गुरुवार, 29 मार्च 2012

आंध्र प्रदेश में करोड़ों का जमीन घोटाला



हैदराबाद। आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मनमाने ढंग से जमीन आवंटन कर राज्य को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगाई है। विधानसभा में गुरुवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] की रिपोर्ट में इस घोटाले का रहस्योद्घाटन किया गया है। इनमें से ज्यादातर आवंटन दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल [2004-09] में किए गए थे।

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2006-2011 के दौरान राज्य सरकार द्वारा जमीन के आवंटन और बिक्री में गंभीर अनियमितता बरती गई। सब कुछ तदर्थ ढंग से किया गया। राज्य के वित्ताीय एवं सामाजिक-आर्थिक हितों को दरकिनार करते हुए बहुत कम कीमत पर जमीन का आवंटन किया गया। जमीन आवंटन और बिक्री के ज्यादातर मामलों में राज्य सरकार ने स्थापित प्रक्रियाओं का खुलेआम उल्लंघन किया।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार जमीन के बाजार मूल्य और आवंटन मूल्य में अंतर के कारण आवंटियों को 1784 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। वर्ष 2006-11 के दौरान राज्य सरकार ने एक हजार से ज्यादा लोगों को 88 हजार 492 एकड़ जमीन का आवंटन किया। कैग ने इनमें से 409 मामलों की जांच की है। जांच में पाया गया कि वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए किए गए इन आवंटनों में पारदर्शिता नहीं बरती गई।

2050 में दुनिया का सबसे अमीर देश होगा भारत



नई दिल्‍ली। हम सभी जानते हैं कि अपनी अर्थव्‍यवस्‍था के दम पर अमेरिका पूरे विश्‍व पर दादा‍गिरी दिखाता है, चीन रौब झाड़ता है और रूस किसी भी मामले में हस्‍तक्षेप करने में पीछे नहीं रहता। अगर हम भारतीय यह सोचते हैं कि यह दिन हमारे लिये कब आयेगा, तो यह जान लीजिये कि वो दिन आयेगा और जरूर आयेगा। वो भी 2050 में। जी हां 2050 में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया में नंबर-1 पर होगी।

अमेरिका के नाइट फ्रैंक एंड सिटीप्राइवेट बैंक की वेल्‍थ रिपोर्ट 2012 ने यह अनुमान लगाया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जीडीपी 85 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जायेगी। उस समय भारत की जीडीपी वर्तमान में पूरे विश्‍व की जीडीपी से भी अधिक होगी। इसके अलावा कई अन्‍य देश भी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में उभरेंगे। यही नहीं सभी महाद्वीपों में एशिया सबसे ज्‍यादा समृद्ध होगा।

2020 में अमेरिका से आगे निकल जायेगा चीन

उत्‍तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप इस समय विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था का 41 प्रतिशत हैं, जो घट कर 18 प्रतिशत तक रह जायेंगी। वहीं एशिया का शेयर 27 फीसदी से बढ़कर 49 फीसदी तक पहुंच जायेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में चीन की अर्थव्‍यवस्‍था अमेरिका से आगे निकल जायेगी। लेकिन चीन भी ज्‍यादा समय तक वर्चस्‍व को कायम नहीं रख पायेगा और 2050 में भारत उससे भी आगे निकल जायेगा।

लंदन स्‍कूल ऑफ इक्‍नॉमिक्‍स के प्रोफेसर डैनी क्‍वाह द्वारा की गई इस गणना के मुताबिक वैश्वित अर्थव्‍यवस्‍था का फोकल केंद्र भी खिसक रहा है। 2050 में इसका केंद्र चीन और भारत में कहीं होगा। 1980 में यह अटलांटिक के पास था। रिपोर्ट के मुताबिक एशिया इस कदर ऊपर उठेगा कि यहां के लोगों की संपत्ति भी अमेरिका के लोगों से अधिक होगी। 18,000 से अधिक सेंटा-मिलियनेयर्स होंगे जो दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन और जापान से होंगे। जो उत्‍तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप से अधिक होंगे।

मंगलवार, 20 मार्च 2012

सिल्वर स्क्रीन की ताजा खबरें




फिल्मों में नहीं आएंगे बेटे

अभिनेता-निर्माता अक्षय कुमार अपनी व्यस्तताओं के बावजूद अपने 10 वर्षीय बेटे अरव के साथ अच्छा समय बिताते हैं लेकिन उनका कहना है कि वह उसे फिल्मों से दूर रखना चाहते हैं। अक्षय ने कहा, वह बहुत छोटा है। मैं अपने बेटे को फिल्मों से दूर रखना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि वह अपने बचपन को जीए। मैं चाहता हूं कि वह जाए और फुटबॉल खेले। समुद्र तट पर जाए और जीवन का आनंद ले। बॉलीवुड सितारे अक्षय ने खुलासा किया कि वह अनुशासित जीवन जीते हैं और अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अपने नियम नहीं तोड़ते। उन्होंने कहा, मैं पार्टियों में शामिल नहीं होता। मैं समझ नहीं पाता कि वे इतनी तेज आवाज में संगीत क्यों बजाते हैं। मैं जल्दी सोना पसंद करता हूं। मैं रात में नौ-साढ़े नौ बजे सोने चला जाता हूं और सुबह 4.30 बजे उठ जाता हूं। अक्षय ने कहा, ट्विंकल रात में 8.45 बजे सोती हैं और भगवान का शुक्र है कि उनमें और मुझमें केवल यही समानता है। जब आपका साथी भी उसी समय सोता है तो आपका जीवन बहुत शांत बन जाता है। हम दोनों में यह समानता है। इस साल प्रदर्शित होने जा रही अक्षय की पहली फिल्म हाउसफुल -2 है, जो पांच अप्रैल को प्रदर्शित होगी।

जब मर्द बनीं लेडी गागा
पॉप सटार लेडी गागा अब मर्द बन गई है। ऐसा इसलिए ताकि वह मर्दों के प्यार को लेकर सोच समझ सकें। दरअसल गागा ने लगातार दो हफ्तों तक पुरुषों के परिधान पहने ताकि वह उनकी सोच समझ पाएं। सूत्रों के मुताबिक पुरुषों के परिधान में उनकी तस्वीर वोग के जापान संस्करण में भी आवरण पृष्ठ पर प्रकाशित की गई है। गागा ने कहा, मुझमें मनोवैज्ञानिक परिवर्तन आए हैं। मैं पूरी तरह पुरुषों के मस्तिष्क को समझना चाहती थी। मेरे पुरुषों के साथ संबंध अच्छे नहीं रहे हैं।

वापसी का इंतजार

रैप गायक जे-जेड अपनी पत्नी बेयोंसे नोल्स की काम में वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जे-जेड चाहते हैं कि अब उनकी बेटी को जन्म देने के बाद बेयोंसे अपने कैरियर में वापसी करें। जे-जेड ने बेयोंसे की वापसी के लिए एक संगीत यात्रा की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। उन्होंने बेयोंसे की विश्व संगीत यात्रा के लिए लाइव नेशन से 15 करोड़ डॉलर के एक अनुबंध के लिए सम्पर्क भी किया था। एक सूत्र का कहना है कि ब्लू आईवी के जन्म के कुछ सप्ताह बाद ही जे-जेड ने बेयोंसे की संगीत यात्रा के लिए लाइव नेशन से मुलाकात की। वह 15 करोड़ डॉलर का अनुबंध चाहते थे लेकिन कम्पनी इससे कम राशि पर अनुबंध चाहती थी।

भागी कैटी पेरी!

गायिका कैटी पेरी अपने पूर्व पति रसेल ब्रांड से सामना नहीं करना चाहतीं। यही वजह है कि जब उन्हें पता चला कि वह जिस नाइटक्लब में हैं, वहां ब्रांड भी पहुंच रहे हैं तो वह वहां से चली गईं। वेबसाइट कांटेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम के मुताबिक पेरी मेफेयर क्लब में मौजूद थीं लेकिन जब किसी ने उन्हें बताया कि ब्रांड भी इसी क्लब में पहुंच रहे हैं तो वह उनसे बचने के लिए तुरंत वहां से चली गई। एक सूत्र ने बताया, वह क्लब में रात गुजारना चाहती थीं। वह जब भी वहां होती हैं तो उनकी दोस्त रिहाना भी वहां पहुंच जाती हैं। लेकिन जब उन्हें पता चला कि ब्रांड वहां पहुंच रहे हैं तो उन्हें वहां से जाना पड़ा।

करीब आए रैना और अनुष्का!

टीम इंडिया के बल्लेबाज सुरेश रैना व बैंड बाजा बारात की अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक दूसरे के करीब नजर आ रहे हैं। बताते हैं कि दोनों की पहली मुलाकात कुछ महीने पहले लंदन में हुई थी। टीम इंडिया उस दौरान इंग्लैण्ड के दौरे पर थी। इसके बाद रैना और अनुष्का की दोस्ती इतनी बढ़ी कि कई बार साथ-साथ घूमते हुए देखे गए। खबर है कि सुरेश रैना बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को दिल दे बैठे हैं। अनुष्का क्रिकेटर की जिंदगी पर बनी फिल्म पटियाला हाउस में काम कर चुकी हंै। रैना और अनुष्का के नजदीकी लोगों के मुताबिक दोनों के बीच अच्छी केमेस्ट्री है। इस बारे में न तो रैना और न ही अनुष्का ने अभी तक कुछ नहीं कहा है। उत्तराखंड की रहने वाली अनुष्का सेना अधिकारी की बेटी है। अनुष्का का भाई कर्नेश राज्य स्तरीय खिलाड़ी भी है। गौरतलब है कि बल्लेबाज रैना कुछ समय पहले केन्द्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल की बेटी के साथ भी देखे गए थे। 27 नवंबर 1986 को जन्मे युवा सुरेश रैना की गिनती भारतीय क्रिकेट टीम के उन चन्द खिलाडिय़ों में की जाती है जो मैदान पर अपने चुस्त क्षेत्ररक्षण के लिए जाने जाते हैं। रैना का जन्म श्रीनगर में हुआ था। उन्हें क्रिकेट का बड़ा शौक था और इसीलिए वह श्रीनगर से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शिफ्ट हो गए थे। रैना मैदान पर जितने आक्रामक हैं, मैदान के बाहर उतने ही कूल और अक्सर मस्तियां करते नजर आते हैं। अब देखना है कि वह बैंड बाजा बारात के बारे में कितना कूल रहते हैं।

सबसे ज्यादा जोखिम
मशहूर चरित्र अभिनेता शरत सक्सेना का कहना है कि अगर जोखिम भरे व्यवसाय की बात की जाए तो हिंदी फिल्म उद्योग सबसे मेहनती जमात है। गत एक वर्ष से फिल्मों से नदारद नजर आ रहे अभिनेता शरत सक्सेना आखिरी बार सलमान खान के साथ बॉडीगार्ड में नजर आए थे। हाल ही में दिए अपने एक साक्षात्कार में शरत ने कहा कि, मुम्बई फिल्म उद्योग सबसे मेहनती है लेकिन उसका काम बेहद जोखिम भरा है। इसके बावजूद हर साल कई अच्छी फिल्में बनती हैं। 61 वर्षीय शरत ने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगू, मलयालम, पंजाबी और अंग्रेजी फिल्मों में काम किया है। हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों के बीच के अंतर को साफ करते हुए शरत कहते हैं, क्षेत्रीय फिल्मों के साथ बहुत कम जोखिम जुड़ा होता है क्योंकि ऐसी फिल्मों को देखने वाले लोगों के हित, पसंद और नापसंद समान होते हैं। क्षेत्रीय फिल्मों के अभिनेता मंदिरों में पूजे जाते हैं लेकिन हिंदी फिल्मों के साथ ऐसा नहीं है। हिंदी फिल्में देश भर में रिलीज होती हैं और जब इसे हर जगह सराहना मिलती है, तभी इसे हिट करार दिया जाता है। हिंदी फिल्मों को हर जगह के लोगों को संतुष्ट करना होता है।

कंगना ने मनाया जन्मदिन
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना राणावत ने अपना जन्मदिन मनाया। रूपहले पर्दे पर दर्द भरी भूमिकाओं को साकार करने वाली कमसिन अभिनेत्री कंगना का फिल्मी सफर अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां उन्हें स्वयं को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। वे हिन्दी फिल्मों की मुख्यधारा की अभिनेत्रियों में अपना स्थान सुरक्षित कर चुकी हैं। मनाली के मध्यम वर्गीय परिवार में पली- बढ़ी कंगना को बचपन से ही हिन्दी फिल्मों की चकाचौंध आकर्षित करती थी। उनका जन्म 20 मार्च 1987 को हुआ था। उन्नीस वर्ष की उम्र में ही कंगना ने फिल्मों में अभिनय के प्रति अपनी रुचि से प्रेरित होकर पहले दिल्ली और फिर मुंबई का रुख कर लिया। भट्ट कैंप ने कंगना की अभिनय-प्रतिभा पर विश्वास किया और उन्हें गैंगेस्टर में नायिका सिमरन की भूमिका निभाने का अवसर मिल गया। पहली ही फिल्म गैंगेस्टर में कंगना के अभिनय और आकर्षण ने दर्शकों को अपने मोह-पाश में बांध लिया। गैंगेस्टर के बाद कंगना के अभिनय ने वो लम्हे में फिर नई ऊंचाइयां छुई। जल्द ही वह शूट आउट एट वडाला में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी।

सचिन के लिए गीत लिखूंगा

हिंदी फिल्म जगत के लोकप्रिय गायक कैलाश खेर क्रिकेट की दुनिया के शहंशाह सचिन तेंदुलकर के सम्मान में एक गीत लिखने की योजना बना रहे हैं। अपने नए एलबम 'रंगीलेÓ के जारी होने के बाद खेर भारत, इंडोनेशिया और बाली के कई शहरों में अपना कार्यक्रम पेश कर रहे हैं। इससे पहले 18 मार्च को वह अपने बैंड कैलाशा के साथ ढाका गये थे और तेंदुलकर के साथ मुलाकात की थी। तेंदुलकर ने बांग्लादेश के खिलाफ शतक लगाकर अपना शतकों का शतक पूरा किया था। तेंदुलकर के शानदार खेल उपलब्धियों से प्रेरित होकर खेर अब उन पर एक विशेष गीत लिख रहे हैं और उसकी धुन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं एक ऐसी धुन तैयार रहा हूं जो उनके व्यक्तित्व को दर्शाता हो। यह एक भावुकता से भरा गीत होगा। जब मैं सचिन के सामने गाऊंगा तो यह मुझे एक नई उंचाई प्रदान करेगा। सचिन एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं।Ó

बेकार गई कुर्बानी

बॉलीवुड में फिल्मों की रिलीज डेट को लेकर बहुत मारा - मारी रहती है। ऐसे में किसी को फेवर देकर अपनी बड़ी फिल्म की रिलीज पीछे कर देना वाकई बहुत बड़ी बात है। लेकिन यह दरियादिली बेकार चली जाए , तो क्या बीतती होगी यह कोई इन दिनों आदित्य चोपड़ा से पूछ सकता है। जी हां, आदित्य चोपड़ा ने आमिर खान को एक बड़ी दरियादिली दिखाई थी। दरअसल , आदित्य अपनी सलमान खान स्टारर एक था टाइगर को 1 जून को रिलीज करने की प्लानिंग में थे , लेकिन आमिर की रिक्वेस्ट पर उन्होंने इस बड़ी डेट को उनकी फिल्म तलाश के लिए छोड़ दिया। गौरतलब है कि 1 जून आईपीएल खत्म होने के बाद पहला शुक्रवार होगा और तमाम फिल्म मेकर्स की नजरें इस कैशिंग शुक्रवार पर थीं। पिछले साल ऐसे ही शुक्रवार को सलमान की रेडी आई थी और फिल्म ने बिजनेस के रिकॉर्ड बना दिए थे। सलमान के क्रेज और आईपीएल के बाद के पहले शुक्रवार के कॉम्बिनेशन को आदित्य पूरी तरह भुनाना चाहते थे, लेकिन धूम-3 के अपने विलेन यानी आमिर की बात को उन्होंने टाला नहीं और डेट उन्हें दे दी। लेकिन आमिर ने अपने टीवी शो के चलते अब तलाश को नवंबर तक खिसका दिया है , जिससे उनको दी गई आदित्य की यह फेवर बेकार चली गई। बहरहाल ,अब यह डेट खाली है , तो इस पर तमाम फिल्म मेकर्स अपनी नजरें जमाए हैं। कहा जा रहा था कि आदित्य फिर एक था टाइगर के बारे में सोच रहे हैं , लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि आदित्य ने फिल्म को ईद पर लाने का फैसला किया है। सलमान ईद पर हमेशा हिट रहते हैं , इसलिए वह 1 जून के बारे में नहीं सोच रहे। फिर मई में आदित्य अर्जुन कपूर और परीनिति को इश्कजादे में ला रहे हैं , तो वह दो फिल्में एक साथ लाना अवॉइड ही करेंगे। ऐसे में 1 जून को आमिर की बजाय अक्षय कुमार के आने की पॉसिबिलिटी ज्यादा है। दरअसल , उनकी फिल्म राउठी राठौर जून मिड में रिलीज होनी है और वह आराम से इसकी रिलीज 15 दिन पहले कर सकते हैं।

