बुधवार, 18 जनवरी 2012

एसी कोच में सफर करना हो तो आईडी प्रूफ जरूर रखें

नई दिल्ली ।। अब रेलवे के एसी कोच में सफर करते हुए आईडी प्रूफ रखना जरूरी कर दिया गया है। रेलवे के नए आदेश के मुताबिक अगर एसी कोच में यात्रा कर रहे किसी शख्स ने आईडी प्रूफ नहीं दिखाया तो बिना टिकट माना जाएगा। रेलवे का यह नया आदेश 15 फरवरी से पूरे देश में लागू हो जाएगा। रिजर्व टिकटों की बढ़ती दलाली रोकने के मकसद से रेलवे ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ तत्काल और इंटरनेट टिकटों की यात्रा में ही आईडी प्रूफ रखने का प्रावधान था। दूसरे के टिकट पर यात्रा करने की काफी शिकायतें मिलने के बाद रेल मंत्रालय के निर्देश पर रेलवे बोर्ड ने यह फैसला किया है।

रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक 16 जनवरी इस बारे में सकुर्लर जारी कर दिया गया है और इसके मुताबिक सभी टीसी 15 फरवरी से मान्य आईडी प्रूफ की मूल प्रति नहीं दिखाने पर संबंधित यात्री को बिना टिकट मानेंगे। अधिकारी ने बताया कि यात्रियों के संबंधित ग्रुप में से किसी एक शख्स का आईडी प्रूफ दिखाना काफी होगा।

अराजक होने के लिए नहीं है फेसबुक







इंटरनेट युग में, जब हमारे इर्द-गिर्द कनेक्टिविटी और सामाजिक मेलजोल की वर्चुअल ही सही किंतु सुखद वापसी हुई है.

फेसबुक जैसे अनुप्रयोगों को आना ही था. भले ही इंटरनेट का प्रधान उद्देश्य सूचनाओं का संकलन और प्रस्तुति हो, उसके विकास के साथ दो अन्य मकसद भी जुड़े हुए हैं- संचार और मनोरंजन. यह महज संयोग नहीं है कि ईमेल जैसी आपसी संपर्क सुनिश्चित करने वाली सुविधा का विकास, सूचनाओं के महा-भंडार र्वल्ड वाइड वेब से कोई बीस साल पहले ही हो गया था. तब से चौतरफा बढ़ चुका इंटरनेट लोगों को साथ लाने में जुटा है और फेसबुक और ट्विटर उसकी इस प्रवृत्ति का स्वाभाविक विस्तार है.

युवाओं में फेसबुक का लोकप्रिय होना उतना ही स्वाभाविक है जितना इंटरनेट का पसंद किया जाना. वे तकनीक के प्रति स्वाभाविक लगाव रखते हैं, उससे बचते या भागते नहीं. स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों के जिस दौर का वे हिस्सा हैं, उसमें मौज-मस्ती, दोस्ती, उत्सव, उल्लास, रूमानियत और शरारत एक किस्म की अनिवार्यता है. नए लोगों की तलाश और पुरानों से प्रगाढ़ता यौवन का स्वाभाविक लक्षण है. जिस तरह गूगल ने सूचनाओं को उंगलियों पर ला दिया है, उसी तरह फेसबुक, ऑरकुट, गूगल-प्लस और माईस्पेस व्यक्तियों को उनकी पहुंच और खोज के दायरे में ले आए हैं.

दूसरी तरफ तकनीक की अपनी अनिवार्यताएं हैं जो लोगों से जुड़ने के लिए उसी तरह आतुर हैं जैसे कोई भी जनोपयोगी उत्पाद अपने प्रयोक्ताओं तक पहुंचने के लिए होता है. लोगों से जुड़ाव उसकी स्थिरता, विकास और यहां तक कि अस्तित्व के लिए भी जरूरी है. कभी वह ब्लॉग, यू-ट्यूब की तर्ज पर यूजर जेनरेटेड कं टेंट जैसे रचनात्मकता के मंच पेश करती है तो कभी फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग के ठिकाने. फेसबुक अपने उपयोक्ताओं को पहचान भी मुहैया कराता है और फटाफट नई चीजें, नए लोग खोजने की प्यास भी बुझाता है. आश्चर्य नहीं कि आज हर पांच में से चार युवा फेसबुक के दीवाने हैं.

देखा जाए तो आज के दौर की जरूरत है फेसबुक. ऐसे दौर की, जिसमें दूरियां अप्रासंगिक हो गई हैं. यह अप्रासंगिकता सिर्फ भौगोलिक स्तर पर ही नहीं है, व्यक्तियों के स्तर पर भी है. लोग बीस-पच्चीस साल पुराने मित्रों को ढूंढ़ने में जुटे हैं. किसी जमाने की निष्ठुर प्रेमिकाएं और मुंह मोड़ कर चले गए बेमुरव्वत प्रेमी चुपके से एक-दूसरे के प्रोफाइल और फिर वॉल पर निगाह डाल लेते हैं. टूटे हुए पुराने धागे जुड़ रहे हैं. सामाजिकता और संबंधों के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं. पद, प्रतिष्ठा और रु आब की दूरियां भी धूमिल पड़ रही हैं.

