शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

घर लौटकर खुश हैं बिग बी




मुंबई। बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा है कि पारिवारिक माहौल में लौटने से वह खुश हैं। अपने पेट की सर्जरी के चलते 12 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद वह घर लौट आए हैं।

बिग बी को सेवेन हिल्स अस्पताल से बीती रात छुट्टी दे गई है। बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, अस्पताल से अभी अभी छुट्टी मिली है और मैं फिर से पारिवारिक माहौल में हूं। उन्होंने लिखा है कि सर्जरी कष्टदायक थी लेकिन ईश्वर की कृपा और दुआओं की बदौलत मैं स्वस्थ हो गया हूं। मैं सभी का शुक्रिया अदा करता हूं।

उन्होंने लिखा है कि कर्मचारियों के चेहरे पर संतोष का भाव था क्योंकि उनका एक संक्षिप्त पारंपरिक स्वागत किया गया। जैसे ही आप मुख्य द्वार से प्रवेश करते हैं आपकी आरती उतारी जाती है और टीका लगाया जाता है। इसके बाद आप घर में कदम बढ़ाते हैं।

वैज्ञानिक नरसिम्हा का अंतरिक्ष आयोग से इस्तीफा





बेंगलूर।
देश के चार शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से नाराज जाने-माने वैज्ञानिक रोद्दम नरसिम्हा ने अंतरिक्ष आयोग के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। नरसिम्हा [78] दो दशक से भी ज्यादा समय से अंतरिक्ष आयोग से जुड़े थे। नरसिम्हा के कदम से सकते में आई सरकार उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है।

एंट्रिक्स-देवास करार को लेकर घोटाले के आरोप लगने के बाद सरकार ने नरसिम्हा और योजना आयोग के सदस्य बीके चतुर्वेदी को इस करार की समीक्षा का जिम्मा सौंपा था। नरसिम्हा ने हाल में कहा था कि उन्हें एंट्रिक्स-देवास करार में किसी भी गड़बड़ी या घोटाले या किसी निजी हित के साक्ष्य नहीं मिले थे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, 'नरसिम्हा, नायर सहित चार शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से दुखी थे।' सरकार ने इस करार को लेकर इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर समेत चार शीर्ष वैज्ञानिकों को किसी भी सरकारी पद पर नियुक्ति के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। विवाद में घिरने के बाद सरकार ने पिछले साल ही यह करार रद कर दिया था।

नरसिम्हा ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया है। सरकार ने नरसिम्हा से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय [पीएमओ] में राज्य मंत्री नारायणसामी ने नई दिल्ली में कहा, 'प्रोफेसर नरसिम्हा बहुत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं। मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।' पद्म भूषण समेत कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके नरसिम्हा ने दो सौ से ज्यादा शोध पत्र लिखे हैं।

माधवन नायर ने भी नरसिम्हा के इस्तीफे पर दुख जताते हुए इसे अंतरिक्ष आयोग के लिए क्षति बताया है। नायर ने कहा, 'यह बेहद दुखदायी समाचार है। वह दिग्गज अंतरिक्ष विज्ञानी हैं। वह तब से अंतरिक्ष कार्यक्रम में अपना योगदान दे रहे थे जब इसकी कमान एपीजे अब्दुल कलाम के पास थी।'

क्या था एंट्रिक्स-देवास करार


वर्ष 2005 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच दुर्लभ एस बैंड स्पेक्ट्रम को लेकर एक करार हुआ था। इसके तहत इसरो को देवास के लिए दो उपग्रह लांच करने थे, जबकि देवास को अगले 20 साल तक एस बैंड स्पेक्ट्रम के 70 मेगाहर्ट्ज के बेतहाशा इस्तेमाल की इजाजत मिली थी। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक [कैग] की रिपोर्ट के अनुसार इस करार से सरकारी खजाने को करीब दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने वाला था।

स्तन कैंसर के जीन की खोज




वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने एक नए जीन को खोजा है जो स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके इस अनुसंधान का परिणाम मरीजों को यह जानने में मदद कर सकता है कि उनमें कैंसर के विकसित होने का कितना खतरा है। फिनलैंड में हुए एक नए अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने पाया है कि ‘एब्राक्सास’ नामक उत्परिवर्तित जीन स्तर कैंसर को अनुवांशिक बनाने के लिए जिम्मेदार है। इस अनुसंधान का परिणाम विज्ञान पत्रिका ‘साईंस ट्रांसलेशन मेडिसिन’ में छपा है।

हेल्थ अपडेट


काला नमक स्वास्थ्य का खजाना

काला नमक भारतीय भोजन में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाने वाला खाद्य नमक है। काले नमक का प्रयोग चाट, चटनी, रायता और कई अन्य भारतीय व्यंजनों में किया जाता है। भारतीय चाट मसाला, अपनी खुशबू और स्वाद के लिए काले नमक पर निर्भर करता है।
काले नमक में मुख्यत: सोडियम क्लोराइड होता है। इसके अतिरिक्त इसमें सोडियम सल्फेट, आयरन सल्फाइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि की कुछ मात्रा भी मिश्रित होती है। सोडियम क्लोराइड के कारण ही यह नमकीन स्वाद देता है, आयरन सल्फाइड के कारण इसका गहरा बैंगनी रंग दिखता है और सभी सल्फर लवण इसके विशिष्ट स्वाद और गंध के लिये जिम्मेदार हैं।

उपयोग
काले नमक को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक ठंडी तासीर का मसाला माना जाता है और इसका प्रयोग एक रेचक और पाचन सहायक के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि यह पेट की गैस (उदर वायु) और पेट की जलन में राहत प्रदान करता है। यह माना जाता है कि इसमें आम नमक की तुलना में कम सोडियम होता है और यह रक्त में सोडियम की मात्रा में वृद्धि नहीं करता है। हरड़ के बीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा में कामोत्तेजक माना जाता और यह रक्तचाप को कम करने और जलन में मदद करता है। इस आशय का कारण हरड़ के बीजों का सल्फ्यूरस यौगिक है, जो निर्माण प्रक्रिया के दौरान काला नमक का हिस्सा बन जाते हैं। काला नमक वायु में फैले बैक्टीरिया को भी खतम करता है।

सेंधा नमक
सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे, तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएं। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खांसी, विशेषकर बलगमी खांसी से आराम मिलता है।


मुंह के छाले ऐसे ठीक करें
मुंह में एक छोटा सा घाव होता है, जिसे हम अल्सर बोलते हैं। अगर यह मुंह में छाला हो जाए तो खाने-पीने में बड़ी तकलीफ हो जाती है। इसमें काफी जलन और दर्द भी महसूस होती है। वैसे तो यह बीमारी कुछ ही दिनों के लिए होती है और हफ्ते भर में ठीक भी हो जाती है। पर मुंह का अल्सर होता कैसे है और इस बीमारी की रोकथाम क्या है ? आज हम इसी विषय पर बात करेंगे।

कारण-
मसालेदार भोजन करना
टूथपेस्ट से एलर्जी
विटामिन की कमी खासकर फोलिक एसिड और बी कांप्लेक्स
कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र
धूम्रपान
बीमारी

अनियमित मासिक
बचाव-
1. अच्छा होगा कि मासालेदार भोजन से बचा जाए, क्योंकि इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। साथ ही पाचनशक्ति भी कमजोर हो जाती है।
2. शरीर में पानी की कमी न होने पाए, इसके लिए खूब सारा पानी पिएं।
3. नारियल पानी शरीर के लिए अच्छा भी होता है और शरीर की गर्मी से राहत भी दिलाता है।
4. अपने मुंह की सफाई का खास ध्यान दीजिए। हमेशा ब्रश करें और टूथपेस्ट को बदलने से बचें।


जानिये गुलाब जल के फायदे


गुलाब जल एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है, जिसको लगातार लगाने से कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।

चाहे सन बर्न हो गया हो या फिर त्वचा को साफ करना हो, गुलाब जल काफी फायदेमंद होता है। साथ ही पुरुष इसे आफ्टर शेव के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। आइये जानते हैं गुलाब जल के कुछ और प्रयोग।

1. रोमा थेरेपी
गुलाब जल अरोमा थेरेपी का ही एक हिस्सा है। रिसर्च के मुताबिक अगर गुलाब जल का प्रयोग किया जाए तो काफी सकारात्मक प्रभाव मिलते हैं। तनाव कम होना, अच्छी नींद आना, तरो-ताजा महसूस करना और सौंदर्य निखरना, यह सब गुलाब जल के लगातार इस्तेमाल से ही होता है।

2. टोनर
गुलाब जल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक सर्वश्रेष्ठ टोनर भी है। यह एक प्राकृ तिक अस्ट्रिंजन्ट होता है, इसलिए यह टोनर के रूप में प्रयोग किया जाता है। रोज रात को इसे अपने चेहरे पर लगाएं और देखें कि आपकी त्वचा कुछ ही दिनों में टाइट हो जाएगी और झुर्रियां चली जाएंगी।

3. क्लींजर
इसके अंदर ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिसकी वजह से आपके चेहरे के बंद पोर्स साफ हो जाएंगे। इन पोर्स में तेल और गंदगी छुपी रहती है, जिसकी वजह से चेहरे पर कील और मुंहासे हो जाते हैं। गुलाब जल लगाने से चेहरा की त्वचा स्वस्थ्य और चमकदार बन जाती है।

4. सनबर्न
कहा जाता है कि यदि आप कहीं तेज धूप में निकल रहीं हों तो त्वचा पर गुलाब जल छिड़कने से धूप का असर नहीं पड़ता। क्या आपको पता है कि गुलाब जल एक कीटाणुनाशक भी है। जिसके प्रयोग से छोटे छोटे कीटाणुओं का नाश हो जाता है। इसको लगाने से धूप की वजह से होने वाले नुकसानों से बचा जा सकता है।

5. सिरदर्द में भी फायदेमंद
सिरदर्द से परेशान लोग जो रोजाना गोली लेकर काम चलाते हैं। वे फ्रिज में रखे एकदम ठंडे गुलाबजल में भीगे कपड़े या रूई को 40-45 मिनट तक सिर पर

रखें। काफी आराम मिलेगा।


जल्दी सोने व जागने से मूड रहेगा मस्त

रात को जल्दी सोने व जागने से मिलने वाले लाभ का अनेक स्थानों पर कई मामलों में गुणगान किया गया है। नए शोध अध्ययन के अनुसार जल्दी सोने व जागने से पूरा दिन मूड खुशगवार बना रहता है। पूरा दिन मन खुश रहता है और व्यक्ति क्रियाशील रहता है। इससे वजन नियंत्रित होता है, शरीर छरहरा रहता है। इसके अलावा जल्दी उठने वालों पर तनाव एवं अवसाद का प्रभाव कम पड़ता है। देर से सोने व देर से जागने वालों की तुलना में ये अधिक स्वस्थ रहते हैं।

ें 'डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपीÓ ने जगाई नई आस

कैंसर के इलाज के लिए कई तकनीक चलन में हैं, लेकिन 'डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपीÓ ने इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में एक नई आस जगाई है। यह थेरेपी जानलेवा कैंसर के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है और शायद यही वजह है कि 'डेन्ड्रिटिक सेलÓ की खोज करने वाले राल्फ एम स्टाइनम को मेडिसिन और फिजियोलॉजी के लिए साल 2011 के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। 'डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपीÓ प्रतिरोधक प्रणाली पर आधारित एक ऑटोलोगस चिकित्सा है, जो कैंसर के मरीज की प्रतिरोध क्षमता को स्वाभाविक रूप से बढ़ाकर उसे कैंसरकारी कोशिकाओं से मुकाबला करने के काबिल बना देती है। गुडग़ांव के मेदांता अस्पताल में चिकित्सा विज्ञान और रक्त विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक वैद्य ने को बताया ''प्रतिरोधक क्षमता शरीर की बीमारियों के खिलाफ लडऩे की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली है। श्वेत रक्तकोशिकाएं प्रतिरोधक प्रणाली की प्रभावी कोशिकाएं होती हैं।ÓÓउन्होंने बताया ''डेन्ड्रिटिक कोशिका सफेद रक्त कोशिकाओं का एक अति विशिष्ट क्षेत्र है। यह किसी भी बाहरी कोशिका, यहां तक कि कैंसरकारक कोशिका को भी अपने दायरे में ले आती है और कई टुकड़ों में बांटकर उन्हें कोशिका की सतह पर ले आती हैं। यह टुकड़ों में विभाजित कर प्रतिरोधक प्रणाली की कोशिकाओं को भी सतर्क कर देती है और कैंसर की कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें नष्ट कर डालती हैं।ÓÓ डॉ. अशोक ने बताया कि डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपी से मरीज की प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक तरीके से मजबूत हो जाती है और कैंसरकारी कोशिका से लडऩे में मदद करती है। डेन्ड्रिटिक सेल में ट्यूमर कोशिकाएं खत्म करने की क्षमता तो होती ही है और साथ ही ये कैंसर को नष्ट करने के लिए रोगी की प्राकृतिकप्रतिरोधक प्रणाली को भी उत्तेजित करती हंै।ÓÓ

मिसकैरिज से बचाव


शुरुआती तीन माह महिलाओं के लिए परेशानी भरे रहते हैं। क्रोमोसोम्स में होने वाली गड़बड़ के चलते मिसकैरिज के ज्यादा चांस रहते हैं।

*हार्मोनल फैक्टर
मानव शरीर में पाई जाने वाली थायराइड ग्रंथि में टी-4, टी-3 तथा टी.एस.एच. की अधिकता होने के कारण प्रैगनैंसी का लॉस हो जाता है। इसके अलावा अग्नाशय में इंसुलिन हार्मोंस की अनियमितता होने के कारण भी मिसकैरिज की

संभावना बढ़ जाती है, इसलिए नियमित चैकअप कराना चाहिए।

प्रतिरक्षा तंत्र में गड़बड़ी
एंटी-फॉस्फोलिपिड एंटीबॉडीज सिंड्रोम रक्त में बन जाते हैं, जिसकी वजह से प्रॉब्लम होती है।

प्रदूषण
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण की वजह से भी मिसकैरिज की संभावना रहती है। इस कंडीशन में फैक्टरी से निकलने वाली गैस गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचाती है।

इंफेक्शन
चिकित्सकों के मुताबिक प्रैगनेंसी के दौरान होने वाले संक्रमित रोग जैसे टी.बी., मलेरिया, रुबेला आदि भी मिसकैरिज के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए इन रोगों के लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराएं।

मिसकैरिज की वजह
एनाटोमिकल फैक्टर-सर्वाइकिल इनकम्पीटेंस में बच्चेदानी का मुंह खुल जाता है। मलेशियन फ्यूजन डिफेक्ट में बच्चेदानी अनियमित आकार की हो जाती है, जिसकी वजह से मिसकैरिज की संभावना बढ़ जाती है।

यूटेराइन साइनेकी
* बच्चेदानी में फाइबर टिश्यू आपस में चिपक जाते हैं, जिससे कैविटी बंद हो जाती है, इस कारण भी मिसकैरिज हो जाता है।
* यूटेराइन फायब्रॉयड-बच्चेदानी की मसल्स में एक्स्ट्रा ग्रोथ हो जाती है, इस कारण भी मिसकैरिज हो सकता है।
* मेडिकल एंड सर्जिकल इलनैस-विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बहुत से कारण होते हैं। जैसे- लीवर, हार्ट डिसीज, जॉन्डिस तथा टी.बी. आदि की वजह से भी मिसकैरिज की संभावना बन सकती है।

टेंशन सबसे बड़ा कारण
जरूरत से ज्यादा टेंशन स्वास्थ्य के लिए तो खतरनाक होता ही है, प्रैगनेंसी में तनाव से मिसकैरिज की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए प्रैगनेंट महिलाओं को अधिक सोचना नहीं चाहिए। खुश रहना चाहिए और अपना ध्यान रखना चाहिए।

मिसकैरिज के लक्षण
* ब्लीडिंग होना तथा ब्राऊन डिस्चार्ज होना।
* पेड़ू में मरोड़ के साथ दर्द होना तथा पीठ के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना।
* योनिमार्ग से खून के थक्के निकलना।
* प्रैगनेंसी के आरंभिक काल में दिखाई देने वाले लक्षणों में कमी आना। जैसे- ब्रैस्ट का कड़ापन कम हो जाना, उल्टी, चक्कर आदि कम महसूस होना।

चैकअप है जरूरी
प्रैगनेंसी के दौरान यदि कोई भी इंफेक्शन या बीमारी हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इसके अलावा अगर फस्र्ट प्रैगनेंसी में जेनेटिक डिसऑर्डर हो तो दूसरी प्रैगनेंसी के वक्त डॉक्टर की सलाह से एमनिओसेंटेसिस टेस्ट 12 से

18 महीने के बीच कराना चाहिए। पहले तीन महीनों में बेसिक इंवेस्टीगेशन जैसे- ब्लड, हीमोग्लोबिन, यूरिन, एच.आई. वी. तथा वी.डी.आर.एल. टेस्ट जरूर करा लेने चाहिए।

‘फिसड्डी है दिल्ली-मुंबई के एयरपोर्ट’






नई दिल्ली : दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डे प्रति यात्री आय हासिल करने के लिहाज से दुनिया के दूसरे विमानपत्तनों के मुकाबले काफी पीछे हैं।



