गुरुवार, 28 जून 2012

मिस्र: महिला पत्रकार को नग्‍न कर नोचते रहे हजारो लोग



काहिरा। मिस्र की राजधानी काहिरा में एक महिला पत्रकार की भरे बाजार में हज्‍जत उतारी गयी। 21 साल की ब्रिटिश पत्रकार के साथ जानवरों जैसा व्‍यवहार किया गया। उसको हजारों लोगों ने कुत्‍तों की तरह नोचा। यह भीड़ राष्‍ट्रपति चुनावों के रिजल्‍ट घोषित होने पर जश्‍न मना रही थी। रिपोर्टर नताशा वहां रिपोर्टिंग करने गयी थी।
न्‍यूज पेपर 'डेली मेल' के अनुसार नताशा 21 की नताशा स्मिथ मना रहे लोगों ने हमला बोल दिया। हजारों हमलावरों ने उसके कपड़े फाड़ दिये और उसको पूरा नग्‍न कर दिया। उसके बाद बहसी जानवरों की तरह उसको नोचते रहे। वहां मौजूद लोग उसके प्राइवेट पोर्ट्स को नोचते घसोतटे रहे। दो लोगों की मदद से वह बुर्का पहनकर वहां से बचकर निकली। उस महिला पत्रकार ने अपने ब्‍लाक पर लिखा कि वह मुझपर ऐसे टूट पड़े जैसे मैं ताजा मांस हूं और वे भूखे सेर। वहां मौजूद सारे लोगों की नजरों में हैवानियत थी। मै चिल्‍ला रही थी, लेकिन मेरी सुनने वाला कोई नहीं था। उस समय पूरे मिस्र में मोहम्‍मद मुर्सी के प्रेसिडेंट चुने जाने पर जश्‍न का माहौल चल रहा था। यह मामला काहिरा के तहरीर चौक की है। यह हादसा रविवार का है। स्मिथ महिला अधिकारियों के मुद्देप पर डॉक्‍युमेंट्री तैयार करने के लिए मिस्र आई थी। नताशा फालमाउथ यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल जर्नलिज्म में मास्टर्स हैं।

ई-गोल्‍ड, सिल्वर में करें निवेश, कमायें भरपूर लाभ




बिकने योग्‍य चीजों में निवेश करना अब और भी आसान हो गया है। आपके लिए इस प्रक्रिया को आसान बनाया है नेशनल स्‍पॉट एक्‍सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) ने। इसकी खास स्‍कीम सोने, चांदी व अन्‍य धातुओं में निवेश के लिए बनायी गई है। इसमें आप निवेश कर सकते हैं एसआईपी यानी सिस्‍टमेटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान के जरिये।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक गोल्‍ड एसआईपी में निवेश करना पहले कभी सपना हुआ करता था, लेकिन अब ई-सीरीज उत्‍पादों के साथ यह सपना पूरा हो सकता है।

अब आप सोना, चांदी, जस्‍ता, प्‍लेटिनम, कॉपर, आदि में हर रोज, हर हफ्ते या हर महीने निवेश कर सकते हैं। एनएसईएल की इस स्‍कीम के तहत आप इन धातुओं पर ऑनलाइन ट्रेडिंग के माध्‍यम से निवेश कर सकते हैं। इसमें विकल्‍प के तौर पर आप ब्रोकर की भी सहायता ले सकते हैं।

इंटरनेट के इस दौर में सोने चांदी में निवेश करने का यह आसान तरीका आपकी लाइफ को आसान बनाता है। पहले जब लोगों को सोने में निवेश करना होता था, तब वे किसी भी सुनार की दुकान पर जाते थे और वहां से उत्‍पाद खरीदते थे और समय आने पर वहीं या किसी अन्‍य दुकान पर बेच देते थे। यहां पर आपको ऐसा कुछ नहीं करना पड़ेगा।

यह खासकर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो लोग बाजार के उतारचढ़ाव का आंकलन नियमित रूप से नहीं कर पाते हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि भले ही आप बाजार का आंकलन नियमित रूप से कर रहे हों, फिर भी आपको पता नहीं होता कब सोने-चांदी के दाम नीचे जायेंगे। सच पूछिए तो निवेश के लिये ई-गोल्‍ड से बेहतर कोई उपाय नहीं है।

एसआईपी के फायदे
छोटे निवेश: इस माध्‍यम से आप छोटे निवेश आसानी से कर सकते हैं। छोटे-छोटे लेकिन निमित रूप से निवेश करने से आपको बड़े लाभ मिल सकते हैं। देखते ही देखते ये छोटे-छोटे निवेश आगे चलकर आपको अच्‍छी रकम दे सकते हैं। निवेशक ई-निवेश के जरिये आसानी से लाभ कमा सकते हैं। इसमें आपको सोना-चांदी खरीदने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं पड़ती।
नियमित निवेश की आदत: एसआईपी के माध्‍यम से निवेशक की नि‍यमित रूप से निवेश करने की आदत पड़ जाती है, जो आगे चलकर अच्‍छे लाभ देगी।
समय की बाधा नहीं: एसआईपी के माध्‍यम से खरीदने या बेचने के लिए आपको सही समय देखने की जरूरत नहीं। इसमें यह देखने की जरूरत नहीं पड़ती कि निवेश में कितना रिस्‍क है। बाजार को नियमित रूप से ट्रैक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
संपत्ति जुटाने का अच्‍छा तरीका: बचत की आदत पड़ने से इसमें कई गुना लाभ मिल सकते हैं। और लंबे अंतराल में देखें तो आप अच्‍छी संपत्ति खड़ी कर सकते हैं।
प्‍योरिटी की गारंटी: सोने-चांदी में निवेश करते वक्‍त लोगों को हमेशा यह चिंता बनी रहती है कि जो वो खरीद रहे हैं, वो प्‍योर है या नहीं, लेकिन यहां पर आपको 100 फीसदी गारंटी मिलती है।
आसानी से धन निकालना: एसआईपी के माध्‍यम से निवेश करने वाले जरूरत पड़ने पर जब चाहे आसानी से अपना धन निकाल सकते हैं।
तो देर किस बात की है आज ही एसआईपी से जुड़ें। एनएसईएल की सदस्‍यता के लिए लॉग इन http://www.nationalspotexchange.com करें।

इंटरनेट से बनिये धनकुबेर

आज अनेक देशों में लाखों-करोड़ों लोग इंटरनेट से आय प्राप्त कर रहे हैं। इंटरनेट विश्‍व का सबसे बड़ा बाजार है और वहाँ पर संसार भर के देशों में रहने वाले लोग ग्राहक हैं। बहुत से लोग तो हजारों से लाखों डॉलर हर महीने कमा रहे हैं।जब वे लोग इंटरनेट से कमाई कर रहे हैं तो सोचिये आप क्यों नहीं कर सकते! अवश्य ही आप भी कर सकते हैं। जरूरत है तो थोड़ी सी जानकारी की और उसके बाद आपके स्वयं के अनुभव की। आप शायद विश्‍वास नहीं करेंगे पर यह सच है। बहुत ही कम पूँजी लगाकर आप इंटरनेट से आय प्राप्त कर सकते हैं, यहाँ तक कि कुछ ऐसे भी तरीके हैं जिनमें आपको अपने जेब से एक फूटी कौड़ी भी नहीं लगानी पड़ती। मजे की बात तो यह है कि यदि आपका अपना कोई वेबसाइट नहीं है तो भी आप इंटरनेट से पैसे कमा सकते हैं। आइये देखें कि इंटरनेट से आय प्राप्त करने के वे तरीके कौन-कौन से हैं:

आनलाइन सर्वे करके आय प्राप्त करना
एफिलियेट प्रोग्राम से जुड़कर आमदनी करना
गूगल एडसेंस से कमाई करना
ब्लॉग बना कर कमाई करना
अपना वेबसाइट बना कर विज्ञापन तथा स्वयं का लघु-व्यवसाय करके रुपये कमाना
ड्राप शिपिंग से आमदनी प्राप्त करना


उपरोक्‍त तरीके सरल, सुगम और कठिनाइयों से मुक्‍त हैं।
विश्‍वास कीजिये, इंटरनेट के आने से धनोपार्जन सरलतम कार्य बन गया है। पर याद रखिये, इसके लिये आपको द‍ृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की आवश्यकता है। इंटरनेट आपकी सहायता करने के लिये तत्पर है। लक्ष्य की प्राप्ति अवश्यसंभावी है। मेहनत आपकी कभी निरर्थक नहीं होगी। अल्पावधि में ही आपके घर में धन की वर्षा होने लगेगी। समय आ गया है कि आप इसका लाभ उठावें। इंटरनेट में हिंदी के प्रयोग के अभाव के कारण धनोपार्जन का कार्य अब तक मुश्किल था। पर एक खुशखबरी कि बहुत जल्दी वह दिन भी आने वाला है जब हिंदी इंटरनेट पर छा जायेगी। हिंदी को इंटरनेट में प्रचलित करने के लिये गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, सन, याहू, आईबीएम और ओरेकल जैसी ग्लोबल कंपनियाँ भिड़ भी गई हैं। विश्‍वास नहीं हो रहा हो तो यह समाचार पढ़िये - मल्टी नेशनल कंपनियाँ ही करेंगीं हिन्दी की ताजपोशी। इसलिये अंग्रेजी वाली चिंता अब केवल कुछ ही दिनों के लिये है। तो बन जाइये धनकुबेर आनलाइन!

आनलाइन सर्वे
वैसे तो हम सभी किसी न किसी को मुफ्त में ही अपनी राय देते ही रहते हैं किन्तु यदि आपको अपनी राय देने के एवज में उसकी कीमत भी मिले तो फिर क्या बात है! जी हाँ, इंटरनेट में कई ऐसी अॉनलाइन सर्वे कंपनियाँ हैं जो आपको आपकी राय की कीमत देते हैं। इन कंपनियों का मुख्य उद्‍देश्य होता है आपकी राय जानकर अपने उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाना। उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ने से उन कंपनियों का फायदा बढ़ता है और उस फायदे का कुछ हिस्सा वे आपको आपकी राय की कीमत के रूप में देते हैं। इस प्रकार की अधिकांश कंपनियाँ अमेरिका तक ही सीमित हैं किन्तु कई बहुराष्ट्रीय कंपनिया अब हमारे देश भारत में भी सर्वे करवाने लगी हैं। तो आइये, जानें कि वे कंपनियाँ कौन-कौन सी हैं।

हाँ तो ये कंपनियाँ हैं:

अमेरिकन कन्ज्यूमर ओपिनियन American Consumer Opinion (ACOP):
यह कंपनी संसार भर के देशों में सर्वे करवाती है और सर्वे करने वाले अपने सदस्यों को उनके विचार और राय के बदले में उन्हें रकम देती है। इस कंपनी की सदस्यता के लिये किसी भी प्रकार की फीस नहीं देनी होती। आप भी इस कंपनी का सदस्य बन सकते हैं।
ब्रांड इंस्टीट्यूट Brand Institute: मुफ्त सदस्यता वाली यह कंपनी भी संसार भर के देशों के लिये अपने दरवाजे खोल कर रखी हुई है।


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ग्लोबल टेस्ट मारकेट Global Test Market.com: यह कंपनी भी संसार भर के देशों में सर्वे करवाती है तथा अपने सदस्यों को उनकी राय की उचित मूल्य प्रदान करती है। सदस्य बनने के लिये किसी भी प्रकार का खर्च नहीं करना पड़ता।
सी.आई.ए.ओ. सर्वे ciao-surveys: मुफ्त सदस्य बनाने वाली यह कंपनी भी अंतर्राष्ट्रीय रूप से सर्वे करवाती है।
आई-मारकेटिंग इंटरनेशनल iMarketing International: सॉफ्टवेयर विष्लेशन करने वाली इस कंपनी को भी योग्य सदस्यों की आवश्यकता है।
सर्वे सावी Survey Sawy: 190 देशों से बने 3000000 सदस्यों वाली यह कंपनी भी सन् 2000 से सर्वे करवाने में जुटी हुई है।
सर्वे मानिया Survey Mania: यह कंपनी भी आपके मत की उचित कीमत प्रदान करती है।
उपरोक्‍त कंपनियों के अलावा अनेक और भी कंपनियाँ हैं जो कि सर्वे करवा कर उसकी कीमत प्रदान करती है किन्तु सदस्य बनने वालों से कुछ सदस्यता शुल्क लेती हैं। इंटरनेट में Paid Surveys Online, Survey Income System, Brand New Paid Survey Site, Top Online Surveys etc., जैसी अनेक वेबसाइट भी हैं जो कि पैसे देकर सर्वे करवाने वाली सैकड़ों कंपनियों की लिस्ट बनाकर रखी हुई हैं तथा उस लिस्ट को बेचती हैं।
आप भी इस जानकारी का लाभ उठा कर अॉनलाइन सर्वे से रुपया कमा सकते हैं।

एफिलियेट प्रोग्राम

इंटरनेट के किसी व्यापारी के उत्पाद या सेवाओं को बढ़ावा देकर आमदनी प्राप्त करने को एफिलियेट (या एसोसियेट) प्रोग्राम कहते हैं। ऐसा भी समझा जा सकता है कि एफिलियेट बन कर आप किसी इंटरनेट व्यापारी के डिस्ट्रीब्यूटर बन गये। किन्तु एफिलियेट और डिस्ट्रीब्यूटर में बहुत फर्क है। डिस्ट्रीब्यूटर को गोदाम बनाने, सुरक्षा निधि जमा करने, मुख्य व्यापारी द्वारा भेजे गये माल के रख-रखाव आदि में बहुत बड़ी पूंजी फँसाना पड़ता है किन्तु इंटरनेट में आपको इस प्रकार का कोई झंझट मोल नहीं लेना पड़ता। इंटरनेट में तो केवल आपको संभावी ग्राहक को व्यापारी के वेबसाइट में भेजना होता है। फिर यदि संभावी ग्राहक सामान खरीद कर वास्तविक ग्राहक बन जाता है तो आपका कमीशन पक्का हो गया।


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एफिलियेट प्रोग्राम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कोई दूसरा व्यक्‍ति उत्पादन करता है, उसे बेचने के लिये वेबसाइट बनाता है, आपको विज्ञापन सामग्री स्वयं प्रदान करता है, ग्राहक से लेन-देन भी स्वयं करता है और असंतुष्ट ग्राहक को समझाना या उसका पैसा वापस करना आदि भी उसी का सरदर्द होता है। आपका ग्राहक से किसी प्रकार से भी सीधा सम्बंध नहीं होता, यहाँ तक कि ग्राहक आपको जानता तक नहीं। इसके बाद भी आपको आपका कमीशन मिलते रहता है।

एफिलियेट प्रोग्राम का आरम्भ सबसे पहले अमेजान डाट काम (amazon.com) ने एसोसियेट प्रोग्राम के नाम से सन् 1996 में किया था। उसकी सफलता से प्रभावित होकर बाद में कमीशन जंक्शन (commission junction), क्लिक बैंक (Click Bank), 5 पिलार (5 Pillar), जेन फिट (Gen Fit), मारकेटिंग टिप्स (Marketing Tips), माई मारकेटिंग सेंटर (My Marketing Center) आदि अनेक वेबसाइटों ने भी अपना एफिलियेट कार्यक्रम शुरू कर दिया। आज तो इंटरनेट के प्रायः सभी व्यापारी का अपना एफिलियेट कार्यक्रम हो गया है।

एक बार किसी इंटरनेट व्यापारी के एफिलियेट बन जाने के बाद आपको उसके उत्पाद तथा वेबसाइट का प्रचार-प्रसार ही करना होता है। प्रचार-प्रसार कैसे करना है उसका प्रभावी तरीका भी वे स्वंय आपको सुझाते हैं तथा उसके लिये वे समस्त सामग्री भी वे ही आपको मुफ्त में प्रदान करते हैं।

किन्तु आपको हमेशा ये बात ध्यान में रखना होगा कि केवल एफिलियेट बन जाने से आमदनी होना शुरू नहीं हो जाता, इसके लिये कठिन परिश्रम करना पड़ता है। बिना परिश्रम किये किसी प्रकार की आमदनी हो ही नहीं सकती।

