शनिवार, 30 मार्च 2013

मंत्रिमंडल से कटेगा बेनी प्रसाद वर्मा का पत्ता?



नई दिल्ली ।। केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता बेनी प्रसाद वर्मा और समाजवादी पार्टी के बीच बयानों की जंग रुकने का नाम नहीं ले रही, लेकिन संकेत हैं कि समाजवादी पार्टी बेनी प्रसाद को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटवाने में करीब-करीब कामयाब हो गई है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही बेनी बाबू को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया जाएगा।
एक हिंदी न्यूज चैनल ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। चैनल की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि यूपीए सरकार को बनाए रखने के लिए बेनी बाबू के मंत्री पद की कुर्बानी देने को तैयार हो गई है। समाजवादी पार्टी के सूत्रों ने चैनल को बताया कि उनकी मांग थी बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्रिमंडल से हटाने की और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनकी मांग पर फैसला कर लिया जाएगा।

गौरतलब है कि बेनी प्रसाद वर्मा न केवल समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह को आतंकवादी और कमिशनखोर बता चुके हैं बल्कि उस बयान पर केंद्र जताने के बाद भी वह लगातार एसपी नेताओं पर कॉमेंट जारी रखे हुए हैं। जवाब में समाजवादी पार्टी उनके मानिसक संतुलन पर सवाल उठा रही है। मुलायम सिंह ने शनिवार को कहा, बेनी प्रसाद वर्मा बार-बार राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात करते हैं। प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी का फैसला पार्टी के उपयुक्त मंच पर होता है, मगर बेनी बाबू पता नहीं कैसे अपनी ओर से इसकी घोषणा करते रहते हैं। उन्होंने ताना मारते हुए कहा, जो शख्स अपने बेटे की जमानत नहीं बचा सका, वह किसी और को प्रधानमंत्री कैसे बनवाएगा, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा।

इस कॉमेंट पर भी बेनी बाबू चुप नहीं रहे। उन्होंने जैसे को तैसा की तर्ज पर कहा, 'मेरा बेटा चुनाव हार गया तो क्या हुआ, मुझे अफसोस डिंपल के हारने का है।' गौरतलब है कि डिंपल मुलायम सिंह यादव की बहू हैं जो पिछले चुनाव में हार गई थीं।

मध्‍य प्रदेश में एक दिन में तीन बलात्‍कार

 
भोपाल। मध्‍य प्रदेश भी अब लड़कियों के लिये असुरक्षित होता जा रहा है। इसका ताज़ा उदाहरण बलात्‍कार के तीन मामले हैं जो शुक्रवार को सामने आये। पहला मामला विदिशा का, दूसरा भिंड और तीसरा शाजापुर जिले का है। विदिशा में गुरुवार की रात आकाश तिवारी और नीलेश नाम के दो युवकों ने 15 साल की बच्‍ची को कोल्‍ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया और एक कमरे में ले जाकर उसके साथ सामूहिक बलात्‍कार किया। यही नहीं दोनों ने मोबाइल से लड़की का अश्‍लील एमएमएस भी बनाया। शुक्रवार की सुबह जब लड़की को कोश आया तो उसने अपने माता-पिता के साथ पुलिस थाने जाकर नामजद रिपोर्ट दर्ज करायी। विधवा से गैंगरेप दूसरा मामला भिंड जिले का है, जहां पर एक आदिवासी विधवा महिला के साथ दो लोगों ने सामूहिक बलात्‍कार किया। मामला गोहड चौराहा पुलिस थाने में दर्ज किया गया है। इस वारदात के बाद ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ गुस्‍सा जाहिर करते हुए जाम प्रदर्शन भी किया। इसमें आरोपियों के नाम राम दास और दीवान हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। तीसरा मामला शाजापुर जिले के शुजलपुर कस्‍बे का है, जहां पर 36 वर्षीय शादीशुदा महिला के साथ दो युवकों ने जबरन बलात्‍कार किया। महिला भोपाल से अपने कस्‍बे पहुंची ही थी कि दो युवक प्रशांत खुराना और राम भरोसे ने उसे अगवा कर लिया और सूनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ बलात्‍कार किया।



भूकंप के हल्के झटकों से कांपा गुजरात



अहमदाबाद: गुजरात में कच्छ जिले के भचाउ में आज सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 दर्ज की गई। इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (आईएसआर) के महानिदेशक बी के रस्तोगी के मुताबिक भूकंप कच्छ जिले में चोबुरी के निकट भचाउ से 22 किलोमीटर उत्तर में दोपहर 12 बजकर तीन मिनट पर महसूस किया गया। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। इससे पहले भी कच्छ में भूकंप के झटके आते रहे हैं। यह क्षेत्र साल 2001 में गुजरात में आए भूकंप के दौरान बुरी तरह से तबाह हुआ था।
सोर्स : http://www.punjabkesari.in

एम फेक्टर का शिगूफा



जालंधर:  दिल्ली की कुर्सी, उस पर छाया M फेक्टर, यानि माया, मुलायम, मनमोहन, ममता, मोदी, एम करूणानिधि और मध्यावधि चुनाव, सब पर देश की निगाहें और रोज की सुर्ख़ियों में लोकसभा चुनाव और ऊपर से नेताओं के रोज के बयानों की उठापटक। ये लहर देश की राजनीती को किस और लेकर जा रही है इसका अंदाजा उन्हें भी है जिन पर आठ के ठाठ हैं, मगर किसी को किसी से क्या। अपनी डफली-अपना राग, सवाल तो सत्ता हासिल का है सवाल तो देश कि सभसे बड़ी गद्दी का है  नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है ,
सभी बहरे है, बावरें है, मगर सत्ता उसे ही मिलेगी जिसे समाज चुनता है
बेनी की वाणी, से शुरू हुई नई जंग तीसरे मोर्चे की सुलगती हुई हवा बन कर राजनितिक गलियारों में दौड़ रही है, जंग कहाँ, और कब ख़त्म होगी इस पर ताजे बयान में बेनी ने नया पता खोला, पता उत्तरप्रदेश में लोकसभा सीटों को लेकर है.  भले ही मुलायम 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव का विगुल पहले फूंकना चाहते है भले ही माया अंदर खाते कांग्रेस से नई खिचड़ी बनाने में लगी है मगर इस सभ के बीच  बेनी ने सीटों को लेकर बिना चुनाव आसमान से बातें कर पहले ही भवीश्य्वानी कर दी है बेनी की माने तो उत्तरप्रदेश में बसपा को 36, बीजेपी को 10, कांग्रेस को 40 सीटें मिलेंगी, जबकि सपा के जनाजे को कन्धा देने के लिए सिर्फ 4 सीटों की भाविश्वानी कर डाली
ये पता चाहे टेबल के निचे से चुराया गया हो या ख्याली पुलाव से बनाया गया हो इस पत्ते के कई रंग है इस पते में कई अंक है

मगर जनता जानती है कि...
चोर की दाढ़ी में तिनका,आयेगा कैसे नज़र,
ये तो है वो चोर जो कि दाढ़ी रखते ही नहीं
गलत करके रख दिया है, इन्होंने ये मुहावरा,
नाग जो फुंकारते है, वो कभी डसते  नहीं मुलायम के सपनो में पीएम कि कुर्सी उन्हें किसी इंद्र के सिंहासन से कम नजर नहीं आ रही सपनो कि दुनिया का महल बनाए मुलायम ने घर का भेदी बन रावन कि नहीं अपितु अपने ही पुत्र कि लंका ढाने में कोई कमी नहीं छोड़ी, पिछले कई सालो से कांग्रेस के पालन हार कहे जाने वाले मुलायम कांग्रेस को आंखें दिखा अब आँख और ईंट के मुहावरों में समेट रही है, कांग्रेस की उड़ती चिड़िया पहचान कर मुलायम आँखे दिखा ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए कांग्रेस की ईंट से ईंट बजाने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते
नई नई सत्ता का सुख भोगने की लालसा में मुलायम के साहिबजादे सत्ता की गलियारों में ईद का चाँद नहीं होना चाहते, पापा की उड़ती चिड़िया के पर गिनने वाले अखिलेश की अकल घास चरने नहीं गयी और न ही वह अक्ल के दुश्मन बन उलटी गंगा बहाना चाहते हैं

यानि
कम्पूटर लीजिये,लेपटोप,टी वी लीजिये,
दो रुपय्ये किलो चांवल,फ्री बिजली लीजिये
आपसे बस ये हमारी,इतनी सी दरख्वास्त है,
चाहे कुछ भी लीजिये पर  वोट हमको दीजिये
बहरहाल M फेक्टर क्या नया लाता है ये देखने वाली बात होगी मगर सत्ता का सुख कोन भोगेगा  इसका जवाब जनता देगी



प्रेतों की रहस्मय दुनिया



भूत-प्रेत में विश्वास ना करने वालों के ये खबर चौंकाने वाली हो सकती है। आपने सुना होगा प्रेतआत्माओं के बारे में। इनके बसेरों के बारे में भी सुना होगा या फिल्मों में देखा होगा। वैसे तो दुनिया में रहस्य और डर से जुड़ी घटनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां हम आपको दुनिया की ऐसी खौफनाक जगहों पर ले जाने वाले हैं जो किसी फिल्मी कहानियों से एकदम अलग बिल्कुल सच के करीब है। इनकी सच्चाई जानेंगे तो आपकी रूह तक कांप जाएंगी, असल में ये जगहें रूहों और पिशाचों का निवास स्थान हैं। कमजोर दिल वालें, कृपया इसे ना पढ़े..

बेरी पोमेरॉय का महल (टॉटनेस)
इस महल से जुड़ी कई कहावतें और कहानियां लोगों में प्रचलित है। इसका संबंध 14वीं सदी से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां दो बहुत लोकप्रिय महिलाओं, सफेद औरत और नीली औरत की आत्मा घूमती है। सफेद औरत का नाम मार्ग्रेट पोमेरॉय बताया जाता है। कहा जाता है कि मार्ग्रेट की बहन उससे बहुत इर्ष्या करती थी। इसी इर्ष्या के कारण एक दिन उसने मार्ग्रेट को कैद कर दिया। कैद और भूख के कारण मार्ग्रेट की वहीं मौत हो गई।

वहीं नीली औरत कौन है यह अभी तक एक रहस्य है। अभी तक किसी को पता नहीं चल पाया है कि वह कौन है। लेकिन कहा जाता है कि जो भी इंसान उस नीली औरत के पीछे जाता है, वह कभी लौटकर वापस नहीं आया।

एडिनबर्ग का महल (स्कॉटलैंड)
प्राचीनकाल के इस महल के बारे में प्रचलित कहानियां भी बेहद भयानक हैं। देखने में यह महल बहुत खूबसूरत और आकर्षक है लेकिन इस सुंदरता के बीच मर चुके लोगों की खौफनाक डरावनी आवाजें और चीखें आती रहती हैं। कहा जाता है कि प्लेग और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के समय मरे लोगों की आत्माएं यहां घूमती रहती हैं। कई लोगों क मानना है कि यहां कुत्तों की आत्माएं भी भटकती रहती हैं।

डोमिनिकन हिल (फिलिपींस)
इस भूतिया जगह पर दरवाजों को जोर-जोर से खटखटाने की खौफनाक आवाजें सुनाई देती हैं। बर्तनों को तोड़ना और अजीब तरह से चिल्लाने की आवाजें भी सुनाई देती रहती हैं जो यहां आत्माओं की पुष्टि करता है।

यहां के बारे में लोगों का मानना है कि युद्ध के समय कई लोग यहां मारे गए थे, उनकी आत्माएं यहां घूमती रहती हैं। कहा जाता है कि वे घायल सैनिक या मरीज जो युद्ध में घायल होने के बाद जीना चाहते थे लेकिन उनकी दर्दनाक मौत हो गई, वह आज भी इस जगह पर भटकते रहते हैं।

मोंट क्रिस्टो (ऑस्ट्रेलिया)
ऑस्ट्रेलिया का यह स्थान बेहद खतरनाक माना जाता है। लोगों का मानना है कि यहां एक महिला की आत्मा भटकती रहती है। पति के मृत्यु के बाद मिसेज क्रॉली नामक यह महिला 23 साल में सिर्फ दो ही बार अपने घर से बाहर निकली। इस भूतनी के बारे में कहा जा है कि आज यह अपने घर में किसी को भी घुसने नहीं देती है। खासकर अपने कमरे में वह हमेशा अपनी मौजूदगी दर्ज करवाती रहती है।

कुछ लोगों का इस बारे में कहना है कि जैसे ही वह जैसे ही उस कमरे में गए उनकी सांस अपने आप बंद होने लगी। लेकिन कमरे से बाहर आने पर उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक हो गया। लाइट का अपने आप जलना और बंद हो जाना इस मकान की एक और खास निशानी है।

एनशेंट रैम इन (इंगलैंड)
कब्रिस्तान के ऊपर बनी यह इमारत, कहा जाता है कि पूरी तरह आत्माओं के कब्जे में है। यहां हमेशा ही अजीब सी आवाजें सुनाई देती रहती हैं। इस घर में भयानक बदबू के साथ-साथ असाधारण वस्तुएं भी मिलती रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां हत्याएं होती थीं और बच्चों की भी बलि दी जाती थी।

हाइगेट सिमिट्री (लंदन)
यह स्थान लंदन का सबसे कुख्यात भूतहा जगह है। कहा जाता है कि यहां सर कटी आत्माएं घूमती हैं। वैसे, यह एक बहुत ही सुंदर और आकर्षक जगह है। लेकिन शाम ढ़लते ही यहां दूर दूर तक कोई नजर नहीं आता। यहां आने वाले लोग इसकी कलाकारी के भी कायल हो जाते हैं। इस जगह की खासियत यह भी है कि दुनिया को अर्थशास्त्र का ज्ञान देने वाले महान विचारक कार्ल मार्क्स को भी यहीं दफनाया गया था।