साइज जीरो पर फिल्म

करीना कपूर अपने साइज जीरो पर पहले से कम नहीं इतरातीं, लेकिन अब तो उनके नखरे सातवें आसमान पर होंगे। जी हां,खबर है कि अब इस पर एक फिल्म बनने जा रही है। दरअसल, साइज जीरो नाम की यह फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी पर बेस्ड होगी, जिसमें बेबो के साइज को फॉलो करने की जबर्दस्त धुन है। बता दें कि फिल्म के प्रोड्यूसर सिद्धार्थ जैन हैं और यंग राइटर्स अनीश पटेल व कारमेन जैनाबादी ने इसे लिखा है। इस बारे में सिद्धार्थ ने बताया, फिल्म की कहानी कुछ वैसी ही होगी, जैसी रीज विदरस्पून स्टारर लिगली ब्लॉन्ड में थी। हमें पता चला है कि फिल्म की लीड के लिए इन दिनों ऑडिशन लिया जा रहा है। तलाश किसी फ्रेश फेस की है। और हां , डायरेक्टर के तौर पर अरुणा राजे का नाम फाइनल हो गया है।

टीवी पर लव मेकिंग ट्रेंड

अब सेंसुअस सीन्स के मामले में भी फिल्मों को टीवी से कड़ी टक्कर मिलने वाली है। हाल ही में तमाम सीरियल्स में जिस तरह यह हॉट जलवा नजर आ रहा है , उससे तो कम से कम यही लगता है ।

इससे पहले यह मामला टीवी पर दिखाई जाने वाली फिल्मों और रियलिटी शोज के पंगों तक ही सिमटा था , लेकिन अब सीरियल भी इस ट्रेंड से इंस्पायर्ड हो रहे हैं। बेशक आपके लिए इन दिनों छोटे पर्दे पर छाए धड़कते सीन्स का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होगा। ये सीन भले ही फिल्मों और रियलिटी शोज जैसे बोल्ड ना हों , लेकिन छोटे पैकेज में बड़ी इमेजिनेशंस जरूर दे जाते हैं।

रिलेशनशिप्स

छोटे पर्दे पर फिलहाल ट्रेंड है कपल के लविंग रिलेशनशिप्स को हाइलाइट करने का। नव्या,अफसर बिटिया, कुछ तो लोग कहेंगे, बालिका वधू वगैरह सभी लव स्टोरीज के एंगल के साथ प्ले कर रहे हैं। जाहिर है , सभी एक तरह का रोमांस नहीं दिखा सकते, इसलिए कुछ सीरियलों में यह मैच्योरिटी लेवल थोड़ा आगे बढ़ते हुए इन कपल्स के बेडरूम रोमांस का आइडिया दे रहा है। हाल ही में जब प्रिया और राम कपूर ने अपनी सुहाग रात मनाई, तो साइबर वल्र्ड तक में अगले दिन तक इसके चर्चे रहे। मजेदार बात यह रही कि उस दिन का पूरा एपिसोड बस उन्हीं के प्यार में रंगा रहा। ऐसे में कहानी में नया ट्विस्ट आने के साथ ही अब तक कि छोटे पर्दे की सबसे लंबी किस का रेकॉर्ड भी बना। वैसे , प्रिया और राम ने इस मामले में अपने जूनियर्स से मात खाई। दरअसल, तुम देना साथ मेरा के लीड अभिलाषा और मनन पिछले दिनों ऐसे ही एक सीन में दिखे। रेड साड़ी पहने अभिलाषा पर मनन का दिल ऐसा मचला कि यह सीन 15 मिनट तक खिंचा। इसके अलावा, क्या हुआ तेरा वादा में प्रदीप और अनन्या का लव मेकिंग भी इसी अंदाज में दिखाया गया,तो ट्रेडिशनल सीरियल बालिका वधू को अगर भट्ट कैंप बना रहा होता, तो जगिया और आनंदी के बीच टॉवल पकड़ाने वाले सीन के बाद जरूर कुछ हो गया होता ! बोल्ड सीन दिखाने की तर्ज पर सौभाग्यवती भव में कुछ ऐसा सीन दिखाया गया , जहां पति अपनी पत्नी से जबर्दस्ती कर रहा है। वहीं अमृत मंथन की लीड फीमेल करैक्टर भी अपने हीरो को हॉट सीक्वेंस में रिझाती नजर आएंगी।

क्या बोल्ड होंगे सीरियल

माना कि हॉट सीन्स का यह ट्रेंड अभी शुरुआती फेज में हैं और टीवी एक्सपर्ट्स इनको अभी बेबी स्टेप्स बता रहे हैं। लेकिन जिस तरह टीवी पर कहानियों के साथ एक्सपेरिमेंट्स का दौर खुल रहा है और एक्टर्स भी वैरायटी के लिए तैयार हैं, उसे देखते हुए आने वाला समय और बोल्ड सीरियल का होने वाला है। प्रोड्यूसर दिया सिंह कहती हैं, सीरियल्स के पॉपुलर होने की वजह यही है कि लोग इनसे खुद को कनेक्ट करके देखते हैं। ऐसे में थोड़ी-बहुत लिबर्टी तो ली जा सकती है। हां , किस हद तक क्या दिखाकर सेफ निकलना है,बेशक इसका ख्याल प्रॉडक्शन टीम को रखना होगा। वर्ना हमारे यहां के सेंसिटिव ऑडियंस हल्ला करने में देर नहीं लगाएंगे।

नहीं है शिकायत

मजेदार बात यह है कि इस हॉट जलवे को फिलहाल दर्शक भी पसंद कर रहे हैं। दरअसल , इस मामले में ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी के पास बहुत ही कम संख्या में शिकायतें आई हैं। हालांकि , फैमिलीज इसे उतने कंफर्ट जोन में एक साथ नहीं देख पा रही हैं , इसलिए रिपीट और ऑनलाइन एपिसोड्स को भी अच्छे हिट्स मिल रहे हैं। बैंक मैनेजर स्वाति कपूर बताती हैं , मुझे और मेरी फ्रेंड्स को बड़े अच्छे लगते हैं का सीन देखने का बहुत क्रेज था। बेशक उसके प्रोमोज कैंडल लाइट रोमांस की याद दिला रहे थे। लेकिन प्लानिंग के बावजूद मैं उसे नहीं देख पाई , क्योंकि मेरी सास और बेटी भी मेरे साथ थे। ऐसे में मैंने अगले दिन का रिपीट देखा।

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

विचारों को हकीकत में बदलिये





राजकुमार सोनी

दो विपरीत विचार हकीकत में नहीं बदलते- विचार नियम के बारे में अधूरा ज्ञान न रखें। आधे-अधूरे ज्ञान से विचार नियम का उपयोग करेंगे तो आपके जीवन में कुछ चीजें तो आ जाएंगी, कुछ विचार तो हकीकत में बदल जाएंगे, लेकिन फिर भी आप दु:खी रहेंगे। इसके लिए आप विचार नियम को पूरी तरह समझें। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन से विचार हकीकत में बदलते हैं। सारे विचार साकार नहीं होते, क्योंकि दिनभर में कई विचार यूं ही चलते रहते हैं। ये शेखचिल्ली जैसे विचार हकीकत में नहीं बदलते। जिन विचारों में होश और जोश होता है, वे ही हकीकत में बदलते हैं।


विचारों की भीड़

इंसान शेखचिल्ली की तरह विचारों की भीड़ में भटकता रहता है कि मुझे यह चाहिए... मुझे वह मिल गया तो इससे मैं यह कहूंगा... फिर ऐसा होगा...। इस तरह विचारों के शोरगुल में कई बार वह अपने ही विचारों के विरुद्ध सोचने लगता है। नतीजा यह होता है कि उसे कोई परिणाम नहीं मिलता। जिस इंसान को जीवन में कोई फल, कोई परिणाम नहीं मिल रहा हो, उसे इस बात पर मनन करना चाहिए कि मेरे विचार एक-दूसरे को कहां पर काट रहे हैं?
उदाहरण- एक आदमी सोचता है, मेरे घर में शांति हो जाए तो कितना अच्छा होगा। उसका यह विचार काम करने लगता है और उसके फल को देने की सृजन प्रक्रिया शुरू हो जाती है। मगर दूसरे ही दिन वह सोचने लगता है, इस घर में शांति संभव ही नहीं है। न तो मेरी पत्नी सुधरने वाली है, न ही मेरा भाई। ये लोग कभी नहीं सुधर सकते। उसके ऐसे विचार उसके पहले विचार को काट देते हैं। अगर सामने वाला नहीं सुधरेगा तो घर में शांति कैसे आएगी। उस इंसान को पता ही नहीं चलता कि उसने अपने इस नकारात्मक विचार से अपना कितना नुकसान कर दिया। उसने अपने पुराने सकारात्मक विचार को काट डाला और अच्छा फल देने वाली सृजन प्रक्रिाय को बीच में ही रोक दिया।

ऐसे रखें ख्याल
आपको इस बात का ख्याल रखना है। आपके विचार अच्छे होंगे लेकिन यदि आपको फल नहीं मिलता हो तो खुद से पूछें कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं अपने विचार काट रहा हूं? फिर स्वयं देखें कि मैं अपने अच्छे विचारों को कहां-कहां काट रहा हूं? अगर आप दो विपरीत दिशाओं में जाना चाहेंगे तो यह संभव नहीं होगा। कुदरत का नियम समझ लें। विचार नियम आपके होश और जोश वाली इच्छाएं पूरी करता है। अगर आप कहते हैं कि घर में शांति चाहिए, तो कुदरत उसकी सृजन प्रक्रिया शुरू कर देती है। दूसरी ओर, अगर आप कहते हैं कि मेरी पत्नी नहीं सुधरने वाली, तो भी कुदरत अपनी सृजन प्रक्रिया शुरू कर देती है। आप जो भी विचार करो, कुदरत तो बस तथास्तु कहती है, यानी आपको अपने कहे मुताबिक परिणाम मिलेंगे, आपकी हकीकत आपकी प्रबल इच्छा के अनुरूप होगी।

विचारों को काटें नहीं

जब इंसान की दो विपरीत विचारधाराएं एक दूसरे-दूसरे को काट देती हैं हैं तब वह देखता है कि उसके घर में कभी खुशी, कभी गम का माहौल चलता रहता है। उसे विचार नियम का पूर्ण ज्ञान नहीं होता इसलिए वह नहीं जानता कि उसके घर में स्थायी खुशी आ सकती थी, ज्यादा खुशी आ सकती थी लेकिन नकारात्मक विचार रखकर उसने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। उसने अपने विचारों में गलत बीज डालकर अपने नुकसान का फल खुद तैयार कर लिया। इसलिए इस बात का ध्यान रखें और यह मानकर चलें कि आप जो भी चाहते हैं, वह सब आपको मिल सकता है।

सही ढंग से पालन करें
अगर आप विचार नियम का सही पालन करें तो आपके जीवन में बहुत कुछ संभव हो सकता है। जब विचार नियम की पूर्ण समझ आ जाती है, तो फिर आपके विचार अलग ढंग के हो जाते हैं। फिर आपके जीवन में केवल खुशी और सुख ही आता है। फिर शेखचिल्ली जैसे विचार बंद हो जाते हैं।

भावना को बल दें
किसी महापुरुष से एक बार पूछा गया था कि - हम जो सपने देखते हैं, क्या वे साकार होते हैं? उसने कहा कि जो सपने हम सोते हुए देखते हैं, वे साकार नहीं होते। साकार तो वे सपने होते हैं, जो हमें सोने नहीं देते। उनके कहने का अर्थ यह था कि मनचाहे जीवन के जिन विचारों में प्रबल भावनाओं की शक्ति जुड़ जाती है, वे हमें कभी-कभी सोने नहीं देते। आपके कुछ विचार ऐसे होतेो हैं जो हकीकत में बदल चुके होते हैं, साकार हो चुके होते हैं, लेकिन उन्हें आप तक पहुंचने में देर लगती है। वे रास्ते में ही रुक गए होते हैं। ऐसा होता है क्योंकि आप उन विचारों को भावना का बल देना छोड़ देते हैं। आपको कुछ दिखाई नहीं देता कि क्या हो रहा है क्योंकि आपके लिए सब अदृश्य में होता है। अदृश्य में होने की वजह से लोग अपने विचारों को बल देना बंद कर देते हैं। वे कहते हैं कि हमने कुछ शुभ विचार रखे, मगर उसका अच्छा परिणाम नहीं मिल रहा है, कुछ तो गलत हो रहा है। जब चीजें दृश्य में नहीं दिखतीं तो उनका विश्वास चला जाता है और वे उन्हें भावना को बल देना बंद कर देते हैं, अपनी प्रार्थनाएं बंद कर देते हैं, मनन के द्वारा भावनाओं को जागृत करना बंद कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि जो चीज उनके पास आ रही थी, बीच में ही रुक जाती है। जब आप बुरी भावना महसूस करते हैं तब आप पीतल बनते हैं, जो लाल बल्ब का प्रतीक है। लाल बल्ब कहता है, रुको, कुछ करो, फिर चलो। जब आप खुशी की भावना महसूस करते हैं तब आप चुंबक बन जाते हैं, जो हरे बल्ब का प्रतीक है। हरा बल्ब कहता है, आगे चलो, सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। इस सूत्र को ध्यान में रखते हुए सदा खुश रहकर, चुंबक बनकर हर सकारात्मक चीज को आकर्।ित करें, जो आप अपने जीवन में चाहते हैं।

विचारों से सब कुछ पाएं
विचारों के द्वारा सब कुछ पाया जा सकता है तो लोगों ने क्यों नहीं पाया- कुछ लोगों के मन में सवाल आता है कि यदि विचारों से ही सब निर्माण होता है तो जिन लोगों को विचार नियम पता है उनके पास कार क्यों नहीं है। दुनिया के ऐशो आराम क्यों नहीं हैं? इसे उदाहरण से समझें- आपके सामने केक आया है, केक के ऊपर क्रीम लगी है। क्रीम के ऊपर चेरी रखी गई है। अब आप बताएं कि पहले आप चेरी खाएंगे या उसके ऊपर लगी हुई आइसक्रीम खाएंगे। हर इंसान इस सवाल का जवाब अलग देगा। कोई कहेगा, मैं पहले केक का छोटा टुकड़ा खाऊंगा और चेरी सबसे अंत में ही खाऊंगा ताकि अच्छा स्वाद लंबे समय तक बना रहे। कोई कहेगा, मैं पहले चेरी खाऊंगा, ताकि अच्छा स्वाद जल्दी से जल्दी मुंह में भर जाए। खाना खाते वक्त भी कई लोग ऐसा करते हैं। कुछ लोग स्वादिष्ट चीज को अंत के लिए बचाकर रखते हैं। कुछ लोग स्वादिष्ट चीज को सबसे पहले खाते हैं, तो कुछ लोग बीच-बीच में। यह लोगों का अपना चयन है, उनका चुनाव है। लोगों के मन में सवाल होते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि जो भी इंसान विचारों का रहस्य जान गया, उसके जीवन में सारे ऐशोआराम होने चाहिए। अगर नहीं है तो इसका अर्थ है कि सामने वाला विचारों का नियम नहीं जानता। परंतु ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है। वास्तव में हर एक के जीवन में प्राथमिकता अलग होती है। हर इंसान अपनी प्राथमिकता ों के अनुसार नियम का उपयोग करता है। लोकप्रिय हो जाने के बाद कुछ लोगों के जीवन में कई सारे बदलाव हो जाते हैं, जिनके कारण बाद में उन्हें सृजन का का समय ही नहीं मिलता। ऐसे भी लोग देखे गए हैं, जो फ्री नहीं होते और न ही रिस्क फ्री होते हैं। लोकप्रिय होने के कारण उनसे नया निर्माण होना बंद हो जाता है। इसलिए आपको पहले ही यह सोच लेना चाहिए कि आप अपने विचारों व्दारा किन चीजों को पहले आकर्षित करना चाहते हैं। कहीं गलत चीज आकर्षित कर ली तो उनसे निबटने में ही पूरा जीवन चला जाएगा। क ार की चाहत किसी के लिए बेकार हो सकती है तो वह उन चीजों के लिए प्रार्थना नहीं करेगा।

समस्या से पहले समाधान
समस्या से पहले समस्या का समाधान दिया जाता है- यह कुदरत का नियम है। इंसान को शक्ति पहले दी जाती है, समस्या बाद में दी जाती है। इसका अर्थ है कि विचार नियम आपके साथ सदैव कार्य कर ही रहा है। आप जो भी समस्या सुलझाना चाहते हैं, निर्णय लेना चाहते हैं, उसके लिए समाधान मौजूद हैं, इसलिए कहा गया कि थोड़ा सोचें, सही दिशा में सोचें। किसी की चाहत होती है कि मैं पहले फलां फलां चीजें प्राप्त कर लूं, इसके बाद जीवन को खुलकर जीऊंगा। पहले मुझे ये सब वस्तुएं मिल जाएं... पहले अच्छा पेन मिले... अच्छी नोटबुक्स मिले.... अच्छे रंग की स्याही मिले... फिर मैं लिखना शुरू करूंगा। दूसरी ओर, कुछ लेखकक ऐसे भी हुए हैं, जिन्होंने रद्दी कागजों पर ही कहानी लिख डाली। उन्होंने यह विचार नहीं किया कि पहले मुझे अच्छी नोटबुक मिल जाए.... अच्छे पेन मिल जाएं... फिर मैं एक अच्छी कहानी लिखूंगा। उन्हें जो मिला, उससे उन्होंने लिखना शुरू किया। कुछ लेखकों ने तो लिफाफे के पीछे, बस की टिकट के पीछे, जहां भी जगह मिली, वहीं लिखना शुरू कर दिया। वे सब कागज जमा करते गए। जब भी उनके कपड़ों की जेब में देखेंगे तो कई कागज निकल आएंगे। उन्होंने यह नहीं सोचा कि उन्हें सारी सुख-सुविधाएं चाहिए, तभी वे लिखेंगे। उनके मन में तो यह विचार था कि ऐसा सृजन करें, कोई ऐसी कहानी लिखें, जो विश्व में प्रसिद्ध हो, जो लोगों को पाठक बनाए। समय के साथ लोगों में पढऩे की आदत कम होती जा रही है। टीवी और कंप्यूटर आने के बाद लोग पुस्तकें पढऩा कम कर रहे हैं इसलिए ऐसे लेखक, लोगों में पढऩे की कम होती आदत को दोबारा स्थापित करना चाहता है। यह लेखक का मूल विचार होता है। वह कार, धन-दौलत के बारे में सोचता तक नहीं क्योंकि ये सब चीजें तो बोनस में अपने आप मिल जाती हैं। जरूरी नहीं है कि विचार रखने पर ही कार या धन-दौलत मिलेगी। वह तो अपने आप मिलेगी। मुख्य सवाल यह है कि आपका मूल विचार किस चीज को आकर्षित कर रहा है- समृद्धि को... दिव्य योजना को... ईश्वर के गुणों की अभिव्यक्ति को.... या प्रेम को आकर्षित कर रहा है? आपका मूल विचार अच्छी चीजों को आकर्षित करे या बुरी चीजों को, यह निर्णय आपको लेना है।