रजिस्ट्रेशन कराने के लिये इस बटन को क्लिक करें - गूगल एडसेंस

चिट्ठों से आय

इंटरनेट से आमदनी करने का एक तरीका चिट्ठा बनाना भी है, जिसे कि अंग्रजी में Blog कहा जाता है। चिट्ठों की अवधारणा कुछ ही वर्षों पहले शुरू हुई किन्तु पिछले दो-तीन वर्षों में इसे बहुत अधिक लोकप्रियता मिली है। इंटरनेट के अनेक व्यवसायियों ने अपने हिसाब से चिट्ठे की अनेक अलग अलग परिभाषा दी है किन्तु संक्षेप यह कहा जा सकता है कि चिट्ठा किसी व्यक्‍ति के द्वारा लिखी गई दैनन्दिनी होता हैं जिसमें वह इंटरनेट में जो कुछ भी चल रहा है उसे अपने निजी विचारों के साथ जोड़कर लिखता है।


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यदि इंटरनेट से अधिक से अधिक आय प्राप्त करने के लिये सर्च इंजिनों में आप अपने वेबसाइट को बेहतर स्थान देना चाहते हैं तो आपको अवश्य ही अपना एक चिट्ठा शुरू करना चाहिये क्योंकि सर्च इंजिनों में शीघ्रातिशीघ्र उच्च स्थान पाने का चिट्ठा ही एक तरीका है। और यह तो आप जानते ही हैं कि इंटरनेट से अधिकतम आय प्राप्त करने का एकमात्र साधन आपका वेबसाइट ही है।

अपना चिट्ठा शुरू कैसे करें: इंटरनेट में ऐसे अनेक वेबसाइट हैं जो कि आपको आपके चिट्ठे के लिये मुफ्त में होस्टिंग देते हैं। इनमें सर्वाधिक लोकप्रिय है ब्लॉगर.कॉम (blogger.com). चूँकि यह गूगल की ही वेबसाइट है, इसलिये आपको एडसेंस विज्ञापनों को प्रकाशित करने की सुविधा भी देती है। आप अपने चिट्ठे में अपना एफिलियेट लिंक भी दे सकते हैं और अपने एफिलियेट उत्पाद पर रिव्हियु भी लिख सकते हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिये आपको एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, बिल्कुल मुफ्त है ये। इसलिये तत्काल अपना चिट्ठा बनाना आरम्भ कर दीजिये।

याहू, एमएसएन, रेडिफ जैसे सभी बड़े पोर्टल भी आपको आपके चिट्ठों के लिये मुफ्त स्थान देती हैं, किन्तु इनमें एडसेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

अंत में एक महत्वपूर्ण बात और। यदि आप हिंदी में अपना ब्लॉग बनाते हैं तो आमदनी बहुत कम हो सकती है या आमदनी शुरू होने में देर भी हो सकती है क्योंकि सर्च इंजिन फिलहाल हिंदी को सपोर्ट नहीं करते। किन्तु निराश होने की कोई बात नहीं है, हिंदी के सपोर्ट के लिये बहुत तेजी से काम चल रहा है और निकट भविष्य में अवश्य ही आय प्राप्त होना आरम्भ हो जायेगा।

सारांशः

चिट्ठा किसी व्यक्‍ति के द्वारा लिखी गई दैनन्दिनी होता हैं जिसमें वह इंटरनेट में जो कुछ भी चल रहा है उसे अपने निजी विचारों के साथ जोड़कर लिखता है।
सर्च इंजिनों में आप अपने वेबसाइट को बेहतर स्थान देने के लिये तत्काल अपना एक चिट्ठा शुरू दीजिये।
ब्लॉगर.कॉम (blogger.com). चूँकि यह गूगल की ही वेबसाइट है, इसलिये आपको एडसेंस विज्ञापनों को प्रकाशित करने की सुविधा भी देती है।
याहू, एमएसएन, रेडिफ जैसे सभी बड़े पोर्टल भी आपको आपके चिट्ठों के लिये मुफ्त स्थान देती हैं।

AndyWibbels.com Blogs
Business Blog Basics
How to Use Google Reader
Podcasting Bootcamp
GoBlogwild.com
The Big Deal About Podcasting
RSS Essentials
Six Figure Blogging

आइये अपना वेबसाइट बनायें

इंटरनेट से अच्छी-खासी आमदनी करने का सबसे अच्छा और महत्वपूर्ण तरीका है स्वयं का वेबसाइट बनाना। अपना वेबसाइट बनाने के लिये आपको लागत अवश्य ही लगानी पड़ती है किंतु यह तो सर्वविदित सत्य है कि व्यवसाय में लागत लगा कर ही मुनाफा प्राप्त किया जाता है।

यदि आप समझते हैं कि आप एचटीएमएल के ज्ञान के अभाव के कारण अपना वेबसाइट नहीं बना सकते तो यह आपकी भूल है। वास्तव में एचटीएमएल सीखना बहुत सरल है, अनेक ऐसे वेबसाइट उपलब्ध हैं जो मुफ्त में एचटीएमएल के ट्यूटोरियल्स देते हैं। अनेक ऐसे वेबसाइट बिल्डर्स भी बन गये हैं जो आपकी साधारण भाषा को एचटीएमएल में परिवर्तित कर देते हैं। प्राय सभी होस्टिंग कंपनी वेबसाइट बिल्डर प्रदान करते हैं। ब्लयू होडा कंपनी तो मुफ्त में इतना अच्छा वेबसाइट बिल्डर देती है कि एक बच्चा भी अपना वेबसाइट बना ले।

अपना एक वेब साइट (या ई-कामर्स साइट) - जिसके द्वारा आप पैसा कमा सकें - बनाने के लिये आपको कोई विशेष कारीगरी जानने की आवश्कता नहीं है। केवल आपको निम्न चीजें सीखनी होगीः

एक 'डोमेन नाम' कैसे रजिस्टर करें।
उस 'डोमेन नाम' को 'होस्ट' कैसे करें।
फटाफट अपने वेबसाइट के लिये उत्तम जानकारियों से युक्‍त लेख लिख डालें।


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डोमेन नाम रजिस्टर करनाः वेबसाइट के नाम को डोमेन नाम कहा जाता है और उसे रजिस्टर करवाना पड़ता है। सबसे पहले तो आप अपने वेबसाइट के लिये अपने वेबसाइट के विषय-वस्तु से मेल रखने वाला एक अच्छा सा डोमेन नाम सोचिये। जैसे कि यदि आपका वेबसाइट 'इंटरनेट से आय' से सम्बंधित है तो आप उसका डोमेन नाम 'मेकमनीआनलाइन' रखें। अब आप इस डोमेन नाम को रजिस्टर्ड करवा लीजिये। प्रायः सभी होस्टिंग कंपनियाँ भी डोमेन नाम के रजिस्ट्रेशन का काम करती है।

डोमेन को होस्ट करनाः अब आपको किसी अच्छी और प्रतिष्ठित होस्टिंग कम्पनी से अपने वेबसाइट के लिये स्थान लेना होगा। होस्टिंग कंपनी आपको सीपेनल (cpanel) की सुविधा प्रदान करती हैं जिसकी सहायता से आप आसानी के साथ अपने वेबसाइट को इंटरनेट में पहुँचा सकते हैं।

कुछ अच्छी और प्रतिष्ठित होस्टिंग कम्पनी के नाम नीचे दिये जा रहे हैं।

Host Gator
BlueVoda
Ixwebhosting
Aplus.net
Fluxservices.com

अपने वेबसाइट के फायदेः

अपने वेबसाइट के द्वारा आप अपना अथवा किसी अन्य का उत्पाद बेच सकते हैं।
अपने वेबसाइट के द्वारा आप दूसरों को सूचनायें भेज सकते हैं।
अपने वेबसाइट के द्वारा आप किसी भी संस्थान तथा उसके लक्ष्य का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।
अपने वेबसाइट के द्वारा आप समान विचार के लोगों के समूह का निर्माण कर उसे बढ़ावा दे सकते हैं।
अपने वेबसाइट के द्वारा आप स्वयं अपने विचार, अपने लेख, अपनी कलाकृति एवं अपने छायाचित्रों का अन्य लोगों को हिस्सेदार बना सकते हैं।
और सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात है कि अपने वेबसाइट के द्वारा आप इंटरनेट में व्यवसाय करके रकम कमा सकते हैं।


30 साल बाद पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे सुरजीत





बैंगलोर। 30 साल से पाकिस्‍तान के कोट लखपत जेल में कैद सुरजीत सिंह आज अपने वतन लौट आये। बाघा बार्डर पार कर सुरजीत ने जैसे ही भारतीय सरजमीं पर पैर रखा वह गममीन हो गये। उनके परिवार वालों ने भारत आने पर उनका स्‍वागत किया। सूत्रों की मानें तो अब यहां से सुरजीत सिंह स्‍वर्ण मंदिर जायेंगे और मथ्‍था टेकेंगे।

मीडिया से बातचीत करते हुए सुरजीत सिंह ने कहा कि अब वह कभी भी पाकिस्‍तान नहीं आयेंगे। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान की जेल में उन्‍हें किसी भी तरह की त‍कलीफ नहीं थी। सुरजीत ने कहा कि दोनों देशों के कैदियों को आजाद करना चाहिए क्‍योंकि मुल्‍क से दूर होने के बाद का गम असहनीय होता है। सुरजीत सिंह ने कहा कि वह जेल में अक्‍सर सरबजीत सिंह से मिला करते थे। सुरतीज सिंह ने कहा कि सरबजीत जेल में बिल्‍कुल ठीक है।

सुरतीज से जुडी पल-पल की खबरें जानने के लिये इस पेज को रिफ्रेश करते रहें।

- भारतीय कैदी सुरजीत सिंह को भले ही गुरुवार सुबह पाकिस्तानी जेल से रिहाई मिल गई हो लेकिन जब वह वाघा सीमा पर पहुंचे तो उनके हाथों में हथकड़ी थी। उनकी हथकड़ी लोहे की एक जंजीर के जरिए पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी के बेल्ट से जुड़ी हुई थी।

- सुरजीत सिंह ने नम आंखों से कहा कि वह‍ सबसे पहले अपने बच्‍चे को गला लगाना चाहते हैं। वहीं पाकिस्‍तान पर लग रहे गफलती के आरोप पर भी से भी सुरजीत ने पर्दा उठाया। सुरजीत सिंह ने कहा कि उर्दू में सुरजीत और सरबजीत को लिखावट में बहुत समानता है। तो हो सकता है इसमें कोई गलतफहमी हो गई हो।

सुरजीत के परिवार ने बताया कि 30 साल पहले एक दिन वह टहलने निकले और फिर वापस नहीं आए। परिवार वालों को ऐसा लगा कि उनके साथ कोई अनहोनी हो गयी है, वह इस दुनिया में नहीं रहे। वर्ष 2005 में पाकिस्‍तान जेल में एक भारतीय कैदी छूटकर आया।

उसने सुरजीत के परिवार वालों को उसके जेल में होने की सूचना दी गयी। वहीं दूसरी तरफ सुरजीत सिंह के वकील अवैस शेख ने संवाददाताओं से कहा कि भारतीय नागरिक को सैन्य शासक जिया उल हक के शासन के दौरान जासूसी के आरोपों में पाकिस्तानी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1985 में पाकिस्तान सेना कानून के तहत सिंह को मृत्युदंड दिया गया था लेकिन वर्ष 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

ऑन लाइन होंगे देश के सभी थाने



रोहतक। देश भर के सभी पुलिस थानों को केंद्रियकृत करने के लिए उन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। इस योजना को लेकर पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में सीसीटीएनएस को लेकर पुलिस महानिरीक्षक ने एचपी कंपनी के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में ऑन लाइन किए जा रहे देशभर के थानों को लेकर विचार विमर्श हुआ। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश का अलग से सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। पुलिस महानिरीक्षक आलोक मित्तल का कहना है कि सभी थानों के ऑन लाइन होने से तालमेल बढ़ेगा, जिससे अपराधों पर अंकुश लगेंगा। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में क्राइम कंट्रोल ट्रेकिंग नेटवर्क को लेकर एचपी कंपनी के विशेषज्ञ प्रोग्राम मैनेजर सचिन पाटिल, नीतिन अरोडा, निशिन व अशोक के साथ पुलिस महानिरीक्षक ने बैठक की। बैठक में नेटवर्किंग को लेकर कंपनी द्वारा किए जा रहे कार्यों को अधिकारियों ने आईजी को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि अलग से प्रदेश का सॉ टवेयर तैयार किया जा रहा है। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि देश के सभी थानों को ऑन लाइन कर उन्हें आपस में जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में इसका कार्य एचपी कंपनी को सौंपा गया है। थानों के आपस में जुडऩे से अपराधों में कमी आएगी और आपसी तालमेल भी बढ़ेगा।

देवर ने भाभी की बनाई ब्‍लू फिल्‍म

ब्‍लैकमेल कर मांगा 5 लाख
दिल्‍ली।
राजधानी दिल्‍ली में देवर और भाभी का रिश्‍ता कलंकित हो गया। यहां एक देवर ने अपनी ही भाभी की ब्‍लू फिल्‍म बना ली और उसे सार्वजनिक करने के धमकी देते हुए बड़े भाई से 5 लाख रुपये की मांग करने लगा। छोटे भाई के इस करतूत से शर्मशार भाई ने दिल्‍ली के डाबरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। आरोपी भाई की तलाश की जा रही है।


सूत्रों की मानें तो डाबरी इलाके के सीतीपुरी में बिजनेसमैन श्‍याम (बदला हुआ नाम) अपनी पत्‍नी संग रहते हैं। जबकि इनका छोटा भाई पिछले पंद्रह साल से पश्चिम विहार में परिवार के साथ रहता है। छोटे भाई का घर पर आना जाना था। बड़े भाई श्‍याम कुमार की गैरमौजूदगी में भी सुमित घर पर अधिकांश समय बिताता था। बताया जाता है कि छोटे भाई ने अपनी लच्छेदार बातों में फंसाकर भाभी को नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाई और शारीरिक संबंध बना लिए। इतना ही नहीं उसने उन अंतरंग पलो की वीडियो फिल्‍म भी बना ली। छोटे भाई की करतूत के बारे में आलोक को कानों कान खबर नहीं लगी।

मामला उस वक्त सामने आया जब आरोपी भाई पिछले एक महीने से श्‍याम से पांच लाख रुपए की डिमांड करने लगा। जब रुपए देने से मना किया तो आरोपी भाई ने ब्लैकमेल करते हुए खुलासा किया कि भाभी की न्यूड पिक्चर की सीडी उसके पास है जिसे वह सार्वजनिक कर देगा। पहले तो श्‍याम ने इस बात को नजरअंदाज करते हुए छोटा भाई का हथकंडा समझा। लेकिन पत्‍नी से पूछताछ करने पर मालूम चला कि देवर ने नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर उसका एमएमएस बनाया है। जिसको दिखाकर वह कई बार भाभी को भी ब्लैकमेल कर चुका है।

छोटे भाई की इस हरकत से दुखी श्‍याम ने परेशान होकर डाबरी थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने शुरुआती जांच पड़ताल के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है। श्‍याम का आरोप है कि 11 साल पहले भी उसके छोटे भाई ने उससे पांच लाख रुपए ऐंठ चुका है और अब पिछले एक महीने से एमएसएस के बहाने उन्हें ब्लैकमेल कर पांच लाख रुपए की लगातार डिमांड कर रहा है।

सैनडिस्क का 128 जीबी का पैन ड्राइव भारत में




अमेरिका की सैनडिस्क कॉर्पोरेशन ने विश्व स्तर पर 128 जीबी की ज़बर्दस्त क्षमता का पैन ड्राइव भारतीय बाजार में जारी किया.सैनडिस्क की भारत और दक्षिण एशियाई कारोबार की प्रमुख मनीषा सूद ने बताया कि दुनियाभर में यूएसबी और पैन ड्राइव का इस्तेमाल युवा सर्वाधिक करते हैं. भारत में युवाओं की आबादी 25 करोड़ से लकर 40 करोड के बीच है. कंपनी ने इनकी ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनडिस्क की नयी श्रंखला पहली बार भारत में वैश्विक स्तर पर जारी की है. अगले तीन महीनें में यह पूरे भारत में उपलबध हो जाएगी.उन्होंने बताया कि भारत के साथ साथ विश्वभर में स्मार्टफोन का बाजार बढ़ रहा है और इससे मेमारी कार्ड और पैनड्राइव की मांग में भी इजाफा हो रहा है.सूद ने कहा कि वर्ष 2011 में यूएसबी का वैश्विक बाजार सात करोड़ डॉलर रहा था जिसके वर्ष 2014 में एक अरब डॉलर हो जाने की संभावना है. एशिया प्रशांत कारोबार के प्रमुख गाविन वू ने बताया कि सैनडिस्क का 128 जीबी का पैन ड्राइव सबसे तेज. सबसे पतला और सबसे अधिक भंडारण क्षमता वाला है. उन्होंने बताया कि इस पैन ड्राइव से तीन जीबी की फाइल 20 सैकंड और 40 जीबी की फाइल चार मिनट में आदान प्रदान की जा सकती है. उन्होंने बताया कि कंपनी का कारोबार तेजी से बढ रहा है. दुनिया में कंपनी की दो लाख 50 हजार दुकानें हैं. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश है और कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण बाजार है.