आपसी संपर्क के ऐसे मंच खड़े हो रहे हैं जो पहले कभी संभव न थे. जब बराक ओबामा तीसरी दुनिया के किसी अनाम युवक से और सलमान रुश्दी दुनिया के सुदूर कोने में अपने किसी युवा प्रशंसक के मित्रों में शामिल हो जाते हैं तो मन के कैसे अजीब से रिश्ते बनते हैं! क्या औपचारिकताओं से मुक्त यह फेनोमेना एक किस्म का वर्चुअल साम्यवाद नहीं है जो सबको साथ खड़ा कर देता है- अनंत तकनीकी वि के समान नागरिक.

कुछ दशक पहले इसी किस्म की क्रांति रेडियो और टेलीविजन के जरिए हुई थी. वह मनोरंजन की प्रधानता का दौर था. धीरे-धीरे सबके लिए मनोरंजन ही प्रधान हो गया. खेल-कूद, मेल-जोल, टहलना-दौड़ना, रु चियों को निखारना, पढ़ाई-लिखाई जैसी बाहरी गतिविधियां ठप होने लगीं. लोग एक स्क्रीन के सामने उस अंदाज में जमने लगे जैसे कोई कर्त्तव्यनिष्ठ सैनिक परेड के दौरान तैनात खड़ा होता है. खैर मनाइए कि इंटरनेट के आने से असामाजिकता के उस दौर से कुछ हद तक मुक्ति मिली है. लोग संबंधों की ओर लौट रहे हैं, भले ही प्रतीकात्मक तौर पर ही सही. हां, टेलीविजन स्क्रीन के समय में हुई कटौती का एक हिस्सा कंप्यूटर की स्क्रीन पर बीतने लगा है, यह सच है. लोग मैदानों और थिएटरों में लौटे नहीं हैं, लेकिन एक-दूसरे के करीब जरूर आए हैं.

करीब आने के कुछ दूसरे अर्थ भी हैं. फेसबुक ने सबका काम आसान कर दिया है, ऐसे युवकों का भी जो किसी निहित मकसद को लेकर इंटरनेट के महासमुद्र में सर्फिंग करने आते हैं. वे साइबर क्राइम, ब्लैकमेल, स्पैमिंग (अंधाधुंध अनचाहे संदेश और मेल), युवतियों और बच्चों के साथ छेड़छाड़, धोखाधड़ी, निजी सूचनाएं चुराने और अश्लील चित्र तथा वीडियो पोस्ट करने में लगे हैं. ऐसे युवकों को समझाना-बुझाना, यहां तक कि उन तक पहुंचना और पहचानना भी बहुत मुश्किल है क्योंकि एक तो इंटरनेट सीमाओं से मुक्त है इसलिए कोई भी कहीं भी पहुंच सकता है, और दूसरे यहां आपके लिए अपनी पहचान उजागर करने की मजबूरी नहीं है. अपना चेहरा छिपाते हुए भी आप अपना एजेंडा पूरा कर सकते हैं. दूसरों की पहचान चुराने, लोगों को बदनाम करने का सिलसिला भी खूब चलता है.

बहुतों के लिए फेसबुक एक ओवरडोज हो गया है. एक लत. सुबह-शाम, रात-दिन, घर-दफ्तर, स्कूल-कॉलेज, मोबाइल-कंप्यूटर.. सर्वत्र फेसबुक. एक तरफ वे हजार फेसबुक मित्रों से जुड़े हैं लेकिन असली दुनिया में मित्रों, रिश्तेदारों और दोस्तों से अलग-थलग पड़ रहे हैं. बहुत बड़ा विरोधभास है किंतु यही तो सच है. सामाजिकता के नए द्वार खोलने वाली सोशल नेटवर्किंग कहीं न कहीं उन्हें अकेला भी बना रही है. भीड़ के बीच, किंतु निपट अकेले. तय आपको करना है कि आप किस तरफ हैं.

युवक चाहें तो सामाजिकता के इस विस्फोटक माध्यम का सकारात्मक इस्तेमाल कर सकते हैं. करिअर के नए अवसर के लिए ऐसे लोगों से संपर्क कीजिए जो आपका मार्गदशर्न कर सकें. अपने क्षेत्र में नई जानकारियों के साथ अपडेट रहने के लिए विशेषज्ञों तक पहुंचिए. किसी अच्छे काम के लिए ग्रुप बनाकर जुटिए. समान विचारों, रुचियों और मकसद वाले युवक-युवतियों को साथ लाइए और कुछ अच्छी योजनाएं बनाइए. इसे खबरों को पाने और देने का जरिया बनाइए. पुराने दोस्तों को साथ लाकर मेल-जोल का ऑनलाइन-ऑफलाइन सिलसिला शुरू कीजिए.

सामूहिक परियोजनाएं शुरू कीजिए. न जाने कितनी बड़ी परियोजनाएं फेसबुक पर ही शुरू, विकसित और सम्पन्न हो रही हैं. फिल्मों के कॉन्सेप्ट्स विकसित करने से लेकर उनके लिए फंडिंग इकट्ठा करने और कलाकारों के चयन से लेकर निर्माण तक में फेसबुक कोई न कोई भूमिका निभा रहा है. सोशल मीडिया आज पब्लिसिटी और कारोबार का जरिया भी बन रहा है. खबरों का वैकल्पिक स्रेत तो वह है ही, खासकर उन खबरों का जिन्हें मुख्यधारा के मीडिया में जगह नहीं मिलती.

