहां रसोई गैस की डिलेवरी टाइम पर होती थी, वहीं आज यह व्यवस्था मनमानी की शिकार हो गई। अब कभी सात  दिन में गैस सिलेंडर आ जाता है तो कभी एक-एक महीना भी लग जाता है। इसी तरह जिन कर्मचारियों ने पहले कनेक्शन नहीं लिए थे, उन्हें अब नए कनेक्शन देने में भी आना-कानी की जा रही है। गैस एजेंसी के कर्मियों के अनुसार नए बिलों पर जल्दी साइन नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि आज भेलकर्मी अपनी ही संस्था में रसोई गैस को तरस गए हैं। सदस्य सीआर नामदेव ने बताया कि रजिस्ट्रार के आने से पहले सोसाइटी वर्ष-2015 में 80 लाख रुपए के प्रॉफिट में थी, लेकिन रजिस्ट्रार के आने के बाद से अब एक करोड़ रुपए का ओवर ड्यू हो गया है। जबकि वर्ष-2005 में यही सोसाइटी मात्र पांच लाख रुपए के लाभ में थी। 

भेल प्रबंधन की खामोशी पर सवाल: 

उधर भेल की अधीनस्थ संस्था में कर्मचारियों की उपेक्षा और संस्था सदस्यों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन की खामोशी पर भी सवाल उठने लगे   हैं। लोगों का कहना है कि जब परिवार(भेल) के मुखिया (ईडी) ही इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं तो फिर न्याय और व्यवस्था की आस भी किससे करें? हालांकि संस्था संचालक मंडल के सदस्य इस दिशा में शीघ्र ही ठोस और सक्रिय कदम उठाने का मन बना रहे हैं।
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शनिवार, 7 नवंबर 2015

पंचायत सचिव संगठन में नियुक्तियों का दौर


दबंग रिपोर्टर, भोपाल
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के कर्णधार कहलाने वाले ग्राम पंचायत सचिव स्तर के कर्मचारियों का संगठन तहसील, जिला और प्रदेश स्तर पर भी मजबूत और सक्रियता की ओर तेजी से अग्रसर है। इतना ही नहीं संगठन में नवीन नियुक्तियों का दौर भी जारी है। इसी कड़ी में मप्र सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने गत दिवस बरखेड़ा सालम पंचायत मुख्यालय पर संगठन की आवश्यक बैठक ली।  बैठक में संगठन के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की। इसमें सचिव ओमप्रकाश शर्मा, परमसिंह मारण और गुलाब मेहरा को संगठन में प्रदेश संगठन मंत्री जैसे जिम्मेदार पद का दायित्व सौंपा गया। बैठक में इन नियुक्तियों की जानकारी देते हुए संगठन के प्रदेश प्रवक्ता दशरथ वैष्णव सहित सतीश नामदेव, घनश्याम मेवाड़ा, ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद यादव, राहुल रजक, अंतिम साहू, मंशाराम पाल, वीरेंद्र यादव, महेंद्र तिवारी, अर्जुनसिंह लवाना, अनारसिंह वर्मा, दिलीप जाट, तिलकसिंह ठाकुर, राजेश तिलक, मंसूर भाई, बूजमोहन शर्मा, पर्वत भारती आदि ने नवनियुक्त तीनों संगठन मंत्रियों को बधाई दी, साथ ही प्रदेश अध्यक्ष का आभार मानते हुए संगठन की सुदृढ़ता पर प्रसन्नता व्यक्त की। 

बुधवार, 4 नवंबर 2015

ईवेजंलिकल लूथरन चर्च के काउंसिल मेम्बर बने अनिल मार्टिन



भोपाल। ईवेजंलिकल लूथरन चर्च सिनड सभा-2015 के वार्षिक अधिवेशन में चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मेलन छिंदवाड़ा में विगत दिनों सम्पन्न हुआ।
जिसमें सेंट जॉन्स चर्च के पास्टर इन चीफ रेव्ह डॉ. अनिल मार्टिन को सर्वसम्मति से आगामी तीन वर्ष के लिए सभासद (काउंसिल मेम्बर) चुना गया। सेंट जॉन्स इवेंजलिकल लूथरन चर्च गोविंदपुरा के युवा सचिव अमन मार्टिन ने बताया कि 1 नवंबर को स्वीडन देश के प्रतिनिधि रेव्ह स्टीफन होमस्टांग, अमेरिका से बिशप इशिदा फ्रेकलीन, इम्मेनुएल पंचू और मप्र, छत्तीसगढ़ , चेन्नई, महाराष्ट्र, कोलकाता से प्रतिनिधि का चयन किया गया इसमें रेव्ह डॉ. अनिल मार्टिन को सर्वसम्मति से काउंसिल मेंबर के रूप में चुना गया। अनिल मार्टिन के मेम्बर बनने पर सालोमन प्रसाद बाबू, राइट रेव्ह. ई. पंचू, जीटी विश्वास, रेव्ह. एसपी दास, रेव्ह तिमोथी वानखेड़े, रेव्ह बिशप रार्बट अली, रेव्ह एसके सुक्का, रजनी रावत ने बधाई दी है।

