बुधवार, 26 सितंबर 2012

नोकिया के लॉन्च दो नए फोन की खूबियां




नई दिल्ली: फिनलैंड की फोन बनाने वाली कंपनी नोकिया ने दो मोबाइल फोन लॉन्च किया है। आशा सीरीज में मंगलवार को दो किफायती टच स्क्रीन फोन पेश किए। नोकिया के अभी भी स्मार्टफोन की तुलना में बेसिक फोन की बिक्री अधिक है।

जानकारों का कहना है कि गूगल के एंड्रायड साफ्टवेयर आधारित स्मार्टफोन से मिल रही टक्कर से निपटने में आशा 308 और आशा 309 नोकिया के लिए मददगार साबित हो सकता है। नोकिया अभी प्रति दिन 10 लाख बेसिक फोन बेचती है।

नोकिया आशा 308 की खूबियां

-नोकिया ओएस
-400x240 पिक्सल रिजोल्यूशन
-ड्यूल सिम
-2MP कैमरा
-64MB इंटरनेल स्टोरेज
-एफएम रेडिया आरडीएस के साथ


नोकिया आशा 309 की खूबियां

-नोकिया ओस
-400x240 पिक्सल
-2MP कैमरा
-ब्लूटूथ के साथ वाईफाई
-64MB इंटरनेल स्टोरेज
-एफएम रेडियो आरडीएस के साथ

14वें मुंबई फिल्म फेस्टिवल में दिखायी जाएंगी 200 फिल्में





मुंबई। 14वे मुंबई फिल्म फेस्टिवल में 200 फिल्में दिखाई जाने वाली है। इस बात की घोषणा एन.सी.पी.ए ने सोमवार को की। इस साल फेस्टिवल में इटालियन की एतिहासिक और फ्रैंच की फिल्में भी दिखाई जाएँगी ।


इस साल मुंबई फिल्म फेस्टिवल में अभिनेत्री वहीदा रहमान को लाईफ टाईम अचीवमेंट से सम्मानित किया जाएगा । जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है। इस फेस्टिवल में हॉलीवुड, बॉलीवुड ,जगत से कई फिल्मों को दिखाया जाएगा । फेस्टिवल में कालिया मर्दन, राजा हरिश्चंद्र , सती सावित्री, जमाई बाबू, जैसी फिल्में दिखाई जाएंगी।


मुंबई फिल्म फेस्टिवल के चेयरमैन ने कहा ' यह फेस्टिवल बहुत ही खास होने वाला है, क्योंकि महाराष्ट्र की सरकार हमारा सहयोग कर रही है, फिल्म उद्योग से सहयोग मिल रहा है, सबसे अच्छी बात है कि मिड़िया हमारे साथ है।

14वा मुंबई फिल्म फेस्टिवल 18-25 अक्टूबर तक चलने वाला है। एकेडमि ऑफ मूविंग इमेज से जुड़े लोगों के साथ प्रेस कॅनफ्रेंस में रिलायंस एंटरटेंमैंट के सी.ई.ओ, चेयरमैन, संजीव लांबा, अमित खन्ना, फेस्टिवल के ट्रस्टी सुधीर मिश्रा और डाईरेक्टर श्रीनिवासन नारायणन भी मौजूद थे।


इस फेस्टिवल में राजेश खन्नाजी , दारा सिंघजी, ए.के.हेंगलजी को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। ऑस्कर में नोमिनेटड़ गौरी कर्टज़ जो स्टारस वार्स और द सटील के मेकर है, जूरी के तौर पर मौज़ूद रहेंगे। शोभा ड़े., राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भावना तलवार, प्रोड़युसर सचिन कुदंलकर भी आने की संभावना है । एक्टर- प्रोड़यूसर संजय सुरी, ड़ायरेक्टर गीतांजलि राव, रीमा कागती भी अपनी झलक दिखाएंगे।


14वां मुंबई फिल्म फेस्टिवल मुंबई एकेडमी ऑफ मूविंग इमेज द्वारा आयोजित किया जा रह है, इसे स्वर्गीय श्री. ऋषीकेश मखर्जी ने स्थापित ने किया था । जिसका प्रायोजक, रिलायंस एंटरटेंमेंट और अमेरिकन एक्सप्रेस हैं । फेस्टिवल से यश चोपड़ा , करन जौहर, अनुराग कश्यप , एक्ट्रेस शबाना आज़मी, जया बच्चन , एक्टर-डाईरेक्टर अमोल पालेकर, फराहान अख्तर, और रिलायंस एंटरटेंमैंट के चेयरमेन अमित खन्ना भी इस एसोसिएशन से जुडे हैं।

भोपाल के बेहतरीन लवर्स पाइंट



भोपाल। अपने प्रेमी-प्रेमिका के संग दो पल सुकून के बिताने के लिए सबसे माकूल जगह भोपाल में कौन सी है? आइये जानते हैं। भोपाल की खूबसूरती के बीच लवर्स पाइंट को।
सबने अपनी-अपनी सहूलियत मसलन : दूरी, प्राइवेसी, सिक्योरिटी आदि के मद्देनजर लव पाइंट बताए। इनमें सबसे फेवरिट लव पाइंट एकांत पार्क निकलकर सामने आया। लवर्स का तर्क था कि एकांत पार्क में नेचुरल ब्यूटी है और डिस्टर्बेंस बिलकुल नहीं। करीब 100 लवर्स ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भोपाल में अभी भी पुलिस लवर्स के प्रति सा ट कार्नर रखती है, जबकि बाकी शहरों में ऐसा नहीं है। खासकर इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों में तो लवर्स को दो वक्त अकेले में बिताने जगह तक समझ नहीं आती।

लवर्स के आधार पर भोपाल में इन लव पाइंट्स को ये नंबर मिले-
1. एकांत पार्क
2. केरवा
3. बोट क्लब
4. चिनार पार्क
5.मनुआभान टेकरी
6.कलियासोत डेम
7. भदभदा
8.भोजपुर
9. भीम बैठका
10. वन विहार
11. मानव संग्रहालय
12. प्रेमपुरा
13. मयूर पार्क


(इनमें से एकांत पार्क इसलिए सबसे फेवरिट निकला, क्योंकि यहां कोई एंट्री फीस नहीं लगती, वहीं नेचुरल ब्यूटी और प्राइवेसी अच्छी है।)

केरवा : यहां नेचुरल ब्यूटी के अलावा सुकूनभरा माहौल रहता है। यह एक पिकनिक स्पॉट है। यहां ग्रुप में भी युवा आते हैं।

स्रोत : भास्कर डॉट कॉम

आजाद भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार है यूपीएः भाजपा



भाजपा ने एक बार फिर यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए उसे आजाद भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने कमियों से गिर रही है और भाजपा का काम उसे बचाना नहीं है। सहयोगी दल सरकार से अलग हो रहे हैं तो इसमें भाजपा कुछ नहीं कर सकती है। साथ ही सरकार काले धन पर भी गंभीर नहीं है। दरअसल ये सारी बातें नितिन गडकरी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कही, जिसे रविशंकर प्रसाद पत्रकारों को बता रहे थे।

इससे पहले हरियाणा के सूरजकुंड में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई। सूरजकुंड में सरकार पर राजनीतिक वार करते हुए टूजी, कोलगेट समेत भ्रष्टाचार के तमाम मुद्दों को राजनीतिक प्रस्तावों में शामिल किया गया है। कार्यकारिणी में नितिन गडकरी को भाजपा अध्यक्ष के रूप में दूसरा कार्यकाल दिया जाना तय है।

कार्यकारिणी की बैठक में एफडीआई के पक्ष में सरकार के तर्कों को नकारते हुए खुदरा कारोबारियों व दुकानदारों की रोजीरोटी पर गहराते खतरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। मीटिंग में महंगाई पर विशेष रूप से निशाना साधा जाएगा। राज्यों पर दोष मढ़ने की नीतियों पर भी सरकार की घेराबंदी की जाएगी।

70 लाख अंग्रेजों ने देखीं मिडेलटन की टॉपलेस तस्वीरें



टॉपलेस तस्वीरों से चर्चा में आईं ब्रिटिश शाही घराने की बहू केट मिडेलटन की तस्वीरों को वहां की मीडिया ने छापने से इंकार कर दिया था। इसके बावजूद ब्रिटेन की कुल आबादी के 10 फीसदी लोग उन तस्वीरों को देख चुके हैं। ब्रिटिश एजेंसी यू गोव पोल ने इस बात का दावा किया है।

ब्रिटेन के आम लोगों को शायद ही प्रिंस विलियम की पत्नी डचेज ऑफ कैंब्रिज केट मिडेलटन के साथ हैंग आउट और फ्रांस जैसी जगह पर उन्हें छुट्टी बिताने का मौका मिले। लेकिन एक पोल के मुताबिक, ब्रिटेन के दस प्रतिशत लोगों ने मिडेलटन की टॉपलेस तस्वीरों को देखा है।

फ्रांसीसी पत्रिका क्लोजर ने छापी थी तस्वीरें
फ्रांसीसी पत्रिका 'क्लोजर' ने इस महीने के शुरुआत में केट की टॉपलेस तस्वीरें छापी थी। तस्वीरें छापने के ठीक तुरंत बाद यह इंटरनेट पर प्रकाशित हो गई थीं। पोल की रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों ने इन तस्वीरों को पूरी दुनिया में देखा और इसे सर्कुलेट भी किया। ये तस्वीरें उस वक्त लीं गईं‌ थी, जब प्रिंस विलियम और केट मिडेलटन एक महीने पहले रानी के भतीजे लॉर्ड लिनले के फ्रांसीसी महल में छुट्टियां मना रहे थे। प‌‌त्रिका ने ये तस्वीरें धुंधली करके छापी थीं, लेकिन इनसे साफ पता चलता है कि वे शाही दंपति की हैं।

आश्चर्यजनक है आंकड़ा
मिडेलटन की ये नग्न तस्वीरें उनके जन्मस्थली में सबसे अधिक चर्चित रहीं। हालिया यू गोव पोल के मुताबिक, ब्रिटेन के करीब 70 लाख लोगों ने इन तस्वीरों को देखा, जिनमें से 66 लाख लोग सिर्फ ब्रिटेन के मूल निवासी हैं। इसका मतलब यह हुआ कि ब्रिटेन की जनसंख्या के दस प्रतिशत से अधिक लोग यह कह सकते हैं कि उन्होंने मिडेलटन की नग्न तस्वीरें देखीं। यह आंकड़े इसलिए भी आश्चर्यजनक हैं क्योंकि ब्रिटेन के किसी भी अखबार, पत्रिका या वेबसाइट ने इन तस्वीरों को प्रकाशित नहीं किया था। इसके बावजूद इतने लोगों ने इन तस्वीरों को देखा है।

पोल के मुताबिक, ब्रिटेन के लोग इस बात से भी काफी खुश हैं कि मिडेलटन फ्रांसीसी पत्रिका 'क्लोजर' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रही हैं। हालांकि शाही परिवार ने इस मैगजीन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

बेटियों को आराम, बहुओं से काम, यह नहीं चलेगा




मोहम्मद रजी/इलाहाबाद
काम के बोझ और तानों से परेशान कई मुसलिम परिवारों की बहुओं ने ससुराल वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बहुएं इस बात से नाराज है कि बेटियां घर में आराम फरमाती रहती हैं और उन्हें पूरा काम करना पड़ता है। यहां तक कि ननद और देवर के कपड़े भी धुलने पड़ते हैं, जबकि उनके पास कोई काम नहीं होता। मना करने पर सास-ससुर धमकाते हैं। ससुराल वालों के व्यवहार से आजिज आकर कई मुसलिम युवतियों ने मदरसा बनात-ए-तइबा में इसकी शिकायत की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इसके बाद भी ससुराल वाले नरम नहीं पड़े तो वे देवबंद मदरसे का दरवाजा खटखटाएंगी।

काम के बहाने उत्पीड़न के ढेरों मामले
शौकत अली रोड की रमोना वाहिद की शादी दो साल पहले कीडगंज में हुई थी। रमोना के मुताबिक उनके पति गाजीपुर के एक स्कूल में टीचर हैं, इसलिए वह घर पर हफ्ते में एक दिन ही आते हैं। इसका फायदा उठाकर ससुराल वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। उनकी तीन ननद हैं, लेकिन वे घर का एक भी काम नहीं करतीं। खाना बनाने, घर की साफ-सफाई के साथ ही ननद और देवर तक के कपड़े उनसे धुलवाए जाते हैं। रमोना ने जब कपड़ा धुलने से इंकार किया तो ससुराल वालों ने दो टूक कह दिया कि अगर घर में रहना है तो सारा काम करना पड़ेगा। रमोना का कहना है कि पिछले छह महीने में उनका वजन सात किलो कम हो गया है। वह अक्सर बीमार भी रहने लगी हैं। यही हाल शाहगंज की राबिया बानो का है। उनकी शादी डेढ़ साल पहले चकिया में हुई थी। राबिया के मुताबिक शादी के एक हफ्ते के बाद ही उनसे घर का सारा काम कराया जाने लगा। अबकी रमजान में सुबह तीन बजे उठकर घर वालों के लिए वह बीस से ज्यादा रोटी बनाती थीं। उन्होंने अपनी सास से रियायत बरतने को कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। बात बढ़ी तो ससुर ने साफ कह दिया कि बेटियां जब तक घर पर रहेंगी, एक भी काम नही करेंगी। राबिया कहती हैं कि घर पर पहले एक नौकरानी आती थी, लेकिन शादी के बाद उसे मना कर दिया गया। मिर्जा गालिब रोड की शमायल, पत्थर गली की सामिया की भी यही कहानी है। आजिज आकर उन्होंने भी मदरसा बनात-ए-ताइबा में शिकायत की है।

ससुराल वालों को नरमी बरतने की हिदायत
मदरसे के शिकायत सेल की प्रमुख मुफ्ती रेशमा खानम के मुताबिक तीन महीने में इस तरह की 50 से ज्यादा शिकायतें आई हैं। कई मामलों में बहुओं को सताने की मंशा साफ उभरकर सामने आई है। शरीयत का हवाला देकर ससुराल वालों को खत भेजा गया है, जिसमें बहुओं के साथ नरमी बरतने की बात भी कही गई है। अगर मसले का हल नहीं निकला तो मामले को शहर के बड़े उलेमा के सामने पेश किया जाएगा।