चौंतीस उंगली वाला बच्चा!



34 उंगली वाले अक्षत ने जब जन्म लिया तब उसके माता-पिता डर गए थे. उन्होंने सोचा कि आखिर उनका क्या कसूर था कि भगवान ने उनके आंगन में किलकारियों की गूंज दी तो लेकिन इस अंदाज में. इस अद्भूत बच्चे को जन्म देने के बाद मानों देश भर के लोगों का देखने के लिए तांता लग गया अब एम्स के वैज्ञानिकों ने शल्य चिकित्सा क्षेत्र में नया अध्याय जोड़ दिया है. 34 उंगली वाले अक्षत को 20 उंगली वाला बनाने की मैराथन सर्जरी शुक्रवार को सायं चार बजे संपन्न हुई. एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि हम सफलता से सिर्फ एक कदम दूर है. बच्चे की तीन सर्जरी पहले की जा चुकी हैं शुक्रवार को अंतिम सर्जरी भी सफलतापूर्वक संपन्न हुई. उन्हें पांच-पांच उंगली का बनाया गया.सर्जरी से दोनों पैरों की अतिरिक्त पांच-पांच उंगलियां निकाल दी गई और किनारे की उंगली को अंगूठे जैसी शक्ल देने की जरूरत थी जिसका लंबे विचार विमर्श के बाद शुक्रवार को ऑपरेशन कर दिया गया. सर्जरी के दौरान हाथ की दोनों अतिरिक्त उंगलियों को काट कर हटाया गया और एक उंगली को अंगूठे की शक्ल दी गई. उंगली को अंगूठे की शक्ल देना और वैसे रक्तप्रभाव वाली नस से जोड़ना मुख्य चुनौती रहा. एक्सपर्ट्स टीम का मानना है कि यह काफी दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरियां रहीं. सर्जरी टीम से जुड़े डॉक्टरों ने दावा किया कि इससे पहले चीन में एक मामला आया था जिसमें 31 उंगलियां थी. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज अक्षत की सर्जरी करने वाले अस्थि शल्यक्रिया विभाग के प्रमुख डॉ. पीपी कोतवाल ने कहा कि यह एक चैलेंजिंग सर्जरी रही. दरअसल बच्चे का शरीर क्षमता से छोटा था उसकी उंगलियां 1 एमएम से 2 एमएम तक रहीं. जिन्हें सावधानीपूर्वक सर्जरी करने के लिए माइक्रो सर्जरी तकनीक का प्रयोग किया गया. इस बीमारी को मेडिकल टर्म में ‘पालीडैक्टली’ कहते हैं. इसके तहत टेड़े-मेढ़े एक से ज्यादा अंगों का आना, दो से अधिक कान का आकार होना उंगलियों की जरूरत से ज्यादा प्रजनन आदि विकृतियां होती हैं. प्रति दस लाख बच्चों में से एक बच्चे में यह विकृति पाई जाती है. इनकी तीन कैटेगरी हैं पहली कैटेगरी में हाथों में पांच से अधिक उंगलियों का उगना. दूसरे चरण में हाथ पैर में 20 से 24 उंगलियां होना. तीसरे चरण में इनसे कही ज्यादा उंगलियों का उगना है. अक्षत को अत्यंत गंभीरावस्था वाली पॉलीडैक्टली बीमारी है. जिसका समय रहते लगभग पूरा निदान कर दिया गया है. अब वह सामान्य जीवन जीने लायक बन सकेगा. यह मां को गर्भ के दौरान किसी प्रकार की समस्या, रेडिएशन, दवा का रिएक्शन आदि इसके कारण हो सकते हैं.

एम्स के डॉक्टर हैं भगवान
उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले अक्षत के पिता मनोज व मां अमृता का कहना है कि जब उसने जन्म लिया तब वे डर गए थे कि आखिर उनका क्या कसूर था कि भगवान ने उनके आंगन में किलकारियों की गूंज दी तो लेकिन इस अंदाज में. इस अद्भूत बच्चे को जन्म देने के बाद मानों देश भर के लोगों का देखने के लिए तांता लग गया. पहले उसे मेरठ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. वहां के डॉक्टरों ने 15 जून 2011 को उसे एम्स रेफर कर दिया था. तब से उसका यहां पर इलाज चल रहा है. अमृता ने कहा कि यहां के डॉक्टर भगवान हैं. इसी उम्मीद से हम अपनी इस नन्ही-सी जान को लेकर यहां आए थे. पहले इलाज शुरू होने में जरूर कुछ दिक्कतें आई, लेकिन जब से डॉ कोतवाल की यूनिट में उसे रेफर किया गया तब से उन्होंने स्वयं इस बच्चे को जीवन देने में दिलचस्पी ली. उन्होंने कहा कि जब बच्चा गर्भ में था तब हमें उसके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए अल्ट्रासाउंड कराया था. उसमें भी उसकी उंगलियों में होने वाले इस विकार का पता नहीं चल सका.

बॉलीवुड अपडेट



अब तो शादी कर ही लो

यशराज के साथ पहली बार काम करने वाले अभिनेता सलमान खान की फिल्म एक था टाइगर का प्रोमो आज यू-ट्यूब पर दोपहर में प्रदर्शित किया गया है।
प्रोमो रिलीज होने के साथ ही हिट हो गया है। बॉलीवुड के साथ-साथ आम दर्शक भी इस प्रोमो को देखकर खुश हुआ है। इससे फिल्म के प्रति उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस प्रोमो में कैटरीना कैफ सलमान खान को शादी करने की सलाह देती नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए। उम्मीद से ज्यादा इसे दर्शकों ने देखा है। पिछले एक सप्ताह से इस बात को प्रचारित किया जा रहा था, यह सिनेमा प्रचार का नया तंत्र है। बॉलीवुड दबंग एक्टर सलमान खान और एक्ट्रेस कैटरीना कैफ की रोमांटिक थ्रिलर फिल्म एक था टाइगर स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को रिलीज होगी। वहीं सिनेमाघरों में 29 जून से इसके ट्रेलर को दिखाया जाएगा। कबीर खान द्वारा निर्देशित और आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्मित इस फिल्म में सलमान और कैटरीना कैफ पांच साल बाद एक बार फिर से परदे पर नजर आएंगे। इससे पहले दोनों फिल्म युवराज में साथ नजर आए थे।

24 घंटे का काम
हाल ही में मां बनीं बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी मातृत्व के बारे में धीरे-धीरे सीख रही हैं। शिल्पा ने ट्विटर के जरिए बताया कि वह अपने बेटे वियान की वजह से काफी व्यस्त रहती हैं और इसलिए सो नहीं पातीं। शिल्पा ने ट्विटर पर लिखा, मेरे ट्विटर के मित्रों, मैं जानती हूं कि मैं ट्विटर को लेकर आलसी रही हूं। बेटा मुझे व्यस्त रखता है। पता नहीं समय कैसे बीत जाता है। बिना सोए मैं बिल्कुल शराबी जैसी नजर आती हूं, लेकिन वियान बेहद खुश है। उन्होंने लिखा, मां बनने का मतलब चौबीस घंटे का काम है। बच्चे को अपने 25 घंटे दो या फिर मां मत बनो। यह बहुत अद्भुत बात है कि हमारी माताओं ने हमें बिना किसी मदद के पाला। उन्होंने हर उस महिला की तारीफ की जो अपने बच्चों को अकेले पालती हैं। शिल्पा ने ट्विटर पर लिखा, मैं खुश हूं कि मेरे पास आराम करने के लिए समय है, लेकिन मैं उन औरतों को सलाम करती हूं, जो बच्चों को पालने के साथ-साथ कई काम करती हैं। ओह!

बहुत कुछ सीखना है
बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन का कहना है कि लोगों ने उन्हें उनकी क्षमता से बहुत ज्यादा श्रेय दिया है। अपने 12 वर्षों के अभिनय कैरियर को याद करते हुए जूनियर बी ने कहा कि अभी उन्हें बहुत कुछ सीखना है। अभिषेक ने बताया, मैं सोचता हूं कि लोग समझते हैं कि मैं बहुत बढिय़ा अभिनेता हूं। मेरे विचार से मुझे भी बहुत कुछ सीखना और सुधार करना है। लोग मेरे लिए बहुत उदार हैं। उन्होंने कहा, मैं स्वयं को लेकर बहुत कठोर हूं। एक अभिनेता हमेशा अपना सबसे बड़ा आलोचक होता है। मैं समझता हूं कि मुझे बहुत कुछ मिल चुका है। मेरा वास्तव में मानना है कि मुझे अभी बहुत कुछ करना है और सीखना है। उन्होंने अपने बॉलीवुड कैरियर की शुरुआत वर्ष 2000 में आई जे.पी. दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी से की थी। इसके बाद उन्होंने अपने उतार-चढ़ाव भरे कैरियर में युवा, गुरु, बंटी, बबली और सरकार जैसी कई हिट फिल्में दीं। अभिषेक (36) का कहना है कि वह कोई भी नई भूमिका चुनते वक्त केवल एक ही मापदंड अपनाते हैं। भले ही कोई बड़ा निर्देशक हो या फिर बहुत अच्छी पटकथा मिले, लेकिन मेरा दिल इस फिल्म के साथ नहीं है तो मैं उसे नहीं करूंगा। वह अपनी फिल्म बोल बच्चन के प्रदर्शित होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिल्म 6 जुलाई को प्रदर्शित होगी।

'जूनियर प्रीति जिंटाÓ
अभिनेत्री प्रीति जिंटा को आखिरकार एक कम उम्र की लड़की के रूप में अपना जूनियर संस्करण मिल ही गया। दरअसल यह लड़की उनके बैनर तले बन रही पहली फिल्म इश्क इन पेरिस में उनके बचपन की भूमिका निभाएगी। प्रीति ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, इश्क इन पेरिस में मेरे बचपन के किरदार के लिए अपने बच्चों की तस्वीरें भेजने के लिए आप सभी का धन्यवाद। प्रीति (37) ने बीते माह चार से सात वर्ष की ऐसी लड़की खोजने के लिए ट्विटर का सहारा लिया था, जिसके दाहिने गाल पर एक डिम्पल हो और वह फिल्म में उनके किरदार के बचपन को निभा सके। वैसे अभिनेत्री अपनी इस कोशिश में कामयाब हो ही गई। प्रेम सोनी निर्देशित इश्क इन पेरिस में अर्जुन रामपाल भी नजर आएंगे।

शादी के बंधन में बंधे दिव्येंदु
फिल्म प्यार का पंचनामा में अपने लिक्विड के किरदार के लिए मशहूर अभिनेता दिव्येंदु शर्मा शादी के बंधन में बंध गए हैं। दिव्येंदु के मित्र और अभिनेता सिद्धार्थ ने अपने ट्विटर अकाउंट पर यह जानकारी दी। सिद्धार्थ ने लिखा, 'प्रतिभाशाली दिव्येंदु को शादीशुदा जीवन की बधाई, वह अच्छे कलाकार और शानदार मित्र हैं।Ó डेविड धवन की आने वाली फिल्म में दिव्येंदु और सिद्धार्थ एक साथ काम कर रहे हैं। यह फिल्म वर्ष 1981 में प्रदर्शित चश्मे बद्दूर का रीमेक है। पाकिस्तानी अभिनेता-गायक अली जाफर भी इस फिल्म का हिस्सा हैं।

चोटिल हुए उदय चोपड़ा
फिल्म धूम में तेज रफ्तार से मोटरसाइकिल चलाते नजर आने वाले अभिनेता उदय चोपड़ा असल जिंदगी में मोटरसाइकिल से गिरकर चोटिल हो गए हैं। उदय (39) ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, मेरा मोटसाइकिल चलाना मनहूस रहा। मोटरसाइकिल से गिरने के कारण मेरा पैर मुड़ गया। अब मैं चल नहीं पा रहा हूं। इन दिनों वह यश राज फिल्म्स का हॉलीवुड विंग-वाईआरएफ इंटरटेनमेंट संभालने में व्यस्त हैं। यह विंग अमेरिका और अन्य अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए फिल्मों का निर्माण करता है।


बच्चे नहीं देख सकेंगे
बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर अपनी आने वाली फिल्म क्या पुर कूल हैं हम को लेकर काफी उत्साहित हैं। तुषार का कहना है कि क्या सुपर कूल हैं हम केवल वयस्कों के लिए है। इस फिल्म से बच्चों को दूर रखें। एकता कपूर द्वारा निर्मित यह वयस्क कॉमेडी फिल्म है। 2005 में आई फिल्म क्या कूल हैं हम का सीक्वल है। 27 जुलाई को रिलीज होने वाली इस फिल्म में तुषार के अलावा रीतेश देशमुख, नेहा शर्मा और सारा जेन डायस नजर आएंगे। तुषार ने कहा कि बच्चे यह फिल्म नहीं देख सकते हैं। यदि इस फिल्म को ए प्रमाणपत्र भी मिलता है तो बच्चे भी देख सकते हैं, पर इसके प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पर्दे पर नहीं देखना चाहते
फिल्मकार शेखर कपूर ने 'इश्क इश्क इश्कÓ (1974), 'जान हाजिर हैÓ (1975) और 'गवाहीÓ (1989) में अभिनेता के तौर पर काम किया। फिल्मों में भले ही कई कलाकारों को उनके सर्वश्रेष्ठ अवतार में दिखाया है, लेकिन इसके बावजूद वह पर्दे पर खुद को देखना पसंद नहीं करते। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ''लोग मुझे कहते रहते हैं कि 'दृष्टिÓ बहुत शानदार फिल्म थी। दरअसल मैंने फिल्म पूरी होने के बाद कभी नहीं देखी। मुझे पर्दे पर खुद को देखना पसंद नहीं था और अब भी नहीं है।ÓÓ वह तमिल-हिंदी में बन रही जासूसी फिल्म 'विश्वरूपमÓ में भी विशेष उपस्थिति दर्ज कराएंगे। फिल्म का निर्देशन और लेखन कमल हसन ने किया है। वैसे वर्ष 1989 में कविता चौधरी के हिट धारावाहिक 'उड़ानÓ में भी दर्शकों ने शेखर के काम को खासा पसंद किया था।

दौड़ में महाश्वेता
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता महाश्वेता देवी की कई कहानियों को अब तक यादगार फिल्मों की शक्ल दी जा चुकी है, लेकिन इस बार वह पर्दे पर आ रही अपनी कहानी में खुद एक किरदार अदा करेंगी। फिल्म 'उल्लासÓ में तीन कहानियां होंगी, जिनमें 'दौड़Ó शीर्षक वाले हिस्से में आदिवासियों के अधिकारों के लिए कार्य करने वाली लेखिका ने काम किया है। 86 वर्षीय लेखिका ने मीडिया से बातचीत में खुद यह जानकारी दी। इस मौके पर फिल्म की कुछ क्लिप भी दिखाई गई। फिल्म आदिवासियों के शोषण पर आधारित है। महाश्वेता देवी ने कहा, 'मैं किसी अहम कलाकार के साथ नहीं दिखाई दूंगी। लेकिन पहली बार मैं कैमरे के सामने आ रही हूं।Ó 'दौड़Ó की कहानी पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा के दौरान एक आदिवासी की मौत के इर्द-गिर्द घूमती है। यह कहानी हाल ही में घटी उस घटना से मिलती है, जिसमें कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल के लिए शारीरिक परीक्षण में शामिल हो रहे दो युवकों की चिलचिलाती धूप में मौत हो गई थी। फिल्म के निर्देशक ईश्वर चक्रवर्ती ने इसका संदर्भ लेते हुए कहा कि महाश्वेता देवी कितनी आगे की सोच सकती हैं। पद्म विभूषण सम्मान से नवाजी जा चुकीं महाश्वेता देवी ने कहा कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है और केवल कहानियां लिखी हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने अभी फिल्म नहीं देखी है। केवल कहानियां लिखी हैं और शूटिंग के दौरान निर्देशक की बातों पर ध्यान दिया। मैं इसके बारे में फैसला दर्शकों पर छोड़ती हूं।Ó