ओहिओ यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
अमेरिका के ओहिओ यूनिवर्सिटी के ज्यादातर परिसर हांटेड माने जाते हैं। ब्रिटिश सोसाइटी फॉर फिजिकल रिसर्च का कहना है कि ओहिओ यूनिवर्सिटी दुनिया के सबसे हॉरर जगहों में से एक है। यहां के बार में कहा जाता है कि यहां का विल्सन हॉल एक लड़की, जिसे सब चुड़ैल मानते थे, के कारण बहुत प्रसिद्ध हुआ। वह लड़की अपने खून से इस हॉल की दीवारों पर असाधारण और रहस्यमयी कहानियां लिखने के बाद मर गई।

वहीं वॉशिंगटन हॉल के विषय में ऐसा माना जाता है कि यहां उन खिलाड़ियों की आत्माएं घूमती हैं जो एक हादसे में मारे गए थे। कभी-कभी लोगों को यहां बास्केटबॉल खेलने आवाजें भी सुनाई देती हैं।

स्क्रीमिंग टनल (ओंटारियो)
स्क्रीमिंग टनल का रहस्य नियाग्रा फॉल्स(जलप्रपात) से संबंधित सभी कहानियों में सबसे ज्यादा भयानक मानी जाती है। यह टनल नियाग्रा फॉल्स को टोरंटो से जोड़ती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस टनल में एक जलती हुई लड़की की आत्मा भटकती रहती है। कहा जाता है कि रात के समय वह इस टनल में बैठती है और माचिस से खुद को जलाकर पूरी रात चिल्लाती है।


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दिल्ली बनी 'क्राइम' की राजधानी

नई दिल्ली: पूरे विश्व में प्रसिद्ध भारत की राजधानी दिल्ली अब अपराध की राजधानी बनती जा रही है। जी हां ये हम नहीं कह रहे ये सच्चाई है। एक निजी चैनल के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में लगातार अपराध घटने की बजाय लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक इस साल के शुरू के 3 महीने में यहां इतने गुनाह हो गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले कई सौ फीसदी तक ज्यादा हैं। दिल्ली गैंगरेप की वारदात और उसके बाद देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर हुए प्रदर्शन के बावजूद यहां यौन उत्पीड़न और रेप की इतनी वारदात हुई हैं, जो पिछले साल से 590 फीसदी तक ज्यादा है।

अगर देखा जाए तो ये वाकई चौका देने वाले आकड़ें हैं। क्राइम के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल के पहले तीन महीनों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इनमें रेप में डेढ़ सौ फीसदी और छेड़छाड़ में 600 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा असुरक्षित जगह बन गई है।

1 जनवरी से 24 मार्च के दौरान हुए अपराधों के आंकड़े

1. रेप की वारदातों में डेढ़ सौ फीसदी का इजाफा

2. यौन उत्पीड़न के मामलों में 590 फीसदी की बढ़ोतरी

3. छेड़छाड़ में 600 फीसदी की बढ़ोतरी

4. अपहरण के मामलों में 53 फीसदी का इजाफा

5. डकैती के मामलों में 65 फीसदी बढ़ोतरी

6. झपटमारी में 73 फीसदी का इज़ाफा

7. चोरी की घटनाओं में 32 फीसदी की बढ़ोतरी 


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वाड्रा का पेट्रोल बिल भी भरती है सरकार: विजय जॉली



कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनके पर्सनल स्‍टॉफ का पेट्रोल का बिल भी भारत सरकार वहन करती है. यहां तक कि अगर वे विदेश शॉपिंग के लिए जाते हैं तो उसका बिल भी भारत सरकार चुकाती है. ये खुलासा किया है बीजेपी नेता विजय जॉली ने. विजय जॉली ने बाकायदा प्रेस रिलीज जारी कर यह दावा किया है.
इससे पहले भी रॉबर्ट वाड्रा लगातार विवादों में रहे हैं. रॉबर्ट वाड्रा के गुड़गांव में जमीन घोटाले को लेकर अरविंद केजरीवाल भी खुलासा कर चुके हैं. आजतक भी रॉबर्ट वाड्रा के हरियाणा और राजस्‍थान में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े का खुलासा कर चुका है.
नरेंद्र मोदी को अमेरिकी वीजा दिलाने के लिए रिश्‍वत दिए जाने के आरोपों के बीच जॉली ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है. उन्‍होंने बताया कि भारत आने वाले अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल ने अपनी यात्रा, होटल और खाने आदि का खर्चा स्‍वयं उठाया है. भारत में किसी भी सरकार ने उनका यह खर्चा वहन नहीं किया है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है.
जॉली ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल का कोई भी खर्चा न तो अमेरिकी सरकार ने उठाया है और न ही भारत सरकार ने. उन्‍होंने कहा कि अमेरिका में कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलता. यहां तक कि राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के साथ खाने के लिए भी 60 से 70 हजार डॉलर प्रति प्‍लेट खर्च करने पड़ते हैं.
उन्‍होंने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के विषय में बताया कि उन लोगों ने मोदी से बात की और मोदी के करिश्‍मे ने काम किया और उन्‍हें तुरंत अमे‍रिका आने का न्‍यौता मिला तो इससे कांग्रेसियों और मोदी विरोधियों के पेट में दर्द होने लगा.
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घाघरा चोली में नाचेगी सनी लियोन


फिल्म शूटआउट एट वडाला में पोर्न स्टार और एक्ट्रेस सनी लियोन आइटम घाघरा चोली में थिरकती नजर आएंगी. पूजा भट्ट की फिल्म जिस्म-2 से बी-टाउन में कदम रखने वाली सनी लियोन शूट आउट एट वडाला में ओ लैला करेंगी. सनी इसमें घाघरा चोली पहनेंगी. इस आइटम नंबर की खास बात यह है कि गाने में सनी का साथ एक-दो नहीं बल्कि पूरे 50 पुरूष डांसर देंगे. कोरियाग्राफर अहमद खान होंगे. खान का कहना है कि फिल्म में सनी से आइटम नंबर कराने का आइडिया निर्देशक संजय गुप्ता का था. उन्होंने कहा,मैं संजय के इस आइडिया से बेहद प्रभावित हूं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सन्नी के आइटम नंबर को दर्शक पसंद करेगें. फिल्म में जान अब्राहम,अनिल कपूर,मनोज वाजपेयी और सोनू सूद लीड रोल में है. फिल्म संभवत 1 मई को रिलीज होगी. उल्लेखनीय है कि फिल्म में प्रियंका चापेड़ा का भी आइटम नंबर है. सनी लियोन ने फिल्म के म्यूजिक लॉन्च के मौके पर कहा, कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मैं यहां होऊंगी और इस तरह का गाना करुंगी सनी ने कहा कि एक छोटी बच्ची के रूप में आप बॉलीवुड फिल्में और खूबसूरत अभिनेत्रियों को नृत्य करते देखते हैं लेकिन यह गाना अलग है जिस पर डांस करके मजा आया एकता कपूर के बैनर तले बन रही ‘शूट आउट एट वडाला’ एक गैंगस्टर की कहानी पर बनी है. सनी लियोन बॉलीवुड में कदम रखने के बाद अब लंबी पारी खेलने की तैयारी में हैं.

मंगलवार, 26 मार्च 2013

सीसीटीवी फुटेज में दिखे हमलावर



नई दिल्ली: बसपा के स्थानीय नेता और व्यवसायी दीपक भारद्वाज की आज उनके दक्षिणी दिल्ली के फार्महाउस में दो लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की तस्वीरें दिखी हैं लेकिन अभी तक उनकी पहचान नहीं हुई है। पुलिस ने बताया कि घटना सुबह करीब 9:15 बजे वसंत कुंज स्थित फार्महाउस ‘नितीश कुंज’ में घटी। सूचना के अनुसार आज सुबह काले रंग की स्कोडा कार में तीन लोग सवार होकर भारद्वाज के पास फार्म हाउस में पहुंचे। थोड़ी देर बातचीत के बाद हमलावरों ने तीन गोलियां भारद्वाज को मार दीं। बचाने की कोशिश कर रहे गार्ड को भी एक गोली मार दी गई। इसके बाद तीनों हमलावर वहां से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि उन्हें सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम एम्स में कराया जाएगा। गौरतलब है कि पिछला लोकसभा चुनाव भारद्वाज ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ा था और सबसे रईस उम्मीदवार के रूप में इन्हें प्रसिद्धी मिली थी। इस चुनाव में भारद्वाज ने 600 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। सूत्र बता रहे हैं कि वर्तमान में भारद्वाज की संपत्ति 2000 करोड़ रुपये की होगी। हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस को स्कोडा कार का नंबर मिल गया है। कार चोरी की है या नहीं यह भी अभी साप नहीं  हो पाया है। बता दें कि 20 साल पहले दीपक भारद्वाज फ्लड डिपार्टमेंट में एक क्लर्क थे।

स्टेनोग्राफर से अरबपति बनाया

हरियाणा के सोनीपत में बेहद साधारण परिवार में जन्मे दीपक भारद्वाज ने बहुत कम समय में तरक्की की सीढि़यां चढ़ी। वर्ष 1950 में जन्मे दीपक दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम करने के बाद सेल्स टैक्स विभाग में सात साल तक स्टेनोग्राफर भी रहे। मगर नौकरी उन्हें रास नहीं आई। उन्होंने आटोमोबाइल पार्टस बनाने का काम शुरू किया। इसके साथ साथ प्रोपर्टी का धंधा भी पार्ट टाइम करने लगे।
प्रोपर्टी के काम में जबरदस्त मुनाफा होते देख उन्होंने वर्ष 1979 में आटोमोबाइल पार्टस बनाने का काम बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी दिल्ली में कई किसानों से उनकी कृषि योग्य जमीन खरीदकर फार्म हाउस बनाए। एक बार प्रोपर्टी के धंधे के उतरने के बाद फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जमीनों की खरीद फरोख्त में करोड़ों के वारे न्यारे होने लगे। उन्होंने स्कूल, होटल और टाउनशिप में कदम रखा। हरिद्वार के समीप दीपक भारद्वाज ने टाउनशिप की नींव भी रखी। द्वारका इलाके में उनका शिक्षा भारती के नाम से स्कूल है। इसके अलावा गुडगांव रोड पर कई होटल एवं आलीशान फार्म हाउस के मालिक दीपक भारद्वाज ने राजनीति में भी कदम रखा। बताया जाता है कि दीपक भारद्वाज को उस समय ज्यादा फायदा हुआ जब उनकी कुछ जमीन दिल्ली एयरपोर्ट के लिए अधिगृहित की गई। बीएसपी के टिकट पर 2009 में उन्होने पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। उन्होंने चुनाव आयोग में खुद को 600 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बताया था। जिसे लेकर मीडिया में उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी। हालांकि वह कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी महाबल मिश्रा से चुनाव हार गए थे।

गार्ड है चश्‍मदीद गवाह
उस संगीन वारदात का सबसे अहम चश्मदीद है फॉर्महाउस का गार्ड और उसके मुताबिक हमलावर तीन थे जो स्कोडा गाड़ी पर सवार होकर आए थे. गाड़ी का नंबर DL3CA 7062 बताया जा रहा है. चश्मदीद के मुताबिक हमलावर ये कहकर फॉर्म हाउस में दाखिल हुए थे कि उन्हें कोई जगह देखनी है और दीपक भारद्वाज से मिलना है.
गार्ड ने उन लोगों से एंट्री रजिस्टर में दस्तखत करवाए और हमलावरों को फॉर्महाउस में जाने का रास्ता दे दिया. फार्म हाउस में पहुंचकर हमलावरों को कुछ देर दीपक भारद्वाज के साथ बातचीत करते भी देखा गया लेकिन उसके बाद अचानक गोलियां चलने लगीं.
चश्मदीदों के मुताबिक हमलावरों ने चार राउंड फायर किए, जिसमें से तीन गोलियां दीपक भारद्वाज को लगी और फायरिंग के बाद हमलावर उसी स्कोडा कार में सवार होकर फरार हो गए. गोली लगने से जख्मी हुए दीपक भारद्वाज को जब तक वसंत विहार फोर्टिस अस्पताल तक इलाज के लिए पहुंचाया जाता तब तक उनकी मौत हो गई.
वारदात के बात मौके पर पहुंची पुलिस ने तमाम सबूतों को इकट्ठा करने का सिलसिला शुरू कर दिया हैं. हालांकि अभी तक पुलिस ने कुछ भी साफ नहीं किया है लेकिन उसने आशंका जाहिर की है कि दीपक भारद्वाज की हत्या में कोई आपसी मामला हो सकता है और निजी रंजिश के चक्कर में हमलावरों ने उनकी हत्या उनके ही घर में घुसकर की. बहरहाल पुलिस ने अपनी टीम लगाकर उस गाड़ी की तलाश तेज कर दी है जिस पर सवार होकर हमलावर आए थे.


कौन था दीपक भारद्वाज
हाईप्रोफाइल कारोबारी और बीएसपी नेता दीपक भारद्वाज की गोली मारकर हत्या कर दी गई. भारद्वाज पश्चिम दिल्ली में लाजवंती गार्डन में रहते थे. दीपक का जन्म 1951 में हुआ था. 15वीं लोकसभा चुनावो के लिए वो बीएसपी की सीट से पश्चिम दिल्ली से उम्मीदवार थे. उस समय लोकसभा प्रत्याशियों में दीपक सबसे अमीर प्रत्याशी थे क्योंकि उन्होने अपनी संपत्ति में 614 करोड़ रुपये का जिक्र किया था. 62 वर्षीय दीपक भारद्वाज जाने माने करोबारी थे. उनके बिजनेस में रियल स्टेट, द्वारका में स्कूल, रियल स्टेट के तहत हरिद्वार में एक टाउनशिप प्रोजेक्ट और दिल्ली गुड़गांव में उनके होटल भी है. साउथ दिल्ली में उनका अपना फार्म हाउस है जहां उनको गोली मार दी गई.सूत्रों के मुताबिक वह विवादित प्रॉप्रटी खरीदने-बेचना का भी काम करता था.
प्रॉपर्टी विवाद के कारण हुई थी चड्ढ़ा बंधुओं की हत्या!
17 नवंबर 2012 को दिल्ली स्थित एक फार्महाउस में कथित तौर पर गोलीबारी में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा एवं उसके भाई हरदीप चड्ढा की मौत हो गई थी. हालांकि पुलिस ने तफ्तीश के बाद हत्याकांड के गवाह सुखदेव सिंह नामधारी को शक के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था. पुलिस का मानना है कि यह हत्याकांड जमीन विवाद को लेकर हुई थी.