कहां से कितनी आईं शिकायतें
शाहगंज 10
करेली 12
अटाला 08
रसूलपुर 05
रोशनबाग 07
दरियाबाद 09

शरीयत के खिलाफ है यह अमल

बज्म-ए-पैगामे वैहदानियत के अध्यक्ष मुफ्ती महमूद हसन गाजी कहते हैं कि ससुराल में बहुओं से एकतरफा काम कराने के जो मामले सामने आए हैं, वे यकीनन शरीयत के खिलाफ हैं। शरीयत इसकी कतई इजाजत नहीं देती कि बहुएं ननद या देवर के भी काम करें। बीवी सिर्फ शौहर के प्रति जवाबदेह है। अगर वह अपनी खुशी से घर का सारा काम करती है तो अलग बात है।

बार-बार खाने की आदत कहीं बीमारी न बन जाए



खाली बैठे बोर हो रहे थे तो सोचा कुछ स्नैक्स हो जाए, टीवी पर मैच या मूवी देखते वक्त हल्के-फुल्के स्नैक्स का मोह छोड़ नहीं सकते या फिर जब भी अकेले और डिप्रेस होते हैं तो मूड अच्छा करने के लिए कुछ खा लेते हैं; अगर आपके पास बार-बार स्नैक्स खाने के ऐसे ही ढेर सारे बहाने हैं तो यकीन मानिए हर वक्त कुछ न कुछ खाते रहने की आपकी आदत आपको कंपल्सिव ओवरईटिंग डिसऑडर का शिकार बना सकती है।

क्या है कंपल्सिव ईटिंग डिसॉर्डर
कंपल्सिव ईटिंग डिसॉर्डर व्यवहार से संबंधी एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्त‌ि को हर वक्त कुछ न कुछ खाते रहने की लत लग जाती है। चिकित्सक इस समस्या को एक ऐसे रोग के रूप में देखते हैं जिसके परिणाम स्वरूप मोटापे जैसे कई दूसरे रोग भी हो सकते हैं।

इस स्थिति में व्यक्त‌ि भोजन देखकर खुद पर अपना नियंत्रण नहीं रख पाता और आगे चलकर उसकी यह मानसिक स्थिति उसे अवसादग्रस्त कर देती है। प्रारंभिक चरण में इस समस्या को बिंग ईटिंग डिसॉडर भी कहा जाता है।

कंपल्सिव ईटिंग डिसॉर्डर के लक्षण
- इस स्थिति‌ में भूख न लगने पर भी बार-बार खुछ खाने का मन करेगा।
- आपकी डाइट सामान्य डाइट की अपेक्षा बहुत अधिक हो जाएगी।
- अधिक खाने के बाद आपको पश्चाताप होगा लेकिन आप खुद को नियंत्रित नहीं कर पाएंगे।
- अवसाद के लक्षण भी दिखेंगे और आपका मूड बहुत जल्दी बदलेगा।
- कम समय में बहुत तेजी से वजन बढ़ेगा।
- आत्मविश्वास कम हो जाएगा।

कैसे निपटें इस स्थिति से
सबसे पहले तो इन लक्षणों को गंभीरता से लें और इनसे उबरने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करें। अगर आप अपने व्यवहार में इस तरह के बदलाव महसूस कर रहे हैं तो समय आ गया है कि आप अपने लिए टाइमटेबल बनाएं और उसका सख्ती से पालन करें। अपनी डाइट बैलेंस और हेल्दी लें जिससे हर समय खाने की जरूरत ही न पड़े। अगर इसके बाद भी आपको खुद पर नियंत्रण रखने में सफलता नहीं मिल पा रही है तो अच्छे काउंसलर से परामर्श लें और इससे छुटकारे के लिए चिकित्सकीय सलाह लें।


राहु, सूर्य चैन से सोने नहीं देंगे मनमोहन सिंह को



प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए यह साल काफी कठिनाईयों भरा रहा है। वर्ष की शुरूआत से ही कई मामलों में विपक्ष ने इन्हें आड़े हाथ लेना शुरू कर दिया और इस्तीफे की मांग की। अब तक साफ-सुथरी छवि वाले नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। मनमोहन सिंह का भाग्यांक बताता है कि साल के अंत तक इसी तरह की स्थिति बनी रहेगी। आने वाला साल कुछ राहत भरा हो सकता है।

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को हुआ है। 1932 को जोड़ने पर भाग्यांक 6 आता है। आने वाला साल 2013 का योग भी 6 है। इसलिए आने वाला साल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए राहत भरा हो सकता है। लेकिन ग्रह स्थिति अनुकूलता का संकेत नहीं दे रही हैं।

मनमोहन सिंह साल के शुरू से ही राहु में सूर्य की अन्तर्दशा के प्रभाव में हैं। सूर्य और राहु के बीच शत्रुता पूर्ण संबंध होने के कारण इन्हें कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। राहु और सूर्य के कारण इन दिनों मनमोहन सिंह मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस दशा में व्यक्ति को अनिद्रा की शिकायत होती है, यानी वह चैन से नहीं सो पाता हैं।

जुलाई 2013 में इस दशा में बदलाव होगा। राहु में सूर्य की जगह चन्द्रमा की दशा चलेगी। चन्द्रमा इनकी कुण्डली में स्वराशि में बैठा है। राहु में चन्द्र की अवधि में भ्रामक स्थिति बनेगी और इनके आस-पास का वातावरण तेजी से बदलेगा। मनमोहन सिंह की राशि कर्क है। यह राशि इन दिनों ढ़ैय्या के प्रभाव में है।

शनि का एक पाया लोहा होने के कारण इस राशि के व्यक्ति कार्यक्षेत्र में उलझन के कारण मानसिक तनाव में रहेंगे। व्यर्थ भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव को लेकर परेशान रहेंगे। इसी प्रकार की स्थिति से मनमोहन सिंह को भी गुजरना पड़ सकता है।

अजीत पवार के इस्तीफे पर एनसीपी में फूट

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे पर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में ही मतभेद पैदा हो गया है। एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि अजीत पवार का इस्तीफा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को मंजूर करना चाहिए। वहीं एनसीपी के अधिकतर विधायक अजीत पवार के समर्थन में‌ दिख रहे हैं। बुधवार को हुई एनसीपी विधायक दल की बैठक में अजीत पवार को अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की गई। इधर प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया अजीत पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र में कोई उप मुख्यमंत्री नहीं होगा। माना जा रहा है कि अजीत पवार पर अंतिम फैसला पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ही लेंगे।


महाराष्ट्र में सियासी संकट, निर्दलीय अजीत पवार के साथ
इससे पहले हजारों करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे से राज्य में सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल एनसीपी के अन्य सभी 20 मंत्रियों ने भी कांग्रेस पर दबाव बनाते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। एनसीपी के मंत्रियों ने कांग्रेस के साथ चल रही गठबंधन सरकार से हटने की मांग भी पार्टी नेतृत्व के सामने बुलंद कर दी है।

उल्लेखनीय है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 61 और कांग्रेस के 82 विधायक हैं। शिवसेना के 45 और भाजपा के 47 विधायक हैं।

पवारों की पावर पॉलिटिक्स
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अजीत पवार का इस्तीफा पवारों की पावर पॉलिटिक्स का नतीजा है। कहा जा रहा है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं, इसलिए अजीत को पद से हटाया गया है। लेकिन अजीत को एनसीपी के कई विधायकों का समर्थन हासिल है।

क्या हैं आरोप
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 1999 से 2009 के बीच जल संसाधन मंत्री रहे अजीत पवार ने वर्ष 2009 में 20 हजार करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जबकि इसके लिए विदर्भ सिंचाई विकास निगम की गवर्निंग काउंसिल से जरूरी क्लीयरेंस भी नहीं लिया गया।

ओबामा के दुबारा जीतने पर मैं पूरे कपडे़ उतार दूंगी'



अमेरिका की चर्चित पॉप सिंगर मेडोना राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनके कामकाज को लेकर बेहद खफा हैं। उनके गुस्से का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है‌ कि उन्होंने सोमवार को वाशिंगटन डीसी में अपने एक लाइव कंसर्ट में यहां तक कह दिया कि अगर ओबामा दूसरी बार चुनाव जीत जाते हैं तो वह मंच पर न्यूड हो जाएंगी। फोक्स समाचार एजेंसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मेडोना ने लोगों से पूछा कि आखिर ओबामा को वोट क्यों दिया जाए? अमेरिका की बेहतरी के लिए या फिर बदतरी के लिए। इस दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अपमानजक शब्दों का भी प्रयोग करने से नहीं चूकीं। एजेंसी के अनुसार, मेडोना का लोगों से प्रश्न कुछ इस तरह था।“Y’all better vote for f**king Obama, OK? For better or for worse, all right?”

मंगलवार, 25 सितंबर 2012

MP में लाखों कर्मियों ने दी बेमियादी हड़ताल की धमकी

भोपाल।। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस बार केन्द्र के समान महंगाई भत्ता उसी तारीख से नहीं दिया गया तो वे बेमियादी हड़ताल करेंगे। अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रवक्ता अरुण द्विवेदी ने कहा है कि केन्द्र के समान और उसी तारीख से इस बार राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता नहीं दिया, तो बेमियादी हड़ताल होगी। इसे लेकर प्रदेश के लगभग पौने 5 लाख कर्मचारियों में आक्रोश है।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अपने कर्मचारियों को 7 फीसदी अतिरिक्त महंगाई भत्ता मंजूर किया है। मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की हमेशा से केंद्र की ओर से घोषित तारीख से महंगाई भत्ता देने की मांग रही है, लेकिन राज्य सरकार ने घोषणा करने के बावजूद अपने कर्मचारियों से छल किया है। द्विवेदी ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों को वर्तमान में 65 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है, लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को एक जुलाई 2012 से 7 फीसदी महंगाई भत्ता मंजूर किया गया है। इसके चलते राज्य के कर्मचारी पीछे हो गए हैं। राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष अमर सिंह परमार ने कहा है कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर राज्य शासन से कई बार आग्रह कर चुके हैं, इस बार केन्द्र के समान महंगाई भत्ता उसी तारीख से नहीं दिया गया, तो आंदोलन होगा।

अक्षय कुमार बने बिटिया के पापा



खिलाड़ी अक्षय कुमार के घर आज मंगलवार सुबह एक बेटी ने जन्म लिया। हालांकि, अक्षय पहले बेबी के टाइम बेटी चाहते थे लेकिन अब इस बेटी ने दूसरी संतान के रूप में ही सही अक्की की विश और उनकी फैमिली दोनों को को पूरा कर दिया है। अक्षय ने पिछले दिनों मीडिया से बातचीत में बेटी की इच्छा जताई थी और अब ऊपरवाले ने अक्की के घर एक प्यारी की परी भेजकर उनकी तमन्ना पूरी कर दी है। वैसे, अक्षय कुमार फिलहाल तो अपने होम प्रॉडक्शन की फिल्म 'ओह माय गॉड' में बिजी हैं, लेकिन यह खुशखबरी मिलते ही वह अपनी वाइफ ट्विंकल से मिलने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंच गए, जहां उनकी पूरी फैमिली मौजूद थी। ट्विंकल की यह नॉर्मल डिलिवरी हुई है। अक्की का बेटा आरव 10 साल का है। गौरतलब है कि अक्षय, आरव और अब उनकी बेटी तीनों का ही जन्मदिन सितंबर में पड़ता है।

बीजेपी के फोकस पर हैं टॉप 5 मुद्दे



नई दिल्ली।। इस साल मई में संजय जोशी को आउट और नरेंद्र मोदी को इन करने को लेकर चर्चित रही नैशनल एग्ज़ेक्युटिव के बाद अब बुधवार से दिल्ली के पास सूरजकुंड में फिर इसका आयोजन हो रहा है। इस एग्ज़ेक्युटिव के बाद दो दिन के लिए पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की भी बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले होने जा रही इस बैठक में पार्टी कई बड़े फैसले ले सकती है। हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाने संबंधी संविधान संशोधन के बारे में मुंबई की बैठक में ही फैसला कर लिया गया था लेकिन इस बार काउंसिल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लग सकती है।

मिड टर्म पोल पर नजर:
बीजेपी अपनी एग्ज़ेक्युटिव और काउंसिल दोनों में ही सबसे ज्यादा जोर मध्यावधि चुनाव की संभावनाओं पर देने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मध्यावधि चुनाव इस साल होंगे या अगले साल, यह भले ही तय न हों लेकिन पार्टी को लगता है कि मध्यावधि चुनाव तय वक्त से पहले होंगे। ऐसे में पार्टी इस चुनौती पर चर्चा करेगी कि किस तरह से यूपीए सरकार विरोधी माहौल को कायम रखा जाए। काउंसिल में चूंकि देश भर से पार्टी के एक हजार प्रतिनिधि शामिल होंगे इसलिए पार्टी इन कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वे किसी भी वक्त चुनाव के लिए तैयार रहें और सरकार की करतूतों को जनता के बीच जोर-शोर से लेकर जाएं।

एकजुटता दिखाने की कोशिश:

इस बार पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपनी एग्ज़ेक्युटिव और काउंसिल की बैठकों को एजेंडे के मुताबिक चलाने की है। पिछली बार संजय जोशी बनाम नरेन्द्र मोदी के विवाद ने पूरे फैसलों को हाईजैक कर लिया था। इस बार पार्टी की कोशिश होगी कि किसी तरह का विवाद खड़ा न हो और उसके फैसले उसी संदेश के रूप में पहुंचें, जिस रूप में वह चाहती है।


गुजरात और हिमाचल चुनाव:
इस बार पार्टी नेताओं में चर्चा का मुख्य केंद्र हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभाओं के चुनाव रह सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी बैठक में इन दोनों ही राज्यों के चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों ही राज्यों में बीजेपी सत्ता में है इसलिए पार्टी यह तय करेगी कि इन दोनों ही राज्यों में इसे किस तरह बनाए रखा जाए। हालांकि गुजरात को लेकर पार्टी पहले से ही जीत की उम्मीद कर रही है। लेकिन इसके बावजूद वहां कांग्रेस के हमलों को रोकने और जवाबी हमले करने की पर चर्चा हो सकती है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी चुनावी रणनीति के अलावा इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि किस तरह से अपना आधार बढ़ाया जाए और चुनाव प्रचार को राज्य की उपलब्धियों पर आधारित बनाया जाए।