टीवी पर दिखाई जाएंगी ए फिल्में
सेंसर बोर्ड की रिवाइज्ड कमेटी ने फैसला लिया है कि ए सर्टिफिकेट के साथ रिलीज होने वाली फिल्मों को टीवी पर टेलिकास्ट करने के लिए यूए सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जिन फिल्मों को ये सर्टिफिकेट दिया जाएगा, वे टीवी पर केवल रात के 11 बजे के बाद ही दिखाई जाएंगी। 11 बजे के बाद का टाइम रखने के पीछे कहा जा रहा है कि इस समय तक 12 से कम उम्र के ज्यादातर बच्चे सो चुके होते हैं या फिर उनके माता-पिता घर पर उन्हें गाइड करने को मौजूद होते हैं। मई में रिलीज हुई जन्नत 2 को सरकार ने पहले ए सर्टिफिकेट दिया था। बाद में इसके कुछ सीन्स काट कर इसे यूए सर्टिफिकेट दे दिया ताकि यह टीवी पर दिखाई जा सके। जन्नत 2 के प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट ने कहा है कि वह सेंसर बोर्ड की इन शर्तों को नहीं मानने वाले हैं। जन्नत 2 दूसरी बॉलीवुड फिल्म होगी, जिसे एडल्ट टाइम स्लॉट में रखा गया है। अप्रैल में विद्या बालन की द डर्टी पिक्चर को लेकर भी ऐसा ही फैसला लिया गया था, लेकिन टेलिकास्ट टाइम को लेकर काफी हो-हल्ला मचा और ऐन मोमेंट पर इसका टेलिकास्ट टाल दिया गया। शुरुआत में यह तय था कि इसका टेलिकास्ट रात 9 बजे होना है, लेकिन बाद में इसे रात 11 बजे दिखाए जाने की बात की जाने लगी। इस हो-हल्ले पर सरकार ने कहा था कि यह अपनी तरह का इकलौता मामला है। सेंसर बोर्ड के ही एक सूत्र ने बताया कि कुछ फिल्में कांट-छांट हो जाने और सर्टिफिकेट जारी करने के बाद भी एडल्ट ही रहती हैं और उनका कॉन्टेंट ऐसा होता है, जो बच्चों को नहीं दिखाया जाना चाहिए।





राष्ट्रपति चुनाव: प्रणब और संगमा ने भरा नामांकन



देश के महामहिम बनने की डगर पर अग्रसर प्रणब मुखर्जी की राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की यात्रा की पहली औपचारिक शुरुआत आज उनके नामांकन भरने के साथ ही हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी समेत संप्रग के घटक दलों के नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने अपना पर्चा भरा। वहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा ने भी आज अपना नामांकन भरा। नामांकन कराने के बाद प्रणब मुखर्जी ने एक बार फिर सभी दलों से समर्थन देने की अपील की। इस दौरान मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान समेत कई नेताओं की मौजूदगी ने यूपीए की बढ़ती ताकत का अंदाज कराया। दोपहर दो बजे के बाद भाजपा समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा के नामांकन पत्र दाखिल करते समय वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से लेकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह उपस्थित रहे। संगमा के समर्थन में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, सुब्रह्मण्यम स्वामी के अलावा अन्नाद्रमुक और एजीपी के प्रतिनिधि मौजूद थे। संगमा के नामांकन के लिए भाजपा की ओर से दो सेट जमा करा गए। इनमें आडवाणी, सुषमा और जेटली के अलावा डॉ. मुरली मनोहर जोशी समेत लगभग सभी प्रमुख नेता व पार्टी के बड़ी संख्या में सांसदों व विधायकों ने बतौर प्रस्तावक व अनुमोदक हस्ताक्षर किए हैं। सबसे पहले संगमा को अपना उम्मीदवार घोषित करने वाले बीजू जनता दल की ओर से भी नामांकन पत्र का एक सेट जमा करा गया। पटनायक समेत पार्टी के 100 से ज्यादा सांसदों व विधायकों ने इस सेट पर हस्ताक्षर किए हैं। अन्नाद्रमुक की ओर से थंबी दुरई समेत कई सांसद व विधायक संगमा के नामांकन के प्रस्तावक व अनुमोदकों में शामिल हैं। संगमा का चुनाव प्रबंधन संभालने के लिए जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी और भाजपा नेता सुधीन्द्र कुलकर्णी पहले से सक्रिय हैं।

मुकाबला अब विधिवत आरंभ

रायसीना हिल्स पर बने राष्ट्रपति भवन में 5 साल प्रवास के अधिकार के लिए प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के बीच मुकाबला अब विधिवत आरंभ हो गया है। राष्ट्रपति पद के 19 जुलाई को होने वाले चुनाव के लिए गुरूवार को यूपीए के उम्मीदवार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। 77 वर्षीय प्रणव मुखर्जी ने सुबह 11 बजे संसद के केन्द्रीय कक्ष में चुनाव अधिकारी और राज्यसभा महासचिव वीके अग्निहोत्री के सामने अपने नामांकन पत्र दायर किये। इस अवसर पर कई प्रमुख नेता मौजूद थे। इनमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल, गृहमंत्री पी चिदम्बरम, अक्षय उर्जा मंत्री और नेशनल कांफ्रेस के नेता डाक्टर फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव, लोक जनशक्ति पार्टी नेता रामविलास पासवान, राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी शामिल हैं। मुखर्जी के नामांकन पत्रों के चार सैट दायर किये गए जिनमें चार सौ अस्सी सांसदों और विधायकों कें हस्ताक्षर थे। इनमें केन्द्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, कांग्रेस विधायक दल नेता और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शामिल हैं। विपक्षी एनडीए के संयोजक और जनता दल यूनाईटेड के अध्यक्ष शरद यादव के हस्ताक्षर नामांकन पत्रों के एक सैट पर सबसे पहले हैं। इसके बाद रक्षामंत्री एके एंटनी के हस्ताक्षर हैं। मुलायम सिंह यादव और मायावती ने भी नामांकन पत्रो ंपर हस्ताक्षर किये हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद मुखर्जी ने उन सभी दलों के नेताओं को धन्यवाद दिया जिन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है। संवाददाताओं से बातचीत में मुखर्जी ने कहा कि समाजवादी पाटी, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, मार्क्सवदी कम्युनिस्ट पार्टी और शिवसेना जैसे दलों ने देश के 14वें राष्ट्रपति पद के लिए उनकी उम्मीदवारी को समर्थन दिया है। मुखर्जी ने आशा व्यक्त की कि उन्हें भगवान का आशीर्वाद और सभी का सहयोग मिलेगा।

प्रणब चेन्नई से करेंगे प्रचार का आगाज
प्रणव मुखर्जी तीस जून को तमिलनाडु से अपना चुनाव प्रचार शुरू करेंगे। संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने यह जानकारी दी। वे मुखर्जी द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किये जाने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। बंसल ने बताया कि नामांकन पत्र पेश करने के अवसर पर महाराष्ट्र, हरियाणा, आन्ध्रप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली सहित आठ राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के छह निर्दलीय सदस्य भी मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं। एक प्रश्न के उत्तर में बंसल ने कहा कि श्री मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बैनजी से भी उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील की है। बंसल ने आशा व्यक्त की कि यूपीए उम्मीदवार जोरदार> बहुमत के साथ राष्ट्रपति चुनाव जीतेंगे।

संगमा पहले आदिवासी उम्मीदवार
राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा समर्थित उम्मीदवार पी ए संगमा ने भी आज अपने नामांकन पत्र भरे। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी मौजूद थे। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी संगमा के साथ थे। इससे पहले संगमा ने कहा कि एक जनजातीय नेता देश के शीर्ष संवैधानिक पद के लिए अपने परचे दाखिल कर रहा है और यह देश की जनजाति समुदाय की विजय है।

नेताम संगमा संग,जयललिता पलटीं
छत्तीसगढ के कांग्रेसी नेता अरविंद नेताम भी संगमा के साथ दिखाई दिए लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयलिलता मौजूद नहीं थी। कांग्रेस ने संगमा का साथ देने पर नेताम के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। नेताम पहले ही कह चुके थे कि आदिवासी उम्मीदवार के रूप में वह संगमा का समर्थन करेंगे। बताया जा रहा है कि जयललिता ने संगमा को समर्थन देने को लेकर अपनी राय बदल दी है। उन्होंने इस संबंध में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को फोन कर सूचित कर दिया है।

भाकपा किसी के साथ नहीं
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में यूपीए उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी और भाजपा समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा दोनों का ही समर्थन न करने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन दोनों में से किसी को भी समर्थन न देने का फैसला किया है।

लाटरी के चक्कर में न फंसे आम लोग



रातोंरात करोड़पति बनने के लालच में गंवाए 35 हजार
कहा जाता है कि लालच बुरी बला है। इसी लालच के चलते यहां एक व्यक्ति को रातोंरात करोड़पति बनने के चक्कर में कई हजार रूपए गंवा देने पड़े और अंत में जब उसे पता चला कि वह ईमेल और एसएमएस के जरिए लोगों को झांसा देने वाले एक विदेशी फर्जी लॉटरी गिरोह का शिकार बन गया है तो उसके हाथों से तोते उड़ गए। देश के इस प्रमुख औद्योगिक नगर में ठगी का शिकार हुए अच्युतानंद बारिक ने शुक्रवार को यहां साकची थाने में दो कथित ब्रिटिश नागरिकों डेविड फुलर और स्टीवन क्रीस समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि बारिक के मोबाईल फोन पर पिछले माह के अंतिम सप्ताह में एक एसएमएस और ईमेल आया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने दस लाख ब्रिटिश पाउंड लगभग आठ करोड़ रूपए का ईनाम जीता है। बाद में उन्हें फोन भी आया और बधाई देते हुए उनसे कस्टम एवं सीमा शुल्क क्लियरेंस के लिए 35000 रूपए की मांग की गई। करोड़पति बनने की लालच में बारिक ने यह पैसे दिल्ली में आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते में भेज दिए। तब उन्हें बताया गया कि उन्हें ईनाम देने के लिए ब्रिटिश उच्चायोग के एक अधिकारी स्टीवन क्रीस 30 मार्च को दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसके बाद बारिक को बताया गया कि क्रीस दिल्ली पहुंच गए हैं। लेकिन जब उनसे इतनी बड़ी रकम के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ आतंकवाद निरोधक विभाग से क्लियरेंस के लिए लगभग ढाई लाख रूपए और देने की मांग की गई तब उन्हें संदेह हुआ। बारिक ने जब अधिक पूछताछ की तो उन्हें धमकी दी जाने लगी। थक हार कर उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस छानबीन कर रही है लेकिन उसका मानना है कि यह कारगुजारी पहले से सक्रिय उस विदेशी गिरोह की हो सकती है जिसके कई नाइजीरियाई सदस्य हाल में पकड़े गए हैं। बहरहाल रातों रात करोड़पति बनने के चक्कर में गाढ़ी कमाई के 35 हजार गंवा चुके बारिक अब अपने लालच पर पछता रहे हैं।

14 करोड़ के लालच में डूब गई जीवन भर की कमाई
पालम विहार।। इंटरनेट पर 14 करोड़ की लॉटरी निकलने का झांसा देकर एक शख्स से 17 लाख रुपये ठग लिए गए। इस शख्स ने करोड़ों के लालच में अपनी जीवन भर की कमाई ठगों के बताए 20 बैंक अकाउंटों में जमा करा दी। इसके बाद उधार लेकर भी पैसे जमा कराते रहे। जब उन्होंने लॉटरी में जीती रकम मांगी तब उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने पुलिस में शिकायत की। डेढ़ महीने की जांच के बाद पालम विहार थाना पुलिस ने 2 महिलाओं समेत 6 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज की है। फर्जीवाड़े के 3 आरोपी यूके (इंग्लैंड) के और 3 भारतीय हैं। पालम विहार जे ब्लॉक निवासी दलबीर सिंह चौधरी रायपुर (छत्तीसगढ़) की एक निजी कंपनी से रिटायर हैं। जुलाई में 'ग्रेट ब्रिटिश पाउंड' नामक कंपनी की ओर से उन्हें एक ई-मेल मिला जिसमें उन्हें 14 करोड़ रुपये की लॉटरी जीतने की सूचना दी गई थी। लॉटरी की रकम हासिल करने के लिए उनसे कुछ औपचारिकताएं पूरी करने का अनुरोध किया गया था। साथ ही, कंपनी के एजेंटों से संपर्क करने की भी गुजारिश की गई थी। करोड़ों की लालच में दलबीर एजेंटों के चक्कर में फंस गए। उन्होंने 2 महीने के अंदर एजंेटों के बताए बैंक अकाउंट में करीब 17 लाख रुपये जमा करा दिए। उनसे यह रकम इनकम टैक्स और एग्रीमेंट के नाम पर वसूले गए। पुलिस के अनुसार दलबीर ने यह रकम सिटी बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई समेत 6 बैंकों में जमा कराई। ठग दलबीर को गुड़गांव, जयपुर और मुंबई स्थित बैंकों के अकाउंट नंबर बताते रहे और वे किस्तों में रुपये गंवाते रहे। ठगों की डिमांड पूरी करने के लिए दलबीर ने 2 लाख रुपये ब्याज पर भी लिए। करीब 17 लाख की रकम जमा कराने के बाद जब कंपनी की ओर एक फूटी कौड़ी नहीं मिली, तब उन्हंे अपनी गलती का एहसास हुआ। दिसंबर 2010 के पहले सप्ताह में दलबीर ने एजेंटों से अपने रुपये मांगे तो उन्हें जान से मारने की धमकी मिली। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में उन्होंने इसकी शिकायत पालम विहार थाने में की। डेढ़ महीने की जांच के बाद आरोप सही पाए गए। पुलिस ने बैंक और लोकेशन पता लगाने के बाद खाताधारकों की भी लिस्ट तैयार की है। ठगों में 3 ब्रिटिश नागरिक और 3 भारतीय हैं। आरोपियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं।

ईमेल भेजकर ठगने वाला नाईजीरियाई गिरफ्तार
लॉटरी में मोटी रकम जीतने के बारे में ईमेल भेजकर लोगों को ठगने के आरोप में एक नाइजीरियन नागरिक और भारतीय महिला को गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अशोक चांद के मुताबिक यह नेटवर्क एक खास किस्म के सॉफ्टवेयर की मदद से लाखों ईमेल भेजता है, जिसमें लोगों को बताया जाता है कि वे लाखों ब्रिटिश पाउंड कीमत की लॉटरी जीत गए हैं। खजूरी खास में रहने वाले राकेश गुप्ता को इन लोगों का भेजा गया ईमेल मिला था। उन्हें बताया गया था कि वे 7.5 लाख पाउंड की लॉटरी जीते हैं। गुप्ता को यकीन आ गया। ईमेल भेजने वालों ने फर्जी वेबसाइट और ब्रिटेन के फोन नंबरों पर बात कर उन्हें पक्का भरोसा दिला दिया। जालसाजों ने पैसा हिंदुस्तान भेजने के लिए ट्रांसफर फीस, रजिस्ट्रेशन, आईबीआई चार्ज, सरकारी मंजूरी और इनकम टैक्स क्लियरेंस के नाम पर राकेश गुप्ता से 90 हजार रुपये ठग लिए। यह रकम ऐसे बैंक अकाउंटों में जमा कराई गई, जो फर्जी नाम-पतों पर खुलवाए गए थे। गुप्ता ने पुलिस कंप्लेंट दी। क्राइम ब्रांच ने तहकीकात के बाद ओबासेकी प्रिंस (32) और बोनी सुशीला जेम्स (26) को गिरफ्तार कर लिया। नाइजीरिया का नागरिक प्रिंस तीन साल पहले भारत आया था। वह मैदानगढ़ी में रह रहा था। भारत में उसके दोस्त पहले से ही ईमेल लॉटरी फ्रॉड में शामिल थे। उन्हीं दोस्तों के माध्यम से प्रिंस की मुलाकात मणिपुर की रहने वाली बोनी सुशीला से हुई। वह भी उनके रैकेट में शामिल हो गई थी। प्रिंस खास तरह के सॉफ्टवेयरों की मदद से यह जालसाजी करता था। उसके नेटवर्क ने दिल्ली के अलावा, मुंबई, बंगलुरू, चेन्नई, कोलकाता, केरल और यूपी में अपने शिकार बनाए थे।