परामर्शदाता ‘लिघ फिशर मैनेजमेंट’ द्वारा सर्वे के आधार पर तैयार 50 देशों की सूची में दिल्ली हवाई अड्डे को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। दिल्ली हवाई अड्डे की प्रति यात्री आय मात्र 1.97 विशेष आहरण अधिकार, एसडीआर है जो कि जापान के नरिता हवाई अड्डे के 17.86 एसडीआर के मुकाबले काफी कम है। 2.09 एसडीआर अर्जित करने वाला मुंबई हवाई अड्डे इस सूची में दिल्ली हवाई अड्डे से उपर है।



आय की गणना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष , आईएमएफ द्वारा सृजित अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति एसडीआर के आधार पर की गई है। एसडीआर मूल्य का निर्धारण चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय करेंसी पर आधारित है।



यातायात और संचालन लागत में बढ़ोतरी की वजह से हो रहे नुकसान के मद्देनजर दिल्ली हवाई अड्डे की संचालन करने वाली दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. यानी डायल ने हवाई अड्डा आर्थिक नियमन प्राधिकरण से हवाई अड्डा शुल्क में 874 प्रतिशत तक की वृद्धि की मांग की है। डायल को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 229 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

कहानी - एक मुट्ठी खुशी


- राजकुमार सोनी



मिस्टर और मिसेज रायजादा बगीचे में बैठे हैं। जब से सरकारी नौकरी में आए थे लोग मिस्टर रायजादा के नाम से ही उनको पहचानते हैं। बगीचे में बहुत सारे बच्चे खेल रहे हैं और हम दोनों इन्हीं में अपने बच्चों का बचपन याद करके हंस रहे थे। ये हम दोनों की ही आदत है कि हम हर छोटी से छोटी खुशी में भी ठहाके लगाते हैं। घर पहुंच कर चाय बनाकर मैं फिर पुरानी यादों में खो गई। कैसे उन्होंने तीनों बच्चों को अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, रात-रात भर जागकर उनका ध्यान रखा। उनके साथ वाली मिसेज शर्मा, मिसेज गुप्ता और हां मिसेज जैन सब लोगों के यहां आया रखी हुई थी, पर उन्होंने कभी बच्चों के लिए आया नहीं रखी। एक बार मिसेज शर्मा की बेटी की आया को उन्होंने उसके दूध की बॉटल से दूध पीते हुए देखा तब से तो उन्होंने पक्का मन बना लिया कि बच्चों को खुद ही पालेगी। हालांकि वीनू के बाद जुड़वा बेटियों को पालने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा, पर बच्चों को पालना, उनके मुंह से मां-पापा सुनना एक अलग ही तरह का अहसास है। घर में वे और उनके तीन बच्चे हैं। सास-ससुर गांव में रहते थे। 3-4 महीने उनके पास रहकर चले जाते। गांव उन्हें अपना लगता। पर इन तीन चार महीनों में ही मीना उनका इतना ध्यान रखती कि सारा दिन मुंह से आशीर्वाद ही निकलता। मां जी तो हमेशा कहती- तुम मेरा इतना ध्यान रखती हो, देखना तुम्हारे बच्चे सोने के पालने में झूला झुलाएंगे और वो हंसकर कहती, अरे... मां जी सोना बहुत महंगा हो गया है। जो जुड़वां बेटियां सोना-मोना और एक बेटे वीनू की मां मीना सारा दिन बच्चों के आगे-पीछे दौड़ती रहती हैं। कभी-कभी मन में ख्याल आता, इतनी पढ़ाई में तो वे आज कहीं नौकरी कर रही होती, किसी उच्च पद पर होती पर अगले ही पल उन्हें अपना मां, पत्नी और बहू वाला पद याद आ जाता और वो फिर अपनी दुनिया में रम जातीं। धीरे-धीरे बच्चे बड़े हो गए। वीनू बड़ा था। सोना-मोना से। बड़े होने पर उनकी ख्वाहिशे बढऩे लगीं और जरूरतें भी । वे मिस्टर रायजादा उनकी हर ख्वाहिश और जरूरतें पूरी करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते। आखिर इस महंगाई के दौर में तीन बच्चों को पालना आसान नहीं है। वो तो शुक्र है कि उनके बच्चे बहुत समझदार हैं। वीनू आईएएस आफिसर बनकर मुम्बई में है, तो बेटियां भी अपने पसंद के क्षेत्र में हैं। सोना फैशन डिजाइनर बनी और साथ ही में काम करने वाले रोहित को पसंद कर लिया। हमें भी रोहित अच्छा लगा और सादगी से उन दोनों का विवाह कर दिया। मोना सोना से 15 मिनट छोटी है। बचपन में शिक्षिका बनकर हमें पढ़ाती थी। आज एक स्कूल में प्रिंसीपल बन गई है। बस अब मोना और वीनू के लिए अच्छा रिश्ता मिल जाए तो जिंदगी के सारे काम खत्म। फिर वो अपनी ख्वाहिशें पूरी करेगी। शादी से पहले ही उनका भी एक सपना था। सारी दुनिया को ज्यादा नहीं सिर्फ एक मुट्ठी खुशी देने का, और वो ये सपना जरूर पूरा करेंगी।
तभी फोन की लगातार बजती घंटी से ध्यान भंग हो गया। अरे... ये तो वीनू है। कल शाम को वो आ रहा है। हम सबको एक खुशखबरी देने। विनीत बहुत समझदार लड़का है। जरूर उसका प्रमोशन हो गया है। खुशी के मारे उनसे भी खुशखबरी नहीं पूछी गई वो तो बस ये खबर मोना और उसके पापा को सुनाने दौड़ पड़ी।
सोना और रोहित को भी फोन कर दिया। कल का डिनर सब साथ ही करेंगे। इधर, मिस्टर रायजादा भी बहुत शुख थे। विनीत बहुत अच्छे मौके पर घर आ रहा है। आज सुबह ही उनकी मुलाकात मिस्टर कपूर जो उनके घनिष्ठ-पारिवारिक मित्र हैं, से हुई है। उन्होंने अपने बचपन के वादे को निभाते हुए विनीत और काजल उनकी बेटी का रिश्ता तय कर दिया है। अब विनीत के आते ही वे उनकी सगाई करवा देंगे। काजल बहुत प्यारी लड़की है। सोना-मोना-विनीत की खास दोस्त पर ये चारों ही बचपन के इस वादे से अंजान थे। आज मीना के हाथों में मशीन लगी थी। दम आलू, पनीर, रायता, पुलाव, मिठाई और न जाने क्या-क्या उनका लाड़ला बेटा जो आ रहा था। वो खुश है, पर मन ही मन डर भी है कि कहीं विनीत ने इस रिश्ते के लिए मना कर दिया तो, पर नहीं वो क्यों मना करेगा। काजल उसकी दोस्त है। कहते हैं न कि मियां-बीबी में दोस्ती होना बहुत जरूरी है। तो ये दोनों तो पहले से ही दोस्त हैं। बस मीना ये सोचकर दोगुने उत्साह से काम करने लगी।
उफ, ये विनीत कब आएगा, थककर सोफे पर बैठी ही थी कि दो हाथों ने उसकी आंखें बंद कर दी, अरे ये तो विनीत के हाथ हैं। विनीत के घर में आते ही हंगामा मच गया। तेज अंग्रेजी धुनों के गाने और मस्ती। पूरा दिन मां-मां करके पीछे घूमता रहता था। अब इसी बच्चे की शादी तय हो गई है। रात का खाना खाकर जब सब लोग बैठक में बैठे तब विनीत ने बताया कि मम्मी-पापा मैंने एक लड़की पसंद कर ली है। बहुत अच्छी है। हम साथ काम करते हैं। मां-बाप नहीं हैं। भाई-भाभी हैं। वे मुझसे मिल चुके हैं। उन्हें हमारे रिश्ते पर कोई एतराज नहीं है। हमारे घर का माहौल इतना दोस्ताना था कि वीनू ने ये सारी बातें इतनी सहजता से बता दीं। हम लोग काजल से बात पक्की ना करते तो हमें भी इस रिश्ते पर कोई एतराज न था। थोड़ा मुस्कुराये और बिना कुछ कहे अपने रूम में चले गए। हम समझ गए कि ये गहरी सोच में है। इसलिए उठकर चले गए, मैं भी साथ ही अंदर चली गई। रात का पता नहीं कौन सोया कौन नहीं... मगर मैं रात भर सो न सकी। एक तरफ मिस्टर रायजादा का वादा और दूसरी तरफ वीनू का प्यार। अब हमारे पास मिस्टर कपूर से बात करने के अलावा कोई चारा न था। सुबह होते ही हमने उन्हें फोन कर दिया कि हम लोग नाश्ता वहीं करेंगे। तैयार होकर मैं और रायजादा साहब वहां गए। वहां जाकर रायजादा साहब ने बिना किसी भूमिका के उनसे सारी बातें कह दीं। आगे निर्णय उन्हीं पर छोड़ दिया। कपूर साहब भी 5 मिनट के लिए सकते में आ गए। लेकिन ये दो दोस्त नहीं दो जान थे। आखिर वीनू उनके लिए भी बेटे समान ही था। उन्होंने वीनू का साथ दिया। उसे उस लड़की, जिसका हम अभी तक नाम भी नहीं जानते थे से शादी के लिए रजामंदी दे दी। हम हंसी-खुशी घर आए और इधर हमारे पीछे घर पर काजल आ गई थी- वीनू से मिलने। वीनू ने उसे भी सब बता दिया था, मुझे लगा आज की पीढ़ी हमसे ज्यादा समझदार है। बिना किसी तनाव के समस्याओं के हल ढूंढ़ लेती है। घर में खुशियों का माहौल बन गया। सबके चेहरों पर खुशी थी, अब मेरे भी मन में बहू को लाने के अरमान जगने लग गए। ये 4 दिन बाद हम सब मुम्बई जा रहे हैं। नम्रता और वीनू के रिश्ते की बात करने। उसके भैया-भाभी से। नम्रता के लिए मैंने साडिय़ां, सेट, सगाई की अंगूठी सब ले लिया था। काजल इन तैयारियों में मेरी पूरी मदद कर रही थी।
मुम्बई पहुंचते ही सारी बातें तय हो गईं। दोनों का उतावलापन देखकर और मलमास के आने पर 15 दिनों में ही शादी करने की बात तय हो गई। ओ..हो.. कितने काम करने हैं। वीनू-नम्रता ने भी छुट्टियां ले लीं थी। शादी के बाद हनीमून की बात सुनकर दोनों ने ही मना कर दिया कि हम बाद में तो मुम्बई में ही रहेंगे। इसलिए हमारी सारी छुट्टियां हम आपके साथ बिताना चाहते हैं। मैं तो ऐसी बहू पाकर निहाल हो गई थी। सब कुछ अच्छा चल रहा है। बड़ी धूमधाम से वीनू की शादी हुई। मैंने- मिस्टर रायजादा ने और सोना-मोना-काजल, मिस्टर कपूर सब बहुत खुश थे। मेरे पास आज एक मुट्ठी नहीं सारे जहान की खुशियां थीं।
शादी के बाद के दिन हवा बनकर उड़ रहे हैं। रोज शाम को कहीं न कहीं का प्रोग्राम बनता और वीनू-नम्रता को अकेले जाने का कहते, तो दोनों ही मना कर देते। रोज हम सब साथ ही में जाते। मैं तो रोज भगवान के सामने सबकी नजर उतारती कि कहीं हमारी खुशियों को किसी की नजर न लग जाए। आज शाम की फ्लाइट से वीनू-नम्रता मुम्बई जा रहे हैं। अगले महीने नम्रता का जन्म दिन है। वो हम सबसे वादा लेकर गई है कि हम लबको मुम्बई उसके जन्म दिन पर जाना है। मिस्टर कपूर-काजल को भी वहां आना है। आखिर कपूर साहब ने उसे अपनी बेटी जो बना लिया। काजल उसकी तो वो बहन बन गई थी तो हम सबको तो मुंबई जाना ही था।
वीनू-नम्रता के बिना घर बहुत सूना हो गया था। हम सब बेसब्री से अगले महीने मुम्बई जाने का इंतजार कर रहे हैं। मां मेरी सारी पैकिंग हो गई है। आप-पापा भी जल्दी से पैकिंग खत्म कर लो। हमें आज शाम को निकलना है। कल भाभी का जन्म दिन है। मोना लगातार बोल रही है। मेरे हाथ भी उसी तेजी से सारे काम खत्म कर रहे हैं।
मां-पापा, सोना-मोना-कपूर अंकल-काजल और पापा- आज में बहुत खुश हूं। वीनू-नम्रता खुशी से चिल्ला पड़े। हम सब शाम की पार्टी की तैयारी में लग गए। मैं नम्रता के लिए बहुत सुंदर लाल रंग की ड्रेस लाई थी। शाम को वो वही पहनने वाली है। एक डायमंड सेट नम्रता तो खुशी से पागल ही हो गई- ये सब देखकर। शाम को उन दोनों के बहुत सारे दोस्त आए। सभी काफी समझदार लग रहे थे। अच्छे घरों के मगर उसमें से एक जोड़ा मुझे पता नहीं क्यों कुछ अजीब लग रहा था। नम्रता से कहा भी। पर ऐसा कुछ नहीं कहकर उसने बात को गोल कर दिया। पार्टी बहुत अच्छी रही। रात के दो बजे तक चली। हम सब बहुत थक चुके थे। इसलिए बिस्तर पर जाते ही सब सो गए। दूसरे दिन रविवार था इसलिए सुबह उठने का टेंशन भी नहीं था।
आज सुबह नाश्ते पर ही नम्रता ने कहा कि आज सब लोग पिकनिक पर जाएंगे। साथ में वीनू और नम्रता के कुछ दोस्त बी रहेंगे। हम सब तैयारी में लग गए, बीच-बीच में नम्रता मुझे थकी सी लगी, पर पार्टी की थकान समझकर मैंने ध्यान नहीं दिया। सारी तैयारी हो चुकी थी और इन दोनों के दोस्त भी आ चुके थे, जहां हम लोग गए वो जगह वीनू के बॉस का फार्महाउस था। बहुत खूबसूरत और ढेर सारे फूलों से भरा हुआ। मन को सुकून देने वाली जगह है यह। मगर वीनू का वो दोस्त -उसकी बीबी जिनकी हरकतें मुझे पार्टी में भी कुछ असामान्य लग रही थीं। यहां भी वे कुछ अजीब सा व्यवहार कर रहे हैं। वे दोनों और नम्रता कमरे में पता नहीं क्या कर रहे हैं। मुझे किसी अनहोनी की आशंका हुई और मैं कमरे में जा पहुंची। मुझे वहां देखकर तीनों सकपका गए और वे दोनों नम्रता को वहीं छोड़कर बाहर चले गए।
क्या बात है नम्रता। कुछ परेशानी है। नम्रता ने जब आंखें ऊपर उठाईं तो उसकी ांखें दहकते शोलों जैसी थीं। मां मुझे ड्रग्स की आदत लग चुकी है- नम्रता ने बिना किसी भूमिका के कहा और मेरी गोद में सर रखकर रोने लगी। मैं जीना चाहती हूं-मां। पर ये लत मुझे मार डालेगी। मुझे बचा लो-मां।
ये क्या कह रही हो। वीनू की तेज आवाज आई। पूरा घर दरवाजे पर खड़ा ये सच सुन चुका था। मुझे लगा मेरे हाथ से खुखियां रेत की तरह फितलती जा रही हैं। मैं... नहीं-नहीं मुझे कुछ करना होगा।
सब लोगों को शांत करके मैंने नम्रता को पानी पिलाया और उससे इस लत के बारे में पूछा, उसने जो बताया वो सुनकर मैं सिहर उठी।
नम्रता अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी और एक मुंह बोला भाई था जिसने प्यार का झूटा आवरण रच रखा था। नम्रता के पापा ने अपनी वसीयत में सारी जायदाद नम्रता के नाम कर दी थी। जो करोड़ों रुपये की है। नम्रता की आकस्मिक मौत होने पर उसकी सारी जायदाद उसके भाई को मिल जाएगी। इस बात का पता चलते ही भाई-भाभी ने मिलकर ड्रग्स का षडयंत्र रचा और उसे इसकी आदत डलवा दी। वीनू से प्यार के बाद उसने काफी हद तक अपनी कमजोरी पर काबू पा लिया। मगर कुछ समय पहले भाई-भाभी ने अपने एक दोस्त और उसकी बीबी को उसके पास भेज दिया। उन्होंने उसे फिर उसी गर्त में ढकेल दिया। मां-मैं आप लोगों के साथ जीना चाहती हूं। उसके सिर पर हाथ फेरती मैं एक निर्णय ले चुकी थी। नम्रता को हमारा प्यार और सहयोग चाहिए। वीनू अपने प्यार की ये हालत देखकर आपे से बाहर हो गया था। इन दोनों को मेरे सहारे की जरूरत है। आज मुझे भी अपना नाम सार्थक करना है। जी हां... मैं दिशा रायजादा। क्रीमिनल लॉयर अपने समय की एक जानीमानी वकील, आप मुझे भी अपना अस्तित्व ढूंढऩा है। अपनों की खुशी वापस लाना है।
सबसे पहले मैंने नम्रता को रिहेब सेंटर में भर्ती करवा दिया और उन लोगों को सख्त निर्देश दिए कि मेरे और वीनू के अलावा और कोई बाहरी व्यक्ति उससे नहीं मिल सकता। दूसरी तरफ उसके भाई पर केस लगा दिया जायदाद के लिए अपनी बहन की हत्या की कोशिश के आरोप में। मुझे अपनी बहू और स्वयं की पहचान वापस लानी थी। 6 माह की लंबी लड़ाई के बाद हम केस जीत गए। नम्रता के भाई-भाभी को जेल हो गई थी। इधर नम्रता मेरा-वीनू का सहारा पाकर धीरे-धीरे इस दु:ख से बाहर निकल रही थी। मिस्टर रायजादा की आंखों में प्रशंसा के भाव थे वे भाव जिन्हें देखने के लिए मैंने अपना कैरियर, अपना सब कुछ उनके नाम कर दिया था। वो मिस्टर कपूर को फोन पर खुशखबरी सुना रहे थे। अरे कपूर मेरी बीबी केस जीत गई है। मैं बहुत खुश हूं। रायजादा साहब की दिशा आज खुश है। अपना खोया नाम पाकर मिसेज दिशा रायजादा। क्रिमिनल लॉयर जो अब उनके घर के बाहर की तख्ती पर लगा है। नम्रता को हम घर ले आए। वीनू हमेशा उसे प्यार और सहारा देता। नम्रता इन सबसे दूर हो चुकी थी। खुशियां धीरे-धीरे हमारे दरवाजे पर दस्तक देने लगीं थीं। आज नम्रता बहुत बड़ी खुशी लेकर आई थी। मैं दादी बनने वाली हूं। लग रहा था कि रेत की तरह जो खुशी फिसल गई थी। हम सब ने मिलकर उसे वापस पा लिया था। एक मुट्ठी खुशी पाने का अहसास आज सही मायनों में हमारे साथ था। हम आज भी बगीचे में ही बैठे हैं। और आज बगीचे में और बच्चों के साथ अपने जुड़वां पोते-पोती को खेलते देख रहे हैं। सोना-मोना की तरह अपनी एक मुट्ठी-खुशी को बढ़ते देखने के अहसास के साथ।