करप्शन से कोलगेट:
एग्ज़ेक्युटिव में यह भी लगभग तय है कि केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दों को किस तरह से हाईलाइट करके उसे घेरा जाए। पार्टी नेताओं का मानना है कि बैठक में कोशिश की जाएगी कि केंद्र सरकार के जिन फैसलों का बीजेपी विरोध कर रही है, उस पर पार्टी में एकजुटता रहे।

आर्थिक स्थिति:
पार्टी इस मौके पर आर्थिक प्रस्ताव ला सकती है और उसके जरिए वह केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर सरकार की खिंचाई कर सकती है। इन नीतियों के साथ ही पार्टी महंगाई के मुद्दे और रीटेल में एफडीआई पर देश में चल रही बहस का आकलन कर सकती है। साथ ही तय कर सकती है कि किस तरह से सरकार को एफडीआई के मुद्दे पर वापस पांव खींचने के लिए मजबूर किया जाए।

महंगी बिजलीः केजरीवाल ने बीजेपी से पूछे 5 सवाल




नई दिल्ली ।। राजधानी दिल्ली में बिजली के महंगे बिलों के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए मंगलवार को टीम केजरीवाल ने इस मामले में बीजेपी को भी लपेटे में ले लिया। केजरीवाल ने बीजेपी नेताओं को घेरते हुए उनसे पांच सवाल किए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक टीम केजरीवाल ने बिजली की महंगी दरों के लिए कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार को तो जिम्मेदार बताया ही है, बीजेपी नेताओं पर भी इस मामले में रहस्यमय चुप्पी बनाए रखने का आरोप लगाया। इन सवालों के जरिए टीम केजरीवाल का आरोप है कि बीजेपी नेताओं ने सब कुछ जानते-बूझते हुए भी शीला दीक्षित सरकार को बिजली की दरें बढ़ाने दीं। समय रहते इसका विरोध नहीं किया। इसीलिए अब इस मसले पर उनका विरोध का कोई तुक नहीं है।

केजरीवाल के पांचो सवाल ये हैं:
एक, क्या बीजेपी को इस बात की जानकारी थी कि डीईआरसी ने अप्रैल 2010 में दिल्ली में बिजली की दरों में 23 फीसदी कटौती करने वाला एक आदेश तैयार किया था?
दो, क्या बीजेपी को जानकारी थी कि शीला दीक्षित सरकार ने डीईआरसी के उस आदेश को दबा दिया है?
तीन, क्या यह सच है कि बीजेपी ने इस बारे में दिल्ली विधानसभा और संसद में कोई प्रश्न तक नहीं पूछा? अगर पूछा था तो क्या?
चार, क्या यह सच है कि बीजेपी ने आरटीआई के जरिए बिजली के दाम को 23 फीसदी तक कम करने वाला डीईआरसी का आदेश प्राप्त कर लिया था?
पांच, यदि बीजेपी ने डीईआरसी का वह आदेश प्राप्त कर लिया था तो वह उस पर चुप क्यों बैठी रही?

महाराष्ट्रः अजित पवार के इस्तीफे के बाद सभी एनसीपी मंत्रियों ने दिया इस्तीफा



मुंबई ।। महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट गहरा गया है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार के इस्तीफा देने के बाद पार्टी के सभी मंत्रियों ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा अजित पवार के समर्थन में दिया गया बताया जा रहा है। ये इस्तीफे प्रदेश एनसीपी अध्यक्ष मधुकर पिचड़ को सौंपे गए हैं। इससे पहले अजित पवार ने मंत्रालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने अपना इस्तीफा पहले पार्टी प्रमुख शरद पवार को भेजा। पवार की मंजूरी के बाद उन्होंने इस्तीफा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को भेजा। सिंचाई घोटाले में नाम उछलने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है। अजित पवार एनसीपी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री शरद पवार के भतीजे हैं। अजित पवार ने कहा कि पिछले दो महीने से सिंचाई घोटाले में जो आरोप लगाए जा रहे थे, उन्हीं के मद्देनजर उन्होंने इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उनमें कोई सचाई नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने जिंदगी में किसी से 5 पैसा नहीं लिया है। जहां तक प्रकियाओं की बात है तो मेरे काम करने का तरीका यही है। मैं बस इतना चाहता हूं कि जो भी आरोप हैं उनकी जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए। उन्होंने कहा, 'इस्तीफा देने का फैसला मैंने इसलिए किया ताकि बाद में कोई यह न कहे कि पद पर रहते निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती।' अजित ने कहा, मैं पार्टी के काम को पूरा वक्त दूंगा।
महाराष्ट्र एनसीपी के ताकतवर नेता अजित पवार के इस्तीफे के बाद पार्टी में संकट काफी गंभीर रूप लेता दिख रहा है। अजित पवार के इस्तीफे के ऐलान के ठीक बाद कुछ विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने यह मांग उठाई कि पार्टी प्रदेश की सरकार से समर्थन वापस ले ले। मगर, पार्टी नेतृत्व ने इस मांग को तवज्जो नहीं दी। केंद्रीय नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पार्टी सरकार में बनी रहेगी। समर्थन वापस नहीं लिया जाएगा। इसके बाद एनसीपी के सभी मंत्रियों ने अजित पवार के समर्थन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मधुकर पिचड़ को अपना-अपना इस्तीफा सौंप दिया। बुधवार को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

महाराष्‍ट्र के डिप्‍टी सीएम अजीत पवार का इस्‍तीफा



नई दिल्ली : कथित रूप से सिंचाई घोटाला में नाम आने के बाद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। लेकिन इन आरोपों को खारिज करते हुए पवार ने बताया कि वह बिलकुल निर्दोष हैं। उल्लेखनीय है कि एनसीपी नेता अजित पवार केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे हैं। महाराष्ट्र में सिंचाई परियोजनाओं में हुई घोटाले की जांच हाल ही में शुरू हुई है। अजित पवार ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं में घोटालों की सही तरह से हो जांच हो इसी लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है।पवार ने कहा कि उनपर उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को लेकर कोई दवाब नहीं था। उन्होंने कहा कि अपने इस्तीफा की सूचना एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को दे दी है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) ने दावा किया कि उसकी वजह से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से अजित पवार को इस्तीफा देना पड़ा। आईएसी के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा, ‘‘उनका (पवार) सिंचाई घोटाले में लिप्तता का पता चला था, जिसे आईएसी मुम्बई ने जोर-शोर से उठाया और इसे सबके सामने लाया। अंजलि दमानिया सहित हमारे अन्य कार्यकर्ताओं ने दिन-रात अथक मेहनत करके इस घोटाले का भंडाफोड़ किया।’’

2016-17 तक सालाना 100 करोड़ टन हो जाएगी कोयला मांग



नई दिल्ली: योजना आयोग ने आज कहा कि देश में कोयले की मांग 2016-17 तक बढ़कर सालाना 100 करोड़ टन हो जाएगी जबकि इस दौरान आपूर्ति 75 करोड़ टन होने का अनुमान है। योजना आयोग के सलाहकार :उर्जा: आईए खान ने इंडियन कोल माकेट्स कान्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा, कोयले की मांग 100 करोड़ टन रहने का अनुमान है जबकि घरेलू उपलब्धता 75 करोड़ टन रहेगी।

उन्होंने कहा कि आयोग ने वाणिज्यिक उर्जा में सात प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है जिसमें कोयला, पेट्रोलियम तथा पनबिजली शामिल है। उन्होंने कहा, शुरू में 8-9 प्रतिशत वृद्धि की योजना थी।इससे पहले कोयले की मांग 2016-17 तक बढ़कर 100 करोड़ टन त्था मांग 80 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया गया था।

घटिया तेल,नमक बेच रहे है बाबा रामदेव !




हरिद्वारा : योग गुरू बाबा रामदेव की मुश्किलें बढऩे वाली है। बाबा रामदेव की ओर से बेचे जा रहे फूड प्रोडक्ट्स टेस्ट में फेल हो गए हैं। उत्तराखण्ड के खाद्य विभाग ने ये टेस्ट किए थे। एक निजी चैनल ने विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया है कि नमक,मसाले,जैम,सरसों के तेल के सैंपल टेस्ट में फेल हो गए हैं। खाद्य विभाग ने हाल ही में बाबा के दिव्य योग आश्रम से सैंपल लिए थे।

विभाग की जांच में पता चला कि बाबा की ओर से बेचा जा रहा सामाना घटिया गुणवत्ता का है।सूत्रों का कहना है कि कुछ उत्पाद बाहर बनाए गए थे लेकिन इनको आश्रम के ब्रांड से बेचा जा रहा था। 16 अगस्त को खाद्य विभाग ने बाबा के आश्रम पर छापा मारकर सैंपल कलेक्ट किए थे। सूत्रों के मुताबिक बाबा रामदेव के आश्रम पर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाएगा। साथ ही 10 से 15 लाख का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

रामदेव ने छापे की कार्रवाई को गलत करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये सब केन्द्र सरकार के इशारे पर किया जा रहा है। बाबा ने कहा कि यह आम आदमी और अमीरों के बीच की जंग है। हम आम आदमी हैं और हमारी जंग शुरू हो गई है। बाबा ने सवाल किया था कि क्या किसी विदेशी कंपनी के यहां छापे मारे गए?

बिलावल भुट्टो के प्यार का रंग चढ़ा हिना रब्बानी पर!


राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो और पाकिस्तान की सबसे युवा विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार के रोमांटिक संबंधों पर पश्चिमी खुफिया एजेंसियों में से एक ने रोशनी डाली है। बिजनैसमैन फिरोज गुलजार के साथ अपने वैवाहिक संबंधों को समाप्त करने की ओर अग्रसर हिना रब्बानी खार के साथ विवाह करने के बिलावल के निर्णय के चलते रिपोर्ट बाप-बेटे के मध्य चल रहे शीत युद्ध की ओर भी ईशारा करती हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति जरदारी के सामने इन संबंधों का खुलासा तब हुआ जब हीना रब्बानी खार द्वारा जूनियर जरदारी को ईद-उल फतिर पर खास तोहफा भेजा गया। बिलावल को एक फूलों के गुलदस्ते सहित एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था ‘कोई शक नहीं कि हमने काफी इंतजार कर लिया है और क्या यह समय इंतजार को खत्म करने का नहीं है। ईद मुबारक!’। इस बारे में जब जरदारी को पता लगा तो उन्होंने तुरंत हीना रब्बानी खार को बुलाया और अपने नाबालिग बेटे के साथ विवाहेतर संबंधों पर नाराजगी जाहिर की।

इस पर हीना ने कठोरता से जरदारी की आलोचना करते हुए उन्हें उनके निजी मामलों में दखलअंदाजी न करने की हिदायत की। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति जरदारी द्वारा किए गए अनुचित व्यवहार की माफी न मांगने पर मंत्री पद के साथ-साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा देने की धमकी दी। हीना ने उक्त मामला बिलावल की जानकारी में लाया तथा जब बिलावल को अपने पिता की अशिष्टता के बारे में ज्ञात हुआ तो उसने भी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की तथा वर्ष के अंत तक देश छोडऩे की धमकी दी।

जरदारी परिवार के सूत्रों के अनुसार बिलावल भुट्टो ने राजनीति से सन्यास लेने का मन बना लिया है तथा 2012 के अंत या अगले वर्ष की शुरूआत में देश छोडऩे का भी मन बना लिया है। इसी दौरान हीना रब्बानी के भी मंत्री पद से इस्तीफा देने की सम्भावना है। पिता और पुत्र में यह शीतयुद्ध प्रतिदिन जटिल रूप धारण करता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हीना की अपने करोड़पति व्यवसायी पति फिरोज गुलजार से तलाक लेने की बातचीत चल रही है जिससे उसकी अनन्या तथा दीना नाम की 2 बेटियां हैं।

वहीं इस खबर के बाद से ही ट्विटर पर दोनों के इश्क को लेकर खूब टिप्पणियां की जा रही हैं। हालांकि ज्यादातर लोग इस खबर को घटिया पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं। खबर में कितनी सच्चाई है इसके बारे में तो ठोस रूप से हिना या बिलावल की ओर से किसी अधिकारिक बयान के बाद ही कुछ कहा जा सकता है लेकिन ट्विटर पर इस प्रेम कहानी को लेकर खूब चुटीली टिप्पणियां पोस्ट की जा रही हैं।

पाकिस्तान की खूबसूरत विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो के 'इश्क' के चर्चे सोशल मीडिया में खूब हो रहे हैं. सोशल मीडिया और कुछ साइटों के मुताबिक, बिलावल के इस कदम से पिता ज़रदारी काफी खफा हैं, वहीं सोशल साइट पर कुछ लोग इस खबर को झूठ और पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं. बांग्लादेशी टेब्लॉइड की वेबसाइट ब्लिट्ज़.नेट ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के हवाले से बताया है कि पीपीपी चेयरमैन बिलावल, विदेशमंत्री हिना रब्बानी से शादी करने की जिद पर अड़े हैं, जिसके चलते बिलावल और उनके पिता के बीच तनाव पैदा हो गया है.खबरों में ये भी कहा गया है कि बिलावल से शादी करने के लिए हिना भी अपने अरबपति पति फिरोज गुलजार को तलाक देने के लिए भी तैयार हैं. यदि खबरों को सच मानें तो इस ईद पर तो बाप-बेटे के रिश्ते इसी बात पर टूटने की कगार पर पहुंच गए थे.कहा जा रहा है कि इस मामले में जरदारी ने तमाम कोशिशें कीं लेकिन खार पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.उन्होंने राष्ट्रपति से साफ कह दिया कि वह उनके निजी मामले में दखल न दें.कहानी में एक ओर बिलावल भुट्टो और पाकिस्तानी विदेशमंत्री हिना रब्बानी खार का पनपता इश्क है तो दूसरी ओर विलेन के तौर पर हैं खुद राष्ट्रपति ज़रदारी.सोशल नेटवर्किंग मीडिया और कुछ वेबसाइटों के मुताबिक, हिना के इश्क में बिलावल के इस तरह दीवाना होने से जरदारी काफी खफा हैं, और वह हिना को बुलाकर अपने बेटे के साथ विवाहेतर संबंधों पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं.
ज़रदारी ने हिना रब्बानी से इस मामले पर अपनी नाखुशी ज़ाहिर करने में देर नहीं लगाई. लेकिन जवाब में रब्बानी ने तो इस्तीफे तक की धमकी दे ही डाली.