गुरुवार, 15 मार्च 2012

एड की दुनिया


- राजकुमार सोनी

बाजार का अपना गणित है, ग्राहकों को लुभाने में आज के ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में विज्ञापनों का बेहद महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही कारण है कि आज कंपनियों के उत्पादों के बाजार में लांचिंग से पहले उसके लिए ईमेज बिल्डिंग में लग जाती है ताकि समय पर प्रोडक्ट को मार्केट में सही से प्लेस और प्रमोशन किया जाता है। लांचिंग के बाद भी समय समय पर उत्पादों के प्रतियोगियों को मात देने में विज्ञापनों का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। इसके लिए कंपनियां एडवरटाइजिंग एजेंसियों के साथ मिलकर अपने एड कंपेंन तैयार करती है। देश में ऑटो और आईटी की कंपनियों ने अपने-अपने जो विज्ञापन टेलीविजन पर प्रस्तुत किए है वे तमाम एड रचनात्मकता के धरातल पर हास्यमय प्रस्तुति के ऐसे इमोशनल इनोवेशन है जो किसी भी व्यक्ति के मन में उस उत्पाद के लिए गहरी पैठ बनाने में सक्षम है। आजकल टेलीविजन पर ऑटोमोबाइल और आईटी कंपनियों के कुछ उम्दा विज्ञापनों पर आधारित एक कवर स्टोरी।


हच का हॉय कैंपेंन

देशभर में एस्सार के साथ हाथ मिलाने के बाद में हच ने जहां भी अपने कदम बढ़ाए सबसे पहले हॉय कैंपेंन सहारा लिया है। इस एड का काम बस इतना ही था कि लोगों को यह बता देना कि अब यह कंपनी अपनी सेवाएं आरम्भ करने जा रही है। इन एड के लिए टेलीविजन पर देश के किसी बड़े चेहरे का उपयोग नहीं किया गया था।

जहां आप वहां हमारा नेटवर्क
इसके बाद में हच ने अपना जो नया कैंपेंन 2003 में लांच किया उसको आज भी अपनाया जा रहा है। हच ने दूसरी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडरों से अलग बिना किसी बा्रंड एम्बैसेडर के अपने कैंपेंन को लांच किया। हच के इन एड ने एक नया बदलाव ला दिया है। जो आज तके भी जारी है। क्योंकि इनके सहारे कंपनी ने एक ऐसा फंडा ईजाद किया है जो किसी को भी टक्कर देने में सक्षम है। इस कैंपेंन के साथ ही हच के एड में एक स्मार्ट पब को शमिल किया जो एक बच्चे के साथ में हर जबह जाता है जहां जहां वह जाता है। बच्चे के खेलने जाने के साथ और बाल कटवाने जाने पर भी साथ रहता है। इस कैं पेंन का पंच लाइन था वेयरएवर यू गो अवर नेटवर्क फॉलो। इस एड में जो फंडा था उसने हच को देश भर में पॉपूलर बना दिया। इस एड को बनाने वाले वी महेश और राजीव राव थे जिसमें से अब वी महेश अब नहीं रहे है। वी महेश देश की जानी-मानी एजेंसी मुम्बई की ओगिल्वी एंड मथर के गु्रप क्रिएटिव डायरेक्टर थे। महेश का मानना था कि रचनात्मकता की उत्पति जिंदगी के तीखे अनुभवों से भी होती है।
अब बात इस एड यू एंड आई एड कैंपेंन में लड़के जयराम के साथ घूमने वाले पग चीका के बारे में भी बतों दें तो यह पग यूनाइटेड किंगडम से मंगावाया गया था। जिसको गावा के दंपत्ति विशाल और लिसा बांबेकर ने रखा है। वर्ष 2003 में भारतीय बाजर में जब कई मोबाइल कंपनियों बाजार को हथियाने की दौड़ में शामिल थी तब हच को देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को यह बताने आवश्यकतास थीं कि वह अपने कवरेज एयिा मेकं हर जगह पर कवरेज देने के लिए पर्याप्त है तो कंपनी ने मुम्बई की इस एजेंसी की अपने विज्ञापन का काम सौंप दिया। तो कंपनी के वी महेयश और रावजीव राव ने पूरी रात एक आईडिया सोचने में गुजार दी महेश बताते थे कि हम लोग कंपनी की तकनीक के बारे में बात नहीें करना चाह रहें थे और हम जान बूझकर लोगों को फोन पर बता करोते दिखाने से बचना चाहते थे उनका पहला आईडिया यह था कि एक छोटी बहन थीं जो उसके भाई का पीछा करती है लेकिन दूसरा विचार यह था कि किसी भी मनुश्य की तुलना में एक डॉग ज्यादा प्रभावी लगेगा। निष्कर्षत: मैसेज को क्लीयर करने के कारण उनकी सहमति डॉग पर बन गई। तब उन्होंने थीम को छू लिया था कि जहां आप जाएंगे वहीं हमारा नेटवर्क आपके साथ रहेगा। इस कैंपेंन का आईडिया यही तय हुआ कि एक ऐसा कुत्ता है जो बच्चे का ऐसे स्थानों पर भी साथ रहता है जहां कल्पना करना भी मुश्किल रहता है। जैसे स्कूल, नहाने और नाई की दुकान पर भी। ओएंडएम कंपनी की नेशनल बिजनैस डायरेक्टर रेणुका जयपाल का कहना है कि यह एक सामान्य वृति पूर्ण समानता है जो मानव के साथ डॉग के संबंध को दर्शाता है जो किसी भी आकस्मिक सहयोग का प्रतीक है।

गोवा में फिल्माया पहला एड

हच ने अपने इस एड कैंपेंन को गोवा में शूट किया था जो साठ सैकण्ड्स का था जिसमें बच्चे का रोल जयराम ने प्ले किया था। जो आठ साल की उम्र का बच्चा था जो पहले भी चार एड में काम कर चुका था। चीका को एड में लेने का सुझाव निर्वारा फिल्मस में काम करने वाले एक असिस्टेंट ने दिया था। इस कैंपेंन को जल्द ही समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया। इस एड के लिए चीका को 1.5 लाख का भमतान किया गया।
इस एड को पूरे देश के स्तर पर प्रसारित किया गया था। ओएंड एम के नेशनल डायरेक्टर पीयूष पांडे का कहना है कि मेरे लिए इस एड कैंपेंन सबसे बड़ा जादू इसकी सादगी है। जो आपके इमोयशनल ऐंटीना पर कुछ इस तरह असर डालता है कि आप इसके खत्म होने तक इसका मजा लेते है। इस एड केंपेंन को वर्ष 2003 का प्रिंट का सर्वश्रेष्ठ विज्ञापन और बिजनेस टूडे ने देश के दस बेस्ट टीवी विज्ञापनों में शामिल किया था।

कंपनी बदली बहुत कुछ बदला
सितंबर 2007 में जो बदलाव आएं है उनके चलते हुए हच इस अपने नाम को बदलने के साथ ही वोडाफोन ने अपनी कम्यूनीकेशन स्टे्रटजी और लोगो को भी बदल दिया है और तो पग को भी बदल दिया है पुराने पग चीका को स्पीकी नाम के नए पग ने रिप्लेस कर दिया है। जैसा कि उम्मीद की जा रही थी ओगिवी एंड माथर इंडिया ही देश में वोडाफोन का विज्ञापन देखते है।
एजेंसी की क्रिएटीव स्टे्रटजी के बारे में एजेंसी के क्रिएटीव डायरेक्टर ने कहा है कि हमारा वोडाफोन के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक और आऊटडोर विज्ञापन से जुड़े रहते है हम पिं्रट मीडिया में इनोवेशन के लिए तैयार करते है। हम इस साल के 20 सितंबर को ब्रांड नेम की घोषणा के बाद में मल्टी मीडिया एड का निर्माण करेगा। इसके बाद में हम युवा लड़के को स्पाईकी के साथ में अपने नेटवर्क को प्रमोट करने के लिए पेश करने ला रहे है। लेकिन कंपनी का टैग इंडिया जारी रहेगा।


हैप्पी टू हेल्प कैंपेंन

आईपीएल के सैकेड सीन के मैच के दौरान वोडाफोन ने अपने बेहद फैमस जूजू के बाद इस जुलाई 2009 में कंपनी ने एक बार फिर हैप्पी टू हैल्प कैंपेंन को लांच किया। जिसको ओएंडएम कंपनी ने अपने पुराने कैेंपेंन के अगले क्रम में बनाया है। जिसमें लड़की के साथ में पग को पात्र बनाया गया है। इस बारे में एजेंसी के राजीव राव कहते है कि इस समय में हम अपने वोडाफोन के ग्राहकों को अपनी सेवाओं के वादे को ताजा करने जा रहें है। हमारा वादा अपने आप में कोई नया नहीं है इस विज्ञापन में आरम्भ से ही ब्रांड की फिलोसॉफी को रिपें्रसेंट करती है पहली बार हमने आईपीएल2008 के दौरान भी प्रकट किया है। राव बताते है कि इस कैंपेंन का काम हमारे वादे में नया जीवन डालना है। वैसे भी कंज्यूमर को सेवा देने वादा ही काफी है।
राव का कहना है कि कुछ समय के बाद में जूजू की कंपनी के एड में वापसी होगी। जूजू को हर तरफ जो रेस्पांस मिला है उसको नकारा नहीं जा सकता है हम लोगों को बता देते है कि जल्द ही जूजू की वापसी होगी।

हैप्पी टू हैल्प में इस बार हॉस्टल
इस बार जो विज्ञापन आएं है उनमें से पहले में छोटी सी लड़की डारमट्री में रहती है एक तेज आवाज के साथ में वह सो जाती है। थोड़ी देर के बाद में वह वापस जग जाती है और पढऩे लग जाती है। इस शोट ेके कट होने पर वोडाफोन का पग दरवाजे के पास में दिखाई देता है। जैसे ही वह पांव की आवाज को सुनता है तो चिल्लाने वाले खिलौने को पांव से बजा देता है तो लड़की तुरंत किताब बंद करके सो जाती है। और जब पैरों की आवाज खत्म हो जाती है तो वह पग फिर से खिलौने से आवाज निकालता है और लड़की जग कर पुस्तक पढऩे लग जाती है। इसकी पंच लाइन है हैप्पी टू हेल्प नाइट एंड डे।

बैकिंग वोडाफोन कैंपेंन
टेलीविजन के इस दूसरे विज्ञापन में लड़की कुछ बना रही होती है लेकिन वह रेसिपी की किताब को बराबर पढ़ नहीं पाती है। क्योंकि इसके पेज हवा के कारण उड़ते रहते है। वह लड़की उसको ठीक नहीं कर पाती है क्योंकि उसके हाथ गिले और सने रहते है तभी पग की इंट्री होती है जो अपने पैरों के द्वारा किताब के पन्नों को उडऩे से रोकता है। इस बारे में कंपनी के कैंपेंन के बारे में राव का कहना है कि जूजू के बेहद लोक्रप्रिय सीरीज के विज्ञापनों पर काम करने के बाद में इस केंपेंन पर काम करने बेहद चुनौतिपूर्ण था। वोडाफोन हमेशा से ही ऐसे पात्रों के सााि में काम करता है जो उसके ब्रांड को अच्छे से सर्व करता है। जिसमें पग और जूजू दोनों शामिल है। इस सीरीज को बनाने में पीयूष पांडे, राजीव राव, एलिजाबेथ दियास, आरती कक्कड़ , भावना खैर और वीरेंद्र सिंदे के साथ अक्षय शेठ ने काम किया है। इस विज्ञापनों को प्रकाश वर्मा के निर्वाण फिल्मस ने शॉट किया है। इस जूजू एक ऐसा नाम है जिसके आज से एक साल पहले तक कोई नहीं होते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से यह लासेगों के दिलों पर छाया है कोई भी हंसे बिना रह नहीं सकता है। इसके बाद में जूजू किसी भी परिचय का मौहताज नहीं रहा है। जूजू वैसे एक विज्ञापन कैरेक्टर है जो इंडियन प्रिमीयर लीग के दूसरे सत्र के दौरान वोडाफोन ने अपने प्रमोशन के लिए तैयार किया था। जूजू सफेद भूत जैसे दिखने वाले प्राणी है जिनका गुब्बारों के जैसा शरीर है और अंडे के जैसे सीर है। जो वोडाफोन की कई वैल्यू एडेड सर्विसेज को प्रमोट करने के प्रयोग किया गया था। विज्ञपनों को देखने पर लगता है कि जूजू कोई ऐनीमेटेड कैरेक्टार के जैसे दिखते है लेकिन वासतव में इंसान थे जो जूजू के कॉस्च्यूम को पहने रहते है। वोडाफोन के दूसरे विज्ञपनों की ही तरह इनका निर्माण भी ओगिवी एंड और माथर एजेंसी ने किया था जिनको बैंगलौर आधारित निर्वाण फिल्मस ने दक्षिण अफ्रि का के केपटाऊन में फिल्माया था।

जूजू का निर्माण
वोडाफोन कंपनी के अपनी विज्ञापनों की सेवाएं देने वाली आगिवी एंड मथर कंपनी से कहा कि उनको ऐसे 30 विज्ञापना चाहिए जिनको कंपनी आईपीएल के सेंकेंड सीजन के दौरान प्रसारित कर सकें। ऐजेंसी के राजीव राव ने बताया कि हम वास्तविक इंसानों को लेकर के एनीमेशन के जैसा बनाना चाह रहे थे। इन विज्ञापनों को वास्तव में प्रकाश वर्मा बऔर उनकी पत्नी स्नेहा ने तैयार किया था जो बेेंगलौर के निर्माण फिल्मस का काम देचाते है। इस विज्ञापन का पूरा आइडिया और स्टेारी लाइन उनहीें के द्वारा तैयार कियार गया था। इस विज्ञापन का फिल्मांकन प्रकाश वर्मा के द्वारा किया गया और जिसका प्रोडक् शन निर्वाण फिल्मस ने किया था। दस दिनों के कम समय में और एक माह के प्रि प्रोडक् शन के काम के में लगभग 3 करोड़ रूपए खर्च हुए। जूजूू वास्तव में छोटे दिखने वाले प्राणी महिलाएं ही थी जो सफेद रंग के फब्रीक में लिपटी रहती है। चेहरे की हर भाव भंगिमा रबर के द्वारा तैयार की गई थी जिसे या फिर बाद में कलाकारों पर एनीमेशन के द्वारा पेस्ट की गई थी। इसी कारण से शूटिंग में समय और कीमत ज्यादा लगी।

वोडाफोन के ऐड कैरेक्टर 'जूजू'
इन छोटे-छोटे सफेद चेहरे हैं 'जूजू', जो इन दिनों वोडाफोन के ऐड में नजर आ रहे हैं। वोडाफोन अपनी वैल्यू ऐडेड सर्विसेज के ऐड में इन्हें पेश कर रही है। ऐड फिल्म्स बनाने वाली कंपनी निर्वाण फिल्म्स ने जूजू कैरेक्टर्स के साथ ये ऐड बनाए हैं, जिन्हें दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं। इससे पहले वोडाफोन का कुत्ते (पग) वाला ऐड भी निर्वाण फिल्म्स ने ही बनाया था।

रीयल कैरेक्टर हैं जूजू
आपको यह देखकर लगता होगा कि ये एनिमेटेड कैरेक्टर्स हैं, जो मानवीय संवेदनाएं दिखाते हैं। पर ऐसा नहीं है। ये मुंबई के लोकल थिएटर से लिए गए स्लिम वुमन एक्टर्स हैं, जिन्हें सफेद कपड$े पहनाकर जूजू का रूप दिया गया है।

जूजू का क्रेज जबर्दस्त
जूजू का क्रेज इतना ज्यादा है कि वोडाफोन के ऐड यूट्यूब पर सबसे ज्यादा वॉच किए जाने वाले विडियो हैं। फेसबुक पर जूजू के १ लाख ३० हजार से ज्यादा फैन्स हैं और यह संख्या लगातार बढ$ रही है।

क्यों आए जूजू?