करोड़ों के इनाम का लालच दे ठगी का धंधा
नोएडा
जिले में करोड़ों के इनाम का लालच देकर हजारों की ठगी का धंधा चल रहा है। इसमें लोगों को ईमेल कर करोड़ों का इनाम जीतने की जानकारी दी जाती है। उनसे कस्टम चार्ज के नाम पर हजारों रुपये एकाउंट में जमा कराए जाते हैं। ऐसे ठगों के शिकार होते-होते निजी कंपनी कर्मी बच गए। उन्होंने पुलिस से मामले की शिकायत की है। सेक्टर 63 स्थित निजी कंपनी में मनीष सिंह काम करते हैं। उनके पास दो दिन पहले ई-मेल आया, जिसमें जानकारी दी गई कि उन्होंने पांच लाख पाउंड यानी करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का इनाम जीता है। इनाम पाने के लिए उनसे नाम, पता, उम्र और फोन नंबर मांगा गया। उन्होंने यह जानकारी दे दी, जिसके बाद उनके पास एक और ई-मेल आया। इसमें उन्हें स्टेट बैंक इंडिया का एकाउंट नंबर 20075523344 दिया गया। इस खाते में कस्टम चार्ज के रूप में साढ़े अठारह हजार रुपये डालने को कहा गया। इसी बीच मनीष के पास 9990175541 नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि वह ब्रिटेन से बोल रहा है। उसने बताया कि वह बृहस्पतिवार को भारत आकर उनसे बात करेंगे। बृहस्पतिवार को मनीष को फिर फोन आया। उसने जल्द पैसा जमा करने को कहा। उन्हें शक हुआ। उन्होंने पैसे जमा करने से मना कर दिया। उन्होंने मामले की शिकायत कोतवाली सेक्टर 58 पुलिस से की। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि कि जो एकाउंट नंबर दिया गया, वह आइजोल मिजोरम की रहने वाली लाल छानछिनी नाम की युवती का है। इस एकाउंट में प्रतिदिन दस-पंद्रह हजार रुपये जमा होते हैं। जो बेलापुर महाराष्ट्र स्थित एटीएम से निकल लिए जाते हैं। जिस नंबर से फोन आया था, वह सुरेंद्र नाम के व्यक्ति का है, जो नांगलोई पश्चिम विहार, नई दिल्ली के पते पर लिया गया है। पुलिस का मानना है कि धोखाधड़ी करने वाले का पूरा गिरोह है। मामले की जांच हो रही है।

साढ़े पांच करोड़ के लालच में मैनेजर ने गंवाए " 51 लाख
मुंबई गुड़गांव स्थित इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के संयुक्त महाप्रबंधक आरसी मिश्रा को नाइजीरियाई ठगों ने अपना शिकार बनाया है। 5.55 करोड़ रुपये इनाम का लालच देकर ठगों ने उनसे 51 लाख से अधिक रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने मामले में मुंबई और ठाणे से दो नाइजीरियाई मूल के लोगों को गिरफ्तार किया है। गुड़गांव में रहने वाले आरसी मिश्रा को एक ई-मेल आया था, जिसमें बताया गया था कि उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट अवॉर्ड जीता है। इसके तहत उन्हें कुल 7.50 लाख ब्रिटिश पाउंड (लगभग 5.55 करोड़ रुपये) की राशि से सम्मानित किया गया है। इनामी राशि का चेक भुनाने के लिए उन्हें 1.49 लाख रुपये चेक व दस्तावेज शुल्क के जमा कराने होंगे। इस पर मिश्रा ने एक निजी बैंक में नीलम एक्सपोर्ट नाम के खाते में पैसा जमा कराया। इसके बाद उन्हें नेशनल वाइड बैंक ऑफ इंग्लैंड की तरफ से एक मेल आया। मेल करने वाले शूमेकर ने अपने आपको क्लीयरेंस मैनेजर बताते हुए लिखा कि मिश्रा को पांच करोड़ से अधिक रुपये के भुगतान के लिए कुल 5.16 लाख की राशि बैंक में जमा करानी होगी। इसके बाद मिश्रा ने फिर से पैसे जमा कराए। इसके बाद उनके पास एक और ई-मेल आया और एक महिला ने अपने आप को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का बताते हुए जानकारी दी कि उनका पैसा भारत आ चुका है। महिला ने मिश्रा से कहा कि उनके बैंक खाते की लिमिट कम है, लिहाजा पांच करोड़ से ऊपर की राशि के लिए लिमिट बढ़वानी होगी। इसके बाद उसने 25 लाख रुपये एक बैंक खाते में जमा करने को कहा गया। इसके बाद भी उनसे कई मदों में पैसे मांगे गए। सबसे आखिर में उन्होंने दस लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए खाते में जमा कराए। काफी समय बीत जाने के बाद जब पैसे नहीं आए तो उन्होंने गुड़गांव स्थित सुशांत लोक पुलिस स्टेशन में एफआइआर दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ई-मेल और फोन कॉल डिटेल से सुराग लगाते हुए मुंबई जा पहुंची। वहां से इमरान इब्राहिम और ठाणे से मुहज्जम अब्दुल रज्जाक गानसे को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ जारी है।

ई-मेल जालसाजी से बचें



रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोगों को आगाह किया है कि वे किसी तरह के विदेशी पैसे के चक्कर में न फंसें। नाइजीरियन ई-मेल जालसाजी के बाद रिजर्व बैंक ने यह चेतावनी जारी की है। बैंक के मुताबिक, ऐसे ज्यादा फर्जी प्रस्ताव ईमेल के जरिए ही आते हैं। और, वे किसी न किसी बहाने ईमेल भेजकर बैंक का खाता और दूसरी जानकारी ले लेते हैं। आप ब्रिटेन में करीब तीन करोड़ पाउंड की लॉटरी के विजेता बन गए हैं। ऐसी कोई ई-मेल अगर आपके इनबॉक्स में दिख रही हो तो, सावधान हो जाइए। बिना किसी वजह से आपको करोड़ों डॉलर या फिर पाउंड का विजेता बनाने वाली ऐसी सारी ई-मेल पूरी तरह से फर्जी है। इन ई-मेल में दावा किया जाता है कि ये इनाम आपको याहू या माइक्रोसॉफ्ट जैसी कम्पनियों की तरफ से दिया जा रहा है और आपकी ई-मेल आईडी करोड़ों लोगों के बीच से चुनी गई है। ये दावा भी हो सकता है कि आप ब्रिटेन की सबसे बड़ी ऑनलाइन लॉटरी के विजेता बन गए हैं। या फिर अफ्रीका के किसी देश का कोई शख्स अपनी वसीयत में पूरी रकम आपके नाम कर गया है। शुरुआती ई-मेल में आपसे सिर्फ आपका नाम और फोन नंबर मांगा जाता है। एक बार आपने मेल का जवाब दिया तो, फिर आपसे पहले आपका खाता संख्या या फिर एटीएम कार्ड नंबर मांगा जाएगा। साथ ही इस बात का पूरा भरोसा दिलाया जाता है कि आप ये पैसे दुनिया के किसी भी एटीएम से निकाल सकते हैं। या फिर सारा पैसा आपके खाते में पहुंच जाएगा। भरोसा दिलाने के लिए कुछ ई-मेल में सीएनएन की वेबसाइट पर किसी कहानी का हवाला भी दिया होता है। शुरु में ही साफ-साफ बताया जाता है कि रकम का आधा हिस्सा या उससे कुछ कम ही आपको मिलेगी। मुफ्त के माल के लिए आप लपके और आपने खाता संख्या या फिर एटीएम कार्ड का नंबर एक बार भेज दिया तो, आप समझ लीजिए आपको लूटने की शुरुआत हो चुकी है। कई बार लॉटरी के कमीशन के नाम पर कुछ रकम आपसे किसी खाते में जमा करने के लिए कही जाएगी। जाहिर है, ये पूरा खेल पैसे का लालच दिखाकर आपको लूटने का है। और इसी वजह से रिजर्व बैंक ने ऐसे किसी ई-मेल से सावधान रहने की हिदायत दी है।



भारतीय रिजर्व बैंक के नाम पर फर्जीवाड़ा



याहू, एमएसएन, माईक्रोसॉफ्ट, आदि बड़ी-बड़ी मल्‍टीनेशनल कंपनियों के नाम पर लॉटरी के ढेरों ई-मेल आपके पास आते होंगे। ई-मेल पढ़ते ही आप समझ जाते होंगे कि यह बेवकूफ बनाने का तरीका है, या यूं कहिये किसी के अकाउंट को हैक करने के लिए फैलाया गया एक जाल है। लेकिन क्‍या आपको पता है, अब इस फर्जीवाड़े में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का भी नाम आ गया है। पढ़ें अजय मोहन की रिपोर्ट-

जी हां भारतीयों को 5 लाख ब्रिटिश पाउंड का लालच देकर उनके बैंक अकाउंट डीटेल्‍स प्राप्‍त करने के लिए यह जाल अब आरबीआई के नाम पर बिछाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस फर्जीवाड़े में यह तक कहा गया है कि लॉटरी के विजेता को यह राशि आरबीआई के गवर्नर डा. डी सुब्‍बाराव के आदेश पर दी जायेगी। यह पढ़कर आप यह जरूर सोच रहे होंगे, क‍ि नोट छापने वाले आरबीआई का इस्‍तेमाल फर्जीवाड़े में कैसे हो सकता है।

अब हम आपको फर्जीवाड़े की कहानी बताने जा रहे हैं। हमारे पास एक ई-मेल आया, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भेजा गया था। उसमें लिखा था कि आपने रिजर्व बैंक के लॉटरी सिस्‍टम में पांच लाख रुपए जीते हैं। इसके साथ एक एटैचमेंट था, जिसे भरकर रिप्‍लाई देने को कहा गया था। हमने अटैचमेंट खोला तो चौंका देने वाले तथ्‍य सामने आये। मेल में लिखा था, "आपने 2010 में 5 लाख पाउंड जीते थे, जो आपको देना है। हाल ही में आरबीआई के गवर्नर डा. डी सुब्‍बाराव ने मुंबई शाखा में सीनेट टैक्‍स कमेटी के साथ एक मीटिंग में यह आदेश दिये थे कि सभी का बकाया धन उन्‍हें दे दिया जाना चाहिये। इसलिए हम डा. सुब्‍बाराव के आदेश पर आपको 5 लाख पाउंड दे रहे हैं। इसके लिए आपको हमें 10,500 रुपए देने होंगे।" मेल में नीचे नाम, पता, उम्र, बैंक का अकाउंट नंबर, फोन नंबर, आदि मांगा गया।" मेल भेजने वाले के पते में आरबीआई के दिल्‍ली कार्यालय का पता दर्शाया गया (ईमेल को पढ़ने के लिए क्लिक करें)।

इतना पढ़ने के बाद आप समझ ही गये होंगे क‍ि यह सब फर्जी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत के हर सरकारी व निजी बैंकों को नियंत्रित करने वाले व करंसी नोट जारी करने वाले आरबीआई का इस्‍तेमाल कोई इतनी आसानी से कैसे कर सकता है। चलो एक बार बैंक का नाम इस्‍तेमाल कर भी लिया, लेकिन यह कहना कि इस संबंध में गवर्नर ने एक मीटिंग बुलाई और पैसा रिलीज करने के आदेश दिये, यह कितना सही है? सही मायने में देखा जाये तो यह आरबीआई के साथ हो रहा घटिया मजाक है। उस गवर्नर के नाम का मजाक है, जिनके हस्‍ताक्षर भारतीय करंसी नोट पर होते हैं।

हमें जब यह ई-मेल मिला तो हमने उसे आरबीआई की वेबसइट के माध्‍यम से आरबीआई की कंप्‍लेंट सेल भेज दिया। यदि आपको ऐसा कोई भी ई-मेल मिले तो सबसे पहले आरबीआई को सूचित करें, ताकि सही समय पर ऐक्‍शन हो और ऐसी ई-मेल भेजने वालों को पकड़ा जा सके।

मोटी लॉटरी के लालच से बच के रहना रे बाबा!



- सीरज कुमार सिंह
नई दिल्ली : दिल्ली में एक वॉटर प्युरिफायर कंपनी की मार्केटिंग टीम में काम करने वाले इंद्रजीत शर्मा को एक ऐसा ईमेल मिला, जिसे पढ़कर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ईमेल का मजमून ही कुछ ऐसा था। यह ईमेल फोर्ड मोटर्स प्रोमो लॉटरी नाम की एक लॉटरी कंपनी की ओर से भेजा गया था। उसमें कहा गया था कि इंद्रजीत की 50 लाख ब्रिटिश पाउंड (करीब 40 करोड़ रुपये) की लॉटरी लग गई है।
ईमेल में बाकायदा इस बात का जिक्र था कि हजारों लोगों की ईमेल आईडी में से सिर्फ इंद्रजीत का नाम चुना गया है। इंद्रजीत ने हैरत भरी खुशी के साथ यह जानकारी अपने दोस्तों को दी। पर, जब उनके मित्रों ने भी इसी तरह के ईमेल मिलने की बात कही, तो इंद्रजीत को शंका हुई। जब इंद्रजीत ने फोर्ड मोटर्स प्रोमो लॉटरी नाम की कंपनी की जानकारी इंटरनेट पर सर्च की तो पता चला कि इस नाम की कंपनी लोगों को फर्जी ईमेल के जरिये अपने जाल में फंसाने की कोशिश करती है। यह और इस तरह की सैकड़ों कंपनियां लोगों को लगातार ईमेल भेजकर उनसे बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड या फिर डेबिट कार्ड आदि की डिटेल लेने की कोशिश करती हैं। या फिर लॉटरी की रकम भेजने के बदले कमिशन के रूप में कुछ पैसे मांगती है। इसके लिए नेट बैंकिंग का पर्सनल आइडेंटिफेशन नंबर (पिन) और पासवर्ड देने को कहा जाता है, ताकि फर्जी कंपनी के अकाउंट में कमिशन की राशि ट्रांसफर की जा सके। रमिटेंस के जरिये भी रकम मांगी जा सकती है।


सतर्क रहने की जरूरत
इंद्रजीत के मामले को ही लें। पहला सवाल यह कि जब इंद्रजीत ने कोई लॉटरी खरीदी ही नहीं, तो उसकी लॉटरी लग कैसे गई? क्या सिर्फ ईमेल आईडी को ही शॉर्ट लिस्ट कर किसी की करोड़ों रुपये की लॉटरी लग सकती है? मामला महज इंद्रजीत का नहीं है। सैकड़ों फर्जी कंपनियां अलग-अलग बहाने बनाकर इनाम देने की बात करती हैं। ईमेल का तानाबाना इतनी सफाई से बुना जाता है कि एकबारगी किसी को इसके फर्जी होने का अंदाजा ही नहीं लगता। मसलन, ऐसे ईमेल में बाकायदा एक फॉर्म भरने को कहा जाता है। इस फॉर्म में आपका पता, राष्ट्रीयता, उम्र समेत कई तरह की पर्सनल डिटेल मांगी जाती है। कई कंपनियां खुद का पता और फोन नंबर आदि देती हैं। पर उस फोन नंबर पर संपर्क किए जाने पर पता चलता है कि इस नाम का कोई फोन नंबर ही नहीं है। या फिर यदि ऐसा कोई नंबर है भी तो वह किसी दूसरी कंपनी या किसी ऐसे शख्स का है, जिसका इन चीजों से कोई सरोकार ही नहीं है। हां, इस तरह की फर्जी कंपनियां ईमेल के जरिये तब तक आपके संपर्क में रहती हैं, जब तक आप उन्हें अपनी बैंकिंग या दूसरी ऐसी कोई भी पर्सनल डिटेल न दे दें, जिसके जरिये वे आपकी जमा पूंजी या किसी और रकम में सेंध न लगा दें। यदि ये यह समझ जाती हैं कि आप उनके झांसे में नहीं आने वाले, तो वे ईमेल करना बंद कर देंगी या फिर नाम बदलकर नए सिरे से ईमेल करना शुरू कर देंगी। इस तरह अनगिनत उलझे हुए बहाने बनाकर आपको भरोसे में लिए जाने की कवायद की जाती है। पर इस तरह के ईमेल से चक्कर में फंसने से हर हाल में बचिए।