शनिवार, 23 मार्च 2013

कोर्ट नहीं पहुंचे सलमान, सैफ समेत बाकी 4 पर आरोप तय


जयपुर। चमकते फिल्मी सितारों के खुद के सितारे आजकल गर्दिश में हैं। संजय दत्त को अवैध हथियार मामले में सजा होने के बाद शनिवार को जोधपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 14 साल पहले काले हिरण का शिकार करने संबंधी प्रकरण की सुनवाई हुई। अदालत ने अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, तब्बू और नीलम के खिलाफ भारतीय वन्य जीव अधिनियम एवं आइपीसी की विभिन्न धाराओं में नये सिरे से आरोप तय किए। इसके तहत तीन से छह साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि , इन सभी ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया। अब कोर्ट में गवाहों को बुलाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
मामले में अन्य आरोपी अभिनेता सलमान खान इलाज के सिलसिले में अमेरिका में हैं, इसलिए वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। सभी सितारों को एक-एक कर अदालत में बुलाया गया और इन पर लगे आरोप पढ़ कर सुनाए गए। इन पर शिकार करने, शिकार में मदद करने और शिकार करने के लिए उकसाने के आरोप हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी।
गौरतलब है कि फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान एक व दो अक्टूबर, 1998 की रात बॉलीवुड सितारे सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली, तब्बू और नीलम द्वारा स्थानीय सहयोगी दुष्यंत सिंह के साथ कथित रूप से कांकणी की सरहद पर दो काले हिरणों का शिकार करने का आरोप हैं। भारतीय वन्य जीव अधिनियम के तहत यह संरक्षित जीव है, जिसे मारना दंडनीय अपराध है।
इस मामले में अदालत ने 20 फरवरी, 2006 को आरोप तय किए थे, जिसे आरोपियों ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी, जबकि राज्य सरकार की ओर से कुछ और धाराएं जोड़ने के लिए हाई कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की गई थी। इस पर हाई कोर्ट ने 24 जुलाई, 2012 को आरोपियों को पुन: संशोधित आरोप सुनाए जाने के आदेश दिए थे।

उपले बेचकर बनाया अपने बच्चों को डिप्टी एसपी


मुरादाबाद  
वाकई सैल्यूट करना होगा सोमवती को। इस मां ने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उपले तक बेचे हैं। आज इसके दोनों बेटे डिप्टी एसपी हैं। मुफलिसी के उस दौर से वह गुजरीं है, जिसे सुनने भर से कंपकंपी आ जाए। पति गांव छोड़ने को तैयार नहीं थे लेकिन सोमवती ने बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव छोड़ दिया और अल्मोड़ा की तंग बस्ती में 70 रुपये महीना पर एक कमरा ले लिया। पास के एक प्राइमरी स्कूल में एडमीशन करा दिया।

जब महेश और नरेश दूसरी और तीसरी कक्षा में थे तब सोमवती बुक स्टाल से पुरानी किताबें खरीदकर लातीं और बच्चों को देती थी, लेकिन आज उनकी तपस्या पूरी हो गई। दोनों बेटे डिप्टी एसपी जो बन गए।

पीलीभीत जनपद के पिपरिया गांव का रहने वाला है यह परिवार। बालकराम यहां अपनी पत्नी सोमवती और बच्चों के साथ रहते थे। थोड़ी बहुत जमीन थी जिसमें फसल उगाकर घर का खर्च चलाते। लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तो सोमवती को उनकी पढ़ाई की चिंता सताने लगी। सोमवती ने अपने पति से कहा कि वह अब गांव में नहीं रहेंगे। बालकराम ने समझाया भी कि शहर में रहने के लिए बहुत पैसा चाहिए। कहां से लाएंगे।

खैर बालकराम ने गांव छोड़ दिया और अल्मोड़ा में रहने लगे। इसी दौरान बालकराम भी पुलिस में भर्ती हो गए। लेकिन तनख्वाह से चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभव नहीं था। अल्मोड़ा के बाद यह परिवार संभल आ गया। यहां सोमवती ने गाय और भैंस पाल लीं। दूध बेचा।

आमदनी बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकलने लगा। बाद में बालकराम का तबादला रामपुर पुलिस लाइन में हो गया। सोमवती का संघर्ष यहां भी जारी रहा। उन्होंने उपले बनाकर बेचने शुरू कर दिए। बच्चों ने भी मां की मेहनत को देखते हुए पढ़ाई में पूरी जान लगा दी। रिजल्ट आज सबके सामने है। सोमवती के बेटे महेश और नरेश डिप्टी एसपी बन गए। महेश की तैनाती शाहजहांपुर में हुई है जबकि नरेश की रामपुर में।

(सोर्स साभार): अमर उजाला डॉट कॉम

मुलायम ने की आडवाणी की तारीफ


अभी तक उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को कसने वाले पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अब सीधे तौर पर अपने बेटे, मुख्यमंत्री अखिलेश की खिंचाई की है।

इसके साथ ही मुलायम ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग चाहते हैं कि प्रदेश में हमारी सरकार अच्छी तरह से चले।

यूपी के अधिकारियों के निकम्मेपन और पार्टी के मंत्रियों की मौज-मस्ती को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अखिलेश से कहा कि ऐसे सरकार नहीं चलती। अखिलेश, कड़ाई करो।

राज का काज सीधेपन से नहीं होता। कोई अधिकारी अपना नहीं। शासन में रहोगे तो यह चापलूसी करेंगे। नहीं रहोगे तो जानते ही हो क्या होता है।

मुलायम शनिवार को यहां डॉ. राममनोहर लोहिया पार्क में डॉ. लोहिया की 103वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।

मुलायम ने जब बोलना शुरू किया तो कार्यकर्ता खुशी से तालियां बजाने लगे और कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों, बड़े नेताओं तथा अधिकारियों के चेहरे फीके पड़ते गए।

मुलायम ने सरकार को भी कामकाज सुधारने की चेतावनी दी। मंत्रियों और बड़े नेताओं के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मंत्री पार्टी का और जनता का नहीं अपना काम कर रहे हैं।

मुलायम बोले, ‘मैं बता देना चाहता हूं कि बड़े नेताओं और मंत्री बनने वालों की बदौलत हमारी सरकार नहीं बनी। यह सरकार सड़कों पर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं की बदौलत बनी है।

इनकी उपेक्षा ठीक नहीं है।’ उन्होंने पार्टी नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि जनता की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

पूछ लूं कि जनता की शिकायतों पर कितने डीएम और एसएसपी पर कार्रवाई हुई, कितने दरोगा और तहसील वालों पर कार्रवाई हुई, तो कोई बता नहीं पाएगा।

काफी पहले से मैं थानों और तहसीलों में लूट की बात कह रहा हूं। कहीं कोई कार्रवाई नहीं। डीएम-एसपी चापलूसी करके पदों पर जमे हैं।

मुलायम ने अखिलेश से कहा कि अधिकारियों को जिम्मेदार बनाओ। काम न करें तो इनसे सख्ती करो। मुख्यमंत्री का काम नीति बनाना है।

लागू करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। जो नतीजा न दे, उसको सजा दो। सब ठीक हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ने जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र और जनेश्वर मिश्र पार्क का शिलान्यास किया।

चापलूसी के आगे सब भूल गए
-मुलायम ने कहा कि बार-बार कहने के बावजूद सरकारी लोगों का रवैया नहीं बदल रहा है। बरदाश्त की हद होती है। मुलायम ने कठोर शब्दों में कहा, ‘कितनी बार मैं समझा चुका हूं, कह चुका हूं कि थानों को ठीक करो।

तहसीलों को सुधारो। भ्रष्टाचार रोको। जो न माने उस पर कठोर कार्रवाई करो। वह चाहे जो हो। किसी की सिफारिश न मानो। पर, बड़ा पद पा गए, मंत्री बन गए, अधिकारियों ने चापलूसी शुरू कर दी तो सब भूल गए।

मुझे सब मालूम है। जिले-जिले से कार्यकर्ता रिपोर्ट दे रहे हैं। मंत्री न तो पार्टी का काम कर रहे हैं और न कार्यकर्ताओं का। अपना काम और मौज-मस्ती कर रहे हैं। यह नहीं चलेगा।

किया आडवाणी का गुणगान
- मुलायम सिंह ने अपने भाषण में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफों की भी झड़ी लगाई। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग चाहते हैं कि प्रदेश में हमारी सरकार अच्छी तरह से चले।

यही कारण है कि वे हमारी कमियां बता रहे हैं। मुलायम के अनुसार, ‘हमारी सरकार में ज्यादा भ्रष्टाचार है। अधिकारी काफी गड़बड़ कर रहे हैं। यह बात किसी और कही होती तो गलत मान लें।

पर, लालकृष्ण आडवाणी ने मुझसे कही। आडवाणीजी ने यह भी कहा कि समीक्षा करिए। वह कभी झूठ नहीं बोलते। यह बात पूरी तरह सच है। मेरा भी ऐसा ही अनुभव हो रहा है। लौटकर दिल्ली में उनसे विस्तृत बातचीत करूंगा।’

(सोर्स साभार): अमर उजाला डॉट कॉम

60 लाख लोग देखते हैं एक मिनट में फेसबुक


an minute on internet
आज इंटरनेट हर किसी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। कुछ ढूंढना हो तो इंटरनेट, मनोरंजन करना हो तो इंटरनेट, दूर बैठे चहेतों या दोस्तों से गपशप करनी हो तो इंटरनेट। आपने भी घंटों इंटरनेट पर वक्‍त गुजारा होगा लेकिन शायद ही कभी आपके मन में यह सवाल आया हो कि इंटरनेट का एक मिनट कैसा होता होगा।

एक मिनट के दौरान इंटरनेट पर क्या-क्या होता होगा। हाल ही में प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी इंटेल ने इंटरनेट के इस पहलू पर से पर्दा उठाया है। इंटेल ने बताया कि हर दिन इंटरनेट पर एक मिनट में क्या-क्या होता है।

इंटरनेट के 60 सेकेंड

डाटा व ई-मेल
जिदंगी का अहम हिस्सा बन चुके इंटरनेट पर एक मिनट में 6,39,800 GB डाटा ट्रांसफर हो जाता है। इसके साथ ही 60 ‌सेकेंड में 20 करोड़ 40 लाख ई-मेल लोग एक-दूसरे को भेज देते हैं।

फोटो- वीडियो
एक मिनट में नेट पर 2 करोड़ फोटो देखी जाती हैं, विभिन्न यूजर्स के माध्यम से 3 हजार फोटो अपलोड की जाती हैं। 13 लाख यू-ट्यूब वीडियो देखते हैं और 30 घंटे के वीडियो अपलोड किए जाते हैं।

नेट ऑन मोबाइल
स्मार्टफोन के बढ़ते यूज के बीच एक मिनट में 47 हजार मोबाइल ऐप्लीकेशन डाउनलोड कर ली जाती हैं और इसी समय में 1300 नए मोबाइल यूजर इंटरनेट से जुड़ते हैं।

सोशल नेटवर्किंग
इंटेल ने बताया कि एक मिनट में 320 से ज्यादा नए ट्वीटर एकाउंट बनते हैं और 1 लाख टवीट्स किए जाते हैं। दो लाख 77 हजार लोग अपने फेसबुक एकाउंट को लॉग इन करते हैं और 60 लाख फेसबुक पोस्ट देखी जाती हैं।

सर्च एंड इंफो
इस एक मिनट में ही 20 लाख से ज्यादा जानकारियां गूगल पर सर्च की जाती हैं और 6 नए आर्टिकल्स विकीपीडिया पर अपलोड किए जाते हैं।

इंटरनेट क्राइम
इंटरनेट की एक मिनट की दुनिया में 80 यूजर्स साइबर क्राइम के शिकार हो जाते हैं और 20 नए यूजर्स की निजी जानकारियां चुरा ली जाती हैं।
(सोर्स साभार) : http://www.amarujala.com

सिनेमा-टीवी की ताजा खबरें


सेट्स पर मरना चाहता हूं
करण जौहर अपनी दिलेरी के लिए प्रसिद्ध हंै। करण ने फिल्म उद्योग के अपने कैरियर की विस्तार से चर्चा की तथा उन्होंने यह भी बताया कि वह इस उद्योग जगत तथा अपने कार्य से बेहद प्यार करते हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन तक यहांं कार्य करते रहेंगे। करण की फिल्मी यात्रा अन्य तमाम लोगों की तरह त्रासदी भरी और मुश्किल नहीं रही है। उन्होंने अपनी इस शानदार यात्रा का आगाज यश चोपड़ा की फिल्म में एक सहायक के तौर पर किया था तथा सुपर हिट फिल्म 'कुछ कुछ होता हैÓ में शाहरुख खान और काजोल जैसे अग्रणी कलाकारों के साथ अपने निर्देशकीय जीवन का श्रीगणेश किया था। इसके बाद उन्होंने 'कभी खुशी कभी गमÓ नामक एक और ब्लॉकबस्टर का निर्माण किया, जिसमें फिल्म जगत के सबसे बड़े कलाकारों में से कुछ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। करण ने यह भी बताया कि आज वह जो कुछ भी हैं वह यश चोपड़ा, आदित्य चोपड़ा और शाहरुख खान की बदौलत हैं। आज वह अपनी सफलता का श्रेय इन लोगों को देते हैं। उन्होंनेे यह भी कहा कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन तक काम करना चाहते हैं और वास्तव में अपनी स्वयं की फिल्म के सेट्स पर प्राण त्यागना चाहते हंै!