दरअसल वोडाफोन अपने कुत्ते वाले ६ साल पुराने विज्ञापन को बदलना चाहती थी और कुछ नया भी करना चाहती थी। इसके बाद वोडाफोन ने निर्वाण फिल्म्स को इस तरह का कोई ऐड बनाने को कहा और जूजू का कॉन्सेप्ट भी हिट कर गया।

क्या है वोडाफोन का प्लान?
वोडाफोन आईपीएल सीरीज के दौरान ३० अलग-अलग तरह के जूजू ऐड पेश कराना चाहती है। हर ऐड कंपनी की किसी न किसी वैल्यू ऐडेड सर्विस को प्रमोट करने के लिए होगा।

हिट हो गया जूजू, मिला पेटा अवॉर्ड

कोच्चि: टेलीकॉम ऑपरेटर वोडाफोन के जूजू विज्ञापन को पेटा (पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स) ने भारत का पहला ग्लिटर बॉक्स पुरस्कार दिया है।

लेकिन, क्यों मिला ये अवॉर्ड?
पेटा का कहना है कि यह पुरस्कार विज्ञापनों में वास्तविक जानवरों की जगह मानव विकल्पों का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को दिया जाता है। पेटा ने इससे पहले वोडाफोन के पुराने विज्ञापनों में जानवरों के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई थी। पेटा की चीफ फंक्शनरी अनुराधा साहनी का कहना है कि इस विज्ञापन की लोकप्रियता से यह साबित होता है कि जानवरों के इस्तेमाल के बिना भी संदेश को पहुंचाने के बहुत से अन्य रास्ते मौजूद हैं।

रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं जूजू
रजूजू इतने बावले भी नहीं, जितने दिखते हैं। टेलीविजन स्क्रीन पर भले यह किरदार अपनी बेवकूफाना हरकतों से लोगों को हंसाए, लेकिन इसकी समझदारी की गहराई काफी ज्यादा है। जूजू तेज रफ्तार से वोडाफोन को नए ग्राहक जोड$ने में मदद दे रहे हैं। यूट्यूब पर ३० लाख से ज्यादा दफा जूजू के विज्ञापन देखे जा चुके हैं। १.५ लाख विजिटर के साथ फेसबुक पर मिल रही प्रतिक्रिया भी काफी उत्साहजनक है और यह तादाद लगातार बढ$ रही है। ऐसा पहली बार नहीं कि किसी चतुर विज्ञापन अभियान ने कंपनी को प्रतिस्पर्धा में काफी आगे ले जाकर खड$ा कर दिया हो।

मंगलवार, 13 मार्च 2012

सिने स्क्रीन की ताजा खबरें




हेट स्टोरी की मिस्ट्री गर्ल!

विक्रम भट्ट की आने वाली फिल्म हेट स्टोरी के पोस्टर की मिस्ट्री गर्ल कोई और नहीं बंगाली बाला पावली डैम है। इस बोल्ड फिल्म के साथ वे बॉलीवुड में धमाका करने जा रही हैं। विवेक अग्निहोत्री निर्देशित यह एक औरत के बदला लेने की कहानी है, जो अपनी सेक्सुअलिटी को खतरनाक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है। पावली 2011 में छत्रक में न्यूड सीन करने के कारण भी सुर्खियों में रह चुकी हैं। 20 अप्रैल को रिलीज हो रही हेट स्टोरी के पोस्टरों से पहले ही धमाल मचा है। देखें वे रिलीज होने तक और क्या जलवे दिखाती हैं।

मीका की छेड़छाड़

पता चला है कि पॉप सिंगर मीका ने फिर एक बार नया कारनामा किया है। राखी सावंत के साथ कंट्रोवर्सी करने के बाद मीका ने एक पार्टी में एक्टर सनी गिल की गर्लफ्रेंड सिमरन कौर को छेड़ दिया है। मीका बांद्रा में अपने दोस्त की एक पार्टी में आए हुए थे। इसमें एक्टर सनी गिल और उनकी गर्लफ्रेंड सिमरन कौर भी थी। यहीं से लौटते हुए उन्होंने अपनी पुरानी हरकत को दोहरा दिया। सूत्रों के मुताबिक, सिमरन ने बताया है कि सुबह चार बजे मीका, सनी गिल और सिमरन पार्टी से लौट रहे थे। इसी दौरान मीका ने आपत्तिजनक कमेंट करना शुरू कर दिया। इसके बाद जो हर बॉयफ्रेंड करेगा वही सनी ने किया। इन दोनों के बीच झगड़े को पार्टी में मौजूद क्रिकेटर श्रीशांत ने खत्म कराया। सिमरन का कहना है कि मीका लड़कियों की बिल्कुल इज्जत नहीं करते हैं। इस बारे में मीका के दोस्तों का कहना है कि सिमरन और मीका दोनों पंजाब से हैं और मीका बस सिमरन से बात कर रहे थे।

बिहारीबाबू का गुस्सा
किसी भी रिलेशनशिप में आप अगर अपना कमर्शल फायदा ढूंढऩे लगें, तो उसमें खटास आनी जाहिर है। ऐसा ही कुछ हुआ शत्रुघ्न सिन्हा और शशि रंजन के रिश्ते में। शत्रुघ्न की तरफ से कहा गया है कि शशि ने अपनी एकेडमी को प्रमोट करने के लिए उनके नाम का मिसयूज किया है। यही नहीं, एकेडमी से नाम जोड़े जाने की बात शत्रुघ्न को बताई तक नहीं गई। बता दें कि शत्रुघ्न 25 साल पहले शशि से मिले थे। वह शशि के डायरेक्शन में बने द शॉटगन शो की एकरिंग भी कर चुके हैं। शशि ने एकेडमी के ऐड में शत्रुघ्न की फोटो तक का इस्तेमाल किया है। शत्रुघ्न के बिजनेस मैनेजर पवन कुमार ने कहा, इस बात से शत्रुघ्न काफी अपसेट हैं। उन्हें बिना कॉन्फिडेंस में लिए ऐसा किया गया है। शशि को यह बात क्लियर करनी चाहिए। जब इस बारे में शशि से बात की, तो उन्होंने इसी बात पर जोर दिया कि वह शत्रुघ्न की परमिशन ले चुके थे। उन्होंने कहा मेरा शत्रुघ्न का नाम मिसयूज करने जैसा कोई मकसद नहीं था और ना ही फ्यूचर में ऐसा होने वाला है। अब देखते हैं कि गुस्साए शत्रु भैया इस मसले का क्या हल निकालते हैं!

खुश हैं असिन
फिल्म अभिनेता अजय देवगन, आमिर खान और सलमान खान जैसे अभिनेताओं के साथ काम करने के बाद साथ 'हाउसफुल 2Ó में अपने अभिनय के जलवे बिखेरने जा रही अभिनेत्री असिन अक्षय कुमार के साथ काम करके बहुत खुश हैं। असिन ने बताया 'अक्षय कुमार के अनुशासित जीवन की मैं प्रशंसक रही हूं। निजी जीवन हो या व्यवसायिक जीवन, अक्षय कई लोगों के लिए रोल मॉडल हैं। वह मेहनती हैं और उनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा। इसको लेकर मैं काफी खुश हूं।Ó अभिनेत्री ने अक्षय कुमार के सरल स्वभाव और समय के पाबंद होने की आदत की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा 'अक्षय दो दशकों से काम करते रहने के बावजूद समय पर सेट पर पहुंच जाते हैं और शूट के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा साजिद और उनके बीच बहुत अच्छा तालमेल है। 'हाउसफुलÓ और 'हे बेबीÓ में अक्षय साजिद के साथ काम कर चुके हैं।Ó तीन साल पहले आमिर खान के साथ आई 'गजनीÓ फिल्म को मिली भारी सफलता के बाद असिन ने कई फिल्मों में काम करने के बजाय कम फिल्मों में काम किया। उन्होंने कहा 'मैं ऐसी फिल्मों में काम करना चाहती हूं, जो लोगों को लंबे समय तक याद रहे और मुझे भी उनमें कुछ करने का मौका मिले।Ó

रुबीना की अहम भूमिका
ऑस्कर से नवाजी जा चुकी हॉलीवुड फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर में बाल कलाकार की भूमिका निभाने वाली रुबीना अली एक छोटे बजट वाली ब्रिटिश फिल्म में नजर आ सकती हैं। इस सिलसिले में रुबीना की फिल्म निर्माताओं से बातचीत चल रही है। हॉलीवुड स्टार एंथनी हॉपकिंस भी इस फिल्म में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारत, इंग्लैंड और वेल्स में इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म की शूटिंग इस साल के अंत में होगी। यह फिल्म एक ऐसे वेल्स नागरिक की कहानी है, जिसे एक भारतीय लड़की से इश्क हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, रग्बी खिलाड़ी रह चुकीं गेविन हेनसन इस फिल्म से अपनी अदाकारी की शुरुआत करेंगी।

जेम्स बॉन्ड के जलवे

नवम्बर महीने में एक बार फिर आ रहा है जेम्स बॉन्ड। जेम्स नए हंगामे और कारनामे लेकर आ रहा है एक भारतीय हसीना के साथ। चाहे वह लंदन हो पेरिस या वेनिस, जेम्स बॉन्ड ने अपने जलवे हर जगह बिखेरे हैं और अब 29 साल बाद एक बार फिर जेम्स बॉन्ड तैयार है इंडिया में एक बार फिर से अपना कातिलाना अंदाज दिखाने के लिए। खबर है कि जेम्स बॉन्ड सिरिस की 23वीं फिल्म स्काई फौल का कुछ हिस्सा इंडिया में शूट किया जाना है और साथ ही इस फिल्म में एक इंडियन हसीना भी होगी, जिसके इर्दगिर्द कहानी के उस हिस्से का तानाबाना बुना गया है, पर ऐसे में बड़ा सवाल यह कि कौन होगी वो हसीना? इस बात पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है तो कौन होगी वह, क्या वह कैटरीना होंगी या करीना, क्या वह बिपाशा होंगी या मिनिषा। आपको बता दें जेम्स बॉन्ड सीरिज की यह 23वीं फिल्म इस साल नवंबर में रिलीज होगी और अब भी इस फिल्म का इंडिया में शूट किया जाने वाला हिस्सा पेंडिंग है, क्योंकि कोलंबिया और सोनी पिक्चर इस हिस्से को दिल्ली के सरोजिनी नगर में शूट करना चाहते थे, पर दिल्ली प्रशासन से परमिशन ना मिलने के चलते अब फिल्म मेकर्स महाराष्ट्र प्रशासन से बात कर रहे हैं। पर क्या जेम्स बॉन्ड को इस दफा परमिशन मिल पाएगी, क्योंकि आज से 29 साल पहले जेम्स बॉन्ड सीरिज की ही फिल्म ओक्टोपस्सी इंडिया में शूट की गई थी।

कुकीज की बिक्री
जर्मन सुपरमॉडल और फिल्म अभिनेत्री हैदी क्लूम इन दिनों अपनी बेटी लेनी के साथ कुकीज (बिस्कु ट) बेच रही हैं। इन दोनों ने गल्र्स स्काउट क्लब में इसके लिए एक दुकान लगाई है। वेबसाइट मिरर डॉट को डॉट यूके के मुताबिक किसी ने क्लूम को इस काम के लिए राजी किया है। उस व्यक्ति के नाम का खुलासा नहीं हुआ है। वेबसाइट के मुताबिक इस काम में क्लूम को काफी सफलता मिली है और उनकी दुकान के पास काफी भीड़ देखी जा रही है। क्लूम मुस्कु रा कर लोगों का अभिवादन करती हैं और यहां तक कि लोगों को बुलाकर कुकीजखरीदने का आग्रह करती हैं।

प्यार की तलाश में
मॉडल एरिन हीथर्टन के साथ समय व्यतीत कर रहे हॉलीवुड अभिनेता लियोनार्डो डिकैप्रियो ने स्वीकार किया है कि वह अब भी सच्चे प्यार की तलाश में हैंं। इससे पहले 37 वर्षीय डिकैप्रियो अभिनेत्री ब्लैक लिवली, मॉडल बार राफेली और जिसेले बंडचेन के साथ समय बिता चुके हैं। वेबसाइट कॉन्टेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम ने डिकैप्रियो के हवाले से लिखा है, मेरा पहला प्यार मुझे याद नहीं है। यदि मुझे लगता है कि मेरा सच्चा प्यार मिल गया तो मैं उससे शादी कर लूंगा।

संसद का दीदार
छोटे पर्दे पर कार्यक्रम पेश करने वाली और बड़े पर्दे पर आइटम गर्ल के रूप में पहचान बनाने वाली अदाकारा राखी सावंत बजट सत्र के पहले दिन संसद देखने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वह देखना चाहती थीं कि संसद में कामकाज किस तरह चलता है। राखी ने संवाददाताओं से कहा, मुझे किसी ने बुलाया नहीं है। मैं सिर्फ सांसदों से मिलने आई हूं। मैं संसद देखने आई हूं, यह देखने के लिए कि यहां कामकाज कैसे होता है और हमारे नेता कैसे काम करते हैं। उन्होंने कहा, मैं सभी लोगों और महिलाओं की तरफ से कांग्रेस प्रमुख सोनियाजी (गांधी) तक यह संदेश पहुंचाने आई हूं कि बजट में महिलाओं के लिए कुछ होना चाहिए और ऐसा बजट जो हर किसी को ठीक लगे। योग गुरुबाबा रामदेव को सलाह देते हुए कि उन्हें सभी राजनेताओं को चोर नहीं कहना चाहिए, राखी ने कहा कि वह योग करें, दूसरों को गाली न दें। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष एक टीवी रिएलिटी शो में राखी ने बाबा रामदेव से विवाह करने की इच्छा प्रकट की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि वह कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी की प्रशंसक हैं।

जान का आइटम गीत

मॉडलिंग की दुनिया से फिल्मी दुनिया में आए जॉन अब्राहम ने अब निर्माता भी बन गए हैं। बतौर निर्माता उनकी पहली फिल्म विक्की डोनर के नाम से बन रही है। इस फिल्म को सुजीत सरकार ने निर्देशित किया है और फिल्म में मुख्य भूमिका आयुषमान खुराना, यामी गुप्ता और अन्नू कपूर ने अभिनीत की है। अपनी पहली फिल्म से जॉन अब्राहम बतौर निर्माता ही जुड़े हुए हैं। इस फिल्म में वे अभिनय नहीं कर रहे हैं, हां एक आइटम गीत में जरूर वे नजर आएंगे।
उनका कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि मैं मेरे बैनर की हर फिल्म में नजर आऊं। जिस फिल्म की पटकथा में मेरे लायक भूमिका होगी, उसमें मैं जरूर काम करूंगा। विक्की डोनर आगामी 20 अप्रैल को प्रदर्शित होने जा रही है। पिछले दिनों इस फिल्म का फस्र्ट लुक जारी किया गया था। जॉन अब्राहम को उम्मीद है कि उनकी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जरूर सफलता प्राप्त करेगी। इस फिल्म को इरोज इंटरनेशनल वितरित कर रही है।

गौरी खान-रितिक साथ-साथ
रितिक रोशन और सुजैन खान की शादी के कई साल हो चुके हैं। दोनों हर जगह एक दूसरे की तारीफ करते नजर भी आते हैं, लेकिन इधर मामला कुछ गड़बड़ सुनने को मिल रहा है। अग्निपथ की सक्सेस पार्टी में रितिक ने शाहरुख खान की बेगम गौरी की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने गौरी को बेहद हॉट भी कहा था। अब चर्चा है कि वे गौरी को अगली फिल्म में कास्ट भी करेंगे। उनके एक दोस्त के मुताबिक, गौरी को लेकर वे बेहद एक्साइटेड हैं। इसलिए फिल्म की स्क्रिप्ट वे खुद तैयार कर रहे हैं। काइट्स के बाद पहली बार वे किसी फिल्म में इतनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वे इस फिल्म में बोल्ड अवतार में दिखना चाहते हैं। इस फिल्म के लिए उन्होंने महेश भट्ट से निर्देशन की बात की है। दिलचस्प बात यह है कि इसे रितिक के पिता राकेश रोशन डायरेक्ट करने वाले थे, लेकिन अंतिम तौर पर कमान महेश भट्ट को थमा दी गई। सूत्रों की मानें तो फिल्म में रितिक और गौरी पर कई इंटिमेट सीन फिल्माए जाएंगे। गौरी अब तक शाहरुख का हाथ प्रोडक्शन में बंटाया करती थीं, पर अब पहली बार बतौर अदाकारा बड़े पर्दे पर नजर आएंगी। फिल्म में इमरान हाशमी और प्राची देसाई भी हैं। गौरी के फिल्म में काम करने पर शाहरुख ने अब तक अपनी कोई प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है। इस बारे में दोनों मियां-बीवी डिस्कस कर रहे हैं। उन्हें जानने वालों के मुताबिक, शाहरुख गौरी के इस कदम से नाराज बताए जा रहे हैं। गौरी का फिल्मों में काम करना उन्हें पसंद नहीं है, पर खबरें हैं कि गौरी ने रितिक को जबान दे दी है। इसलिए फिल्म में काम करने से मुकरने के आसार बेहद कम हैं।