कहानी - मैं जिंदा हूं

- राजकुमार सोनी

बचपन से शायद जब मैं 7-8 साल की रही हूंगी तब से ही अछूत थी। मुझे छूने से लोगों में वायरस फैल जाता था। वायरस भी कोई साधारण नहीं बहुत भयानक था। इसलिए लोग मुझसे ज्यादा बात नहीं करते थे। वैसे तो हम दो बहनें और एक भाई था। भाई हम दोनों बहनों के बीच में था। मैं सबसे छोटी थी। इसलिए राहुल भैया और सुषमा दीदी दोनों ही कहते थे कि हम दो हमारे दो थे। हम तुम पता नहीं कहां से आ गईं। हालांकि दोनों मुझसे बहुत प्यार करते थे। मगर फिर भी और थोड़ा बड़ा होते-होते मुझे इस बीमारी ने घेर लिया। रिश्तेदार घर वाले थे मुझसे मिलने में कि ये बीमारी कहीं उनके बच्चों को लग गई तो इस समाज में उनका रहना मुश्किल हो जाएगा। क्या करें, हमारा समाज भी तो खोखले रीति-रिवाजों से बना हुआ है। खैर... मैं बात कर रही थी, अपनी बीमारी की और इसका खामियाजा हमारे पूरे परिवार को कभी-कभी भुगतना पड़ता था।
पड़ोस के वर्माजी आज अपनी बेटी को बहुत डाट रहे थे। क्योंकि उसने चौराहे पर दीपक से बात कर ली जो उसी की क्लास में था। दीपक को बुक चाहिए थी जो आरती ने उसे दे दी थी। बस इस बात पर वर्मा अंकल ने गुस्सा होकर अपनी कॉलेज जाती लड़की को चांटा मार दिया। वर्मा जी का घर और हमारा घर आपस में जुड़ा हुआ था। चम्मच गिरने की भी आवाज आ जाती थी। तो ये अंकल का चांटा था। मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं अंकल को कहकर आ गई कि दो बातें करने से आरती दीदी खराब नहीं हो गईं। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था। अंकल और गुस्सा हो गए कि तुम्हें हमारे घर में बोलने की क्या जरूरत है। जाओ यहां से। बित्तेभर की लड़की और ये जुर्रत। हां, मैं बित्ते भर की थी। कद छोटा, मगर सपनों की उड़ानें ऊंची-ऊंची। कभी पायलट, कभी पुलिस वाली, तो कभी कलेक्टर, मन हमेशा ऐसी बातों की तरफ जाता, जहां विद्रोह हो, जज्बा हो कुछ करने का। पर मेरे इसी जज्बे की कीमत घर वालों को चुकानी पड़ी। आरती दीदी, सुषमा दीदी की दोस्ती टूट गई और सुषमा दीदी के कोप का भाजन मुझे बनना पड़ा।
क्या करूं। दूध में पानी की मिलावट, सड़कों की खस्ता हालत, मिनी बस वालों की बदतमीजी, नेताओं के वादे और उन्हें पूरा न करना, लोगों का एक दूसरे को नीचा दिखाने का जुनून मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। ऊपर से मीठा बनना और अंदर से मैल। ये भी मुझसे नहीं होता। सारी सहेलियां कहतीं कि अपने आपको बदल ले, ये छोटी-छोटी बातें हैं। इन पर ध्यान मत दे। मगर मैं क्या करूं। हर काम में बचपन से लेकर आज तक परफेक्शन की बीमारी थी। जी हां, मुझे यही छूत की बीमारी थी। इसलिए लोग मुझसे तन्वी जैन से बात करने में डरते थे कि ये लड़की पता नहीं किस बात पर भड़क जाए और हमें पता नहीं किसका विद्रोह करना पड़े। मैं अपनी सहेलियों में हीरो थी, पर रिश्तेदारों की नजरों में मैं असंस्कारी लड़की थी। कॉलेज आते-जाते मुझे प्यार हो गया अपनी ही जाति के लड़के से पर ये बात अब मायने नहीं रखती क्योंकि वो लड़का मुझसे ज्यादा समाजवाला था। इसलिए मेरी नजरों में वो कायर निकला, मैं और विद्रोही हो गई। कॉलेज खत्म होते-होते कैरियर की चिंता होने लगी और मैं आगे की पढ़ाई करने बाहर चली गई। पढ़ाई पूरी होते-होते ही शादी तय हो गई। मुझसे पहले दीदी-भैय्या की शादी हो चुकी थी। सुषमा दीदी की शादी के बाद उनकी डिलीवरी पर जब में उनके ससुराल मदद करने गई तो वहां उनकी सास को देखकर शादी नाम से ही डर गई और सीधे-साधे जीजाजी को देखकर मन गुस्से से भर गया। सातवें महीने में दीदी को पोंछा लगाते कराहते देख बहुत गुस्सा आया। घर लौटते ही मम्मी-पापा को कह दिया, दीदी को तलाक दिलवा दो, जो अपनी बीबी के मान-सम्मान की रक्षा न कर सके, जो घर अपनी गृहलक्ष्मी को सम्मान न दे, वहां रहने से क्या फायदा। मगर समाज फिर मुस्कुराता खड़ा था। मुझे कभी समझ नहीं आया कि समाज कहां है। खैर... कुछ सालों बाद दीदी की जिंदगी पटरी पर आ गई और उनकी सास की मौत हो गई।
तन्वी जल्दी तैयार हो जाओ, लड़के वाले आते ही होंगे। भाभी की आवाज से मैं अपनी 25 साल पहले की जिंदगी से लौट ही रही थी कि सोचा कुछ भाभी के बारे में कहा जाए। अमीर बाप की संतान, बात-बात पर आंसू बहाने वाली और अपने पापा के पैसों का रौब दिखाकर हर पल हमें ये अहसास कराती कि तुम नौकरी वाले हो, तुम्हारे पास सिवाय अपनी ईमानदारी, एक दूसरे की मदद करने के अलावा कुछ भी नहीं है, पर आज मेरी सगाई एक पैसे वाले खानदान में तय हो रही है। कैसे नहीं... पता क्योंकि हमारे पास तो देने के लिए मोटा दहेज भी नहीं। शायद मम्मी-ापा के संस्कार अच्छे हैं, जिनकी खुशबू उन तक पहुंची और उनकी तीसरी अनचाही संतान की शादी इतने ऊंचे खानदान में हो रही थी। और... इधर मेरी भाभी की तबीयत ये सब देखकर खराब हो रही थी। खैर... मेरी सगाई बहुत अच्छे से हो गई। पति बहुत अच्छा मिला पर मेरी विद्रोही भावनाएं खत्म नहीं हो पा रही हैं। घर में कुछ बातों से मेरा मन बहुत खराब हो जाता, घर की छोटी बेटी अब बहु बन चुकी है। तन्वी, सासू मां की आवाज आई। आज फिर तुमने नमक कम डाला। अब कैसे खाना खाएंगे। और मेरा मन कहता है कि क्या ऊपर से अपने स्वाद के हिसाब से नमक नहीं डाल सकते। मेरे ससुराल में बहुत मेहमान-नवाजी की जाती है। 99 फीसदी अच्छा करने के बावजूद एक फीसदी की कमी सारा घर निकालता। यही बात मुझे अच्छी नहीं लगती। आखिर मैं भी इंसान हूं। पतिदेव को कभी शिकायत करो तो कहते, अरे एक कान से सुनकर दूसरे से बाहर निकाल दो, पर कैसे मैंने अपने जीवन में कभी किसी को निराश या दु:खी नहीं किया, फिर क्यों मेरे साथ ऐसा होता है। और.... आज तो हद हो गई। वर्मा अंकल की बात मेरे घर में हुई, जब सुसराजी ने मेरे कॉलेज के दोस्त के सामने मेरी बेइज्जत कर दी, सिर्फ इस बात पर कि मैंने दिन में बाहर खाना क्यों खाया। इन सब बातों से मेरा मानसिक संतुलन गड़बड़ा रहा था। मन में दिन रात अपने आपको साबित करने की जद्दोजहद चलती रहती कि कैसे बताऊं कि मैं भी सही हूं। पहले इन सब बातों का विरोध करते हुए भी जिंदा थी और आज इन सब बातों को सहते भी मैं जिंदा हूं। औरत शायद इसलिए इतनी शक्तिशाली है। हर काल में, हर युग में सहती है। सहकर भी जिंदा रहकर काली मां, लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती देवी के रूप में पूजते हैं। घर में उसी की इच्छाओं, उसकी भावनाओं को मारकर मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाते हैं।