पुष्य नक्षत्र में 55 करोड़ का कारोबार


-दोपहर बाद उमड़ा खरीददारों का सैलाब

-दुकानदारों एवं कारोबारियों के चेहरे खिले

-बुधवार को भी रहा बाजारों में मंगल

भोपाल। खरीददारी के महायोग पुष्य नक्षत्र के दौरान राजधानी के बाजारों में खरीददारों क ा सैलाब दूसरे तीसरे भी उमड़ पड़ा। बुधवार को अधिकांश बाजार बंद रहते हैं,लेकिन खरीददारी के महायोग के चलते मंगलवार को भी शहर के सभी छोटे-बड़े बाजार गुलजार रहे। पुष्य नक्षत्र के बाद भी को भी जमकर खरीददारी हुई, जिससे 55 करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार हुआ।
मंगलवार को अपने घरों में आराम करने वाले दुकानदार पुष्य नक्षत्र के महायोग में ग्राहकों से घिरे हुए नजर आए। यहां बता दें कि मंगलवार को आमदिनों में शहर का बाजार बंद रहते हैं। दोपहर बाद शहर के बाजारों में भीड़ बढऩा शुरू हुई और शाम ढलने के बाद बाजारों में पैर रखने की भी जगह नहीं थी, जिससे राहगीरों को आवागमन में भले ही थोड़ी समस्या हुई, लेकिन कारोबारियों के चेहरे खिले हुए थे। सराफा, इलेट्रोनिक्स, ऑटोमोबाइल, कपड़े के साथ ठंडे पड़े रीयल स्टेट के कारोबार में भी इस दौरान बूम देखने को मिला।

सराफा में 8 करोड़ का कारोबार
सोना-चांदी का खरीदना सदियों से सुख समृद्धि और भाग्य का प्रतीक माना जाता है, जिसके चलते पुष्य नक्षत्र के दूसरे दिन भी सराफा बाजार में भारी ग्राहकी देखने को मिली। सराफा में इस दौरान 200 फीसदी अधिक खरीददारी हुई। इस दौरान एक-एक शोरूम संचालक ने  लाखों का कारोबार किया। जिसके चलते अकेला सराफा व्यवसाय ही 8 करोड़ तक जा पहुंचा। लोगों ने अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक सोने और चांदी के आभूषण खरीदे। आमजनों ने जहां सगुन के रूप में गोल्ड रिंग, चांदी के सिक्के तथा सस्ते आयटम खरीदे, वहीं धनाड्य वर्ग ने नैकलैस तथा लेटेस्ट डिजायन की च्वैलरी खरीदकर इस महायोग को यादगार बनाया।

ऑटोमोबाइल में 13 करोड़.....
गाडिय़ां खरीदने के लिए मौके की तलाश कर रहे लोगों ने जमकर दो पहिया एवं चार पहिया वाहनों की खरीददारी की। शहर भर के शोरूमों में इस दौरान 1 सैकड़ा से अधिक वाहनों की खरीददारी की गई। जिसके चलते ऑटोमोबाइल सेक्टर में 13 करोड़ के करीब कारोबार हुआ।
कपड़ा बाजार में आए 5 करोड़......
कपड़ा मार्केट आमतौर पर सस्ता मार्केट माना जाता है, लेकिन दीपावली से पूर्व हर व्यक्ति अपने परिवार के लिए नए कपड़े खरीदता है, जिसके चलते कपड़ा बाजार में जर्बदस्त बूम देखने को मिला और लगातार दूसरे दिन भी शहर में कपड़े की भारी बिक्री हुई। छोटी दुकानों से लेकर शहर के हर छोटे-बड़े शोरूमों पर खरीददारों की भीड़ रही, जिसके चलते कपड़ा बाजार में 5 करोड़ रुपए आए।

इलेक्ट्रोनिक्स में 7 करोड़.....
भौतिकता के बढ़ते प्रभाव के चलते पुष्य नक्षत्र में लेटेस्ट डिजायन एवं तकनीक के इलेट्रोनिक्स उत्पादों की भारी खरीददारी हुई। लोकप्लाजा, मनीष सेल्स जैसे शोरूमों पर खरीददारी के लिए सुबह से शाम तक भीड़ उमड़ती रही। इलेक्ट्रोनिक्स उत्पादों में टीवी, फ्रीज के साथ वशिंग मशीन, गीजर, मिक्सर, ओवन, इंडक्शन जैसे ढेरों उत्पादों की जमकर खरीददारी हुई। जिसके चलते करीब 7 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रोनिक आयटम बिके।

रीयल स्टेट में 12 करोड़ बूम
मंदी की मार झेल रहे रीयल स्टेट कारोबार में भी पुष्य नक्षत्र के दौरान हलचल देखी गई। रीयल स्टेट कंपनियों ने इस खास मौके के लिए लुभावने ऑफर दिए थे,जिसके चलते रीयल स्टेट में फ्लेट्स एवं प्लॉट की खरीददारी हुई,जिसके चलते रीयल स्टेट में भी करीब 2 करोड़ का कारोबार हुआ।