रणबीर के साथ काम करेंगी कल्कि
करण जौहर के होम प्रोडक्शन की फिल्म 'ये जवानी है दीवानीÓ में रणबीर कपूर के साथ अदाकारा कल्कि कोएचलिन भी नजर आएंगी। अभी तक कल्कि ने 'डेव डीÓ, 'इमोशनल अत्याचारÓ, 'शैतानÓ जैसी ऑफबीट फिल्मों में अभिनय किया है। हालांकि वह व्यावसायिक रूप से सफल 'जिंदगी ना मिलेगी दोबाराÓ में भी नजर आई थीं। करण जौहर की आगामी फिल्म का निर्देशन 'वेक अप सिडÓ से चर्चित निर्देशक अयान मुखर्जी करेंगे और इसमें दीपिका पादुकोण तथा रणबीर मुख्य किरदार में दिखेंगे। करण जौहर ने ट्विटर पर लिखा, 'हमारी फिल्म..ये जवानी है दीवानी इस माह शुरू होगी..इसका निर्देशन अयान मुखर्जी करेंगे और रणबीर-दीपिका, आदित्य राय कपूर के साथ ही कल्कि भी नजर आएंगी।Ó आदित्य राय कपूर अंतिम बार संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गुजारिशÓ में दिखे थे।

बालीवुड की चाहत नहीं
फिल्म कहानी में विद्या बागची की मदद करने के लिए आप बेशक उन्हें हीरो कहें, लेकिन एक्टर परमब्रत चटर्जी का मानना है कि वह फिल्म की हीरोइन हैं! परमब्रत की मानें तो फिल्म में विद्या और कोलकाता के तौर पर पहले ही दो हीरो हैं, इसलिए उन्होंने हीरोइन की कमी पूरी की है। वैसे, इस रोल के उनके हाथ लगने की कहानी भी दिलचस्प है। परमब्रत बताते हैं, जब मेरे पास सुजॉय का फोन आया, तब मैं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ विदेश में था। उन्होंने खुद को ठीक से इंट्रोड्यूस भी नहीं किया और मुझे तुरंत इंडिया वापस आने को कहा। दरअसल, उन्होंने बॉन्ग कनेक्शन में मेरा काम देखकर मुझे सिलेक्ट किया था। हालांकि सुजॉय की इस कॉल के बाद परमब्रत ने वापस आने में कुछ समय लिया, क्योंकि अगर अपनी गर्लफ्रेंड को नाराज करते, तो वह उन्हें छोड़कर चली जाती! कम ही लोग यह जानते हैं कि परमब्रत ने विद्या के साथ ही भालो ठेको से अपने कैरियर की शुरुआत की थी। वैसे, विद्या के साथ काम करने के बारे में उनका कहना है कि यह हिंदी सीखने से ज्यादा आसान रहा। वह बताते हैं, पहली फिल्म के बाद से मैं विद्या से कभी नहीं मिला। लेकिन जैसे ही हम कहानी के सेट पर मिले, हमारी टयूनिंग पहले जैसी हो गई। वैसे, परमब्रत भी बाकी सभी की तरह विद्या को नेचरल एक्टर मानते हैं। उनका कहना है कि वह अपने काम को बेहद गंभीरता से लेती हैं और स्टार होने के बावजूद उनमें किसी तरह का एटिट्यूड नहीं है। इस फिल्म में नोटिस किए जाने के बाद क्या परमब्रत अब बालीवुड को लेकर सीरियस हैं? वह कहते हैं, इस बारे में मैंने अभी कुछ नहीं सोचा। फिलहाल मैं बांग्ला सुपर स्टार प्रसन्नजीत को लेकर एक फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं। अब आप चाहें बालीवुड के बारे में ना सोचें, लेकिन कहानी के बाद यहां के दर्शक आपका और काम जरूर देखना चाहेंगे परमब्रत!

इस साल शादी कर लूंगी
हॉलीवुड अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन ने कहा है कि वह इस साल हर हाल में शादी कर लेंगी। एनिस्टन ने इसके लिए अपने प्रेमी जस्टिन थेरॉक्स को सूचित कर दिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि एनिस्टन ने थेरॉक्स से कहा है कि वह या तो इस साल उनसे शादी करें या फिर उनके साथ संबंध समाप्त कर लें। वेबसाइट कांटेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम ने एनिस्टन के हवाले से लिखा है, इस साल के अंत तक मैं शादी कर लूंगी। मैंने थेरॉक्स से कह दिया है कि अगर ऐसा नहीं हो सका तो फिर हम अपने संबंध को विराम दे देंगे।

मां बनकर खुश हैं ऐश्वर्या
बालीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कहा है कि उनकी अभिनेत्री पत्नी ऐश्वर्या राय मां बनकर बेहद खुश हैं। ऐश्वर्या साढ़े तीन माह की बेटी के साथ खुशी-खुशी समय बिता रही हैं। काम पर लौटने का फैसला उनका होगा और वह अपनी इच्छा से ही ऐसा करेंगी। अभिषेक (36) ने यह भी कहा कि वह युवा लेखकों द्वारा लिखी जाने वाली कहानी पर आधारित फिल्मों में काम करना चाहेंगे। सौरभ पंत की पुस्तक द वेन्सडे सोल के विमोचन पर अभिषेक ने कहा, मुझे जीवनी तथा आत्मकथाएं पढऩा पसंद है। कई युवा लेखक हैं, जो अच्छी कहानियां लिख रहे हैं। मैं उनमें काम करना चाहूंगा, लेकिन मैं तय नहीं कर सकता कि वह एक कहानी कौन होगी।

रविवार को अनशन पर बैठेंगे हजारे



नई दिल्ली, एजेंसी दो महीने से अधिक समय के अंतराल के बाद अन्ना हजारे राजधानी दिल्ली लौट रहे हैं तथा वह इस दौरान आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार के लिए न्याय और भंडाफोड़ करने वालों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून की मांग को लेकर रविवार को अनशन पर बैठेंगे।

मुम्बई में गत वर्ष दिसम्बर महीने में मजबूत लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर अपना तीन दिवसीय अनशन स्वास्थ्य कारणों से वापस लिए जाने के बाद 74 वर्षीय हजारे की ओर से किया जाने वाला यह पहला अनशन होगा।

टीम अन्ना के एक सदस्य ने कहा कि वर्ष 2009 बैच के उस आईपीएस अधिकारी के लिए न्याय की मांग करने वालों के साथ एकजुटता के लिए हजारे जंतर मंतर पर एक दिन के अनशन पर बैठेंगे जिसकी मध्य प्रदेश में खनन माफिया द्वारा हत्या कर दी गई थी। टीम अन्ना ने आईपीएस अधिकारी के परिवार के सदस्यों को भी इस मौके पर आमंत्रित किया।

IPS अधिकारी नरेंद्र की हत्या की CBI जांच होगी



भोपाल। राज्य सरकार आईपीएस नरेंद्र कुमार की हत्या मामले की सीबीआई से जांच कराने को तैयार हो गई है। विधानसभा के बाहर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने यह घोषणा की। चौहान ने कहा कि दिवंगत आईपीएस अफसर की पत्नी आईपीएस मधुरानी की मांग पर सरकार ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस के दवाब में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने नहीं सौंपा जा रहा है।



मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस संबंध में पत्र भेजेगी। गौरतलब है कि घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा को चलने नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन लाया था,लेकिन हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी को सदन की कार्रवाई स्थगित करना पड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में जो कुछ भी हुआ वह शर्मनाक है। विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया। सरकार इस पर चर्चा कराने के लिए तैयार थी। उनके सवालों का सरकार जवाब देती।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन में चर्चा से भाग रहा है। यह लोकतंत्र का अपमान है। विपक्ष की रूचि घटना की गंभीरता में नहीं है। वह घृणित राजनीति कर रहा है। एक होनहार अफसर की शहादत पर रोटियां सेंकना चाहता है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मध्य प्रदेश को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
कार्यवाहक न्यायाधीश से जांच कराना चाहती है सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना की न्यायिक जांच कराने के लिए मप्र हाईकोर्ट को पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यवाहक न्यायाधीश से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

क्या बहुगुणा की सरकार अल्पमत में है?




नई दिल्ली. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर विजय बहुगुणा ने देहरादून के परेड ग्राउंड में मंगलवार शाम को शपथ ले ली। राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने उन्हें शपथ दिलाई। लेकिन इस दौरान कांग्रेस के बीच फूट साफ नज़र आई। शपथ ग्रहण समारोह में कई कुर्सियां खाली देखी गईं और कांग्रेस के सिर्फ 10 विधायक ही समारोह के दौरान मौजूद रहे। उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के 32 विधायक हैं। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के 22 विधायक नदारद रहे। बताया जा रहा है कि देहरादून में जब शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था तब कांग्रेस के 17 विधायक हरीश रावत के दिल्ली स्थित आवास पर मौजूद थे।


हरीश रावत ने अपने ताजा़ बयान में कहा है कि वे आलाकमान को अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे संगठन में रहकर काम करेंगे। रावत ने यह भी कहा है कि उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री का चुनाव करने गए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट गलत थी। हरीश के मुताबिक उनके समर्थन में आए विधायकों से यह बात साबित होती है कि पर्यवेक्षकों ने केंद्रीय नेतृत्व को गलत रिपोर्ट सौंपी थी। रावत ने कहा कि उन्हें इस बात का इंतजार है कि अब केंद्रीय नेतृत्व पर्यवेक्षकों पर क्या कार्रवाई करता है। कांग्रेस के सांसद और हरीश रावत के समर्थक प्रदीप टम्टा ने कहा है कि विजय बहुगुणा विधानसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का उदाहरण दिया, जो लोकसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए थे।

वहीं, पार्टी के एक अन्य प्रमुख नेता हरक सिंह रावत का भी विजय बहुगुणा को लेकर असंतोष सामने आ गया है। रावत ने मंगलवार शाम को मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर बहुगुणा अपना बहुमत साबित कर देंगे तो वह बहुगुणा को नेता मान लेंगे। इससे पहले मंगलवार को दिन में हरक सिंह रावत ने खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते हुए साफ कर दिया था कि विजय बहुगुणा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार ज़्यादा दिनों तक कायम नहीं रहेगी। उन्होंने देहरादून में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सरकार भानुमति का पिटारा साबित होगी।




इससे पहले मंगलवार की दोपहर में कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को लेकर अपने तेवर कड़े कर लिए थे। कांग्रेस कोर ग्रुप ने तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए विजय बहुगुणा के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी थी।

लेकिन बहुगुणा को बतौर मुख्यमंत्री चुनना कांग्रेस के लिए बड़ा 'सिरदर्द' साबित हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बहुगुणा को बतौर मुख्यमंत्री चुने जाने से सबसे ज़्यादा नाराज हरीश रावत हैं। हरीश रावत पार्टी आलाकमान से इतने नाराज बताए जा रहे हैं कि उन्होंने बीजेपी से बात करनी शुरू कर दी है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक हरीश रावत ने सोमवार रात बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी से गैर कांग्रेसी सरकार बनाने के लिए मदद मांगी है। बताया जा रहा है कि गडकरी ने हरीश को हरी झंडी दे दी है।
इससे पहले रावत ने नाराजगी में केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री के पद से इस्‍तीफा भी दे दिया। उन्‍होंने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वे पार्टी के आम कार्यकर्ता के तौर पर काम करना चाहते हैं। वह सोमवार सुबह संसदीय कार्य मंत्रालय की बैठक से भी गैरहाजिर रहे। इससे पहले उन्‍होंने कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को एक चिट्ठी भी लिखी। इसमें उन्‍होंने अपने समर्थकों की भावनाओं को तरजीह दिए जाने की मांग की। उनके समर्थक सोमवार रात से ही प्रदर्शन कर रहे थे और सोनिया के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। ।

रावत इतने नाराज थे कि उन्‍होंने कांग्रेस अध्‍यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल का फोन तक नहीं उठाया। हालात की नजाकत को भांपते हुए सोनिया ने विजय बहुगुणा और हरीश रावत को अपने घर पर आने का संदेशा भिजवा दिया।

हरीश रावत द्वारा इस्‍तीफा प्रधानमंत्री को भेजने और हरक सिंह रावत के बगावती तेवर सामने आने के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया। पार्टी आलाकमान ने बहुगुणा, हरीश रावत के अलावा सतपाल महाराज, यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत को भी दिल्ली तलब किया है।
संभव है कि कांग्रेस आलाकमान किसी तरह रावत को समझा कर स्थिति शांत करने की फिराक में है। लेकिन भाजपा भी स्थिति का फायदा उठाने के लिए तैयार बैठी है। सूत्र बताते हैं कि रावत समर्थकों की मदद से सरकार बनाने की संभावना बनती है तो भाजपा इसे भुनाने से चूकेगी नहीं। भाजपा आलाकमान रावत से लगातार संपर्क बनाए हुए है।

कौन हैं विजय बहुगुणा
विजय बहुगुणा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे हैं। विजय टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से संसद सदस्य हैं। वे 14वीं लोकसभा में भी सदस्य थे। रीता बहुगुणा जोशी विजय बहुगुणा की बहन हैं, जो खुद उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख नेता हैं। विजय बहुगुणा का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। विजय बहुगुणा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई की थी। इसके बाद वे इलाहाबाद हाई कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस करने लगे थे। बाद में वे जज भी बने।
Source: dainikbhaskar.com

बैकफुट पर कांग्रेस


त्वरित टिप्पणी


पॉच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों में निराशा मिलने पर कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। यह कांग्रेस और यूपीए-दो के लिए एक जोरदार झटका माना जा रहा है। तीन साल तक कड़ी मेहनत करने वाले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने उप्र में एक नए चमत्कार की कल्पना संजो ली थी लेकिन पासा पलटने पर अब कांग्रेसियों को जबाव देते नहीं बन रहा है। उत्तरप्रदेश में सरकार बनाने का सपना तो शायद खुद राहुल गांधी ने भी नहीं देखा, लेकिन पार्टी के इतने खराब प्रदर्शन की उम्मीद का अंदेशा उन्हें नहीं था। इसके पीछे कारण कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं की बयानबाजी और मतदाता के बसपा को सत्ता से बाहर करना ही था। लेकिन कांग्रेस इसका फायदा नहीं उठा पाई। राहुल गांधी ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी और संगठन में सुधार का बयान दिया है। भाजपा को भी उम्मीद से कम सीटें मिलना उसके लिए भी चिंतनीय है। उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इन नतीजों का सबसे बड़ा असर राजनीतिक ही नहीं, आर्थिक फैसलों पर भी दिखाई देने वाला है। मणिपुर के अलावा अन्य चार राज्यों - उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनावों में आशा के अनुरूप परिणाम नहीं आने के बाद यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार पर सहयोगी पार्टियों का दबाव बढ़ सकता है। उत्तराखंड में कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद की शपथ तो दिला दी है, लेकिन इस पद के सशख्त दावेदार हरीश रावत को नाराज कर लिया है। इससे पहले जो परेड कांग्रेस के नेताओं ने कराई वह भी जग जाहिर है। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी समेत सपा के सांसद भी अपना कड़ा रुख अपना सकते हैं। इसके साथ ही अन्य सहयोगी दल अपना दबाव बढ़ाकर केंद्र सरकार से अपनी बात मनवा सकते हैं जिससे यूपीए सरकार को संकट का सामना करना पड़ सकता है। 14 मार्च को रेल बजट और 16 मार्च को केंद्र सरकार आम बजट पेश करने वाली है। विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी बजट में रियायतें देकर आम जनता को लुभाने की कोशिश करेंगे। बजट में कुछ ऐसी भी घोषणाएं कर सकते हैं जिनसे कांग्रेस को 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में लाभ मिल सके। जिससे आम जनता समझ सके कि कांग्रेस का हाथ अभी भी आम आदमी के साथ है। आर्थिक सुधारों पर भी ब्रेक लग सकता है। बैंकिंग, इंश्योरेंस और रिटेल सेक्टर में विदेशी निवेश का मामला या टैक्स के मामले पर काम धीमा हो सकता है। कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव व उपराष्ट्रपति चुनाव होंगे। पार्टी को अन्य सहयोगी दलों की भी जरूरत पड़ेगी। अपना प्रत्याशी खड़ा करने के लिए तब चुनौती भरा काम होगा। ऐसे में कांग्रेस को मजबूत करना और संगठन में जान भरना जरूरी है।

- राजकुमार सोनी

शनिवार, 10 मार्च 2012

राजएक्सप्रेस का होली समारोह

भोपाल। सच कहने का साहस और सलीका के साथ राजएक्सप्रेस भोपाल कार्यालय में 7 मार्च 2012 को होली मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर साथियों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई दी। संपादकीय विभाग के श्री अरविन्द शीले, श्री पवन सोनी, श्री अनुराग त्रिवेदी, श्री एस एन सिंह, श्री ईश्वर शर्मा, श्री कृष्णा शर्मा, श्री राजकुमार सोनी सहित सैंकड़ों साथी, डीटीपी के सदस्य उपस्थित थे।

होली मिलन समारोह में पत्रकार राजकुमार सोनी सभी साथियों के साथ


होली मिलन समारोह में पत्रकार राजकुमार सोनी सभी साथियों के साथ



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होली मिलन समारोह में पत्रकार राजकुमार सोनी सभी साथियों के साथ


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होली मिलन समारोह में पत्रकार राजकुमार सोनी सभी साथियों के साथ

