मंगलवार, 28 मई 2013

छत्तीसगढ़ के हाईटेक नक्सलियों के पास 10,000 से ज्यादा लड़ाके




बस्तर के दरभा घाटी में जिस तरह से नक्सलियों ने मौत का तांडव रचा, उसे देखकर नौकरशाहों, धनपशुओं और ठेकेदारों के पैरों की जमीन खिसक गई होगी। कभी आगे, कभी पीछे होकर नक्सलियों का समर्थन करने वाले राजनेताओं के ऊपर जब नक्सलियों का हमला हुआ तो उन्हें भी छठी का दूध याद आ गया। बस्तर टाइगर आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा की जिस बेरहमी से हत्या की गई, उसे देखकर और सुनकर अब नेता बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर नहीं जाएंगे। कमोवेश उड़ीसा के कोरापुट, नवरंगपुर, मलकानगिरी की भी हालत कुछ ऐसी ही है। नक्सलियों की ताकत पर नजर डालें तो उन्होंने अपना क्षेत्र बढ़ा लिया है। उनके पास खतरनाक हथियारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सूचना के तमाम नई तकनीक उनके पास उपलब्ध हैं। नक्सलियों की असली ताकत गुरिल्ला लड़ाई में पारंगत उनकी सैन्य कंपनियां हैं। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की कंपनियां तीन से दस हो चुकी हैं। वे लगातार इलाके का विस्तार और सदस्यों की संख्या बढ़ा रहे हैं। एक माह पहले ही उन्होंने कांकेर और राजनांदगांव के इलाके को मिलाकर नया डिवीजन बनाया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सली राजधानी की तरफ पांव बढ़ा रहे हैं। हालांकि इससे इन्कार भी नहीं किया जा सकता कि पुलिस के दबाव और लगातार कार्रवाई से गरियाबंद, राजनांदगांव, कांकेर जिले के कुछ हिस्सों में वे कमजोर पड़े हैं। जंगल वॉरफेयर विशेषज्ञों की मानें तो नक्सलियों के इलाके में जाकर लडऩे के लिए उनसे चार गुना ज्यादा ताकत चाहिए। वे वहां के इलाके से अभ्यस्त होते हैं। दरख्तों और पत्थरों के बीच दुबकने और भागने के आदी होते हैं। ऊपर से गुरिल्ला युद्ध उन्हें और भी प्रभावी बनाती है। पिछले 6 वर्षों में हुए बड़े नक्सली हमले डा. प्रताप अग्रवाल के अनुसार नक्सल प्रभावित जिला को केंद्र और राज्य सरकार इतना पैसा देती है कि अगर उसे पूरी तरह खर्च किया जाए तो जि़लों की तस्वीर बदल जाए। लेकिन अथाह पैसा मिलने के बाद भी बस्तर की बहुसंख्य आबादी बिना बिजली और शौचालय के रहती है। अस्पताल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है, अर्थी की तरह जिंदा व्यक्ति को कंधे पर उठाकर अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। कई जगहों पर वे नक्सलियों पर अभी भी निर्भर हैं। एडीजी नक्सल आरपेशन आरके विज ने बताया कि नक्सली अपने फोर्स को बहुत मजबूत करने में जुटे हुए हैं। कुछ जगहों पर फोर्स के दबाव में उन्हें वापस जरूर होना पड़ा है लेकिन वे लगातार अपना बल बढ़ा रहे हैं। आईये बात करते हैं छत्तीसगढ़ के नक्सलियों की ताकत की।

कहां से आता है पैसा
कहाँ क्या खर्च हो रहा है, इसका कोई हिसाब नहीं क्योंकि जहां पैसे कथित तौर पर खर्च हो रहे हैं वहां तो पुलिस भी नहीं जा पाती जाहिर है ये पैसा नेता, नौकरशाह और ठेकेदारों की तिकड़ी बांट कर खा रही है और इसका एक बड़ा हिस्सा नक्सलियों को भी दिया जाता है। नक्सली इलाक़ों के व्यापारियों से रंगदारी टैक्स वसूला जाता है। आदिवासियों के शोषण की लाख गुहार की जाए नौकरशाहों की आंखें नहीं खुलती हैं। जब तक इन नौकरशाहों, नेताओं और ठेकेदारों पर नकेल नहीं कसी जाएगी, नक्सली आंदोलन का खात्मा नहीं किया जा सकता है।

गुरिल्ला आर्मी
नक्सलियों की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की कंपनियां तीन से दस हो चुकी हैं। वे लगातार इलाके का विस्तार और सदस्यों की संख्या बढ़ा रहे हैं। गुरिल्ला आर्मी जंगलों में हथियों से लैस होकर चलते हैं और चाहे कितना ही घना जंगल क्यों न हो, ये कभी भटकते नहीं। इन्हें विशेष रूप से उसी के लिये प्रशिक्षित किया जाता है, कि वे जंगल में लड़ सकें। इन्हें जंगली जानवरों का कतई खौफ नहीं होता।

नक्सलियों के पास एके 47
नक्सलियों के पास एके 47, एके 57, लाइट मशीनगन और टू इंच मोर्टार से लैस लड़ाके हैं। 65 से 100 सदस्यों के साथ चलने वाली ये कंपनियां घात लगाकर हमला करती हैं और 300 से 400 जवानों पर भारी पड़ती हैं। ताड़मेटा जैसे बड़े हमलों को अंजाम देने वाली इस कम्पनी में कम से कम 10 हजार लड़ाके हैं।

नक्सली आंदोलन के कारण
- राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी
- आंध्रप्रदेश की तरह पुलिस, प्रशासन और खुफिया तंत्र एक ही दिशा में काम नहीं कर पा रहे हैं।
- नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास तो दूर, सड़कें तक नहीं बन पा रहीं।
- एंटी नक्सल फोर्स तो बनी, पर खुफिया सूचनाओं के अभाव में उसका स्ट्राइक रेट बेहद कमजोर।

10 साल में आयी कितनी ताकत
पिछले दस सालों की बात करें तो 2003 से लेकर 2013 तक नक्सलियों की ताकत कुछ इस प्रकार बढ़ गई है। 2003 में जहां इनके सिर्फ चार डिवीजन थे, वहीं अब 12 डिवीजन हैं। दो बटालियन हो चुकी हैं, प्लाटून 6 से बढ़कर 41 हो गईं। गुरिल्ला कंपनी 30 से बढ़कर 110 कंपनियां हो गई हैं। वहीं हथियारबंद लड़ाके 1 हजार से बढ़कर 10 हजार हो चुके हैं।

10 साल में आई ताकत
वर्ष 2003    2013
डिवीजन    4    12
बटालियन    0    12
कंपनियां    2    10
प्लाटून    6    41
गुरिल्ला    30    110
जनताना    0    245
हथियारबंद    1000    10,000
आधुनिक हथियार    140    500

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शनिवार, 25 मई 2013

गजब की नौकरी : दिनभर देखो पॉर्न, मोटी तनख्वाह पाओ!



चीन में निकली ‘चीफ पॉर्नोग्राफी आईडेंटिफिकेशन ऑफिसर’ की वैकेंसी, 17 लाख रुपए सालाना वेतन होगा

इंटरनेट डेस्क/वर्ल्ड नाउ। चौंक गए ना ! आपका चौंकना लाजमी भी है। हम भी ऐसे ही चौंके थे, जब हमें चीन में निकली इस अनोखी नौकरी के बारे में पता चला था। चलो अब आपको बता ही दें कि आखिर मामला क्या है?
चीन में हाल ही ऑफिसर रैंक की एक ऐसी वैकेंसी निकाली गई है, जिसमें मोटी तनख्वाह दी जाएगी और दिनभर आपको इंटरनेट पर पॉर्न सामग्री पर निगाह रखनी होगी। अच्छे वेतन के साथ ऑफर की जा रही इस पोस्ट का नाम है ‘चीफ पॉर्नोग्राफी आईडेंटिफिकेशन ऑफिसर’। इतना ही नहीं चीफ ऑफिसर के अंडर में एक पूरी टीम का गठन किया जाएगा, जो दिनभर ऑफिस में बैठकर इंटरनेट पर पॉर्न वेबसाइट्स पर नजर रखेगी। यदि आपके पास पासपोर्ट है और आप भी ऐसी योग्यता रखते हों तो अपना रिज्यूमे तुरंत hr@anquan.org पर करें, हो सकता है कि आपको इस नौकरी के लिए चुन लिया जाए।
क्या करना होगा…
जानकारी के अनुसार ‘चीफ पॉर्नोग्राफी आईडेंटिफिकेशन ऑफिसर’ की वैकेंसी निकालने के पीछे चीन सरकार का उद्देश्य मात्र यह है कि इंटरनेट को आने वाली पीढ़ी के लिए साफ-सुथरा बनाना है, यानी अश्लील सामग्री से मुक्त ऑनलाइन सेवाएं और माहौल मुहैया कराना है। इसके लिए एक गैर सरकारी संस्था को सरकार ने जिम्मेदारी दी है। इस संस्था का नाम है सेफ्टी अलायंस। यह थर्ड पार्टी ऑगनाईजेशन के रूप में काम करेगी। चाइना स्मैक के अनुसार इंटरनेट पर काम करने वाले लोगों के लिए अश्लीलतामुक्त वातावरण का बनाने के उद्देश्य से यह सारी कवायद की जा रही है।
सेफ्टी अलायंस के अधिकारी के अनुसार इस पोस्ट का सृजन चीन से फेसबुक पर 120 हजार शेयर और 20 हजार कमेंट के बाद किया गया। यानी जनता भी यही चाहती है कि अश्लील सामग्री इंटरनेट पर नहीं परोसी जाए। इस जॉब के अंतर्गत अधिकारी व कर्मचारी को ऑफिस में बैठ कर पोर्न कंटेंट देखना होगा और जज करना होगा कि वह कंटेंट अश्लीलता के मानकों पर कहां ठहरता है। इस तरह एक पूरी टीम के द्वारा इंटरनेट पर अश्लील कंटेंट की पहचान की जाएगी और फिर ऐसे कंटेंट को या तो डिलीट करने की रिक्वेस्ट भेजी जाएगी अथवा फिर कंटेंट परोसने से पहले चेतावनी दी जाएगी।
हालांकि सेफ्टी अलायंस के अधिकारी का कहना है कि यह जॉब घर बैठे भी किया जा सकेगा। फिलहाल ऐसा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो अश्लील कंटेंट को पहचानने का काम करेगा। इस कार्य के अंतर्गत लोगों के अभिव्यक्ति के अधिकार को भी ध्यान में रखा जाएगा। इस नेटवर्क के चीफ का वेतन दो लाख चीनी चॉन यानी करीब 17 लाख रुपए सालाना होगा। इस नौकरी के लिए एप्लाई करने के लिए कोई भी व्यक्ति hr@anquan.org पर अपना रिज्यूमे मेल कर सकता है।

शुक्रवार, 24 मई 2013

इंडिया का सबसे बड़ा ड्रामेबाज : पुणे का आदित्य सिंहल


इस साल जनवरी में जबसे यह शो प्रसारित होना आरंभ हुआ है, पूरा देश इनकी प्रतिभा का दीवाना हो गया है। चाहे वह हृतिक रोशन हों, डेविड धवन हों, प्रीति जिंटा हों, आयुष्मान खुराना हों, जूही चावला हों या अर्जुन कपूर, इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज में नन्हें अभिनेताओं ने बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों तक को अपनी विविधता और मासूमियत से विस्मित करके रख दिया है। जैसे-जैसे यह शो समापन की ओर बढ़ता गया, टॉप 6 ड्रामेबाजों के बीच की स्पर्धा एक रोमांचक मोड़ ले लिया, दर्शक हैरानी के साथ इंतजार में थे कि आखिर कौन इस महत्वपूर्ण ' गोल्डन कीड़ा ट्रॉफी को हासिल करने में कामयाब होगा। देश ने अपना फैसला सुनाया और इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज हैं पुणे के आदित्य सिंहल !!!
12 साल के आदित्य ने शो के ग्रॅन्ड फिनाले में असंख्य प्रशंसकों के बीच अपने साथी फायनलिस्टों, मोहाली की अंजली आस्था, नागपुर के चिन्मय देशकर, मोहाली की मेहनाज मान, शिर्डी से निहार गिते और जयपुर से प्रणीत शर्मा, को दौड़ में पीछे छोड़कर, यह खिताब अपने नाम किया। एक प्रकाशक और प्रूफ रीडर के बेटे और एक प्रतिभाशाली बाल अभिनेता आदित्य का कहना है कि अभिनय की कीड़ा उसे तब से काट रहा है, जब वह सिर्फ 4-5 साल का था। एक कच्ची उम्र से ही वह जन्मदिन की पार्टियों में शरारतन अपने मां-बाप और बड़ों की नकल उतारा करता था और सभी के छक्के छुड़ा देता था।
'' बेशक मैं इस शो में जीत से रोमांचित हूँ, लेकिन मैं इसे यहीं समाप्त नहीं करना चाहता। इंडियाÓज बेस्ट ड्रामेबाज ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं इस मंच को, प्रस्तुतियों को अनुराग बासु , सोनाली दीदी, विवके भैया, रित्विक और रागिनी दीदी को बहुत मिस करूँगा। मैंने इन सभी से और खासकर इस शो में मेरे गुरु आलोक उल्फत से एक्टिंग के बारे में बहुत कुछ सीखा है। मैंने नागपुर के चिन्मय देशकर और पटना के अभिषेक जैसे कई अच्छे दोस्त पाए हैं। हम सेट्स पर बहुत मस्ती किया करते थे। दुर्भाग्य से, दोनों बीमार पड़ गए और उन्हें शो से बाहर होना पड़ा।