सबसे बड़ा शत्रु  जलंधर
दर्शकों के सामने अब महादेव का सबसे बड़ा शत्रु जलंधर आएगा। इस रोमांचक कथा में और रोमांच जोडऩे के लिए महादेव की भूमिका निभाने वाले मोहित रैना ही जलंधर की नकारात्मक भूमिका में दिखाई देंगे। महादेव और जलंधर के इस मुकाबले में दर्शक पहली बार मोहित को दोहरी भूमिका में देखेंगे। महादेव अपनी पत्नी पार्वती और अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के साथ सुख से हैं, तभी समुद्र में कहीं से एक नये शरीर का अवतरण होता है, जिसमें महादेव का अंश है। मत्स्य कन्या इस अंश जलंधर को अपने पुत्र की तरह पालती है। इंद्र को जब जलंधर की उपस्थिति के बारे में पता चलता है तो वह असुरक्षित अनुभव करते हैं और जलंधर के वध के लिए अपनी सेना भेजते हैं, लेकिन इसमें मत्स्यकन्या मारी जाती है और गुस्से और नफरत से भरा बालक जलंधर बच जाता है। असुरों के गुरु शुक्राचार्य इस बच्चे में शिव का अंश देखते हैं और असुरों के नेता बनने के लिए महादेव के अंश से बेहतर कौन हो सकता है, यह सोचकर उस बच्चे को प्रशिक्षित करने लगते हैं। जलंंधर की शक्तियां बढ़ाने के लिए वह उसका विवाह वृंदा से कराते हैं, जो एक पवित्र आत्मा है और वृंदा की भक्ति से जलंधर और शक्तिशाली हो उठता है।


भारत से मिली प्रेरणा
ऑस्कर पुरस्कार से नवाजे गए फिल्म निर्माता आंग ली ने कहा है कि उन्हें भारत से प्रेरणा मिली थी। ली अपनी फिल्म 'लाइफ ऑफ पाईÓ के विशेष प्रदर्शन में शिरकत नहीं कर पाए थे। पुरस्कार के लिए उन्होंने भारत से मिली प्रेरणा और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। फिल्म के विशेष प्रदर्शन का आयोजन ताईपे आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र द्वारा किया गया था। फिल्म के अभिनेता सूरज शर्मा का गुरुवार 21 मार्च जन्मदिन भी था, जिन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत की। ऑस्कर पुरस्कारों में फिल्म की सफलता का जश्न मनाने के लिए इस विशेष प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। राजदूत चंग क्वांंंग तेन ने ली का बयान पढ़ा, ''मैं माफी मांंगता हूं कि मैं वहांं व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सका। लाइफ ऑफ पाई एक बहुत खास यात्रा है। मुझे लगता है कि यह 'कर्मÓ ही है जो मुझे भारत ले आया। मैं इस मौके पर भारत से मिली प्रेरणा और सहयोग के लिये धन्यवाद कहना चाहता हूं।ÓÓ इस साल सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीत चुके ली ने कहा, ''मैं यहां की संस्कृति से बेहद प्रभावित था। सरकार ने भी फिल्म बनाने में मुझे सहयोग किया। शानदार भारतीय कलाकारों ने कहानी में जान डाल दी।ÓÓ ली ताईवान के रहने वाले हैं और 'पाईÓ में सूरज शर्मा, इरफान खान, तब्बू ने अभिनय किया है।

प्रियंका पर फिदा
बॉलीवुड हॉट एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा के यूं तो बहुत दीवाने हैं, लेकिन अब उनमें एक नाम और शामिल हो गया है। हुआ यूं एम टीवी वीडियो म्यूजिक अवार्ड समारोह में जब पिग्गी चोप्स पहुंची, तो उनकी खूबसूरती देख गायक हनी सिंह से रहा नहीं गया और उन्होंने पीसी के लिए गाना गा डाला। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के श्याम रंग पर अंतर्राष्ट्रीय रैपर यो यो हनी सिंह इतना फिदा हो गए। हनी ने प्रियंंका के लिए अपना हिट गाना ब्राउन रंग दे गाया और कहा कि ये गाना प्रियंका के लिए है, उनका रंग भूरा है और वह हॉट हैं। बहुत समय के बाद बॉलीवुड में ऐसी अभिनेत्री आई है, जो गोरी नहीं बल्कि सांवली और हॉट है। ऐसी तारीफ सुनकर  प्रियंका भी कैसे खामोश बैठ सकती थी। पीसी भी खुद पर काबू नहीं रख पाई और मंच पर थिरक पड़ी। पिछले साल प्रियंका ने भी इन माय सिटी एलबम के सात गायन की दुनिया में कदम रखा है।

ईमानदारी से प्रभावित
हिम्मतवाला फिल्म से बॉलीवुड कैरियर शुरू कर रहीं दक्षिण की अभिनेत्री तमन्ना अभिनेता अजय देवगन की ईमानदारी से बेहद प्रभावित हैं और साथ काम करने के बाद उनके मन में उनके लिए इज्जत बढ़ गई है। 24 वर्षीय तमन्ना ने कहा, मैं अजय की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हूं, लेकिन उनके साथ काम करने के बाद मैं उनकी और भी इज्जत करने लगी हूं। उन्होंने कहा, बेहतरीन कलाकार होने के अलावा वह बहुत ईमानदार इंसान हैं। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। तमन्ना ने कहा कि उन्हें हम दिल दे चुके सनम, ओंकारा और गोलमाल में अजय का काम बहुत अच्छा लगा। हिम्मतवाला1983 की जीतेंद्र और श्रीदेवी की इसी नाम से बनी सफल फिल्म का नया संस्करण है, जो 29 मार्च को प्रदर्शित होगा।

शाहरुख करेंगे आइटम
अभिनेता शाहरुख खान इन दिनों खूब चर्चा में हैं। कभी प्रियंका के साथ लिंक-अप उन्हें लाइम लाइट में लाता है, तो कभी उनका आने वाला आइटम नंबर। जी हां, रोहित शेट्टी की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस में किंग खान आइटम नंबर करते नजर आएंगे। इस आइटम नंबर को कोरियोग्राफ कर रहे प्रभुदेवा के भाई राजू सुंद्रम से किंग खान ने ये साफ कह दिया है कि उनके आइटम नंंबर में किसी भी तरह की तड़क-भड़क नहीं होना चाहिए और न ही ऐसे कोई मूव्स होने चाहिए, जो अश्लील नजर आएं। शाहरुख अपनी इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित हैं। यही वजह है कि उन्होंने ये पहले ही साफ कर दिया कि गाने में कोई भी डबल मिनिंग वाले शब्द इस्तेमाल न हों, ताकि उनकी फिल्म को ए सर्टिफिकेट न मिले और लोग अपने परिवार के साथ वो इस फिल्म को देखने आ सकें। पहले ये गीत खुद प्रभुदेवा ही कोरियोग्राफ करने वाले थे। लेकिन बिजी शिड्यूल की वजह से उन्होंने ये काम अपने भाई को ये जिम्मेदारी सौंपी। इससे पहले सुंद्रम फिल्म कमीने में भी कोरियोग्राफी कर चुके हैं। शाहरुख खान के साथ इस गाने में नजर आने वाली प्रियामणी भी जमकर इस गाने के लिए तैयारी कर रही हैं। इस गाने का रिहर्सल किया जा रहा है। शाहरुख खान ने इससे पहले फिल्म ओम शांति ओम और बिल्लू में आइटम सांग्स पर डांस किया है, लेकिन शाहरुख का कहना है कि उनका ये आइटम नंबर उन सारे आइटम नंबर्स से अलग होगा।

संजू का इंतजार
शुक्रवार को दिन-भर कई टीवी चैनलों की कैमरा टीम संजय के घर के बाहर जमा रही, पर न तो संजय बाहर आए, न ही उनकी पत्नी मान्यता। न ही दोनों बच्चों बेटे साहरान और बेटी इकरा की कोई झलक नजर आई। संजय की सांसद बहन प्रिया दत्त भी उनके घर दिल्ली से पहुंचीं, पर वह भी प्रेस से दूर रहीं। गेट पर मौजूद गार्ड इस बात का खास ध्यान रख रहे थे कि कोई अनचाहा व्यक्ति अंदर न जा सके। यहां तक कि एक्टर प्रभु देवा को भी कुछ देर के लिए बाहर ही खड़े रहना पड़ा। दरअसल प्रभु को उस समय गेट पर मौजूद गार्ड पहचान नहीं सके थे। प्रभु के अलावा शुक्रवार को दिन-भर करन जौहर, अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, डेविड धवन, मिलन लूथरिया, संजय कपूर, राज कुंद्रा, रितिक रोशन आदि संजय के घर गए।

नहीं जमा रंग
वाशु भगनानी की फिल्म रंगरेज जो कि कल ही रिलीज हुई है, को लोगों की तरफ से काफी अच्छे कमेंट्स मिल रहे हैं। हालांकि जैसा कि हर फिल्म के साथ होता है, वैसा ही इस फिल्म के साथ भी हो रहा है कि कुछ लोगों को फिल्म बहुत ही बकवास और बिना किसी अच्छे कंटेंट की लग रही है। फिल्म का निर्देशन किया है प्रियदर्शन ने और फिल्म के निर्माता हैं वाशु भगनानी। वाशु भगनानी ने इससे पहले भी अपने बेटे जैकी भगनानी को बॉलीवुड में जमाने के लिए फालतू और अजग गजब लव स्टोरी जैसी फिल्में बनाई थीं, लेकिन अफसोस कि इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर पहले ही दिन दम तोड़ दिया और जैकी भगनानी की किस्मत भी डूब गई। लेकिन वाशु भगनानी ने हिम्मत नहीं हारी और एक बार फिर से अपने बेटे जैकी को इस बार एक एक्शन हीरो के रूप में पेश किया है, फिल्म रंगरेज में।

आधी रात को कैटरीना कैफ
चॉकलेटी हीरो रणबीर कपूर के घर आधी रात को कोई मेहमान आया और वो मेहमान अगर कोई खूबसूरत हसीना हो, तब तो दाल में जरूर कुछ काला है। ब्लैक ऑडी कार में खूबसूरत कैटरीना कैफ आधी रात को रणबीर कपूर के पाली हिल स्थित बंगले में आतीं हैं.. भई ऐसी भी क्या बात है कि सुबह तक इंतजार न हो सका! संजय दत्त की गिरफ्तारी की खबर सुन रणबीर उनसे मिलने रात 10.30 बजे गए और वहां से वापस अपने घर 1.30 बजे लौटे। उसी समय उनके घर खूबसूरत कैटरीना कैफ अपने ब्लैक ऑडी कार में पहुंची। वैसे तो रणबीर और कैटरीना ने अभी हाल ही में अपने रोमांस की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था। अब अगर यहां रोमांस की खिचड़ी नहीं पक रही, तो हो सकता है संजय दत्त के घर न जा रणबीर से ही उनका हाल जानने कैटरीना उनके घर पहुंची हों।

रैम्प पर आशा
अनुभवी गायिका आशा भोंसले लैक्मे फैशन वीक में मनीष मल्होत्रा के समर रिजॉर्ट कलेक्शन का प्रदर्शन रैम्प पर करती नजर आईं। भोंसले पिछले दिनों प्रदर्शित फिल्म 'माईÓ से अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रख चुकीं हैं। कार्यक्रम में अभिनेत्री हेमा मालिनी और डिजायनर भानू अथैया के साथ दर्शक दीर्घा में बैठीं भोंसले से जब मंच पर आने को कहा गया तो वह काफी खुश हुईं। भोंसले ने कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं, सिनेमा की वजह से हूं। सिनेमा जगत का हिस्सा होने का मुझे गर्व है। मैंने अपनी जिंदगी में सब कुछ किया, जो एक चीज बाकी थी, वह थी रैम्प पर चलना। भोंसले डिजायनर मल्होत्रा की डिजाइन की गई साड़ी में रैम्प पर नजर आईं और दर्शक उनकी प्रस्तुति पर खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। आगामी 26 मार्च तक चलने वाले लैक्मे फैशन वीक में बॉलीवुड की नामी हस्तियों जैसे- प्रियंका चोपड़ा, वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा, करिश्मा कपूर, काजोल, करण जौहर, दिबाकर बनर्जी, अनुराग कश्यप और जोया अख्तर शामिल हुए।











प्रेम-उमंग की होली


होली बसंत व प्रेम-प्रणव का पर्व है तथा धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह रंगों का, हास-परिहास का भी पर्व है। यह वह त्यौहार है, जिसमें लोग क्या करना है तथा क्या नहीं करना के जाल से अलग होकर स्वयं को स्वतंत्र महसूस करते हैं। यह वह पर्व है, जिसमें आप पूर्ण रूप से स्वच्छंद हो, अपनी पसंद का कार्य करते हैं, चाहे यह किसी को छेडऩा हो या अजनबी के साथ भी थोड़ी शरारत करना हो। इन सबका सर्वोत्तम रूप यह है कि सभी कटुता, क्रोध व निरादर बुरा न मानो होली है की ऊंची ध्वनि में डूबकर घुल-मिल जाता है। बुरा न मानो होली है की करतल ध्वनि होली की लंबी परम्परा का अभिन्न अंग है। प्रचलित मान्यता के अनुसार यह त्यौहार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के मारे जाने की स्मृति में मनाया जाता है। पुराणों में वर्णित है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका वरदान के प्रभाव से नित्य अग्नि स्नान करती और जलती नहीं थी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्निस्नान करने को कहा। उसने समझा कि ऐसा करने से प्रह्लाद अग्नि में जल जाएगा तथा होलिका बच जाएगी। होलिका ने ऐसा ही किया, किंंतु होलिका जल गई, प्रह्लाद बच गये। होलिका को यह स्मरण ही नहीं रहा कि अग्नि स्नान वह अकेले ही कर सकती है, तभी से इस त्यौहार के मनाने की प्रथा चल पड़ी।

