बुधवार, 30 सितंबर 2015

Sony TV’s Pyar Ko Ho Jaane Do to launch on 20th October


Produced by Balaji Telefilms, Sony Entertainment Television’s upcoming show Pyar Ko Ho Jaane Do will launch on the 20th October 2015. Starring Mona Singh and Iqbal Khan the show is based on the insight that the family is the driving force which stops us from going astray in life and stands by our side even in worst of circumstances.

The show was earlier slated to go air during early October but due to some religious belief Ekta Kapoor shifted the launch to 20th October. A source informs us about the news, “According to the Hindu calendar, the period of shradh will start from 28 September and end on 12 October. Ekta wanted to avoid starting a new project in the same time span, and thus delayed the launch of the soap. She is possessive about each of her serials and wants the best for them. She wanted to begin the PKHJD on an auspicious time.”

On the same we tried calling Ekta Kapoor and the creative of the show Nivedita Basu but couldn’t reach them. But well whatever may be the reason, I am sure the fans of Mona Singh and Iqbal Khan are eagerly waiting to watch them onscreen. So don’t miss to watch the episodes of the show Pyar Ko Ho Jane Do starting from 20th October 2015, Monday to Friday at 9pm only on Sony Entertainment Television
 

श्रद्धा से मनेगा अग्निहोत्र प्रणेता का जन्म शताब्दी समारोह


दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ आज

11 दिन होगा अखंड महामृत्युंजय महायज्ञ

भोपाल
अग्निहोत्र यज्ञ की पुनरुज्जीवन स्थली माधव आश्रम बैरागढ़ में अग्निहोत्र के प्रणेता माधव स्वामी पोतदार ‘साहब’ का जन्म शताब्दि समारोह पूरी श्रद्धा से मनाया जाएगा। इस अवसर पर जहां पर्यावरणविदें द्वारा पर्यावरण सुरक्षा के विभिन्न आयामों को विस्तार से समझाया जाएगा, वहीं कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अग्निहोत्र कृषि ‘जैविक खेती’ के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा पर प्रकाश डाला जाएगा। यह जानकारी देते हुए माधव आश्रम की संचालिका नलिनी माधव जी पोतदार ने बुधवार को पत्रकारों से चर्चा में बताया कि गुरुवार सुबह ठीक 10 बजे इस आयोजन की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी आश्रम में 1 अक्टूबर से 11 दिवसीय अखंड महामृत्युंजय शुरू होगा, जिसमें देश भर से अग्निहोत्र आचरणकर्ता शामिल होंगे। संचालिका जी ने कहा कि अग्निहोत्र यज्ञ को दुनिया के लोगों के लिए पुनरुज्जीवित करने वाले महानुभाव श्रीमान माधवजी पोतदार‘साहब’ का यह जन्म शताब्दि है। उन्होंने बताया कि विदिशा जिले में जन्मे माधव स्वामी जी की कर्मभूमि पूरा मध्यप्रदेश रही है, जबकि आज विश्वभर में विभिन्न संप्रदायों के लोग पर्यावरण प्रदूषण रोकने की दिशा में अग्निहोत्र को प्रभावी अस्त्र के रूप में इसे अपना रहे हैं। आयोजन को लेकर उन्होंने पत्रकारों को बताया कि रूढ़ियों और परपंरागत अंधविश्वासों से जनसाधारण मुक्त हो और वैदिक नित्य अग्निहोत्र यज्ञ को जीवन में अपनाए, यही वर्षों से इस संस्थान का उद्देश्य रहा है। 
समारोह की इसी कड़ी में एक अक्टूबर को स्मारिका का विमोचन विशेष अतिथि द्वारा किया जाएगा।  गुरुवार सुबह 5 बजे व्याहृति यज्ञ के साथ समारोह की शुरुआत होगी। चार सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रथम सत्र सुबह 10 शुरू होगा। दोपहर 1 बजे 1000 पात्रों में महामृत्युंजय यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी जाएगी। शाम का सत्र रात्रि 9 बजे से देर रात तक चलेगा। दूसरे दिन 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे रक्तदान शिविर लगेगा, साथ ही अग्निहोत्र कृषि विषय पर विशेष सत्र होगा, जिसमें ताराचंद बेलजी, दीपक सचदे, शिशिर पारिजा, डॉ. संजय तिवारी एवं डॉ. रामाश्रय मिश्रा आदि वैज्ञानिकों द्वारा जैविक और अग्निहोत्र कृषि पर किसानों से चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर आयोजन के संयोजक डॉ. विवेक पोतदार ने बताया कि अन्य कार्यक्रमों के साथ ही एक एवं दो अक्टूबर को सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सामूहिक अग्निहोत्र का व्यापक स्वरूप में प्रदर्शन भी किया जाएगा।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