बड़े होकर अभिनेता बनूंगा
पुणे के बिशप को-एड स्कूल का छात्र, आदित्य नाट्य संस्कार नामक एक अभिनय संस्थान के माध्यम से अनेक राज्य स्तरीय अभिनय स्पर्धाओं में हिस्सा ले चुका है। उसके आइडियल हैं, शाहरुख खान, जिन्हें वह बहुत स्टायलिश मानता है। लेकिन, वह परेश रावल को हमेशा अपना फेवरेट कहता है, जिन्हें वह बेहद विविधता से भरपूर मानता है। तो क्या शो के निर्णायकों में से भी उसका कोई फेवरेट है? आदित्य तुरंत जवाब देता है, '' निस्संदेह अनुराग दा। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने हमारे विकास में बहुत दिलचस्पी ली है और हमारी प्रस्तुतियों पर बहुत मेहनत की है। वे हमें बहुत सावधानीपूर्वक हमारी कमियों के बारे में बताते थे। वह गर्मजोशी और स्नेह से भरपूर, एक सच्चे बेहतरीन इंसान हैं। हम सभी उन्हें प्यार करते हैं। इस शो में उसके सबसे यादगार एक्ट रहे एक तो उसका वह एक्ट, जिसमें उसे स्कूल के नाटक में रावण का रोल करने वाले बच्चे की हड़बड़ाहट को प्रस्तुत करनी थी, दूसरा वह एक्ट जिसमें उसने डीआईडी लिटिल मास्टर्स के विजेता फैजल के साथ जुगलबंदी की थी और तीसरा उसके सबसे अच्छे दोस्त चिन्मय के साथ किया गया मैजिक एक्ट, जिसमें दोनों ने बौने की भूमिका की थी। इसी तरह उसका ग्रॅन्ड फिनाले का वह एक्ट भी काफी बेहतरीन रहा, जिसमें उसने दीवार फिल्म के प्रसिद्ध डॉयलॉग '' मेरे पास मां है  पर अभिनय किया।
आदित्य की भविष्य की क्या योजनाएं हैं? आदित्य कहता है, '' अब यह मेरी पढ़ाई में मन लगाने का समय है। मैं स्कूल में बेहतर ग्रेड्स हासिल करने पर ध्यान देते हुए अभिनय के अवसरों और आने वाले ऑडिशनों पर भी नजर रखूंगा। आखिर मैं बड़ा होकर एक अभिनेता बनना चाहता हूँ!!
हम भी यही कामना करते हैं कि यह ड्रामेबाज अपने सभी भावी प्रयासों में कामयाबी हासिल करे।
पत्रकार राजकुमार सोनी के साथ इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज के नन्हें कलाकार

सोमवार, 20 मई 2013

भारत-चीन सीमा विवाद को शांति से सुलझाने पर सहमत



नई दिल्‍ली : चीन और भारत के बीच सोमवार को आठ अहम समझौते पर दस्‍तखत किए गए। इस मौके पर दोनों देशों के एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में संयुक्‍त बयान में चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुलाकात से भरोसा बढ़ा है। जो भी विवाद है, उसे जल्‍द सुलझा लिया जाएगा।

उन्‍होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री से मिलकर वे खुश हैं। सीमा विवाद को शांति और सौहार्द से सुलझाएंगे और इसके लिए बातचीत जारी रहेगी। सामरिक मुद्दों पर सहमति बनी है। चीनी पीएम ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के हितों का नुकसान नहीं चाहते हैं। विवादों को पीछे छोड़कर हितों का ध्‍यान रखना जरूरी है। जल संशाधन के मसले पर और समन्‍वय बढ़ाया जाएगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के विकास के बिना न एशिया मजबूत होगा और न ही दुनिया। भारत और चीन वर्ल्‍ड इकोनॉमी के इंजन हैं।

ली ने कहा कि हम अच्छे दोस्त हैं। मैं इससे इनकार नहीं करूंगा कि कुछ क्षेत्रों में कुछ समस्याएं हैं। संबंधों को मजबूत बनाने के लिए इस साल के अंत में भारतीय प्रधानमंत्री के चीन के दौरे को लेकर हम आशान्वित हैं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में विविध, महत्वपूर्ण नतीजे हासिल किए गए।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि चीन से रिश्‍ते और मजबूत होंगे। दोनों देश सरहद पर शांति चाहते हैं। सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा मसले पर बातचीत हुई। यह बातचीत दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई। मनमोहन सिंह ने कहा कि वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जैसी स्थिति है, वैसी स्थिति बनाए रखने पर सहमति बनी है। दोबारा तनावपूर्ण हालात पैदा न हो, इसके लिए पूरी कोशिश की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि ली केचियांग का सबसे पहले भारत आना खुशी की बात है। ये दौरा दोनों देशों के बीच के रिश्‍ते को मजबूत करेगा। भारत और चीन के आपसी रिश्‍तों से जुड़े कई मसलों पर बातचीत हुई।
दोनों देशों के बेहतर रिश्‍ते दक्षिण एशिया के लिए अहम हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग अहम भूमिका निभाते हैं। वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई है। इसके अलावा, चीन के बाजार को भारत के लिए खोलने पर भी सहमति बनी है।

प्रेस कांफ्रेंस से पहले, भारत और चीन के बीच आठ अहम समझौते हुए। ब्रह्मपुत्र नदी पर भारत और चीन के बीच करार हुआ है। दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों पर भी बात हुई है। कृषि और जल संशाधन क्षेत्र, वाणिज्‍य और व्‍यापार को लेकर भी कई समझौते हुए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भी समझौता किया गया है। विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए चीन को न्‍यौता दिया गया है।

चीन में सत्ता बदलने के बाद  ली कू-चीयांग की भारत यात्रा अहम मानी जा रही है क्योंकि अपनी पहली विदेश यात्रा के पहले पड़ाव के लिए उन्होंने भारत को चुना है। हाल में लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति के मद्देनजर चीन के प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायने में अहम है। ली की तीन दिवसीय इस भारत यात्रा पर दोनों देशों की ही नहीं, पूरे विश्व की निगाहें टिकी हुई हैं।

आज हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में बताया जा रहा है कि एलएसी पर यथास्थिति बहाल रखने, चीनी में भारत का एक्सपोर्ट बढ़ाने और ब्रह्मपुत्र के बहाव में किसी भी तरह का बदलाव करने पर जानकारी साझा करने व कैलाश मानसरोवर यात्रा सहित आठ मुद्दों पर समझौते हुए हैं।

भारत-चीन साझा बयान जारी करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश सीमा पर शांति चाहते हैं और दोनों के रिश्ते और मजबूत होंगे। मनमोहन सिंह ने चीन जाने का न्यौता स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ा है। वहीं चीन के प्रधानमंत्री ली कू-चीयांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ा है और सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। ली ने कहा कि सीमा विवाद बातचीत के जरिए हल करने की कोशिश की जाएगी और चीन ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे दोनों देशों के बीच दरार पैदा हो। भारतीय प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति कायम रखना अच्छे द्विपक्षीय संबंधों के लिए आवश्यक है।

ली द्वारा तिब्बत मसला उठाये जाने पर भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि दलाई लामा एक आध्यात्मिक नेता हैं और तिब्बतियों को भारत में रहकर राजनीति करने की आजादी नहीं है।

दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में बढ़ोतरी और आपसी निवेश को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौता हुआ है । चीन में भारत का निर्यात बढ़ाने संबंधी बातों पर भी बातचीत की गई जिसके चलते दोनों देशों के व्यापार संबंधों में प्रगाढ़ता बढ़ेगी । चीन को दुनिया के सबसे बड़े बाजार के रूप में देखा जा रहा है और ऐसे में भारत का चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में जुड़ना भारत को इस क्षेत्र में नए अवसर प्रदान कर सकता है। दोनों देशों के बीच एक आर्थिक गलियारा बनाने पर भी सहमति हुई है, जिससे पूर्वी और दक्षिणी एशिया जुड़ जाएंगे। ली ने कहा कि दोनों देश यह मानते हैं कि एक-दूसरे का विकास ही उनका विकास है।

शुरू से ही कहा जा रहा है कि सीमा विवाद इस वार्ता और यात्रा का मुख्य केंद्रबिंदु  रहेगा और दोनों देशों के साझा बयान जारी करने के बाद यह जाहिर हो गया कि अन्य सभी मुद्दों पर तो निष्कर्ष निकालना आसान है लेकिन सीमा विवाद अत्यंत गंभीर मसला है और इसके हल के लिए और समय का इंतज़ार करना होगा।

भारत की लद्दाख सीमा पर चीनी घुसपैठ केवल अपनी वर्चस्वता और मानसिक दबाव बनाने मात्र भर के लिए थी। लेकिन अब देखना है कि क्या चीन हमेशा की तरह अपना वर्चस्व कायम रखते हुए ली की इस यात्रा के बाद अपने तीखे तेवरों में बदलाव की कड़ी को अपनाता है अथवा दोस्ती का हाथ बढ़ा कर केवल अपनी छवि को आज की पृष्ठभूमि पर विश्व के सम्मुख बदलने का भ्रम पैदा करना चाहता है।



कान के रेड कारपेट पर काले गाउन में खूब जंचीं ऐश्वर्या



नई दिल्ली: मशहूर अदाकारा ऐश्वर्या राय बच्चन कान फिल्म महोत्सव के रेड कारपेट पर एक खास काले गाउन में नजर आईं। इस परिधान में वह बिल्कुल छरहरी और आकर्षक नजर आ रही थीं। समारोह में 11वीं बार शामिल होने वाली 39-वर्षीय अभिनेत्री ने अपने बालों को खुला छोड़ रखा था और थोड़े-बहुत आभूषण पहन रखे थे। हालांकि 18 महीने की बेटी आराध्या के साथ समारोह में भाग लेने आईं ऐश्वर्या ने अपनी बच्ची को कैमरे की नजरों से दूर रखा। वह केरी मुलीगन-जस्टिन टिम्बरलेक अभिनीत फिल्म 'इनसाइड लेवयन डेविस' के प्रीमियर में भाग लेने के लिए अकेले ही गईं। बाद में, शाम को पाश्चात्य परिधान के जगह पर ऐश्वर्या ने सब्यसाची द्वारा डिजाइन की गई काले रंग की एक खूबसूरत साड़ी पहनकर भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। हिन्दी सिनेमा 'बॉम्बे टॉकीज' के प्रदर्शन के दौरान ऐश्वर्या ने अपने बालों को बांध रखा था और कढ़ाई की हुई साड़ी पर उन्होंने सोने के आभूषण पहन रखे थे।

रिश्‍तेदार के घर से मिली Fixing की रकम

नई दिल्‍ली :- आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस के स्पेशल सेल के सूत्रों के हवाले से खबर है कि पुलिस ने स्पॉट फिक्सिंग की रकमद बरामद कर ली है. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस के स्‍पेशल सेल ने हरियाणा में अजित चंदीला के रिश्तेदार के घर छापा मारकर फिक्सिंग की रकम बरामद की.

बताया जा रहा है कि चंदीला की गिरफ्तारी के बाद घरवाले डर गये थे और उन्‍होंने यह रकम अपने रिश्‍तेदार के घर में छिपा दी. दिल्‍ली पुलिस की इस सफलता ने केस को और मजबूर कर दिया है. हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि श्रीसंत और अंकित चव्हाण ने रकम कहां छिपाई है.  इस बीच बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने सोमवार को फिक्सिंग कांड के सिलसिले में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की.

मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है. इस बीच तीनों आरोपी खिलाड़‍ियों से स्पेशल सेल में पूछताछ जारी है. मंगलवार को इनकी पुलिस रिमांड खत्म हो रही है, लेकिन पुलिस फिर से रिमांड लेने की कोशिश करेगी. इस बीच अंकित चव्हाण के पिता और चाचा उससे मिलने पहुंचे. सभी आरोपियों को आज एम्स में जांच के लिए ले जाया गया.

हत्या के समय मैं सो रहा था : राजेश तलवार



गाजियाबाद : डाक्टर राजेश तलवार ने अदालत में सोमवार को दावा किया कि जिस रात उनकी बेटी आरुषि और घर के नौकर हेमराज की हत्या की गई, उस रात वह सो रहे थे और हो सकता है कि उनके कमरे से दर्ज इंटरनेट क्रियाकलाप सही नहीं हो। तलवार का बयान दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत दर्ज किया जा रहा है जिसमें न्यायाधीश परिस्थितियों के बारे में आरोपी का बयान जानने के लिए उससे सीधे सवाल करते हैं। तलवार के वकील मनोज सिसौदिया ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अब तक सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस लाल ने तलवार से 200 से अधिक सवाल पूछे हैं जिसमें उन्हें अपना बचाव करने का मौका दिया गया है।  तलवार से आज 15 मई की हत्या वाली रात में उनके रूटर से लगातार दर्ज इंटरनेट क्रियाकलाप के बारे में पूछा गया। सीबीआई ने दावा किया था कि उन्होंने नियमित अंतराल पर इंटरनेट का उपयोग किया जो दिखाता है कि वह जगे हुए थे और उन्‍हें पता था कि आरुषि के कमरे में क्या हो रहा है। तलवार ने आज अदालत से कहा कि वह साढ़े 11 बजे के बाद सो गए थे और उन्होंने इंटरनेट का उपयोग नहीं किया।  सिसौदिया ने दावा किया कि पुलिस और जांचकर्ताओं के घटनास्थल पर पहुंचने और कम्प्यूटर बंद होने के बाद भी रूटर 16 मई को सुबह छह बजे से दोपहर एक बजे तक क्रियाकलाप दिखा रहा था। सिसौदिया ने कहा कि 16 मई को रूटर क्रियाकलाप दिखाते हैं कि उसकी रिकार्डिंग में गलती हुई है इसलिए यह दावा नहीं किया जा सकता कि चूंकि इंटरनेट पर क्रियाकलाप जारी था इसलिए डाक्टर तलवार जगे होंगे।  उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि तलवार ने यह जानकारी अदालत को दी या नहीं। सीबीआई ने अपने इस दावे को पुख्ता करने के लिए एयरटेल के एक अधिकारी को गवाह के तौर पर पेश किया था कि 15 मई को इंटरनेट क्रियाकलाप दर्ज किया गया। सीबीआई ने इस प्रकार तलवार के इस दावे को खारिज किया था कि वह सो रहे थे और उन्हें नहीं पता कि आरुषि के कमरे में क्या हो रहा है।  तलवार से हेमराज के शव के पोस्टमार्टम के बारे में भी पूछा गया जहां सीबीआई ने दावा किया है कि उसके फूले हुए गुप्तांग इस ओर इशारा करते हैं कि हेमराज मौत से ठीक पहले या तो यौन संबंध बना रहा था या बनाने वाला था। तलवार का दावा था कि उन्होंने पोस्टमार्टम वाले दिन नौकर के फूले हुए अंगों के बारे में कोई राय नहीं बनाई थी क्योंकि उन्होंने सोचा था कि वह उस समय कारण बताएंगे जब उनसे पूछा जाएगा। वह बचाव पक्ष के वकील की इस बात पर भी सहमत हुए कि अंगों का फूलना शव सड़ने के कारण भी हो सकता है।