कहानी- एक कदम जिंदगी की ओर


- राजकुमार सोनी


बहुत दिनों से मेरी कलम शांत थी कोई विषय नहीं मिल रहा था मन बैचेन हुआ तो ऐसे ही गार्डन की ओर चल पड़ी। आज शनिवार था और बच्चों की स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए आज उनकी टीचर सुबह ही आने वाली थी। तब तक मैंने सोचा दोनों बच्चों के लिए उनकी पसंद का नाश्ता बनाया जाए। सनी को कच्चा सेंडविच पसंद है, तो निकी को छुट्टी के दिन उत्तपम और मेगी ही पसंद है। दोनों को नाश्ता कराकर मैंने भी नाश्ता कर लिया। पतिदेव काम की वजह से दिल्ली गए हुए थे। कामवाली बाई राधा आ चुकी थी। आने से ही पहले वो हम दोनों की चाय बनाती। उसके बाद पूरे मोहल्ले की खबरें सुनाती। कहा- क्या हुआ। किसके बच्चे हॉस्टल से आए हैं या कौन से बंगले की मालकिन मायके गई है। आज मैं भी फुर्सत में थी। बच्चे नहाने जा चुके थे।
राधा झाडू निकाल ही रही थी कि मिसेज शर्मा की गुस्से से भरी आवाज सुनाई दी।
आज क्या मिसेज पंवार के ही घर रहना है। एक दिन की पगार कटेगी तो समझ आएगा।
राधा बेबसी से मेरी तरफ देखती रही।
मैंने कहा- घबरा मत, मेरा काम बाद में आकर कर लेना।
राधा फुर्ती से हाथ पोंछकर मिसेज शर्मा के घर चली गई।
बच्चे तैयार हो चुके थे। 11 बजने को आए पर उनकी टीचर पारुल अभी तक नहीं आई थी। बच्चे रविवार का प्रोग्राम बना रहे थे। लंच बाहर करना, शाम को मूवी, फिर डिनर बाहर.... पूरा दिन मस्ती होने वाली थी। तभी घंटी की आवाज आई। लगता है टीचर आ गई है। पारुल आज बहुत उदास लग रही थी। मेरे पास आई। बोली- दीदी आज मैं पढ़ा नहीं पाऊंगी, पर आपसे थोड़ी देर बात करना चाहती हूं।
बैठो....।
पारुल मैं चाय बनाकर लाती हूं।
सनी-निकी छुट्टी की बात सुनते ही खुश हो गए। और अपने दोस्तों के यहां खेलने चले गए।
पारुल कुछ देर चुप रही फिर बोली-
...दीदी, आप लिखती हो, इसलिए आज में अपनी जिंदगी की बातें आपके साथ बांटना चाहती हूं।
कभी आपको ऐसा कुछ लगे लिखने जैसा तो आप वो जरूर लिखना। मैं चुपचाप सुन रही थी।
पारुल के रुकने पर मैंने उसे कहा कि तुम सुनाओ मैं तुम्हें बीच में नहीं रोकूंगी।
पारुल ने जो कहानी सुनाई मुझे लगा कि ये कहानी हर जागरुक आदमी को पढऩा चाहिए। इसलिए ये कहानी आप सभी के सामने है।
दीदी, उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी। बारिश भी दो प्रकार की होती है। अमीरों के लिए घूमना, चाय काफी पकौड़े और पिकनिक, मगर गरीबों के लिए उस दिन सिर्फ बारिश होती है दिन भर के उपवास के साथ पर भगवान का शुक्र था कि पारुल ऐसे घर में पैदा हुई थी.... जहां दो वक्त के खाने के लिए सोचना नहीं पड़ता था। भरा पूरा परिवार था। दादा-दादी, दो भाई, मम्मी-पापा सब लोग थे। पारुल की सबसे प्यारी सखी सरिता की सगाई थी और पारुल अपनी सहेलियों के साथ उसी की सगाई में गई हुई थी कि अचानक बेमौसम की बारिश चालू हो गई। हम लोग सरिता के घर से निकल चुके थे और रास्ते में ही बारिश की वजह से हमारी गाड़ी खराब हो गई। तभी एक जीप आकर रुकी। कुछ लड़के उसमें बैठे थे। पारुल को समझ नहीं आ रहा था कि वे लोग क्या करें। मदद लें या नहीं पर समय को देखते हुए उनके पास और कोई चारा नहीं था। मन बहुत घबरा रहा था। अखबारों में आए दिन ऐसी ही घटनाएं घटती रहती हैं। सहमती हुई वे सब उस जीप में सवार हो गईं। कुछ देर के रास्ते में ही पता चल गया कि राहुल नाम का लड़का अपने 4 दोस्तों के साथ कमरा लेकर एमबीए की तैयारी कर रहा है। पारुल को राहुल अच्छा लगा। राहुल ने उसे अपना सेल नम्बर दिया और उन सभी को सुरक्षित घर पहुंचा दिया। पारुल के घरवालों ने सही सलामत देखकर चैन की सांस ली।
चार-पांच दिन बीते होंगे कि एक दिन सुबह-सुबह ही राहुल का फोन आ गया। उसका जन्म दिन है और वो चाहता है कि पारुल अपने पूरे परिवार के साथ उसके जन्मदिन में शामिल हो। थोड़ी बहुत ना नुकुर के बाद पारुल मान गई।
शाम को वे सभी राहुल के बर्थडे में गए। वहीं पर अचानक राहुल ने उसके मम्मी-पापा से उसका हाथ मांग लिया। ये सब कुछ बहुत ही अचानक था। एकदम फिल्मी स्टाइल पर। पारुल भी उसे चाहने लगी थी। आखिर दिल जीत गए और राहुल के मम्मी-पापा व पारुल के मम्मी-पापा ने हां कर दी।
चट मंगनी और पट विवाह हो गया।
ये सब कुछ एक खुशनुमा अहसास था।
राहुल एक साये की तरह उसके साथ रहता। उसकी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी और एक अच्छी कंपनी में नौकरी भी मिल गई थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था। कभी-कभी पारुल को जरूर राहुल का व्यवहार अजीब लगता, कभी गुस्सा-कभी चिड़चिड़ापन, कभी एक दम से डर जाना।
राहुल की मम्मी का व्यवहार बुहत ही अजीब था। राहुल अपनी मम्मी से ज्यादा बात नहीं करता था। एक दिन राहुल की तबीयत बहुत खराब हो गई। वो दीवारों पर सिर फोडऩे लगा। जोर-जोर से चिल्लाने लगा। कभी शांत हुआ तो कभी गुस्सा करने लगा।
पारुल घबरा गई, उसे समझ नहीं आया कि क्या करें।
मम्मी से तो मदद की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। पारुल बेबस और लाचार थी। हर जगह अंधेरा नजर आ रहा था। उसने अपनी सहेली को फोन किया तो उसने बताया कि उसके घर के पास ही एक आश्रम है, जहां पर इसी प्रकार के लक्षणों वाले रोगी आते हैं। वहां ले जाने पर डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद बताया कि उसे बाईपोलर डिसआर्डर है। ये बीमारी लाइलाज नहीं है, पर रोगी के साथ-साथ घरवालों को धैर्य व प्यार के साथ रोगी का ध्यान रखना चाहिए। तबी उसका चिड़चिड़ापन, चीखना, कभी अचानक खुश होना, कभी गुस्सा होना.... ठीक हो जाएगा और रोगी सामान्य जीवन जी पाता है।
घर आने पर जब उसने मम्मी को बताया तो उन्होंने कहा कि वो जानती है, पर वो कोई मदद नहीं कर सकती। आखिर सौतेली संतान के लिए और क्या-क्या करें।
सौतेली संतान।
उफ,
अब पारुल को सब समझ आ गया वो उसी वक्त आश्रम पहुंची और वहां के संचालक से बात करके दोनों के वहीं रहने का इंतजाम भी करवा लिया। सुबह वो आश्रम में काम करती और शाम को मेरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती।
राहुल के दौरों में कोई कमी न थी। डॉक्टर चाहते थे कि पारुल उसका अतीत जाने किस बात का डर उसमें समाया है। इसका पता करे और एक दिन उसे ये मौका मिल ही गया। उस दिन 2 अक्टूबर था। गांधी जयंती का दिन। राहुल बहुत शुख नजर आ रहा था।
खुद ही पारुल से बोला।
मैं अपने जीवन की कुछ कड़वी सच्चाईयों से तुम्हें मिलवाना चाहता हूं। जब मैं दसवीं कक्षा में था तो एक दिन परीक्षा खत्म होने के बाद मैं और मेरे दोस्त राम-रहीम, पीर और सतपाल स्कूल के बाहर खड़े होकर भविष्य की योजनाएं बना रहे थे, पर हम पांचों दोस्त सिर्फ और सिर्फ अपने देश के लिए काम करना चाहते थे। पांचों अलग-अलग धर्मों के होते हुए भी एक जान थे। वैसे भी दोस्ती में धर्म कहां मायने रखता है। तभी उनके पास एक काली गाड़ी आकर रुकी। याद नहीं पर उन लोगों ने ऐसा कुछ कहा कि हम पांचों उस गाड़ी में बैठ गए। कुछ दूर जाने पर उन्होंने हमें नोटों की गड्डियां दीं और हमें वापस वहीं स्कूल के बाहर बिना कुछ कहे छोड़ दिया। हाथ में नोट और असमंजस के भाव। नादान, कम उम्र... समझ नहीं पाए और उन नोटों से अपने बाकी दोस्तों को बुलाकर एग्जाम खत्म होने की पार्टी दी। सारे रुपए खत्म हो गए। अब हम सब अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। मेरे घर में सौतेली मां और मामा दोनों ही थे, जो मुझे बिल्कुल भी नहीं चाहते थे। कुछ दिनों बाद वही काली गाड़ी मेरे घर के बाहर खड़ी थी। मैं पता नहीं क्यों उनके साथ गाड़ी में बैठ गया और अपने बाकी दोस्तों को भी साथ ले लिया। अब हम सभी शहर से दूर एक खंडहर में पहुंचे। जहां नकाब पहने एक आदमी मिला। उसने हम पांचों को अपने मिशन के बारे में बताया। देश में फैले भ्रष्टाचार और भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ इतना जहर उगला कि हम सभी को वे दुश्मन दिखने लगे। मगर अब हम पांच दोस्त नहीं पांच मानव बम बन चुके थे। हम सब इस बात को जान भी नहीं पाए कि वो हमारा इस्तेमाल कर रहा है।
पारुल सांस रोके उसकी कहानी सुन रही थी। राहुल ने पानी पिया और आगे कहना चालू किया।
अब हम सभी के पास एक मिशन था।
हमें पांच बड़े-बड़े एरिया दिए गए। हम सब बिना कुछ सोचे-समझे इस घिनौने काम के लिए तैयार हो गए।
4 दिसंबर की सुबह मेरे चारों दोस्तों को एक साथ इस मिशन को अंजाम देना था और एक जुलाई को मुझे ये काम करना था। मेरे चारों दोस्त चले गए। ये सोचकर कि वो अपने देश के लिए कुछ कर रहे हैं। अगले दिन के अखबारों में 4 मानव बमों सहित हजारों लोगों के मरने और घायल होने की खबरें थीं। मुझे लगा कि अखबारों में ये रक्त टपक रहा है। हर निगाह मुझे कह रही है कि मैं कातिल हूं।
उफ.....।
तो उन लोगों का ये मिशन था।
मासूमों को मारने का....।
मैं पागल हो गया और मुझे इस बीमारी का पहला दौरा पड़ा।
मां तो मुझे पहले ही पसंद नहीं करती थी। इस बीमारी के बाद तो सब मुझसे नफरत करने लगे।
मुझे घर से निकाल दिया।
मैं पूना जाकर एमबीए की तैयारी करने लगा।
मगर एक जुलाई की याद आते ही मैं सिहर उठता।
तभी मेरे जीवन में तुम आई।
मुझे लगा कि तुम्हारे साथ में इस काले साये से निकल जाऊंगा।
मैं बहुत हद तक सफल भी रहा। एक जुलाई भी निकल गई। उन लोगों का भी कुछ पता नहीं था। मगर आज फिर वो काली गाड़ी उसे ढूंढ़ते हुए वहां आ पहुंची और धमकी दी कि अगर वो उनका मिशन पूरा नहीं करेगा तो उसे पारुल को खोना पड़ेगा।
पारुल सारी घटना दम साधे सब सुनती रही। उसने उसे ढांढस बंधाते हुए उस नकाब वाले से मिलने के लिए कहा। और खुद पुलिस स्टेशन चली गई। वहां जाकर उसने डीजीपी को राहुल के अतीत के बारे में सब कुछ बताते हुए उनसे मदद मांगी। पुलिस पहले ही इन विस्फोटों की जांच में लगी थी। राहुल उनके लिए एक अहम सुराग था। पारुल आश्वासन पाकर आश्रम पहुंची। बाहर एक गाड़ी खड़ी थी। राहुल अपने कमरे में छुपा था। पारुल के समझाने पर वो बाहर आया और उन लोगों से बात करके 4 बजे मिलने का वक्त तय किया। अपने मिशन को अंजाम देने का। राहुल 4 बजे वहां पहुंच गया। इधर पुलिस टीम भी सादा वर्दी में उसके साथ थी। 5 बजे काली गाड़ी आई। उसमें से तीन चार लोग बाहर निकले। उन्होंने राहुल को एक नक्शा दिया और रुपयों से भरा बैग। राहुल बता रहा था कि कैसे मेरे हाथ कांप रहे थे, पर पुलिस की चौकन्नी निगाहें उन लोगों पर थीं। नक्शा हाथ में आते ही चारों तरफ से पुलिस ने उनको घेर लिया और उनके जरिये उस नकाब पोश तक भी पहुंच गए। उस नकाब वाले को देखकर उसके होश उड़ गए। क्योंकि वो और कोई नहीं उसके मामा थे। पर आज उन दोनों को ऐसा लग रहा था कि उनकी जिंदगी से वो काला साया हमेशा के लिए चला गया हो। आज से उसका राहुल आजाद है। पुलिस का मुखबिर बनने पर उसे सारे आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसलिए आज पारुल अपनी कहानी मुझे सुनाने आई थी। वे दोनों आज एक नई शुरुआत करने जा रहे थे। संचालक ने आश्रम की पूरी जिम्मेदारी उन पर सौंप दी थी। इसलिए वो आज से ट्यूशन का काम छोडऩा चाहती है और इस कहानी के माध्यम से लोगों को बताना चाहती है कि हमें आतंकवाद का मुकाबला डटकर करना चाहिए। पारुल चली गई पर मेरे पास कुछ सवाल छोड़ गई।
क्या हमारे देश को आतंकवाद से, राहुल जैसे मासूम नौजवानों को बहकाने से बचाने के लिए कोई पारुल आएगी।
नई सुबह लेकर।
क्योंकि करोड़ों लोगों की भीड़ में मैं भी एक हूं। अपने देश से आतंकवाद को हमेशा के लिए मिटा देने के संकल्प के साथ।

कोठे वाली

कहानी

कोठे वाली


- राजकुमार सोनी


आज बाजार में बहुत चहल-पहल है, गाना बजाना रास्ते भर औरतें सज-संवरकर खड़ी थीं और क्यों न हों, आज पूरा बाजार ग्राहकों से भरा पड़ा था। कजरी बाई का कोठा सबसे ज्यादा गुलजार था, क्योंकि उस बाजार की दो हुस्न परियां उसके कोठे की शानो थीं- शानो और मलिका। इस बाजार में बड़े-बड़े नेता, उच्च-मध्यम वर्गीय सब आज कजरी बाई के यहां मुजरा सुनने के लिए आने वाले हैं। कजरी बाई के लिए तो आज एक ओर खुशी की बात थी। आज मलिका की नथ उतरने वाली थी। नथ उतरना मतलब कजरी बाई का कोठा। मालामाल होने वाला है। कजरी शाम से ही सज संवरकर ग्राहकों का इंतजार करने लगी, ग्राहकों से कोठा भर गया, पर सारे ग्राहकों में एक चेहरा ऐसा था जो पहली बार कोठे पर आया है। उस चेहरे में कोई भाव नहीं थे, लगता है जैसे कोई मशीना आदमी बैठा हो, खैर... मलिका ने एक नजर उस पर डाली और उपेक्षा से मुंह फेर लिया। उसे क्या करना? कौन है? कौन सा इसका सगा है जो वो इतना उसके बारे में सोचे। उसे तो मुजरे के बाद मिलने वाले रुपयों से मतलब है, ताकि उसे और कजरी बाई को कुछ हफ्तों तक काम न करना पड़े। कजरी बाई थी तो कोठे वाली पर उन सबका ध्यान मां जैसा ही रखती थी। मुजरा खत्म होने को है पर ऐसा कोई ग्राहक नहीं आया जो उसकी नथ उतराई की कीमत लगा सके, पर वो बुत अभी तक बैठा है। एक-एक करके सब चले गए। उसने नोटों की 4-5 गड्डियां निकालीं और उठकर चला गया। ऐसा लगातार पांच दिनों तक होता रहा, कजरी के तो मजे थे। रुपयों की बारिश हो रही थी। मगर पांचवे दिन मलिका ने उसे रोक लिया। बाबूजी माना हम कोठे वालियां हैं पर मुफ्त का हम भी नहीं लेते। आप क्यों रोज यहां आकर चुपचाप बैठते हो और नोटों की गड्डियां थमाकर चलते बनते हो। क्या घर में कोई नहीं है। कल को हम पर अगुलियां उठ जाएंगी कि हमने आपको कंगाल कर दिया। आज तो आपको बताना ही पड़ेगा।
न तो आप मुजरा देखते हो और न हमारी तरफ आंख उठाकर देखते हो।
आखिर क्या बात है, उसने पास में रखा पानी पिया और पहली बार मेरी तरफ नजर उठाकर देखा। उसकी आंखों की लालिमा देखकर मैं भी चौंक उठी। लगा कि वो कई महीनों से सोया नहीं है। उसने बताया कि उसका नाम प्रताप है। पिता किसी गांव में जमींदार हैं। खूब पैसा है। मुझे लगा इसलिए बड़े बाप की औलाद यहां आकर पैसा उड़ा रही है।
प्रताप ने फिर कहना चालू किया- कुछ सालों पहले उसका विवाह हो चुका है, अपनी बीबी से वो बहुत प्यार करता है। बीबी रमा संस्कारी लड़की, पर मध्यमवर्ग की थी, लेकिन उसके विवाह की एक कमी थी।
इनकी कोई संतान नहीं है।
वंश को चलाने वाला कोई नहीं।
हर जगह इलाज करवा लिया।
कोई उम्मीद नहीं।
अब घर के लोग पीछे पड़े हैं। दूसरी शादी के लिए। लेकिन प्रताप अपनी रमा के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं सकता। अभी घर वालों ने जबरदस्ती रमा को मायके भेज दिया है। घर वाले रोज एक रिश्ता लेकर आते हैं। उन्हीं से बचने के लिए मैं रोज यहां आ जाता हूं। ताकि लोग मेरी बदनामी कर दें और फिर कोई मुझसे शादी न करें।
इतना बताकर वो चला गया।
मेरा भी मन कुछ अजीब हो चला था। अगले कुछ दिनों तक प्रताप नहीं आया।
मैं भी बीमार हो गई।
शानो की नथ उतराई हो चुकी थी। मतलब उसका घर बस गया था। मेरे बीमार होने की वजह से कजरी बाई का कोठा बी वीरान हो चला था, पर अभी मैं सिर्फ प्रताप के बारे में सोच रही थी।
आज मेरी तबीयत थोड़ी ठीक थी तो मैंने सोचा क्यों न जमींदार की हवेली की तरफ जाऊं?
प्रताप कैसा है?
क्या उसकी बात घर वाले मान गए?
कहीं उन्होंने उसकी दूसरी शादी तो नहीं कर दी?
और रमा.... वो कहां होगी?
अपने मायके में या उसे कुछ हो तो नहीं गया। बस, इन सब सवालों के जवाब के लिए मुझे वहां जाना ही था।
हवेली के बाहर बहुत से लोग आ जा रहे हैं, अपने चेहरे पर घूंघट डालकर मैं भी लोगों की भीड़ में शामिल होकर अंदर चली गई, लेकिन वहां का माहौल देखकर मैं सिहर गई एक तरफ प्रताप की शादी हो रही थी और दूसरी तरफ रमा की लाश पड़ी हुई थी।
उफ, ये क्या हो गया।
...और ये प्रताप कुछ बोल क्यों नहीं रहा।
रमा कैसे मर गई?
मैं मलिका जो अपने जीवन के बड़े-बड़े दर्द भी बर्दाश्त कर गई। अपनों ने मुझे जहां लाकर पटका वो भी सह लिया।
मगर मेरे साथ गरीबी और लाचारी थी। दुनिया की गंदी निगाहों से बचने के लिए मुझे ऐसा लगा कि कजरी बाई का कोठा सुरक्षित जगह थी जहां अपना हुनर बेचकर अपना पेट पाला जाता है।
मगर ये प्रताप बड़े लोग, पैसों की कमी नहीं, ये क्या हो गया। शायद पांच दिनों की मुलाकात में मेरा प्रताप से एक लगाव हो गया था। मैं ये सोच रही थी कि मेरे सामने एक आदमी आकर खड़ा हुआ, बोला- क्या आप मलिका हो। प्रताप ने कहा था - आप उन्हें ढूढऩे जरूर आओगी।
मैं प्रताप का दोस्त हूं, पर आपने आने में देर कर दी। आज प्रताप की शादी है। वो अभी बेहोशी की हालत में है। रोज उसे बेहोशी के इंजेक्शन दिये गए और आज भी वो बेहोश ही है।
ये बड़े लोग हैं, इन्होंने डॉक्टर को खरीद लिया और रमा को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया, अब ये लोग रमा को इसी हवेली में दफना देंगे और कह देंगे कि रमा किसी के साथ भाग गई।
इन लोगों ने वंश की खातिर एक नहीं दो-दो जिंदगियों को खत्म कर दिया। प्रताप ने कहा था कि वो आपको सब बताना चाहता है। रमा के साथ यहां से कहीं भाग जाना चाहता है, पर उसके पहले ही ये सब हो गया।
इतना कहकर वो चला गया और मैं जड़ हो गई। ये सब सुनकर ये कैसा सच था। मैं क्यों प्रताप की मदद नहीं कर पाई और एक भयानक सच जो शायद सिर्फ मुझे ही पता था कि बच्चा पैदा न कर पाने की कमी रमा में नहीं बल्कि प्रताप में थी और ये बात प्रताप ने मुझे तो बता दी पर जान गंवाकर चुकानी पड़ी।
मेरे सामने एक तमाशा चल रहा था, प्रताप की शादी और रमा का कफन दोनों तैयार थे।
सारा सच जानते हुए भी मैं चुप थी। कैसे बताती कि मैं कोठे वाली हूं। मेरे कोठे पर आकर प्रताप ने मुझे ये सच बताया था। मैं सोच रही थी कि प्रताप के घर वाले अपने वंश के लिए और मिलने वाली इतनी सारी दौलत के लिए तो वो लड़की वाले और खुद लड़की बड़े घर से जुडऩे के लिए इतना गिर सकते हैं। ये संभ्रांत कहलाने वाले लोग खुद ही अपने बच्चों को बाजार में लेकर बैठे हैं। हमारी मंडी और इनकी मंडी में ज्यादा फर्क नहीं है। हम पेट के लिए मजबूरी में यहां धकेले जाते हैं, तो ये लोग खुद ही बिकने के लिए बैठ जाते हैं। सच है समाज को सुधारने का बीड़ा, बड़े लोगों ने ही उठा रखा है। इन्हीं लोगों ने अलग-अलग बाजार बना दिया।
एक खुद को बेचने के लिए और एक हमको बेचकर यहां बैठाकर खुद का मन बहलाने के लिए। पर ये हीरामंडी सब जगह है। ये मैं जान चुकी थी और मेरे भी मुजरे का वक्त हो चला था। आखिर मैं अपने खुद के घर में सुरक्षित तो थी।

आयकर छूट सीमा तीन लाख करने पर सहमति




नई दिल्ली:
प्रत्यक्ष कर संहिता यानी डीटीसी की जांच कर रही संसद की एक प्रमुख समिति आयकर सीमा बढ़ाकर 3 लाख करने की सिफारिश कर सकती है। साथ ही समिति 2.5 लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट देने का भी प्रस्ताव रख सकती है। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति की बैठक के बाद सूत्रों ने कहा, ‘इस बात पर सदस्यों के बीच सहमति है कि सालाना कर छूट सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाए।’’ सूत्रों के अनुसार उंची मुद्रास्फीति से परेशान लोगों को राहत देने के लिये आयकर छूट सीमा को मौजूदा 1.8 लाख रुपये से बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल, विर्निदिष्ट क्षेत्रों में एक लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट मिलता है। इसके अलावा बुनियादी ढांचा बांड पर 20,000 रुपये तक के निवेश पर भी कर छूट मिलता है। वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने दो मार्च को डीटीसी पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने का निर्णय किया है ताकि संसद 12 मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था पर महत्वकांक्षी सुधार पर चार कर सके। सूत्रों के अनुसार, ‘समिति संसद को अपनी रिपोर्ट मार्च के तीसरे सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।’ प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता में आयकर छूट सीमा 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। साथ ही कर स्लैब में संशोधन का भी प्रस्ताव है। फिलहाल, 1.80 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक पर 10 प्रतिशत, 5 से 8 लाख पर 20 प्रतिशत तथा 8 लाख रुपये से उपर की आय पर 30 प्रतिशत कर लगता है।डीटीसी आयकर कानून, 1961 का स्थान लेगा। इसे अगस्त 2010 में समिति को सौंपा गया था। कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को वित्त मंत्री को सौंपी अपनी मांग में सभी को खुश करने वाला बजट बनाने तथा आयकर स्लैब बढ़ाने की बात रखी है।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

ज्योतिष की शब्द तुला पर आपका जीवन दर्शन


(नाम के प्रथम अक्षर द्वारा अपने आपको पहचाने!)