शनिवार, 22 सितंबर 2012

प्रधानमंत्री जी ! क्या आपको कोयला और 2जी से भी बड़ा पेड़ चाहिए'




डीजल में की गई मूल्य वृद्घि और खुदरा में निवेश के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भाषण आम जनता को कतई रास नहीं आया है। सोशल नेट‌वर्किंग साइट्स पर उनके बयान 'पैसे पेड़ों पर नहीं उगते' के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। ट्विटर और फेसबुक पर कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश पर चुटीली प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।
कड़े कदम उठाने की बात की भी आम लोगों ने आलोचना की है। दरअसल प्रधानमंत्री की जनता को समझाने की कोशिश लोगों को पसंद नहीं आई है। प्रकाश शर्मा ने ट्वीट किया है, 'प्रधानमंत्री ममता बनर्जी को तो समझा नहीं सके तो जनता को कैसे समझा सकते हैं।' गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के बयान पर ट्विट किया है,'पैसे पेड़ पर नहीं उगते इस बात से मैं हैरान हूं। प्रधानमंत्री जी को क्या कोयला और 2जी से भी बड़ा पेड़ चाहिए। '

'पैसे पेड़ों पर नहीं उगते' पर आईएसी ने टिप्पणी की ह‌ै, 'जी प्रधानमंत्री जी, पैसा पेडों पर नही उगता, वो कोयले में उगता है, चारे में उगता है, बोफोर्स में उगता है, 2G में उगता है, राष्ट्रमंडल खेलों में उगता है, आपकी पार्टी अध्यक्षा के घर में उगता है, आपके मंत्रियों के घर में उगता है...।' इस बयान पर ही उमा शंकर चौधरी की प्रति‌क्रिया है, 'पैसे पेड़ पर नहीं उगते। मैंने अपनी पूरी जिन्दगी में प्रधानमंत्री के भाषण में इस तरह की भाषा नहीं सुनी थी। हद ही हो गई। मनमोहन जी का भाषण कौन लिखता है भाई।'

प्रधानमंत्री के कड़े फैसले लेने के बयान पर चुटकी लेते हुए दिलीप खान ने फेसबुक पर लिखा है, '21 साल बाद भी वही लाइन, वही बात। 24 जुलाई 1991 को भी मनमोहन सिंह ने कहा था, 'अब कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है', आज फिर से यही वाक्य दोहराया।'

ट्विटर पर‌ स्मिता नायक ने टिप्पणी की है, 'पैसा पेड़ों पर नहीं उगता तो फिर सरकार बिना पैसे के कोयला और 2जी क्यों बांट देती है प्रधानमंत्री जी।" ट्विटर पर‌ ही किशोर बड़थल ने व्यंग्य किया है, 'मैं हमेशा अपने स्टूडेंट्स को समझाता रहता हूं कि आपके पास डिग्री है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास नॉलेज भी होगा। मनमोहन सिंह इसके उदाहरण हैं।'

प्रधानमंत्री के भाषण पर फेसबुक पर कुछ काव्यात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। जैसे धीरेश सैनी ने लिखा है, एफडीआई पर पीएम की 'आम आदमी' से अपील पर दुष्यंत का शेर याद आ रहा है-

उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें
चाकू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिये

श्याम उदय 'कोरी' ने लिखा है-
मंहगाई रूपी पटकनी से, चित्तम चित्त है जनता
मगर अफसोस, कुछ शैतां ... अब भी मजे में है?

प्रधान मंत्री के भाषण पर आलोक दीक्षित फेसबुक पर लिखते हैं, 'प्रधानमंत्री महोदय से क्या उम्मीद की जाए जो एफडीआई को लेकर प्रधानमंत्री की हैसियत से कम, किसी वालमार्ट कंपनी के पीआर की हैसियत से अधिक बोलते दिखाई दिए।'

राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री का संदेश



भाइयो और बहनों,
आज शाम मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि सरकार ने किन वजहों से हाल ही में आर्थिक नीतियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने इन फैसलों का विरोध किया है। आपको यह सच्चाई जानने का हक है कि हमने ये निर्णय क्यों लिए हैं।

कोई भी सरकार आम आदमी पर बोझ नहीं डालना चाहती। हमारी सरकार को दो बार आम आदमी की ज़रूरतों का ख्याल रखने के लिए ही चुना गया है। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्रहित में काम करे और जनता के भविष्य को सुरक्षित रखे। इसके लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास हो, जिससे देश के नौजवानों के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे रोज़गार के नए मौके पैदा हों। तेज आर्थिक विकास इसलिए भी जरूरी है कि हम शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासीय सुविधाओं और ग्रामीण इलाकों में रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए ज़रूरी रकम जुटा सकें।

आज चुनौती यह है कि हमें यह काम ऐसे समय पर करना है जब विश्व अर्थव्यवस्था बड़ी मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। अमरीका और यूरोप आर्थिक मंदी और वित्तीय कठिनाइयों से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि चीन को भी आर्थिक मंदी का एहसास हो रहा है। इस सबका असर हम पर भी हुआ है, हालांकि मेरा यह मानना है कि हम दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी के असर को काबू में रखने में काफी हद तक कामयाब हुए हैं।

आज हम ऐसे मुकाम पर हैं, जहां पर हम अपने विकास में आई मंदी को खत्म कर सकते हैं। हमें देश के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों के विश्वास को फिर से कायम करना होगा। जो फैसले हमने हाल ही में लिए हैं, वे इस मकसद को हासिल करने के लिए ज़रूरी थे।

मैं सबसे पहले डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी और एलपीजी सिलिंडरों पर लगाई गई सीमा के बारे में बात करना चाहूंगा। हम अपनी ज़रूरत के तेल का करीब 80 प्रतिशत आयात करते हैं और पिछले चार सालों के दौरान विश्व बाजार में तेल की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है। हमने इन बढ़ी हुई कीमतों का सारा बोझ आप पर नहीं पड़ने दिया। हमारी कोशिश यह रही है कि जहां तक हो सके आपको इस परेशानी से बचाए रखें।

इसके नतीजे में पेट्रोलियम पदार्थों पर दी जाने वाली सब्सिडी में बड़े पैमाने पर इज़ाफा हुआ है। पिछले साल यह सब्सिडी 1 लाख चालीस हजार करोड़ रुपए थी। अगर हमने कोई कार्रवाई न की होती तो इस साल यह सब्सिडी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए से भी ज़्यादा हो जाती।

इसके लिए पैसा कहां से आता? पैसा पेड़ों पर तो लगता नहीं है। अगर हमने कोई कार्रवाई नहीं की होती तो वित्तीय घाटा कहीं ज्यादा बढ़ जाता। यानि कि सरकारी आमदनी के मुकाबले खर्च बर्दाश्त की हद से ज़्यादा बढ़ जाता। अगर इसको रोका नहीं जाता तो रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों की कीमतें और तेजी से बढ़ने लगतीं। निवेशकों का विश्वास भारत में कम हो जाता। निवेशक, चाहे वह घरेलू हों या विदेशी, हमारी अर्थव्यवस्था में पूंजी लगाने से कतराने लगते। ब्याज की दरें बढ़ जातीं और हमारी कंपनियां देश के बाहर कर्ज नहीं ले पातीं। बेरोज़गारी भी बढ़ जाती।

पिछली मर्तबा 1991 में हमने ऐसी मुश्किल का सामना किया था। उस समय कोई भी हमें छोटे से छोटा कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था। उस संकट का हम कड़े कदम उठाकर ही सामना कर पाए थे। उन कदमों के अच्छे नतीजे आज हम देख रहे हैं। आज हम उस स्थिति में तो नहीं हैं लेकिन इससे पहले कि लोगों का भरोसा हमारी अर्थव्यवस्था में खत्म हो जाए, हमें ज़रूरी कदम उठाने होंगे।

मुझे यह अच्छी तरह मालूम है कि 1991 में क्या हुआ था। प्रधान मंत्री होने के नाते मेरा यह फर्ज है कि मैं हालात पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाऊं। दुनिया उन पर रहम नहीं करती जो अपनी मुश्किलों को खुद हल नहीं करते हैं। आज बहुत से यूरोपीय देश ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। वे अपनी ज़िम्मेदारियों का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं और दूसरों से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। वे अपने कर्मचारियों के वेतन या पेंशन में कटौती करने पर मजबूर हैं ताकि कर्ज देने वालों का भरोसा हासिल कर सकें।

मेरा पक्का इरादा है कि मैं भारत को इस स्थिति में नहीं पहुंचने दूंगा। लेकिन मैं अपनी कोशिश में तभी कामयाब हो सकूंगा जब आपको ये समझा सकूं कि हमने हाल के कदम क्यों उठाए हैं।

डीजल पर होने वाले घाटे को पूरी तरह खत्म करने के लिए डीजल का मूल्य 17 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की ज़रूरत थी। लेकिन हमने सिर्फ 5 रुपए प्रति लीटर मूल्य वृद्धि की है। डीजल की अधिकतर खपत खुशहाल तबकों, कारोबार और कारखानों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बड़ी कारों और एस.यू.वी. के लिए होती है। इन सबको सब्सिडी देने के लिए क्या सरकार को बड़े वित्तीय घाटों को बर्दाश्त करना चाहिए?

पेट्रोल के दामों को न बढ़ने देने के लिए हमने पेट्रोल पर टैक्स 5 रुपए प्रति लीटर कम किया है। यह हमने इसलिए किया कि स्कूटरों और मोटरसाइकिलों पर चलने वाले मध्य वर्ग के करोड़ों लोगों पर बोझ और न बढ़े।

जहां तक एलपीजी की बात है, हमने एक साल में रियायती दरों पर 6 सिलिंडरों की सीमा तय की है। हमारी आबादी के करीब आधे लोग, जिन्हें सहायता की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, साल भर में 6 या उससे कम सिलिंडर ही इस्तेमाल करते हैं। हमने इस बात को सुनिश्चित किया है कि उनकी ज़रूरतें पूरी होती रहें। बाकी लोगों को भी रियायती दरों पर 6 सिलिंडर मिलेंगे। पर इससे अधिक सिलिंडरों के लिए उन्हें ज़्यादा कीमत देनी होगी।

हमने मिट्टी के तेल की कीमतों को नहीं बढ़ने दिया है क्योंकि इसका इस्तेमाल गरीब लोग करते हैं।

मेरे प्यारे भाइयो और बहनो,

मैं आपको बताना चाहता हूं कि कीमतों में इस वृद्धि के बाद भी भारत में डीजल और एलपीजी के दाम बांगलादेश, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान से कम हैं।

फिर भी पेट्रोलियम पदार्थों पर कुल सब्सिडी 160 हजार करोड़ रुपए रहेगी। स्वास्थ्य और शिक्षा पर हम कुल मिलाकर इससे कम खर्च करते हैं। हम कीमतें और ज्यादा बढ़ाने से रुक गए क्योंकि मुझे उम्मीद है कि तेल के दामों में गिरावट आएगी।

अब मैं खुदरा व्यापार यानि रि‍टेल ट्रेड में विदेशी निवेश की अनुमति देने के फैसले का ज़िक्र करना चाहूंगा। कुछ लोगों का मानना है कि इससे छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचेगा। यह सच नहीं है।

संगठित और आधुनिक खुदरा व्यापार पहले से ही हमारे देश में मौजूद है और बढ़ रहा है। हमारे सभी ख़ास शहरों में बड़े खुदरा व्यापारी मौजूद हैं। हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अनेक नए शॉपि‍ग सेन्‍टर हैं। पर हाल के सालों में यहां छोटी दुकानों की तादाद में भी तीन-गुना बढ़ोत्तरी हुई है।

एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में बड़े एवं छोटे कारोबार, दोनों के बढ़ने के लिए जगह रहती है। यह डर बेबुनियाद है कि छोटे खुदरा कारोबारी मिट जाएंगे।

हमें यह भी याद रखना चाहिए कि संगठित खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश की अनुमति देने से किसानों को लाभ होगा। हमने जो नियम बनाए हैं उनमें यह शर्त है कि जो विदेशी कंपनियां सीधा निवेश करेंगी उन्हें अपने धन का 50 प्रतिशत हिस्सा नए गोदामों, कोल्‍ड स्‍टोरेज और आधुनिक ट्रांसपोर्टर व्यवस्थाओं को बनाने के लिए लगाना होगा। इससे यह फायदा होगा कि हमारे फलों और सब्जियों का 30 प्रतिशत हिस्सा, जो अभी स्‍टोरेज और ट्रांसपोर्टर में कमियों की वजह से खराब हो जाता है, वह उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेगा। बरबादी कम होने के साथ-साथ किसानों को मिलने वाले दाम बढ़ेंगे और उपभोक्ताओं को चीजेंकम दामों पर मिलेंगी।

संगठित खुदरा व्यापार का विकास होने से अच्छी किस्म के रोज़गार के लाखों नए मौके पैदा होंगे।

हम यह जानते हैं कि कुछ राजनीतिक दल हमारे इस कदम से सहमत नहीं हैं। इसीलिए राज्य सरकारों को यह छूट दी गई है कि वह इस बात का फैसला खुद करें कि उनके राज्य में खुदरा व्यापार के लिए विदेशी निवेश आ सकता है या नहीं। लेकिन किसी भी राज्य को यह हक नहीं है कि वह अन्य राज्यों को अपने किसानों, नौजवानों और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर ज़िंदगी ढूंढने से रोके।