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में नए खुलासे



मुंबई :- आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में नए-नए खुलासे सामने आते जा रहे हैं। इस मामले की जांच में जुटी एजेंसियां आज दिल्ली से लेकर मुंबई तक हरकत में नजर आ रहीं हैं। मुंबई में पुलिस ने सोफिटेल होटल, ओआरजी और रॉयल्टी पब की सीसीटीवी फुटेज जब्त की है। दिल्ली में खिलाड़ियों के वॉयस सैंपल लिए गए। लैपटॉप से भी कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों से मिला जानकारी के मुताबिक गिरफ्तारी से पहले श्रीशांत अपने दोस्त जीजू के साथ मुंबई के होटल सोफिटेल में ही रुके थे और ओआरजी और रॉयल्टी पब में तीन लड़कियों और सट्टेबाजों से मिले थे। पुलिस पहले ही होटल सोफिटेल से श्रीशांत का लैपटॉप, मोबाइल और आईपैड बरामद कर चुकी है, जिनकी जांच जारी है।

मुंबई पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि एक कास्टिंग डायरेक्टर ने ई-मेल के जरिए श्रीशांत को लड़कियों की तस्वीरें भेजी थी। उस कास्टिंग डायरेक्टर की पहचान कर ली गई है। आज पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है। कुछ अभिनेत्रियों की तस्वीरें भी भेजे जाने की खबर सामने आई है। श्रीशांत के लैपटॉप में एक खास फोल्डर में कुछ नंबर सेव किए गए हैं। ये सारे नंबर कोड वर्ड में हैं। इन्हें डी कोड करने की कोशिश जारी है। श्रीशांत की बुकी जीजू और जुपिटर से ई-मेल के जरिए काफी बातचीत हुई थी। इससे भी अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। श्रीशांत के लैपटॉप से कई ई मेल डीलिट कर दिए गए हैं। लैपटॉप की बरामदगी के बाद अब साइबर डिलीट किए गए ईमेल को रिट्रीव करने में जुटी है।

लैपटॉप से जुपिटर और श्रीशांत की एक साथ तस्वीर भी मिली है। ये भी पता चला है कि श्रीशांत ने 14 मई को होटल की एक कार अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट भेजी थी। शक है कि कार सट्टेबाज जुपिटर के लिए भेजी गई थी। सुत्रों के मताबिक जीजू, जुपिटर और श्रीशांत खुद लडकियों को लेनें मुंबई के अंधेरी इलाके के लोखंडवाला इलाके तक गए थे। इस बीच पुलिस की गिरफ्त में आए सट्टेबाज रमेश व्यास ने कई अहम खुलासे किए हैं। स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार सट्टेबाज रमेश व्यास पुछताछ के बाद मुंबई पुलिस को शक है कि रमेश व्यास माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के गैंग का खास आदमी हो सकता है। पूलिस सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में रह रहा दाऊध खुद इस धंधे को देखता है क्योंकि नशे के कारोबार के बाद उसे सबसे ज्यादा फायदा सट्टेबाजी के धंधे से ही होता है।

पुलिस सूत्रों की मानें तो रमेश व्यास ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में रहने वाले छोटानी और नुमान नाम के दो सट्टेबाज दाऊद के इशारे पर मैच में फिक्सिंग कराते हैं। वहीं, दुबई में बैठा सुनील दुबई नाम का आदमी दाऊद के सट्टेबाजी से जुड़े हवाला लेन-देन का जिम्मा संभालता है। इसके अलावा मुंबई में रहने वाला देवेंद्र उर्फ जूनियर कोलकाता दाऊद के भारत में मौजूद सट्टेबाजों को नियंत्रित करता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक डी कंपनी से जुड़े ये चारों खास आदमी ही क्रिकेट में मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी का रैकेट संभालते हैं। इस पूरे धंधे का सबसे बड़ा हिस्सा भारत से बाहर से ऑपरेट होता जो कि हजारों करोड़ रुपए का है। यही नहीं, व्यास ने ये भी खुलासा किया है कि आईपीएल के पहले और दूसरे सीजन में इसी गैंग ने कुल 18 मैच फिक्स किए थे।

 

45 साल के राजा के 27 बच्चे, 14 पत्नियां

लंदन :- दक्षिण अफ्रीकी देश स्‍वाजीलैंड के स्‍वाजी राजा मस्‍वाती तृतीय की 14वीं रानी बनने से इनकार करने के बाद 22 साल की एक महिला ने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण मांगी है. राजा की पहले से 13 रानियां हैं. तिनत्‍सवालो नगोबेनी नाम की इस महिला को उस वक्‍त ब्रिटेन जाना पड़ा जब उस पर अरबपति राजा की नजर पड़ी. इस स्‍वाजी राजा को उसकी विलासी जीवनशैली के लिए जाना जाता है. दरअसल, स्‍वाजी रीति-रिवाजों के मुताबिक 45 साल के राजा को हर साल अपने लिए नई रानी चुनने का अधिकार है. राजा मस्‍वाती 27 बच्‍चों का पिता है. पिछले साल इस राजा की छठी पत्‍नी यह कहते हुए महल से भाग गई थी कि उसके पति ने उसे सालों तक भावानात्‍मक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया है.

बर्मिंघम में रहने वाली नगोबेनी जब सिर्फ 15 साल की थी, तब राजा ने उसे अपनी चौ‍थी पत्‍नी के महल में देखा था. जब उसे पता चला कि राजा उससे शादी करना चाहता है तो वह घबरा गई. नगोबेनी के मुताबिक, 'राजा की पत्‍नियों को राजमहल में रखा जाता है, जहां चारों ओर सुरक्षाकर्मियों का घेरा होता है. जब तक राजा की इजाजत न हो रानियां कहीं नहीं जा सकती. वे सिर्फ साल में एक बार अमेरिका जा सकती हैं क्‍योंकि तब राजा उन्‍हें शॉपिंग करने के लिए एलाउंस देता है.'

पहले नगोबेनी एक निजी बोर्डिंग स्‍कूल में पढ़ाई कर रही थी, लेकिन जब उसे राजा की नियत के बारे में पता चला उसे अपनी सहज जिंदगी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और वह वहां से भागकर ब्रिटेन चली गई. नागोबेनी का कहना है, 'मेरे पास भागने के अलावा कोई चारा नहीं था. कोई भी राजा का आदेश मानने से इनकार करने की हिम्‍मत नहीं दिखा सकता.' नागोबेनी की ब्रिटेन में राजनीतिक शरण की अपील साल 2011 में खारिज कर दी गई थी. पिछले महीने उसे गिरफ्तार कर डीटेंशन सेंटर में भेज दिया गया था. हालांकि बाद में उसे रिहा कर दिया गया.

रविवार, 19 मई 2013

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में तीन और गिरफ्तारियां



नई दिल्ली: स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। नागपुर से गिरफ्तार इन लोगों में से एक क्रिकेटर मनीष गुडेवा भी शामिल है। इसके बारे में बताया जा रहा है कि वह क्रिकेट खेल चुका है और अजित चांडीला के साथ भी खेला है। इसके अलावा जिन दो और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनके नाम हैं सुनील भाटिया और किरण उर्फ मुन्ना। तीनों को गिरफ़्तार कर दिल्ली लाया जा रहा है।

बीसीसीआई की लाचारी


स्पॉट फिक्सिंग मामले में जहां लोगों को बीसीसीआई से कड़े कदमों की उम्मीद थी वहीं बीसीसीआई ने अपना 'लाचार' रूप लोगों के सामने रखा और कहा कि सट्टेबाजों पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है.
बीसीसीआई ने रविवार को कार्रकारिणी की बैठक बुलाई और बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस अपनी लाचारी दिखाई. राजस्थान रॉयल्स स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार अपने तीन क्रिकेटरों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करेगा लेकिन बीसीसीआई ने कहा कि वह दागी तिकड़ी को सजा देने के लिये नियमों का अनुपालन करेगा.
हालांकि श्रीनिवासन ने एक वादा जरूर किया कि अगर खिलाड़ी दोषी पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. बीसीसीआई ने अपनी भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (एंटी करप्शन यूनिट) के प्रमुख रवि सावनी को जांच आयुक्त नियुक्त किया. उनसे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिये कहा गया है.
श्रीनिवासन ने कहा, ‘हमने राजस्थान रॉयल्स के मालिकों को भी आमंत्रित किया था. उसके प्रबंधन ने बैठक में हिस्सा लिया और कार्यकारिणी को घटना के बारे में बताया. हमें बताया गया कि वे तीनों खिलाड़ियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाना चाहते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘जब तक किसी को दोषी नहीं ठहराया जाता तब तक वे निर्दोष है. बीसीसीआई किसी को नहीं बचा रहा है लेकिन हमारी कार्रवाई साफ सुथरी होनी चाहिए. हम नियमों के अनुसार चलेंगे. यदि किसी को दोषी पाया जाता है तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे.’
श्रीनिवासन ने कहा, ‘इसे (जांच) जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा. यह आंतरिक जांच होगी. हमें पुलिस से कुछ सूचना की जरूरत पड़ सकती है. बाकी सावनी पर निर्भर है लेकिन जांच जल्द से जल्द पूरी की जाएगी. हम नैसर्गिक न्याय के सभी पहुलुओं पर गौर करेंगे. हमारी अपनी नियमावली है और बीसीसीआई की अपनी प्रणाली है.’
भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बारे में बीसीसीआई प्रमुख ने कहा कि बोर्ड खिलाड़ियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिये प्रत्येक आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ सुरक्षा अधिकारी के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारी नियुक्त करेगा. उन्होंने इसके साथ ही कहा कि बोर्ड अब खिलाड़ियों के एजेंट को मान्यता प्रदान करेगा.
श्रीनिवासन ने कहा, ‘कार्यकारिणी ने फैसला किया है कि खिलाड़ियों के सभी एजेंट बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त होंगे. प्रत्येक टीम के साथ सुरक्षा अधिकारी के अलावा एसीएसयू (भ्रष्टाचार निरोधक एवं सुरक्षा इकाई) अधिकारी होगा.’
उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. आईसीसी एसीएसयू के प्रमुख इससे निबटने के लिये बीसीसीआई को आवश्यक कदम उठाने के लिये उपाय बताएंगे.’ श्रीनिवासन ने कहा कि बोर्ड के पास सट्टेबाजों पर लगाम लगाने के लिये संसाधन नहीं है और वह केवल खिलाड़ियों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है.
उन्होंने कहा, ‘हम खिलाड़ियों को किसी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसी का काम नहीं कर सकते. जब सट्टेबाजों पर नियंत्रण की बात आती है तो हम कुछ नहीं कर सकते. इस तरह के टूर्नामेंटों में खिलाड़ियों पर निगरानी रखने और सतर्कता को मजबूत करने के लिये विस्तृत ज्ञापन भी मुझे सौंपा गया है.’
श्रीनिवासन ने कहा, ‘टूर्नामेंट से पहले सभी टीमों के खिलाड़ियों को शिक्षित करने के लिये एसीएसयू ने जो कदम उठाये थे उनके बारे में कार्यकारिणी को बताया गया.’ बीसीसीआई ने इन खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया है. इन पर आईपीसी की धारा 420 ( धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) के तहत आरोप लगाये गए हैं.
बोर्ड ने प्रथम श्रेणी क्रिकेटर अमित सिंह को भी निलंबित कर दिया है जो अब कथित रूप से सटोरिया है. उसे 16 मई को 10 अन्य सटोरियों के साथ गिरफ्तार किया गया था. श्रीनिवासन ने इन बातों को भी नकार दिया कि आईसीसी से चेतावनी मिलने के बावजूद बोर्ड ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम नहीं उठाये.
उन्होंने कहा, ‘आईसीसी एसीएसयू ने आज पुष्टि की उन्होंने में कुछ नहीं बताया था. यह सूचना सही नहीं है.’ उन्होंने दावा किया कि बोर्ड को दिल्ली पुलिस से इस मामले में कोई जानकारी नहीं मिली थी. श्रीनिवासन ने कहा, ‘हम खिलाड़ियों पर लागू होने वाले नियमों के हिसाब से चलेंगे. हमने पुलिस से हमारी जांच पूरी करने के लिये सूचना मुहैया कराने का आग्रह भी किया है. हमने इस संबंध में दिल्ली पुलिस को भी मदद की पेशकश की है. यदि खिलाड़ी दोषी पाये जाते हैं तो हम बेरहम कार्रवाई करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे.’
श्रीनिवासन ने कहा कि बोर्ड खिलाड़ियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकारी नहीं है क्योंकि वे राजस्थान रायल्स से अनुबंधित हैं. उन्होंने कहा, ‘हमें सलाह दी गयी कि बीसीसीआई प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकता. फ्रेंचाइजी ऐसा करेगी. हम अनुशासन समिति की रिपोर्ट के अनुसार चलेंगे.’
बोर्ड प्रमुख ने इसके साथ ही कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किये गये खिलाड़ियों से इतर अन्य खिलाड़ियों की भागीदारी के बारे में जानकारी नहीं दी है. उन्होंने कहा, ‘यह तीन खिलाड़ियों से जुड़ा सवाल है जिन्होंने कथित तौर पर स्पॉट फिक्सिंग के रूप में गलत काम किया. जहां तक बीसीसीआई का सवाल है तो हम जांच आयोग की रिपोर्ट के अनुसार चलेंगे. हम कार्रवाई करने में नहीं हिचकिचाएंगे लेकिन हम केवल दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.’
उन्होंने कहा, ‘हम आईसीसी एसीएसयू की सेवाएं ले रहे हैं. वे टूर्नामेंट में निगरानी रख रहे हैं. हमारे पास पेशेवर लोग नहीं हैं.’ श्रीनिवासन ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के लिये खिलाड़ियों को शिक्षित करने वाली प्रणाली को मजबूत किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘हमारी पहले ही नियमावली है. आईसीसी एसीएसयू निगरानी कर रही है. सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने सभी खिलाड़ियों को क्या करना है और क्या नहीं है, के बारे में बताया था. ऐसा नहीं है कि कुछ नहीं किया गया.’
श्रीनिवासन ने कहा, ‘खिलाड़ियों ने उन फार्म पर हस्ताक्षर किये हैं जिनमें कहा गया है कि वे सब कुछ समझते हैं. इसके बाद करने के लिये कुछ नहीं बचा था. मैं पहले से अनुमान नहीं लगा सकता. रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम कार्रवाई कर सकते हैं. हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने में नहीं हिचकिचाएंगे. हम अपने शिक्षा कार्यक्रम को भी मजबूत करेंगे.’
श्रीनिवासन ने इस संकट के लिये खिलाड़ियों पर निजी तौर पर दोषी ठहराना जारी रखा. उन्होंने कहा, ‘गलती खिलाड़ियों के लालचीपन के कारण हुई. हम सट्टेबाजी को प्रश्रय नहीं देते. हम किसी चीज को बढ़ावा नहीं देते. भारत में सट्टेबाजी वैध नहीं है, पुलिस कार्रवाई करेगी.’ बोर्ड प्रमुख ने आईपीएल का भी बचाव किया.
उन्होंने कहा कि प्रशंसकों की भारी उपस्थिति से साबित हो गया है कि टूर्नामेंट इस संकट से उबर जाएगा. उन्होंने कहा, ‘पिछले तीन चार दिन से बीसीसीआई और आईपीएल को जमकर कोसा जा रहा है जैसे कि पूरी दुनिया की खत्म हो गयी हो. सच्चाई यह है कि केवल तीन खिलाड़ियों पर गलत करने के आरोप लगे हैं. आईपीएल की ब्रांड इक्विटी प्रभावित नहीं होगी. हम दर्शकों के आभारी हैं कि वे अब भी मैच देखने के लिये आ रहे हैं.’
श्रीनिवासन से पूछा गया कि क्या सट्टेबाजी को वैध करने से भ्रष्टाचार पर रोक लगायी जा सकती है, उन्होंने कहा, ‘सट्टेबाजी को वैध करना यह अलग विषय है. दूसरे देशों में यह वैध है इससे मदद मिलती है लेकिन भारत के बारे में मैं नहीं जानता.’
बोर्ड प्रमुख से फिर से आईपीएल के बख्रास्त आयुक्त ललित मोदी के आरोपों के बारे में पूछा गया कि उन्होंने आईपीएल में फिक्सिंग को लेकर आगाह किया था. श्रीनिवासन ने कहा, ‘दुर्भाग्य से मैं मोदी पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। मोदी के खिलाफ जांच चल रही है और मेरे लिये कुछ कहना सही नहीं होगा। नीति के अनुसार मैं मोदी को कोई जवाब नहीं देता.’