साहित्यिक उत्सवों में ज्योतिषी सम्मानित नहीं होते। मौजूदा समय में इतिहास का सबसे जाज्वल्यमान विषय है- तो वह है, ज्योतिष विज्ञान। आंकड़ों के आइनों में जब भी कोई घटना/दुर्घटना घटती है, उसे ज्योतिष के दर्पण मेें देखें तो अक्स नजर आता है, राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण बेचैन जनमानस। किसी वर्ग को सपने डस रहे हैं और किसी को हकीकत। शान्ति, अशान्ति, सुख या दु:ख, इत्यादि को नापने का कोई बैरोमीटर है- तो वो है- ज्योतिष। किस भावना को किस एंगिल से देखना है, यह सूक्ष्म नजरिया - आप ज्योतिष के मनोवैज्ञानिक पक्ष से देख सकते हैं और अहसास कर सकते हैं। कुछ लोग, जिन्हें स्वप्नदर्शी भी कहा जा सकता है - वे धरती पर चलते समय भी पैरों में लगे अदृश्य पंखों से उडऩे का एहसास पाते हैं। सभी के जीवन में अपनी-अपनी सुगंध है, महक है। मानव पर अपने वंश, परिवार और परिवेश के इतर कुण्डली में बैठे ग्रहों, हथेली में खिंची लकीरें- बोलती हैं - आप क्या है? किस ओर जायेंगे? कैसे साथी मिलेंगे? जीवन में इन्द्रधनुषी छटा कब-कब, किस-किस के सहयोग से महकेगी? कब आप बहकेंगे? नव रसों के श्रृंगार से आपका मन क्रन्दन करेगा या नृत्य करेगा? जीवन की कालावधियों में मोह, सम्मान, तिरस्कार के सृजन में आपकी भूमिका कैसी रहेगी? आइये विस्तार से जानते हैं।

हम हैं जो, उसे ज्ञात करना, उसे परिभाषित करना, ज्योतिष का ही तो रोमांचकारी स्वभाव है। आपका डीएनए और आपके थॉट्स वस्तुत: कुण्डली के बारह भावों में हलचल मचा रहे हैं। मैं तो मात्र उद्घोषक हूं, ज्योतिष की विभिन्न विधाओं के माध्यम से आपका भविष्य जानना मेरी नियति है। आंकड़ों की दुनिया से जब आपका मन भर जाए, तो आ जाइये शब्दों की भूल भुलैयों में। मन तरंगित हो उठेगा, नाच उठेंगे आप। शब्द चित्र आपको रोमांचित कर देंगे। आपकी आत्मा को उद्वेलित कर सकता है - आपके नाम के प्रथम अक्षर का ज्योतिषीय आकलन। शब्दों के प्रहरी बने, आप।

'ए
'ए अंग्रेजी वर्णमाला का यह प्रथम अक्षर है। जिसके नाम में सर्वप्रथम यह अक्षर 'एÓ हो, तो ऐसा व्यक्ति श्रेष्ठ विचारक तथा सद्गुण सम्पन्न होता है। चंचल प्रकृति होने के साथ साथ दूसरों के दु:ख-दर्द में भी भागीदार होता है। ऐसे व्यक्तिसमाज को प्रेममय, मधुर तथा सुन्दर बनाने का प्रयत्न करते हैं। गम्भीर प्रकृति के साथ भावना प्रधान व्यक्तित्व होता है, इनका। यदाकदा देखा गया है कि इनमें राजसी भावना के साथ साहित्यिक प्रतिभा भी पर्याप्त होती है। चरित्र के मामले में इनका ढुल-मुल रवैया कभी-कभी इन्हें विवादग्रस्त बना देता है। मित्रता के मामले में ये विश्वसनीय होते हैं। व्यापार जगत से जुड़े जातक कठोर परिश्रम से आयु के 40वें वर्ष के बाद अगर ग्रह योग अनुकूल रहें, तो कुबेरपति बनते इन्हें देर नहीं लगती। राजनैतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में उत्थान-पतन की अठखेलियां, इन्हें चाणक्य की वृष्टि छाया में लाकर खड़ा कर देती हैं। विशिष्ट नायक-महान दार्शनिक अरस्तु, सम्राट अशोक, एडॉल्फ हिटलर, अब्राहिम लिंकन, श्री अटल बिहारी बाजपेयी, अन्ना हजारे। शक्ति मंत्र- झूठ एक आकर्षण है, एक जालसाजी है, जिसे फंतासी में सजाया जा सकता है। इसे रहस्यमयी अवधारणा के पर्देे में रखा जा सकता है। सत्य भावहीन और गंभीर होता है, जिसे झेलना आरामदेह नहीं होता। झूठ ज्यादा स्वादिष्ट होता है। मैंने पाया है कि कल्पना की उड़ान सच से बहुत ज्यादा रोचक और लाभदायक होती है।

'बी
'ब यह अंग्रेजी वर्णमाला का दूसरा अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'बीÓ होता है - तो ऐसा व्यक्ति विचारों की गहराई में डूबा रहता है। वाद-विवाद में पडऩा इन्हें अच्छा नहीं लगता। कुतर्क की अपेक्षा भावपूर्ण तर्क को महत्व देते हैं। इनका सहज स्वभाव मित्रों की संख्या में इजाफा करता रहता है। यात्राएं इनके जीवन में पथ प्रदर्शक बन कर इनके व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाकर नेता, अभिनेता, समाजसेवी, प्रशासनिक अथवा गरिमापूर्ण राजनैतिक आसंदियों पर बैठाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करती हैं। किसी भी विषय में इनका स्वयं का निर्णय होता है। कुछ शंकालु होने के कारण, चौकन्ने रहते हैं। कभी कभी स्वार्थ और हीन भावना के शिकार भी हो जाते हैं। विशिष्ट नायक- श्री बालगंगाधर तिलक, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. भीमराव अंबेडकर, बॉवी फिशर। शक्ति मंत्र- आप किस उद्देश्य से काम कर रहे हैं, यह जाहिर न होने दें। इससे लोग अंधेरे में रहेंगे और अपनी योजनाएं नहीं बना पाएंगे। अगर उन्हें इस बात का अन्दाजा भी नहीं होगा कि आप क्या करना चाहते हैं, तो वे अपनी रक्षा की योजना नहीं बना सकते। इस तरह आप उन्हें गलत दिशा में काफी दूर तक ले जा सकते हैं और काफी समय तक गुमराह कर सकते हैं। जब तक उन्हें आपके इरादों का एहसास होगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

'सी
'सी वर्णमाला के तीसरे अक्षर द्वारा जिसका नाम शुरू होता है- ऐसे व्यक्ति धुन के पक्के होते हैं। जिस कार्य में हाथ डालते हैं, उसमें प्राणपण से जुट जायेंगे तथा पूरा करके ही छोड़ेंगे। वादा निभाना ये जानते हैं। इनकी बात पत्थर की लकीर होती है। जो कह दिया- सो कह दिया, उसी पर अडिग रहेंगे। ये अन्तर्मुखी होते हैं। इनका मस्तिष्क निरन्तर गतिशील रहता है। कोई न कोई योजना बनाते रहते हैं। नि:संदेह इन्हें कर्मठ, दूरदर्शी एवं श्रेष्ठ प्लानर कहा जा सकता है। विशिष्ट नायक- महान कूटनीतिज्ञ चाणक्य, क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद, चाल्र्स डिकेन्स, च्यांगकाई शेक, महान हस्त रेखा विशेषज्ञ कीरो। शक्ति मंत्र- मित्रों से सावधान रहें। मित्र बहुत जल्दी से ईष्र्या करने लगते हैं। मित्र भविष्य में कष्ट का कारण बन सकते हैं। इसके बजाय अगर आप किसी पुराने शत्रु को काम पर रखेंगे, तो वह मित्र से ज्यादा वफादार होगा, क्योंकि उसे बहुत कुछ साबित करना है। दरअसल आपको शत्रुओं से नहीं, बल्कि मित्रों से डरना चाहिए। कहावत प्रसिद्ध है- मूर्ख दोस्त से समझदार दुश्मन अच्छा होता है।

'डी
'डी यह अंग्रेजी वर्णमाला का चौथा अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'डीÓ हो- वे कम बोलने वाले, मिष्ठभाषी होते हैं। अपने विचारों पर अडिग बने रहते हैं। प्रबल आत्मविश्वासी, वचन के पक्के जिम्मेदार व्यक्तिहोते हैं। अपनी योजनाओं को पूर्ण होते देखना इनका लक्ष्य होता है। विपरीत समय या अवस्था भी इनके कार्य में बाधक नहीं बनती। मान प्रतिष्ठा को बहुत महत्व देते हैं। अगर मान प्रतिष्ठा प्राण देकर भी बनी रह सके, तो ये चूकते नहीं हैं। सफल प्रशासक, कुशल नेता, कर्मठ एवं त्यागी होते हैं। विशिष्ट नायक- हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द, डोनाल्ड ब्रेडमेन, डेनियल डिफो: राबिन्सन क्रूसो के रचयिता, तिब्बती गुरु दलाई लामा। शक्ति मंत्र- इस छोटे से जीवन में सीखने को बहुत कुछ है और ज्ञान के बिना जिन्दगी अर्थहीन है। इसलिए सबसे ज्ञान अर्जित करना एक उत्कृष्ट तकनीक है। दूसरों की जी तोड़ मेहनत के बल पर आप महानता की प्रतिष्ठा हासिल करना सीखें। बिस्मार्क ने एक बार कहा था- मूर्ख कहते हैं कि वे अपने अनुभव से सीखते हैं। मैं दूसरों के अनुभव से लाभ उठाना पसन्द करता हूं।

'ई

'ई वर्णमाला का यह पांचवां अक्षर है, जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'ई हो - तो वे बहिर्मुखी होते हैं। व्यवहार कु शलता की इनमें कमी होती है। किस समय, किसको क्या बोलना है? इसका ध्यान न रखकर मुंह पर ही खरी खोटी कह देते हैं। चाहे सामने वाला कितना भी उच्च व्यक्ति हो। स्पष्टवादी होने के कारण लोगों में इनके प्रति अच्छी भावना नहीं पाई जाती। अधिक बोलने के कारण वाचाल और गप्पी समझे जाते हैं। ये नवीनता को जीवन में प्रमुखता देते हैं। कार्य हो, विचार हो, योजना हो- यानी हर क्षेत्र में नवीनता इन्हें प्रिय होती है। विशिष्ट नायक- इब्सन, जार्ज इलियट, प्रिंस इम्पीरियल (नेपोलियन)। शक्तिमंत्र- खुशकिस्मत लोगों को पहचाने, ताकि आप उनके साथ रहने का निर्णय ले सकें। बदकिस्मत लोगों को भी पहचाने, ताकि उनसे आप बच सकें। दुर्भाग्य आमतौर पर मूर्खता के कारण आता है और इसके शिकार लोगों से ज्यादा संक्रामक और कोई नहीं होता। अपने दरवाजे को छोटे से छोटे दुर्भाग्य के लिए भी खोलें, क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं, तो उसके पीछे पीछे बहुत से दुर्भाग्य चले जायेंगे।

'एफ

'एफ - अंग्रेजी वर्ण माला का यह छठवां अक्षर है। जिसके नाम की शुरूआत 'एफ से हो- ऐसे जातक घरेलू कार्यों में अधिक रुचि लेते हैं। परिवार को सुचारु रूप से कैसे चलाया जा सकता है, कोई इनसे सीखे? इन्हें श्रेष्ठ गृहस्थ कहा जा सकता है। ये परिवार में बच्चों में बच्चे बने रहकर, बड़ों में गम्भीर रहकर परिवार में
प्रसन्नता बनाए रखते हैंं। इनका जीवन एक तरह से समाज और परिवार की धरोहर होता है। ये सच्चे प्रेमी, ईमानदार, मधुर व्यवहारी एवं परोपकारी होते हैं। कुल मिलाकर सामाजिक दृष्टिकोण के अनुसार ये श्रेष्ठ व्यक्ति होते हैं। विशिष्ट नायक- फ्लोरेन्स नाइटिंगेल, फर्डीनांड डी लिसफ, जर्मनी राजा फ्रेडरिक महान, फैराडे, फ्रांसिस बेकन। शक्ति मंत्र- अन्त ही सब कुछ है। अंत तक पहुंचने की पूरी योजना बनाएं। उन सभी संभावित परिणामों, बाधाओं और किस्मत के उतार चढ़ावों पर विचार करें, जो आपकी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं। अंत तक की योजना बनाने से आप परिस्थितियों के शिकार नहीं होंगे और यह जान जाएंगे कि कब रुकना है। किस्मत को धीरे से राह दिखाएं और बहुत आगे तक विचार करके अपने भविष्य को तय करें।

'जी
'जी - अंग्रेेजी वर्णमाला का यह सातवां अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'जी हो वे चरित्रवान होते हैं। आकर्षण शक्ति इनमें गजब की होती है। इनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसी विशेषता होती है कि लोग इनकी तरफ खिंचे चले आते हैं। शत्रु भी शत्रुता भूल जाता है और मित्रता करने को आतुर दिखाई देता है। किसी को भी किसी भी समय, अपने व्यवहार, मृदु वार्तालाप से ये अपने अनुकूल बना लेते हैं। ये आडम्बरों को परे रखकर जीवन-यापन करते हैं। सादगी, सच्चाई, शिष्टता के पुजारी, नवीन सभ्यता के जन्मदाता कहे जाते हैं। हर कार्य योजनाबद्ध तरीके से करने इनका स्वभाव होता है। वस्तुत: ऐसे व्यक्ति ही जीवन में सफल होते हैं। विशिष्ट नायक- भगवान गौतम बुद्ध, राष्ट्रवादी हिन्दुत्व के पुरोधा गुरु गोलवलकर, श्री गोविन्द वल्लभ पंत। शक्ति मंत्र- हमेशा जरूरत से कम बोलें। जब आप जरूरत से कम बोलते हैं तो हमेशा वास्तविकता से ज्यादा महान और शक्तिशाली नजर आते हैं। आपकी चुप्पी से दूसरे लोग परेशान हो जायेंगे। इंसान विश्लेषण और स्पष्टीकरण करने वाली मशीनें हैं।

'एच
'एच - अंग्रेजी वर्णमाला का यह आठवां अक्षर है, जिसके नाम का 'एच प्रथम अक्षर होता है, वे दृढ़ निश्चयी, अद्भुत कार्यक्षमता तथा विलक्षण प्रतिभा से सम्पन्न होते हैं। समाज के जिस क्षेत्र में ये कदम रख दें- जनमानस इनका अनुयायी हो जाता है। लेखन, वाकपटुता तथा अपनी कार्यशैली से चमत्कृत कर देने की ऐसे जातकों में अद्भुत क्षमता होती है। ग्रह योग अनुकूल हो तो युग पुरुष बनते इन्हें देर नहीं लगती। अपनी वाणी से जनसमूह को आकर्षित करना तथा अपने अनुकूल बनाना कोई इनसे सीखे। दूसरे शब्दों में कहें तो ये वाणी के जादूगर होते हैं। ग्रहों की प्रतिकूलता पतन के मार्ग की पथगामिनी बना देती है। विशिष्ट नायक- इस्लाम धर्म के प्रवर्तक: हजरत मुहम्मद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेगडेवार, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, हरिविष्णु कामत, डॉ. हरीसिंह गौर। शक्ति मंत्र- यह सबक सीख लें। एक बार बाहर निकल जाने के बाद आप शब्दों को दोबारा नहीं लौटा सकते। इन्हें नियंत्रण में रखें। व्यंग्य के प्रति खासतौर पर सावधान रहें। आपके व्यंग्य बाणों से आपको क्षणिक संतुष्टि तो मिल सकती है, लेकिन बदले में आपको उसकी ज्यादा कीमत चुकाना पड़ती है।