धुलेंडी
यह त्यौहार होली के अगले दिन, रंग दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व पर किशोर-किशोरियां, वयस्क व वृद्ध सभी एक-दूसरे पर गुलाल बरसाते हैं तथा पिचकारियों से गीले रंग लगाते हैं। पारंपरिक रूप से केवल प्राकृतिक व जड़ी-बूटियों से निर्मित रंगों का प्रयोग होता है, परंतु आजकल कृत्रिम रंगों ने इनका स्थान ले लिया है। आजकल तो लोग जिस-किसी के साथ भी शरारत या मजाक करना चाहते हैं। उसी पर रंगीले झाग व रंगों से भरे गुब्बारे मारते हैं। प्रेम से भरे यह - नारंगी, लाल, हरे, नीले, बैंगनी तथा काले रंग सभी के मन से कटुता व वैमनस्य को धो देते हैं तथा सामुदायिक मेल-जोल को बढ़ाते हैं। इस दिन सभी के घर पकवान व मिष्ठान बनते हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और पकवान खाते हैं।

स्वादिष्ट व्यंजन
मिष्ठान इस पर्व की विशेषता है। उत्तर भारत में आप गुझिया का आनन्द ले सकते हैं व पश्चिम महाराष्ट्र में पूरनपोली का। ठंडाई [19] भांग [20] परंतु इस मिश्रण से सावधान ही रहना चाहिए, क्योंकि यह पेय होली पर प्राय: सभी जगह बनाया व वितरित किया जाता है। इसका नशा जल्दी उतरता नहीं और भूख बढ़ती ही जाती है, इसके पीने से दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है।


होलिका की प्राचीन कथाएं
होलिका दहन से संबंधित कई कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिसमें से कुछ प्रसिद्ध कथाएं इस प्रकार हैैं- कथाए पौराणिक हो, धार्मिक हो या फिर सामाजिक  सभी कथाओं से कुछ न कुछ संदेश अवश्य मिलता है। इसलिये कथाओं में प्रतीकात्मक रूप से दिए गए संदेशों को अपने जीवन में ढालने का प्रयास करना चाहिए। इससे व्यक्ति के जीवन को एक नई दिशा प्राप्त हो सकती है। होलिका दहन की एक कथा जो सबसे अधिक प्रचलन में है, वह हिरण्यकश्यप व उसके पुत्र प्रह्लाद की है।

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद होलिका दहन कथा
राजा हिरण्यकश्यप अहंकार वश स्वयं को ईश्वर मानने लगा। उसकी इच्छा थी की केवल उसी का पूजन किया जाए, लेकिन उसका स्वयं का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था.। पिता के बहुत समझाने के बाद भी जब पुत्र ने श्री विष्णु जी की पूजा करना बन्द नहीं की, तो हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को दण्ड स्वरूप आग में जलाने का आद़ेश दिया। इसके लिए राजा ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को जलती हुई आग में लेकर बैठ जाए, क्योंकि होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। इस आदेश का पालन हुआ, होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई, लेकिन आश्चर्य की बात थी कि होलिका जल गई और प्रह्लाद नारायण कृपा से बच गया। यह देख हिरण्यकश्यप अपने पुत्र से और अधिक नाराज हुआ। हिरण्यकश्यप को वरदान था कि वह न दिन में मर सकता है न रात में, न जमीन पर मर सकता है और न आकाश या पाताल में, न मनुष्य उसे मार सकता है और न जानवर या पशु-पक्षी, इसीलिए भगवान उसे मारने का समय संध्या चुना और आधा शरीर सिंह का और आधा मनुष्य का- नृसिंह अवतार। नृसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप की हत्या न जमीन पर की न आसमान पर, बल्कि अपनी गोद में लेकर की। इस तरह बुराई की हार हुई और अच्छाई की विजय। इस कथा से यही धार्मिक संदेश मिलता है कि प्रह्लाद धर्म के पक्ष में था और हिरण्यकश्यप व उसकी बहन होलिका अधर्म नीति से कार्य कर रहे थे। अंतत: देव कृपा से अधर्म और उसका साथ देने वालों का अंत हुआ। इस कथा से प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रेरणा लेना चाहिए कि प्रह्लाद प्रेम, स्नेह, अपने देव पर आस्था, दृढ़ निश्चय और ईश्वर पर अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। वहीं, हिरण्यकश्यप व होलिका ईष्र्या, द्वेष, विकार और अधर्म के प्रतीक हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि आस्तिक होने का अर्थ यह नहीं है, जब भी ईश्वर पर पूर्ण आस्था और विश्वास रखा जाता है, ईश्वर हमारी सहायता करने के लिए किसी न किसी रूप में अवश्य आते हैं।

होली और राधा-कृष्ण की कथा
भगवान श्रीकृष्ण तो सांवले थे, परंतु उनकी आत्मिक सखी राधा गौरवर्ण की थी। इसलिए बालकृष्ण प्रकृति के इस अन्याय की शिकायत अपनी मां यशोदा से करते तथा इसका कारण जानने का प्रयत्न करते। एक दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को यह सुझाव दिया कि वे राधा के मुख पर वही रंग लगा दें, जिसकी उन्हें इच्छा हो। नटखट श्रीकृष्ण यही कार्य करने चल पड़े।

शिव पार्वती कथा-होलिका दहन
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय की बात है कि हिमालय पुत्री पार्वती की यह मनोइच्छा थी कि उनका विवाह केवल भगवान शिव से हो। सभी देवता भी यही चाहते थे की देवी पार्वती का विवाह ही भगवान शिव से होना चाहिए. परन्तु श्री भोलेनाथ थे कि सदैव गहरी समाधि में लीन रहते थे। ऐसे में माता पार्वती के लिये भगवान शिव के सामने अपने विवाह का प्रस्ताव रखना कठिन हो रहा था। इस कार्य में पार्वती जी ने कामदेव का सहयोग मांगा, प्रथम बार में तो कामदेव यह सुनकर डर गये कि उन्हें भगवान भोलेनाथ की तपस्या को भंग करना है, परन्तु पार्वती जी के आग्रह करने पर, वे इसके लिये तैयार हो गये। कामदेव ने भगवान शंकर की तपस्या भंग करने के लिये प्रेम बाण चलाया, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई। अपनी तपस्या के भंग होने से शिवजी को बड़ा क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया। इसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह कर लिया। होलिका दहन का पर्व, क्योंकि कामदेव के भस्म होने से संबंधित है। इसलिये इस पर्व की सार्थकता इसी में है कि व्यक्ति होली के साथ अपनी काम-वासनाओं को भस्म कर दें। और वासनाओं से ऊपर उठ कर जीवन व्यतीत करें।

नारद जी और युधिष्ठिर की कथा
पुराण अनुसार श्री नारदजी ने एक दिन युधिष्ठिर से यह निवेदन किया कि है राजन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन सभी लोगों को अभयदान मिलना चाहिए, ताकि सभी कम से कम एक साथ एक दिन तो प्रसन्न रहें, खुशियां मनाएं। इस पर युधिष्ठिर ने कहा कि- जो इस दिन हर्ष और खुशियों के साथ यह पर्व मनाएगा, उसके पाप प्रभाव का नाश होगा। उस दिन से पूर्णिमा के दिन हंसना-होली खेलना आवश्यक समझा जाता है।

श्री विष्णु जी को झूले में झुलाने की प्रथा
होली से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन जो लोग चित को एकाग्र कर भगवान विष्णु को झूले में बिठाकर, झूलते हुए विष्णु जी के दर्शन करते हैं, उन्हें पुण्य स्वरूप वैकुण्ठ की प्राप्ति होती है।


होलिका दहन : कब करें, कैसे करें, पूजन विधि
26 मार्च 2013 मंगलवार, को होलिका दहन किया जाएगा। प्रदोष व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भ्रद्रारहित काल में होलिका दहन किया जाता है। 26 मार्च, 2013 को गोधूलि बेला में होलिका-दहन किया जा सकता है। इसलिए होलिका-दहन से पूर्व और भद्रा समय के पश्चात् होली का पूजन किया जाना चाहिए।
भद्रा के मुख का त्याग करके निशा मुख में होली का पूजन करना शुभफलदायक सिद्ध होता है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पर्व-त्यौहारों को मुहूर्त शुद्धि के अनुसार मनाना शुभ एवं कल्याणकारी है। हिंदू धर्म में अनगिनत मान्यताएं, परंपराएं एवं रीतियां हैं। वैसे तो समय परिवर्तन के साथ-साथ लोगों के विचार व धारणाएं बदलीं, उनके सोचने-समझने का तरीका बदला, परंतु संस्कृति का आधार अपनी जगह आज भी कायम है। आज की युवा पीढ़ी में हमारी प्राचीन नीतियों को लेकर कई सवाल उठते हैं, परंतु भारतीय धर्म-साधना के परिवेश में वर्ष-भर में शायद ही ऐसा कोई त्यौहार हो, जिसे हमारे राज्य अपने-अपने रीति रिवाजों के अनुसार धूमधाम से न मनाते हों।

आहुति देने वाली सामग्रियां
होलिका दहन होने के बाद होलिका में जिन वस्तुओं की आहुति दी जाती है, उसमें कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। सप्त धान्य है, गेहंू, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर।

पूजा विधि
होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा की जाती है.। इस पूजा को करते समय, पूजा करने वाले व्यक्तिको होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। पूजा करने के लिये निम्न सामग्री को प्रयोग करना चाहिए। एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त नई फसल के धान्यों जैसे- पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती है। इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल तथा अन्य खिलौने रख दिए जाते हैं। होलिका दहन मुहूर्त समय में जल, मोली, फूल, गुलाल तथा गुड़ आदि से होलिका का पूजन करना चाहिए। गोबर से बनाई गई ढाल व खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर लाकर सुरक्षित रख ली जाती हैं। इसमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमान जी के नाम की, तीसरी शीतला माता के नाम की तथा चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है। कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना होता है, फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है। रोली, अक्षत व पुष्प को भी पूजन में प्रयोग किया जाता है। गंध-पुष्प का प्रयोग करते हुए पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन

किया जाता है। पूजन के बाद जल से अघ्र्य दिया जाता है। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित कर दी जाती है। इसमें अग्नि प्रज्जवलित होते ही डंडे को बाहर निकाल लिया जाता है। सार्वजनिक होली से अग्नि लाकर घर में बनाई गई होली में अग्नि प्रज्जवलित की जाती है। अंत में सभी पुरुष रोली का टीका लगाते हैं तथा महिलाएं गीत गाती हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। सेंक कर लाए गए धान्यों को खाने से निरोगी रहने की मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि होली की बची हुई अग्नि और राख को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर को अशुभ शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है तथा इस राख का शरीर पर लेपन भी किया जाता है। राख का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है-
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव॥

होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए-
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।।

इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रूप में करना चाहिए।

होलिका पूजन के बाद होलिका दहन
विधिवत रूप से होलिका का पूजन करने के बाद होलिका का दहन किया जाता है। होलिका दहन सदैव भद्रा समय के बाद ही किया जाता है। इसलिए दहन करने से भद्रा का विचार कर लेना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि भद्रा समय में होलिका का दहन करने से क्षेत्र विशेष में अशुभ घटनाएंं होने की संभावना बढ़ जाती हैं। इसके अलावा चतुर्दशी तिथि, प्रतिपदा में भी होलिका का दहन नहीं किया जाता है तथा सूर्यास्त से पहले कभी भी होलिका दहन नहीं करना चाहिए। होलिका दहन करते समय मुहूर्त आदि का ध्यान रखना शुभ माना जाता है।

आधुनिक परिप्रेक्ष्य में होलिका दहन
आज के संंदर्भ में वृक्षारोपण के महत्व को देखते हुए आज होलिका में लकडिय़ों को जलाने के स्थान पर अपने मन से आपसी कटुता को जलाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे हम सब देश की उन्नति और विकास के लिए एकजुट होकर कार्य कर सकें । आज के समय की यह मांग है कि पेड़ जलाने के स्थान पर उन्हें प्रतीकात्मक रूप में जलाया जाए। इससे वायु प्रदूषण और वृक्षों की कमी से जूझती इस धरा को बचाया जा सकता है। प्रकृति को बचाए रखने से ही मनुष्य जाति को बचाया जा सकता है, यह बात हम सभी को कभी नहीं भूलनी चाहिए।