आरबीआई की नसीहत
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में लोगों को हिदायत थी कि वे किसी अनजान कंपनी द्वारा ईमेल पर किसी बड़े फंड की काल्पनिक पेशकश के लालच में न आएं। आरबीआई ने साफ किया था फॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) लॉटरी या इसी किस्म की गतिविधि के लिए पैसे विदेश भेजने की इजाजत नहीं देता। आरबीआई ने कहा था कि लोग अनजान कंपनियों की ऐसी योजनाओं और पेशकशों में भागीदारी के लिए किसी किस्म के रेमिटेंस का उपयोग न करें।
सोर्स : नवभारत टाइम्स

बुधवार, 27 जून 2012

कार मे, ट्रेन में और पार्किंग तक में किया सेक्स




सेक्स के लिए बेहद उत्सुक रहने वाली गायिका क्लेयर रिचर्ड्स ने कई बार सार्वजनिक जगहों पर जमकर सेक्स का आनंद लिया है। अपनी सनसनीखेज आत्मकथा में खुलासा करते हुए रिचर्ड्स ने स्वीकार किया है कि उसने कार में, ट्रेन में, बैकस्टेज पर और यहां तक की रेलवे स्टेशन के पार्किंग तक में सेक्स किया है।

अपनी आत्मकथा 'ऑल अबाउट मी' में क्लेयर ने बताया है कि उसने 20 साल की उम्र से ही सेक्स का आनंद लेना शुरू कर दिया था। क्लेयर ने अपने शादी के ही दिन अपने एक साथी गायक डेन बोवर्स के साथ सड़क पर कार में ही सेक्स किया था।

क्लेयर ने किताब में अपने सेक्स अनुभवों पर लिखा है कि उन्होंने अपने पूर्व प्रेमी रीस के साथ एक बार इतनी छोटी कार में यौन संबंध बनाए कि उनके पूरे शरीर पर खरोंचे पड़ गई थीं। क्लेयर ने रीस के साथ ट्रेन में, स्टेज के पीछे और रेलवे स्टेशन के पार्किंग तक में सेक्स किया है। 34 वर्षीय क्लेयर अब फिर अपने पुराने प्रेमी रीस के साथ हैं और दोनों ने 2008 में शादी कर ली और अभी तक एकसाथ हैं।

कंप्यूटरों को मानव मस्तिष्क की नकल करना सिखा रहा है गूगल



सान फ्रांसिस्को: कल्पना कीजिये एक ऐसे कंप्यूटर की, जिसमें मानव मस्तिष्क की तरह चीजों को समझने की क्षमता हो और वह बिना कुछ बताये चीजों को देखते ही उसके बारे में प्रतिक्रिया देता हो। जी हां यह कल्पना अब हकीकत का रूप ले रही है और दिग्गज अमेरिक कंपनी गूगल ने कहा है कि वह मानव मस्तिष्क की समझने की क्षमता की नकल करने की कंप्यूटरों की क्षमता को दोगुना कर रही है।

गूगल के फेलो जेफ डीन एंड्रयू एनजी ने अपने ब्लॉग में कहा कि इस प्रकार प्रोग्राम किये गये कंप्यूटरों को जब यूट्यूब पर वीडियो दिखाया गया तो उन्होंने बिल्ली को पहचान लिया। शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘हमारी अवधारणा थी कि कंप्यूटर इन वीडियो को देखकर सामान्य चीजों को पहचानना सीख लेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में हमारे एक कृत्रिम न्यूरोन्स ने बिल्ली की तस्वीर देखने पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देना सीख लिया है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क को कभी भी यह नहीं बताया गया था कि बिल्ली क्या होती है या ऐसी कोई तस्वीर नहीं दी गई थी जिस पर लिखा हो कि यह एक बिल्ली है।’’ डीन ने कहा कि कंप्यूटर ने अपने आप ही यह सीख लिया कि बिल्ली कैसी दिखती है।

रेलवे ने बढ़ाया एसी का किराया




नई दिल्ली। आम आदमी एक बार फिर से मुश्किलों का सामना करने वाला है। सरकार ने दोबारा उसकी जेब पर वार करते हुए रेल के किराए में वृद्धि करने की घोषणा कर दी है यानी की फिर से उसकी जेब से कुछ एक्स्ट्रा पैसे निकलने वाले हैं। आपको बताते चलें की अब अगर आप रेल से सफर करने जा रहे हैं तो सफर करना आपको 3.6 प्रतिशत महंगा हो सकता है। क्योंकि एक जुलाई से रेल में एसी क्लास की तीनों श्रेणियों और फर्स्ट क्लास के किराए में बढ़ोत्तरी की गई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे को इन श्रेणियों पर मिलने वाली सर्विस टैक्स की छूट इस महिने खत्म होने वाली है जिससे रेलवे पर 5,500 से छह हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। इससे रेल किराया बढ़ाना जरुरी हो गया है। रेल मंत्री मुकुल राय ने सर्विस टैक्स की छूट जारी रखने के लिए पिछले हफ्ते वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखा है। लेकिन इस अनुरोध पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

मुकुल राय रेल किराए को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे। लेकिन इस बात की उम्मीद कम ही है कि रेलवे को इससे कोई राहत मिले क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव के कारण तृणमूल कांग्रेस और सरकार के बीच खटास है। उधर, रेलवे बोर्ड अब यह तय करने में लगा है कि किराया कितना बढ़ाया जाए। इस साल के बजट में एसी-फस्र्ट और एसी-सेकंड क्लास का किराया करीब 20 फीसदी बढ़ाया जा चुका है।

कोठे से निकल आजादी की ओर बढ़ी 10 लडकियां



नयी दिल्ली। पैसा कमाने की चाह ग़ुरबत की मार झेल रही छोटे शहरों की लडकियां के लिए एक अभिशाप बनती जा रहा है। अक्सर इनका कम पढ़ा लिखा होना इनकी परेशानी का सबसे बड़ा सबब बन जाता है। जहां अक्सर ही ये सुनने को मिलता है कि नौकरी के नाम पर इनसे जिस्मफरोशी जैसा काम कराया जाता है और अगर गलती से भी इन्होने इसके खिलाफ अपना मुह खोला तो बात इनकी जान लेने तक आ जाती है।

खैर अब भी समाज में कई ऐसे लोग कई ऐसी संस्थाएं हैं जो अपनी जान जोखिम में डाल कर इन लड़कियों को जिस्मफरोशी के इस दलदल से आज़ाद कराते हैं। ऐसी ही एक गैर सरकारी संस्था ने दिल्ली पुलिस की मदद लेते हुए जीबी रोड स्थित कोठे पर दबिश देकर देह व्यापार में जबरन धकेली गई 10 लड़कियों को मुक्त कराया है। आपको बताते चलें की मुक्त लड़कियों में अधिकतर नाबालिग हैं।

मध्य जिला पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि रेस्क्यू फाउंडेशन नामक एक गैरसरकारी संस्था के प्रतिनिधियों ने कमला मार्केट थाने में सूचना दी कि जीबी रोड कोठा नंबर 58 में बंगाल से गुमशुदा एक किशोरी को जबरन रख कर उससे देह व्यापार कराया जा रहा है।

प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने गैर सरकारी संस्था की टीम के साथ छापेमारी करने के बाद कुल 10 लड़कियों को मुक्त कराया। इन लड़कियों में गुमशुदा लड़की भी शामिल थी। जांच में पता चला कि अन्य नौ लड़कियां पश्चिम बंगाल व बिहार के अलग अलग प्रांतों की रहने वाली हैं।

मुक्त लड़कियों ने बताया कि वे गरीब परिवारों से हैं, उन्हें अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर दिल्ली लाया गया था जहां बाद में उन्हें जिस्फारोशी के दलदल में ढकेला गया । बरामद लड़कियों ने ये भी बताया की कोटे के मालिकों द्वारा उन्हें इस बात की भी धमकी दी जाती थी कि अगर किसी के सामने उन्होंने अपना मुह खोला तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पडेगा।

पूरे देश में खूनी खेल खेलने के लिए फंड जुटा रहा था हमजा




मुंबई। मुंबई आतंकी हमले का एक और अहम आरोपी अब सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में है। 26/11 हमले का सरगना अबू हमजा उर्फ अबू जिंदाल उर्फ सैयद जबीउद्दीन से अब कई और नये रहस्‍य खुलते जा रहे है। मुंबई में आतंकवादियों ने जो खूनी खेल खेला था उसे शायद ही कोई भूला पाये, और कुछ ऐसा ही खेल पूरे देश में खेलते की तैयारी में जुटे हुए थे।

अबू हमजा ने पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को चौकाने वाला सच बताया है। उसने कहा कि वह देश के कई हिस्‍सों में मुंबई जैसे हमले की तैयारी में था। इसलिए वह भारत आया था। इस आतंकी हमले के लिए वह पैसे भी जुटा रहा था। इसी दौरान उसको दिल्‍ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया। हमजा पांच जुलाई तक पुलिस की हिरासत में है।

मुंबई की पुलिस ने दिल्‍ली के मुख्‍य मजिस्‍ट्रेट विनोद यादव की अदालत में अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस से इसपर जवाब मांगा है। मुंबई पुलिस का कहना है कि हम हमजा और कसाब दोनों के साथ आमने-सामने पूछताछ करना चाहते है। इससे मुंबई हमलों की के जुड़े कुछ और अहम सुराग सामने आएंगे।

दोनों से एकसाथ पूछताछ करने से पता चलेगा कि हमले से पहले, हमले के समय और उसके बाद पकिस्‍तान की क्‍या प्रक्रिया हो रही थी। हमले की साजिश को पाकिस्‍तान का कितना समर्थन मिल रहा था। मुंबई पुलिस हमजा पर अलग से मामला चलाने की फिराक में है। हमजा से अभी एनआईए और खुफिया एजेंसी पूछताछ कर रही है। उसकी सुरक्षा पर भी विचार किया जा रहा है।

आतंकी अबू हमजा की पहचान पर पाक का दोगलापन




बैंगलोर। सुरजीत और सरबजीत मामले को लेकर अबतक पाकिस्‍तान की वायदापरस्‍ती की चर्चाएं हो रहीं थी मगर अबू हमजा केस में अब पाकिस्‍तान का दोगलापन सामने आ गया है। इस पूरे मामले को एक नया मोड़ देते हुए पाकिस्‍तान सरकार के सलाहकार रहमान मलिक ने कहा है कि जिस हमजा को भारत ने गिरफ्तार किया है वह वो नहीं है जिसे वह तलाश कर रहा था। मलिक ने 26/11 को हुए मुंबई हमले में पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के शामिल होने की खबर को सिरे से खारिज कर दिया है।

हमजा मसले पर पाकिस्‍तान सरकार ने पल्‍ला झाड लिया और एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिये कहा कि भारत की ओर से सौंपे गए मोस्ट वांटेड लिस्ट में हमजा नाम के दो-दो व्यक्ति का नाम है। ऐसे में भारत पहले ये बताए की गिरफ्तार हुआ हमजा कौन है? रहमान मलिक ने कहा कि लोग पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई को बदनाम करना चाहते हैं, जबकि यह सरकार की ओर से वैद्य जांच एजेंसी है। आईएसआई हमारे देश की सबसे अच्छी एजेंसी है, हमें इसपर गर्व है। उन्होंने कहा कि अगर कोई आईएसआई को बदनाम करने का प्रयास करेगा तो पाकिस्तान इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

मालूम हो कि दिल्‍ली पुलिस द्वारा पूछताछ में अबू हमजा ने खुद इस बात को स्‍वीकार किया है कि मुंबई आतंकी हमले के वक्‍त वह कराची के कंट्रोल रूम में बैठकर आतंकियों को दिशा निर्देश दे रहा था। उसने यह भी कबूल किया कि कराची स्थित कंट्रोल रूम में आईएसआई का एक अधिकारी भी मौजूद था। हमजा ने यह भी कबूला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इन्टर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के अधिकारियों को मुंबई हमले की पहले से पूरी जानकारी थी। अब इसे पाकिस्‍तान की कोई चाल कहें या दोगलापना मगर एक बात तो साबित होती है कि पाकिस्‍तान हमेशा से आतंकियों का मददगार रहा है।

2013 से आईआईटी के लिये नए फॉर्मेट में होंगे एंट्रेंस टेस्‍ट




दिल्‍ली। आईआईटी (IIT) में दाखिले के लिए होने वाले टेस्ट को लेकर सरकार और आईआईटी काउंसिल के बीच विवाद सुलझ गया है। नए फॉर्मूले की मानें तो आईआईटी जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) में बैठने के लिए सीबीएसई (CBSE) की परीक्षा में 78 फीसदी अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है। मालूम हो कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आईआईटी निदेशकों की बैठक में भाग नहीं लिया। वहीं सिब्‍बल के भाग ना लेने पर सूत्रों का मनना है कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है ।

आईआईटी परीक्षा में बैठने के लिये यूपी बोर्ड के लिए न्यूनतम 65 फीसदी तथा तमिलनाडु बोर्ड के लिए न्यूनतम 78 फीसदी अंक की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। पहले हर बोर्ड के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंक ही जरूरी थे। आज दिल्ली में हुई आईआईटी काउंसिल की बैठक में ये फॉर्मूला तय किया गया। नई व्यवस्था 2013 से लागू होगी।

नई व्यवस्था के मुताबिक आईआईटी में प्रवेश के लिए करीब डेढ़ लाख छात्रों का एक एडवांस टेस्ट होगा। इस टेस्ट में वही छात्र बैठ पाएंगे जो अपने-अपने बोर्ड के टॉप-20 परसेंटाइल होंगे। परसेंटाइल से तात्पर्य है कि अगर किसी बोर्ड के टॉपर ने 98 फीसदी नंबर पाए हैं तो उससे 20 फीसदी कम यानी कि करीब 78 फीसदी तक अंक पाने वाले छात्र इस एडवांस टेस्ट में बैठ पाएंगे। एडवांस टेस्ट की मेरिट लिस्ट से आईआईटी में छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।

बिजनेस पार्टिज़ में जिस्‍म बेचने आती हैं लड़कियां




पणजी। अगर किसी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने एक बिजनेस मीट का आयोजन किया तो आप क्‍या सोचेंगे? यही ना कि अच्‍छे खाने और टाई बेल्‍ट पहने बिजनेस क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ अनुभव शेयर करने का एक अनोखा मौका मिलेगा। मगर आप गलत हैं। गोवा पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि अब मेट्रो शहरों में बिजनेस समारोहों की आड़ में सेक्‍स रैकेट चलाया जा रहा है। पुलिस छापे के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां समारोहों की आड़ में देह व्यापार का रैकेट चलाती हैं। इसके लिए देश के विभिन्न राज्यों से तस्करी के माध्यम से युवतियों को यहां लाया जाता है।

गोवा में यौन शोषण के लिये मानव तस्‍करी पर रोक के लिये रणनीति बनाने हेतु दो दिवसीय आयोजन में शिरकत कर रहे पुलिस निरीक्षक गुरुदास कदम ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए सबको चौका दिया। उन्‍होंने बताया कि बिजनेस मीटिंग में लाई जाने वाली लड़कियों को पहले से ही यह पता होता है कि उन्‍हें इस पार्टी के माध्‍यम से ग्राहक पटा कर जिस्‍म का काला कारोबार करना है। उन्‍हें यह साफ पता होता है कि किस ग्राहक को टारगेट करना है और किस तरह पेश आना है। इतना ही नहीं उन्‍हें यह भी दिशा निर्देश दिया जाता है कि अगर वह समारोह के दौरान सेट ना हो सके तो उसे समारोह के बाद सेट कर कमरे तक ले जाया जाये।

मालूम हो कि पुलिस निरीक्षक गुरुदास कदम ने आंध्र प्रदेश की एक कंपनी के यौन शोषण के रैकेट में लिप्त होने का भंडाफोड़ किया था। महिला और बाल विकास विभाग के निदेशक संजीव गडकर ने कहा कि गोवा सरकार अन्य राज्यों के साथ मिलकर यह जानने की कोशिश करेगा कि समारोह का आयोजन कर रहीं इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां पंजीकृत हैं या नहीं। गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम के प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे है।

आईआईटी और सरकार के बीच प्रवेश परीक्षा विवाद हल हुआ


नई दिल्ली । प्रवेश परीक्षा को लेकर आईआईटी और सरकार के बीच के विवाद का बुधवार को हल निकल आया। दोनों पक्षों के बीच अगले साल से साझा परीक्षाएं कराने पर सहमति बन गई।