सोमवार, 5 मार्च 2012

मेहनत करके अर्जित की लोकप्रियता






मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंहजी चौहान का जन्मदिन


शिवराज सिंह चौहान के आने की खबर से हजारों लोग इकट्ठे हो जाते हैं। किसी को लाना नहीं पड़ता, स्वयमेव पहुंचते हैं। देखने में आता है कि इनमें युवा चेहरे सर्वाधिक होते हैं। बेटियों, महिलाओं और युवा चेहरों की विशेष उपस्थिति उल्लेखनीय होती है। ऐसी लोकप्रियता के लिए कठिन परिश्रम, साधना, दृढ़- इच्छाशक्ति और संकल्प की जरूरत होती है। इसके साथ ही एक और बड़ी आवश्यकता होती है, अपनी बात को अभिव्यक्त करने की क्षमता। ईश्वर ने शिवराज सिंह को इन सभी गुणों से एक साथ नवाजा है।
आखिर क्या आकर्षण है, शिवराज में? यह प्रश्न जितना सहज है, उत्तर भी उतना ही सरल। शिवराज सिंह प्रदेश के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो बिलकुल सरल, सहज और मिलनसार हैं। उनमें पद का घमंड किसी ने कभी नहीं देखा होगा। हर कोई उनसे मिल लेता है, बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि वे खुद ही जाकर हर किसी से मिल लेते हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह कि वे पंक्ति में खड़े सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश ही नहीं करते, सप्रयास उसके समीप पहुंचते भी हैं।
लगता है कि हर किसी की पीड़ा उनकी अपनी है। इस पीड़ा को वे हर लेना चाहते हैं। कठिन परिश्रम में उनका कोई सानी नहीं है। आश्चर्य होता है, यह देखकर कि वे प्रतिदिन 18-20 घंटे लगातार कार्य कर लेते हैं। ग्रामों में जब वे होते हैं, भोर से लेकर शुरू हुआ उनका जन-दर्शन आधी रात हो जाने के बाद भी चलता रहता है। वनवासी सम्मान के लिए निकले शिवराज सिंह कभी थकते नहीं दिखते। विभागों की समीक्षा का दौर और प्रशासनिक कार्य भी वे ऐसे ही लगातार करते हैं। उन्होंने एक आम कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री तक का सफर इसी परिश्रम से तय किया है। उनकी यात्रा अब भी जारी है। आगे का मार्ग भी वे अपनी इसी अद्भुत कर्मठता से तय करेंगे।
लक्ष्य प्राप्ति के लिए परम आवश्यक गुण है, साधना और शिवराज की यह साधना स्तुत्य है। इसी का प्रतिफल है कि दर्शनशास्त्र जैसे गूढ़ विषय में उन्होंने स्वर्ण पदक अर्जित किया। वे सतत अध्ययनशील हैं। सामान्यत: किसी भी विषय पर वे बिना अध्ययन के नहीं बोलते। जब भी बोलते हैं, पूरे अधिकार के साथ, विषय पारंगत होकर। सबने देखा है, हिंदू धर्म के विविध आयामों पर उन्हें बोलते हुए। गीता तो मानो कंठस्थ-सी लगती है। जब वे सामयिक विषयों पर बोल रहे होते हैं, उनके मुख से कबीर और संत रविदास, महात्मा ज्योतिबा फुले की वाणी झरने के शुद्ध जल की तरह प्रवाहित होते देखी है। प्रकाश पर्व पर गुरु ग्रंथ साहब, पर्यूषण पर्व के क्षमायाचना अवसर पर जैन धर्म का उल्लेख, इस्लाम और ईसाई धर्मों के त्यौहारों पर शिवराज का धार्मिक संवाद सुनकर बहुत-से लोगों को अवाक होते देखा गया है। वे अपने शासकीय निवास पर इन सभी पर्वों को बड़े हर्ष व उल्लास के साथ मनाने वाले देश के शायद पहले मुख्यमंत्री हैं।
उन्होंने अपने जीवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को अपनाया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने जितनी भी योजनाएं बनाईं, सभी में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरणा दिखाई देती है। वे दीन भगवान को मानकर उनकी सेवा का संकल्प लिए कार्य करते हैं। पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति और समाज के सबसे कमजोर वर्ग का सबसे पहले कल्याण उनका लक्ष्य होता है। दृढ़-इच्छाशक्ति के साथ संकल्पबद्ध होकर कार्य करना शिवराज सिंह की विशेषता है। इसी विशेषता से उन्होंने मध्यप्रदेश में बेटियों को बोझ से वरदान बना दिया है। आज मध्यप्रदेश में बेटियां अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। शिवराज सिंह चौहान का 'बेटी बचाओ अभियानÓ प्रदेश में जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। बेटियों की घटती संख्या राष्ट्रीय चिंता की विषय है। मध्यप्रदेश में उनके द्वारा प्रारंभ इस अभियान से वे देश में बेटी बचाओ आंदोलन के प्रणेता बन गए हैं।
मध्यप्रदेश के जैत गांव के किसान परिवार में पांच मार्च-1959 को जन्मे शिवराज सिंह चौहान बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी हैं। नेतृत्व क्षमता उनमें बचपन से है। छोटी कक्षा में मानीटर बनने से लेकर मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र संघ अध्यक्ष बनने तक उन्होंने छात्र जीवन में नेतृत्व का पाठ सीखा। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभिन्न पदों पर रहे। भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के अनेक पदों से लेकर अध्यक्ष तक का पदभार उन्होंने संभाला। वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। सन 1990 में पहली बार बुदनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद बने। उनकी नेतृत्व क्षमता, मिलन सारिता, सरल व्यक्तित्व और सर्वसुलभता का परिणाम था कि वे पांच बार चुनाव में विजयी होकर संसद सदस्य रहे। नेतृत्व क्षमता को ही पहचानकर भारतीय जनता पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की योग्यता देखी।
वे 29 नवंबर-2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री बनाए जाने के निर्णय में वे एक सफलतम व्यक्ति साबित हुए। वर्ष-2008 में प्रदेश विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लड़ा गया। इसमें भाजपा ने पुन: ऐतिहासिक जीत दर्ज की। परिणामस्वरूप उन्होंने 12 दिसंबर-2008 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की दोबारा शपथ ली। इस विजय ने साबित कर दिया कि शिवराज सिंह चौहान सही अर्थों में जन-नेता हैं। उन पर आमजन का अटूट विश्वास है। शिवराज ने भी इस विश्वास को कभी खंडित नहीं होने दिया। उन्होंने प्रदेश में प्राय: सभी वर्गों की पंचायतें बुलाने का सिलसिला प्रारंभ किया।
महिलाओं, कोटवारों, घरेलू कामकाजी बहनों से लेकर विद्यार्थियों और हाल ही में हुई फेरीवालों व मछुआ पंचायत तक सबसे चर्चा कर व्यावहारिक निर्णय लिए। प्रदेश में अन्त्योदय योजनाएं बनीं। प्रत्येक प्रदेशवासी का अपना घर और हर गांव को सड़क से जोडऩे की योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू हुआ। केंद्र सरकार से योजनाओं में सहयोग का वे आग्रह अवश्य करते हैं, पर देखने में आया कि वे कभी उसके भरोसे नहीं बैठे। भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए विशेष न्यायालय अधिनियम पारित कराने का उन्होंने साहसिक निर्णय लिया, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
ऐसा ही साहस भरा निर्णय लोक सेवा गारंटी कानून बनाने का है। निर्धारित समय में कार्य न होने पर सरकारी कर्मचारी से जुर्माना वसूल कर आवेदक को देने का प्रावधान है, इस कानून में। शिवराज प्रभावशाली वक्ता हैं। उनकी बात का जादुई असर होता है। सरल स्वभाव से वे सबको अपना बना लेते हैं। राजनीति में उनकी सौजन्यता से विरोधी भी कायल हैं। वे राजनीति को सेवा का माध्यम और धर्म मानते हैं। उन्होंने अपने पुरुषार्थ, कर्मठता और सहजता से राजनीति को नई शैली दी है।

- गौतम

रविवार, 4 मार्च 2012

कहां मिलेगा इंसाफ




भारतीय समाज में परिस्थितियां इतनी विपरीत हो चुकी हैं कि दुष्कृत्य की शिकार युवती को बाद में इंसाफ के लिए दर-दर भटकना होता है। पर रसूखदारों के रसूख पुलिसिया दबंगई के गठजोड़ के आगे विवश रहती है खुद को बेगुनाह साबित करने में। भारतीय समाज भी उसे ही गुनहगार मानता है और गुनाह करने वाले खुलेआम घूमते हैं। एमएमएस की पब्लिसटी करते हुए। कैसे मिलेगा नारी को इंसाफ इसी पर केन्द्रित है यह स्टोरी।


प्रमुख घटनाएं

18 फरवरी: को बेटमा में दो यवतियों के साथ सामूहिक दुष्कृत्य का
माला सामने आया।
23 फरवरी को देपालपुर में मूक बघिर महिला को बच्चे को मारने की ध्
ामकी देकर तीन लोगों ने दुष्कृत्य किया।
24 फरवरी को लसूडिय़ा में पति को बांधकर आरोपियों ने खुद को
क्राइम ब्रांच का आफीसर बताते हुए महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया।
25 फरवरी को बैरसिया में घर के पास ही एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कृत्य किया गया।
28 फरवरी को बैतूल के कल्याणपुर में सातवी क्लास में पढ़ रही बच्ची के
साथ गैंगरेप किया गया। इतना ही नहीं बच्ची के परिवार वालों को एक लाख
रुपए का लालच देकर पुलिस में रिपोर्ट नहीं कराने का दबाव भी बनाया।

दिल दहलाने वाली घटनाएं

ये घटनाएं दिल को तो दहलाती ही हैं साथ ही ये सोचने पर भी मजबूर करती हैं कि क्या समाज की मानसिकता इतनी विकृत हो गई है कि महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कृत्य तो हो ही रहे हैं पर बच्चियों तक को नहीं बख्शा जा रहा। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपनी लाड़लियों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, तो वहीं सीएम खुद को बच्चियों को मामा कहते है। लेकिन अपनी लाड़ली भंाजियों को सुरक्षा देने मेें सरकार नाकाम ही रही है। सरकार लाख दावे करे पर अपने रसूख का प्रयोग करके अपराधी आज भी पीढि़त पक्ष को न सिर्फ और प्रताडि़त करते हैं, बल्कि चोरी और सीनाजोरी की तर्ज पर उनके प्रति समाज में ऐसा माहौल बना देते हैं कि पीडि़त परिवार विवश रहता है सर झुकाकर जीने के लिए। प्रदेश में तेजी से बढ़ती सामूहिक दुष्कृत्य की घटनाएं तेजी से इस ओर इशारा करती हैं कि भोपाल इंदौर जैसे शहर जहां इस मामले में सबसे आगे हैं, वहीं इन घटनाओं से यह भी साबित होता है कि प्रदेश में खाकी वर्दी और कानून का खौफ अपराधियों में नहीं ही रहा है। पिछले कुछ महीनों में पुलिस की कई जगह हुई पिटाई भी इसी ओर इशारा करती है। उपरोक्त सभी घटनाओं में एक बात समान थी कि आरोपी पक्ष ने पीडि़त पक्ष को धमकाया कि
वे रिपोर्ट न करें। बैरसिया वाले मामले में तो थाने पहुंची पीडि़ता को पुलिस ने पहले भगा दिया बाद में आरोपियों को पकड़ा और सबसे बाद में उनके खिलाफ बलात्कार और मारपीट का मामला दर्ज किया। एक नजर आंकड़ों पर भी डालें। शहर-दर-शहर सरकार ने विधानसभा में जो आंकड़े पेश किए उसके अनुसार पिछले तीन सालों में बलात्कार के नौ हजार से अधिक बलात्कार के मामले प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2011 में दुष्कृत्य के मामलों का आंकड़ा 3400 के पास पहुंच गया था।

कब जागेगी सरकार

सवाल उठता है कि क्या सरकार को जगाने के लिए क्राइमरिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े काफी नहीं हैं। आंकड़ों पर यकीन किया जाए तो देश के 35 प्रमुख शहरों में बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के मामले में इंदौर और भोपाल तीसरे स्थान पर हैं। वर्ष 2012 की शुरुआत में ही मार्च प्रथम साप्ताह तक पूरे प्रदेश में बलात्कार के ढाई सौ से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज हो चुके हैं। गौर दलील-ए- सरकार पर भी किजीए, सरकार के अनुसार चूकि मामले दर्ज किए जा रहे हैं इसलिए बढ़ रहे हैं और दूसरे शहरो में मामले दर्ज नहीं हो रहे हैं। इसलिए वहां के ग्राफ में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। सरकार का यह तर्क गले तो नहीं उतरता पर यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि सभवत: कई जगहों पर मामले दर्ज नहीं हो पाते इसलिए ये ग्राफ कम है अगर ठीक से प्रकरण दर्ज हों तो शायद तस्वीर और भयावह होगी। सरकारें लाख दावे करें पर वास्तविकता यह है कि किसी भी राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कोई खास कमी नहीं आई है। पूरे देश की बात करें तो इस मामले में दिल्ली और उत्तरप्रदेश सबसे आगे हैं। यहां अगस्त 2011 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 6,703 मामले दर्ज किए गए, वहीं दूसरा स्थान दिल्ली का है, जहां 2,188 मामले दर्ज हुए। बहरहाल बेटमा, देपालपुर, इंदौर, भोपाल तो क्या पश्चिम बंगाल से लेकर नोयडा तक ऐसी ही खबरें आ रही हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छेड़छाड़ किडनैपिंग जैसी घटनाएं आम हैं। इन घटनाओं का सच कभी सामने आ पाएगा या नहीं ये बाद की बात है, लेकिन फिलहाल इनके निहितार्थों पर गौर करने की आवश्यकता है। इन्हें समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये हमारे समाज की बदलती दशा और दिशा, व्यवस्था और दिनों-दिन दूषित होते वातावरण की तरफ इशारा करते हैं।

घटनाओं के पीछे कारण
ऐसी घटनाओं के पीछे कुछ कारण देखे जा सकते है। पहला तो यही कि किसी भी महिला के साथ यदि दुष्कृत्य होता है तो उसके लिए पहले सें ही तय मानदंडों के अनुसार उसके साथ व्यवहार किया जाता है। ये मानदंड हैं अच्छी महिला और बुरी महिला के। यदि महिला का चाल-चरित्र थोड़ा भी संदिग्ध है तो उसके साथ ऐसा कुछ होता भी है तो सारा दोष उस महिला के सर ही मढ़ दिया जाता है। यही कारण है आरोपी ज्यादती करने के बाद सबसे पहले पीढि़ता के चरित्र पर ही उंगली उठाते हैं। बेटमा की घटना इसका सबसे ताजा और पुख्ता उदाहरण है। जिन युवतियों के साथ ज्यादती हुई उनके बारे में कहा गया कि वे खेत में अपने अपने प्रमियों से मिलने गईं थीं। ये कहकर हम जाहिर क्या करना चाहते हैं? क्या यह कि यदि वे पे्रमियों से मिलने गईं थीं, तो क्या बाकी लोगों का इस प्रकार की आपत्ति जताना उनके साथ ज्यादती करना जायज है? हैरानी की बात ये है कि ये तर्क पुलिस अफसरों की तरफ से आए। इसी प्रकार इंदौर में दुष्कृत्य की शिकार हुई महिला के मामले में तर्क दिया गया कि वह अपने पहले पति को छोड़ चुकी थी और आरोपियों के साथ उसके पहले से संबंध थे। एक बार यह मान भी ले तो क्या सिर्फ इस तर्क के कारण उसे अपराधी घोषित किया जाना चाहिए? महिला थाने तक से उसे बगैर शिकायत लिखे लौटा दिया जाना चाहिए? दूसरा कारण जो समझ में आता है वह ये कि पुरुष इस बात को लेकर पूर्णत: निश्चिंत है कि उसके चरित्र पर कभी सवाल नही उठाया जाएगा। यदि वह कुछ गलत करेगा भी तो कछ समय बाद लोग भूल जाऐंगे अंतत: समाज में उन्हें उनकी पूरी प्रतिष्ठा के साथ दोबारा अपनाया जाएगा ही।

पुरुषों का संबंध
आलम यह है कि यदि किसी महिला के एक से ज्यादा पुरुषों से संबंध हैं तो दुश्चरित्रा सिर्फ महिला ही ठहराई जाती है, इसके विपरीत पुरुष पर कभी उंगली भी नहीं उठाई जाती। सवाल यहां यह है कि हर मामले में सिर्फ महिला ही दोषी
क्यों? मामला चाहे प्रेम प्रसंग का हो, बलात्कार का हो या फिर मजबूरी में देह बेचने वाली महिलाओं का हो, हर मामले में पुरुष की मौजूदगी साफ तौर पर होती है फिर भी सिर्फ महिला ही दोषी क्यों मानी जाती है। ये एकतरफा सोच ही समाज में ऐसी विकृति को फैलाने में मददगार साबित हो रही है। यदि ऐसा नहीं होता तो दो युवतियों के साथ सामूहिक ज्यादती करने वाले युवक घटना का एमएमएस बनाकर उसे सार्वजनिक करने का दुस्साहस नहीं दिखाते जबकि इस कुकर्म में वे खुद भी शामिल थे। सरकारी अव्यवस्था का आलम यह है कि इस ज्यादती के मामले के खुलासे और आरोपियों के पकड़ जाने के बाद भी दूसरे मोबाइल्स पर यह एमएमएस जारी रहा। ये साबित करता है कि खुद को टेक्नो फ्रेंडली कहकर इतराने वाले समाज की लचर कानून व्यवस्था तकनीकी अपराध से निपटने में अभी-भी अक्षम है। इस प्रकार तो उन लड़कियों के साथ रोजाना ही पता नहीं कितनी बार ज्यादती हो रही है। ऐसे अपराधों से निपटने और इन्हें रोकने के लिए फिलहाल हमारे पास न तो कोई तयशुदा, व्यवस्थित सोच है, न ही कोई कानून।