राजीव शुक्‍ला: जोड़-जुगाड़ की संस्कृति का राजदूत

जी.एस. विवेक | सौजन्‍य: इंडिया टुडे | नई दिल्‍ली |


छठी इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने से एक सप्ताह पहले 26 मार्च को जब तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने फैसला किया कि श्रीलंका के क्रिकेट खिलाडिय़ों को चेन्नै में नहीं खेलने दिया जाएगा तो पूरा टूर्नामेंट ही खतरे में पड़ता दिखाई दिया. इसका सीधा-सा मतलब यह था कि चेन्नै सुपर किंग्स के साथ मैचों में पुणे वॉरियर्स को एंजिला मैथ्यूज, डेहली डेयरडेविल्स को माहेला जयवर्धने, सनराइजर्स हैदराबाद को कुमार संगाकारा और मुंबई इंडियंस को लसित मलिंगा के बगैर ही खेलना पड़ता. आइपीएल के बिलियन डॉलर क्लब में विरोध के स्वर उठने लाजिमी थे.
तभी आइपीएल के अध्यक्ष राजीव शुक्ल ने अपनी चिकनी-चौड़ी मुस्कान और बिना कवर वाले मोबाइल फोन के साथ मोर्चा संभाला. इसी तरह की मुश्किल के मौके पर अपनी सेवाएं देने वाले भारत के इस प्रमुख राजनैतिक संकटमोचन और संपर्क बनाने में माहिर इंसान ने नाम कमाया है. एक के बाद एक फोन कॉल, कुछ वादों और कुछ व्यक्तिगत आश्वासनों के साथ उन्होंने आखिरकार संकट का हल निकाल लिया. उसके बाद शुक्ल ने मुस्कुराते हुए इंडिया टुडे से कहा, ‘‘अगर आप लोगों को जानते हैं और यह भी पता है कि उनके साथ संवाद कैसे किया जाए तो सब कुछ आसान है.’’ इसके बाद वे एक और युक्ति का खुलासा करते हैं, ‘‘अहं को साधना एक कला है. आपको उसका गुर आना चाहिए.’’Rajiv Shukla
अहं को साधने और दुश्मनों को भी अपने तरीके से पटा लेने की उनकी कला ने ही 5 सफदरजंग रोड को राजधानी दिल्ली में सत्ता के गलियारों में एक अहम ठिकाना बना दिया है. उनका फोन लगातार बजता रहता है और जालीदार दरवाजा तमाम दलों की नामी हस्तियों के आने-जाने से खुलता-बंद होता रहता है. कई एक तो आइपीएल के अगले मैच के लिए वीआइपी पास लेने भर के लिए आते हैं.
53 साल के राजीव शुक्ल के पास एक नहीं, कई जिम्मेदारियां हैं-संसदीय कार्य और नियोजन राज्यमंत्री, कांग्रेस के प्रवक्ता, आइपीएल के अध्यक्ष, बीसीसीआइ की मार्केटिंग कमेटी के सदस्य, उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष, हॉकी इंडिया लीग बोर्ड के सदस्य, राजनैतिक समीक्षक और अब एक मीडिया कंपनी के कर्ताधर्ता.
दोपहर के बाद का व्यस्त समय था. शुक्ल सफेद कमीज और डार्क कलर की पैंट पहने लेदर चेयर पर विराजमान थे. हर तरह की पोशाक उन पर अजीब-सी ही लगती है, चाहे संसद के लिए कुर्ता-पाजामे की पोशाक हो, आइपीएल मैचों के लिए कोट-टाइ, बीसीसीआइ की बैठकों के लिए सफारी सूट और पेज 3 पार्टियों के लिए टी शर्ट और काला चश्मा. हर जगह उनकी भूमिका संकटमोचन की ही रहती है. सदा मुस्कराते हुए उनकी नजर इसी बात पर रहती है कि किससे भाईचारा बनाया जाए.
शुक्ल का वेटिंग रूम दूसरे किसी वेटिंग रूम जैसा ही है. हां, एक दीवार ऐसी जरूर है, जिस पर लगी तस्वीरों से उनके सामाजिक जीवन के साथ-साथ आधुनिक भारत में राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक हर बड़े-छोटे कद की झलक मिलती है. सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ एक ग्रुप फोटो, पॉप स्टार केटी पेरी के साथ हाथ मिलाते हुए फोटो, और इसके अलावा उनके कान में फुसफुसाते शाहरुख खान का बड़ा सा फोटो. लेकिन इन सब पर भारी पड़ती है एक फोटो, जो 2002 की है. इसमें लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर अप्रत्याशित जीत मिलने पर कप्तान सौरव गांगुली अपनी कमीज उतार कर लहरा रहे हैं. शुक्ल उनसे हाथ मिलाकर उठाए नजर आते हैं.
ये कुछ अहम नाम हैं, जिनके साथ अपनी दोस्ती के बारे में शुक्ल बताना चाहते हैं. शुक्ल की असली ताकत उनकी फोन बुक की मोटाई, बीबीएम में दर्ज कॉन्टैक्ट्स और इस चतुर बुद्धि में छिपी है कि किसको क्या चाहिए. आजकल अधिकतर शाम को वे किसी आइपीएल स्टेडियम में लग्जरी सोफे पर विराजमान मिलते हैं जहां कभी ललित मोदी विराजा करते थे. आजकल मोदी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेलते हुए लंदन में वनवास काट रहे हैं. शुक्ल कहते हैं, ‘‘मुझे मालूम था कि मोदी के साथ तुलना होकर रहेगी क्योंकि उन्होंने अपना खूब प्रचार जो कर लिया था. लेकिन बात मोदी बनाम शुक्ल की लाइन पर क्यों? आइपीएल अगर वाकई मोदी की देन था तो उन्होंने एक दूसरा क्यों नहीं खड़ा कर लिया?’’
शुक्ल ने 2011 में एक मुश्किल वक्त में आइपीएल की कमान संभाली थी. उस वक्त प्रायोजक साथ छोड़ रहे थे, टीआरपी गिर रही थी और फ्रेंचाइज मालिक घाटा उठा रहे थे. उन्होंने उस दौर में नाव पार लगाई: पेप्सी के साथ 396 करोड़ रु. का करार किया और आइपीएल के दर्शकों की तादाद 192 देशों में 10 करोड़ तक पहुंचा दी. इसके बावजूद उन्होंने खुद को मैनेजर की तरह नहीं बल्कि संकटमोचन के रूप में स्थापित किया है. कांग्रेस जब अपने सहयोगियों या विपक्ष के साथ मुश्किल में फंसती है, जब बीसीसीआइ को सरकार से परेशानी होती है या जब शाहरुख खान मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से भिड़ जाते हैं तब शुक्ल ही सबके विघ्नविनाशक, अंग्रेजी में कहें तो मैंस फ्राइडे का अवतार लेते हैं.
अपने बारे में इस तरह के विशेषण सुनते ही शुक्ल थोड़ा असहज हो जाते हैं. उनका कहना है कि फ्राइडे जैसा शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल होना चाहिए जो मुझसे ज्यादा गुणी हों. ‘‘मेरा काम तो समस्याएं सुलझाना है.’’ इसके बाद वे अपनी कामयाबी का राज भी खोल देते हैं, ‘‘रिश्ते बनाए रखने में खासा समय भी देना पड़ता है और अटेंशन भी. खासी भाग-दौड़ भी करनी होती है. उसमें पैसा भी खर्च होता है और ऊर्जा भी. आपको भरोसा रखना होता है कि सब हो जाएगा.’’
शुक्ल की राय में उनका सीधा-सा सिद्धांत है कि भइया, सबको खुश कर पाना तो मुमकिन है नहीं. पर फिर भी ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को खुश रखना आपके हाथ में है.’’ और इसके लिए वे रोज 17 घंटे काम करते हैंरू 7-8 बैठकें, 2-3 प्रेस वार्ताएं और सैकड़ों फोन काल. किसी भी फोन करने वाले को अक्सर वे यही कहते हैं, ‘‘नो प्राब्लम.’’
शुक्ल के करियर की शुरुआत सियासी रिपोर्टिंग के जरिए हुई थी. उन्हें 1978 का वह दिन आज भी याद है, जब पहली दफा नार्दन इंडिया पत्रिका के कानपुर संस्करण में एक मामूली रेल दुर्घटना की खबर उनके नाम से छपी थी. उसके बाद उन्होंने रविवार पत्रिका में वी.पी. सिंह से जुड़े जमीन के सौदों की खोजी खबरें लिखीं. इसी के जरिए वे कांग्रेस और उसके प्रथम परिवार के करीब पहुंचे. उनका जुड़ाव राजीव गांधी से हुआ और उनकी हत्या के बाद भी परिवार से रिश्ता कायम रहा. बताते हैं कि 10 जनपथ में उनकी बेरोकटोक आवाजाही है और वहां के वे एक प्रमुख सिपाही हैं. पत्नी अनुराधा प्रसाद के साथ उन्होंने एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया. अनुराधा बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद की बहन हैं. चार न्यूज और एंटरटेनमेंट चैनल चलाने वाले बीएजी फिल्म्स की अब वे ही मालकिन हैं और उनकी घोषित संपत्ति 23.3 करोड़ रु. की है.
शुक्ल कहते हैं, ‘‘मैं अपने दोस्तों की गिनती नहीं कर सकता. उनकी लिस्ट तो बहुत लंबी है. मेरे दुश्मनों को गिनना आसान है और उन्हें मैं दोस्तों के पाले में लाने के लिए काम करता हूं. लड़ते तो बच्चे हैं. मैं तो यारों का यार बनना चाहता हूं.
साभार : http://aajtak.intoday.in







शनिवार, 18 मई 2013

सावधान! डरा देंगी तीन डायनें





मनोरंजन की आड़ में अंधविश्वास को मिल रहा बढ़ावा

- राजकुमार सोनी

एक समय पर्दे से लगभग गायब हो गयीं हॉरर (भुतही) फिल्में एक बार फिर लौट आयी हैं। इस बार उनकी वापसी अलग-अलग तरह की फिल्मों से हुई है। मार्च में रिलीज हुई आत्मा और 3जी के बाद 19 अप्रैल को एक थी डायन रिलीज हो रही है। बॉलीवुड में भुतही शक्तियां एक बार फिर से सक्रिय हो गई हैं। चुड़ैलों, रहस्यमय ताकतों जैसी बातों पर आधारित एक थी डायन इस कड़ी में अगला नाम है। इस चलन से हताश महिला समूहों का तर्क है कि डायन बताकर मारना (विच हंटिग) मनोरंजन नहीं बल्कि एक दुखद तथ्य है, जो महिलाओं को निशान बनाने को बढ़ावा देता है।

भोपाल। राज 3 और तलाश ने दर्शकों का मनोरंजन करने की आड़ में मिथकों, जादू टोना को खूब प्रचारित किया है। एकता कपूर और विशाल भरद्वाज द्वारा सहनिर्मित, अभिनेता इमरान हाशमी, कोंकणा सेन शर्मा और कल्कि कोचलिन अभिनीत 19 अप्रैल को प्रदर्शित होने जा रही एक थी डायन का फोकस चुड़ैल की चोटी पर है। एकता को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तरह की फिल्में विच हंटिग के नाम पर महिलाओं के शोषण को बढ़ावा देती है। एकता कहती हैं, मैं नहीं जानती कि डायन की चोटी दिखाने में अंध विश्वास को बढ़ावा देने जैसा क्या है। सवाल यह है कि इस तरह की फिल्मों का विशेष रूप से सीधे-सादे श्रोताओं पर क्या प्रभाव होगा जो इस धारणा को मजबूती देती हैं कि चुड़ैलों का अस्तित्व होता है।

अंधविश्वास नहीं परोसें
ईशा वेलफेयर सोसायटी की संचालक रूबीना खान का कहना है कि जब हिंसा और अंधविश्वास से भरी फिल्में बना रहे हैं, तो जरूरी है कि मनोरंजन के नाम पर इस तरह के विचारों को बढ़ावा, सशक्तता और वैधता देने से बचें। प्रमुख समाजसेवी भाभिका मोटवानी का कहना है कि बीते 100 वर्षों से अधिक के सफर में भारतीय सिनेमा ने डरावनी फिल्मों, दैवीय शक्तियों और कुछ प्रचलित बुराइयों की अवधारणा को मजबूती दी है। जिससे समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा मिला है। हम 21 वीं सदी में जी रहे हैं और वैज्ञानिक यह सिद्ध कर चुके हैं कि दुनिया में कहीं भी भूत-प्रेत नहीं है यह सिर्फ मन का भ्रम है फिर फिल्म निर्माता-निर्देशक अंधविश्वास को बढ़ावा क्यों दे रहे हैं, उन्हें साथ-सुथरी और शिक्षाप्रद फिल्में बनाना चाहिए।