'आईÓ
अंग्रेजी वर्णमाला का यह नौंवां अक्षर है। जिसके नाम का पहला अक्षर 'आईÓ हो तो वे बातों की अपेक्षा श्रम पर अधिक विश्वास रखते हैं। वे अपने जीवन में आराम है हराम इस वाक्य को प्रधानता देते हैं और सच्चे कर्मठ तथा श्रमिक कहलाये जाते हैं। इनके जीवन में एक कहावत चरितार्थ है। वर्क लाइफ इन लेबर, लिव लाइक ए किंग किसी भी कार्य को पूरी लगन और तत्परता से पूर्ण करते हैं। आलसी व्यक्तियों एवं आलस्य से इन्हें घृणा होती है। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम का प्रथम नामाक्षर 'आईÓ ही था। उन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में राजाओं के प्रिवीपर्स तथा विशेषाधिकार की समाप्ति एवं बैंकों का राष्ट्रीयकरण तथा बांग्लादेश की स्वाधीनता में अविस्मरणीय योगदान दिया। किसी भी विषय का अध्ययन करते समय गहराई तक पहुंच जाना इनकी विशेषता होती है। ये अनावश्यक बातें नहीं करते। जो कुछ कहेंगे, वो ठोस तथा प्रमाणित होगा। वस्तुत: ये ही देश और समाज को कुछ नया दे सकते हैं। विशिष्ट नायक- श्रीमती इंदिरा गांधी। शक्तिमंत्र- प्रतिष्ठा, शक्ति की नींव है। ऐसी प्रतिष्ठा बनाये कि उस पर कोई हमला न कर सके। हमेशा संभावित हमलों के बारे में सचेत रहें और उसके होने के पहले ही उन्हें खत्म कर दें। शत्रुओं की प्रतिष्ठा पर सेंध लगाकर उन्हें नष्ट करना सीखें और फिर दूर खड़े हो जाएं और जनता को उनकी आलोचना करने दें।

'जे
'जे - अंग्रेजी वर्णमाला का यह दसवां अक्षर है। जिसके नाम का पहला अक्षर 'जे होता है- वे उदार प्रकृति, विशाल हृदय, स्वतंत्र विचारों के धनी होते हैं। अनुशासनप्रिय, स्वतंत्रता की प्राण देकर रक्षा करने वाले होते हैं। छोटी-मोटी बातों पर ध्यान नहीं देते। मौलिकता इनके जीवन का सच्चा साथी होता है। उन्मुक्त विचारक होकर संकीर्णता को प्रश्रय नहीं देते। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के नाम का प्रथम अक्षर 'जे ही था। खरी खोटी ये कह नहीं सकते। नेतृत्व का मौका यदि इन्हें मिले तो देश और समाज के हित में ही जीवन पर्यन्त लगे रहकर सम्मान अर्जित कर सकते हैं। विशिष्ट नायक- जीसस क्राइस्ट, पं. जवाहर लाल नेहरू, बाबू जयप्रकाश नारायण, जार्ज वर्नार्ड शॉ, जूलियस सीजर, जार्ज वाश्ंिागटन। शक्ति मंत्र- हर कीमत पर सबका ध्यान आकर्षित करें, अन्यथा गुमनामी में दफन हो जाएंगे। नीरस और भीरू जनता से ज्यादा महान, ज्यादा दिलचस्प और ज्यादा रहस्यमय दिख कर चुम्बक बन जाए तथा सबका ध्यान अपनी ओर खींचें।

'के
'के - अंग्रेजी वर्णमाला का यह ग्यारहवां अक्षर है। जिसके नाम का पहला अक्षर 'केÓ होता है- वह संघर्षमय जीवन के ज्वलंत उदाहरण होते हैं। उनके जीवन में उत्थान पतन, उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। जितनी ऊंच-नीच अपने जीवन में ये देखते हैं- इतना अन्य कोई नहीं। ये प्रत्येक कार्य का अंधेरा पक्ष देखते हैं। प्राय: निराशावादी हो जाते हैं। जीवन के प्रति इन्हें कोई खास लगाव नहीं होता। घड़ी के पेन्डूलम की तरह बीच की स्थिति में इनका जीवन गुजरता है। उन्नति की ओर अग्रसर हो गए, तो उच्च पद अथवा अतुल धन सम्पत्ति अर्जित कर लेते हैं। अगर कहीं पतन होना शुरू हो गया, तो पतनोन्मुखी होकर भिक्षुक ही नजर आयेंगे। ग्रहों की अनुकूलता इन्हें युग पुरुष भी बना देती है। विशिष्ट नायक- महाकवि कालिदास, कार्ल माक्र्स, सीमान्त गांधी खान, अब्दुल गफ्फार खां। शक्ति मंत्र- अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए दूसरों की समझदारी, ज्ञान और मेहनत का इस्तेमाल करें। इस तरह से आप न सिर्फ अपना अमूल्य समय और ऊर्जा बचायेंगे, बल्कि इससे यह छवि भी बनेगी कि आप बहुत कार्यकुशल और तीव्र हैं। लोग आपको याद रखेंगे और आपके विरोधी गुमनामी के अंधेरे में खो कर रह जायेंगे।

'एल
'एल - यह अंग्रेजी वर्णमाला का बारहवां अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'एल हो - वे दया, भावना तथा दार्शनिकता के हस्ताक्षर होते हैं। वे दार्शनिक भावुक और दयालु होने के साथ साथ श्रेष्ठ विचारक एवं न्यायी होते हैं। इनका एक मात्र लक्ष्य रहता है- उन्नति करना- आगे बढऩा। इनके विचार सुलझे हुए होते हैं। प्रत्येक कार्य योजनाबद्ध तरीके से करते हैं। कार्य के प्रति निष्ठावान रहकर उसमें लगे रहते हैं। सफलता इनकी दासी होती है। ऐसे व्यक्ति ही त्मेमतअमक कहलाते हैं। भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री स्व. श्री लालबहादुर शास्त्री के नाम का प्रथम अक्षर भी 'एलÓ रहा, अपने प्रधानमंत्रित्व काल में उनका नारा था- जय जवान, जय किसान। ये उच्चस्तरीय रहन, सहन से प्रभावित नहीं रहते। विद्वानों और श्रेष्ठ जनों की संगति पसन्द करते हैं। प्राय: उच्चस्तरीय समुदाय से सहायता भी प्राप्त कर लेते हैं। अपने श्रेष्ठ विचारों, गुणों व योजनाबद्ध कार्य करने के कारण अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करने में समर्थ होते हैं। विशिष्ट नायक- साम्यवाद के संस्थापक लेनन, लियो टाल्सटॉय, लुईस केरोल, लियोनार्डो द विंसी, पंजाब केसरी लाला लाजपत राय, लालकृष्ण आडवाणी, सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर। शक्ति मंत्र- जब आप दूसरे व्यक्ति को काम करने के लिए मजबूर करते हैं, तो नियंत्रण आपके हाथ में होता है। हमेशा ज्यादा अच्छा यही होता है कि आपका विरोधी आपके पास आए। दूसरों को अपने पास आने के लिए मजबूर करने की योग्यता दीर्घकालीन रणनीति के लिहाज से आपका सबसे शक्तिशाली अस्त्र है।

'एम

'एम - यह अंग्रेजी वर्णमाला का तेरहवां अक्षर है। 'एमÓ लोकप्रियता, प्रसिद्धि का प्रतीक अक्षर है। जिसके नाम का यह प्रथम अक्षर हो वे जातक अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होते हैं। कार्य कोई भी हो? कैसा भी हो? कैसा भी देशकाल हो? वे संघर्षों के बाद प्रसिद्धि , लोकप्रियता की चोटी पर दिखाई देंगे। बापू, जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था, उनके नाम का प्रथम अक्षर भी 'एमÓ है। ये सज्जन, सदाचारी, सभ्य, सुसंस्कृत होते हैं। पवित्र विचारों वाले ये जातक सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांतों के प्रेमी होते हैं। कभी-कभी सादगी इनके जीवन का अभिशाप बन जाती है। ये गोपनीयता पर काफी जोर देते हैं, परन्तु वास्तविक जीवन में इनकी कोई बात गोपनीय रहे- ऐसा नहीं पाया जाता। अपने को श्रेष्ठ साबित करने की ललक भी इन्हें होती है। इतना कुछ होने के बावजूद भी जीवन में उत्थान-पतन, उतार-चढ़ाव ये देखते ही हैं। विशिष्ट नायक- भगवान महावीर स्वामी, पूज्य बापू मोहनदास करमचन्द गांधी, फील्ड मार्शल मानिक शा, माओत्से तुंग, मिर्जा गालिब, मदर टेरेसा। शक्ति मंत्र- बहस से मिलने वाली क्षणिक विजय दरअसल खोखली होती है। इससे सामने वाले के विचार नहीं बदलते। इसके बजाय उसके मन में द्वेष, और दुर्भावना उत्पन्न होती है, जो काफी समय तक कायम रहती है। कुछ बोले बिना अपने कार्यों से दूसरों को प्रभावित करना बहुत ज्यादा असरदार होता है। बोलें नहीं, बल्कि काम करके दिखा दें।

'एन

'एन - यह अंग्रेजी वर्णमाला का चौहदवां अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'एन हो - वह प्रभावशाली व्यक्तित्व लिए होता है। इसी जन्मजात गुण के कारण यह अपरिचित से अपरिचित व्यक्तिको अपना मित्र बना लेता है और अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। इन्हें जो भी मित्र मिलते हैं, वे सदा इनकी सहायता के लिए तैयार रहते हैं। ये आजीवन संघर्षरत रहकर कठिनाइयां झेलते हैं। विघ्न बाधाएं इनकी सहचरी संगिनी होती हैं। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। अपने व्यक्तित्व की महानता एवं परिश्रमी प्रवृत्ति के कारण अन्त में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। विशिष्ट नायक- गुरु नानक देव जी, नेपोलियन बोनापार्ट, फुटबॉल का बादशाह मासिमेंटो पेले। शक्ति मंत्र- कुछ लोग खुशनुमा स्वभाव, स्वाभाविक उत्साह और बुद्धिमत्ता के द्वारा खुशी को आकर्षित करते हैं। वे सुख का स्रोत होते हैं और आपको उसके साथ संबंध जोडऩा चाहिए, ताकि आप भी उनके सुख में हिस्सेदार बन सकें। नेपोलियन बोनापार्ट टेलीरेंड की जितनी प्रशंसा करते थे, उतनी किसी की भी नहीं। उसे फ्रांस का सबसे शालीन, आकर्षक और हाजिर जवाब सामंत मानते थे।

'ओ
'ओ अंग्रेजी वर्णमाला का पन्द्रहवां अक्षर है। जिनके नाम का प्रथम अक्षर 'ओÓ होता है- वे अत्यंत महत्वाकांक्षी होते हैं। आकस्मिक रूप से ऊपर उठने की तीव्र इच्छा इनमें बनी रहती है। इनके जीवन का उत्तरार्ध-पूर्वार्द्ध की अपेक्षा अधिक सुखी एवं सम्पन्न होता है। ये हिम्मत एवं दिलेरी के मूर्तिमान होते हैं। हिम्मत हारना ये जानते ही नहीं है। निरन्तर उतार-चढ़ाव इनके जीवन में बने रहते हैं। इतने पर भी धैर्य एवं साहस का दामन थामे रहते हैं। गिरकर उठने की क्षमता रखते हैं। विविधता के प्रतिनिधि इन जातकों के जीवन में मित्रों की एक लम्बी कतार होती है, परन्तु विरोधी एवं शत्रुओं की भी कमी नहीं होती। विशिष्ट नायक- ओशो रजनीश, ओरविल राइट, ओलिवर गोल्ड स्मिथ, ओनासिस। शक्ति मंत्र - राष्ट्रपति निक्सन ने व्हाइट हाउस में बैठने के बाद बहुत से लोगों को निकाला, किन्तु हेनरी किसिंगर बच गये, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी राजतंत्र के इतने सारे क्षेत्रों में घुसपैठ कर ली थी कि उन्हें हटाने से भारी अव्यवस्था का माहौल बन जाता। लोकप्रिय बननेे से अच्छा है- लोग आप पर निर्भर रहें और इस बात से डरें कि आपके चले जाने के कितने बुरे परिणाम होंगे।

'पी
'पी अंग्रेजी वर्णमाला का 16 वां अक्षर है। जिस व्यक्ति के नाम का प्रथम अक्षर 'पीÓ बनता है तो ऐसा व्यक्तिरहस्यमय प्रकृति का, अपने हृदय में अनेक रहस्यों को छिपाये हुए होता है। हृदय में बड़ी से बड़ी उथल-पुथल तथा हाहाकार मचने के बावजूद भी ऊपर से शान्तचित्त दिखाई देते हैं। ये दयालु प्रकृति के दूसरों के सुख-दुख में शामिल होने वाले होते हैं। कितनी भी कठिनाइयां हों, दुख-तकलीफ हों। इनके मस्तिष्क पर विषाद की रेखाएं नहीं खिंचती और मुखारबिन्द पर हास्य बिखेरे रहते हैं। ये श्रेष्ठता के प्रतीक, सच्चे कर्मठ होते हैं। ये समाज के वास्तविक आभूषण कहलाने लायक होते हैं। वस्तुत: ऐसे ही सच्चे समाज सेवियों की आज के समाज में आवश्यकता है। विशिष्ट नायक- महाराणा प्रताप, उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द, पाब्लो पिकासो, महान दार्शनिक प्लेटो, उडऩपरी पी.टी. उषा, प्रकाश पादुकोण। शक्ति मंत्र- देश की सुरक्षा हेतु दृढ़ संकल्पशक्ति, महत्वाकांक्षा तथा प्राणों का लोभ त्यागकर लक्ष्य पाने का अदम्य साहस ही सफलता की कुंजी है। मनुष्य दत्तचित्त होकर पूरी निष्ठा व आस्था के साथ सत्कर्म करे- बाधाएं उसका पथ छोड़ देती हैं और भाग्य की देवी उसे इतिहास पुरुष बना देती है।

'क्यू
'क्यू अंग्रेजी वर्णमाला का यह 17 वां अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'क्यूÓ हो - वे अपने सिद्धांत के पक्के और इसके पीछे जीते मरते हैं। ये श्रेष्ठ विचारक होते हैं, जो कुछ विचार कर लेते हैं, उसी पर अडिग रहते हैं- ऐसे व्यक्तिसच्चे, ईमानदार एवं सहृदयी होते हैं। सही और व्यवस्थित ढंग से किसी कार्य योजना का श्रीगणेश करते हैं। जीवनयापन में विशेष व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। इनके निश्चित लक्ष्य, निश्चित सिद्धांत होते हैं और इन्हें ये बदलते नहीं, बल्कि इन्हीं पर अडिग रहते हैं। शान्ति, गम्भीरता एवं भावुकता इनके जीवन के विशेष आभूषण हैं। उतावलापन इनमें नहीं होता। कभी किसी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करते तथा अपने कार्यों में भी हस्तक्षेप पसन्द नहीं करते। अहंकार, घमंड से परे रहकर जीवनयापन करने वाले ऐसे जातक श्रेष्ठ प्रशासक भी हो सकते हैं? विशिष्ट नायक: कुतुबुद्दीन ऐबक (जिसने दिल्ली की कुतुबमीनार बनवाई थी), क्वीन एलेक्जेण्डा। शक्ति मंत्र - एक सच्चा और ईमानदार कदम बेईमानी के दर्जनों कदमों को ढंक लेगा। सन्देह करने वाले लोगों के रक्षा कवच आपकी ईमानदारी और उदारता के कामों से शिथिल हो जाते हैं। जब आपकी थोड़ी सी ईमानदारी उनके कवच में छेद कर दे और आपकी ईमानदारी,सावधान लोगों को निरस्त्र करने का सबसे अच्छा तरीका है।

'आर

'आर अंग्रेजी वर्णमाला का यह 18वां अक्षर है। जिनके नाम का प्रथम अक्षर 'आरÓ बनता है, ऐसे जातक श्रेष्ठ व्यक्तित्व के धनी, प्रभावशाली और मधुरभाषी होते हैं। अपरिचित व्यक्ति को शीघ्र से शीघ्र मित्र कैसे बनाया जा सकता है? कोई इनसे सीखे। अपने उच्चाधिकारी से अपना कोई भी कार्य बना लेना, इनके बायें हाथ
का खेल है। ये साधारण कुल-परिवार में जन्म लेकर भी उच्च स्थान प्राप्त नायक- गुलाम वंश का प्रथम बादशाह कर लेते हैं। समाज में ये विशेष लोकप्रिय होते हैं। जैसे जैसे इनकी आयु बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे ये जीवन में मान-प्रतिष्ठा, पद-इज्जत-सम्मान में अधिकाधिक वृद्धि कर लेते हैं। सही अर्थों में ये गुणी व्यक्तिहोते हैं। ऐसे जातक पक्के हितग्राही होते हैं। अपने हितों को नजर से ओझल नहीं होने देते। हित साधन के पश्चात-प्रत्युपकार करने में भी ये पीछे नहीं रहते। दूसरों को परख लेने की इनमें अद्भुत क्षमता होती है। इनके जीवन का उत्तरार्ध श्रेष्ठ होता है। ये परिश्रमी और लगनशील होते हैं। सफलता की देवी इनके साथ परछाई की तरह चलती है। विशिष्ट नायक- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर, संत रविदास, राजाराममोहन राय। शक्ति मंत्र- कहीं भी बहुत ज्यादा आने जाने से कीमत घटती है। आप जितना ज्यादा दिखते और बोलते हैं, उतने ही साधारण नजर आते हैं। आपके अनुपस्थित रहने पर आपके बारे में ज्यादा बातें होती होंगी। आपको बस यह सीख लेना चाहिए कि दूर कब रहना है। अभाव से हर चीज का मूल्य बढ़ जाता है, इस सिद्धांत का लाभ लें।