तंत्र-मंत्र और टोटकों की होली
कम लोग ही जानते होंगे कि दीपावली की तरह होली का महत्व भी तंंत्र-मंत्र और टोने-टोटके के मामलों में कम नहीं। सभी लोग जब होली के हुड़दंग में डूबे होते हैं और चहुंओर मस्ती का आलम होता है, तब गुमनाम और सुनसान जगहों पर तंत्र-मंत्र से टोटकों की होली खेली जा रही होती है। इस होली में लाल, हरे, नीले, पीले रंग नहीं, बल्कि देशी पान के पत्ते, काले तिल, सिंदूर, कपूर, नारियल, नींबू, लाल मिर्च आदि होते हैं। तांत्रिकों की दुनिया में दीपावली की तरह होली पर भी टोने-टोटके की परंपरा चल पड़ी है। होलिका दहन से पूर्व के समय को तांत्रिक सिद्ध मानते हैं। पूर्णिमा को प्रात: से रात्रि 12 बजे तक तांत्रिक विभिन्न प्रकार के तंत्र और मंत्रों को सिद्ध करके अपना और जातकों का कल्याण करते हैं। होली के दिन तांत्रिक तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूरे दिन पूजा, पाठ, हवन आदि करते हैं। पीडि़तों की मांग पर टोटके आदि किए जाते हैं। तांत्रिक प्रक्रिया में दीपावली की तरह पशु-पक्षियों अथवा उनके अंगों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि वनस्पति और अन्य सामग्री से उतारा आदि किए जाते हैं। होली और श्मशान की राख होली पूर्णिमा की रात को अनिष्टकारी कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। तंत्र-मंत्र की दुनिया से जुड़े लोग कहते हैं कि समाज में आज भी ईष्र्यालु लोगों की कमी नहीं है। व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा वाले कुछ लोग एक-दूसरे के पतन के लिए टोने-टोटके करवाते हैं। इसमें होली और श्मशान की राख का खास तौर पर उपयोग किया जाता है। दिशाएं बताती हैं, इसी क्रम में दशा मान्यता है कि होलिका दहन के समय उसकी उठती हुई लौ से कई संकेत मिलते हैं। पूरब की ओर लौ उठना कल्याणकारी होता है, दक्षिण की ओर पशु पीड़ा, पश्चिम की ओर सामान्य और उत्तर की ओर लौ उठने से बारिश होने की संभावना रहती है।


होली पर टोने-टोटके
व्यापार बढ़ाने के लिए
इस बार होली मंगलवार को है। सोमवार को ऐसे पेड़ के नीचे जाएं, जिस पर चमगादड़ लटकती हो, उस पेड़ की एक डाल को निमंत्रण दें कि कल हम तुम्हें ले जाएंगे। होली वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उस डाल को तोड़कर ले आएं। रात को उस डाल एवं उसके पत्तों का पूजन कर अपनी गद्दी के नीचे रखें। व्यवसाय खूब फलेगा-फूलेगा।
पौरुषत्व प्राप्ति के लिए
जंगली कबूतर की बीट लाकर उसे तेल में मिला लें तथा रात को उसे सामने रखकर रात्रि में निम्न मंत्र का जाप करें- ऊं कामाय नम: तथा इस तेल की मालिश करने से पुरुषेंद्रिय शक्तिशाली होती हैं।
धन में वृद्धि हेतु
ऊं नमो धनदाय स्वाहा
होली की रात इस मंत्र का जाप करने से धन में वृद्धि होती है।
रोग नाश हेतु
ऊं नमो भगवेत रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा, इस मंत्र का होली की रात जाप करने से कैसा भी रोग हो नाश हो जाता है।
शीघ्र विवाह हेतु
- होली के दिन सुबह एक साबुत पान पर साबुत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं, यही प्रयोग अगले दिन भी करें। अतिशीघ्र विवाह हो जाता है।
- गोरखमुण्डी का पौधा लाकर उसको धोकर होली की रात उसका पूजन करें, फिर उसको होली की अग्नि में सुखा दें तथा पांच दिन सूखने दें, पंचमी के दिन उसको पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण कई प्रयोग में आता है।
- सुबह-शाम इस चूर्ण को शहद से चाटने पर स्मरण एवं भाषण शक्ति बढ़ती है।
- दूध के साथ इस चूर्ण का सेवन करने से शरीर स्वस्थ और बलिष्ठ होता है। इस चूर्ण के पानी से बाल धोने पर बाल लंबे और काले घने होते हैं। इस चूर्ण के तेल से शरीर की ऐंठन, जकडऩ दूर होती है।

ऐसे बचें टोटकों से
टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। होलिका दहन वाले दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
* उतार और टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए सिर को टोपी आदि से ढंके रहें।
* टोने-टोटके में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें।
* होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा, तो वह भी खत्म हो जाएगा। होली के दिन क्या करें और क्या न करें- यहां पढ़ें।




प्राकृतिक सौंदर्य का पर्व होली

भारत त्यौहारों का देश है। यहां एक त्यौहार कई संस्कृतियों, परम्पराओं और रीतियों की झलक प्रस्तुत करता है.। होली शीत ऋ तु के उपरांत बसंत के आगमन, चारों और रंग-बिरंगे फूलों का खिलना होली आने की ओर इशारा करता है। होली का त्यौहार प्राकृतिक सौन्दर्य का पर्व है। यह प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली से ठीक एक दिन पहले रात्रि को होलिका दहन होता है। उसके अगले दिन प्रात: से ही लोग रंग खेलना शुरू कर देते हैं। वर्ष 2013 में 27 मार्च के दिन होली रंगोत्सव मनाया जाएगा। इस होली को धुलेंडी के नाम से भी जाना जाता है।

होली का त्यौहार मस्ती और रंग का पर्व है। यह पर्व बसंत ऋ तु से चालीस दिन पहले मनाया जाता है। सामान्य रूप से देखें तो होली समाज से बैर-द्वेष को छोड़कर एक दूसरे से मेलमिलाप करने का पर्व है। इस अवसर पर लोग जल में रंग मिलाकर, एक-दूसरे को रंगों से सराबोर करते हैं। टेसू के फूलों से युक्त जल में चन्दन, केसर और गुलाब तथा इत्र इत्यादि से बनाए गए प्राकृतिक रंग इस उत्सव की खूबसूरती बढ़ा देते हैं।

प्राचीन काल की होली
पौराणिक समय में श्रीकृष्ण और राधा की बरसाने की होली के साथ ही होली के उत्सव की शुरुआत हुई। फिर इस होली को मुगलों ने अपने ढंंग से खेला। मुगल साम्राज्य के समय में होली की तैयारियांं कई दिन पहले ही प्रारम्भ हो जाती थी। मुगलों के द्वारा होली खेलने के संकेत कई ऐतिहासिक पुस्तकों में मिलते हैं, जिसमें अकबर, हुमायूंं, जहांंगीर, शाहजहां और बहादुरशाह जफर मुख्य बादशाह थे, जिनके समय में होली खेली जाती थी। अकबर काल में होली के दिन बाकायदा बड़े बड़े बरतनों में प्राकृतिक वस्तुओं का प्रयोग करते हुए, रंग तैयार किए जाते थे। रंग के साथ स्वादिष्ट व्यंंजनों का भी प्रबन्ध होता था। राग-रंग का माहौल होता है। तानसेन अपनी आवाज से सभी को मोहित कर देते हैं। कुछ इसी प्रकार का माहौल जहांंगीर और बहादुरशाह जफर के समय में होली के दिन होता था। ऐसे अवसरों पर आम जनता को भी बादशाह के करीब जाने, उनसे मिलने के अवसर प्राप्त होते थे। आज होली के रंग, इसकी धूम केवल भारत तथा उसके प्रदेशों तक ही सीमित नहीं है, अपितु होली का उड़ता हुआ रंग आज दूसरों देशों तक भी जा पहुंचा है। ऐसा लगता है कि हमारी परम्पराओं ने अपनी सीमाओं का विस्तार कर लिया है। यह पर्व स्नेह और प्रेम का है। इस पर्व पर रंग की तरंग में छाने वाली मस्ती पर संयम रखते हुए, अपनी मर्यादाओं की सीमा में रहकर, इस पर्व का आनन्द लेना चाहिए।

आज की होली
प्राचीन काल में होली खेलने के लिए पिचकारियों का प्रयोग होता था, परन्तु समय का पहिया घूमा और समय बदल गया। आज पिचकारियों से होली केवल बच्चे ही खेलते हैं। प्रत्येक वर्ग होली खेलने के लिये अपने अलग तरह के संसाधनों का प्रयोग करता है, उच्च वर्ग एक और जहां, इत्र, चंदन और उत्तम स्तर के गुलाल को प्रयोग करता है. वहीं, दूसरा वर्ग पानी, मिट्टी ओर कभी कभी कीचड़ से भी होली खेल कर होली के त्यौहार को मना लेता है। होली का त्यौहार बाल, युवा, वृ्द्ध, स्त्री- पुरुष, बिना किसी भेदभाव से ऊंच-नीच का विचार किये बिना, एक-दूसरे पर रंग डालते हैं। धुलेंडी की सुबह, घर पर होली की शुभकामनाएं देने वाली को भीड़ लग जाती है। होली के दिन जाने-पहचाने चेहरे भी होली के रंगों में छुपकर अनजाने से लगते हैं। होली पर बड़ो को सम्मान देने के लिये पैरों पर गुलाल लगा कर आशीर्वाद लिया जाता है। समान उम्र का होने पर गुलाल माथे पर लगा कर गले से लगा लिया जाता है और जो छोटा हों, तो स्नेह से गुलाल लगा दिया जाता है।

होली की विशेषता
भारत के सभी त्यौहारों पर कोई न कोई खास पकवान बनाया जाता है। खाने के साथ अपनी खुशियों को मनाने का अपना ही एक अलग मजा है। इस दिन विशेष रूप से ठंडाई बनाई जाती है, जिसमें केसर, काजू, बादाम और ढेर सारा दूध मिलाकर इसे बेहद स्वादिष्ट बना दिया जाता है। ठंडाई के साथ ही बनती है, खोये की गुजिया और साथ में कांजी इन सभी से होली की शुभकामनाएं देने वाले मेहमानों की आवभगत की जाती है और आपस में बैर-मिटाकर गले से लगा लिया जाता है। दुश्मनों को भी दोस्त बनाने वाला यह पर्व कई दिनों तक सबके चेहरों पर अपना रंग छोड़ जाता है। होली का पर्व सूरज के चढऩे के साथ ही अपने रंग में आता है। होली खेलने वाली की टोलियां नाचती-गाती, ढोल- मृदंग बजाती, लोकगीत गाती सभी के घर आती है और हर घर से कु छ जन इस टोली में शामिल हो जाती है, दोपहर तक यह टोली बढ़ती-बढ़ती एक बड़े झूंड में बदल जाती है। नाच-गाने के साथ ही होली खेलने आई इन टोलियों पर भांग का नशा भी चढ़ा होता है, जो सायंकाल तक सूरज ढलने के बाद ही उतरता है। होली की टोली के लोकगीतों में प्रेम के साथ साथ विरह का भाव भी देखने में आते है। इस दिन होली है...की गूंज हर ओर से आ रही होती है।

होली में भावनाओं की अभिव्यक्ति
होली भारतीय समाज में लोकजनों की भावनाओं की अभिव्यक्तिका आईना है। यहां परिवार को समाज से जोडऩे के लिये होली जैसे पर्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज को एक-दूसरे से जोड़े रखने और करीब लाने के लिए होली जैसे पर्व आज समाज की जरूरत बन कर रह गए हैं। आधुनिकता की दौड़ में शहरों में व्यक्ति भावना शून्य हो गया है। गांवों में एक और जहां किसी एक व्यक्ति के बीमार पडऩे पर सभी ग्रामीण हालचाल पूछने आते हैं। किसी एक पर विपदा आने पर वह विपदा पूरे गांव की होती है। इसके विपरीत शहरों में साथ वाले फलैट में कौन रहता है, यह जानने में भी कई बरस लग जाते हैं। सभी मायनों में देखा जाए तो आज होली की जरूरत शहरों के इस मौन को तोडऩे के लिए सबसे अधिक है।

बुरा न मानो होली है!

आशा नेगी (पवित्र रिश्ता की पूर्वी )
होली के दौरान लोगों को देखना हमेशा से एक आश्चर्यजनक अनुभव रहा है। चूंकि यह भारत में हमारे द्वारा मनाए जाने वाला संभवतया सबसे रंगीन त्यौहार है। यह हमें जीवन के अलग-अलग रंगों की याद भी दिलाता है। मैं रंगों से होली मनाने की खास प्रशंसक नहीं हंू, क्योंकि दिन के अंत तक सब कुछ बहुत गड़बड़ हो जाता है। इस साल मैं छुट्टी मनाने का सोच रही हूं, क्योंकि में पहली बार मुंबई में अपने दोस्तों और साथियों के साथ होली मना रही होऊंगी। फि र भी मेरे लिए सबसे याद होली दो साल पहले की है, जब मैंने अपने गृहनगर देहरादून में इसे अपने पूरे परिवार के साथ मनाई थी। इस त्यौहार की सबसे अच्छी बात यह है कि सारे लोग अपने अहं को दूर रखकर सभी के साथ मस्ती में डूबकर इस त्यौहार को मनाते हैं।

रागिनी खन्ना (इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज की होस्ट)
होली मुझे बचपन के दिनों की याद दिलाती है, जब मैं इस त्यौहार को अपनी नानी के घर अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ मनाती थी, लेकिन दुर्भाग्य से इस साल ऐसा नहीं होगा। इस साल मेरी योजना यह है कि यदि मुझे शूटिंग से समय मिला तो इसे मैं अपने नजदीकी दोस्तों और परिवार वालों के साथ मनाऊं। इस त्यौहार की सबसे अच्छी बात यह है कि यही वह समय है, जब आप सारी शरारतें करने के लिए उठ खड़े होते हैं और और बुरा न मानो होली कह कर सब कुछ माफ  कर देने की अपेक्षा करते हैं।

रित्विक धनजानी (पवित्र रिश्ता का अर्जुन और इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज का होस्ट)
होली एक ऐसा त्यौहार है, जिसे मैं कुछ सालों से मना नहीं पाया हूं। अपनी जिन्दगी के कई साल विदेश में बिताने के कारण मुझे इस त्यौहार को इतना मनाने का मौका ही नहीं मिल पाया। लेकिन यदि मुझे आधा मौका भी मिला तो मैं इसे मनाऊंगा। मेरे दिमाग में होली की एक खास याद है, जब मैं इसे अपने दोस्त के घर मना रहा था। हम एक दूसरे पर रंग लगाने के लिए एक दूसरे के पीछे दौड़ रहे थे। अंत में दौड़भाग से थकने के बाद उन्होंने मुझे रंग से भरी बाल्टी में धकेल दिया और मुझ पर इंद्रधनुषी रंग छा गया। जब कि मुझे यह लग रहा था कि मैं बहुत मजेदार लग रहा हूं। मैं तीन साल का ऐसा बच्चा लग रहा था, जिसने अपनी अंगुलियों को पेंटिंग के रंगों में डूबो दी है। इसके बावजूद मुझे आज भी मुझे अपने दोस्तों और परिवार के साथ होली मनाना अच्छा लगता है।