फेसबुक हो या बेबो, ऑरकुट हो या गूगल-प्लस, ये यौवन की उमंगों और उल्लास को बढ़ाने वाले अनुप्रयोग हैं. भला ये किसी अन्य के लिए भी कोई समस्या क्यों बनें! इंटरनेटीय लोकतंत्र में सबको अवसर पाने का हक है. यहां मौज-मस्ती जरूर कीजिए, नए लोगों से दोस्ती भी कीजिए. लेकिन सब कुछ सीमाओं में रहते हुए, अपनी मर्यादा खोए बिना. यह मत भूलिए कि संबंध किसी पर थोपे नहीं जा सकते. और हां, फेसबुक भी हमारे सामाजिक जीवन का ही दर्पण है. इस ऑनलाइन समाज में भी आप और हम हैं, वहां भी सामाजिक जीवन के मूल्यों और गरिमा का सम्मान है. कोई भी माध्यम अराजक होने की अनुमति नहीं देता, फेसबुक भी नहीं.

बालेन्दु शर्मा दाधीच
लेखक

सोमवार, 16 जनवरी 2012

भाग्य का प्रतिबिम्ब : अंक ज्योतिष




अंक शास्त्र, यह एक स्वयंपूर्ण ज्योतिष शास्त्र है। अंक शास्त्र द्वारा आपको मानव जीवन का पूरा भविष्य और उसकी विशेषताओं का ज्ञान होता है। अंक शास्त्र (गणित शास्त्र) और ग्रहों का एक अट्टू संबंध है। अंक में एक तरह का जादू है। यह उसका ज्ञान प्राप्त करने से प्रतीत होता हैै। अंक शास्त्र, आत्मा है, गणित की। प्रत्येक अंक पर विशिष्ट ग्रहों का प्रभुत्व रहता है और उसके अनुसार जीवन में हमेशा शुभ-अशुभ घटनाक्रम घटित होते रहते हैं। अंकों के अन्दर छिपा भविष्य मानव को बराबर प्रभावित करता रहता है। नौ ग्रह नौ अंकों के आयाम हैं। अंकों का महत्व आर्य साहित्य की प्राचीन परम्परा है। कुछ उसमें वैज्ञानिक रहस्य हैं।



आचार्यों का मत है कि 25 दानों की माला से जप करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती हैै। 30 दानों की माला से जप करने पर धन की तथा 27 दानों की माला से जप करने पर सर्वसिद्धि एवं 54 दानेां की माला से जप करने पर सर्वाकांक्षा पूर्ति और 108 दानों की माला से जप करने पर सिद्धियां स्वयं समीप आ बैठती हैं। योगियों और धर्मगुरुओं के नाम के आगे 108 या 1008 अवश्य ही लगा होता है, जिनका योगफल भी 9 होता है। सूर्यादि नव ग्रह, बारह राशियों में भ्रमण कर सबको प्रकाश देते हैं। अत: 12ग9=108=1$8=9 दिन और रात्रि में श्वासों की संख्या 21600 है। यह भी 2$1$6$0$0$0=9 संख्या है। जिसमें सुषुम्ना के श्वास 108 हैं। नाडिय़ों की संख्या 7200 है, यह भी 7$2$0$0 = 9 अंक हुई। यह 9 संख्या प्रकृति के तत्व को दर्शाती है। मानव इस जगत में जन्म धारण करके जन्म कुण्डली की बारह राशि के 9 ग्रहों से सदा आवृत्त रहता है। नक्षत्र भी 27 है - 2$7 = 9 अर्थात् पूर्ण ब्रह्माण्ड भी 9 अंक से नापा गया है। यह संख्यावाची परम्परा आर्य साहित्य का गरिमापूर्ण संकेत है। उभयपक्ष इसमें अन्तर्हित है। यह सुख-दुख की अवन्ति भी है। विफलता भी - सफलता भी, विनाश भी - निर्माण भी, चार युग, चैदह भुवन, तीन लोक, सप्त पदी, दुर्गा सप्तशती, इस प्रकार अंक साहित्य का आलोक प्रकाश पुंज सर्वत्र आलोकिक है। हमारे महर्षियों ने गहन अध्ययन-मनन एवं चिन्तन के बाद अंकों का महत्व समझा और उसे अपनाया था। भगवत् गीता में 18 अध्याय ही क्यों है? महाभारत में 18 पर्व ही क्यों लिखे गये ? 18 पुराणों की संख्या का वैज्ञानिक आधार क्या है? मनुष्य की प्रखर विचारशीलता ने उस पर गणित के रहस्य प्रकट किये या उसकी अतृप्त जिज्ञासा शब्द से भिन्न अंक के क्षेत्र से दिग दिगन्त तक जा पहुंची। उसका पुरूषार्थ और भाग्य दोनों का समन्वित फल है। मूलत: प्रकृति, संख्या के स्तर पर कार्य करती है किन्तु संख्या भी एक-दो, या चार, पांच के रूप में नहीं बल्कि वृत्त और कोण के रूप में ज्यामितीय स्तर पर। वृत्त, बिन्दु का प्रतीक है, जो संख्या में सूर्य का बोध कराता है और कोण संख्याओं का। वह संख्याओं के साथ जुड़कर ही अपनी शक्ति एवं व्यक्तित्व को प्रकट कर पाता है।
संख्या का दार्शनिक पक्ष: विश्व की उत्पत्ति और अन्त शून्य से ही है। शून्य, ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए अंकीय निर्मिती ÓÓ से ही मानी जाती है। विश्व की हलचल का केन्द्र बिन्दु ÓÓ ही है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में छोटी-बड़ी आपदा, विपदा और झंझावातों का प्रभाव तो पड़ता ही है, जिन्हें अंक शास्त्र द्वारा जान सकते हैं। अंक शास्त्र 1 से 9 अंक, आकाश के 9 ग्रहों के गुण, विशेषताओं के अनुसार बांटे गए हैं और उनका प्रभाव सभी जीवों पर जीवनपर्यन्त निश्चित रूप से पड़ता है। आप अपना मूलांक और भाग्यांक बहुत ही आसान, विधि से जान सकते हंै। मान लो किसी की जन्मतिथि 4-7-1964 है। तो सबसे पहले जन्म तिथि का योग कर लें। जन्म तिथि 4 है- कहने का अर्थ है - मूलांक हुआ 4, भाग्यांक के लिए 4$7$1$9$6$4 = 31 = 3 $ 1 = 4 अर्थात् भाग्यांक भी 4 हुआ। एक अन्य व्यक्ति का जन्म 18.8.1954 है। तो सबसे पहले जन्म तिथि का योग करेंगे। 1$8 =9 मूलांक हो गया। भाग्यांक के लिए जोड़ेंगे जन्म की तारीख, माह तथा सन् यथा 1$8$8$1$9$5$4 = 36 = 3$6 = 9 भाग्यांक हुआ = 9 उपरोक्त विधि से प्रत्येक व्यक्ति अपनी जन्मतिथि के अनुसार मूलांक और भाग्यांक को ज्ञात कर सकता है।