नये प्रारूप के मुताबिक एक एडवांस परीक्षा आयोजित की जाएगी और ये प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान उन छात्रों पर दाखिले के लिए गौर करेंगे जो विभिन्न बोर्डों के शीर्ष 20 फीसदी में आते हैं।

बैठक के बाद आईआईटी काउंसिल के सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हमने एक ऐसा फार्मूला तैयार किया है जिसमें स्क्रीनिंग का मापदंड तय कर हर बोर्ड के शीर्ष 20 फीसदी छात्रों को आईआईटी में दाखिले के योग्य माना जायेगा।

उन्होंने कहा कि इसे वर्ष 2013 से लागू किया जाएगा। शीर्ष निर्णायक निकाय आईआईटी काउंसिल की बैठक में इस बात पर सहमति बनी। इस निकाय में इन सभी 16 संस्थानों के निदेशक और सरकार के प्रतिनिधि हैं।

हालांकि काउंसिल के अध्यक्ष मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इस बैठक में नहीं थे और बैठक की अध्यक्षता आईआईटी, मद्रास के संचालक मंडल के अध्यक्ष एम एन शर्मा ने की।

इस समझौते के अनुसार वर्ष 2013 से आईआईटी में दाखिला एडवांस परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर होगा और साथ ही यह शर्त होगी कि चुने गए छात्र अपने बोर्डों के शीर्ष 20 फीसदी छात्रों में हों।

इससे पहले सरकार ने साक्षा प्रवेश परीक्षा का प्रस्ताव रखा था जिसे आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर ने खारिज कर दिया और कुछ अन्य के भी इसी राह पर चलने की आशंका थी।

यह सम्मति फार्मूला आईआईटी ज्वायंट एड़मिशन बोर्ड के निर्णय के अनुरूप ही है। इसकी पिछले शनिवार को बैठक हुई थी। इसमें आईआईटी के निदेशक शामिल हैं। जेएबी ने मुख्य और एडवांस परीक्षाओं के बीच उपयुक्त अंतराल की मांग की है, ताकि मुख्य परीक्षा का परिणाम एडवांस से पहले उपलब्ध हो जाए तथा मुख्य परीक्षा के केवल डेढ़ लाख शीर्ष सफल उम्मीदवार एडवांस परीक्षा में शामिल हों।

आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर ने प्रस्ताव को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यह परीक्षा अकादमिक दष्टि से अनुपयुक्त और प्रक्रियागत दृष्टि से अतर्कसंगत है।

पूर्व इंजीनियर आरके डवास: ऐतिहासिक फैसला



दिल्ली की सीबीआई की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में एक अनूठा फैसला सुनाकर दंड का भय कायम करने की शानदार कोशिश की है। अदालत ने दिल्ली नगर निगम के पूर्व इंजीनियर आरके डवास को भ्रष्टाचार का दोषी पाया और तीन वर्ष की सश्रम कैद और पांच लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी की पत्नी को भी एक साल की साधारण कैद अथवा ढाई लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाकर एक ऐतिहासिक फैसला दिया।
न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने स्पष्ट किया की आरोपी की पत्नी घरेलू महिला जरूर है, पर वह अपने पति को काली कमाई के लिए उकसाती थी और इससे चल-अचल संपत्ति जोड़ती थी। तय है कि पत्नी को पति के भ्रष्ट आचरण की जानकारी थी। अत: पत्नी का फर्ज बनता था कि वह अपने पति को गलत काम करने से रोके, पर ऐसा न करते हुए वह पति की काली करतूतों में भागीदार ही रही। लिहाजा, पत्नी भी सजा की बराबर हकदार है।
यदि अदालतें विवेक से फैसला लेते हुए भ्रष्टाचारी पतियों की पत्नियों और बालिग बच्चों को भी सजा देने लगेंगी, तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर देश में अंकुश लगने की उम्मीद की जा सकेगी। हालांकि, लगता है कि अब यह सिलसिला शुरू हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को भी भ्रष्टाचार के एक 23 वर्ष पुराने मामले में शिमला हाईकोर्ट ने आरोपी बनाया है। दरअसल, प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश के उद्योगपतियों से धन वसूली में अपने पति के साथ बराबर की भागीदार थीं, ऐसे साक्ष्य अदालत ने पेश किए गए थे।
बेबस नागरिकों को यह खबर निश्चित रूप से सुकून देने वाली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को ऐसे ही कड़े और दूरगामी फैसलों से सार्थक अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है, साथ ही जनता में यह भरोसा भी पैदा किया जा सकता है कि जनता दबाव बनाए और कानून साथ दे, तो भ्रष्टाचारी भी पत्नी और बच्चों समेत सीखचों के पीछे होंगे। वैसे भी अब भ्रष्टाचारियों के बावत तमाम मुगालते टूट रहे हैं। कुछ समय पहले ही भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी नीरा यादव को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। नीरा देश की पहली महिला आईएएस अधिकारी थीं, जिन्हें किसी अदालत ने सजा सुनाई थी। इस फैसले ने बेहतरीन नजीर पेश करते हुए इस भ्रम को तोड़ा था कि किसी आईएएस अफसर को सजा नहीं हो सकती। निश्चित रूप से ये सजाएं भ्रष्टाचारियों के मन में खौफ पैदा करेंगी और एक हद तक बेलगाम भ्रष्टाचार पर अंकुश भी इनसे लगेगा, मगर जो वैकल्पिक कानून भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते हैं, यदि उनमें कसावट ला दी जाए, कुछ कानूनों का विलोपीकरण कर दिया जाए और अदालतें आरके डवास के मामले की तरह विवेक को भी फैसले का आधार बनाने लगें, तो देश भ्रष्टाचार से मुक्ति की दिशा में मुड़ सकता है।
इस बाबत हम चीन को बतौर बानगी मानते हुए भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता में भ्रष्टाचार के सिलसिले में ऐसे और कठोर दांडिक प्रावधान जोड़ सकते हैं, जिनकी पहुंच भ्रष्टाचारी के पारिवारिक सदस्यों तक भी हो। आखिर कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार से जो अकूत संपत्ति जुटाता है, उसका लाभ परिवार के सदस्य ही तो उठाते हैं। अधिक मात्रा में धन की आवक निरंतर बनी रहे, इसके लिए पत्नी व संतानें भी व्यक्ति को नाजायज कमाई के लिए उकसाने का काम करती हैं। लिहाजा, दंड के दायरे को लाभांवित लोगों की पहुंच तक विस्तार देने की जरूरत है। आज चीन की आर्थिक विकास की रफ्तार 11.2 फीसदी है। जीडीपी के पैमाने पर उसने जापान को नीचे धकेलकर अमेरिका के बाद दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। चीन में विकास की यह जो इबारत लिखी जा रही है, उसमें वहां के कठोर कानूनों का भी योगदान है। हाल ही में वहां भ्रष्टाचार के आरोप साबित होने पर दो अधिकारियों को मृत्यु दंड दिया गया है व उनकी चल-अचल संपत्ति भी जब्त कर ली गई है। एक अधिकारी की पत्नी को भी आठ साल की सजा दी गई है।
इनमें एक बीजिंग का वरिष्ठ बैंक अधिकारी वांग ई था, जिस पर 18 लाख अमेरिकी डालर की रिश्वत का आरोप साबित हुआ, तो दूसरा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वेन छियांग था, जिस पर 24 लाख अमेरिकी डालर की रिश्वत लेने का आरोप सिद्ध होने पर मृत्युदंड दिया गया। छियांग की पत्नी को भी आठ साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई गई, क्योंकि वह पति को कदाचरण के लिए उकसाती थी। कानूनी प्रावधानों के ईमानदार क्रियान्वयन के चलते ही चीन संतुलित आर्थिक विकास के बूते 60 करोड़ लोगों को गरीबी से छुटकारा दिलाने में सफल रहा है। यह एक बड़ी उपलब्धि है।
मगर, भारत में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के भ्रष्ट लोगों ने 12740 करोड़ रुपए स्विस बैंकों में जमा कर रखे हैं। यह जानकारी हाल ही में स्विस नेशनल बैंक ने स्विस बैंकों की वार्षिक समीक्षा पत्रिका में दी है। अब हमारे देश में भ्रष्टाचार ने एक कारोबार की तरह मांग व आपूर्ति का स्वरूप ग्रहण कर लिया है, जिसके चलते रिश्वत का लेनदेन किसी सामग्री की खरीद-फरोख्त की तरह होने लगा है। टूजी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श सोसायटी, कोयला, उत्तरप्रदेश में 35 हजार करोड़ का अनाज घोटाला और मध्यप्रदेश का खनन घोटाला आदि भ्रष्टाचार के करोबारी चरित्र के ही पर्याय हैं।
देश में प्रतिभा पलायन का भी एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार बड़ी बाधा होने के कारण ही कल्पनाशील, नवाचारी और उत्साही युवक देश में रहकर कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं। जिस देश की युवाशक्ति बेहतरी की खोज में विदेशों में बसने की मानसिकता बना रही हो, वह देश कैसे एक आर्थिक महाशक्ति बन सकता है? जिस देश के नागरिकों में अपने देश को समर्थ, समृद्ध और शक्ति-संपन्न बनाने की बजाए परदेशों में स्थाई रूप से बसने की ललक है, उस देश से वैश्विक महाशक्ति बनने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
दिल्ली की सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए नसीहत दी है कि व्यक्ति को जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए, पर भौतिक सुखों की चाहत व्यक्ति की हवस बढ़ा रही है। पत्नी और बच्चों की भोग-विलास के उपकरणों की मांगें निरंतर बढ़ रही हैं। इन्हीं महत्वाकांक्षाओं की आपूर्ति के लिए भ्रष्टाचार चरम पर है। साथ ही भ्रष्टाचारी की यह धारणा भी पक्की हो चुकी है कि उनकी अनैतिक गतिविधियों को पकड़ा नहीं जाएगा। इसीलिए उन्हें ऐसा दंड दिया ही जाना चाहिए, जिससे उनके मन में डर पैदा हो कि जिस दिन वे पकड़े गए, उस दिन भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति चली जाएगी और सजा उनके साथ ही पत्नी व बच्चों को भी मिलेगी। फिलहाल तो दिल्ली की अदालत ने यह उम्मीद जगाई ही है।
- प्रमोद भार्गव

सरबजीत, पाक और हमारे समाचार चैनल



- राजेन्द्र चतुर्वेदी


कहा तो यही जा रहा है कि जरदारी ने सरबजीत विषयक निर्णय अपनी फौज के दबाव में बदला है, मगर यह तथ्यों का सरलीकरण करना है।...और सरबजीत सिंह रिहा नहीं हो सका। मंगलवार की शाम करीब साढ़े छह बजे पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर यह ऐलान कर चुके थे कि राष्ट्रपति ने सरबजीत की फांसी की सजा माफ करके उम्र कैद में बदल दी है और यह भी कि राष्ट्रपति ने कानून मंत्रालय को निर्देश दिया है कि यदि सरबजीत उम्र कैद की सजा भुगत चुका है, तो उसे अब रिहा कर दिया जाए। इसके करीब आधा-पौन घंटे बाद इधर भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जरदारी की 'जय-जयकारÓ करने लगा, तो उधर पाकिस्तान में मोर्चा संभाला हामिद मीर जैसे पत्रकारों ने, जो सरबजीत को 'इंडियन कसाबÓ कहते हैं। यानी, हमारे लिए जितना बड़ा गुनहगार 26/11 के हमलों के बाद पकड़ा गया पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब है, पाकिस्तानी मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपने लिए उतना ही बड़ा गुनहगार सरबजीत को मानता है।


फिर, पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी का भी बयान आया। उन्होंने कहा कि सरबजीत की बहन को मैं अपनी बहन मानता हूं और मैंने उससे वादा किया था कि सरबजीत को बचाऊंगा। मुझे खुशी है कि मैं अपना वादा निभाने में सफल रहा। इसके बाद सरबजीत के घर जश्न मनाया जाने लगा, मगर रात करीब एक बजे सरबजीत के परिवार की खुशियों को ग्रहण लग गया। बाबर, वही बाबर, जो शाम को सरबजीत की सजा माफ करने का ऐलान कर रहे थे, रात को कह रहे थे कि कोई 'कन्फ्यूजनÓ हुआ है। राष्ट्रपति ने सरबजीत की सजा नहीं माफ की, बल्कि उस सुरजीत सिंह को रिहा करने की घोषणा की है, जो वर्ष-1989 से पाकिस्तान की जेल में बंद है। साफ है कि पाकिस्तान सरबजीत की सजा को माफ करने की अपनी घोषणा से पलट चुका था। क्यों पलटा, इस सवाल पर अब गंभीरता-पूर्वक विचार होना चाहिए? कुछ लोग कह रहे हैं कि जरदारी ने अपना निर्णय फौज व आईएसआई के दबाव में पलटा है, मगर यह तथ्य का सरलीकरण करना है। सरबजीत की रिहाई जैसा निर्णय फौज को 'भरोसेÓ में लिए बिना पाकिस्तानी राष्ट्रपति ले ही नहीं सकते थे। यानी, निर्णय सभी ने मिलकर नहीं लिया होगा, यह बात पचती नहीं।


तब क्या हुआ कि पाकिस्तान बदल गया? दरअसल, इस वक्त 26/11 का एक प्रमुख सूत्रधार अबु हमजा हमारी गिरफ्त में है। वह पाकिस्तान के खिलाफ हमारे पास एक पुख्ता सबूत है। पाक देखना चाहता होगा कि हमजा कि गिरफ्तारी से भारत में जो तूफान उठा है, क्या सरबजीत की रिहाई से उस तूफान को शांत किया जा सकता है? क्या भारतीयों का ध्यान हमजा से हटाकर सरबजीत की ओर मोड़ा जा सकता है? और पाकिस्तान तक यह संदेश चार -पांच घंटे में ही पहुंच गया था कि नहीं, यह नहीं हो सकता। अत: उसने पलटी मार दी। किसने दिया, उसको यह संदेश? बेशक, हमारे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने। मंगलवार के प्राइम टाइम में मीडिया में चर्चा इसी सवाल के इर्द-गिर्द चल रही थी कि सरबजीत की रिहाई हमजा के मामले पर क्या असर डालेगी व क्या नहीं? क्या जरूरत थी, इस प्रश्न को उठाने की? एक रणनीति के तहत ही यदि मीडिया सरबजीत प्रकरण पर पाकिस्तान सरकार की तारीफ करता और हमजा को भूल जाता, तो लगता है कि पाक भी सरबजीत को छोड़ देता, क्योंकि तब उस तक संदेश यह जाता कि हमजा की ओर से ध्यान हटाने की उसकी रणनीति कामयाब हो गई है। यह सही है कि पाक सरबजीत को यदि रिहा भी कर देता, तो भी वह 26/11 के दोष से बचता नहीं, फिर भी मीडिया को इस मुद्दे पर चुप ही रहना था।
हमजा का मामला बहुत संवेदनशील है। यह पता अब चल रहा है कि भारत व अमेरिका मिलकर आठ-नौ महीने से कोशिश कर रहे थे, तब सउदी अरब ने उसको हमें सौंपा। यह भी इसकी संवेदनशीलता का ही उदाहरण है कि हमारी सरकार अब भी नहीं कह रही है कि वह सउदी अरब से लाया गया है, तो भी मीडिया ने उस मामले को सरबजीत से जोड़ दिया। यह सही है कि मीडिया यदि ऐसा नहीं करता, तो भी सरबजीत की रिहाई की कोई गारंटी नहीं थी, पर सही यह भी है कि मीडिया ने गंभीरता नहीं दिखाई।

मंगलवार, 26 जून 2012

मई 2006 में मंत्री के गेस्ट हाउस में रुका था अबू हमजा



सुनील मेहरोत्रा



मुंबई।। 26/11 का प्रमुख आरोपी अबू जिंदाल उर्फ अबू हमजा 2006 में औरंगाबाद में उतारे गए जखीरे वाले केस में भी प्रमुख आरोपी है। उस केस में जो और लोग शामिल थे, उनमें एक फैयाज भी था, जो बाद में तेहरान भाग गया था। फैयाज को छोड़ने अबू जिंदाल मई, 2006 में मुंबई आया था और एक बड़े राजनेता के गेस्ट हाउस में रुका था।