1991 में, जब हमने भारत में उत्पादन के क्षेत्र में विदेशी निवेश का रास्ता खोला था, तो बहुत से लोगों को फिक्र हुई थी। आज भारतीय कंपनियां देश और विदेश दोनों में विदेशी कंपनियों से मुकाबला कर रही हैं और अन्य देशों में भी निवेश कर रही हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेशी कंपनियां इन्‍फॉरमेशन टेक्‍नोलॉजी, स्टील एवं ऑटो उद्योग जैसे क्षेत्रों में हमारे नौजवानों के लिए रोज़गार के नए मौके पैदा करा रही हैं। मुझे यकीन है कि खुदरा कारोबार के क्षेत्र में भी ऐसा ही होगा।
मेरे प्यारे भाइयो और बहनो,

यूपीए सरकार आम आदमी की सरकार है। पिछले 8 वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की रिकार्ड दर से बढ़ी है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि गरीबी ज़्यादा तेजी से घटे, कृषि का विकास तेज़ हो और गांवों में भी लोग उपभोग की वस्तुओं को ज़्यादा इस्‍तेमाल कर सकें।

हमें और ज़्यादा कोशिश करने की ज़रूरत है और हम ऐसा ही करेंगे। आम आदमी को फायदा पहुंचाने के लिए हमें आर्थिक विकास की गति को बढ़ाना है। हमें भारी वित्तीय घाटों से भी बचना होगा ताकि भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास मज़बूत हो।

मैं आपसे यह वादा करता हूं कि देश को तेज़ और इन्‍क्‍सूसि‍व विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए मैं हर मुमकिन कोशिश करूंगा। परंतु मुझे आपके विश्वास और समर्थन की ज़रूरत है। आप उन लोगों के बहकावे में न आएं जो आपको डराकर और गलत जानकारी देकर गुमराह करना चाहते हैं। 1991 में इन लोगों ने इसी तरह के हथकंडे अपनाए थे। उस वक्त भी वह कामयाब नहीं हुए थे। और इस बार भी वह नाकाम रहेंगे। मुझे भारत की जनता की सूझ-बूझ में पूरा विश्वास है।

हमें राष्ट्र के हितों के लिए बहुत काम करना है और इसमें हम देर नहीं करेंगे। कई मौकों पर हमें आसान रास्तों को छोड़कर मुश्किल राह अपनाने की ज़रूरत होती है। यह एक ऐसा ही मौका है। कड़े कदम उठाने का वक्त आ गया है। इस वक्त मुझे आपके विश्वास, सहयोग और समर्थन की जरूरत है।

इस महान देश का प्रधानमंत्री होने के नाते मैं आप सभी से कहता हूं कि आप मेरे हाथ मज़बूत करें ताकि हम देश को आगे ले जा सकें और अपने और आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाल भविष्य का निर्माण कर सकें।

जय हिन्द !

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शर्ट उतारकर जताया विरोध



नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण से पहले एक शख्स ने अपने कपड़े उतारकर विरोध किया। जैसे ही प्रधानमंत्री भाषण देने विज्ञान भवन आए उसी समय संतोष सुमन नामक इस शख्स ने अपने कपड़े उतार दिए। वह कह रहा था, 'भ्रष्ट प्रधानमंत्री वापस जाओ, डीजल पर मूल्य वृद्धि वापस लो'। बाद में सुरक्षाकर्मी उस शख्स को विज्ञान भवन से बाहर ले गए।

पेशे से वकील संतोष सुमन को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह एसपीजी की हिरासत में है। संतोष सुमन बिहार का रहने वाला है। अभी वह दिल्ली के शकरपुर में रहता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़ा संतोष दिल्ली की पाटियाला हाउस कोर्ट में प्रैक्टिस करता है। संतोष सुमन की जेब से दिल्ली प्रदेश राजद का आईकार्ड भी मिला है। इधर राजद प्रमुख ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दिल्ली प्रदेश राजद यूनिट को भंग कर दिया है।

हालांकि इस घटना के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपना भाषण शुरू किया। पीएम ने कहा कि हाल ही में लिए गए फैसले देश की अर्थव्यवस्‍था के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए हमें बेहतर माहौल बनाना ही होगा। हमें दुनिया के दूसरे देशों से सीख लेनी चा‌हिए। इसलिए हर राजनीतिक दल को सरकार के आर्थिक सुधारों का समर्थन करना चाहिए।

वीजा उल्लंघन को लेकर कुवैत में सैकड़ों भारतीय गिरफ्तार




कुवैत में वीजा उल्लंघन को लेकर सैकड़ों भारतीयों को हिरासत में लिया गया है। वहां स्थित भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने कहा है वीजा उल्लंघन और चोरी जैसे अन्य अपराधों में शामिल होने के आरोप में जिन 2,100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया उसमें कई भारतीय भी शामिल हैं।

हालांकि कितने भारतीय हिरासत में लिए गए हैं यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन एक अधिकारी ने कहा कि कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने हिरासत में लिए गए करीब 300 लोगों के परिवार वालों का आवेदन स्वीकार किया है। अधिकारी पुलिस स्टेशनों में जाकर मामले की जांच कर रहे हैं। उसने कहा कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों को पहले ही रिहा कर दिया गया है।

खबरों के मुताबिक कुवैत के गृह मंत्रालय ने अचानक चलाए गए सुरक्षा अभियान में वीजा खत्म होने और मादक पदार्थों की तस्करी, चोरी, शराब तथा इस तरह के अन्य मामलों में 2,136 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन खबरों में गिरफ्तार किए गए लोगों की राष्ट्रीयता नहीं बताई गई है। दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि इस सप्ताहांत के मध्य से ही हम लोगों के प्रार्थनापत्र स्वीकार कर रहे हैं और पुलिस स्टेशन जाकर आगे की स्थिति की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

दूतावास से जुड़े तीन कर्मी रविवार से इस मामले को देखेंगे। अधिकारी ने बताया कि ये तीनों इस तरह के मामले से पूरी तरह अनजान हैं। यह अलग तरह का मामला है इसे अलग तरीके से देखना होगा। उसने बताया कि पकड़े गए कुछ लोगों के पास खादिम या खद्दाम वीजा है, जो या तो नियमित नहीं कराया गया है या फिर पहली जगह पर ही अवैध है।

अक्सर इस तरह की गिरफ्तारी के बाद लोगों को देश से बाहर भेज दिया जाता है और वापस प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है। पिछले साल कुवैत ने क्षमा प्रदान करते हुए बहुत से भारतीयों का वीजा नियमित किया था। हाल ही में कुवैत गृह मंत्रालय के सुरक्षा मीडिया विभाग ने एक बयान में कहा था कि सरकार उन नियोक्ताओं के बारे में कड़ी कार्रवाई करेगी जो अपने मजदूरों के गायब होने की सूचना देने में विफल होंगे।

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित होंगे विजय राणा


लंदन, एजेंसी जोहानिसबर्ग में होने वाले नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी भाषा को योगदान के लिए पत्रकार विजय राणा को सम्मानित किया जाएगा। विजय ने दो दशकों से भी अधिक वक्त तक बीबीसी की हिंदी सेवा के लिए काम किया और इस दौरान कई ऐसे चर्चित कार्यक्रम बनाए, जिन्हें भारत समेत कई देशों में पसंद किया गया। वह अब इंटरनेट के जरिए चलने वाली रेडियो सेवा एनआरआई डॉट कॉम के संपादक हैं। भारत सरकार और दक्षिण अफ्रीका के हिंदी शिक्षा संघ के संयुक्त आयोजन में कल से शुरू हो रहे विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी के 700 से भी अधिक कवि, लेखक, विद्वान और कई देशों के पत्रकार शामिल हो रहे हैं। विजय ने 1980 के मध्य में पर्यावरण से संबंधित एक साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू किया था, जिसे रेडियो पर हिंदी भाषा का पर्यावरण संबंधी पहला कार्यक्रम माना जाता है।

कड़े कदम नहीं उठाते तो महंगाई बढ़ जाती: मनमोहन सिंह





नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने हमारे आर्थिक फैसलों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि हम आम आदमी पर बोझ नहीं डालना चाहते। आम आदमी का ध्यान देने की वजह से ही हमें दो बार चुना गया। प्रधानमंत्री ने हाल में लिए गए फैसलों को जरुरी ठहराते हुए हालातों के अनुरुप बताया।

उन्होंने कहा कि देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी हिस्सों की अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। पीएम ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि इसी मद्देनजर हाल में लिए गए आर्थिक फैसले जरुरी थे। लेकिन इन सबके बावजूद हमने जनता पर पूरा भार नहीं डाला।

हाल में आर्थिक सुधार के संबंध में लिए गए फैसले से मचे बवाल को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा जितना जरुरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी हो गया था।

पीएम ने कहा कि वित्तीय घटा कम करने के लिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी थी। यह बढ़ोतरी 17 रूपए प्रति लीटर तक बढ़ना चाहिए थी। लेकिन सरकार ने सिर्फ पांच रूपए ही बढ़ाए। सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा था। हम 80 फीसदी तेल आयात करते हैं। हमने इस बात का ध्यान रखा कि जनता पर ज्यादा बोझ नहीं पड़े।

उन्होंने कहा कि विश्व में आर्थिक मंदी का असर है। लेकिन हम भारत को यूरोप नहीं बनने देंगे। सरकार के कदमों को लेकर किसी बहकावे में न आएं। मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई से लोगों को फायदा मिलेगा, चीजे सस्ती मिलेगी। रिटेल में एफडीआई के आने से छोटे कारोबारियों को नुकसान का डर बेमानी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी गाडिया चलाने वालों को डीजल पर सब्सिडी क्यों मिले। उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि मुझे आपके सहयोग की जरूरत है।

बुधवार, 19 सितंबर 2012

दुश्मन को वतन के अंदर नहीं घुसने देंगे: सेना प्रमुख




सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने देशवासियों को रक्षा तैयारियों के प्रति आश्वस्त करते हुए कहा कि 1962 की जंग में चीन से हार जैसी स्थिति दोहराने नहीं दी जाएगी। जनरल सिंह ने कहा ह‌ि हम दुश्मन को अपने वतन के अंदर नहीं घुसने देंगे।

सेना प्रमुख ने अपनी तैयारियों के प्रति यह संकल्प ऐसे समय जाहिर किया है, जब अगले माह अक्टूबर में देश चीन के साथ जंग की 50वीं वर्षगांठ पूरी कर रहा है। यह ध्यान दिलाए जाने पर कि क्या वह देश के लोगों को इस पराजय के 50 साल पूरे होने के मौके पर यह भरोसा दिला सकते हैं कि ऐसा फिर नहीं होगा, तो सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसा नहीं होने देंगे।

सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की मौजूदगी की उन्हें सूचना है लेकिन यह बताया गया कि ये सैनिक वहां चीन की परियोजनाओं को संरक्षण देने के लिए हैं।

यह है आराध्या!



पिछले दस माह से अमिताभ बच्चन की पोती को लेकर अटकलों का बाजारा गरम था। हर कोई यह जानना चाहता था कि आखिर कैसी है आराध्या। उसकी एक झलक पाने के लिए मीडिया बेहद उतावली नजर आ रही है। यहाँ तक सुनने में आया था कि एक चैनल ने आराध्या की तस्वीरों के लिए बच्चन परिवार को बडी राशि का प्रस्ताव किया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। लेकिन इस सस्पेंस से आखिकार पर्दा उठ गया है। आराध्या की तस्वीर मीडिया में उजागर हो गई और सारी दुनिया ने ऎश्वर्या और अभिषेक की बेटी आराध्या को पहली बार देखा। यह तस्वीर उस वक्त खींची गई जब ऎश्वर्या धूम-3 की शूटिंग में व्यस्त अभिषेक से मिलने शिकागो जा रही थी। फोटोग्राफर विराल भयानी ने ऎश और आराध्या की कुछ तस्वीरों को इस दौरान अपने कैमरे में कैद किया। ऎश्वर्या की तस्वीरों को क्लिक करने के प्रयास में उन्हें एक फोटो आराध्या का लेने में सफलता प्राप्त हो गई। इससे पहले मीडिया में आराध्या की कई फोटो सामने आई लेकिन सभी फोटो गलत साबित हुई लेकिन अब जो तस्वीर सामने आई है उसमें आराध्या ऎश्वर्या की गोद में सो रही हैं।

भारत बंद के बाद खोलेंगे अपने पत्ते




नई दिल्ली। यूपीए सरकार से तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापसी की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि उनका ममता बनर्जी के फैसले से कोई लेना देना नहीं है। मुलायम इस समय वेट एंड वॉच के पक्ष में हैं व उन्होंने कहा कि गुरूवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में हम आगे की रणनीति तय करेंगे। मुश्किल में घिरी यूपीए सरकार को लेकर मुलायम ने कहा कि अडियल रवैये से कांग्रेस कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि सपा संसदीय बोर्ड की बैठक गुरूवार को होगी जिसमें सरकार को समर्थन के मुद्दे पर भविष्य के कदम पर फैसला किया जाएगा। मुलायम ने यहां अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि गुरूवार को समाजवादी पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक है। हम उसमें फैसला करेंगे। सपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सरकार के फैसलों का विरोध करने के लिए प्रदर्शन करने की अपनी योजना पर आगे बढेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और पूरे देश में विरोध होगा। लोगों से जुडे मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किए जाएंगे।

सरकार को सद्बुदि्ध आए
मुलायम ने सरकार की यह कहकर निन्दा की कि इसकी नीतियों ने आम आदमी की कमर तो़ड दी है। सपा प्रमुख ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार को समझ आए। सरकार ने लोगों को महंगाई और भ्रष्टाचार के सिवाय क्या दिया है। आम आदमी तथा किसानों पर काफी भार है। यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र सरकार का रवैया इसको सहज रूप से चलाने में आडे आ रहा है, उन्होंने कहा कि यह जिद्दी रवैया सरकार को केवल कमजोर करने का काम करेगा। इस रवैये से कांग्रेस काफी कमजोर हो जाएगी। संप्रग को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी ने मंगल कोतृणमूल कांग्रेस की ओर से समर्थन वापस लिए जाने के फैसले को "गंभीर" मुद्दा करार देते हुए कहा था कि इस स्थिति के लिए कांग्रेस नीत सरकार का रवैया जिम्मेदार है।

अब क्या करेगी मनमोहन की सरकार!