लुभावने वादों की राजनीति

ऐसा कहा जाता है कि राजनीति ‘‘सम्भावना की कला है‘‘ किन्तु मतदान की अनिश्चितता और मतदाताओं के गुस्से ने राजनीति को ‘‘असम्भवना की कला‘‘ बना दिया है। मोदी जी और केजरीवाल जी की अविश्वसनीय सफलता यह सिद्ध करती है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि जनता को ऐसे लाभकारी वादे किये गये जो किसी सरकार के लिये पूरा करना संभव ही नहीं था। लोग यह भूल जाते हैं कि जब वादे नहीं पूरे हो पायेंगे तो वही मतदाता नाराज हो जायेंगे और सत्ता प्राप्त दल को सत्ता से बाहर कर देंगे। मोदी सरकार को सत्ता में आये अभी एक ही वर्ष हुआ है और जनता उनसे असंतुष्ट होने लगी है। यह समझना कठिन नहीं है कि 5 वर्ष पूरा होने तक स्थिति क्या हो सकती है।
    इस प्रकार की राजनीति जोखिम भरी होती है। यह प्रजातांत्रिक शासन के मार्ग में बड़ी बाधा है। जनता यह सोच लेती है कि जो दल अधिक आर्थिक लाभ देने का वादा करेगा उसी के पक्ष में मतदान करेंगे। इस नीति के दुष्परिणाम भी होते हैं। क्योंकि पर्याप्त धन लुभावने वादों को पूरा करने में व्यय हो जाता है और करों की वसूली कम हो जाती है, सरकार के सामने एक संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसा सुनने में आया है कि ‘आप‘ सरकार इसी स्थिति का सामना कर रही है। वादा करने में तो कुछ खर्च नहीं होता है। किन्तु उन्हें पूरा करने में धन की आवश्यकता होती है।
    जब लाभ प्राप्त करने वालों की संख्या का अनुपात अधिक हो जाता है तो अर्थ व्यवस्था डगमगा जाती है क्योंकि लाभान्वित वर्ग करों की अदायगी से अधिक आर्थिक लाभ सरकार से ले रहा होता है। इस प्रकार लाभान्वित वर्ग का बोझ उन्हें उठाना पड़ता है जो इस श्रेणी के बाहर होते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार के पास बांटने के लिये धन नहीं बच पाता है। मार्गेरेट थैचर ने यह कहा था कि ‘‘समाजवादी नीतियों के साथ कठिनाई यह है कि अन्ततः दूसरों का धन बांटने के लिये कम पड़ जाता है। ‘‘चर्चिल ने यह कहा था कि ‘‘समाजवाद का निहित गुण यह है कि इसमें दुखों का बराबर बंटवारा होता है।‘‘
    प्रजातांत्रिक शासन की विफलता की अफवाहें बहुत बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित की जाती है। इसके विपरीत लुभावने वादों के आधार पर प्राप्त सत्ता मान्य सिद्धान्तों पर आधारित नहीं होती है। वास्तविकता यह है कि अच्छी चुनावी नीति अच्छी लोक नीति पर आधारित होनी चाहिये। जनता को यह समझने में देर नहीं लगती कि उसके साथ धोखा हुआ है और फिर वह उसी रूप में चुनाव में उत्तर देती है। जनता का यह सन्देश होता है कि उन्हें मूर्ख नहीं बनाया जा सकता और उन्हें भी बदला चुकना आता है।
    जनता ने कांग्रेस की परम्परागत समाजवादी नीतियों को अस्वीकार करके मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी को विकास, रोजगार तथा सुशासन के आश्वासन पर भारी बहुमत से विजयी बनाया। अभी तक जनता सिर्फ बातें सुनती चली आ रही है और निराश है। जनता ने मोदी जी को देश को सुशासन देने के लिये निर्वाचित किया था जिसे प्रदान करने में वे असफल होते दिखाई दे रहे हैं। देश में विकास के लिये मोदी जी भूमि अधिग्रहण विधेयक और श्रम कानून मे परिवर्तन आवश्यक मानते हैं, किन्तु राजनीतिक दल और किसान इस का विरोध कर रहे हैं। इसी प्रकार श्रमिक वर्ग श्रम कानून में परिवर्तन अपने हितों के विरूद्ध मानते हैं। इन दोनों मामलों में सरकार को सफलता हाथ लगना कठिन लग रहा है। अपने प्रयासों में सफल न होने पर मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक में कियें जा रह संशोधनों को वापस ले लिया हैं।                           