उस राजनेता का ओहदा बाद में एक मंत्री के रूप में बदल गया। अबू जिंदाल फैयाज को छोड़ने के बाद अपने साथियों के साथ नाशिक गया था। जहां दो गाड़ियों में हथियार व आरडीएक्स रखा गया था। इनमें से एक गाड़ी को तब के एटीएस चीफ के.पी.रघुवंशी व सीनियर इंस्पेक्टर सुनील देशमुख ने बीच रास्ते में पकड़ लिया था, इसलिए दूसरी गाड़ी में बैठा अबू जिंदाल मालेगांव के पास गाड़ी छोड़कर अलग -अलग रास्तों से पहले बांग्लादेश और फिर पाकिस्तान भाग गया था। उस वक्त अबू जिंदाल को जैबीउद्दीन उर्फ जैबी के नाम से जाना जाता था। बांग्लादेश में जो शख्स समद खान उससे मिला था, उसे बाद में एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया। उसने जो इकबालिया बयान एटीएस को दिया था, प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश:

बीड से हुई शुरुआत
मैं जन्म से बीड में रहता हूं। बीड में कागजी मोहल्ला में एक लाइब्रेरी है। वहां पर कुछ साल पहले मेरा दोस्त इमायत मुझे लेकर गया था। वहां उसने मेरी अकील और जाकिर नाम दो लोगों से मुलाकात कराई, जो यह लाइब्रेरी देखते थे। अकील और जाकिर बीड के ही रहने वाले हैं। जब मैं लाइब्रेरी जाता था, उस वक्त कागजी दरवाजा मोहल्ला में रहनेवाले जैबीउद्दीन उर्फ जैबी व फैयाज भी लाइब्रेरी आते थे। उसी बहाने मेरी जैबी और फैयाज से पहचान हुई। संयोग से लाइब्रेरी चलाने को लेकर जाकिर और अकील के बीच झगड़ा हो गया। इस वजह से दोनों ने लाइब्रेरी छोड़ दी। तब लाइब्रेरी का कारोबार जैबी और फैयाज ने हाथ में ले लिया।




सिमी की बैठक
सन 2002 में बीड में एक धार्मिक प्रोग्राम हुआ था। उसमें गांव के सब लोगों को दावत दी गई थी। मैं भी उसमें शरीक होने गया था। उस वक्त अकील ने मेरी पहचान औरंगाबाद के रहने वाले आमिर से करवाई थी। मुझ मालूम हुआ कि वह सिमी संगठन से जुड़ा हुआ है। आमिर ने बीड में सिमी का अधिवेशन किया हुआ था। उस वक्त कागजी दरवाजा मोहल्ला में रहनेवाले फैयाज और अकील भी वहां मौजूद थे। औरंगाबाद में रहनेवाले अकील को मैं कई महीने से जानता हूं और जानता हूं अब्दुल अजीम नामक शख्स को भी। वह मेरा दूर का रिश्तेदार भी था। अजीम उस वक्त बीड में ड्राइवर का काम करता है। मैं जब छठी कक्षा में था, तब बीड में रहनेवाले एजाज से भी मेरी पहचान हो गई। परभणी में रहनेवाले इमरान से मेरी पहचान भी कुछ दिनों पहले हुई थी।

औरंगाबाद में हुई मुलाकात
सन 2005 के आखिर में मैं फैयाज को मिलने आजाद कॉलेज औरंगाबाद गया था। उस वक्त कॉलेज हॉस्टेल में मैं फैयाज से मिला। वह भी सिमी संगटन का सदस्य है। उस वक्त वकार नाम का लड़का भी कमरे में मौजूद था। बाद में मार्च 2006 में मैं फिर फैयाज को मिलने आजाद कॉलेज गया था। तब फैयाज एक दोस्त अफरोज के साथ मोटरसाइकल पर मुझे मिलाने बीड आया था। उस वक्त मैं, आमिर, जैबीउद्दीन, वकार, एजाज, अलीफ और अकील से मिलता था। इमरान ने मुझे परभणी में खुद का मोबाइल नंबर दिया था और मेरे घर का नंबर उसने लिखा था।

अंप्रैल 2006 में जब मैं लाइब्रेरी में गया, उस वक्त अकील मेरे साथ था। थोड़ी देर में लाइब्रेरी में फैयाज आ गया। हमारी बातचीत हो गई। तब फैयाज ने मुझे बताया कि उसका दुबई में जॉब का काम हो गया और वह दुबई जा रहा है।

ईरान का टिकट
8 मई 2006 को मैं कागजी दरवाजा मोहल्ले में अकील की दुकान में मौजूद था। उस वक्त करीब चार बजे फैयाज मोटरसाइकल से वहां आया था। तब फैयाज ने मुझे बताया कि आज रात को वह मुंबई जानेवाला है और मुंबई से दूसरे दिन ईरान जाने वाला है। ऐसा बताकर वह वहां से निकल गया। शाम को सात बजे मेरे मोबाइल पर फैयाज का फोन आया। उसने मुझे बताया कि औरंगाबाद से अलीफ और बीड से आमिर आए हुए हैं और वह दोनों सिटी होटेल के पास रुके हुए हैं। उनको जाकर मिलो और बाद में घर के पास ढाबे पर ले जाओ। मैंने वैसा ही किया। करीब 15- 20 मिनट बाद फैयाज, जैबीउद्दीन, अकील और एजाज वहां पर आए। 5 मिनट बाद अब्दुल अजीज सफेद रंग की टाटा सूमो गाड़ी लेकर आ गया। वहां पर हम सब लोगों ने साजिश रचनी शुरू कर दी। आमिर और जैबी ने हथियार मिलनेवाले हैं, ऐसा सबको बताया। आमिर, जैबीउद्दीन और फैयाज ने टाटा सूमो के पास पास जाकर और बातचीत की और फैयाज, जैबीउद्दीन और अब्दुल अजीज मुंबई जा रहे हैं, ऐसा बताकर वह निकल गए। बाद में आमिर, अलीफ और मैं आमिर की मोटरसाइकिल से वापस आए। मुझे बस स्टैंड पर छोड़कर वे दोनों औरंगाबाद के लिए चले गए।

9 मई, 2006 में मेरा छोटा भाई असद एसटीडी बूथ पर बैठा था। तब साढ़े चार बजे मेरे मोबाइल नंबर पर जैबीउद्दीन का फोन आया कि उसके पीछे लोग लगे हुए हैं। हम लोग मुश्किल में हैं। शाम को सात बजे फिर उसका मोबाइल पर फोन आया और कहा कि बीड छोड़ दो, क्योंकि हमारे संगठन के कई लोग पकड़े गए हैं और उसने फोन काट दिया।

सोर्स: नवभारत टाइम्स

कांग्रेस के भद्रलोक में दो इस्तीफे




कांग्रेस के भद्रलोक में एक ही दिन में दो इस्तीफे हुए. पहला इस्तीफा हुआ हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र में लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मामलों के मंत्री वीरभद्र सिंह ने तो दूसरा इस्तीफा दिया वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने. कांग्रेस के भद्रलोक से इन दो भद्रजनों की विदाई हुई लेकिन अलग अलग मायनों और अर्थों में. प्रणव मुखर्जी का इस्तीफा राजनीति में उनकी पदोन्नति है तो वीरभद्र का इस्तीफा एक ऐसा प्रहार जिसके बचाव में वे सिर्फ इतना ही कह सके कि पचास साल के राजनीतिक कैरियर में उनके जीवन पर कोई दाग नहीं लगा.




वीरभद्र को इस्तीफा इसलिए देना पड़ा क्योंकि उनके ऊपर एक 23 साल पुराना भ्रष्टाचार का मामला है जिसपर सुनवाई करते हुए हिमाचल की एक स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ आरोप सिद्ध कर दिये. उनके ऊपर आरोप है कि आज से तेईस साल पहले वे और उनकी पत्नी एक आईएएस अधिकारी मोहिन्दर लाल से पैसे के लेन देन की बात कर रहे थे. 2007 में राजनीतिक दांव पेंच के चलते कांग्रेस के ही एक पूर्व मंत्री विजय सिंह मनकोटिया ने वीरभद्र पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था जिसके आधार पर 2009 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चलाने के लिए स्थानीय अदालत में आवेदन किया गया था. अब स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.

सोमवार को आये इस आदेश के बाद बीरभद्र ने कांग्रेस की सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की और अपनी सफाई दी लेकिन उन्हें लग गया कि अब वे भ्रष्टाचार के आरोपों के सहित इस पद पर बने नहीं रह सकते. इसी साल हिमाचल प्रदेश में चुनाव हैं और टीम अन्ना पूरे जोर शोर से हिमाचल में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने की तैयारी में है. ऐसे में हिमाचल के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके बीरभद्र पर अगर दाग लग जाए तो ऐसे दाग लगे नेता को लेकर कांग्रेस मैदान में उतरने से बचना चाहेगी. उसने वही किया और कांग्रेसी भद्रलोक से अब शायद हमेशा के लिए बीरभद्र की बिदाई हो गई.

भद्रलोक से विदाई तो प्रणव मुखर्जी की भी हुई लेकिन वैसी नहीं जैसी बीरभद्र की. प्रणव मुखर्जी अब राजनीति का रोजमर्रा का काम छोड़कर रायसीना हिल्स के राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाने जा रहे हैं. कांग्रेस उनकी उम्मीदवारी में चार चांद लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है इसलिए एक पैनल भी गठित कर दिया है जो कि दादा के लिए चुनाव प्रबंधन का काम करेगी. बड़ी घोषणा करके वित्तमंत्रालय छोड़ने जा रहे दादा ने जब वित्त मंत्रालय से इस्तीफा देने का वक्त आया तो कह दिया कि वित्त मंत्री पद पर अंतिम दिन था इसलिए वे किसी भी नीतिगत मुद्दे पर बात नहीं कर सकते। अब उनके बाद अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार तक तक संभाले रहेंगे जब तक नया वित्तमंत्री नहीं मिल जाता.

खैर, एक ही दिन में कांग्रेस के दो शीर्ष नेताओं का मंत्रिमंडल से इस्तीफा हुआ लेकिन अलग अलग कारणों से. लगभग हमउम्र वीरभद्र और प्रणव की यह विदाई राजनीति की वह क्रूर सच्चाई है जहां बड़े राजनीतिक फायदों के लिए अक्सर बीरभद्र जैसे नेताओं को जिबह कर दिया जाता है, या फिर यह भी होता है कि उन्हें प्रणव मुखर्जी बना दिया जाता है.

दोराहे पर खड़ी भाजपा

- प्रवीण कुमार



भाजपा का मिशन-2014 लड़खड़ाता दिख रहा है। वजह है पार्टी में अंतरकलह और नीतिगत अंतरद्वंद्व की स्थिति। मुंबई में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अंतरकलह और अंतरद्वंद्व दोनों ही स्थितियां इसी मुंबई अधिवेशन से जिन्न बनकर निकली है और पार्टी हाईकमान को डरा रही है। पहले बात करते हैं अंतरकलह की। मुंबई अधिवेशन में नरेंद्र मोदी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिस तरह से पार्टी के एक कर्तव्यनिष्ठ नेता व कार्यकर्ता संजय जोशी को बलि का बकरा बनाया गया यह पार्टी के एक धड़े को नहीं पचा। यह वही धड़ा है जो हमेशा से नरेंद्र मोदी की खिलाफत करता आया है। यह धड़ा है लालकृष्ण आडवाणी एंड कंपनी।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी (पीएम इन वेटिंग) नहीं चाहते कि उनके रहते भाजपा में प्रधानमंत्री का कोई और दावेदार हो। इसमें कोई दो राय नहीं कि आडवाणी भाजपा ही नहीं देश के गिने चुने बड़े नेताओं में शुमार किए जाते हैं, वैचारिक रूप से काफी सबल भी हैं, लेकिन देश को लेकर उनकी सोच काफी साफ नहीं है। सिर्फ प्रधानमंत्री बनने के लिए दावेदारी जताना अलग बात है और देश को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री बनना अलग बात है। जहां तक मैं समझता हूं, आडवाणी में अब देश को एक दिशा देने का कोई एजेंडा नहीं है। वह सिर्फ पीएम इन वेटिंग का जो दाग उनपर लगा हुआ है उसे मिटाने भर के लिए प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। देश आडवाणी की मंशा को अच्छी तरह से समझ चुका है और उनकी दावेदारी में कोई रुचि नहीं ले रहा है। भाजपा हाईकमान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की जनभावनाओं को भांपते हुए नरेंद्र मोदी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने की हिम्मत जुटा रहा है।

नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व निश्चित रूप से एक तानाशाह जैसा है। यह भय पार्टी हाईकमान को भी है और संघ परिवार को भी है। पार्टी और संघ दोनों में दो धड़े सक्रिय हैं। एक धड़ा मोदी की हिमायत कर रहा है तो एक धड़ा मोदी की खिलाफत। मालूम हो कि संजय जोशी संघ के कार्यकर्ता पहले हैं, पार्टी के नेता बाद में। भाजपा में जोशी का वजूद संघ परिवार की वजह से है। जाहिर है संघ परिवार में जोशी के समर्थक यह कतई नहीं चाहेंगे कि जोशी को बलि का बकरा बनाने वाला शख्स भाजपा में पीएम का भावी उम्मीदवार हो। इस बात को लेकर संघ के मुखपत्र पांचजन्य और आर्गेनाइजर में परस्पर विरोधी लेख छपे। मीडिया ने चटखारे लेकर इस तरह की खबरों को खूब प्रश्रय दिया कि भाजपा में अंतरकलह चरम पर है। पार्टी में अंतरकलह है इससे कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन जब यही अंतरकलह पार्टी के अस्तित्व के लिए संकट पैदा करने लगे तो मिशन-2014 को लेकर पार्टी हाईकमान का चिंतित होना लाजिमी है।

अब बात करते हैं भाजपा के नीतिगत अंतर्द्वंद्व की। मिशन-2014 को लेकर पार्टी में अंतर्द्वंद्व साफ दिख रहा है। पार्टी हाईकमान को यह समझ नहीं आ रहा कि वह कट्टरपंथ की राह अपनाए या फिर उदारपंथ की। मेरी राय में पार्टी को न तो कट्टपंथ के राह पर आगे बढ़ना चाहिए और न ही उदारपंथ की राह पर। एक तीसरा पंथ जिसे हिंदू पंथ का नाम दिया जा सकता है, को अपनाने में कोई हर्जा नहीं है। इसकी तरफदारी सरसंघचालक मोहन भागवत कर चुके हैं। उनके कहने का आशय यह था कि देश का प्रधानमंत्री अगर कोई हिंदु छवि वाला नेता हो तो इसमें गलत क्या है। अगर वैचारिक प्रतिबद्धता से थोड़ा ऊपर उठकर सोचा जाए तो मोहन भागवत की बात को नकारा नहीं जा सकता। अगर आप नरेंद्र मोदी को हिंदु छवि का नेता मानते हैं तो ये देखना ज्यादा मुनासिब होगा कि क्या मोदी राज में मुसलमानों की तरक्की रूक गई, उनका जीने का सहारा छीन लिया गया या मुसलमान गुजरात से पलायन कर गए। अगर इन सवालों का जवाब नहीं में आता है तो फिर देश का प्रधानमंत्री हिंदुत्ववादी नेता हो या कट्टरपंथी छवि का हो, क्या फर्क पड़ता है।

बहरहाल, भाजपा हाईकमान को मिशन-2014 के लिए पार्टी में कड़े फैसले लेने होंगे। अंतरकलह और नीतिगत अंतर्द्वंद्व से पार्टी को उबरना होगा। कुछ पाने के लिए पार्टी को कुछ खोने के लिए भी तैयार रहना होगा। अगर पार्टी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने का मन बना रही है तो इसको लेकर ऊहापोह की स्थिति खत्म होनी चाहिए। इसी ऊहापोह की वजह से पार्टी की सेहत लगातार बिगड़ी है। पार्टी के नेताओं को यह मान लेना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भाजपा में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी को छोड़ दें तो कोई और नेता नहीं जो जनता के बीच अपनी दावेदारी को मजबूती से रख सके। एक अहम बात और कि प्रणब मुखर्जी अगर राष्ट्रपति चुनाव जीत जाते हैं तो नरेंद्र मोदी के मुकाबले में कांग्रेस नीत यूपीए में भी कोई टक्कर का नेता नहीं है। इसलिए भाजपा को यह सुनहरा मौका नहीं गंवाना चाहिए।