ग्रामीण इलाकों पर बुरा प्रभाव
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव दीप्ति सिंह का कहना है कि अभिनेता ऋषि कपूर और श्रीदेवी अभिनीत फिल्म नगीना को ही ले लीजिए। इस फिल्म में भेष बदलने में माहिर नागिन बदला लेती है। अनेकों दर्शकों के लिए यह मनोरंजन हो सकता है लेकिन देश के सुदूर अंचलों में रहने वाले अधिकांश लोग फिल्माए गए मिथकों या अंधविश्वास पर भरोसा करने लगते हैं। देश के पिछड़े हिस्सों से विच हंटिंग से जुड़ी दिल दहला देने वाली अनेक खबरें आई हैं। इसी तरह हाल ही में प्रदर्शित राज-3, आत्मा और तलाश फिल्में समाज में जादू-टोना, अंधविश्वास को बढ़ा रही हैं।

क्या है एक थी डायन
चर्चित और बहुप्रतीक्षित फिल्म एक थी डायन शुक्रवार 19 अप्रैल को रिलीज हो रही है। एकता कपूर की बैनर की इस फिल्म में सस्पेंस इस बात का है कि आखिर फिल्म में डायन है कौन? कन्नन अय्यर के निर्देशन में बनीं इस फिल्म में इमरान हाशमी, कोंकणा सेन शर्मा, हुमा कुरैशी और काल्की कोचलीन ने मुख्य भूमिका निभायी है। इस फिल्म को एक अलग तरह की भुतही फिल्म बताया जा रहा है। यह फिल्म भूत और चुड़ैल के मनोविज्ञान पर बातें करेगी। फिल्म में डरावने चेहरे दिखाकर डराने के बजाय सिचुवेशनल हॉरर दृश्यों से डराया जाएगा। फिल्म के प्रोमो और ट्रेलर लोगों को पसंद आ रहे हैं। इसके अलावा फिल्म के गाने भी अपनी लिरिक्स की वजह से चर्चाओं में हैं। इस फिल्म का निर्माण एकता कपूर और विशाल भारद्वाज ने मिलकर किया है।


हॉरर शो फैला रहे अंधविश्वास
यूं तो टीवी पर डरने-डराने का दौर काफी समय से चल रहा है। लेकिन इस समय जो शो दिखाई दे रहे हैं, उनमें कई नई बातें देखने को मिल रही हैं। ये नई चीजें हैं- बॉलीवुड के प्रोड्यूसर्स, टीवी के बड़े एक्टर्स, पहले से बेहतर कथानक और थ्री डी तकनीक के स्पेशल इफेक्ट्स। इस बार इन चीजों को भी साथ लेकर दर्शकों को डराया जा रहा है। निर्माता एकता कपूर और विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बना हॉरर सीरियल एक थी नायिका अभी हाल ही में लाइफ ओके चैनल पर शुरू हो चुकी है। इसमें अलग-अलग डरावनी कहानियां दिखाई जा रही हैं। जी टीवी पर चलने वाला एक शो फियर फाइल्स भी है, जिसमें उन लोगों की कहानी को बताया जाता है, जिन्होंने असाधारण चीजें अनुभव की हों। स्पेशल इफेक्ट्स से इसे पहले आए सीरियलों से ज्यादा भयानक बनाने की कोशिश की गई है। सहारा वन पर काला सायाÓ, ये काली-काली रातेंÓ, रात होने को है जैसे कई हॉरर शो एक के बाद एक चलते रहे हैं। फिलहाल हॉन्टेड नाइट्स नामक एक काल्पनिक हॉरर शो हर हफ्ते एक नई कहानी दिखा रहा है। कई हॉरर फिल्में बना चुके विक्रम भट्ट टीवी चैनल सहारा वन पर हॉन्टेड नाइट्सÓ लेकर आए थे। अब कलर्स पर भी उनका नया सुपर नेचुरल थ्रिलर शो अनहोनियों का अंधेरा चल रहा है, जिसमें नायिका आत्माओं से बात करके लोगों की मदद करती है। लाइफ ओके के शो सावित्रीÓ में पुर्नजन्म, अमरता और प्यार की परीक्षा जैसे विषयों के बीच राहुकाल का कैरेक्टर हॉरर और खौफ परोस रहा है। शो की लीड सावित्री बनीं रिद्धि डोगरा कहती हैं, इस सीरियल में कुछ खास स्पेशल इफेक्ट्स डाले गए हैं। दर्शक हर बार कुछ नया चाहते हैं। लव स्टोरी पर तो कई सीरियल्स हैं, पर कुछ तो अलग होना चाहिए। सावित्रीÓ की कहानी में भी शैतानी ताकतों को दिखाया है। इन्हें स्पेशल इफेक्ट्स से रियल दिखाने की कोशिश की गई है, ताकि दर्शक सच में डर को महसूस करें।Ó माना हॉरर का मतलब डराना ही है, मगर सब टीवी ने दर्शकों को नए अंदाज में हंसाने के लिए भूत का सहारा लिया है। हॉरर कामेडी शो Óभूतवाला सीरियलÓ अपने आप में एक अनोखा प्रयास रहा, क्योंकि पहली बार भूत दर्शकों को डराने के बजाय हंसाते हुए दिखाया गया है। इस शो में भूत परिवार और जीवित परिवार के बीच एक दूसरे को बाहर करने का प्रयास, शो का हर एपिसोड भरपूर हंसी ठहाकों से भरा रहा। हॉन्टेड नाइट्स के निर्माता विशाल गुरनानी इन शो के नए फॉर्मेट के बारे में कहते हैं कि दर्शक डरावनी शैली के कार्यक्रमों को देखना पसंद करने लगे हैं। अगर ऐसा नहीं होता, तो सारे चैनल्स हॉरर को लेकर कोई प्रयोग नहीं करते। दरअसल इस तरह के धारावाहिक का ढांचा छोटी कहानियों वाला होता है। इसलिए दर्शक ऊबते भी नहीं है। यही नहीं ऐसे कार्यक्रम से दर्शकों को नई से नई चीजें, नई सामग्री, नई कहानियां देखने को मिलती हैं। इसी वजह से दर्शक ऐसे कार्यक्रम से बंधे भी रहते हैं। ? जी टीवी के प्रमुख (फिक्शन प्रोगाम्स) सुकेश मोटवानी कहते हैं, ऐसे बहुत कम धारावाहिक हैं, जो डरावनी चीजों को दर्शकों के सामने यथार्थवादी तरीके से पेश करते हों। लेकिन नई तकनीक के आ जाने से ऐसे धारावाहिकों की ग्राफिक्स की गुणवत्ता बढ़ी है। इसलिए लोग इसे पसंद भी रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि पहले हॉरर शो नहीं थे देखा 6 जाए तो आहट, शशश..कोई है, जी हॉरर शो, खौफनाक सभी हॉरर शो ही थे। इतना ही नहीं, 90 के दशक में रामसे ब्रदर्स निर्देशित जी हॉरर शो, मानो या न मानो, शुभ कदम, ब्लैक, श्री, और कोई आने को है जैसे डरावने धारावाहिकों लंबी फेहरिस्त है। लेकिन अब जो हॉरर शो दिखाए जा रहे हैं, उनको कुछ ज्यादा ही खौफनाक बनाने की कोशिश हो रही है। अब देखना होगा कि ये सिलसिला कहां तक पहुंचता है।

डर से आपका खून जमा देगी फिल्म द् एविल डेड
हॉलीवुड अभिनेत्री जेन लेवी का कहना है कि दी एविल डेड सभी डरावनी फिल्मों से ज्यादा डरावनी है। यह फिल्म इतनी डरावनी है कि डर से आपका खून जमा देगी। जेनी लेवी 1981 में आई फिल्म दी एविल डेड की रीमेक में दिखाई देंगी। यह मूल फिल्म हिट रही थी। निर्देशक फेड अल्वरेज की फिल्म में लेवी मुख्य भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि फिल्म की शूटिंग के दौरान वह बुरी तरह तंग आ गईं क्योंकि फिल्म में हर डरावनी घटना उनके किरदार के साथ घटती है। उनका कहना है कि फिल्म में अपने किरदार को पूरी तरह जीना थोड़ा मुश्किल रहा था। वेबसाइट फीमेल फर्स्ट डॉट को डॉट यूके के अनुसार लेवी ने कहा, "मैं इसे बहुत अच्छा अनुभव नहीं कह सकती। कभी कभी तो मुझे अभिनय करने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। मैं इतनी थक जाती थी कि रोने लग पड़ती थी और मुझे घर की याद आती थी। यह बिल्कुल वैसी हालत थी जैसा मेरा किरदार था।







कमांडो आगे, नौटंकी साला पीछे




राजधानी में कमाए 7 करोड़

भोपाल। हाल ही में रिलीज हुई दो फिल्मों नौटंकी साला और कमांडो ने अच्छा कारोबार किया है। कमांडो में जहां पांच दिनों में 4 करोड़ रुपए कमाए वहीं नौटकीं साला ने 3 करोड़ रुपए की कमाई की।  भोपाल मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन के संचालक ने बताया कि यह दोनों ही फिल्में औसत दर्शक खींचने में सफल रहीं। खास बात यह रही कि नौटंकी साला और कमांडो दोनों में ही नेक टू नेक फाइट देखने को मिली। पिछले शुक्रवार कॉमेडी की टक्कर एक्शन से थी। रोहन शिप्पी निर्देशित फिल्म नौटंकी साला का मुकाबला एक्शन फिल्म कमांडो से था। दर्शकों ने इन दोनों ही फिल्मों में बराबर की दिलचस्पी लेकर दिखाया कि उन्हें एक्शन भी पसंद है और कॉमेडी भी।
ज्योति सिनेप्लेक्स के डायरेक्टर ने बताया कि पांच दिनों में नौटंकी साला ने कमांडो ने थोड़ी बढ़त ली है। जबकि रिलीज के दिन शुक्रवार को कमांडो का कलेक्शन नौटंकी साला पर भारी था। बाकी के चार दिनों में नौटंकी साला, कमांडो पर हावी होती दिखी। नौटंकी साला ने शुक्रवार को पचास लाख के साथ ओपनिंग की। रिलीज के दूसरे दिन शनिवार को इस फिल्म ने डेढ़ करोड़ से अधिक कमाए। छुट्टी होने का बड़ा लाभ इस फिल्म को मिला। रविवार को इस फिल्म ने साढ़े तीन करोड़ कमाए। इस तरह नौटंकी साला ने पांच दिनों में लगभग 4 करोड़ 5 लाख रूपए की कमाई कर ली। रिलीज हुई दूसरी फिल्म कमांडो ने शुक्रवार को बीस लाख 70 हजार की ओपनिंग ली। रिलीज के दूसरे दिन इस फिल्म का कलेक्शन थोड़ा लुढ़क गया। शनिवार को इस फिल्म ने सिर्फ 1 करोड़ 40 लाख कमाए। रविवार को इस फिल्म ने एक बार फिर कमबैक करते हुए करीब एक करोड़ की आमदनी की। इस तरह विद्युत जामवाल की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म अपने शुरुआती पांच दिनों में तीन करोड़ 10 लाख रूपये कमाने में सफल रही। यह फिल्म रिलीज हुई दूसरी फिल्म से लगभग एक करोड़ रुपए पीछे हैं। रोहन सिप्पी की फिल्म नौटंकी साला एक हास्य फिल्म है, जिसमें आयुष्मान खुराना और कुनाल राय कपूर ने मजेदार अभिनय किया है। कमांडो एक एक्शन फिल्म है जिसे दिलीप घोष ने निर्देशित किया है।
नौटकीं साला सबको पसंद : इस फिल्म में हंसी मजाक और एक्शन होने से राजधानी के दर्शकों को फिल्म खूब पसंद आ रही है।

इत्र-सुरमा को नहीं मिल रहे कद्रदान

 - राजकुमार सोनी

रोगी, जोगी, भोगी कोई नहीं बच सका इत्र की खुशबू से। हमेशा से सभी को इत्र मोहती रही। नवाबो , जमीदारों के हमाम में भी इत्र ने अपनी जगह बनाई,  तो गरीबों के घरों में विशेष मौकों का एहसास भी इत्र ने कराया। किसी के लिए दवा बनी तो किसी के लिए दुआ। रीति- रिवाजों में भी इत्र का विशेष स्थान रहा। मुगल काल में नूरजहाँ की यह खोज आज  इतिहास बनने को तैयार है। आज के समय यूँ कहें की नूरजहाँ हो गयी है इत्र। इसी तरह सुरमा के असली कद्रदान गायब है।

60 साल के कल्लू मियां विगत 45 साल से सुरमा बनाने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुरमा लगाने से आंखों की रोशनी तेज बनी रहती है। आंखों में मोतियाबिंद, धुंधलापन, किरकिरापन नहीं होता। न ही सुरमा रोज लगाने से आंखों की बीमारी होती है। लेकिन अब सुरमा को कोई लगाना नहीं चाहता। बाजार में आंखों के ड्राप्स मिलने लोग आंखों में वही यूज करते हैं। पुस्तैनी सुरमा बनाने वाले कल्लू मियां बड़े गर्व से कहते हैं कि सुरमा का प्रयोग अब कम लोग करते हैं। इसलिए सुरमा लोग नहीं खरीदते हैं।
26 वर्षों से इत्र -सुरमा घर-घर तक पहुचाने वाले रहीम खान बताते हैं की कभी इस धंधे ने इतना जोर पकड़ा था की किसी और धंधे में मन न लगा। वे कहते हैं कि वह सुगंध जो अंतरात्मा तक पहुच जाए। वाकई बचपन में लौटे तो इत्र की कुछ समझ बन सकती है। जब मोहल्ले की किसी गली में कोई नहीं


पहुंचता। तो एक अजीब और आकर्षक महक हमें ही नहीं, बूढ़े , जवान सबको अपनी ओर खींच  लेती। सब उसे घेर लेते, अधिकांश लोग खरीदने के बहाने  फ्री में ही थोडा इत्र लगाकर भीड़ से कल्टी मार लेते थे। बाद में कोई बेला पर गुमान करता तो कोई गुलाब पर इतराता। रहीम कहते हैं की वे अर्थशास्त्र के ग्यानी तो नहीं हैं लेकिन देशी अर्थशास्त्र उन्हें खूब मालूम है। अपने अनुभव का जिक्र करते कहते हैं की तब  महक का मतलब महक ही था। कद्र होती थी, खुशबू के कद्रदान भी थे। आज तो महक के क्या-क्या मतलब हैं पता नहीं। रहीम के मुताबिक भोपाल में आज घर- घर घूम कर इत्र सुरमा बेचने वाले 500 से घट कर 5 बचे हैं। भोपाल का सुरमा नेपाल तक बिकता था। आज वे कुछ फिक्स ग्राहक के अलावा विशेष मौकों पर ही इत्र-सुरमा बेचने निकलते हैं, बड़े अफसोस से कहते हैं मेरा पुराना धंधा है तो छोड़ नहीं सकता। ऐसे ही हालात रहे तो जरूर छूट जाएगा। भोपाल में ही नहीं कई जगह कन्नोज के इत्र की खासी मांग है, इसके बाद मुंबई , दिल्ली, कोलकाता जैसी जगहों से भी इत्र उनके पास आता है। फिरदौश, खस, चन्दन, बेला, हिना, मुसम्बर हजारों वेरायटी कभी उनके बक्से में बंद रहती थी, आज कुछ खास ही बक्से में रहती हैं। रहीम मियां डॉक्टर को चुनौती देते हुए बोलते है की उनके सुरमे के अलावा सब दावा बेकार है। सुरमा आज भी आँखों को तरावट देता है। हमने अपने लड़के को सुरमा-इत्र बेचने के लिए तैयार किया है लेकिन ग्राहकी नहीं होने से बहुत कम माल बिकता है।