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श्रम कानून में सशोधन और अन्य श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में देश के श्रमिक संगठनों ने 2 सितम्बर को देशव्यापी हडताल किया। सरकार इस मामले में भी भुकने के लिये बाध्य हो जायेगी।
इस कारण उद्योग जगत में निराशा व्याप्त है। उद्योग जगत ने मोदी जी को समर्थन दिया था किन्तु अब वह असंतुष्ट और निराश है। किसान और श्रमिक वर्ग को भी सरकार पर भरोसा नहीं रह गया है।
    मोदी जी के पास देश का शासन चलाने के लिये समय ही कम बचता है। उन की प्राथमिकताओं में विदेशी दौरे सब से ऊपर हैं। यह कार्य भी आवश्यक है किन्तु इसमें विदेश मंत्री प्रधान मंत्री का हाथ बंटा सकती है। इसी प्रकार राज्य चुनावों में प्रधान मंत्री के रूप में मोदी जी अपने दायित्व से अधिक प्रचार कार्य में समय दे रहे हैं। अभी बिहार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी चुनावी कार्य-क्रम चला सकती है। वहाँ पर 5 रैलियों को सम्बोधित करने का प्रधान मंत्री का कार्यक्रम है।
    दिल्ली की विधान सभा चुनाव में ‘आप‘ दल की विजय यह संकेत देती है कि मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी को बोलने के बजाय जनता की समस्याओं और अपने द्वारा किये गये वादों को पूरा करने की ओर अधिक ध्यान देना चाहिये। जिस प्रकार कांग्रेस की समाजवादी नीतियों ने देश के विकास को बाधित कर रखा था, उसी प्रकार भारतीय जनता पार्टी का हिन्दुत्व एजेंड़ा देश को महानता की ओर बढ़ने की प्रगति को रोक सकता है।
    भारत के प्राचीन गौरव के गुणगान में फसे रहने से देश की प्रगति नहीं होगी बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीकी के द्वारा ही भविष्य में भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हो सकता है। बीते समय में जीना अपने को धोखा देना है। जैसा कि जार्ज बर्नार्ड शा ने कहा है हम भूत काल का स्मरण करके बद्धिमान नहीं बनते हैं बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियां उठा कर के। हिन्दुत्व एजेन्डा को क्रियान्वित करने के बजाय सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के शासन को मजबूत करने, मूलभूत ढँाचे के निर्माण, भ्रष्टाचार के समाप्त करने और शोसल सेक्टर में व्यय बढ़ाने की ओर प्रयास किये जाने चाहिये। इन्हीं कार्यो के द्वारा देश में सुशासन की स्थापना हो सकती है।
    राजनीतिज्ञ शायद यह भूल जाते हैं कि धार्मिक ध्रुवीकरण के द्वारा भारत का शासन नहीं चलाया जा सकता है। ठीक इसी प्रकार वर्ग ध्रुवीकरण के द्वारा भी देश का शासन नहीं चलाया जा सकता है। ‘आप‘ और भारतीय जनता पार्टी को इसी नीति के द्वारा सफलता प्राप्त हुई है। देश को जितनी आवश्यकता उद्योगपतियों की है उतनी ही श्रमिकों की भी है। इसी प्रकार जितनी आवश्यकता किसानों की है उतनी ही शहरी मध्यम वर्ग की भी है। ध्रुवीकरण की नीति को दीर्घकालीन नीति के रूप में नहीं अपनाया जा सकता है।

डॉ. लक्ष्मी शंकर श्रीवास्तवा
सी-2/9, चार ईमली,अरेरा कॉलोनी, भोपाल
मोबाईल. 8989728552