मूलांक और आपका भविष्य

मूलांक 1
जिस व्यक्ति का जन्म अंग्रेजी महीने की 1, 10, 19, 28 तारीख को होता है, उसका मूलांक 1 होगा। इस अंक का अधिपति सूर्य है। ग्रहराज सूर्य प्रत्यक्ष देव हैं, सब जीवों का पालन करते हैं। इनकी पूजा संपूर्ण विश्व में की जाती है। इस अंक में जन्में व्यक्ति दृढ़निश्चयी, स्वतंत्रता प्रिय, तथा नेतृत्व की जन्मजात प्रतिभा वाले होते हैं। ये बड़े परिश्रमी, लग्नशील, स्वाभिमानी तथा शक्तिशाली होते हैं। पाश्चात्य ज्योतिषियों के मतानुसार 21 मार्च से 28 अपै्रल तक तथा 21 जुलाई से 28 अगस्त तक प्रबल स्थिति में सूर्य होता है। इस कारण इस बीच जिनका जन्म हुआ हो और उनका मूलांक 1 हो तो सूर्य का विशेष शुभ प्रभाव रहेगा। इनमें नेतृत्व के गुण विशेष होते हैं। इसलिए ये समाज, धार्मिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों एवं जाति के लिए कुछ नया करने में समर्थ होते हैं। ये कार्यपटु, श्रेष्ठ विचारक, सतत क्रियाशील, बात के धनी तथा अपने सिद्धातों पर अडिग रहते वाले होते हैं। झुकना ये जानते नहीं और न ही समझौतावादी इनका स्वभाव है। इनके जीवन में उत्थान पतन आते रहते हैं। तीक्ष्ण बुद्धि के ये जातक या तो स्वतंत्र व्यवसाय करते हैं- अथवा ऐसे पद पर कार्य करते हैं, जहां इनके कार्य में कोई हस्तक्षेप न करे। मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जन्मे एक सलाखा पुरूष ने गरीबी में जन्म लिया। भाग्यवश 1928 में उन्हें किसी ज्योतिषी ने कहा किसी हरे पत्ते का व्यापार करो, भाग्य बदलेगा। तेन्दूपत्ता का व्यापार किया। लीब्ज किंग कहलाये। मेसर्स बी.एस. जैन के नाम से सागर में एक फर्म बनाई। बीड़ी का कुटीर उद्योग स्थापित किया। जिसने बुन्देलखण्ड के लाखों क्षेत्रीय जनों को इस कुटीर उद्योग के माध्यम से रोजगार के साधन दिये। ऊर्जामयी कर्मठता और श्रम में विश्वास, पुण्य के परमाणुओं के उदय ने गरीबी को कब अमीरी में बदल दिया, अहसास ही नहीं कर सके और देश के श्रीमंतों की कतार में खड़े हो गये। मध्यप्रदेश के सागर जिले में सबसे अधिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। जेलों मेें गये आजादी के रण बांकुरों के परिवारों को आर्थिक मदद दी। अंगे्रज हुकूमत से मिलने वाली रायबहादुर के खिताब को लेने से इंकार कर दिया। समाज ने उन्हें श्रीमंत की उपाधि से सम्मानित किया। करोड़ों की राशि दान देने वाले दानवीर श्रीमंत सेठ भगवानदास जैन, सागर भी मूलांक 1 वाले थे। उनके ज्येष्ठ पुत्र पूर्व सांसद डालचंद जैन जीवनपर्यन्त मध्यप्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन के अध्यक्ष रहे। मूलांक 1 वाले जातकों की आकांक्षा रहती है कि मैं ही इस संस्था का अध्यक्ष बनकर इसका संचालन करूं। वह अन्तर्मुखी तथा अपने विचार सबसे छिपा कर रखते हैं। शासनात्मक प्रवृत्ति उनकी