नई दिल्ली। ममता बनर्जी के अल्टीमेटम के बाद यूपीए सरकार के लिए स्थितियां गंभीर हो गई है लेकिन यूपीए अब भी कई विकल्पों पर विचार कर रही है। ऎसा करना इसलिए भी जरूरी है कि सरकार बेवजह परेशानियां नहीं पालना चाहती है, उसे अभी आर्थिक सुधारों को लेकर और भी कई फैसले करने हैं ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।

इन सब बातों के साथ यूपीए को संसद में अपने संख्याबल पर भी गौर करना है। कुल 545 सदस्यों की मौजूदा लोकसभा में काँग्रेस के 205 सांसद हैं, अगर तृणमूल काँग्रेस के 19 सदस्य हाथ खींच लेते हैं तो यूपीए के पास डीएमके के 18, आरएलडी के 5, एनसीपी के नौ, नेशनल कान्फ्रेंस से तीन और दूसरी पार्टियों के कुछ सांसद बच जाएंगे। सरकार को बाहर से समर्थन देने वालों में सपा, बसपा, आरजेडी हैं और जनता दल-सेक्युलर है। कुल मिलाकर बाहर से 50 सांसदों का समर्थन उसे प्राप्त है यानि उसके पास 300 से ज्यादा सांसदों की ताकत है जबकि सरकार में रहने के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इस संख्या के आधार पर पर अब सरकार के सामने निमA विकल्प हैं।

आंशिक रोलबैक
फैसलों पर आंशिक रोलबैक की संभावना कम है क्योंकि सरकार को सभी आर्थिक घोषणाओं पर अमल को टालने की घोषणा करनी होगी पर अगर यूपीए सरकार ममता बनर्जी के दबाव में आकर ताजा घोषणाओं को आंशिक तौर पर पलट दे तो ममता बनर्जी के उनके साथ बने रहने की संभावना बन सकती है। सरकार ने ये बहुत साफ शब्दों में कह दिया है कि खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के फैसले को पलटा नहीं जाएगा क्योंकि उस पर भारतीय अर्थव्यवस्था को और उदार बनाने का दबाव है। अंतरराष्ट्र्रीय मुद्रा कोष ने फिर दोहराया है कि भारत को आर्थिक उदारीकरण के क्षेत्र में और उपाय करने चाहिए। लेकिन कहा जा रहा है कि मौजूदा संकट को टालने के लिए सरकार अगर प्रति परिवार रसोई गैस के छह से ज्यादा सिलेंडर दिए जाने पर लगी रोक हटा दे और डीजल की कीमतों को कुछ कम कर दे तो ममता बनर्जी इसे अपनी जीत के तौर पर पेश करते हुए सरकार में बनी रह सकती हैं।

अल्पमत सरकार
केंद्र में पहले भी अल्पमत सरकारें रह चुकी हैं। ममता बनर्जी के 19 सांसदों के समर्थन वापिस लेने के बाद भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की बाहरी मदद से मनमोहन सिंह केंद्र में अल्पमत सरकार चला सकते हैं। सपा के पास 22 और बसपा के 21 सांसद हैं। बसपा के नेता कह चुके हैं कि सरकार के गिरने से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा नहीं होने वाला।

नए साथी ढूंढे जाएं
अगर कांग्रेस मुलायम सिंह यादव को सरकार में आने के लिए मना लेती है तो मनमोहन सिंह की स्थिति पूरी तरह से मजबूत हो जाएगी। तृणमूल के पास इस समय रेल जैसा अहम मंत्रालय है। समाजवादी पार्टी को अगर इस तरह के मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई तो पार्टी सरकार में शामिल हो सकती है। हालाँकि अभी मुलायम सिंह यादव ने इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है। काँग्रेस को अपनी जरूरत का एहसास दिलाते रहने के लिए मुलायम सिंह आलोचनात्मक सुर में बोलते रहे हैं. ममता बनर्जी की घोषणा के बाद भी उन्होंने काँग्रेस को खबरदार करने के लिए कडे शब्दों का इस्तेमाल किया है। लेकिन अगर समाजवादी पार्टी सरकार में शामिल होती है तो फिर मायावती की पार्टी किसी भी कीमत में शामिल नहीं होगी।

मध्यावधि चुनाव हों तो
या तो कांग्रेस और यूपीए एक साथ कई सारी लोकलुभावन घोषणाएं करे और मध्यवर्ग को माफिक आने वाला बजट पेश करने के बाद खुद ही 2013 में मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दे। या फिर एनडीए के साथ साथ ममता बनर्जी की तृणमूल काँग्रेस और समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सरकार को मध्यावधि चुनाव करवाने के लिए मजबूर कर दें।

बंद से उपजने वाली समस्याएं
अभी सरकार को सबसे ब़डी चुनौती का सामना 20 सितंबर को करना होगा जब पूरे देश में एफडीआई का विरोध किया जाएगा। विपक्ष और सरकार विरोधी पार्टियों की ओर से की जा रही इस ह़डताल में सरकार की सहयोगी पार्टी डीएमके भी हिस्सा ले रही है।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले को ही देंगे समर्थनः नीतीश




बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस के यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने पर केंद्र में स्थिति को अत्यधिक नाजुक बताते हुए बुधवार को कहा कि जो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगा उसी को सरकार बनाने में समर्थन दिया जाएगा.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर आयोजित की जाने वाली अधिकार रैली को लेकर पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया के महाराजा स्टेडियम में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा ‘ममता बनर्जी ने समर्थन वापस ले लिया है, स्थिति बहुत ही नाजुक है.’

नीतीश ने कहा, ‘कांग्रेस के लोग जुगाड़ में माहिर हैं, जितना दिन यह सरकार (केंद्र की यूपीए सरकार) चलेगी उतनी ही दुर्दशा आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी होने वाली है.’

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर आगामी चार नवंबर को आयोजित की जाने वाली अधिकार रैली में पूरी ताकत लगाकर पटना पहुंचने का आहवान करते हुए नीतीश ने कहा कि जो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगा हम उसी को सरकार बनाने में मदद करेंगे.

उनके मुताबिक, ‘आज केंद्र की यूपीए सरकार आपकी ताकत नहीं समझ रहे हैं और एक-दो सांसदों वाली पार्टी की ओर ताकने वालों को अधिकार रैली में उमड़ने वाले जन सैलाब में बिहार के चालीस सांसद दिखाई देंगे और उन्हें आपकी ताकत समझ में आएगी.’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राजनैतिक जीवन में उन्होंने जितनी भी अपनी यात्रा और अभियान की शुरुआत की है वह चंपारण से की है और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए भी पश्चिमी चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया से अधिकार रैली को लेकर अपनी यात्रा की शुरुआत की है, जो लगभग एक महीने तक प्रदेश में विभिन्न भागों में जारी रहेगी.

नीतीश ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर प्रखंड स्तर पर अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया है, और पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश में जारी बारिश के कारण जिलों में इसके आयोजन को लेकर जदयू के कार्यकर्ता चिंतित थे पर यह बारिश राहत की बारिश है क्योंकि इससे प्रदेश में सुखा की स्थिति में कमी आएगी.

उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल दिल्ली को हमारी बात माननी होगी और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देना होगा. नीतीश ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर वर्ष 2006 में बिहार विधानमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया था.

उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री से सर्वदलीय शिष्टमंडल के मिलने के लिए समय मांगा गया था पर उसके लिए समय नहीं दिया गया.

नीतीश ने कहा कि जदयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने को एक अभियान के रूप में लिया और इस संबंध में जदयू शिष्टमंडल ने प्रदेश की जनता के सवा करोड हस्ताक्षर के साथ एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा था.

उन्होंने कहा कि इसको लेकर अंतर मंत्रालय समूह का गठन किया गया पर उसने हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया पर उसने हमारे पिछडे़पन को स्वीकारा है.

नीतीश ने कहा कि बिहार में प्रति व्यक्ति आय कम है और मानव विकास के मामले में और पूंजी निवेश के मामले में हम पीछे हैं ऐसे में प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि अधिकारियों की एक समिति बनाकर हमारी मांगों को स्वीकार करें.




मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ता देश!



तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी ने यूपीए सरकार से समर्धन क्या वापस लिया ऐसा माना जाने लगा है कि कांग्रेस देश को मध्यावधि चुनाव की ओर ढकेल रहा है और 'राजनीतिक संकट' पैदा कर रहा है. चौतरफा केंद्र सरकार की निंदा हो रही है.

भाजपा ने बुधवार को कहा कि एफडीआई, डीजल के दाम में बढ़ोतरी, रसोई गैस सिलिंडरों की राशनिंग और कोयला ब्लॉक आवंटन जैसे देश के चार ज्वलंत मुद्दों पर यूपीए सरकार संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो चुकी है और इसे देखते हुए उसे इन चारों फैसलों को बिना देरी किए तुरंत रद्द करना चाहिए.

पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, ‘इन मुद्दों पर तृणमूल कांग्रेस सरकार से हटने की घोषणा कर चुकी है और अन्य घटक दल द्रमुक तथा सहयोगी दल सपा सरकार के उक्त फैसलों के खिलाफ 20 तारीख को देशव्यापी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं. इनके अलावा राजग, वाम मोर्चा तथा बीजद और तेलगुदेशम ने भी हड़ताल का ऐलान किया है. इससे साफ है कि संसद के दोनों सदनों में सरकार बहुमत खो चुकी है.’

उन्होंने हालांकि, सरकार को घेरने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने या उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जैसे सवालों को टालते हुए कहा कि इन सब बातों पर 20 सितंबर के बाद गौर किया जाएगा.

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने हालांकि इससे पहले कहा था कि मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी देने के सरकार के फैसले के आलोक में संसद का विशेष सत्र बुलाने की मुख्य विपक्षी दल मांग करेगा.

कांग्रेस द्वारा अपने शासन वाले राज्यों को साल में छह की बजाय रियायती दर वाले नौ रसोई गैस सिलिंडर देने के निर्देश की कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘यह तो हद हो गई. केंद्र रसोई गैस सिलिंडरों की राशनिंग करें और राज्यों से कहे कि वह अपनी ओर से रियायती दरों पर तीन अतिरिक्त सिलिंडर मुहैया कराए. जबकि रसोई गैस सिलिंडर वितरण का राज्यों से कोई वास्ता ही नहीं है. यह केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है.’

वहीं जदयू सांसद शिवानंद तिवारी ने कांग्रेस पर देश को मध्यावधि चुनाव की ओर धकेलने और एक ‘राजनीतिक संकट’ पैदा करने का आरोप लगाया. तिवारी ने कांग्रेस पर मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत, डीजल की कीमत में वृद्धि तथा सब्सिडी प्राप्त रसोई गैस सिलिन्डर की संख्या सीमित करने का फैसला कर देश में ‘राजनीतिक संकट’ पैदा करने का आरोप लगाया.

उन्होंने इस बात की मांग की कि सरकार को अपने फैसलों के लिए संसद की मंजूरी लेनी चाहिए क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह यूपीए के नहीं केवल कांग्रेस के फैसले हैं. उन्हें सरकार के अंदर भी बहुमत नहीं है. यह अल्पमत के फैसले हैं. यदि आप इस विषय पर अपने सहयोगी दलों को भी साथ नहीं ले पाते हैं, तो अब देश को इसके लिए कैसे राजी करेंगे? कांग्रेस अपने फैसले थोप रही है और इस मुद्दे पर अड़ियल रवैया अपना कर देश में राजनीतिक संकट पैदा कर रही है.’



टूटी टीम अन्ना, अलग हुए अरविंद केजरीवाल



अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल अलग हो गए हैं, राजनीतिक पार्टी बनाने को लेकर हुए मतभेद के चलते टीम अन्ना टूट गई है. अन्ना हजारे ने कहा है कि टीम अन्ना का अलग होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

अन्ना हजारे ने साफ तौर पर कहा कि वह किसी भी पार्टी का हिस्सा नहीं बनेंगे साथ ही उन्हों ने कड़ा फैसला लेते हुए कहा कि चुनाव प्रचार में भी शामिल नहीं होंगे. हालांकि अन्ना हजारे ने कहा कि टीम के टूटने से उन्हें दुख है.

इससे पहले अन्ना हजारे ने मंगलवार को ही साफ किया था कि वह राजनीतिक पार्टी के गठन के खिलाफ हैं. कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद ये फैसला लिया गया. बैठक में अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, संतोष हेगड़े, मनीष सिसौदिया समेत अन्य लोग शामिल हुए थे.

राजनीतिक विकल्प का रास्ता चुनने के मुद्दे पर पूर्ववर्ती टीम अन्ना में मतभेद काफी दिनों से चला आ रहा था.

हजारे ने साफ किया था कि वह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के राजनीतिक राह पकड़ने के खिलाफ हैं और केजरीवाल से उन्होंने कहा कि वह उनसे (अन्ना से) यह उम्मीद नहीं करें कि वह (अन्ना) उनके सभी उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे.

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के राजनीतिक रास्ता अख्तियार करने का विरोध कर रहे समर्थकों के एक समूह को संबोधित करते हुए हजारे का यह बयान आया था.

हजारे ने पहले भी कहा था, ‘मैंने अरविंद को (पिछले महीने जंतर मंतर पर हुए अनशन के दौरान) कह दिया था कि अगर वह पार्टी का गठन करना चाहते हैं तो करें लेकिन मैं उसका हिस्सा नहीं होऊंगा.’ अन्ना हजारे ने कहा था, ‘ऐसा नहीं है कि अगर उनके 1000 उम्मीदवार होंगे तो मैं उन सबका समर्थन करूंगा. ऐसा नहीं होगा.’




