सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

मोटापा भी है ब्रेस्ट कैंसर का कारण

अक्टूबर माह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्तन कैंसर जागरुकता माह के रूप में मनाया जाता है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं में स्तन कैंसर तेजी से बढ़ा है। हमारे देश में एक लाख महिलाओं में 25 को स्तन कैंसर होता है। स्तन कैंसर आज विश्व में महिलाओं में होने वाला प्रमुख कैंसर होने के अलावा कैंसर से मृत्यु का भी प्रमुख कारण है। किसी भी महिला के जीवन में स्तन कैंसर होने की संभावना आठ में से एक होती है।

स्तन कैंसर के साथ-साथ कुछ अन्य व्याधियां/आदतें भी महिलाओं में बढ़ी हैं और इसका कारण मानी जाने लगी हैं । खान-पान में आये बदलाव व व्यस्त जीवन शैली के चलते मोटापा बढ़ा है । शिक्षा व नौकरी के कारण बच्चे 30 साल की उम्र के बाद होते हैं अथवा नहीं होते हैं । बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता है । शराब का चलन भी महिलाओं में पिछले कुछ सालों में बढ़ा है ।

स्तन कैंसर के कारण एवं इसके समय से पहले पता करने के तरीकों के प्रति जानकारी नहीं होने के कारण हमारे देश में अधिकतर महिलाएं इलाज के लिए देरी से आती हैं। विकसित देशों में 20 साल की उम्र से लड़कियों को स्तन का स्व-परीक्षण सिखा दिया जाता है जो वे माह में एक बार जीवन पर्यन्त करती हैं। 40 साल की उम्र से हर महिला साल में एक बार मेमोग्राफी करवाती है जिससे 85 प्रतिशत तक कैंसर आरंभिक अवस्था में ही पकड़ में आ जाता है और इससे इन देशों में स्तन कैंसर मृत्युदर में 25 फीसदी कमी आई है।

गंभीर बीमारियों को आमंत्रण

हमारे देश में मोटापा पिछले दो दशकों में बढ़ा है। मोटापा कई बीमारियों को जन्म देता है जिसमें मधुमेह, हृदय रोग, लकवा, गुर्दे के रोग एवं नॉन-एल्कोहोलिक फेटी लीवर प्रमुख हैं। मोटापे से होने वाली इन बीमारियों से समय पूर्व मृत्यु भी बढ़ी है। पिछले कुछ सालों में ये पता चला है कि मोटापे से कई प्रकार के कैंसर व उनसे मृत्यु का खतरा भी बढ़ता है। मोटापे से संबंधित महिलाओं में होने वाले कैंसरों में स्तन कैंसर के अलावा कोलन, ओवरी, यूटरस के एण्डोमेट्र्यिम, इसोफेगस, गाल ब्लेडर, पेनक्रियाज व थायरॉयड के कैंसर प्रमुख हैं। मोटापा अधिक होने के कारण यह बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं।

बॉडीमास इंडेक्स
मोटापे को बीएमआई बॉडीमास इंडेक्स से जाना जाता है। जिनका बीएमआई  25 से अधिक है उनमें ये कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। मोटापे के कारण ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा पोस्ट मेनोपोजल महिलाओं मेें अधिक रहता है और ये आमतौर पर हारमोन पॉजिटिव कैंसर होता है। अगर बीएमआई 25 से 5 यूनिट बढ़ती हैं तो स्तन कैंसर का खतरा इन महिलाओं में 33 प्रतिशत अधिक बढ़ जाता है। ये खतरा हर 5 यूनिट बीएमआई के साथ इसी अनुपात में बढ़ता जाता है। जिससे रोग बढ़ता है।

एस्ट्र्रोजन का स्तर
मोटापे के कारण इन महिलाओं के शरीर में मेनोपॉज के बाद भी एस्र्टेजन का स्तर अधिक बना रहता है। साथ ही इन महिलाओं में एन्र्डेजन्स की मात्रा भी अधिक रहती है। इन दोनों का बढ़ा हुआ स्तर इन महिलाओं में स्तन कैंसर का कारण बनता है। मोटी महिलाओं में मधुमेह के साथ ही रक्त में इन्सुलिन की मात्रा अधिक रहती है। ये बढ़ा हुआ इन्सुलिन कोशिकाओं को अनियंत्रित होकर बढऩे में मदद करता है इसीलिए मधुमेह की रोगी महिलाओं में मोटापा और स्तन कैंसर अधिक पाया गया है। हाल के वर्षों में ये भी सामने आया है कि मधुमेह के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा मेटफोरमिन रक्त में इन्सुलिन के स्तर को कम करने के साथ-साथ पोस्ट मेनोपॉजल महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका भी कम करती है।