लीना जुमानी (पुनर्विवाह की परी )
होली मेरा पसंदीदा त्यौहार है और मुझे इस दौरान होने वाली सारी रस्में अच्छी लगती हैं। इस त्यौहार की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें सबके साथ एकजुट होने की भावना पनपने लगती है। मेरे लिए सबसे यादगार होली वह थी, जब दस साल पहले इसमें पूरे परिवार के साथ मजाक कर सोते समय सभी को रंग से भर दिया था।

महिमा मकवाना (सपने सुहाने लड़कपन की रचना)
जब मैं छोटी थी तभी से मेरी मां इस पवित्र त्यौहार पर पूरणपोली बनाया करती हैं और यदि पूरणपोली नहीं मिले, तो ऐसा लगता ही नहीं कि होली है। इस साल भी मम्मी मेरे लिए कुछ खास बनाएगी। मुझे स्वादिष्ट व्यंजन खाना अच्छा लगता है। वर्ली में एक जगह लोलीवाडा है, जहां होली की तैयारियां 7-8 दिन पहले से आरंभ हो जाती हैं। यदि मुझे शूटिंग से एक दिन की छुट्टी मिली तो मैं वहीं होली मनाना पसंद करूंगी। होली ऐसा समय है, जब आप अपने दोस्तों के साथ इसका आनंद लेते हैं और चूंकि मुझे रंग अच्छे लगते हैं और दूसरों के साथ छेड़छाड़ करना पसंद है, इसलिए मैं बेताबी से होली का इंतजार करती हूं।

सुहासी धामी (हाउस वाइफ  है सब जानती है की सोना)
मेरे विचार में गुलाल से होली मनाना सबसे अच्छा है। आखिरकार यह रंगों का त्यौहार है। इस दिन पुराने दोस्तो से मिलकर मस्ती करना अच्छा लगता है, जिससे पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं। मुझे भांग पीना अच्छा लगता है, साथ ही इसके बाद होने वाले प्रभाव भी मजेदार होते हैं, जिसमें आप अपने आपको अपनी ही दुनिया में पाते हैं। दुर्भाग्य से इस साल में शूटिंग में व्यस्त रहूंगी, इसलिए मैंने अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है।

शक्ति अरोरा (पवित्र रिश्ता का डॉ. ओनिर )
इस साल मैं स्पेशल होली मनाऊंगा और मुझे इसकी मौज-मस्ती का बेताबी से इंतजार है। मुझे होली से पहले योजना बनाना और यह सुनिश्चित करना अच्छा लगता है कि सारा दिन मजे से गुजरे। इस साल मैं भांग आजमाने का बेताबी से इंतजार कर रहा हूं।

अनिरूद्ध दवे ( हाउस वाइफ  है सब जानती है का कन्हैया )
मैं हमेशा अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ होली मनाने का आदी रहा हूं। बहुत सारे रंग और बैलून्स के अलावा हम अंडे और टमाटर के साथ भी होली खेलते हैं। वास्तव में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि चाहे होली कैसी भी खेली जाए, वह धमाकेदार होनी चाहिए। रंगों का त्यौहार होने के नाते यह मेरा सबसे पसंदीदा त्यौहार है और मैं इस साल भी इसे धमाके साथ मनाने का इंतजार कर रहा हूं।

मृणालिनी त्यागी (पवित्र रिश्ता की तेजु)
पिछले साल मेरे लिए होली सबसे ज्यादा यादगार थी, क्योंकि मैंने इसे अपने दोस्तों और साथियों के साथ मनाई थी। होली का सबसे अच्छा हिस्सा इसके रंग, गुलाल और भांग हैं। इस रंगीन दिन मुझे सफेद कपड़े पहनना अच्छा लगता है। मुझे इस दिन मिठाई के साथ भांग खाना अच्छा लगता है। इस दिन आप मुझे सबसे ज्यादा शरारतें करते देख सकते हैं। मैं रंगों से भरे गुब्बारे फेंक कर सभी को रंग देती हूं। इस दिन मैं अपने आप को सबसे ज्यादा मजेदार मानती हूं और बुरा न मानो होली है कहते हुए सभी के साथ मजाक करती रहती हूं।

श्रुति कंवर (पवित्र रिश्ता की ओवी)
होली कभी भी ऐसा अवसर नहीं रहा, जिसे मैंने बड़े पैमान पर मनाया हो। हालांंकि मुझे होली ख्रेलना इतना अच्छा नहीं लगता है, फि र भी इस साल मैं होली अपने शरारती दोस्तों गत्विक, आशा और जिया के साथ मनाना चाहती हूं और हम सभी मिलकर पवित्र रिश्ता के सेट पर खूब धमाल करने वाले हैं।

नेहा सरगम (रामायण की सीता )
सच कहूं तो होली पर लोगों के चेहरे देखकर मुझे डर लगने लगता है। एक ऐसा मजेदार वाकिया है, जिसे मैं आपको बताना चाहती हूं। मैंने एक बार अपने शरारती कजिन के साथ मिलकर अपने दादाजी का चेहरा तब रंग दिया, जब वह सो रहे थे। जब वह नींद से जागे और अपने आपको शीशे में देखा, तो वह बच्चों की तरह चीखने लगे। यदि होली पर मुझे छुटटी मिली, तो मैं इसे अपने परिवार के साथ मनाऊंगी।

नील भट्ट (रामायण का लक्ष्मण)
होली के बारे में मुझे एक घटना याद है, जब हम इसे अपनी बिल्डिंग के टैरेस पर मना रहे थे। हमने सारे वाटर पाइप्स को बंद कर दिया था, ताकि टैरेस पर पानी भर जाए और हम पानी के तालाब में धूम मचाएं। दुर्भाग्य से इस साल होली के लिए मेरी कोई योजना नहीं है, क्योंकि मैं रामायण की शूटिंग में व्यस्त रहूंगा। होली में रंगों का उपयोग सबसे अच्छा लगता है। वह हमारे समाज को एक साथ लाकर धर्मनिरपेक्षता की डोर मजबूत करते हैं।

किरण करमरकर (बदलते रिश्ते की दास्तान का बलराज)
हालांकि मुझे होली और इससे जुड़ी सभी बातें अच्छी लगती हैं, फिर भी मेरा मानना है कि होली इस तरह से मनाई जाना चाहिए कि इससे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। देश में पानी के मौजूदा संकट को देखते हुए मैं यही अनुरोध करूंगा कि वह बड़े पैमाने पर पानी को बरबाद करने के बजाए सूखे रंगों से होली खेलें।

मंगलवार, 19 मार्च 2013

फाल्गुन आया झूम के



रंग बिरंगे पुष्प खिले हैं ,फाल्गुन आया झूम के,
सखा ने है गुलाल लगाया अपनी सखी को चूम के|

अरे दादा दादी,काका काकी,मुन्ना मुन्नी आओ रे,
रंग लाल,गुलाबी,नीला,पीला,हरा, बैंगनी लाओ रे|

गिले शिकवे सब भूल के,आज गले लग जाओ रे,
सब दोस्तों संग मिलके ,तुम भी होली मनाओ रे|

ढोलक ले कर गलियों में, टोली बनाकर आओ रे,
चंदन तिलक करो सभी को गीत खुशी के गाओ रे|
       
भांग पकोडे,बिस्कुट,गुजिया चाय के संग खाओ रे,
शिव प्रसाद भांग छक के,मस्ती में छा जाओ रे|

फाल्गुन आया झूम के ,तुम भी संग झूम जाओ रे,
देखो सबको गीला करदो ,गुब्बारे पिचकारी लाओ रे||
..................................

होली आई रे,संग फूलों की बहार लाई रे
उससे आज मिलने का यह एक बहाना है

रंगोली वाले कोई मोहब्बत का रंग देदे
हमें तो अपने सजना को रंगने जाना है

रंग गाढ़ा देना,तमाम उमर न उतर पाए
ऐसे रंग से आज सजना को सजाना है

रंग देना साँवरिया की सच्ची प्रीत सा
हमें मीरा राधा को लगाने जाना है

गिले शिकवे नफ़रत की होली जलाकर
मन प्यार स्नेह से भर कर लाना है

प्यार के रंगों की 'सरिता' यूँ बहाकर 
इसको प्रेमसागर से आज मिलाना है||
.....................................................
नाम                  सरिता भाटिया

जन्म                 6मार्च,1966. क़ादिया [जिला गुरदासपुर,पंजाब]

शिक्षा                 Sec...Ved Kaur Kanya Vidhalya, Quadian.
                       B.Sc.....Baring Union Chritian College ,Batala 
                       B.Ed.....D.A.V.COLLEGE for Women, Amritsar

पिता का नाम       स्वर्गीय श्री जनक राज भाटिया

माता का नाम       श्रीमती राज भाटिया

पता                    भाटिया कॉलेज
                         आर-169,ए-3,वाणी विहार, 
                         उत्तम नगर, नई दिल्ली-59
mob.                  09818802421 [not to post]

सेवा                 * प्रधानाचार्य...पैराडाइज़ पब्लिक स्कूल,
                         उत्तम नगर,नई दिल्ली.
                      * मैनेजर....   भाटिया कॉलेज,
                         उत्तम नगर,नई दिल्ली.
                      * अध्यक्षा...   महिला मोर्चा ,बिन्दापुर मंडल

लेखन               *  अंजुम मासिक पत्रिका,श्री गंगानगर,राजस्थान में
                         हर माह रचना छपती है
                      * 'सृजक' मोतिहारी बिहार त्रैमासिक पत्रिका में रचनाएँ
                      * 'नव्या' सुरेंदरनगर,गुजरात में रचना
                      * 'नव्या ' इ मैगज़ीन में रचनाएँ 
                      * 'सक्षम' मासिक पत्रिका गुड़गाव, में रचना
                      * 'पंचमहल उजागर' साप्ताहिक गोधरा, गुजरात. में रचनाएँ
                      *  'मानस वंदन' मासिक पत्रिका,उज्जैन,में रचनाएँ
                      * 'राज एक्सप्रेस' दैनिक समाचार पत्र,भोपाल में रचनाएँ 

ब्लॉग               guzarish6688.blogspot.com
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ई-मेल               saru.bhatia66@gmail.com

SALMAN KHAN MAKES PARENTS PROUD


Very soon the most celebrated Khan of Bollywood will be seen making his anchoring debut. Yes, you guessed it right; it’s none other than the dashing Salman Khan. Salman Khan, for the very first time would be debuting as a host at Renault Star Guild Awards only on STARPLUS.
Like the grace and panache in his movies, the same was visible in his hosting abilities. Hosting for the first time is surely a proud feeling; the handsome hunk agrees to his and said “My parents would be really proud of me, as I am debuting for the very first time as a host and nothing could be better than making them feel happy.”
This is very much like our STARPLUS’ sons who are very respectful towards their parents and always want to keep them happy.
To catch all this and much more don’t forget to watch Renault STAR Guild Awards on 24th March 2013 at 8pm only on STAR PLUS!


LIFETIME ACHIEVEMNET AWARD FOR LATA DIDI
The fact that time and age does not affect talent was proved yet again. The singing sensation Lata Mangeshkar left the audience with teary eyes when she came on the stage of Renaut STAR Guild Awards.
This happened when the singing sensation was honored with a Lifetime Achievement award during the ceremony. Lata didi who was very touched didn’t have words to express what she was going through at that moment.  It was when the host for the evening Salman Khan requested, the Singing sensation sang few lines from the very popular song ‘Naam Gum Jaayega’. As her voice reverberated in the entire studio the audience stood up and gave her standing ovation with teary eyes!
To catch all this and much more don’t forget to watch Renault STAR Guild Awards on 24th March 2013 at 8pm only on STAR PLUS!


HEMA MALINI MAKES A CONFESSION!
It was a night of confession and learning at the Renault STAR Guild Awards. The dream girl, Hema Malini who came for the awards looking extremely ravishing in the white sari made a confession.
This happened when the host of the show the one and only Salman Khan asked beautiful Hema Malini to dance with him on her famous song from the movie where she wore skates.
The actress who was very well appreciated for her double role in the movie Seeta aur Geeta felt really shy accepting the fact that she has still not learnt how to skate when actually Ramesh Sippy had asked her to do so years back during the making of Seeta aur Geeta! She acknowledged that she couldn’t get herself to learn it till date.
To catch all this and much more don’t forget to watch Renault STAR Guild Awards on 24th March 2013 at 8pm only on STAR PLUS!