मध्यावधि चुनाव और कांग्रेस का सफाया तय






लखनऊ भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने मध्यावधि चुनाव होने और कांग्रेस के सफाए का दावा किया है। उन्होंने कहा कि संसद व सड़क पर विश्वास खो चुकी केंद्र सरकार को डॉलर के जरिए बचाने की कोशिश हो रही है और इसके लिए साफ्ट टारगेट तलाशे जा रहे हैं।

पार्टी मुख्यालय में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में नकवी ने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार को डॉलर डॉयलसिस पर चलाने के सभी प्रयास बेकार साबित होंगे क्योंकि देश की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के हटने के बाद मनमोहन सरकार को सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया। विदेशी बाजार माफिया के इशारों पर चल रही कांग्रेस सरकार को जनहित से कोई सरोकार नहीं रह गया। एफडीआई के मुद्दे पर सरकार लगातार गलतबयानी करती आ रही है। राज्य सरकारों और विभिन्न दलों को विश्वास में लेने की बात जिस तरह झूठ साबित हुई, उसी तरह विदेशी कंपनियों द्वारा 30 प्रतिशत माल भारतीय बाजारों से खरीदने का आश्वासन भी धोखा है। सच्चाई यह है कि विश्व व्यापार संगठन के नियमों में सरकार के पास ऐसा कोई अधिकार ही नहीं है। इसी तरह गैस और डीजल पर दाम बढ़ाकर भी सरकार ने जनता से विश्वासघात किया है। सरकार 51 बार पेट्रोल, 42 बार डीजल और 12 बार एलपीजी के दाम बढ़ा चुकी है। कंपनियों का घाटा भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण होता है।

नकवी का कहना था कि सरकार अब 'रोल बैक' भी करती है तो उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि भ्रष्टाचार की भस्मासुर बनी कांग्रेस का साथ जो भी देगा वो खुद समाप्त हो जाएगा। सपा व बसपा का नाम लिए बिना नकवी ने उनके विरोध को सौदेबाजी का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि दोनो हाथ में लड्डू लेने वालों को भी जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

नकवी ने कहा कि भाजपा मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है। 26, 27 व 28 सितंबर को फरीदाबाद में होने वाली राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में चुनावी रणनीति तय होगी। ममता बनर्जी का एनडीए में शामिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संप्रग के आधे घटक दल राजग से संपर्क में रहें है। सोशल साइट्स पर अंकुश लगाने के बारे में उनका कहना था कि भ्रष्टाचार की पर्याय बन चुकी कांग्रेस अपनी कालिख छिपाने में जुटी है।

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

ममता ने यूपीए से समर्थन वापस लिया


तृणमूल कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है. मौजूदा लोकसभा में ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल के 19 सांसद हैं. लोक सभा के 543 सदस्यों में यूपीए को बहुमत के लिए 272 की जरूरत है. यूपीए के लोक सभा में 273 सांसद हैं लेकिन उसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल का बाहरी समर्थन हासिल है. तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापस लेने से ये संख्या 254 हो जाएगी जिससे यूपीए सरकार बाहरी समर्थन देने वाले दलों पर बुरी तरह से आश्रित हो जाएगी. ममता बनर्जी ने मल्टीब्रांड खुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, डीजल के दामों में वृद्धि के फैसलों के बाद केंद्र सरकार को ये फैसले वापस लेने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. वित्त मंत्री पी चिदंबरम सोमवार को ही किसी भी तरह के 'रोलबैक' यानि फैसला वापस लिए जाने से इनकार कर चुके थे.

'सशर्त पुनर्विचार संभव, बाहरी समर्थन नहीं'
दो घंटे से भी ज़्यादा चली तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ममता बैनर्जी ने कहा, “इस सरकार ने एक के बाद एक जनता-विरोधी फैसले लिए हैं, इसलिए हम सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं और शुक्रवार को दोपहर तीन बजे तृणमूल कांग्रेस के मंत्री दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने इस्तीफे सौंप देंगे”. हालाँकि ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि यदि केंद्र सरकार खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश के फैसले को वापस लेती है, प्रति वर्ष प्रत्येक परिवार के मिलने वाले गैस के सिलिंडरों की संख्या 12 तक बढ़ाती है और डीजल की कीमत में वृद्धि में कुछ कमी लाती है तो वे समर्थन वापस लेने के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं. ममता ने सरकार को बाहर से समर्थन देने की किसी भी संभावना से इनकार किया और कहा कि उन्होंने समर्थन वापसी का फैसला आधे मन से नहीं लिया है.
'सहयोगी दलों को सम्मान नहीं' तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ममता बैनर्जी ने कहा कि खुदरा व्यापार के असंगठित क्षेत्र में अपनी जीविका चला रहे गरीब और मध्य वर्ग के लोगों पर विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से बुरा असर पड़ेगा. ममता बैनर्जी ने कहा, “सरकार हमारी पार्टी के विचारों को एक सहयोगी दल की तरह सम्मान नहीं दे रही है, अब लंबे समय तक इंतज़ार करने के बाद हमें ये दुखद फैसला लेना पड़ रहा है.” इस घटनाक्रम से पहले राजधानी दिल्ली में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की. सोमवार को चिदंबरम ने कहा था कि सरकार अपने सहयोगियों को समझाने का पूरा प्रयास करेगी. चिदंबरम ने ये भी दावा किया था कि सरकार को कोई खतरा नहीं है.

सोमवार, 17 सितंबर 2012

ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट में शामिल होंगे 500 से अधिक निवेशक


बड़े-छोटे सभी निवेशकों का हो समभाव सम्मान -मुख्यमंत्री श्री चौहान


मध्यप्रदेश के आगामी तीन दिवसीय ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में देश-विदेश के 500 से अधिक निवेशक आयेंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण प्रसंग की सभी तैयारियाँ सूक्ष्मता तथा सम्पूर्णता के साथ करने के निर्देश दिये हैं। ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट 28 अक्टूबर से इंदौर में हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज यहाँ ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट की बिन्दुवार समीक्षा की। बैठक में उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव श्री आर.परशुराम, अपर मुख्य सचिव उद्योग श्री प्रसन्न कुमार दाश भी मौजूद थे।

बैठक में बताया गया कि देश के अनेक बड़े समूहों ने इस मीट में आने की स्वीकृति दी है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान प्रमुख रूप से 10 सेक्टर में बड़े निवेश होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि निवेशक बड़े हों अथवा छोटे, प्रदेश में सभी का समभाव से सम्मान किया जाय तथा नीति निर्धारित कर सुविधाएँ दी जायं।

बैठक में तय किया गया कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट की तिथियों का पूरा सप्ताह मध्यप्रदेश में निवेश, नये उद्योगों की स्थापना तथा औद्योगिक विकास को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान स्वयं भी प्रदेश के विभिन्न चिन्हित औद्योगिक केन्द्रों में जायेंगे।

बताया गया कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के पहले दिन 28 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य तथा विशिष्टताओं की झलक दिखाने वाली विश्व स्तरीय प्रदर्शनी कार्यक्रम स्थल लालगंगा मैदान में लगायी जायेगी। उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा, निवेशकों से एम.ओ.यू. इन तीन दिवसीय आयोजन के दौरान होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित आयोजन को भव्यता, रोचकता तथा उपयोगी बनाने के लिये अन्य आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।

उद्योगपतियों से भेंट
इससे पहले सोमवार को अपने नियमित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उद्योगपतियों से सीधी चर्चा का क्रम आज भी जारी रखा। आज यहाँ नर्मदा ट्रामा सेंटर भोपाल के डॉ. राजेश शर्मा ने स्वास्थ्य का एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट स्थापित करने की मंशा जाहिर की जिसमें मध्यप्रदेश के किसी भी मरीज को इलाज के लिये कहीं अन्यत्र नहीं जाना पड़े। यह परियोजना हेल्थ हब के रूप में होगी। इसमें स्टेम सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तथा चिकित्सा की क्रांतिकारी पद्धति का समावेश होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रस्ताव निश्चित ही प्रभावशाली है। उन्होंने नर्मदा हेल्थ ग्रुप के डॉ. शर्मा को प्रदेश शासन की अपेक्षा के विस्तृत ब्यौरे के साथ परियोजना की पूरी रूप रेखा प्रस्तुत करने का आग्रह किया। श्री चौहान ने कहा कि उनकी भी यही इच्छा है कि हर आम आदमी को मध्यप्रदेश में ही सम्पूर्ण इलाज की सुविधा मिले।

स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में सभी को मिलेंगी मुफ्त दवाएं



12वीं पंचवर्षीय योजना को मंजूरी मिलते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम लोगों को मुफ्त दवाएं मुहैया कराने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर कदम बढ़ा दिए हैं। उसकी योजना है कि 1 नवंबर से जनता को स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध हो सकें।

12वीं योजना में जीडीपी की 1.95 फीसदी राशि आवंटित होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सभी योजनाओं पर अमल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अगले दो महीनों के अंदर हम मुफ्त दवा की योजना लांच करने की तैयारी कर रहे हैं। इसे 1 नवंबर से लागू करने की हमारी पूरी कोशिश है। इसके लिए हम राजस्थान और तमिलनाडु के मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन के मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। इस योजना के तहत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा जिला अस्पतालों से लेकर मेडिकल कालेजों में सभी मरीजों को मुफ्त जेनेरिक दवाएं दी जाएंगी।

वार्मअप मैच में पाक ने भारत को 5 विकेट से हराया



आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के एक वार्मअप मैच में कामरान अकमल के शानदार अर्द्घशतक की बदौलत पाकिस्तान ने भारत को पांच विकेट से हरा दिया है। भारत के दिए 186 रनों के लक्ष्य को पाकिस्तान ने 19.1 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया।

कामरान अकमल ने केवल 50 गेंद में नाबाद 92 रनों की पारी खेली। इस पारी में अकमल ने छह छक्के और पांच चौके जड़े। वहीं शोएब मलिक ने 18 गेंद में नाबाद 37 रन बनाए।

पाकिस्तान के ओपनरों मोहम्मद हफीज(39) और इमरान नजीर(13) ने टीम को धमाकेदार शुरुआत ‌दी। हफीज ने 29 गेंद में चार चौके और एक छक्के की मदद से 38 रन बनाए। इसके बाद पाकिस्तान के तीन प्रमुख बल्लेबाज नासिर जमशेद(0), शाहिद अफरीदी(0) और उमर अकमल(2) सस्ते में आउट हो गए। हालांकि एक छोर से कामरान अकमल ने मोर्चा संभाले रखा और शोएब मलिक के साथ मिलकर टीम को जीत लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

भारत की ओर से आर अश्विन एक मात्र सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने चार ओवर में 23 रन खर्च कर चार विकेट लिए। भारत की ओर से पहला विकेट आर अश्विन ने लिया। अश्विन ने मैच के तीसरे ओवर की तीसरी गेंद पर इमरान नजीर के सुरेश रैना के हाथों कैच कराया। इमरान नजीर ने 11 गेंदों में 13 रन बनाए। नासिर जमशेद के रूप में पाकिस्तान का दूसरा विकेट गिरा। गौतम गंभीर के थ्रो पर कप्तान धोनी ने उन्हें रन आउट किया। नासिर बिना खाता खोले आउट हुए।

भारत ने बनाए 185 रन
इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट खोकर 185 रन बनाए। भारत की ओर से विराट कोहली और रोहित शर्मा ने शानदार अर्द्घशतक जड़ा।

सईद अजमल की गेंद पर बोल्ड होने से पहले रोहित शर्मा ने 56 रन बनाए। वहीं विराट कोहली ने 47 गेंद में सात चौके और दो छक्के की मदद से नाबाद 75 रनों की पारी खेली। युवराज सिंह ने नाबाद चार रन बनाए। गौतम गंभीर 10 रन बनाकर उमर गुल की गेंद पर बोल्ड हुए जबकि वीरेंद्र सहवाग 26 रन बनाकर अजमल की गेंद पर आउट हुए।

सहवाग ने 14 गेंद में चार चौके और एक छक्के की मदद से तेजी से 26 रन बनाए। पाकिस्तान की ओर से सईद अजमल सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने चार ओवर में 22 रन देकर दो विकेट लिए। वहीं उमर गुल को एक विकेट मिला।

सीआरआर में 0.25 फीसदी की कटौती, अन्य दरें नहीं बदली



भारतीय रिजर्व बैंक ने तिमाही ‌मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है। इसके तहत नगद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी की कटौती की गई है। वहीं रेपो और रिवर्स रेपो दर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। रिजर्व बैंक का यह फैसला 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएगा।

रिजर्व बैंक के इस ऐलान के बाद अब सीआरआर की दर 4.50 फीसदी हो जाएगी। इस फैसले से आर्थिक विश्लेषकों को उम्मीद है कि बाजार में 17 हजार करोड़ रुपये की तरलता आएगी।

हालांकि रिजर्व बैंक ने रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि रेपो दर आठ प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर सात फीसदी पर ही बनी रहेगी।

आरबीआई के गर्वनर सुब्बाराव ने कहा कि मौद्रिक नीति का फोकस मुख्य रूप से मुद्रास्फीति पर काबू पाना है। सरकार के पिछले कुछ फैसले विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखे जा सकते हैं। मसलन सरकार ने गैस सिलेंडर पर सब्सिडी कम कर दी है दूसरी तरफ खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी है।

मौद्रिक नीति के अहम बिंदुः
1. नगद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 कटौती, घटकर 4.5 प्रतिशत।
2. रेपो रेट (8%) और रिवर्स रेपो (7%) में कोई बदलाव नहीं।
3. सीआरआर में कटौती से बाजार में 17,000 करोड़ रुपये तरलता की उम्मीद।
4. महंगाई पर काबू पाना अभी भी चुनौती।
5. राजकोषीय घाटे को कम करने पर नजर।

सरहदों पर तैनात होंगी तोप और टैंक ब्रिगेड



बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर सेना उत्तरी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में सरहदों पर आर्टिलरी और टैंक ब्रिगेड की तैनाती करने पर विचार कर रही है। हाल ही में सेना ने माउंटेन स्ट्राइक कोर की स्थापना के साथ ही एक लाख सैनिकों की और भर्ती करने का प्रस्ताव दिया है।

सेना के सूत्रों के मुताबिक लद्दाख और पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी जंगी क्षमता को बढ़ाने की योजना के तहत सेना रूस निर्मित टैंकों वाली बख्तरबंद ब्रिगेड की तैनाती पर विचार कर रही है। इसके अलावा उसकी इन इलाकों में इनफैंट्री कांबैट व्हीकिल भी तैनात करने की तैयारी है। सेना की उत्तराखंड और लद्दाख में दो स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड भी तैनात करने की योजना है।

सेना का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर 10 हजार अतिरिक्त जवानों को भेजने का प्रस्ताव है। इन द्वीपों पर सेना की एंफीबियस ब्रिगेड तैनात है। आधुनिकीकरण और विस्तार योजना के तहत चीन से लगे दूरदराज और ऊंचाई वाले इलाकों में नई हवाई पट्टियां और हैलीपैड बनाने की भी योजना है। लद्दाख और पूर्वोत्तर के इलाकों में पुरानी हवाई पट्टियों को भी दुरुस्त किया गया है।

मालूम हो कि चीन ने सीमा से लगते अपने इलाकों में ढांचे का जबरदस्त विकास किया है। इसके मद्देनजर भारत भी सरहदी क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने में लगा हुआ है। चीन सीमा से सटे इलाकों में सड़कें बनाई जा रही हैं। अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तैनात की गई है। इसके अलावा असम में सुखोई-30 एमकेआई विमान तैनात किए गए हैं।

शनिवार, 15 सितंबर 2012

विदेशी निवेश: कौन राज्य किधर?