उन्नति के मार्ग में गहनतम बांधाएं और रूकावट बन कर खड़ी रहती हैं और मित्र भी शत्रु बन जाते हैं। परेशानियां इनका आभूषण बन जाती हैं। किन्तु कुछ संकल्पित व्यक्ति सभी प्रकार के संघर्षों में से निकलकर सफलता को वरण कर अपने लक्ष्य को प्राप्त लेते हैं। सूर्य के समान ही ताप से युक्त विस्फोटक और जीवन में उथल-पुथल करने वाला मूलांक 1 ही तो है। सूर्य पोषक और सखा भी है- इस मूलांक का। क्रोधावेग इनका तीव्र होता है। इनका दाम्पत्य जीवन सुखी कहा जा सकता। गृह कलह के योग कम ही बनते हैं। निरन्तर चिन्तनशील एवं लक्ष्य भेदी व्यक्ति होते हैं। हर स्थिति में ये धैर्य का दामन थामें रहते हैं। महत्वाकांक्षी होते हैं। ऐसे जातकों का व्यवहार सन्तुलित, व्यावहारिक होता है। स्वभाव अत्यंत उदार किन्तु किसी का दबाव बरदाश्त नहीं करते। आर्थिक मामलों में कंजूसी से काम लेते हैं। दूसरों को शीघ्र ही अपने विचारों से प्रभावित कर डालते हैं। आग्नेय अस्त्रों से भय, विद्युत संयंत्रों से सावधानी, अन्यथा जीवन संकट में पड़ सकता है। जीवन संघर्षपूर्ण रहता है। अपने व्यक्तित्व का स्वयं निर्माण करते हैं। युवावस्था में कुछ जातक दिल फेंक होते हैं किन्तु सामाजिक भय, प्रतिष्ठा को बचाये रखने के उद्देश्य से अपनी आदतों पर अंकुश लगाये रहते हैं। सन्तान सुख प्राप्त करते है - रक्तचाप, मधुमेह से बचने में सावधानी बरते अन्यथा वृद्धावस्था में तकलीफदेय जीवनयापन करना पड़ सकता है। आपका महत्वपूर्ण अंक 1 और 4 है। इस अंक के जातकों के लिए प्रत्येक माह के 1, 4, 10, 13, 19, 22, 28 तथ 31 तारीखें महत्वपूर्ण हैं। आपकी उम्र के 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67, 76 वां वर्ष भी शुभ हैं। अशुभ मूलांक 6 और 7 आपको सजगता, सतर्कता का अलार्म बजा रहा है- सावधान रहेे, तो आपदायें, विपदायें और झंझायें दूर से आपको सलाम करती नजर आएंगी।
रोग और मूलांक 1 जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी तब आपको डिपथीरिया, अपच, रक्त दोष, गठिया, रक्तचाप, स्नायविक दुर्बलता व नेत्र पीड़ा हो सकती है। शुभ रंग - पीला, नारंगी, सुनहरा, हरा, सलेटी रंग शुभ है। गाढ़े गहरे रंग अशुभ। हलके रंग आपके लिए शुभ हैं। शुभ दिन - आपके मूलांक का स्वामी सूर्य देव हैं। रविवार और सोमवार के दिन आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। शुभ दिशा - ईशान, वायत्व एवं दक्षिण
मूलांक 1 के जातक : स्वामी दयानंद सरस्वती-19 जुलाई, लाला लाजपत राय-28 जनवरी, इंदिरा गांधी (पूर्व प्रधानमंत्री)-19 नवम्बर 1917, चन्द्रशेखर आजाद-28 फरवरी, महाराणा प्रताप-1 जून, सिकन्दर महान-1 जुलाई, राष्ट्रपति सर गारफील्ड (यूएसए)-19 नवम्बर, राष्ट्रपति विल्सन (यूएसए) -28 दिसम्बर, प्रसिद्ध ज्योतिषी कीरो-1 नवम्बर, सेठ भगवानदास जैन (सागर)-10 अक्टूबर 1899।