मध्यप्रदेश के नेताओं पर मेहरबान पुलिस



- राजकुमार सोनी

प्रदेश की पुलिस जन सेवा और देश भक्ति का पाठ आम लोगों को पढ़ाते हुए नहीं थकती। जनता की हर सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस क्या आपकी सुरक्षा कर रही है। नहीं न, तभी तो प्रदेश में तेजी से अपराध बढ़ रहे हैं और जनता के बीच असुरक्षा की भावना धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। हाल ही में आए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी नेताओं की सुरक्षा में तैनात हैं।


नियम ताक पर
नेताओं को अंगरक्षक उपलब्ध कराने में पुलिस अधीक्षक नियमों को ताक पर रख रहे हैं। ऐसे करीब बाइस जिलों के एसपी पुलिस मुख्यालय की अनुमति के बगैर उन्हें सुरक्षा गार्ड उपलब्ध करा चुके हैं। संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिए जा रहे हैं। उनके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही भी की जा सकती है। पूर्व में गनमैन शुल्क व्यवस्था लागू करने से सैकड़ों की संख्या में जवानों की वापसी हो गई थी।

16 सौ जवान सुरक्षा में
राज्यपाल, मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री को जेड प्लस की सुरक्षा की पात्रता है। इनके अलावा विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री, सांसद, विधायक, हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को अंगरक्षक की पात्रता है। किसी नेता या लोगों को खतरे की स्थिति में ही अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाता है। पुलिस मुख्यालय को आवेदन देने पर पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर गनमैन उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान में सत्तापक्ष ही नहीं विपक्ष के कई ऐसे नेता हैं, जिनकी सुरक्षा में छह से आठ अंगरक्षक तैनात हैं। जो नियमों के विरुद्ध है। स्थिति यह है कि जिन्हें सुरक्षा की पात्रता नहीं है, उन्हें भी अंगरक्षक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सुरक्षा में वर्तमान में एसएएफ के करीब 1600 जवान तैनात हैं।

गनमैन भी शामिल
बाइस जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने अपने क्षेत्रों में नेताओं को खुद अंगरक्षक उपलब्ध करा दिए हैं। जान को जोखिम में बताकर दिए गए आवेदन पत्रों के आधार पर ही पुलिस अधीक्षक गनमैन दे रहे हैं, नियमानुसार पुलिस मुख्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य है।  पुलिस अक्षीक्षक को खुद अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजना चाहिए। ज्यादातर ऐसे गनमैन चंबल और ग्वालियर रेंजों में उपलब्ध कराए गए हैं। कुछ नेता तो ऐसे हैं जिन्हें, पुलिस मुख्यालय से भी सुरक्षागार्ड उपलब्ध कराए गए हैं और  पुलिस अधीक्षक से भी गनमैन ले लिए हैं। गनमैन साथ रखना स्टेट्स सिंबल माना जाता है। इसी कारण जान जोखिम में बताकर गनमैन की मांग की जाती है। अब तो प्रदेश से बाहर जाने के लिए भी नेताओं के माध्यम से गनमैन उपलब्ध कराने की सिफारिशें की जा रही हैं। हालांकि पीएचक्यू ने इस पर अभी निर्णय नहीं लिया है।

 

इनका कहना
जरूरत के हिसाब से पुलिस के जवान उपलब्ध कराए जाते हैं। अगर पुलिस मुख्यालय से अनुमति नहीं ली गई है तो जांच कराई जाएगी।
नंदन दुबे, डीजीपी, भोपाल

लुटेरो... मुझे लूटकर दिखाओ!




  • - गुलाबी गैंग की दबंग महिला ने हजारों बदमाशों को किया पुलिस के हवाले
  • - सड़क पर निकलते ही रूह कांप जाती है बड़े-बड़े अपराधियों की

- राजकुमार सोनी

भोपाल। हर एक महिला में झांसी की रानी होती है, बस कमी है तो उसके अंदर दबे जज्बात को बाहर निकालने की। जब वह घर से बाहर निकलती है तो वह अपने साथ मान-सम्मान व वर्चस्व हाथ में लेकर चलती है। ऐसी ही एक महिला हैं भाविका मोटवानी। जो न केवल राजधानी में रहकर समाज सेवा कर रही हैं बल्कि कुख्यात बदमाश, लुटेरों, चोरों को पुलिस के हवाले कर जांबाजी की मिसाल कायम कर रही हैं।
    नगर एवं ग्राम रक्षा समिति पिपलानी की मेम्बर भाविका मोटवानी के साथ आठ-दस लड़कों की अच्छी-खासी फौज है जो न केवल डंडे-लाठी लेकर चलते हैं बल्कि पुलिस कर्मियों का साथ भी रहता है। उन्होंने इसका नाम गुलाबी गैंग रखा है। यह गुलाबी गैंर शाम ढलते ही बाजार की सड़कों पर निकलना शुरू हो जाता है तो देर रात तक मोहल्लों, गलियों व चौराहों पर अपने-अपने वाहन से निकलता है जिसका नेतृत्व भाविका मोटवानी खुद करती हैं। भाविका सोने-चांदी के आभूषण पहनकर पैदल चलती हैं उनके साथ दूरी बनाकर उनकी गैंग के सदस्य लैस होकर चलते हैं। पीछे-पीछे सिविल ड्रेस में पुलिस के कर्मचारी चलते हैं। जैसे ही कोई लुटेरा या बदमाश लूटने की कोशिश करता है तभी गैंग के सदस्य उस पर हावी होकर धर दबोचते हैं। पीछे से पुलिसकर्मी आकर गिरफ्त में आए आरोपी को थाने लेकर जाकर कार्रवाई करते हैं।

झांसी रानी से प्रभावित
भाविका मोटवानी ने बताया कि मैं मुंबई की रहने वाली हूं। हमने प्राइमरी व उच्च शिक्षा के दौरान झांसी की रानी के चरित्र को बचपन से ही अपने जीवन में उतारा। जब हमारी शादी 2001 में भोपाल हुई तो कुछ ही समय बाद ससुराल वाले मुझे तंग व परेशान करने लगे। मैंने जब इसका विरोध किया तो वे सब मुझ पर हावी होने की कोशिश करने लगे, उसी वक्त मुझमें झांसी की रानी जागृत हुई। ससुराल वालों को लाइन पर लाने के लिए मैं पिपलानी थाने में  मई 2002 में शिकायत करने के लिए गई लेकिन हमने ससुराल वालों की यहां शिकायत न करते हुए पिपलानी टीआई से पूछा मुझे कोई ऐसा काम बताओ जिससे समाज सेवा भी हो और हमारा नाम भी रोशन हो सके। तब उन्होंने बताया कि आप नगर एवं ग्राम रक्षा समिति से जुड़कर यह कार्य कर सकती हो। तभी से मैं इसमें जुड़कर काम कर रही हूं। हमारी गुलाबी गैंग में नावेद खान, वसीम मलिक, समीर हाशमी, अभिषेक तिवारी व राशिद अंसारी शामिल हैं। पिपलानी व अयोध्या चौकी के टीआई से लेकर सभी पुलिसकर्मियों का सहयोग मिलता है।

दो हजार बदमाशों को पकड़वाया
10 सालों में हमने लगभग दो हजार बदमाशों को पकड़ाकर पुलिस के हवाले किया है। इसमें चोर, डकैती, लूट, हत्या, जिला बदर के आरोपी भी शामिल हैं।

दुर्घटनाग्रस्त लोगों को बचाया
पिछले दस सालों में हुई सड़क दुर्घटनाओं के लगभग 600 लोगों को जान अस्पताल पहुंचाकर बचाई है।

समाजसेवा में सक्रिय
सिंधी समाज सहित नवदुर्गा, गणेशोत्सव चल समारोह की व्यवस्था करना, रैली, बड़े समारोह आदि को संभाला है।

आदर्श कटियार ने किया सम्मानित
पिपलानी इलाके में बेहतर काम करने के लिए तत्कालीन एसएसपी आदर्श कटियार ने मुझे सम्मानित किया था।

नहीं मिलता पारिश्रमिक
मोटवानी का कहना है कि पुलिस विभाग ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों को कोई भी पारिश्रमिक नहीं देता, जबकि उन्हें हर माह पारिश्रमिक मिलना चाहिए।

इनका कहना
नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों को हाईटैक किया जा रहा है जिससे अपराधों पर तेजी से अंकुश लगेगा। उन्हें पारिश्रमिक देने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है।
उपेन्द्र जैन, आईजी


बुधवार, 15 मई 2013

सीरिया में सैनिक को मारा, फिर कलेजा निकाल कर खाया

 
सीरिया। पिछले दो सालों से लगातार गृह युद्ध झेल रहे सीरिया ने तो मौत के कई मंजर देखे हैं मगर मौत की इतनी वीभत्‍स तस्‍वीर कभी नहीं देखी होगी। सीरिया में सेना और विद्रोहियों के बीच जंग के दौरान एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसे, देखने के बाद शायद आप कांप जाये। ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर आप कमजोर दिल के हैं तो इसे देखने के बाद शायद आपकी हालत खराब हो जाये। बेहद खतरनाक हथियारों से लैस विद्रोहियों ने अपने एक नेता का वीडियो शूट किया है। इस वीडियो में विद्रोहियों का नेता मारे गये सैनिक के शव को बुरी तर‍ह क्षत-विक्षत कर उसका कलेजा खा रहा है। ये झंकझोर कर रख देने वाली वीडियो को मोबाइल से बनाया गया है और ऐसा माना जा रहा है कि ये सीरिया के होम्‍स सिटी के आस-पास की हैं जहां सेना और विद्रोहियों के बीच लड़ाई बहुत उग्र हो चुकी है।
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वीडियो में विद्रोहियों के जिस नेता को दिखाया गया है उसका नाम अबु सक्कार है। वीडियो में दिखाया गया है कि सक्‍कार एक चाकू उठाता है और मारे गए एक सैनिक के शव के पास जाता है। उसकी छाती को खोलकर, उसके दिल को निकालता है और खा जाता है। इस बीच वो और उसके साथी जोर जोर से कहते हैं हमने भगवान के सामने कसम खाई थी कि हम तुम्हारा दिल और लिवर खा जाएंगे। तुम सैनिक लोग बशर के कुत्ते हो। इसके बाद सब विद्रोही चीयर करते हैं और कहते हैं अल्लाह-अकबर।  
सोर्स : वन इंडिया.इन

जिसकी कलाई पर राखी बांधी, उसी ने लूट ली आबरू



वाराणसी | जिस कलाई पर उसने राखी बांधकर अपनी सुरक्षा का वचन लिया, उसी भाई ने उसकी आबरू को तार-तार कर दिया। इस दरिंदगी का राज तब खुला जब वह गर्भवती हो गई। मामला यूपी के वाराणसी जिले का है। कैंट इलाके में स्थित अपने ननिहाल में रहने वाली एक किशोरी का दामन उसके रिश्ते के भाई ने ही दागदार कर दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी चार माह तक किशोरी को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ बलात्कार करता रहा। पीड़िता के पिता ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने बताया कि आजमगढ़ की मूल निवासी 14 साल की किशोरी की मां की पिछले साल मृत्यु हो गई थी। मां की मृत्यु के बाद कैंट इलाके में वह अपने ननिहाल में रह रही थी। ननिहाल में किशोरी के मामा की गैर-मौजूदगी में उसके साले का बेटा किशोरी को धमकाकर उससे बलात्कार करता रहा। एक सप्ताह पहले पेट में दर्द उठने पर किशोरी को लेकर उसकी मामी डॉक्टर के पास गई तो जांच में पता चला कि वह चार माह से गर्भवती है। किशोरी ने बताया कि उसके रिश्ते के भाई ने उसके सा‌थ दुराचार किया था। पीडिता के पिता के आने पर पंचायत भी बुलाई गई लेकिन पंचायत में आरोपी द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में पिता ने पुलिस थाने जाकर मुकदमा दर्ज कराया। किशोरी को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है। जबकि आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अब 8.5 फीसदी मिलेगा पीएफ पर ब्याज



कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर 8.5 फीसदी ब्याज दर के लिए वित्त मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी है।  यह दर वित्त वर्ष 2012-13 के लिए लागू होगी। नई यह इससे पूर्व वित्त वर्ष की तुलना में 0.25 फीसदी अधिक है। इस बारे में केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) अनिल स्वरुप ने जानकारी देते हुए कहा कि 8.5 फीसदी पीएफ ब्याज दर को वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित कर दिया है।  नई दर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। और नई दर का लाभ 5 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी भविष्य निधि के खाताधारकों को मिलेगा।  उन्होंने यह भी बताया कि अधिसूचना के मुताबिक वर्ष 2012-13 के ईपीएफओ के सभी दावों का निपटारा भी इसी दर पर होगा।  ब्याज की राशि पीएफ खाताधारकों के खाते में जमा कर दी जाएगी।  गौरतलब है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने 25 फरवरी को 8.5 फीसदी पीएफ ब्याज दर को अपनी मंजूरी दी थी।  इसके बाद नए दर को लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय के पास इस प्रस्ताव को भेज दिया गया था।  नियम के मुताबिक वित्त मंत्रालय की ओर से नए दर को अधिसूचित करने के बाद ही पीएफ ब्याज दर को लागू या पीएफ खाते में जमा किया जाता है।