लम्बी कानूनी प्रक्रिया
तीसरा कारण है लंबी कानूनी प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही के दौरान पूछे जाने वाले बेहुदा सवाल। अलावा इसके कोर्ट भले ही पीडि़ता के पक्ष मे हो, लेकिन कोर्ट तक पहुंचने से पहले की सारी प्रक्रियाएं इतनी त्रासद और पीड़ादायक होती हैं कि कभी-कभी तो पीडि़ता और उसका परिवार इन सबसे बचने के लिए थाने तक जाता ही नहीं। इसके लिए पुलिसिया रवैया भी कम जिम्मेदार नहीं है। पिछली घटनाओं में पुलिस ने जो तर्क दिए वो तो कम से कम यही जताते हैं।

महिलाएं जिम्मेदार क्यों?
एक चौथी बात नई ये सामने आने लगी है कि महिलाओं के खिलाफ छेडख़ानी या दुव्र्यवहार की घटनाओं के बाद अपराधी के खिलाफ बोलने के बजाय उलटे महिलाओं की वेशभूषा और व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता के लोग दुराचारी को सजा दिलाने के बजाय लड़की के कपड़े और तौर तरीकों पर सवाल उठाते हैं। जबकि हकीकत तो ये है कि युवतियां, महिलाएं सलवार कमीज या साड़ी में भी उतनी ही असुरक्षित हैं जितनी पश्चिमी परिधानों मेें। इस बारे में मनोवैज्ञानिक डॉ. विनय मिश्रा कहते हैं कि यहां मामला कपड़ों का नहीं बल्कि सोच का है। वैसे इस दलील से सहमत नहीं हुआ जा सकता कि महिलाओं पर हमले उनके कपड़ों के कारण होते हैं। यह मानसिकता उस पुरुष प्रधान समाज की है जो महिला को ही दोषी ठहराता है। डॉ मिश्रा सवाल करते हैं कि 21वी सदी का पहला दशक बीत जाने के बाद भी हम इस सोच से अलग नहीं हो पाए है कि दुष्कर्म का कपड़ों से क्या वास्ता है। विनय मिश्रा के अनुसार महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने या फब्तियां कसने वालों का उसी स्थान पर लोग मिलकर विरोध क्यों नहीं करते? जो आज
दूसरों की बहन-बेटियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं, वे कल आपके घर की लड़कियों के साथ भी वैसा ही करेंगे। इसलिए ऐसी घटनाओं को अगर रोकना है तो सबसे पहले तो इन्हें नजरअंदाज करने की आदत और मानसिकता हमें छोडऩी होगी।

और अंत में ....

खैर, उर्दू में औरत की इज्जत के लिए एक शब्द है इस्मत, लेकिन इसका सही अनुवाद शायद न हिंदी में है, न अंग्रेजी में; इस देश में इस्मत के सौदागरों को दलाल कहा जाता है। ये वे लोग हैं जो मासूम बच्चियों को जिस्म बेचने पर मजबूर करते है। समाज की नजरों में ये गिरे हुए गंदे लोग माने जाते हैं, लेकिन इन इस्मत के सौदागर समाज के उन ठेकेदारों से फिर भी अच्छे हैं जिनकी समाज में ताकत का आधार है यह मान्यता कि औरत का अपने जिस्म-ओ-दिमाग पर कोई अधिकार नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि महिलाओं के प्रति दिन-ब-दिन बढ़ते अपराधों के विरोध में किसी भी राजनीतिक दल की तरफ से कोई पुरजोर विरोध दिखाई या सुनाई नहीं देता। साल भर में होने वाले लोकसभा-राज्यसभा और विधानसभाओं के होने वाले सत्रों में आंकड़े तो पेश किए जाते है पर पुख्ता कार्यवाही करने की आवाज शायद ही इन मामलों में उठती हो। वे लोग जो संसद में उंची आवाज में बात करते है महिला आरक्षण की नैतिकता के इन ठेकेदारों के सामने चुप रहते हैं क्यों? क्यों किसी बलात्कारी को कठोर दंड नहीं दिया जाता? दिया भी जाता है तो सुप्रीम कोर्ट से होते हुए राष्टपति की दयायाचिका तक सब रफा-दफा। क्या करेंगी महिलाएं, बच्चियां ऐसे आरक्षण का जब वे अपने ही घर, मोहल्ले, शहर में सुरक्षित नहीं हैं। वे कहां जाकर इंसाफ की गुहार लगाएं? क्या मिलगा उन्हें सच में इंसाफ? क्या हमारी सरकारों को, जनप्रतिनिधियों को, हमारे देश की कानून व्यवस्था के पहरुओं को इस मामले में और कठोर कानून बनाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती?

- ममता यादव, भोपाल

पूरब-पश्चिम के बीच झूलती नारी




- ममता यादव

पुरुषों से बात न करना, लंबे घूंघट रखना, दिनभर घर में काम करते रहना, पति से लोगों के सामने बात न करना आदि ऐसी कई बातें हैं, जो करीब दो-ढाई दशक पूर्व तक भारतीय नारी के व्यक्तित्व के विशेष गुण माने जाते थे। यही वे गुण थे, जो भारतीय नारी की नैतिकता और सद्चरित्रता का प्रमाण माने जाते थे, लेकिन अब भारतीय नारी समाज में तीव्रता से परिवर्तन आया है।


वह चाहे व्यवसाय का क्षेत्र हो या सरकारी नौकरी का, खेल जगत हो या मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया, नारी ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। नारी ने आसमान में उड़ान भर ली है। जमीन पर पंख फडफ़ड़ाने वाले दिन अब लद चुके हैं। वह नित नए क्ष़ेत्रों की तलाश कर रही है। घर की दहलीज पार कर वह बाहर आ चुकी है, लेकिन इस तीव्र गति से आए परिवर्तन को समझने के लिए जब हम पिछले दशकों की तरफ देखते हैं तो जो नतीजे आते हैं, वे हमें चौंकाते हैं तो रुलाते भी हैं। कभी उत्साहित करते हैं, तो कभी समाज में फैली उच्छंखलता पर हमें माथा पीटने को भी बाध्य करते हैं। ये नतीजे चौंकाते इसलिए हैं क्योंकि भारतीय नारी ने जिस तीव्रगामी परिवर्तनशीलता का परिचय दिया है, जिस खूबी से वह घर-बाहर की जिम्मेदारी निभा रही है वह अन्यत्र दुर्लभ है। ये नतीजे रुलाते इसलिए हैं क्योंकि एक तरफ जहां भारतीय समाज खुद के 21 वीं सदी होने का दंभ भरते नहीं थकता, वहीं दूसरी ओर नारी पर
अत्याचार, नारी शोषण और दुष्कृत्य की घटनाएं बजाय घटने के निरंतर
बढ़ी ही हैं।

बढ़ रहीं घटनाएं

मध्यप्रदेश के इंदौर और बेटमा में हुई सामूहिक दुष्कृत्य और दुष्कृत्य की घटनाएं हों या राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निरंतर बढ़ती छेड़छाड़ और दुष्कृत्य की घटनाएं इसका ताजा उदाहरण हैं। जो यह सवाल छोड़ जाती हैं कि क्या वाकई नारी की स्थिति में बदलाव आया है, आया भी है तो किस हद तक? सिर्फ सतही तौर पर या अंदरूनी तौर पर। क्या कारण है कि आज भी पुरुष इस बात को लेकर निश्चिंत है कि चरित्र को लेकर उसके लिए समाज में कोई मानदंड नहीं हैं। वह कुछ गलत करेगा भी तो कुछ समय तक बात करने के बाद समाज उसे दोबारा उसी प्रतिष्ठा के साथ स्वीकार करेगा ही। आज भी भारतीय समाज में अच्छी महिला और बुरी महिला के लिए नजरिया अलग-अलग ही है। ज्यादती होने पर भी नजरियों का ये अंतर बना ही रहता है। क्या कारण है कि आज भी ज्यादती करने वाले लोग पीढि़त महिला को ही चरित्रहीन करार देकर साफ-साफ बच निकलते हैं?

कहां गई आधुनिक स्वतंत्रता
बेशक पहले की अपेक्षा नारी अधिक आधुनिक, अधिक स्वतंत्र और अधिक सफल हुई है। उसने नई उंचाईयों को छुआ है, लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि भारतीय नारी जहां कहीं भी अपने गौरव से और अपनी महत्वपूर्ण उंचाईयों को छोड़कर पश्चिम की तरफ बढ़ी है, वहीं उसके पीछे ताली ठोकने वाले हाथ ही उसके प्रेरक भी एवं अभद्र संज्ञा के कारण भी रहे। आज की 21 वीं सदी की आधुनिकता भरी दुनियां में नारी को महज उपभोग की वस्तु समझा जाने लगा है। इसमें फिल्मी मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पर्दा चाहे छोटा हो या बड़ा सर्वत्र नारी देह दिखाना आवश्यक सा बना दिया जाता है। अब नायिकाएं खुद पर देह प्रदर्शन का आरोप लगने से बचने के लिए कहानी की मांग की दुहाई देती हैं। इसमें अब नया इजाफा पोर्न स्टार्स के आने से हुआ है। कई ऐसी अभिनेत्रियां भी हैं जो यह कहने से गुरेज नहीं करतीं कि मैं सुंदर हूं और मुझे अपनी सुंदरता दिखाने का पूरा हक है। इस बड़बोलेपन ने एक तरफ जहां एक नंगे युग की शुरूआत की है वहीं दूसरी तरफ उन महिलाओं या युवतियों की तरक्की के रास्ते बाधित किए हैं जो सादे रूप में ही अपनी मंजिल पाना चाहती हैं। विज्ञापन किसी भी उत्पाद का हो देह दर्शना वस्त्रों के साथ नारी की उपस्थिति अनिवार्य सी बना दी गई है। इसके लिए ख्ुाद नारी भी कम जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि कम कपड़े पहनना और कपड़े उतारना उसकी नजर में आधुनिकता है। यह स्टेट सिंबल है। इस स्टेट सिंबल और सेक्स सिंबल कल्चर ने अपराधियों की राहें आसान की हैं।

नारी का शील स्वभाव

वैसे देखा जाए तो नारी के शील, स्वभाव एवं सच्चरित्रता पर धब्बों का कारण स्वयं भारतीय समाज बना, जो उसे पश्चिम की ओर ले गया। आधुनिकता की अंधी लालसा ने भारतीय नारी को पूरब से पश्चिम की ओर धकेला है। अब सवाल यह है कि भारतीय नारी को क्या चरित्र चाहिए, पूरब या पश्चिम का? यदि वह पश्चिम की तरफ जाती है तो उसे भारतीय हृदय खोना पड़ता है यदि वह पूर्वी चरि़त्र को अपनाती है तो उसे उसके मूलरूप में हमारा भारतीय समाज अपनाने में संकोच करता है। हमारा समाज खुद ही तय नहीं कर पा रहा उसे पूरब चाहिए या पश्चिम? वह कभी पूरब की तरफ भागता है और सराहना पश्चिम की करता है। कभी आधा पूर्वी और आधा पश्चिमी बनकर भारतीय जीवन में उथल-पुथल मचाये रखता है। ऐसे में नारी यह तय नहीं कर पाती उसे किसके साथ चलना चाहिए। हमारी संस्कृति चूल्हे की आग में सेंकी रोटी नहीं भूलती, पर लोग पिज्जा की ज्यादा प्रशंसा करते हैं।

एक यक्ष प्रश्न?
नारी क्या अपनाए, क्या छोड़े, यह एक यक्ष प्रश्न है। वह पर्दा करे, अद्र्ध नग्न रहे या देह दर्शना कपड़ं पहने? आखिर क्यों भारतीय समाज में नारी का जीवन उथल-पुथल एवं प्रताडऩा का विषय बनता जा रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं सारी घटनाएं, सारे परिवर्तनकारी दृश्य उसकी मानसिक परतंत्रता के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। हमारे सामने अनेक प्रश्न हैं, इन प्रश्नों में छिपी कड़वी सच्चाईयां भी हैं। क्या मि रूढ़ मानसिकता का त्याग कर पाए हैं या फिर हम पूर्णत: रूढ़ संस्कृति के साथ हैं। वर्तमान दौर में यदि कोई लड़की देह दर्शना कपड़ों में किसी के गले में बांहें उाले घूमे तो वह आधुनिका है लेकिन पीछे से उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन जब उसी लड़की शादी की बात होती है तो संस्कृति की रक्षा का सवाल आ खड़ा होता है। यह दोहरापन क्यों? बहरहाल, बेहतर हो कि नारी खुद तय करे कि उसे करना क्या है। बेहतर हो कि हम बाहरी चकाचौंध के बजाय अपनी मानसिक स्वतंत्रता को बढ़ाऐं। मॉडर्निटी देह दर्शना कपड़ों की नहीं वरन् विचारों की मॉडर्निटी बढ़ाएं।

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

तकदीर और तस्वीर



'बनने वालाÓ बड़ा है या 'बनाने वालाÓ- उत्तरप्रदेश के नतीजों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में इसी पर मोलभाव होने वाला है। 6 मार्च के बाद यूपी में कौन होगा और यूपीए में कौन कौन होगा? इसका जवाब इसी मोलभाव से निकलेगा। लेकिन बनने-बनाने के इस खेल में देश की तकदीर और तस्वीर बदलना तय है।

आजादी के बाद पहली बार उत्तरप्रदेश में इतने वोट पड़ रहे हैं। सुना है लड़कपन का पहला वोट ही इस बार लखनऊ की बागडोर का फैसला करने वाला है। इस बार यहां लैपटॉप है, इंडस्ट्री की उम्मीद है, एफडीआई का झगड़ा है। यहां 'नखलऊÓ नहीं माया का पेरिस है। इस बार यहां रोम नहीं, राम नहीं फिर भी साध्वी है। इस बार यहां राहुल का गुस्सा है। अमिताभ नहीं..अखिलेश है..ये नया उत्तरप्रदेश है..।

हकदार नेता
इस नए उत्तरप्रदेश में वोट चाहे जितने पड़ें, लेकिन इनका हकदार एक नेता..एक पार्टी..या एक आंदोलन नहीं हो सकता। ये पक्की बात है कि 60, 70, 80 फीसदी वोट सिर्फ एक पार्टी या नेता के लिए नहीं पड़े हैं। इसी को दिमाग में

रखते हुए एक नतीजा भी आउट हो चुका है- 50, 75, 125 और 150 यानी नए उत्तरप्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी को 150 (कुछ ज्यादा या कम) सीटें मिलने जा रही हैं तो फिर दिक्कत किस बात की। 150 वाला 50 वाले से मिल जाएगा या 125 वाला 75 वाले से मिल जाएगा या फिर इसका उल्टा हो जाएगा और उस नए उत्तरप्रदेश की सरकार बन जाएगी, जहां लाइनें लगा लगा के नए वोटरों ने जमकर वोट डाला है, लेकिन इस बार खेल इतना आसान नहीं।

होली का रंग
6 मार्च के जश्न या मातम का असर जाने कहां तक होगा। ये भविष्यवाणी करना किसी भी पंडित के बस का नहीं है। हो सकता है इस बार की होली का रंग अब लोकसभा चुनावों के बाद ही उतरे। चुनाव उत्तरप्रदेश के हैं, लेकिन लहरें दक्षिण से पूरब के प्रदेशों तक उठ रही हैं। ट्रेड यूनियनें हड़ताल कर रही हैं, संघ पर राज्य हावी हैं। सरकार छोटी और विपक्ष बड़ा हो रहा है, जीडीपी, सब्सिडी के माहिरों को नींद नहीं आ रही, तेल के दाम बेलगाम होने को बेकरार हैं, महंगाई पर लगी चुनावी लगाम कभी भी छूट सकती है। यानी देश की राजनीति में हाल के वर्षों का सबसे ज्यादा अनिश्चितता का वक्त दस्तक दे रहा है।


अनिश्चितता
अनिश्चितता का आलम ये है कि पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे छोटे राज्यों की आवाज भी साफ नहीं सुनाई दे रही है। कहीं ऐसा ना हो कि देहरादून से लखनऊ और दिल्ली तक 'बननेÓ और 'बनाने वालेÓ एक हो जाएं। इशारा बीएसपी की तरफ है। देहरादून में अगर वो कुछ उधार दे पाई तो लखनऊ में सत्ता तक पहुंचने के लिए अपना हिस्सा जरूर मांगेगी। इस गणित में ये भी याद रखना है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 'बनाने वालोंÓ में बीएसपी का रोल काफी अहम होने वाला है। ऐसे में हो सकता है हाथी को लेकर राहुल का गुस्सा धरा का धरा ही रह जाए और आखिरकार हाथी की पूंछ पकड़ कर ही कांग्रेस को आगे की चुनावी वैतरणी पार करनी पड़े।
सबसे बड़ा संकट
असल में इन चुनावों में सबसे बड़ा संकट कांग्रेस के लिए ही है। वो 50 रहे चाहे 75, यूपी में 'बनाने वालेÓ की भूमिका निभाना उसकी मजबूरी हो गई है। उसे एक तरफ ममता को साधना है तो दूसरी तरफ राज्य सभा में अपने नंबर ठीक करने हैं। राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति की गद्दी के लिए क्षत्रपों की ताकत का जुगाड़ करना है तो आने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी राजनीति का रास्ता भी चुनना है। कांग्रेस अगर सपा या बसपा के साथ जाती है तो यूपी में राहुल ने जितनी मेहनत की है, वो सब पानी में जाएगी और नहीं जाती है तो फिर दिल्ली में उसे कौन बचाएगा और खुदा ना खास्ता इस चुनाव से कुछ नहीं बन पाया तो राष्ट्रपति शासन का पाप भी उसी के माथे मढ़ा जाएगा।