गुरुवार, 17 सितंबर 2015

विश्वकर्मा पूजा : हर्षोल्लास से हुई सृष्टि के निर्माता की पूजा


- धूमधाम से निकला चल समारोह, हर क्षेत्र से शामिल हुई आकर्षक झांकियां 

- डीजे की धार्मिक धुन और लहंगी नृत्य पर खूब झूमे श्रद्धालु

भोपाल
राजधानी में सृष्टि के निर्माता भगवान विश्वकर्मा की जयंती बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास से मनाई गई। भगवान विश्वकर्मा पूजा महोत्सव के अवसर पर गुरुवार को इमामी गेट स्थित भगवान विश्वकर्मा मंदिर में महाआरती के साथ ही यहां से मुख्य चल समारोह शुरू हुआ। सर्व विश्वकर्मा समाज समिति के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष विष्णु विश्वकर्मा एवं चल समारोह के मुख्य संयोजक मनोज विश्वकर्मा के नेतृत्व में आयोजित चल समारोह में हजारों की संख्या में विश्वकर्मा समाज के महिला-पुरुष 
श्रद्धालुओं ने शामिल होकर अपने आराध्य देव भगवान विश्वकर्मा की श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पीरगेट स्थित मुख्य समारोह मंच पर सांसद आलोक संजर, महापौर आलोक शर्मा, पूर्व महापौर एवं प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री सुनील सूद, विधायकद्वय विश्वास सारंग तथा रामेश्वर शर्मा के अलावा मानस पुष्प संत भगवान शरण बापू के विशेष आतिथ्य और सर्वविश्वकर्मा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ज्वालाप्रसाद विश्वकर्मा के सानिध्य में भगवान विश्वकर्मा की पूजा और आरती की गई। कार्यक्रम के दौरान ही सांसद आलोक संजर ने विश्वकर्मा समाज द्वारा प्रकाशित कैलेंडर का विमोचन भी किया। 
 
चल समारोह में पुरस्कृत हुई आकर्षक झांकियां :
मुख्य चल समारोह दोपहर करीब दो बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से भी आकर्षक झांकियां शामिल हुर्इं। समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विष्णु विश्वकर्मा ने बताया कि इस अवसर पर करोंद, कोलार, कंकाली मंदिर गुदावल, बंगरसिया, नीलबड़, बैरागढ़, द्वारका नगर, सेमरा, पिपलानी क्षेत्र से विश्वकर्मा समाज समितियों की आई झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इनमें गुदावल से आई झांकी (संतोष विश्वकर्मा) को प्रथम पुरस्कार दिया गया। इसी तरह युवा मंडल करोंद (महेंद्र विश्वकर्मा) तथा सेमरा (बलराम विश्वकर्मा) की झांकी को द्वितीय पुरस्कार तथा द्वारका नगर (कैलाश विश्वकर्मा) की झांकी को तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा भेल पिपलानी (लखन विश्वकर्मा)की झांकी को विशेष पुरस्कार सहित सभी झांकियों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। 
 
आकर्षण का केंद्र रहा लहंगी नृत्य : 
चल समारोह के दौरान विभिन्न समितियों द्वारा विशेष रूप से सजाकर लाई गई झांकियों के अलावा लहंगी नृत्य पर थिरकते कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। समीपस्थ ग्राम इमलिया से हरिशंकर विश्वकर्मा के नेतृत्व में आई लहंगी नृत्य की टोली को विशेष पुरस्कार से नवाजा गया। 
 
करोंद में भजन संध्या आयोजित :
भगवान विश्वकर्मा जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को सर्व विश्वकर्मा समाज समिति द्वारा भगवान विश्वकर्मा की झांकी सजाकर पूजा- अर्चना की गई। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष अवधनारायण विश्वकर्मा तथा युवा मंडल अध्यक्ष रामू विश्वकर्मा के नेतृत्व में भजन संध्या आयोजित की गई, जिसमें समाज के करीब एक दर्जन युवा और वरिष्ठ कलाकारों द्वारा देर रात तक भगवान विश्वकर्मा भजनमाला के साथ ही अन्य धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद गुरुवार को यहां से चल समारोह के रूप में झांकी पीरगेट पर मुख्य चल समारोह में शामिल हुई।

- बीएल मारण