'एस

'एस - यह अंग्रेजी वर्णमाला का 19वां अक्षर है। जिसके नाम का प्रथम अक्षर 'एसÓ बनता है- ऐसे जातक जीवन में महान बनने के लिए पैदा होते हैं। ऐसे व्यक्तिहंसमुख, विनोदी प्रकृति के होते हैं। अपने मालिक अथवा उच्चाधिकारी के प्रति पूर्ण रूप से वफादार रहते हैं। खुद कष्ट सहकर दूसरों को सुख देना, इन्हेंं अच्छा लगता है। ये मित्र-बन्धु भी काफी बना लेते हैं, भले ही वे इनके जीवन में सहायक न हों। लोकप्रियता पाने का लोभ ये छोड़ नहीं सकते। इनका लक्ष्य होता है- येन केन प्रकारेण लोकप्रिय बनना। इसलिए ये सामाजिक कार्यों, सभा, सोसायटियों, सार्वजनिक उत्सवों, प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। ज्यादा से ज्यादा जनसम्पर्क बनाए रखने का प्रयत्न करते हैं। कई दफा दूसरों के स्वार्थ की बेदी पर बलि चढ़ जाते हैं। अर्थ (वित्त) पक्ष समयानुसार सबल होता रहता है। धन अर्जित करने की अपेक्षा, ये विद्याव्यसनी अधिक होते हैं। विशिष्ट नायक- महान दार्शनिक सुकरात, सर विंस्टन चर्चिल, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सर चाल्र्स चेपलिन, छत्रपति शिवाजी, सिकन्दर महान। शक्ति मंत्र- अपने प्रतिद्वंद्वी के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है। बहुमूल्य जानकारी इकट्ठी करने के लिए जासूसों का इस्तेमाल करें, ताकि आप एक कदम आगे रह सकें। इससे भी अच्छा तरीका यह है कि आप खुद जासूस की भूमिका निभाएं। सौहार्दपूर्ण सामाजिक मुलाकातों में यह काम करना सीखें। अप्रत्यक्ष सवाल पूछें, ताकि लोग अपनी कमजोरियों और इरादों को उजागर कर दें।

'टी
'टी अंग्रेजी वर्णमाला का यह 20 वां अक्षर है। जिस जातक के नाम का प्रथम अक्षर 'टीÓ होता है- ऐसे व्यक्ति स्वतंत्र एवं त्वरित निर्णय लेने वाले होते हैं। कोई कुछ भी कहे-सुनते सबकी हैं, परन्तु करते वही हैं, जो इन्हें न्यायसंगत और ठीक लगे। ये प्रबल आत्मविश्वास वाले होते हैं। अपनी उन्नति के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। गलत तरीकों से उन्नति, लाभ अर्जित करना इन्हें पसन्द नहीं, अपितु सफलता हेतुु न्यायसंगत तथा विवेकपूर्ण आधार अपनाते हैं। ऐसे जातक आस्तिक होते हैं। ईश्वर की सत्ता पर इनका अटूट विश्वास होता है। ये अपने पूरे जीवन में 'भगवत गीताÓ के इन दो वाक्यों को प्रमुखता देकर चलते हैं - (1) कर्म करते चलो, फल की इच्छा मत करो। (2) जैसा कर्म तुम करोगे, वैसा फल पाओगे। ऐसे व्यक्तिसमाज, प्रशासन अथवा राजनीति में शिखर पुरुष के रूप में सम्मानित होते देखे जा सकते हैं। विशिष्ट नायक: टॉमस एल्वा एडीसन, संगीत सम्राट तानसेन, टी.एन. शेषन। शक्ति मंत्र- युद्ध के प्रमुख दार्शनिक कार्लवॉन क्लॉजेविट्ज के अनुसार अपने दुश्मन पर दया न करें। अपने दुश्मन को उसी तरह से पूरा कुचल डालें, जिस तरह मौका मिलने पर वे आपको कुचल डालते हैं। दुश्मनों के मिट जाने के बाद ही आपको शान्ति और सुरक्षा मिल सकती है।

'यू

'यू अंग्रेजी वर्णमाला का यह 21वां अक्षर है। जिस व्यक्ति के नाम का प्रथम अक्षर 'यूÓ से बने ऐसे जातक सुलझे विचारों के धनी होते हैं। सत्य की खोज के लिए ये प्राणाहुति तक दे सकते हैं। ये नवीन स्थितियों, कार्यों तथा विचारों वाले होते हैं। संसार में जो कुछ नया दिखाई दे- उसके जन्मदाता ऐसे जातक ही हो सकते हैं। रूढि़वादिता को ये पसन्द नहीं करते। जीवन के हर क्षेत्र में सबसे अलग इनके विचार होते हैं। इनके शत्रु भी बहुत होते हैं, जो पीठ-पीछे कुचक्र रचते रहते हैं। सामने आने पर हितोपदेशी बने नजर आते हैं। भेद को अन्तर्मन में छिपा कर रखना, कोई इनसे सीखें। जीवन में जो कुछ गुजर गया, उसका विचार-पश्चाताप ये नहीं करते। वर्तमान को कैसे समृद्ध तथा उज्जवल बनाया जा सकता है- इस ओर इनका विशेष ध्यान रहता है। भविष्य की चिन्ता ये खुद नहीं करते, ईश्वर को अर्पण कर देते हैं। विशिष्ट नायक- प्रथम अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन (सोवियत संघ), राष्ट्रपति यूलीसीज ग्रॉट, शायर उमर खय्याम। शक्ति मंत्र- इंसान आदतों के हिसाब से चलते हैं। आपके लीक पर चलते रहने से उन्हें यह अहसास होता है कि आप नियंत्रण में हैं। पांसों को पलट दें? जानबूझ कर अनापेक्षित काम करें? लोग हमेशा आपके कार्यों के पीछे उद्देश्यों को समझने की कोशिश करते हैं, ताकि आपके खिलाफ रणनीति बनाई जा सके।

'व्ही
'व्ही अंग्रेजी वर्णमाला का यह 22वां अक्षर है। जिस जातक के नाम का प्रथम अक्षर 'व्हीÓ हो ऐसा व्यक्ति ज्ञान, विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहता है। वे अपने मान-सम्मान तथा प्रतिष्ठा की रक्षा में सदैव तत्पर रहते हैं। साथ ही दूसरों के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाते। समाज तथा सभा सोसायटी में सदैव आदर पाते हैं। इनके कार्यों की ओर लोग विशेष ध्यान देते हैं। उनके द्वारा किये जा रहे सत्कार्यों की हृदय से सराहना की जाती है। जीवन में कोई भी जटिल कार्य व पेचीदा मसला हो, ये चुटकियों में हंसते हंसते युक्तिबल से सुलझा देते हैं। इनके व्यक्तित्व की खूबी होती है, दूसरों को अपने व्यवहार से प्रभावित कर अपना बना लेना। प्रबल आत्मविश्वास और कर्मठता तथा दूरदर्शिता को अपनाकर ऐसे मानव समाज में आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो ये समाज के पथ प्रदर्शक के रूप में जाने जाते हैं। विशिष्ट नायक- स्वामी विवेकानंद, महारानी विक्टोरिया, वास्कोडिगामा, केसर विल्हेम। शक्ति मंत्र- इंसान स्वभाव से सामाजिक है। इसलिए शक्ति, सामाजिक आदान-प्रदान और व्यवहार पर निर्भर होती हैै। लोगों से मेलजोल बढ़ाएं, पुराने सहयोगी खोजें, नए साथी बनायें और अलग अलग समूहों में जाएं। शक्तिशाली लोग सदियों से इस तकनीक पर चलते आ रहे हैं। अगर सम्प्रेषण और बुद्धि से आपका नाता खत्म हो जायेगा, तो आपका प्रभा मण्डल निस्तेज हो जावेगा और आप अस्तित्वहीन हो जाएंगे।

'डब्ल्यू

'डब्ल्यू अंग्रेजी वर्णमाला का यह 23 वां अक्षर है। जिस जातक के नाम का पहला अक्षर 'डब्ल्यूÓ होता है- वे बुध से प्रभावित विद्वान, परिश्रमी, धैर्यवान तथा कर्मठता के लिए जाने जातेे हैं। वे जोखिम भरे कार्यों को करने में हिचकिचाते नहीं वरन आनंद का अनुभव करते हैं। जोखिम उठाने में ऐसे व्यक्ति सिद्धहस्त होते हैं। लेखन विद्या में अग्रणी, सेना में उच्च पदों पर और तंत्र मंत्र में भी विशेषज्ञ माने जाते हैं। रोमांचक कार्यों के करने में उल्लासित होते हैं। ये बेहद फुर्तीले होते हैं। इस शब्द से प्रभावित विश्व के अनेक राजनैतिक, साहित्यिक और सेना के उच्च पदों पर आसीन व्यक्ति इतिहास के सुनहरे पन्नों में पढ़े जा सकते हैं। आलस्य इनसे दूर भागता है। हर क्षण, हर बात और हर कार्य को चुनौती के रूप में स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं। परिवर्तनशीलता इनके जीवन की विशेषता मानी जाती है। समय के अनुसार इनका चरित्र रहस्यमयी पगडंडियों मेंं विचरण करता यदाकदा इन्हें युग पुरुष भी बना देता है। यह किसी से हार नहीं मानते। किसी के सामने झुकना पसंद नहीं करते अपितु सामने वाले को झुकाने में अपना पूरा जोर लगा देते हैं। विशिष्ट नायक- राष्ट्रपति विल्सन, विन्स्टन चर्चिल, वाल्टेयर, विलियन वर्ड्सवर्थ, सर वाल्टर स्कार्ट। शक्ति मंत्र- एकाग्रता को बिखराव से ज्यादा मूल्यवान मानें। पूर्णता संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता में होती है। बहुत से काम करने में लगने वाला व्यक्ति कभी औसत से ज्यादा ऊपर नहीं उठ पाता है। बहुत ज्यादा रुचियों वाले लोगों का दुर्भाग्य यह होता है कि वे हर मामले में हाथ तो डालते हैं, लेकिन उनकी पकड़ किसी में नहीं होती। एकाग्रता से ऊंचा स्थान मिलता है और इससे इंसान बहुत ऊंचाई पर पहुंच जाता है।

'एक्स

'एक्स अंग्रेजी वर्णमाला का यह 24 वां अक्षर है। जिस व्यक्ति के नाम का पहला अक्षर 'एक्सÓ हो तो ऐसे जातक झूठ तथा आडम्बरों के दिखावेपन पर विश्वास करते हैं। वास्तविकता में ये सत्य से कोसों दूर होते हैं। लापरवाही और घनिष्ठता से इनकी गहरी मित्रता होती है। ये वाचाल प्रवृत्ति के शेखी बघारने वाले तथा बढ़ चढ़कर बातें बनाने मेें ये माहिर होते हैं। किसी भी कार्य या बात के प्रति येे जिम्मेदारी प्रदर्शित नहीं करते। जिम्मेदारी से इनकी जन्मजात शत्रुता रहती है। भाग्यवश, ग्रहों की अनुकूलता और अपनों के सहयोग से अपनी प्रौढ़ावस्था में इनके जीवन में कुछ विशेष चमक दिख जाये, तो इन्हें दूर से ही नमन् कीजिए। प्रमुखत: आलस्य इनका आभूषण है। वाणी की विश्वसनीयता यदाकदा इनके लिए कष्टदायिनी बन जाती है। विशिष्ट नायक- जोबियर (एक्सपीयर) शक्ति मंत्र- समाज द्वारा लादी गई भूमिकाओं को स्वीकार न करें। एक नई पहचान बनाकर खुद को नये सांचे में ढालें। अपनी एक ऐसी पहचान बनायें, जिसकी तरफ लोगों का ध्यान जाए। दूसरों की बनाई छवि के हिसाब से जीने से बेहतर यह है कि आप अपनी छवि खुद बनाएं। अपने सार्वजनिक कार्यों और मुद्राओं में नाटकीय तरीकों का प्रयोग करें। इससे आपकी शक्तिबढ़ेगी और आपका कद जिन्दगी से बड़ा नजर आयेगा।

'वाई
'वाई अंग्रेजी वर्णमाला का यह 25वां अक्षर है। जिस जातक के नाम का प्रथम अक्षर 'वाईÓ हो तो ऐसे व्यक्ति आत्मकेन्द्रित होते हैं। वे अपने आप में खोये रहते हैं और अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं। जब ये जाग जाते हैं तो विश्व को अपनी संगठन क्षमता से चमत्कृत कर जाते हैं- यासर अराफात भी एक ऐसा जीवट इतिहास पुरुष बना, जिसने अपने बुलन्द इरादों से विश्व के राजनैतिक रंगमंच पर तहलका मचा दिया। ऐसे व्यक्तिअनुपम, अनूठे व्यक्तित्व के धनी होते हैं। विश्व जनमानस को अपने कृत्यों द्वारा प्रभावित करने में ये सफल भी होते देखे गए हैं। दार्शनिक रंगमंच पर भी विश्वस्तरीय साहित्यिक रचनाकारों ने अपनी लेखनी से जनमानस को उद्वेलित कर रखा है। भौतिक दृष्टि से ऐसे जातक भले ही उद्योगपतियों की तुलना में कुछ कमजोर दिखें- किन्तु समृद्ध सामाजिक पृष्ठभूमि इनके अभिनन्दन के लिए पलक पावड़े बिछाये खड़ी रहती है अथवा साहित्यकार के रूप में अद्भुत गं्रथों के सर्जक बन मानवीय चेतना को झंकृत कर देने में सक्षम होते हैं। विशिष्ट नायक- अमर संगीतकार योहेन सेबेस्टियन (जर्मनी), यूजीन फील्ड (कवि), यासिर अराफात। शक्ति मंत्र- शक्ति काफी हद तक दिखावे पर निर्भर करती है, इसलिए आपको ऐसी तरकीबें सीखना चाहिए, जिससे आपकी प्रतिष्ठा बढ़े। शक्तिका यह आभा मण्डल समय के साथ बढ़ता जाता है। शक्ति हमेशा परिवर्तनशील होती है। यह आपको धैर्य और आत्मनियंत्रण सिखाती है। आवश्यकता पडऩे पर अगर आप समर्पण कर देते हैं, तो लगभग हमेशा जीत आपकी होती है।

'जेड
'जेड अंग्रेजी वर्णमाला के गणनाक्रम में यह अन्तिम अक्षर है। जिस जातक के नाम का प्रथम अक्षर 'जेडÓ से प्रारंभ होता हो, वे तुनक मिजाक तथा जल्दबाज देखे गए हैं। ये पक्के स्वार्थी तथा जिद्दी होते हैं। इनके मित्रों की संख्या नगण्य किन्तु शत्रुओं की लम्बी कतार इनके जीवन के आसपास नजर आयेगी। इनकी शत्रुता चिरस्थायी होती है। वे क्रोधी, बदमिजाज तथा अविवेकी होते हैं, किन्तु कूटनीति के क्षेत्र में, ये विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं। विवाद की कोई भी समरभूमि हो तथा राजनैतिक परिदृश्य में अच्छे अच्छों की पृष्ठभूमि में उच्चकोटि के आविष्कारक होंगे। न्यायालयीन क्षेत्र में न्यायाधीश के गरिमामय पद पर हों या अपनी लाजवाब युक्तियों से पैरवी करते हुए एडवोकेट की भूमिका में हों, तार्किक लहजा, इनकी उपस्थिति को गरिमामय बना देती है। विशिष्ट नायक- पारसी धर्म के प्रवर्तक जरथुष्ट। शक्तिमंत्र- यह जान लें कि चाहे व्यक्ति कितना ही महत्वहीन या छोटा हो, वह कभी न कभी काम आ सकता है। लेकिन अगर आपने उसका कभी अपमान किया, तो वह आपके काम नहीं आयेगा। गलतियों को अक्सर माफ कर दिया जाता है, लेकिन अपमान को कभी माफ नहीं किया जाता। सत्यता का परिदृश्य युगान्तकारी होता है और मानवीय चेतना को जगाने वाले युग पुरुष का अवतरण जनमानस को पुलकित कर देता है।


पंडित पी.एन. भट्ट

अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य, हस्तरेखा विशेषज्ञ एवं अंकशास्त्री
जी-4/4, जीडीए कॉलोनी, गोपालगंज
सागर (मप्र), मोबाइल : 9407266609
फोन: 07582-223168,227159
ईमेल : panditp.nbhatt999@yahoo.com


-------------------------------------------------------

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

जीवन से निराश न हों, उपाय करें

हर जातक जीवन में प्रयास करता है कि हमें यश, वैभव, कीर्ति, धन संपदा व वो सारी खुशियां मिलें जो हम चाहते हैं, लेकिन जब दुर्भाग्य साथ लगा होता है तो जातक परेशान व चारों ओर संकट से घिर जाता है। ऐसे में उसे कोई उपाय नहीं सूझता कि आखिर हम क्या करें जिससे सब कुछ अच्छा हो जाए। समाज में मान-प्रतिष्ठा मिले, परिवार में शांति अमन-चैन रहे और धन-संपदा की कभी कमी न होकर किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। अगर नीचे लिखी समस्याएं आपके साथ हैं तो हम आपको बेहतरीन एक उपाय बताएं जिससे आप सुख व शांति से समय व्यतीत कर अपने जीवन का हर लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।

ये हैं आपकी समस्याएं-
- क्या आप अपने जीवन से तंग आ चुके हैं?
- क्या आप धन की कमी से परेशान हैं?
- क्या आप पारिवारिक कलह से झुंझलाहट व क्रोध में रहते हैं।
- आप बच्चों की शादी से संकट में हैं?
- क्या आप कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर थक चुके हैं?
- क्या आपके ऊपर या परिजनों पर बुरी नजर लगी है?
- क्या आप हमेशा भाग्य को दोष देते रहते हैं?
- क्या आपका व्यापार-धंधा, उद्योग ठप है?
- क्या आपको नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल रहा?
- क्या आप किसी को अपने वश में करना चाहते हैं?
- क्या आपकी जमीन, जायदाद जबरन हड़प ली है?
- क्या आप कोई नई नौकरी की तलाश में हैं?
- क्या आप एक अच्छा इंसान बनना चाहते हैं?
- क्या आपको मकान बनवाने में कई अड़चनें आ रही हैं?
- क्या आप अपनी धर्मपत्नी से परेशान हैं?
- क्या आप अपने पति की बुरी आदतें सुधारना चाहती हैं?
- क्या आपका बच्चा/बच्ची गुम हो गया है और सब प्रयासों
के बावजूद वह नहीं मिल रहा है।
- क्या आप लव-मैरिज करना चाहते हैं?
- क्या आप अपनी सास को सुधारना चाहती हैं?
- क्या आपका कहना आपके बच्चे नहीं मानते?
- क्या आप अपने बच्चों को परीक्षा में अच्छे नंबर दिलाना चाहते हैं?
- क्या आप बार-बार दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं?
- क्या आपके घर में बार-बार दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं?