मूलांक 2
किसी अंग्रेजी महीने की 2, 11, 20, 29 तारीख को पैदा होने वाले जातक का मूलांक 2 होगा। ऐसा जातक हमेशा सूर्य अंक अर्थात् 1 मूलांक का कभी विरोध नहीं करता। भयानक और जटिल परिस्थितियों में भी उसका कवच और पक्षक बना रहता है। जिस प्रकार ज्योतिष गं्रथों ने सूर्य को लोक रक्षण कारक कहकर नमन् और प्रणाम किया है- उसी प्रकार चन्द्रमा को भी अभिनंदित किया है। पाश्चात्य ज्योतिषियों के मतानुसार 20 जून से 25 जुलाई तक जिनका जन्म हुआ है और उनका मूलांक भी 2 हो, उन पर चन्द्रमा का विशेष शुभ प्रभाव रहेगा। मूलांक 2 वाला व्यक्ति, चूंकि चन्द्रमा से प्रभावित होता है। अत: वह दूसरों की पीड़ा का हरणकर्ता बनकर सहयोगी है। ऐसा व्यक्ति सूक्ष्मदर्शी, एकान्त और तन्हाई प्रिय, आलोचक दृष्टि रखता है। धैर्यशाली होने से शनै:शनै: अपने उद्देश्य की पूर्ति कर लेता है। इस अंक वाला व्यक्ति कल्पनाशील रहते हुए भी विवेकी होता है। वस्तुत: ऐसे व्यक्ति शांति प्रिय और न्यायशील होते हैं। शान्तिपुंज नीति का अनुसरण करते हैं। दुश्मनों को भी न्याय संगत परामर्श और सन्मति देते हैं। ऐसा जातक अनेक मित्र नहीं बनाता। सजग और सतर्क होकर मैत्री करता है। ऐसे व्यक्ति का क्रोध भी क्षणिक होता है। यह अपने हृदय में द्वेष और विरोध नहीं पालता। अपितु शीघ्र ही भूल जाता है। इस कारण ऐसे मूलांक वालों के स्थायी शत्रु नहीं होते- कालान्तर में शत्रु भी मित्रता की भूमिका में नजर आने लगते हैं।जो निराशा, अवहेलित, पतित, दलित और पराजित व्यक्ति होते हैं, उन्हें मूलांक 2 वाले व्यक्ति अपनत्व और प्यार के साथ अपनाते है और उन्हें प्रगति के पथ की ओर अग्रसर करने में प्रेरणादायी भूमिका का निर्वाहन करते हैं। इस मूलांक वाले जातकों का जीवन संकटमय भी रहता है। आग्नेय अस्त्रों से सावधानी। परिवर्तनशील व्यक्तित्व के धनी ऐसे व्यक्ति अच्छे समाज सेवी, राजनीतिज्ञ तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में "सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय" की भावना से राष्ट्र की सेवा करते देखे जा सकते हैं। कलाप्रेमी, प्रकृति के प्रांगण में विचरण कर प्रकृति को निहारना, काव्यमय साहित्य का सृजन, प्रणय भाव में भी लीन देखे जा सकते है, ऐसे जातक। चरित्रहीनता की रेखा पार करने में ऐसे जातक भयाक्रान्त भी रहते हैं। संकोचशील स्वभाव के कारण भीरूता भी इनके जीवन की कमजोरी होती है। यदाकदा भ्रष्ट आचरण की लक्ष्मण रेखा पार करते ऐसे कुछ जातक सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों के अपहरण में संलिप्त भी नजर आ सकते हैं।
रोग और मूलांक 2 : जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी तब आपको कमजोरी, क्षीणता, उद्वेग, मस्तक पीड़ा, छोटी-छोटी दुर्घटना, हृदय रोग, संवेदनशीलता, भावुकता, स्नायु निर्बलता, कब्जियत, आंत रोग, मूत्र रोग, गैस रोग इत्यादि हो सकते हैं। हृदय रोग, मधुमेह, जोड़ों के दर्द आदि रोगों को अंकशायनी बनाकर ऐसे जातक शतायु भले ही न हो किन्तु लम्बा दाम्पत्य जीवन अवश्य भोग लेते हैं। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना आवश्यक है। गृहस्थ जीवन के मामलों में सौभाग्यशाली माने जा सकते हैं। जीवन साथी सुन्दर, गुणवान एवं पारिवारिक दायित्वों के निर्वाहन में दूरदर्शी होता है। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष : 2, 11, 19, 20, 29, 37, 47, 57, 61 एवं 71 वां वर्ष शुभ हो सकेंगे किन्तु जीवन यात्रा में सजगता, दूरदर्शिता और स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता होनी अनिवार्य शर्त है। इस मूलांक के जातकों के लिए 1, 4 और 7 की संख्या भी शुभ है। शुभवार - सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार एवं शनिवार। शुभ तारीखें - प्रत्येक माह की 2, 7, 11, 16, 20, 25, 29 शुभ रंग - श्वेत, अंगूरी, पीला, कपूरी। शुभ दिशा - उत्तर, उत्तर-पूर्व, उत्तर पश्चिम।
मूलांक 2 के जातक - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी-2.10.1869, पूर्व राष्ट्रपति सर हार्डिंग (यू.एस.ए.) -2 नवम्बर, सुमित्रा नंदन पंत (कवि)-20 मई, विनोवाभावे (भूदान यज्ञ के प्रणेता)-11.9.1895, लाल बहादुर शास्त्री (पूर्व प्रधानमंत्री)-2.10.1904, तानाशाह मुसोलनी (इटली)-29.7.1883, सर नेपोलियन तृतीय -20 अपै्रल, एडोल्फ हिटलर-20.4.1889, मोरारजी भाई देसाई-29.2.1896, आचार्य रजनीश (शब्दों का जादूगर)-11.12.1931।