कारोबारियों के चेहरे खिले
सराफा व्यापारी संघ के अध्यक्ष जगमोहन अग्रवाल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में बाजार काफी अच्छा रहा। मंगलवार की वजह से सराफे में कुछ दुकानें नहीं खुली, अन्यथा और भी अज्छा कारोबार होता, हालांकि सभी बड़े शोरूमों पर अज्छी ग्राहकी रही। पुष्य नक्षत्र के दौरान ग्राहकी की जो अपेक्षा की गई थी, काफी हद तक पूरी हुई।
मंगलम शो रूम के संचालक ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के दौरान इलेट्रोनिक्स का कारोबार पिछले वर्ष से काफी अज्छा रहा। एलईडी, फ्रिज, वशिंग मशीन तथा सर्दी का मौसम शुरू होने से गीजर की बिक्री भी काफी रही, जिससे कारोबारियों में काफी उत्साह देखा गया। दीपावली के फेस्ट्व सीजन में अज्छे ऑफर दिए गए हैं, जिससे कारोबार अज्छा होने की उम्मीद है।

रविवार, 1 नवंबर 2015

ई-रजिस्ट्री : गड़बड़ी के चलते छह प्रोवाइडरों के लाइसेंस निरस्त



- इकट्ठे स्लॉट बुक कराना महंगा पड़ा 

 बीएल मारण
दबंग रिपोर्टर, भोपाल
जमीन-जायदाद यानि अचल संपत्ति के पंजीयन की हाईटेक व्यवस्था भले ही आम जनता के लिए सुविधाजनक है, लेकिन इसका अनुचित लाभ लेना सर्विस प्रोवाइडरों को महंगा पड़ रहा है। जी हां, शनिवार को उस समय यह स्थिति सामने आई, जब दो से तीन ई-रजिस्ट्री कराने के लिए आधा दर्जन सर्विस प्रोवाइडरों ने 10 से 19 तक स्लॉट बुक कराए। जांच में प्रोवाइडरों की यह गड़बड़ी सामने आने पर जिला पंजीयक पवन अहिरवार ने सभी छह प्रोवाइडरों के लायसेंस निरस्त कर दिए हैं। यह पहला मौका है, जब किसी सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। खास बात यह है कि जिला पंजीयक ही वह अधिकारी है, जिन्होंने पायलेट प्रोजेक्ट के तहत सीहोर में रहते हुए पहला लाइसेंस प्रोवाइडर को जारी किया था और उन्होंने ही प्रदेश में पहली बार एक साथ छह सर्विस प्रोवाइडरों के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की है। 
स्लॉट बुकिंग की जांच में मिली गड़बड़ी :
ई-रजिस्ट्री में गड़बड़ी का यह खुलासा गत एक सप्ताह में हुद स्लॉट बुकिंग की जांच में हुआ। जिला पंजीयक पवन अहिरवार के अनुसार अधिक स्लॉट बुक होने के बावजूद रजिस्ट्रियां कम हो रही थीं। इसकी जानकारी के लिए पिछले हफ्ते में सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा ई-रजिस्ट्री के लिए कराए गए स्लॉट बुकिंग की जांच की गई तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। उन्होंने बताया कि छह सर्विस प्रोवाइडर ऐसे पकड़े गए, जिन्होंने एक ही दिन में 10-10 स्लॉट की बुकिंग की थी, जबकि रजिस्ट्री केवल दो से तीन कराई। यह स्थिति सात दिन तक लगातार देखी गई। एक प्रोवाइडर ने तो इतनी हद कर दी कि उसने एक ही दिन में 19 स्लॉट बुक कराए। इसमें से केवल दो स्लॉट पर प्रोवाइडर पक्षकारों को लेकर उपस्थित हुए, जबकि अन्य खाली ही रहे। सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा इस तरह की जा रही गड़बड़ी सेवा प्रदाता नियमों का उल्लंघन है। इसके चलते सभी छह प्रोवाइडरों को फाल्स स्लॉट बुक करने का दोषी पाते हुए उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। जिला पंजीयक ने बताया कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी। 
15 मिनट का होता है एक स्लॉट : 
जिला पंजीयक ने बताया कि ई-रजिस्ट्री कराने के लिए प्रतिदिन 264 स्लॉट दिए जाते हैं, एक स्लॉट 15 मिनट का होता है। उन्होंने बताया कि दरअसल ये छह प्रोवाइडर प्रतिदिन 100 से भी अधिक स्लॉट बुक कराते थे, जिसके चलते अन्य प्रोवाइडरों को खाली स्लॉट ही नहीं मिलते थे। 
 इन प्रोवाइडरों को लाइसेंस हुए निरस्त : 
- नूरीन खान
- आशीष सिंह भदौरिया
 - दिलीप कुमार मूलचंदानी
 - राघवेंद्र सिंह पंवार
 - अनुराधा जायसवाल
 - अजय कुमार असनानी
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