'व्हेअर टाइगर्स रूल


अभिनेता अजय देवगन, बिपाशा बासु और ओलम्पिक खिलाड़ी अभिनव बिंद्रा अपना समर्थन दे रहे हैं
एनिमल प्लैनेट एक महीने तक चलने वाले विशेष कार्यक्रम - व्हेअर टाइगर्स रूल के साथ फिर लौट रहा है ताकि भारत के राष्ट्रीय जीव का यशोगान कर सके और इस शानदार जीव से जुड़ी आकर्षक और विविध दास्तानों को भारत तथा पूरी दुनिया से प्रस्तुत कर सके। व्हेअर टागइर्स रूल कार्यक्रम को केवल एनिमल प्लैनेट पर अप्रैल में हर रात 9 बजे से दिखाया जाने वाला है और यह दर्शकों को बाघ के व्यवहार, शिकार करने की उसकी महारतों, लोकगाथाओं और इसके अस्तित्व से जुड़े मुद्दों पर दिलकश कार्यक्रम दिखाएगा।
व्हेअर टागइर्स रूल कार्यक्रम को भारत के भव्य वनों, घास के मैदानों और संरक्षित अभयारण्यों के मनोहारी भू-दृश्यों में फिल्माया गया है जो बाघ की रहस्यमय दुनिया के अंतरंग दृश्य मुहैया कराएगा। इस प्रयास में एनिमल प्लैनेट के साथ जुड़ रहे हैं बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता अजय देवगन, बिपाशा बासु और ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा। वे बाघों के प्रति एनिमल प्लैनेट के जुनून में हिस्सेदारी कर रहे हैं। बाघों और उनके अस्तित्व को प्रभावित करने वाले खतरों के बारे में पूरे देश की दिलचस्पी जगाने में ये हस्तियां चैनल की कोशिशों में मदद करेंगी।

इस श्रृंखला की घोषणा करते हुए राहुल जौहरी, सीनियर वाइस प्रैजिडैंट और जनरल मैनेजर - दक्षिण एशिया, डिस्कवरी नैटवक्र्स एशिया पैसिफिक ने कहा, 'देश भर में एनिमल प्लैनेट की लोकप्रियता बाघों के संरक्षण से जुड़ी राष्ट्रीय चिंता के लिए समर्थन जुटाने में मदद करेगी। बाघ पूरे एक महीने तक टेलीविजन की स्क्रीन पर छाए रहेंगे। दर्शक इन आकर्षक बाघों का अनुसरण करते रह पाएंगे और परभक्षी तथा संरक्षक की उनकी भूमिकाओं की पेचीदगियों के बारे में जान पाएंगे। जाने-माने अभिनेता अजय देवगन ने कहा, 'बाघों की घटती आबादी पूरे राष्ट्र की चिंता है और इसके लिए एक साथ मिलकर कुछ करने की आवश्यकता है। मैं प्रसन्न हूं कि एनिमल प्लैनेट ने हमारे इस राष्ट्रीय खजाने पर एक महीने तक कार्यक्रम दिखाने का फैसला किया है, मुझे विश्वास है कि व्हेअर टाइगर्स रूल कार्यक्रम दर्शकों के दिलोदिमाग पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ेगा। बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बासु ने कहा, 'व्हेअर टाइगर्स रूल एनिमल प्लैनेट द्वारा की गई एक अमूल्य पहल है ताकि दर्शक बाघों की कीमत पहचान सकें। बाघों को विलोपन से बचाने के लिए जिस जुनून की आवश्यकता है, ये प्रयास उसे पैदा कर पाएगा। ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने कहा, 'बाघ ताकत, संकल्पशक्ति और धीरज का प्रतीक है। आज इसे अपनी जगह बचाने के लिए लगातार बढ़ती इंसानी आबादी से जूझना पड़ रहा है। मुझे इस बात का बड़ा गर्व है कि मैं एक ताकतवर लेकिन खतरे से घिरी प्रजाति का संरक्षण करने की जरूरत के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एनिमल प्लैनेट के साथ जुड़ रहा हूं।

इस कार्यक्रम में शामिल कुछ एपिसोड इस प्रकार हैं

सीक्रेट लाइफ़ ऑफ़ द टाइगर
बाघ की पारम्परिक छवि ये है कि वह एक अकेला और खून का प्यासा हत्यारा जीव है। ये दास्तानें हैं नरभक्षी बाघों की, मौत होने तक जूझने वाले और बाघों के शावकों को मार डालने वाले बाघों की। बेशक इन सब कहानियों में कुछ हकीकत है, लेकिन वह हकीकत असली सच्चाई का केवल कुछ भाग ही है। यह फिल्म बाघ की विकास प्रक्रिया और इसके पोशीदा व्यवहार का जायज़ा लेने के साथ-साथ यह भी दिखाती है कि बाघ इतना कामयाब शिकारी क्यूं है और किस प्रकार इसने अपने आप को अलग-अलग तरह के पर्यावासों के मुताबिक ढाला है। सबसे बड़ी बात ये कि यह दुनिया के सबसे करिश्माई जीवों में से एक की निजी जिन्दगी को देखने का एक अनूठा अवसर है।

ब्रोकन टेल
कॉलिन स्टेफर्ड जॉनसन ने भारत के जंगली बाघों को कई साल तक फिल्माने के दौरान जिन बाघों को देखा, ब्रोकन टेल उनमें से सबसे तड़क-भड़क वाला बाघ शावक था। अपने अभयारण्य को छोड़कर ब्रोकन टेल लगातार एक से दूसरी जगह जाता रहा, और करीब एक साल तक जिंदा बचा रहा, जबकि बहुत से लोगों का कहना था कि राजस्थान के ग्रामीण और असुरक्षित इलाकों में ऐसा नामुमकिन था। ब्रोकन टेल की इस असाधारण यात्रा में कोलिन और उनके साउंडमैन सलीम उसके साथ थे और वे इस शावक के अंतिम दिनों की घटनाओं के ताने-बाने जोड़ते हैं। ब्रोकन टेल की इस दास्तान के जरिये दर्शक भारत के अंतिम जंगली बाघों से जुड़ी कुछ कड़वी सच्चाईयां जानेंगे।

रिटर्न ऑफ़ द टाइगर
करीब 7 साल पहले भारत के सरिस्का रिजर्व के बाघों का सफाया गैरकानूनी शिकारियों ने कर दिया था। इस कीमती प्रजाति को विलोपन से बचाने के संघर्ष के लिए ये एक बड़ा झटका था। लेकिन अब संरक्षणवादियों का पलड़ा फिर भारी हो रहा है। इस खूबसूरत फिल्म में एक बाघिन और एक जोशीले नर बाघ को 18 महीनों की अवधि के दौरान दिखाया जा रहा है जो अपना नया इलाका कायम करने की कोशिश करते हैं, अपने शिकार को मारना सीखते हैं और गैरकानूनी शिकारियों के सदा मौजूद खतरे को चकमा देते हैं।

इंडिया - किंगडम ऑफ़ द टाइगर
यह फिल्म एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो भारत को 1910 से लेकर आज तक दिखाती है। ये एपिसोड एक प्रख्यात अंग्रेज शिकारी और प्रकृतिवादी जिम कॉरबैट के साथ-साथ चलता है जो भारत के एक गांव को एक आदमखोर बाघ के आतंक से बचाने निकल रहे हैं। अपनी यात्रा के दौरान वे बाघों के प्रति अपने जुनून को दर्शाते हैं और बाघों के संरक्षण के मुद्दों का जायजा लेते हैं। इस एपिसोड में नाट्यांकन की मदद ली गई है और इसमें जानी-मानी भारतीय अभिनेत्री स्मृति मिश्रा और क्रिस्टोफर हेयरदाही नजर आएंगे।  



एनिमल प्लैनेट के बारे में
एनिमल प्लैनेट दुनिया का एकमात्र ऐसा ब्रैंड है जो दर्शकों को जानवरों से जुड़े भावनात्मक, आकर्षक और भावपूर्ण कार्यक्रम दिखाता है। इनमें जंगली जानवरों से लेकर पालतू जानवर तक शामिल हैं। एनिमल प्लैनेट समृद्ध और भरपूर सामग्री वाले कार्यक्रमों के जरिये इंसानों और जानवरों को आपस में जोड़ता है और जानवरों को प्यार करने वाले लोगों को कई माध्यमों के जरिये मनोरंजन, सूचना और ज्ञान उपलब्ध कराता है। इन माध्यमों में टेलीविजन, वैबसाइट और बिक्री वाली चीजें शामिल हैं। एनिमल प्लैनेट पूरी दुनिया में 36 करोड़ 90 लाख घरों में उपलब्ध है। एनिमल प्लैनेट को 1998 में एशिया-पैसिफि़क में लांच किया गया और अब यह इस क्षेत्र में 31 देशों और इलाकों तक 16 करोड़ 90 लाख से ज्यादा सबस्क्राइबरों को आबंटित किया जाता है। और अधिक जानकारी के लिए ूूूण्ेंपंण्कपेबवअमतलण्बवउ पर एनिमल प्लैनेट को देखें।



डिस्कवरी कम्यूनिकेशन्स के बारे में
डिस्कवरी कम्यूनिकेशन्स (नैस्डैक: डिस्क ए, डिस्क बी, डिस्क के) दुनिया की पहले नम्बर की गैरकथात्मक मनोरंजन प्रस्तुत करने वाली मीडिया कम्पनी है जिसकी पहुंच 217 देशों और क्षेत्रों में 1 अरब 80 करोड़ से भी ज्यादा उपभोक्ताओं तक है। डिस्कवरी लोगों को अपनी दुनिया खोजने और उनकी उत्सुकता को शांत करने के लिए दुनिया भर में फैले अपने 153 से भी ज्यादा नैटवर्कों का उपयोग करता है, उनका नेतृत्व करते हैं- डिस्कवरी चैनल, टी एल सी, एनिमल प्लैनेट, साइंस और इनवैस्टिगेशन डिस्कवरी, इसके अलावा उसके पास अमरीका के संयुक्त उपक्रम नैटवर्क ओ डब्ल्यु एन: ऑप्रा विन्फ्रे नैटवर्क, द हब और 3नैट भी हैं जो 24 घंटे चलने वाला पहला 3डी नैटवर्क है। डिस्कवरी स्कूलों को उपलब्ध कराए जाने वाले शैक्षिक उत्पादों और सेवाओं का भी एक जाना-माना प्रदाता है तथा उसके स्वामित्व में डिजिटल मीडिया सेवाओं का एक विस्तृत पोर्टफोलियो भी है, जिसका वह संचालन करता है। इसमें भ्वूैजििनॅवतोण्बवउ शामिल है। एशिया-प्रशांत में डिस्कवरी के आठ ब्रैंड 56 करोड़ 50 लाख लोगों तक 35 देशों में पहुंचते हैं और उसके कार्यक्रम 15 भाषाओं और बोलियों में पेश किए जाते हैं।





   




मजाकिया हरकतें


'बैंड बाजा बर्बादÓ शो की परिकल्पना अनूठी एवं मनोरंजक है, जिसमें आर.जे. मंत्रा और उनका गैंग समूचे देश में शादी-विवाह के दौरान मजाकिया हरकतों की जमकर खिंचाई करेंगे। खबर है कि चैनल को लंबे समय से एक ऐसे उत्साही एवं हाजिर जवाब शरारती होस्ट की तलाश थी, जो इस शो के लिए उपयुक्त हो। खुशी की बात यह है कि चैनल की पहली पसंद मंत्रा इस शो का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गए हैं। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कलाकार एवं कॉमेडियन मंत्रा ने फिल्म 'तुम मिलेÓ से बॉलीवुड में कदम रखा था। एक कॉमेडी रियलिटी शो में एक स्टैंडअप कॉमेडियन की भूमिका निभा कर भी उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी हैं और लोगों को हंसा-हंसा कर लोटपोट करने के लिए प्रसिद्ध हैं। बैंड बाजा बर्बाद जैसे नए एवं मजेदार शो के साथ रियलिटी टीवी के आनंद को और अधिक मजेदार बनाएंगे।

प्रियदर्शन ने जैकी भागनानी के खिलाफ योजना बनाई

अक्सर निर्देशक अपने अभिनेताओं के सामने जानकारी निकालने की स्थिति रख देते है। प्रियदर्शन ने भी ऐसा किया । रंगरेज के एक खास सिक्वेंस में जैकी से कुछ भावमय प्रदर्शन की जरूरत थी और वरिष्ठ निर्देशक ने फ ौरन अपनी आजमायी हुई योजना का उपयोग किया । पूरे दो दिन तक पूरी यूनिट जैकी से कन्नी काटती रही जिसे देखकर जैकी परेशान हो गया कि आखिर उससे क्या गलती हो गई है। असिस्टैण्ट से लेकर स्पाटबॉय किसी ने भी जैकी को लिट न दी और सभी उसे अनदेखा करते रहे। एक सूत्र ने कहा कि ''जैकी को तब अपने सेट पर ऐसा लगा जैसे कि वह कोई बेगाना है। सभी उसे नजर अंदाज करते रहे और उसे घूर घूर कर देखते रहे इससे एक समय ऐसा भी आया कि लोगों के व्यवहार से वह वास्तव में उत्तेजित हो गया । ''जब वह ऐसी स्थिति से गुजर रहा था,तभी उसे बहुप्रतीक्षित शॉट के लिए बुलावा आ गया और जैसी कि प्रियदर्शन की योजना थी जैकी ने भावना मे डूबकर एक टेक में शॉट दे दिया । इस पर पूरी कू्र  ने तालियां  बजाते हुए अपना मौन तोडा । तब कहीं जाकर जैकी ने राहत की संास ली।

Doraemon in ‘Nobita’s


It’s a journey between dream and reality with Doraemon in ‘Nobita’s Three Magical Swordsmen’ this weekend only on Disney Channel


Imagine getting caught in between the intervening zone in your dream and reality?  And that’s where Nobita and his friends get stuck and it is up to everyone’s favourite friend Doraemon to save the day in the brand new Doraemon movie premier, ‘Nobita’s Three Magical Swordsmen’ this Saturday, March 23, 2013 at 11.00 am only on Disney Channel.

The movie begins with Nobita using Doraemon's magic pocket to get into some mischief. While fiddling with the magic pocket, he is able to use a tool that enables him to dream of himself being a warrior, fighting against evil. But the more he dreams, the more realistic it gets. Before long, Nobita and his friends find themselves trapped between dream and reality, unable to get back to the real world.

Being a true friend, Doraemon reaches out to Nobita and his friends to help them break away from their scary dream. Will Doraemon succeed in helping Nobita? Will they be able to overcome the dangers they will encounter? More importantly, will they ever be able to come back from the frightening dream?

To find out watch the premiere of Doraemon in ‘Nobita’s Three Magical Swordsmen’ on Saturday, March 23, 2013 at 11 am only on Disney Channel