मनमोहन सिंह मंत्रीमंडल ने ख़ुदरा व्यापार और नागरिक उड्डयन सहित कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश की इजाज़त दे दी है. मल्टी-ब्रांड ख़ुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की घोषणा करते समय केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे वॉलमार्ट और टेस्को वगैरह को अपने क्षेत्र में स्टोर खोलने की आज्ञा देने का ज़िम्मा राज्यों पर छोड़ दिया गया है. आनंद शर्मा ने कहा कि पिछले साल नवंबर में इस मामले पर लिए गए फ़ैसले के बाद संसद में हुए हंगामे के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था लेकिन सभी पक्षों से विचार विमर्श के बाद इसे लागू करने का फ़ैसला लिया गया है. लेकिन आप आम सहमति को एक राय नहीं समझें, एकमतता के लिए तो हमें अनंत काल तक इंतज़ार करना होगा. आनंद शर्मा ने कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, असम, महाराष्ट्र वगैरह का नाम लेते हुए कहा कि इन मुख्यमंत्रियों ने लिखित में इसके के पक्ष में कहा है.

क्या राय है इस मामले में राज्यों की:
समर्थन
हरियाणा:
मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुडा ने ख़ुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के निर्णय का फ़ैसला किया है और कहा है कि इससे किसानों को उनके माल की बेहतर क़ीमत मिलेगी और ये उपभोगताओं को फ़ायदेमंद होगा.

दिल्ली: मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मंत्रीमंडल के फ़ैसले को बहुत बड़ा क़दम बताया और कहा कि इससे लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ मुहैया हो पाएंगे और नौकरियां पैदा होंगी.

राजस्थान: कांग्रेस शासित एक दूसरे प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने कहा कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कृषि क्षेत्र को फ़ायदा पुहंचेगा.

महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वन के मुताबिक़ इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और माल की सप्लाई में पैदा होनेवाली बाधाएं ख़त्म होंगी.

असम: असम के मुख्यमंत्री के इस फ़ैसले से ख़ुश होने की बात कही गई है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री द्वारा भी इस फैसेल के समर्थन की बात कही है.



विरोध
रिटेल क्षेत्र को खोले जाने के विरोध के चलते इसे लंबे समय से टाला जाता रहा है.जहां कांग्रेस शासित इन प्रदेशों ने मंत्रीमंडल के फ़ैसले का स्वागत किया है वहीं दक्षिणी राज्य केरल ख़ुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के ख़िलाफ़ है.

गुजरात: मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वो नहीं जानते कि प्रधानमंत्री कर क्या रहे हैं. उनके मुताबिक़ छोटे दुकानदारों का धंधा इससे चौपट हो जाएगा. हालांकि नरेंद्र मोदी पहले इस खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के पक्ष में बोलते रहे हैं.

उड़ीसा: पिछले साल दिए गए एक बयान में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे मुल्क को पीछे ले जानेवाला और ग़लत सलाह पर लिया गया फ़ैसला बताया था.

पश्चिम बंगाल: तृणमुल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने 72 घंटे के भीतर इस फ़ैसले को वापस लेने की मांग की है.

उत्तर प्रदेश: केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी के राज्य के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में किए गए एक प्रेस कांफ्रेस में साफ़ किया है कि वो इस फ़ैसले को राज्य में लागू नहीं करेंगे.

बिहार:
मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कहा कि इससे लाखों लोगों को कामकाज का नुक़सान होगा.

मध्य प्रदेश:
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अनुसार इस फ़ैसले से छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को नुक़सान उठाना होगा


अनिश्चित
पंजाब: मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी कहा है कि वो इसपर बाद में निर्णय देंगे. प्रकाश सिंह बादल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल है जिसका मुख्य दल भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का विरोध कर रहा है.

झारखंड: मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि वो नागरिकों और स्थानीय व्यापारियों से सलाह मशिवरा करने के बाद किसी नतीजे पर पहुंचेंगे.

कर्णाटक:
उद्योग मंत्री मुरुगेश निरानी ने कहा है कि राज्य सरकार नीति का गहन अध्ययन करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेगी. कर्णाटक में बीजेपी की सरकार है.

हर जरूरी सामान होगा सस्ता



सरकार ने सीसीईए की बैठक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर दो अहम फैसले लिए हैं। एक फैसले में सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी निवेश को मंजूरी दे दी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने किराने में विदेशी निवेश को लेकर राज्य सरकार को छूट भी दी है। राज्य सरकार अपने यहां आउटलेट खोलने की इजाजत देने में स्वतंत्र होंगे। वहीं, देसी एयरलाइंस में विदेशी एयरलाइंस के निवेश को भी सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। हालांकि, सरकार के इन फैसलों का तृणमूल पार्टी विरोध कर रही है। सीसीईए बैठक में लिये गए फैसले में सरकार ने 5 कंपनियों को देशी एयरलाइंस में निवेश की इजाजत दी है। दिलचस्प है कि किसी एक देश की कंपनी द्वारा दूसरे देश में किये जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एफडीआई कहा जाता है। ऐसे में निवेश में निवेशक को दूसरे देश की कंपनी के मैनेजमेंट में कुछ हिस्सा मिल जाता है। हालांकि, यह हिस्सा 51 फीसदी से कम होता है। आमतौर पर किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए निवेशक को कंपनी में न्यूनतम 10 फीसदी शेयर खरीदने पड़ते हैं। केंद्र सरकार के इस फैसला के तृणमूल कांग्रेस ने तीखा विरोध किया है। पार्टी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि हमारी पार्टी और ममता बनर्जी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती हैं। कुणाल ने कहा कि हमारे पास संसद में इतनी संख्या नहीं है कि हम फैसलों को रोक सकें लेकिन हमें खुलकर इसका विरोध तो कर ही सकते हैं। कांग्रेस के पास संख्याबल है और यूपीए में उन्हीं की चलती है। कुणाल घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ऐसी किसी भी पॉलिसी को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी। विदेशी निवेश को किस तरह लागू किया जाना है यह राज्य सरकारें तय करेंगी। आर्थिक सुधारों के नाम पर लिए गए केंद्र सरकार के इस फैसले की बीजेपी और सीपीआई ने तीखी आचोलना की है। विपक्ष ने कहा है कि यूपीए अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गलत फैसले ले रही है।

आम आदमी को होगा ये फायदा
देश के कई राज्य एफडीआई के खिलाफ हैं। वहीं, कई संगठन भी इसका विरोध जता रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच आम आदमी को जहां इससे कुछ नुकसान होने के साथ-साथ फायदा भी मिलेगा। इन फायदों में- एफडीआई से अगले तीन साल में रिटेल सेक्टर में एक करोड़ नई नौकरियां मिलेंगी। किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और अपने सामान की सही कीमत भी। कंस्यूमर तक जो चीज 20 रुपये में पहुंचती है, उसकी कीमत उसे पैदा करने वाले किसान को महज 4 रुपये मिल पाती है। बाकी का पैसा आढ़ती और बिचौलियों के पेट में जाता है। अब कंपनियां सीधे किसानों से चीजें खरीदेंगी, जिससे किसानों का फायदा बढ़ेगा और बिचौलियों द्वारा किया जाने वाला शोषण कम होगा। विदेशी कंपनियां द्वारा सप्लाई चेन सुधारने से खाद्य सामग्री का खराब होना रुकेगा।। सामान कम खराब होने से खाद्य महंगाई सुधरेगी। विदेशी कंपनियों को न्यूनतम 30 फीसदी सामान घरेलू बाजार से ही लेना होगा। इससे देश में लोगों की आय बढ़ेगी। इससे औद्योगिक विकास दर भी सुधरेगी। देश की बड़ी कंपनियों को पहले ही रिटेल में आने की इजाजत है। चीन हो या फिर इंडोनेशिया जहां भी रिटेल में एफडीआई को मंजूरी दी गई वहां एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के दिन फिर गए।

+92 के नंबर से कोई कॉल रिसीव हो तो तुरंत तोड़ दो सिम'



जोधपुर.थल सेना ने अपने जवानों व अफसरों को सख्त हिदायत दी है कि +92 के नंबर यानी पाकिस्तान से उनके मोबाइल फोन पर कोई कॉल आए और गलती से भी रिसीव हो जाए तो सिम को तुरंत तोड़ दें। इन कॉल के जरिए जाने-अनजाने में सामरिक महत्व की सूचनाएं लीक होने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। देश की दो शीर्ष खुफिया एजेंसियों रिसर्च एंड एनेलिसिस विंग (रॉ) व इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की आपत्ति के बाद सेना मुख्यालय ने हाल में यह आदेश दिया है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि +92 यानी पाकिस्तान के किसी नंबर या इंटरनेट कॉल आने पर तुरंत ही इसकी सूचना अपनी यूनिट को दें। पहले पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश या किसी खाड़ी देश से कॉल आने पर जवान को किसी की मौजूदगी में ही बात करने की हिदायत थी।

सेना दफ्तरों में मोबाइल फोन बंद :
पाकिस्तान से लगातार आ रही कॉल्स और हाईटेक मोबाइल फोन का प्रचलन बढ़ने से सेना ने अपने बेस और ऑपरेशन व वार रूम में इसके उपयोग पर ही पाबंदी लगा दी है। कंप्यूटर पर वीडियो कैमरा के उपयोग, पेन ड्राइव लाने, पर्सनल ई-मेल ऑफिस में खोलने आदि पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही -पोस्टिंग पर आते ही अपने मोबाइल फोन की पूरी जानकारी यूनिट को देने के आदेश दिए गए हैं। सेना के महत्वपूर्ण बेस पर सामान व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की स्क्रीनिंग के लिए मशीनें लगाई जाएंगी।

आईटी सेल से आती हैं कॉल्स :
रक्षा सूत्रों के अनुसार कराची व लाहौर में आईएसआई के आईटी सेल बने हुए हैं। इनमें विशेष रूप में प्रशिक्षित लोग भारतीय अफसर या जवान के परिजन या परिचित बनकर कॉल्स करते हैं। वे उसी लहजे में बात करते हैं, जिससे उन्हें कोई न कोई सूचना मिल जाती है। इसके लिए वे विशेष स्फूफिंग सॉफ्टवेयर का सहारा लेते हैं। वे भारत में एजेंटों के मार्फत लोकल मोबाइल नंबर भी लेते हैं। फिर सॉफ्टवेयर के माध्यम से लोकल नंबर से कॉल कर जवानों को छकाते हैं।

जवानों के लिए तनाव की कॉल्स :
आईएसआई का मकसद सामरिक महत्व की सूचनाएं जुटाने के अलावा जवानों में तनाव बढ़ाना भी है। यूनिट में इस बारे में बताते ही उन्हें कई तरह की पूछताछ के दौर से गुजरना पड़ता है। ऐसे में इस तरह की कॉल्स से जवानों में तनाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि उनकी काउंसलिंग कर कहा गया है कि वे ऐसी कॉल्स से तनाव में नहीं आएं।

एक्सपर्ट व्यू: सिम का क्लोन बनाते हैं भरत वर्मा, रक्षा विशेषज्ञ

पाकिस्तान या अन्य देश से मिस कॉल आने पर जवान जैसे ही उस पर दुबारा कॉल करता है तो उसकी पूरी डिटेल कॉपी हो जाती है। उस आधार पर उस नंबर के सिम का क्लोन तैयार हो जाता है। जवान के उसी नंबर से रिश्तेदारों या उसके साथियों को कॉल कर सूचनाएं ली जाती रही हैं। इसके चलते ही सेना ने सख्त कदम उठाया होगा।

ये हो रही हैं परेशानियां

>कॉल रिसीव करने पर सिम तोड़कर नया सिम लेने में झंझट।
>एक कॉल के चक्कर में संबंधित जवान या अफसर का सौ रुपए का नुकसान।

>सूचना नहीं देने पर कार्रवाई, ऐसे में प्रमोशन व कॅरिअर पर प्रभाव।

>ऑफ ड्यूटी के दौरान जवान को बुलाने में परेशानी।

>सिम तोड़ने से बचने के लिए जवान अब परिजनों के नाम की सिम ले रहे हैं। इसकी सूचना यूनिट को नहीं देते।

‘शूरवीर’ की सूचनाएं हुई थीं लीक

इस वर्ष मई में पश्चिमी सीमा के निकट सूरतगढ़ में हुए थल सेना के युद्धाभ्यास ‘शूरवीर’ के दौरान एक अफसर व कुछ जवानों के मोबाइल फोन पर पाकिस्तान से कॉल आए थे। कॉल करने वाले ने उनसे परिचित बनकर बातचीत की थी। इससे कुछ सूचनाएं लीक हुई थीं। खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में यह बात सामने आई थी।

ऐसे लीक होते हैं जवानों के नंबर

मोबाइल फोन उपयोग करना जवानों के लिए मुसीबत बन गया है। हर दो साल में नई पोस्टिंग होने पर उन्हें नया प्रीपेड सिम लेना पड़ता है। इसके लिए वे अपने सर्विस प्रमाण पत्र, फोटो व पता देते हैं। ओपन डोमेन के कारण उनसे संबंधित नंबर व जानकारी लीक होती है। यह एजेंटों के मार्फत सीमा पार जा रही है।