मूलांक 3
मूलांक 3 वाले व्यक्ति महत्वाकांक्षी, शासन की इच्छा रखने वाले तथा अनुशासन में कठोर होते हैं। नेतृत्व प्रिय, अधीनस्थ लोगों से भी अनुशासन में कठोर होते हैं। इनमें हुकुमत का जन्मजात गुण होता है। वाणी से कठोर, इसी वजह से इनसे जुड़े व्यक्तियों में इनके प्रति शत्रुता के भाव भी देखे जा सकते हैं। पाश्चात्य ज्योतिषियों के अनुसार जिनका जन्म 19 फरवरी से 21 मार्च तक तथा 21 नवम्बर से 21 दिसम्बर के बीच हुआ हो और उनका मूलांक भी 3 हो तो उन जातकों पर वृहस्पति का विशेष शुभ प्रभाव होगा। देव गुरू वृहस्पति -धन, विद्या, मन्त्रणा और सन्तान के कारक माने गये हैं। इन दैविक गुणों की आपमें प्रचुरता रहती है। अध्यात्मवादी गुण प्रधान हैं। नेतृत्व-प्रधान व्यक्तित्व होने के कारण इन्हें अलग से पहचाना जा सकता है। संघर्ष जीवन का आभूषण है। संघर्षरत रहकर अन्तोगत्वा अपने लक्ष्य को पा ही लेते हैं। उत्तम विचार और उत्तम चरित्र इनकी विशेषता कही जा सकती है। समयानुकूल अपने को ढ़ालने की अद्भुत क्षमता होती है। अगर गुरू कमजोर हो तो स्वार्थपरता भी बढ़ सकती है। समयानुकूल शत्रु को मित्र बना लेने में ये पटु होते हैं। 3, 12, 21, 30 इन सब अंकों का मूलांक 3 ही हैं। जिनकी जन्म तारीख का मूलांक 3 हो, उनमें परस्पर विशेष आकर्षण होता है। विभिन्न जाति, वंश, राजनीति, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितिवश आकर्षण में अन्तर अवश्य होगा, लेकिन उनकी मानसिक क्रियाशीलता एवं कार्य करने का ढंग एक सा ही होगा। मूलांक 3 वाले एक दूसरे के अच्छे मित्र हो सकते हैं। मूलांक 3 वाले व्यक्ति व्यापार की अपेक्षा बौद्धिक कार्यों में अधिक सफल होते देखे गए हैं। राजनीति में पर्याप्त यश और सफलता प्राप्त करते हैं। शासकीय सेवा क्षेत्र में ऐसे जातक उच्च पद पर बैठेगे। विदेश यात्राओं में माध्यम से उन्नति के मार्ग प्रशस्त होगेंं। वाहन से सतर्क रहना लाभदायक। एक उदाहरण द्वारा यह बात प्रमाणित की जा सकती है। अमेरिका के प्रेसीडेन्ट रू्जवेल्ट की जन्म तिथि 30 जनवरी थी। ब्रिट्रेन के प्रधानमंत्री चर्चिल की जन्मतिथि 30 नवम्बर थी। रूस के शासनाध्यक्ष स्तालिन की जन्म तिथि 21 दिसम्बर। तीनों की जन्म तारीख का मूलांक 3 था। इसी कारण द्वितीय विश्व युद्ध के समय यद्यपि तीनों प्रमुखों की विचारधारा अलग अलग थी, इसके बावजूद भी मूलांक 3 होने के कारण तीनों राष्ट्रों के तीन कर्णधार द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अपने अपने देश से आकर यूरोप के एक स्थान पर गुप्त मंत्रणा के लिए एकत्र होकर योजनाबद्ध तरीके से तानाशाह 'हिटलरÓ को उसके मित्र राष्ट्रों सहित परास्त कर विश्व में शांति स्थापित करने में सफल हुए। मूलांक 3 अंक वालों को चमकीला गुलाबी रंग या हल्का गुलाबी रंग विशेष शुभ होता है। स्त्रियां इस रंग के कपड़े पहने तो उनके लिए विशेष लाभप्रद रहेगा। पुरूष वर्ग अपने कमरे की दीवारों पर यह रंग करायें, या इस रंग का फर्नीचर अथवा पर्दे आदि कमरे में लगायें तो विशेष शुभ रहेगा। इस मूलांक वाले जातकों के लिए अपने भाई-बन्धुओं, कुटुम्बीजनों एवं मित्रों से किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा नहीं करना चाहिए। इस मूलांक वाले जातक अचानक धनी बनकर, जीवन ठाठ से गुजारे, इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। यात्रा के माध्यम से ये ऊंचे उठते हैं। यात्रा ही इसके भाग्योदय में सहायक होती है।
रोग और मूलांक : जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी तब आपको चर्मरोग , दाद, खाज, खुजली, प्रमेह, पित्त प्रकोप, रक्त दोष इत्यादि हो सकते हैं। गृहस्थी के मामले में ये सौभाग्यशाली होते हैं। जीवन संगनी, सुन्दर, ईश्वरपरायण एवं सुन्दर सन्तान की जननी होती है। शुभ वार - रविवार, मंगलवार, गुरूवार एवं शुक्रवार। शुभ तारीखें - 3, 12, 21, 30, 6, 15, 24, 9, 18, 27, 1, 10, 19, 28 अगर इन तारीखों में गुरूवार, शुक्रवार, सोमवार या रविवार हो तो उत्तम है। शुभ रंग - हल्का पीला, गुलाबी, जामुनी एवं हरा। शुभ दिशा - दक्षिण पश्चिम एवं दक्षिण पूर्व जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27, 30, 33, 39, 42, 45, 48, 51, 54, 57, 60, 63, 66 इत्यादि।
मूलांक 3 के जातक : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (प्रथम राष्ट्रपति)-3.12.1884, स्वामी विवेकानंद-12.1.1863, सर जगदीश चन्द्र बसु-30 नवम्बर, लोह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल-30.10.1875, फील्ड मार्शल मानिकशा-3 अप्रैल, सर चर्चिल विंस्टन (पूर्व प्रधानमंत्री, इंग्लैण्ड)-30.11.1874, स्व. कर्नल नासिर (अरब के पूर्व राष्ट्रपति)-21 जनवरी, सर हेनरी फोर्ड (विश्वविख्यात उद्योगपति)-30 जुलाई, सर रूजवेल्ट (प्रेसीडेन्ट : अमेरिका)-30 जनवरी, सर स्टालिन (पूर्व प्रेसीडेन्ट : रूस)-30.12.1878।