दिल्ली गैंगरेप: तिहाड़ जेल में आरोपी की पिटाई, गंभीर



पिछले साल दिसंबर में हुए बर्बर दिल्ली गैंगरेप के आरोपी विनय शर्मा की तिहाड़ जेल में पिटाई की खबर है। उसके वकील एपी सिंह ने कहा है कि उसकी हालत गंभीर है। उसे लोक नायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सिंह का आरोप है कि विनय को एक महीने से खाने में धीमा जहर दिया जा रहा था।  सिंह की शिकायत पर एक विशेष अदालत ने बुधवार को तिहाड़ जेल के अधिकारियों को विनय को अच्छी से अच्छी चिकित्सा उपलब्ध कराने के आदेश दिए।  साथ ही कहा कि यदि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर हैं तो उसे अच्छे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया जाए।  उल्लेखनीय है कि इससे पहले इसी जेल में गैंगरेप के एक अन्य प्रमुख आरोपी राम सिंह ने फांसी लगा कर खुदकुशी की थी। सिंह के अनुसार विनय की छाती में गंभीर चोटें हैं। उन्होंने बुधवार को मीडिया से कहा, ‘वह खून की उल्टियां कर रहा है और उसे तेज बुखार है। वह गंभीर हालत में है।’  उन्होंने आरोप लगाया कि कड़ी सुरक्षा वाले तिहाड़ में 20 साल के शर्मा को उसके साथी कैदियों ने जमकर पीटा। जबकि पिछले कुछ सप्ताह से दिए जा रहे धीमे जहर के कारण उसकी हालत पहले ही खराब थी। सिंह ने बताया कि पहले विनय शर्मा को जेल के ही क्लीनिक में भर्ती किया गया, लेकिन जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी हालत और खराब हुई।  इसके बाद उसे लोक नायक अस्पताल में भर्ती किया गया जहां के डॉक्टरों ने इस संबंध में अभी कुछ नहीं कहा है। तिहाड़ के अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। मार्च में गैंगरेप के आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह का शरीर रहस्यमयी परिस्थितियों में उसकी कोठरी में लटका मिला था। जेल अधिकारियों ने उसकी आत्महत्या की बात कही थी, लेकिन उसके वकील ने हत्या का शक जाहिर किया था।  राम सिंह के बाद शर्मा उन मुख्य चार आरोपियों में है, जो 16 दिसंबर को बस में 23 वर्षीया युवती से हुए गैंगरेप के मामले का सामना कर रहे हैं।  मामले का पांचवां आरोपी 17 साल का नाबालिग है, जिस पर जुविनाइल कोर्ट में केस चल रहा है।  हादसे की शिकार युवती की 13 दिनों बाद सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। गुड़िया के परिजन बलात्कारियों के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं।

सोने के भावों में जोरदार गिरावट

सोने की कीमतों में बुधवार को साल की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। भोपाल सराफा बाजार में सोने का भाव 600 रुपये लुढ़क कर 27,300 रुपये प्रति दस ग्राम पर रहे। कीमतों में गिरावट की वजह ग्लोबल बाजार में नरमी का रुख रहा। सोने की ही तरह चांदी भी बड़ी गिरावट का शिकार हुई और इसके भाव 800 रुपये लुढ़क कर 44,700 रुपये प्रति किलो पर आ गए। कारोबारियों के मुताबिक ऊंची कीमतों पर स्टॉकिस्टों की मांग घटने और ग्लोबल बाजार में नरमी का रुख दिखने के चलते सोने में गिरावट दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मजबूत होकर तीन सप्ताह के ऊंचे स्तर पर पहुंचने का नकारात्मक असर सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। मंगलवार को 380 रुपये की बढ़त दर्ज करने के बाद ग्लोबल रुख के चलते बुधवार को सोना 600 रुपये नरम पड़ कर 27,300 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गया। घरेलू बाजार में चांदी सिक्कों के भाव 75,000 रुपये प्रति सैकड़ा लिवाली व 76,000 रुपये प्रति सैकड़ा बिकवाली के स्तर पर रहे।

संजय दत्त को जान से मारने की धमकी!


बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को लेकर मुंबई की आर्थर रोड जेल को एक खत मिला है. इस खत में संजय दत्त को धमकी दी गई है. जेल प्रशासन ने इस खत के बाद उनकी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी देने का वादा किया है.
गौर करने वाली बात है कि संजय दत्त ने मंगलवार को अपनी जान को खतरा बताया था और टाडा कार्ट में याचिका दायर करके सीधा पुणे के यरवडा जेल में सरेंडर करने की मांग की थी. हालांकि उन्होंने बुधवार अपनी याचिका वापस ले ली.
अब संजय दत्त जेल की जगह टाडा कोर्ट में सरेंडेर करेंगे. संजू बाबा को गुरुवार शाम 4 बजे तक सरेंडर करना है. वहीं, धमकी भरी चिट्ठी मिलने के बाद सवाल यही है कि आखिर संजय दत्त को कौन मारना चाहता है?
याचिका जिसमें संजय दत्त ने जाने के खतरे की बात कही थी...
संजय दत्त को अदालत में सरेंडर करने से डर लग रहा है. उनके वकीलों ने टाडा कोर्ट में एक याचिका दायर कर दो दलीलें दी थी.
दलील नंबर 1- संजय दत्त को कट्टरपंथी ताकतों से अपनी जान पर खतरा महसूस हो रहा है.
दलील नंबर 2- वो नहीं चाहते कि कोर्ट से जेल ले जाने तक मीडिया के कैमरे उनका पीछा करते रहें और कोई हादसा हो जाए.
पिछली बार जब संजू बाबा जब गिरफ्तार हुए थे तो मीडिया उनके पीछे लग गई थी. इस वजह से उन्हें 120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी भगानी पड़ी थी.
गौरतलब है कि 1993 मुंबई ब्लास्ट को लेकर 21 मार्च को आर्म्स एक्ट (गैरकानूनी रूप से हथियार रखने के लिए) के तहत संजय दत्त की सजा बरकरार रखने का फैसला सुनाया था. न्यायालय ने दत्त को 5 साल कैद की सजा सुनाई थी. वह पहले 18 महीने जेल की सजा काट चुके हैं और अब उन्हें जेल में साढ़े तीन साल की और सजा काटनी है.
इस फैसले के बाद इस बॉलीवुड अभिनेता ने अपनी फिल्मों की शूटिंग खत्म करने के बाद आत्मसमर्पण करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें समर्पण करने के लिए 4 हफ्तों की मोहलत दी थी. सरेंडर के लिए मोहलत मिलने के बाद संजय दत्त ने सु्प्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जिसे खारिज कर दिया गया.
क्या है मामला?
संजय दत्त को गैरकानूनी तरीके से नौ एमएम की पिस्तौल और एके 56 राइफल रखने के जुर्म में टाडा अदालत ने दोषी ठहराया था. ये हथियार उन्हीं विस्फोटक सामग्री और हथियारों की खेप का हिस्सा थे, जिनका इस्तेमाल मुंबई बम धमाकों में किया गया था. इन धमाकों में 257 व्यक्ति मारे गये थे और 700 से ज्यादा जख्मी हो गए थे. मुंबई की टाडा अदालत ने 6 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे घटाकर 5 साल कर दिया था.

शातिर नकबजन गिरोह का पर्दाफाश, 20 लाख का माल बरामद



भोपाल। क्राइम ब्रान्च भोपाल द्वारा ऐसे नकबजन गिरोह का पर्दाफाश किया गया जो दिन एवं रात्रि में टेंट हाउस, औद्योगिक क्षेत्र में ऐसे स्थान जहां पर सामान बाहर पड़ा हो, सेन्ट्रींग का सामान इत्यादि की रैकी करते थे एवं अपने स्वयं के ट्रक से साथियों की मदद से पूरा सामान चोरी कर कबाडिय़ों को बेच देते थे। इस नकबजन गिरोह से भोपाल शहर के विभिन्न थानों की 6 नकबजनी का लगभग 20 लाख रुपए से अधिक राशि का मसरूका बरामद किया गया ।
क्राइम ब्रान्च को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि चार-पांच व्यक्ति अपने स्वयं के ट्रक से औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा, पिपलानी एवं शहर के अन्य क्षेत्र में आते हैं एवं सामान सूना इलाका देख कर गाड़ी में अपने साथियों की मदद से भरते हैं एवं रफूचक्कर हो जाते हैं । मुखबिर की सूचना के आधार पर क्राइम ब्रान्च की टीम द्वारा दिए गए इलाकों पर सतत् निगाह रखी जा रही थी ।15 मई 2012 को मुखबिर द्वारा पुन: सूचना दी गई उक्त गिरोह पिपलानी क्षेत्र से सामान भरकर जा रहा है। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रान्च की टीम द्वारा अल्प समय में ही टीम गठित कर थाना पिपलानी पुलिस के सहयोग से भोपाल से बाहर जाने वाले रास्तों में कर्मचारी तैनात कर थाना पिपलानी क्षेत्र में ही घेरा बंदी कर ट्रक सहित धरदबोचा गया । पकड़े जाने पर घटनास्थल पर ही उक्त व्यक्तियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना नाम अनीस, निवासी कोहेफिजा का होना बताया गया एवं सामान के बारे में पूछने पर हीलाहवाली करते हुए एक दूसरे का सामान बताने लगे । घटनास्थल पर सामान के साथ सभी व्यक्तियों को पकड़कर क्राइम ब्रान्च लाया गया एवं सख्ती से पूछताछ की गई तो पकड़े गये व्यक्तियों में अनीस बेग पिता अजीज बेग पुराना शातिर नकबजन निकला तथा दूसरा अजय उर्फ बब्लू पिता तुलसीराम, निवासी- सईद कबाड़ी की दुकान कोलार, भी कई मामलों में भोपाल के थानों में बंद हुआ है । दोनों आरोपियों से पूछताछ करने पर आरोपियों ने थाना अशोकागार्डन क्षेत्र से एक मोटर साइकिल, थाना पिपलानी क्षेत्र से एल्युमिनीयम के गोदाम से दो ट्रक एल्युमिनीयम एवं टेंट हाउस का सामान, पानी की 10-15 एचपी की चार मोटरें, दो वाल्व, थाना कमलानगर क्षेत्र से लगभग 300 सेन्ट्रिंग प्लेटें, थाना गांधीनगर क्षेत्र से सेन्ट्रिंग प्लेटें, थाना हबीबगंज क्षेत्र से सेन्ट्रिंग प्लेटें, कटर मशीन इत्यादि सामान चोरी करना कबूल किया एवं चोरी का माल शातिर कबाड़ी सईद पिता उस्मान, निवासी जेजे-77, चूनाभट्टी, थाना कमलानगर को बेचना बताया। आरोपियों के बताये अनुसार सईद कबाड़ी की तलाश की गई एवं चोरी किया गया लगभग मसरूका बरामद किया गया । आरोपियों से पूछताछ लगातार की जा रही है एवं इनके तीन अन्य साथियों की तलाश सरगर्मी से की जा रही है इनसे और भी अधिक नकबजनी की वारदातों का खुलासा होने की संभावना है। आरोपी अनीस जाहिरा तौर पर टाटा-407 का ट्रक चालक है तथा अजय उर्फ बबलू सईद कबाड़ी की दुकान पर नौकर के रूप में काम करता है एवं चोरी का माल ठिकाने लगाने में सहयोग करता है । उक्त गिरोह को पकडऩे मे क्राइम ब्रान्च के उनि नंदजी भारती, सउनि बीरेन्द्र उइके, प्रआर संजय मिश्रा, आर. ऐहतेशाम, मुरली कुमार, जावेद, भूपेन्द्र, नफीस, अजहर, नईम की सराहनीय भूमिका रही ।

गिरफ्तार किए गए आरोपी
1. अनीस बेग पिता स्व. अजीज बेग, उम्र 34 साल निवासी एकतानगर पुराना सचिवालय के पीछे झुग्गी कोहेफिजा भोपाल
2. अजय उर्फ बबलू पिता तुलसीराम, उम्र 24 साल, निवासी इन्द्रपुरी लेंवर कालोनी, निजामुद्दीन रोड पिपलानी भोपाल
3. मो. सईद पिता स्व. हाजी मो. उस्मान, उम्र 45 साल, निवासी जेजे-77, झुग्गी कोलार गेस्ट हाउस के सामने, भोपाल
थानों के प्रकरण जिनका निराकरण खुलासा हुआ-
क्र.    थाना    अपराध क्रमांक एवं धारा
1. पिपलानी     152/13, धारा 379 भादवि
2. पिपलानी     160/13, धारा 457, 380 भादवि
3. पिपलानी     176/13, धारा 457, 380 भादवि
4. कमलानगर    223/13, धारा 379 भादवि
5. अशोकागार्डन     256/13, धारा 379 भादवि
6. गांधीनगर    50/13, धारा 457, 380 भादवि

शनिवार, 11 मई 2013

महिला पुलिसकर्मियों के पास नहीं है शौचालय



ह्मूमन राइट्स वॉच का कहना है कि अफगानिस्तान में महिला पुलिसकर्मियों को अलग टॉयलट और कपड़े बदलने के लिए अलग कमरे उपलब्ध करवाए जाएँ। अभी अफ़गानिस्तान में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी एक ही शौचालय इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से कई बार महिला पुलिसकर्मियों को कुछ पुरुष सहकर्मियों के ग़लत बर्ताव का शिकार होना पड़ता है। ह्मूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के मुताबिक कई शौचालय ऐसे हैं जिन्हें आप अंदर से बंद नहीं कर सकते और कुछ शौचालयों के दरवाज़ों में सुराख होते हैं जिस वजह से महिलाकर्मियों को एक-दूसरे के लिए टॉयलट के बाहर खड़े रहना पड़ता है। सरकार या पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। काबुल पुलिस प्रमुख ने हाल ही में आदेश दिया था कि प्रांतीय पुलिस स्टेशनों में महिलाओं के लिए अलग शौचालयों का इंतज़ाम किया जाए। ेकिन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि ऐसे निर्देशों का पूर्व में कभी पालन नहीं हुआ है।

'महिलाओं की प्रताड़ना आम बात'
अफ़ग़ानिस्तान में करीब 1500 महिला पुलिसकर्मी काम करती हैं। आंतरिक मंत्रालय का कहना है कि वो 2014 तक ये संख्या पाँच हज़ार तक ले जाना चाहता है। पुलिसबल को फंडिंग पश्चिमी देशों से मिलती है। एचआरडब्ल्यू के मुताबिक जैसे-जैसे महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ी है वैसे-वैसे पुरुष पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ बलात्कार और यौन शोषण की शिकायतें भी बढ़ी हैं। 2001 में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के बाद अफ़गानिस्तान के रूढ़ीवादी समझे जाने वाले इलाकों में भी महिलाएँ नौकरी पर लौट आई थीं। वे शिक्षिका, स्वास्थ्यकर्मी और अधिकारियों के पद पर काम कर रही थीं। लेकिन जैसे-जैसे दक्षिणी हिस्सों में तालिबान का प्रभाव फिर से बढ़ा, वैसे-वैसे महिलाओं को धमकाने की घटनाएँ भी बढ़ने लगी। अफगानिस्तान में महिलाएँ के खिलाफ हिंसा आम बात हैं लेकिन इसकी शिकायत कम ही होती है और न ही ज़्यादा मामलों में सज़ा होती है।ह्मूमन राइट्स वॉच के एशिया निदेशक ब्रैड एडम्स का कहना है कि बहुत सी अफ़गान महिलाओं के लिए प्रताड़ना आम बात है और महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के ब़गैर महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की बात अधूरा वादा ही रहेगी। अफग़ानिस्तान में चरमपंथ की लड़ाई के खिलाफ़ महिला पुलिसकर्मी अहम भूमिका निभाते हैं जैसे पुलिस नाकों पर महिलाओं की जाँच करना।