एक उपाय जो बदल देगी आपकी किस्मत



हर धार्मिक ग्रंथ में एक ही उपाय बताया गया है कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। ईश्वर सब जानता है। लेकिन जब दुर्भाग्य साथ जुड़ जाता है तो जातक कुछ नहीं कर पाता। कई वर्षों के शोध एवं अनुसंधान से हमारे संस्थान ने एक उच्चकोटि का तंत्र (ताबीज) स्वर्णभस्म, पारा एवं 18 अन्य बहुमूल्य चीजों से निर्मित किया है। यह तंत्र (ताबीज) प्राण-प्रतिष्ठित किया हुआ है, जिसका प्रभाव जिंदगी भर रहता है। इसके गले में धारण करने से आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाएगा। इसके धारण करते ही आप इसका प्रभाव स्वयं देख सकते हैं। यंत्र की न्यौछावर मात्र 501 रुपये (सामान्य) एवं 1100 रुपये (स्पेशल) है।
नोट - तंत्र (ताबीज) पहनकर किसी के निधन, उठावनी, क्रियाक्रम संस्कार में नहीं जाना है, न ही शवयात्रा के पास से गुजरना है।


चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान
एमआईजी-3/23, सुख सागर फेस-2
नरेला शंकरी, भोपाल- 462023 (मप्र)
ईमेल : panditraj259@gmail.com
मोबाइल नं. + 91-9302207955

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

हर घंटे गुम हो रहे हैं 12 बच्चे

भारत के ये आंकड़े सचमुच डरावने हैं. इन गुम बच्चों को या तो बेगार करने में लगा दिया जाता है या फिर अवैध धंधों में. बड़ी तदाद में बच्चों को देह व्यापार के घृणित पेशे में भी झोंक दिया जाता है.


पिछले सप्ताह बुरी तरह घायल हालत में अस्पताल लाई गई दो साल की मासूम बच्ची फलक की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है. बुरी तरह पीटने से उसके सिर में गंभीर चोटें आई हैं. उसका एक हाथ टूटा हुआ है और चेहरे को भी दागा गया है. डॉक्टर उसे बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

सबसे खराब हालत देश की राजधानी दिल्ली की है. यहां हर दिन दर्जनों बच्चे गायब हो जाते हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीते चार महीनों में अकेले दिल्ली से 1600 बच्चे गायब हो चुके हैं.

कौन है जिम्मेदार

दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन चला रहे आबिद अली भी फलक की हालत जानने अस्पताल पहुंचे. उनका कहना है, "मैं मां बाप की हालत समझ सकता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि वह अच्छी हो जाए. दो साल पहले मैंने भी अपनी बच्ची खोई है और पुलिस ने उसे खोजने के लिए कुछ नहीं किया."

कुछ इसी तरह की कहानी पश्चिमी दिल्ली में मकान बनाने का काम करने वाले राजकुमार सिंह की भी है. उनका 13 साल का बेटा हरि जून 2010 से लापता है. वह स्कूल के लिए घर से निकला लेकिन लौटा नहीं. बेटे के गायब होने के बाद से ही राजकुमार उसे तलाश रहे हैं, "मैं 20 बार से भी ज्यादा थाने जा चुका हूं. स्थानीय पार्षद का दरवाजा खटखटा चुका हूं. स्कूल में प्रदर्शन कर चुका हूं. लेकिन मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं. मैंने स्थानीय अखबारों में विज्ञापन भी छपवाए हैं."

इसी तरह चार से 14 वर्ष के उन सैकडों हजारों बच्चों का जीवन भी अंधकारमय है जो लापता हैं. बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का मानना है कि ऐसे बच्चों से भीख मंगवाने के अलावा उन्हें बंधुआ मजदूरी और वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है. कुछ मामलो में उन्हें गैरकानूनी रूप से गोद भी ले लिया जाता है.

बच्चों के अवैध व्यापार के खिलाफ काम करने वाले संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के प्रमुख आरएस चौरसिया डॉ़यचे वेले से बातचीत में कहा, "यह बहुत अच्छी तरह संगठित गिरोह है. वे बच्चों को ऐसी जगहों पर रखते हैं, जहां कोई पहुंच ही नहीं सकता है. कई बच्चों को मानव अंगों की तस्करी, गैरकानूनी ढंग से गोद लेने और भीख मांगने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है."

अपहरण की राजधानी

दिसंबर 2011 में प्रकाशित रिपोर्ट मिसिंग चिल्ड्रन इन इंडिया में देश भर के 392 जिलों से गुम हुए बच्चों का आंकड़ा शामिल किया गया है. जनवरी 2008 से 2010 के बीच देश भर से एक लाख 20 हजार बच्चों के लापता होने जानकारी है. इसी दौरान अकेले दिल्ली से 13,570 बच्चे गायब हुए हैं. यह जानकारी मानव अधिकार संगठन, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और विभिन्न संगठनों के एकत्रित आंकड़ों के आधार पर जुटाई गई है.

बीबीए के कैलाश सत्यार्थी के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह कि इन मामलों की जांच और रोकथाम के लिए जिम्मेदार एजेंसियां ही इसके प्रति गंभीर नहीं हैं.

उधर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि यहां कई संगठित गिरोह बच्चों की तस्करी में जुटे हैं. लापता बच्चों में बड़ी संख्या उनकी भी है जो सामाजिक, आर्थिक या दूसरे कारणों से घर छोड़ कर चले जाते हैं. हालांकि वे ये नहीं बता पाए कि बीते वर्षों में कितने बच्चे घर लौटे.

बाल अधिकार संरक्षण के राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष शांता सिंह के अनुसार, "बच्चों के मामलों को लेकर और अधिक गंभीर होने की जरूरत है. इसका एकदम अभाव है."

भारत गर्व करता है कि उसकी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं की है. निश्चित ही यह एक आर्थिक और सामाजिक शक्ति है. लेकिन दुर्भाग्य से वहां जहां बच्चों और खास कर लड़कियों का जीवन छोटा है.



रिपोर्टः मुरली कृष्णन/जे व्यास

नया डिजाइन, नया प्लेटफॉर्म और भरोसेमंद सूचना



नए कलेवर में DW के प्रोग्राम और वेबसाइट: नया डिजाइन लेकिन पहले की ही तरह नए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टीवी प्रोग्राम के साथ भरोसेमंद सूचना.


डॉयचे वेले सोमवार 6 फरवरी 2012 से अपनी नई वेब आईडी www.dw.de, नए कॉरपोरेट डिजाइन और नए टेलीविजन प्रोग्राम के साथ उतर रहा है. DW महानिदेशक एरिक बेटरमन का कहना है, "ये परिवर्तन दुनिया में जर्मनी की बेहतर मीडिया उपस्थिति के लिए मील का पत्थर है."

जर्मनी के विशेषज्ञ के रूप में DW की जिम्मेदारी है महत्वपूर्ण घटनाओं और विकास पर नजर रखना, उनकी व्याख्या और विश्लेषण करना. DW के सभी प्रोग्राम में इस जिम्मेदारी पर ध्यान दिया जा रहा है.

dw.de - नेट में नया पता



नई वेबसाइट पर DW के सभी प्रोडक्ट को शामिल किया गया है. चाहे वह टेक्स्ट हो, वीडियो या ऑडियो या इंटरएक्शन हों. महानिदेशक बेटरमन, "वेब आईडी dw.de का मतलब 30 भाषाओं में जर्मनी से भरोसेमंद सूचना और उच्चस्तरीय पत्रकारिता है. नए रंग और सामयिक डिजाइन पोर्टल को दोस्ताना चेहरा देते हैं."

नई वेबसाइट पर आप भरोसेमंद इंटरएक्टिविटी का मजा ले सकेंगे. सामग्रियों का संयोजन विषयों के हिसाब से किया गया है और सभी पन्नों पर उन्हें यूजर के मनमाफिक ही पिरोया गया है. नया पेज सामयिक मुद्दों पर कई भाषाओं में तस्वीरों, वीडियो और विस्तृत जानकारी के लिए अधिक जगह देता है.

मीडिया सेंटर DW का मीडियाथेक है और एक लिंक के जरिए वेबसाइट पर सीधा जुड़ा हुआ है. यूजर यहां DW मल्टीमीडिया लाइब्रेरी से सीधे वीडियो, ऑडियो और फोटो गैलरी डाउनलोड कर सकते हैं.

नई मल्टीमीडिया ब्रैंडिंग



इंटरनेट और टीवी पर अपने नए ऑफर के साथ डॉयचे वेले नया कॉरपोरेट डिजाइन भी ला रहा है. महानिदेशक बेटरमन का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा देश विश्व जनमत बनाने में हिस्सेदारी चाहते हैं और अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचना चाहते हैं. "इस लिहाज से नई ब्रैंडिंग अंतरराष्ट्रीय मीडिया बाजार में सफल उपस्थिति के लिए जरूरी निवेश है." बहुत से नए तकनीकी प्लेटफॉर्म और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल भी मल्टी मीडिया ब्रैंडिंग चाहते हैं, जिसे जल्दी से खोजा जा सके और जो विशेष हो.

डॉयचे वेले ने अपनी छवि इसके अनुरूप ढाल ली है. उसने अपने लोगो में परिवर्तन किया है. नया लोगो उसकी पत्रकारिता को व्यापकता में पेश करता है, माध्यम से परे सभी महाद्वीपों पर और सभी भाषाओं में.

नई टेलीविजन पेशकश



टेलिविजन में भी अब DW नए चैनल और नई साज सज्जा वाले कार्यक्रम ला रहा है. पहले की ही तरह प्रोग्राम में समाचारों की दुनिया से महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलेंगी. इसके अलावा विभिन्न मुद्दों पर मैगजीन, रिपोर्ताज और दस्तावेजी फिल्में भी पेश की जाएंगी. जर्मन, अंग्रेजी, स्पैनिश और अरब भाषाओं में टीवी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी 6 फरवरी से www.dw.de/tv पर उपलब्ध है.

जर्मनी के विदेशी टेलीविजन प्रसारण के व्यापक सुधारों के केंद्र में है. नए भाषाई चैनलों, क्षेत्रीय कार्यक्रमों और माल्टीमीडिया फॉर्मेटों के जरिए इलाके के दर्शकों तक बेहतर पहुंच. 6 फरवरी 2012 से DW लैटिन अमेरिका के लिए अपने टेलीविजन प्रोग्राम को 2 घंटे से बढ़ाकर 20 घंटे प्रतिदिन कर रहा है. मुख्य कार्यक्रम अंग्रेजी में 24 घंटे प्रसारित किया जाएगा, जिसे एशिया, अफ्रीका, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा. जर्मन, अंग्रेजी, स्पैनिश और अरब भाषाओं में टेलीविजन प्रसारण के अलावा DW ने बहुत सी अन्य भाषाओं में टीवी मैगजीन का प्रोडक्शन शुरू किया है. इन भाषाओं में हिंदी भी शामिल है.

रिपोर्ट: बिरगिट गौएर्त्स/मझा

संपादन: ईशा भाटिया

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

सुप्रीम कोर्ट 2जी के 122 लाइसेंस रद्द किए

नई दिल्ली। पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए . राजा के खिलाफ केस की मंजूरी का मसला लंबे समय तक दबाए रखने पर सुप्रीम कोर्ट में किरकिरी झेल चुकी यूपीए सरकार दो दिन बाद फिर उसी स्थिति में फंस गई। यूपीए सरकार के पिछले कार्यकाल में जनवरी 2008 के बाद आवंटित किए गए सभी 2 जी लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए और उन्हें नीलाम करने का आदेश दिया।

सरकार के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि घोटाले में गृहमंत्री पी . चिदंबरम की भूमिका की जांच के लिए दायर सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर उसे दो दिनों की राहत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में यह मामला चल रहा है और वही इस बारे में फैसला करेगा। ट्रायल कोर्ट 4 फरवरी को फैसला सुनाने वाला है।



जस्टिस जी . एस . सिंघवी और ए . के . गांगुली की बेंच ने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की सीबीआई जांच की निगरानी के लिए एसआईटी बनाने की याचिका को खारिज कर दिया।

4 महीने में लाइसेंसों की नीलामी
सुप्रीम कोर्ट ने ' पहले आओ पहले पाओ ' के तहत मनमाने और असंवैधानिक तरीके से ए . राजा द्वारा अलॉट किए गए 2 जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द कर दिए। लाइसेंस हासिल करने के बाद अपने शेयर बेचने वाली तीनों कंपनियों पर पांच - पांच करोड़ का जुर्माना लगाते हुए कोर्ट ने टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( ट्राई ) से कहा कि वह 2 जी लाइसेंस आवंटन के लिए ताजा सिफारिशें दे। जस्टिस जी . एस . सिंघवी और ए . के . गांगुली की बेंच ने सरकार को ट्राई की सिफारिशों पर एक महीने के अंदर अमल करने और चार महीने के भीतर स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट नीलामी के आधार पर करने का निर्देश दिया।

बेंच ने यह फैसला गैर - सरकारी संगठन सीपीआईएल और जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिकाओं पर दिया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में राजा ने स्पेक्ट्रम लाइसेंस अलॉटमेंट में घोटाला किया और कैग ने इससे 1.76 लाख करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान जताया है। राजा ने सिर्फ 9,000 करोड़ रुपये 122 लाइसेंस दिए , जबकि 3 जी के केवल कुछ ही लाइसेंसों की नीलामी से सरकार को 69,000 करोड़ रुपये मिले थे।

लाइसेंस रद्द होने से जो कंपनियां प्रभावित होंगी उनमें यूनिनॉर , लूप टेलिकॉम , सिस्टेमा श्याम , एतीसलात डीबी , एस टेल , विडियोकॉन , टाटा और आइडिया शामिल हैं।

चिदंबरम को दो दिन की राहत
सुप्रीम कोर्ट ने 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में गृहमंत्री पी . चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच की मांग पर फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया। सुब्रमण्यम स्वामी ने चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच के लिए सीबीआई को आदेश देने की मांग करते हुए याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं का निपटारा करते हुए जस्टिस जी . एस . सिंघवी और ए . के . गांगुली की बेंच ने कहा कि उसके आदेश से ट्रायल अदालत की कार्यवाही किसी भी तरह प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई अदालत गृह मंत्री के बारे में दो सप्ताह के भीतर फैसला करे।

गौरतलब है कि चिदंबरम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग कर रही , स्वामी की एक अलग याचिका पर सुनवाई कर रहे सीबीआई के विशेष जज ओ पी सैनी ने पहले ही अपना आदेश 4 फरवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। स्वामी ने तर्क दिया था कि वित्त मंत्री होने के नाते चिदंबरम की भूमिका 2 जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस के मूल्य तय करने में और टेलिकॉम कंपनियों द्वारा दो विदेशी कंपनियों को शेयर बेचे जाने में थी।



सीवीसी को स्टेटस रिपोर्ट देगी सीबीआई
सीपीआईएल ने ही 2 जी घोटाले की चल रही सीबीआई जांच में खामियां बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से दो - तीन विशेषज्ञों का विशेष जांच दल ( एसआईटी ) गठित करने की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जारी जांच की स्टेटस रिपोर्ट केंदीय सतर्कता आयोग ( सीवीसी ) के सामने पेश करे। सीवीसी इस मामले में कोर्ट को सहयोग करेगा। स्वामी ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश वस्तुत : एसआईटी गठन का निर्देश देने के समान है।