किसी का पिछलग्गू नहीं
बीजेपी को फिलहाल यूपी में किसी का पिछलग्गू बनने की जरूरत नहीं पडऩी चाहिए। उस पर कांग्रेस जैसा कोई दबाव नहीं है। उसे जरूरत है तो सिर्फ अपना घर संभालने की और अगर उत्तराखंड और पंजाब में उसका खेल जम जाए तो यूपी में वो बाहर खड़े होकर 'बननेÓ और 'बनाने वालोंÓ के तमाशे का मजा

लेगी। बड़ा फायदा भी इसी में है। लेकिन अगर यूपी में वो नंबर-4 रह गई,
उत्तराखंड और पंजाब में भी लुटिया डूब गई तो संकट कांग्रेस से बीजेपी में शिफ्ट हो सकता है। तब उसके सामने पहली चुनौती होगी कर्नाटक में अपनी सरकार बचाने की। पार्टी को आंख दिखा रहे येदियुरप्पा को संभालना फिर बेहद मुश्किल हो जाएगा। गडकरी की कमान पर सवाल उठाने वालों की आवाज में खनक आ जाएगी। ऐसी सूरत में बीजेपी भी नहीं चाहेगी कि समय से पहले ही लोकसभा चुनाव हो जाएं।


राजनीति का हथियार
बड़ी बात ये है कि फिलहाल बीजेपी या कांग्रेस के चाहने ना चाहने से बहुत कुछ होने वाला नहीं है। असल में एफडीआई और एनसीटीसी जैसे मुश्किल लफ्जों को देसी राजनीति का हथियार बना रहे क्षत्रप कांग्रेस-बीजेपी से ज्यादा धारदार नजर आने लगे हैं। इनमें से एक के पास यूपीए सरकार की धड़कनें हैं तो बाकी दिल्ली पर दबदबा बनाने को बेकरार हैं। अनिश्चितता के इस माहौल में पटनायक-ममता और जया की चिट्ठी-पत्री सबसे 'इंपॉर्टेंटÓ हो गई है। दीवार पर साफ-साफ लिखा दिख रहा है कि राष्ट्रीय राजनीति की पिच पर 'तीसराÓ अपना करतब दिखाने को मचल रहा है। इमेज की मारी कांग्रेस को मिस्टर क्लीन पटनायक की चिट्ठी यूपी के नतीजों से ज्यादा डरा रहा है। कहीं राष्ट्रीय राजनीति के अगले नायक के बीज उड़ीसा में तो नहीं पड़ गए हैं? कहीं बीजू पटनायाक का मलाल उनके पुत्र तो खत्म नहीं करेंगे? क्या राजनीतिक स्थिरता का रास्ता तीसरे दरवाजे से होकर ही निकलेगा? उस वक्त फिर वैसा ही होगा जैसा अभी उत्तरप्रदेश में होने की संभावना है। शायद उस वक्त भी कांग्रेस को मजबूरन 'बनाने वालेÓ का रोल ही निभाना पड़े।

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सम्पूर्ण नहीं मेरा जीवन

हॉलीवुड अभिनेत्री जेसिका अल्बा के मुताबिक उनका जीवन सम्पूर्ण नहीं है, क्योंकि वह परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाती हैं। दो बच्चियों की मां जेसिका का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहती हैं, लेकिन व्यस्तताओं के कारण ऐसा कर नहीं पातीं। वेबसाइट शोबिजस्पाई. कॉम ने जेसिका के हवाले से कहा, यह सम्पूर्ण नहीं है। मैं लगातार विचार कर रही हूं कि मुझे अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए। मैंने अपने कार्यालय में बच्चों के लिए एक स्थान समर्पित कर दिया है, जहां बच्चे आरामदायक महसूस करते हैं, लेकिन हर दिन नया होता है।

रणबीर-शाहिद मिलाएंगे आंखें

रणबीर कपूर और शाहिद कपूर आंखें मिलाने को तैयार बैठे हैं। जी हां, 1993 की ब्लॉकबस्टर मूवी आंखें का सीक्वल बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें शाहिद और रणबीर लीड रोल्स में होंगे। पहलाज निहलानी की ऑरिजनल फिल्म में गोविंदा और चंकी पांडे मेल लीड्स थे। इसमें केवल गोविंदा का डबल रोल था। वहीं, आंखें 2 में दोनों हीरोज डबल रोल में होंगे। पहलाज ने बताया, इस समय वह फिल्म के बारे में ज्यादा तो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन इतना जरूर है कि यह ऑरिजनल से ज्यादा फनी होगी। हालांकि, शाहिद और रणबीर के रोल के बारे में अभी काफी कुछ तय होना बाकी है। फिलहाल फाइनल स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है। इसी साल के अंत तक शूटिंग शुरू करने की प्लानिंग है। यही नहीं, फिल्म की लीडिंग लेडीज के बारे में भी अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। अब देखते हैं शाहिद और रणबीर की जोड़ी क्या कमाल दिखाती है!

वीना को इनकार
जब भी कोई स्वयंवर से जुड़ा रिएलिटी शो टीवी पर दिखाया जाता है, तो उसे हिट करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। अब वीना मलिक स्वयंवर को भी खूब तूल दिया जा रहा है। इसके लिए इंटरनेशनल रेसलर संग्राम सिंह को करोड़ों तक का ऑफर दिया जा चुका है। इंटरनेशनल रेसलर संग्राम ंिसंह ने वीना मलिक के स्वयंवर में आने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चैनल उन्हें स्वयंवर में आने का न्यौता काफी समय से दे रहा है। सूत्रों की मानें तो पहले उन्हें 60-70 लाख रुपये ऑफर किए गए, फिर 1 करोड़ रुपये। और अब उन्हें 2 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। इतनी मोटी रकम के बावजूद, संग्राम वहां आने को राजी नहीं हो रहे। जब हमने इस बारे में संग्राम से बात की, तो उन्होंने बताया कि उन्हें वीना के स्वयंवर में अपनी प्रजेंस दिखाने से ऐतराज ही नहीं है तो फिर प्रॉब्लम कहां पर है? दरअसल, वह वीना के फ्रेंड होने के नाते अपनी गर्लफ्रेंड पायल रोहतगी के साथ तो वहां जा सकते हैं, लेकिन पार्टिसिपेंट बनकर नहीं। जबकि चैनल चाहता है कि वह स्वयंवर में कैंडीडेट के तौर पर पार्टिसिपेट करें। यही नहीं स्वयंवर के फिनाले तक वीना के साथ इस ताम-झाम में भी मौजूद रहे। इस बारे में संग्राम बड़ी साफगोई से कहते हैं, चैनल वाले अगर वीना को ही 1 करोड़ रुपए और ज्यादा दे दें, तो वह इतना ड्रामा कर देंगी कि टीआरपी बढ़ जाएगी। भला, मेरी क्या जरूरत है वहां? दिलचस्प यह है कि संग्राम पहले भी यह कहते रहे हैं कि वीना का उन पर क्रश रहा है। ऐसे में उनके लिए यह सब ज्यादा इंपोर्टेंस नहीं रखता। हालांकि संग्राम, अपनी इमेज के हल्का होने को लेकर भी खासे कॉन्शस हैं। ग्लैमर वल्र्ड उन्हें रास तो आने लगा है,
लेकिन वह अपनी रिस्पेक्टेबल इमेज को भी बरकरार रखना चाहते हैं। बकौल संग्राम, खली भाई साहब की मैं बहुत रिस्पेक्ट करता रहा हूं। लेकिन बिग बॉस में आने के बाद उनकी इमेज की ऐसी-की-तैसी हो गई। वैसे ऐसे में बेचारी पायल का रिएक्शन क्या होगा, यह जानना भी खासा इंटरेस्टिंग होगा!
अश्मित-वीना का रोमांस : पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक और अश्मित पटेल रियल लाइफ के बाद रील लाइफ में रोमांस करते नजर आएंगे। दोनों का प्यार रियलिटी शो बिग बॉस सीजन-4 के दौरान परवान चढ़ा था। दोनों नवीन बत्रा की फिल्म सुपरमॉडल में एक साथ दिखेंगे। फिल्म की शूटिंग अगले कुछ महीनों में फिजी द्वीप पर की जाएगी। नाम के अनुरूप फिल्म की पृष्ठभूमि फैशन, रहस्य, ग्लैमर के इर्द-गिर्द बुनी गई है। अभिनेत्री अमीषा पटेल के भाई अश्मित के साथ काम करने को लेकर वीना खासी उत्साहित हैं। वीना ने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि हम साथ काम कर रहे हैं। बिग बॉस के बाद प्रशंसक हमें एक साथ देखना चाहते थे। उनकी यह मुराद पूरी होने जा रही है। वैसे, मुराद किसकी पूरी होने जा रही है, यह बात तो वीना अच्छे से जानती हैं।

जेनिफर किससे प्यार

हॉलीवुड अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन ने कहा कि फिल्म 'वंडरलस्टÓ की शूटिंग के दौरान उन्हें बकरी से प्यार हो गया। फिल्म 'वंडरलस्टÓ की शूटिग के दौरान जेनिफर का बकरी के साथ जुड़ाव बढ़ गया और उन्हें दूध दुहने में काफी आनंद आया। वेबसाइट 'कांटैक्ट म्यूजिक डॉट कॉमÓ जेनिफर के हवाले से बताया, स्क्रीन टेस्ट के दौरान मैं उस बकरी से मिली। मैंने अपने जीवन में कभी भी बकरी का दूध नहीं दुहा था। मैं न्यूयार्क शहर में पली-बढ़ी हूं, लेकिन मुझे बकरी से प्यार हो गया।

विदेशी नहीं करेंगे बॉलीवुड में काम!

यहां के फिल्मीस्तान स्टूडियो में फिल्म तेज की शूटिंग के दौरान अचानक शिव सैनिकों के पहुंचने से हड़कंप मच गया। दरअसल, सेट पर मल्लिका शेरावत पर लैला नाम का एक आइटम नंबर शूट किया जा रहा था। तभी वहां दो शिव सैनिक जबरन घुस आए। फिल्म से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वे देखने आए थे कि यहां कोई विदेशी कलाकार तो नहीं। उनका कहना था कि वे किसी भी विदेशी कलाकार को हिंदी फिल्म में काम करने के लिए महाराष्ट्र में शूटिंग की इजाजत नहीं देंगे। जब उन्हें बताया सेट पर मौजूद कलाकार विभिन्न संघों के सदस्य हैं, तब भी नहीं माने। काफी देर बाद मामला सुलझाया जा सका। निर्माता रतन जैन ने भी खबर की पुष्टि की है। दरअसल, फिल्म लंदन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसलिए विदेशी कलाकार भी इसमें काम कर रहे हैं। इसकी भनक लगते ही शिवसैनिक वहां पहुंच गए। फिल्म में अजय देवगन, अनिल कपूर, कंगना रनौत और समीरा रेड्डी भी काम कर रहे हैं। इससे पहले पाकिस्तानी सेलीब्रिटी के रियलिटी शो बिग बॉस सीजन पांच में काम करने पर भी शिवसैनिकों ने शो को बंद कराने के लिए प्रदर्शन किया था।

कैनेडी की भूमिका में कुनिस
हॉलीवुड अभिनेत्री माइला कुनिस एक फिल्म में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की पत्नी जैकलिन कैनेडी की भूमिका में नजर आ सकती हैं। कुनिस की निर्देशक ली डेनियल से इस बारे में बातचीत चल रही है। सूत्रों के अनुसार डेनियल ने द बटलर नाम की एक पटकथा लिखी है। यह पटकथा व्हाइट हाउस में 34 वर्षों तक सेवाएं प्रदान करने वाले एक कर्मचारी यूजीन एलेन पर आधारित है। एलेन ने वर्ष 1952 से आठ अलग-अलग राष्ट्रपतियों को व्हाइट हाउस में देखा है। ह्यूग जैकमैन, जॉन कुसैक और टॉक शो प्रस्तोता ओपराह विनफ्रे भी इस परियोजना के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले केटी होम्स ने हिस्ट्री चैनल के कार्यक्रम द कैनेडीज में जैकी की भूमिका निभाई थी।

नए निर्देशकों के साथ नहीं

कैटरीना कैफ अब नए निर्देशकों के साथ काम नहीं करना चाहती। हाल ही में एक बड़े प्रोडक्शन हाउस ने कैट को अपनी फिल्म के लिए अप्रोच किया, लेकिन कैट ने फिल्म में काम करने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि डॉयरेक्टर नया था। कैटरीना इन दिनों बड़े निर्देशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। वो शाहरुख के साथ यश चोपड़ा की फिल्म में काम कर रही हैं। सलमान के साथ उनकी एक था टाइगर आने वाली है और आमिर खान के साथ राजू हिरानी की फिल्म की बात चल रही है।

खुश हैं पेनेलोपी
हॉलीवुड की दिलकश अभिनेत्री पेनेलोपी क्रूज की सौतेली मां ने एक बच्ची को जन्म दिया है। सौतेली बहन के जन्म पर क्रूज काफी खुश हैं। हैलो मैगजीन की खबर के मुताबिक, 37 वर्षीय स्पैनिश कलाकार के पिता एडुआर्डो की दूसरी पत्नी कारमैन मोरेनो ने इस बच्ची को जन्म दिया है। मोरेनो की उम्र पेनेलोपी क्रूज की उम्र के लगभग बराबर है। अभिनेत्री क्रूज के माता-पिता ने बच्ची का नाम सलमा रखा है। यह नाम पेनेलोपी के सबसे अच्छी दोस्त सलमा हायेक का भी है। बहरहाल, यह नाम मैक्सिको की अभिनेत्री के नाम पर नहीं, बल्कि संयोगवश रखा गया है।

नई पीढ़ी अधिक प्रतिभाशाली
फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्मों में कई नए चेहरों को मौका दिया है और उनके ऐसा करने के पीछे एक विशेष वजह है। दरअसल, अनुराग महसूस करते हैं कि नई पीढ़ी उनकी पीढ़ी से अधिक प्रतिभाशाली है। साथ ही उन्हें फिल्म उद्योग में आ रहे नए चेहरों पर पूरा भरोसा है। विक्रमादित्या मोटवानी, बिजॉय नामबीर और राजकुमार गुप्ता को मौका देने वाले कश्यप ने कहा, 'मैं मानता हूं कि नई पीढ़ी हमसे कहीं बढिय़ा है। नए निर्देशक, कलाकार हमसे बढिय़ा हैं। नई प्रतिभाओं को पता है कि उन्हें क्या करना है। वह हमारे जितने असमंजस में नहीं हैं।Ó 39 वर्षीय कश्यप ने एक कार्यक्रम में कहा, 'उनमें कई बहुत अच्छे फिल्म निर्माता हैं। जब भी मैं बढिय़ा फिल्म निर्माता को देखता हूं, तो उसका सम्मान करता हूं। मैंने विक्रमादित्या, बिजॉय और राज कुमार को चुना, जिन्हें उनके दिमाग के लिए जाना जाता है। मैं उनको कभी नहीं बताता कि उन्हें क्या करना है।Ó निर्देशक विकास बहल और मोटवानी के साथ मिलकर 'फेन्टॉमÓ नाम से प्रोड्क्शन हाउस चला रहे कश्यप संगीत उत्सव 'सनबर्नÓ पर फिल्म भी बना रहे हैं। फिलहाल कश्यप अपनी फिल्म 'गैंग्स ऑफ वसेपुरÓ और 'अईयाÓ में व्यस्त हैं।

साड़ी में सन्नी लियोन
बिग बॉस 5 से पोर्न स्टार सनी लियोन भारतीय दर्शकों में खासी लोकप्रिय हो गई हैं। अब तो वो हिंदी फिल्मों में भी दिखाई देंगी। बिग बॉस में सनी अधिकतर समय भारतीय परिधानों में ही दिखाई दी थीं, हालांकि सनी लियोन इन दिनों वापस कनाडा लौट चुकी हैं, लेकिन लगता है कि भारत से जाने के बाद भी उन पर से देसी रंग उतरा नहीं है। यह उसका इंडियन ड्रेसेस के लिए आकर्षण ही है शायद, जो सनी अब साड़ी पहन कर तस्वीरें खिंचवाने लगी हैं। सनी साड़ी में भी गजब की सुंदर दिख रही हैं। हाल ही में सनी ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर अपनी नई तस्वीर लगाई है, जिसमें उन्होंने एक पारंपरिक भारतीय महिला की तरह पोज किया है और साड़ी पहनी है। उन्होंने इस तस्वीर को अपनी अब तक की सबसे अच्छी तस्वीर करार दिया है।

प्रीति की तमन्ना पूरी
प्रीति जिंटा अपने डेब्यू को-प्रोडक्शन की फिल्म इश्क इन पेरिस की शूटिंग पेरिस में कर रही हैं। प्रीति ने ट्विट किया है कि अब वह एफिल टावर को शूट करने की तैयारी कर रही हैं। आपको बता दें कि प्रीति की पहले से ही तमन्ना थी की वह एफिल टावर को अपनी फिल्म के लिए शूट करें।

- राजकुमार सोनी