वोट डालने नहीं निकला पाकिस्‍तान, आतंकियों ने ली 25 की जान

 
इस्‍लामाबाद. पाकिस्तान में हिंसा और विरोध के बीच शनिवार को नेशनल असेंबली और प्रांतीय असेंबलियों के लिए मतदान हो रहा है। मतदान खौफ के साए में हो रहा है। दोपहर बाद तीन बजे तक महज 25 फीसदी मतदान हो सका है। पाकिस्‍तान में कराची से लेकर पेशावर तक हुए चार बम धमाकों में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं जबकि 198 लोग जख्‍मी हुए हैं। नेताओं ने वोट के लिए फरेब भी किया है। कुछ इलाकों में तमाम पार्टियों ने मिल कर 'सीक्रेट डील' की है कि महिलाओं को वोट नहीं डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चुनाव हिंदुस्‍तान के नाम पर भी लड़ा जा रहा है। सत्‍ताधारी पीपीपी की धुर विरोध पीएमएल(एन) के मुखिया नवाज शरीफ ने कहा है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो करगिल संघर्ष और 26/11 में पाकिस्‍तान की भूमिका की जांच करवाएंगे। शरीफ को कड़ी टक्‍कर देने वाले इमरान खान नया पाकिस्‍तान बनाने की बात कर रहे हैं। क्रिकेट स्टार शाहिद अफरीदी ने कराची में अपना वोट डाला। देश में पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया है और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हस्तांतरण होने जा रहा है। पिछली बार परवेज मुशर्रफ ने फौजी शासन खत्म कर चुनाव करवाए थे।  विभिन्न आतंकी संगठनों ने मतदान केंद्रों पर हमले की धमकी दी है। देश में 73 हजार में से 20 हजार केंद्रों पर हमलों की आशंका है। देश भर में छह लाख सुरक्षा कर्मी और सैनिक तैनात किए गए हैं। मतदान सुबह आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक चलेगा। मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन तथा क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ के बीच है। इन दिनों घायल हैं, पर उन्‍होंने काफी मेहनत की है और उन्‍हें इसका नतीजा मिलने की काफी उम्‍मीद है।

अक्षय तृतीया पर मनोकामना होगी पूरी



अक्षय तृतीया तिथि को सत्ययुग के आरम्भ की तिथि भी माना जाता है , इसीलिए इसे "कृतयुगादि तृतीया" भी कहते हैं। यदि वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि को बुधवार और रोहिणी नक्षत्र भी हों तो वह तिथि सर्वाधिक शुभ और पुण्यदायी होने के साथ-साथ अक्षय प्रभाव रखने वाली हो जाती है।  अक्षय तृतीया पर दिया गया दान अक्षय हो जाता है, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में जाना जाता है। जन मानस में यह तिथि अक्षय तीज के नाम से प्रसिद्द है। पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान, दान, जप, स्वाध्याय, तर्पण आदि करना शुभ फलदायी माना जाता है। इस तिथि में किये गए शुभ कर्मों का कभी क्षय नहीं होता है। भविष्य पुराण में दिए गए एक प्रसंग के अनुसार शाकल नगर में रहने वाले धर्म नामक एक धर्मात्मा वणिक अक्षय तृतीया के दिन पूर्ण श्रद्धा भाव से स्नान, ध्यान और दान कर्म किया करता था, जबकि उसकी भार्या उससे मना करती थी। मृत्यु के बाद वह वणिक किये गए दान पुण्य के प्रभाव से द्वारका नगरी में सर्व सुख संपन्न राजा के रूप में अवतरित हुआ। इस जन्म में भी वह अक्षय तृतीया के पुण्य प्रभाव को भूला नहीं था। राजा के रूप में भी वह अक्षय तृतीया के दिन दान और पितरों को तर्पण अवश्य करता था।  अक्षय तृतीया को पवित्र तिथि माना गया है। इस दिन गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों में स्नान करके श्रद्धा भाव से अपने पितरों का तर्पण करना और सामथ्र्य के अनुसार जल एवं अन्न से पूर्ण घट, अनाज, गन्ना, दही, सत्तू, फल, सुराही, हाथ के बने पंखे, वस्त्र आदि का दान करना विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है। मत्स्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन अक्षत, पुष्प, धूप, दीप आदि द्वारा भगवान् विष्णु की आराधना करने से भगवान् विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा संतान भी अक्षय बनी रहती है। अक्षय तृतीया के दिन दीन दुखियों की सेवा करना, ग्रीष्म ऋतु से सम्बंधित वस्तुओं का दान करना, पितरों का तर्पण करना, शुभ कर्मों की ओर  अग्रसर रहते हुए मन, वचन और कर्म से अपने मनुष्य धर्म का पालन करना ही अक्षय तृतीया पर्व की सार्थकता है। कलियुग के  नकारात्मक एवं दुष्प्रभाव से बचने के लिए अक्षय तृतीया के दिन भगवान् विष्णु की उपासना करके दान और पितरों को तर्पण अवश्य करना चाहिए, ऐसा करने से निश्चय ही अगले जन्म में समस्त ऐश्वर्य एवं सुख प्राप्त होंगें।

अक्षय तृतीया दो दिन, सूर्योदय से 13 की तिथि मान्य

आसनसोल: अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती है, जो इस वर्ष 12 व 13 मई को मनायी जायेगी. यह 12 मई की सुबह 08:06 बजे से शुरू होकर 13 मई को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी. शास्त्रनुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही पूर्ण तिथि मानी जाती है. इससे 13 मई को ही अक्षय तृतीया मान्य है. इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है. इस वर्ष स्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग व रित योग के एक साथ होने से इसका महत्व और बढ़ गया है.
सोने की खरीदारी शुभकारी
अक्षय तृतीया पर जितना महत्व दान-पुण्य का है, उतना ही सोने की खरीदारी का भी है. सोना अग्नि तत्व माना गया है. तृतीया तिथि भी अग्नि तत्व है, जिसकी स्वामिनी गौरी है. मां गौरी को लाल रंग प्रिय है. इससे अग्नि के रूप में सोने की खरीदारी करना अति शुभकारी है.
साढ़े तीन तिथियां हैं महत्वपूर्ण
पंडित मार्कंडेय शारदेय के अनुसार अक्षय तृतीया हिंदू संस्कृति की महत्वपूर्ण तिथियों में एक है. यह तिथि अक्षय फलदायी है. ज्योतिष के अनुसार साढ़े तीन मुहूर्त ऐसे हैं, जिनमें किसी पंचांग की जरूरत नहीं पड़ती. उनमें चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया, आश्विन शुक्ल दसवीं (विजया दशमी) व कार्तिक शुक्ल प्रतिप्रदा का आधा दिन शामिल है. इसमें शुभ काम करने के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है.
पांच तरह की होती हैं तिथियां
हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार तिथि पांच तरह की होती है. नंदा,भद्रा, जया, रिक्ता व पूर्णा. इन्हीं पांचों तिथियों में कई तरह के शुभ कार्य किये जाते हैं. इनमें जया तिथि में अक्षय तृतीया मनायी जाती है. जया विजय का प्रतीक है, इसलिए इसका विशेष महत्व है. हिंदू धर्म ग्रथों के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीय को हुआ था. कार्तिक, माघ व वैशाख भगवान विष्णु के माह है.
ज्वेलरी शॉप में बुकिंग शुरू
अक्षय तृतीया को लेकर 13 मई के लिए शहर के चर्चित ज्वेलरी शॉपों में बुकिंग की जा रही है. कई सोने-चांदी की दुकानों पर विशेष ऑफर भी दिये जा रहे हैं. इनमें मेकिंग चार्ज व सोने के सिक्के आदि पर विशेष छूट शामिल हैं. तनिष्क शो-रूम के संचालक ने बताया कि हीरे की अंगूठी, ब्रेसलेट, इयर रिंग व पेंडेंट आदि की 15 से 20 बुकिंग हो चुकी है. आठ हजार से अधिक के डायमंड खरीद पर 0.25 मिली ग्राम का सोने का सिक्का मुफ्त दिया जा रहा है. शहर के कई शोरूम में मेकिंग चार्ज में 50 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है. स्क्रैच कार्ड का विशेष ऑफर भी है.
 'अक्ती' के नाम से प्रचलित
'अक्ती' के नाम से प्रचलित अक्षय तृतीया को लेकर पूरे राज्य में तैयारी चल रही है. लगभग 28 वर्षों बाद अद्भुत संयोग के साथ आ रही अक्षय तृतीया इस बार ज्योतिष की तिथियों के फेर में फंस गई है. कई ज्योतिषी 12 तो कुछ 13 मई को अक्षय तृतीया होने की बात कह रहे हैं. कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि दोनों दिन अक्षय तृतीया मनाई जाएगी. तिथियों के फेर में फंसी अक्षय तृतीया इस बार दो दिन यानी 12 व 13 मई को मनाई जाएगी. अक्षय तृतीया पर्व पर इस बार शनि 28 साल बाद अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे.
पंडितों के अनुसार, भक्तों के लिए यह संयोग विशेष फलदायी होगा. भगवान परशुराम जयंती पर्व को लेकर भी पंडितों की अलग-अलग राय है. इसीलिए कुछ 12 तो कुछ 13 मई को इसे मनाने का तर्क दे रहे हैं.
एक ओर जहां ज्योतिषी अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर उलझे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर अक्षय तृतीया के लिए गुड्डे-गुड्डियां बेचने वाले बाजार पहुंचने लगे हैं. 12 मई को 10.18 बजे से अक्षय तृतीया की तिथि लगेगी तथा वह दूसरे दिन 13 मई को 12.47 बजे तक जारी रहेगी. इसलिए अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त दोनों दिन पूरे समय रहेगा. इस दौरान किए गए शुभ कार्य का पूरा लाभ मिलेगा. 13 मई को अक्षय तृतीया पड़ेगी. 12 मई को सूर्य उदय की द्वितीय तिथि है. 12 मई को भगवान परशुराम जयंती है. 13 मई को तृतीया रहेगी तथा इसी दिन अक्षय तृतीया पड़ेगी. इस दिन सिद्ध शुभ मुहूर्त में शुभ कार्य किए जाएंगे. आम लोगों में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनती दिख रही है, परंतु ज्योतिषियों ने दोनों ही दिन शुभ मुहूर्त होने की बात कहकर एक तरह से वर्षों बाद आ रहे इस विशेष संयोग के प्रति आम लोगों का रुझान और भी बढ़ा दिया है.
विशेष संयोग: सूर्य अपनी उच्च राशि में अक्षय तृतीया इस बार विशेष संयोगों के साथ आ रही है. पर्व पर जहां एक ओर सूर्य देव अपनी उच्च राशि 'मेष' और चंद्र देव अपनी उच्च राशि 'वृषभ' में गोचर करेंगे, वहीं न्याय के देवता भगवान शनि भी अपनी उच्च राशि 'तुला' में गोचर करेंगे.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 28 साल बाद अक्षय तृतीया पर शनि देव का गोचर हो रहा है. इस संयोग से भक्तों को हर क्षेत्र में सकारात्मक फल की प्राप्ति होगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवसर पर शनि साढ़े साती से पीड़ित जातक भगवान शनि की विधिवत आराधना, हवन-अनुष्ठान कर इस दोष से छुटकारा पा सकेंगे.

गुरुवार, 9 मई 2013

1984 सिख विरोधी दंगे : 3 आरोपियों को उम्रकैद की सजा



नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित 29 वर्ष पुराने एक मामले में दोषी ठहराये गए पांच में से तीन मुजरिमों को गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा सुनायी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जे आर आर्यन ने बलवान खोक्कर, गिरधारी लाल और कैप्टेन भागमल को उम्र कैद की सजा सुनायी। अदालत ने इन तीनों को 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। दंगा करने के जुर्म में दोषी ठहराये गए दो अन्य दोषियों पूर्व पाषर्द महेंद्र यादव और पूर्व विधायक किशन खोक्कर को तीन वर्ष जेल की सजा सुनायी गई। हालांकि अदालत ने यादव और खोक्कर दोनों को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने सभी दोषियों पर एक एक हजार रुपए का जुर्माना भी किया है। न्यायाधीश ने इसके साथ ही पांचों दोषियों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जिस मामले में पांचों व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया था वह पांच सिखों केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या से संबंधित है। इन सिखों की दिल्ली छावनी इलाके में स्थित राजनगर में भीड़ ने हत्या कर दी थी। इस वारदात के शिकार एक ही परिवार के सदस्य थे।

बुधवार, 1 मई 2013

60 साल के ससुर ने किया रेप

बलिया। यूपी पुलिस प्रदेश में किस कदर अपराध को रोकने में नाकाम रही है इसका सबूत इस खबर को पड़ऩे के बाद मिल जाएगा। बलिया के पास नागरा इलाके में एक 12 साल की बहु के साथ उसके ससुर ने रेप किया। मामला सुनने में जितना अजीब लगा रहा है वारदात उतनी ही गंभीर है। बच्ची के घरवालों न पिछले साल अपनी 12 साल की बेटी का विवाह  नागरा गांव के युवक से कराया था। शादी के बाद बच्ची अपने ससुराल चली गई।
लेकिन ससुराल में उसके साथ उसके ही 60 साल के ससुर ने उसका रेप किया। बच्ची ने अपने साथ हुई इस घटना के बारे में अपने घरवालों को बताया तो उसके चाचा फौरन वहां से उसे लेकर चले गए। बच्ची के चाचा ने थाने पहुंचकर फोरन उसके ससुर के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
एसएसपी अशोक त्रिपाठी ने ससुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर माले की तफ्तीश शुरु कर दी है। साथ ही बच्ची का मेडिकल कराने के लिए उसे अस्पताल भेज दिया है। असोक ने बताया कि रिपोर्ट के आते ही मामला साफ हो जएगा। फिलहाल ससुर फरार हो गया है।