प्री-मेनोपॉजल
मोटापे से समय पूर्व मृत्यु की आशंका भी अधिक रहती है। साथ ही इन महिलाओं में स्तन कैंसर के दोबारा होने व स्तन कैंसर से मृत्यु की अधिक आशंका रहती है एवं ये कम समय ही जीवित रह पाती हैं। रिकरेंस एवं मृत्यु की आशंका पोस्ट मेनोपॉजल महिलाओं में ही नहीं अपितु प्री-मेनोपॉजल मोटी महिलाओं में अधिक पाई गई है। चंूकि वजन घटाया जा सकता है इसलिए खान-पान में बदलाव व व्यायाम से स्तन कैंसर की आशंका कम करने के साथ ही, इलाज के बाद लम्बे जीवन की कल्पना की जा सकती है। अभी तक डॉक्टर वजन न बढऩे की सलाह देते थे किन्तु हाल ही में पता चला है कि इन महिलाओं में इलाज के बाद बिना परेशानी के वजन कम किया जा सकता है। इन महिलाओं में प्रतिदिन 500-1000 कैलोरी कम करने से एवं फैट की मात्रा खाने की कुल केलोरीज की 20 प्रतिशत तक सीमित कर देने से वजन कम करना संभव है। साथ ही खाने में सब्जी व फलों के अधिक उपयोग एवं सप्ताह में 150 मिनट के व्यायाम से 6 महीने में 3 से 4 किलो तक वजन कम किया जा सकता  है। हाल के वर्षों में स्तन कैंसर के उपचार के बाद महिलाओं में वजन कम करने से महिलाओं का ओवरऑल सर्वाइबल काफी बढ़ा है।

दिनचर्या व खान-पान पर दें ध्यान
मोटापा स्तन कैंसर करने के साथ ही, उपचार उपरांत स्तन कैंसर करने व जीवन अवधि भी कम करता है। अत: दिनचर्या एवं खान-पान में सकारात्मक बदलाव कर वजन कम करने से स्तन कैंसर की आशंका कम की जा सकती है। स्तन कैंसर के इलाज के बाद भी महिलाओं को वजन कम करना चाहिए जिससे कैंसर मुक्त लम्बा जीवन जी सकें। समस्या होने पर अपने चिकित्सक से राय लेकर या कैंसर हॉस्पिटल में परामर्श लेकर इलाज कराएं।

डॉ. सुनील कुमार
कंसलटेंट
मेडिकल आंकोलॉजी
जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल

बुधवार, 23 अक्तूबर 2013

उत्तराखंड के श्रमजीवी पत्रकारों को सुविधाएं दी जाएंगी : विजय



देहरादून। उत्तराखण्ड में श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं पर विचार कर आवश्यक कार्यवाही के लिए राज्य सरकार एक समिति बनाएगी। कार्यरत महिला पत्रकारों के लिए एक वूमेन हॉस्टल बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में श्रमजीवी पत्रकारों को जो सुविधाएं मिल रही हैं, उत्तराखण्ड में भी वे ही सुविधाएं श्रमजीवी पत्रकारों को मिलेंगी।
    ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में इंडिया फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के 66 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में ''गंगा स्वच्छता में मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जानी अति आवश्यक है। निर्भीक व जोशपूर्ण पत्रकारिता के साथ ही पारदर्शिता व दृढ़ इच्छाशक्ति देश के विकास व प्रजातंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। मीडिया लोकतंत्र का चतुर्थ स्तम्भ है, इसकी बुनियाद को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा जीवन है। सभी प्रान्तों में बहने वाली नदियां पवित्र हैं। इन्हें प्रदूषण से मुक्त किए जाने के लिए संकल्पशक्ति के साथ सभी को मिलजुलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को भीषण दैवीय आपदा का सामना करना पड़ा जिसमें अपार जन धन की हानि हुई। स्थानीय लोगों ने स्वयं अभाव में रहकर बाहर से आए लोगों की जिस प्रकार मदद की वह सराहनीय है। राज्य सरकार ने सेना, एनडीआरएफ, पुलिस के सहयोग से एक लाख तीस हजार से अधिक लोगों को हिमालयी सुनामी से सुरक्षित बाहर निकाला। यह सम्भवत: अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान था। सरकार 100 दिनों के भीतर 300 करोड़ रूप्ए की राहत राशि का वितरण चैक के माध्यम से आपदा प्रभावितों को कर चुकी है। उन्होंने कहा कि ''राज्य सरकार केवल राहत राशि का वितरण ही नहीं कर रही है बल्कि जिम्मेवारी भी उठा रही है। सरकार जिम्मेवारी उठा रही है बेघर हुए बच्चों की। उनकी स्कूल व कालेज की एक वर्ष की फीस राज्य सरकार वहन करेगी। चाहे वह कक्षा एक में पढ़ रहा हो या इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हो। आपदा से प्रभावित परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए एक लाख रूप्ए की एफडी कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए मानक बदल दिए। राहत राशि में कई गुना बढ़ोतरी की गई।

    मुख्यमंत्री ने देश विदेश से आए श्रमजीवी पत्रकारों को देवभूमि में स्वागत करते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेवारी है। फेडरेशन के अध्यक्ष के विक्रम राव ने संस्था व कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि समाज से संवाद स्थापित करने में मीडिया की अहम भूमिका है। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि, केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, डा.हरक सिंह रावत, मंत्रीप्रसाद नैथानी, मजदूर नेता शिवगोपाल मिश्रा, फेडरेशन के परमानंद पांडे,राममहेश मिश्रा, कमल शर्मा, मुदिता सहित देश विदेश से आए पदाधिकारी व सदस्यगण उपस्थित थे। मध्यप्रदेश से वरिष्ठ पत्रकार श्री सतीश सक्सेना एवं विश्वेश्वर शर्मा ने पत्रकारों का सम्मेलन में नेतृत्व किया।