मूलांक 4
सूर्य की प्रदक्षिणा करने में ग्रह हर्षल को लगभग 84 वर्ष लगते हैं। अर्थात् यह ग्रह एक राशि में लगभग 7 वर्ष तक रहता है। यह ग्रह शनि से भी अत्यंत बली, खल एवं तमोगुणी अशुभ ग्रह है। आकस्मिक घटनाएं, विलक्षण रोगोत्पत्ति और स्थान त्याग आदि का कारण माना जाता है। जिनका मूलांक 4 हो और उनका जन्म 21 जून से 31 अगस्त के मध्य हुआ हो, उन पर इस ग्रह का विशेष प्रभाव होता है। इस अंक वाले जातक का व्यक्तित्व रहस्यमय होता है। इनके आन्तरिक भावों की जानकारी ले लेना सरल नहीं। राज की बातें ये राज ही रखते हैं। कोई भी कार्य ऐसा नहीं जिसे पूर्ण करने में इन्हें बाधाएं न आवे। व्यवहार कुशलता की कमी, किसी को कब क्या कहना है ? इसका ध्यान नहीं रखते, साथ ही स्वेच्छाचारिता भी प्रचुर मात्रा में रहती है। इनके विचार संबसे अलग रहते हैं। इस कारण इनके मित्रों, प्रशंसकों की संख्या कम रहती है। यूरेनस के कारण इनके विचारों में दार्शनिकता का पुट रहता है। मूलांक 4 वाला व्यक्ति अपने विवेक द्वारा अपनी कल्पना को सही दिशा देता है और वह काल्पनिक से विवेकी और प्रत्यक्षदर्शी बन जाता है। ऐसा व्यक्ति प्रतिभाशाली, वैज्ञानिक और प्रसिद्ध साहित्यिक बनकर असाधारण सफलता प्राप्त करता है। मूलांक 4 वाले व्यक्ति नई व्यवस्थाओं के संस्थापक एवं पुरानी सामाजिक व्यवस्थाओं के विरोधी होते हैं। ये लोग आसानी से दूसरे लोगों से मित्रता नहीं करते। हां, जिन लोगों की जन्म तारीख का मूलांक 1, 2, 7 या 8 होता है, उसके प्रति इनका झुकाव हो सकता है। मूलांक 4 वाले धन जोडऩे के लिए अधिक प्रयत्नशील नहीं रहते, बल्कि घूमने-फिरने और मौज-मस्ती करने में खूब खर्च कर देते हैं। जिस व्यक्तियों का मूलांक 4 अर्थात जन्म तारीख, 4, 13, 22, 31 हो उन्हें धन का अपव्यय नहीं करना चाहिए, बल्कि बचा कर रखना चाहिए, जिससे वक्त पर काम आ सके। यदि मूलांक 4 वाले व्यक्ति अपने अन्दर सहनशीलता की भावना पैदा करें और दूसरों से व्यर्थ विवाद न करें तथा शुत्रता को दावतनामा न दें, तो जीवन में विशेष सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वस्तुत: ऐसे जातक दयालु और स्वभाव से सौम्य रहते हैं। संवेदनशीलता इनमें आवश्यकता से अधिक रहती है। पारिवारिक जीवन सुखमय होता है। सन्तान का सुख भी रहता हैं। जीवन पर्यन्त ये कर्मठ बने रहते हैं। वैसे जीवन के प्रारंभ में काफी दुख और विपदाएं आ सकती हैं। आकस्मात् धन प्राप्त कर सकते हैं। निर्माण कार्यों, साहित्यिक क्षेत्र में सफलता के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। ऐसा व्यक्ति महत्वाकांक्षी नेता, राजनीतिज्ञ होता है। मूलांक 4 वाला व्यक्ति चमत्कारिक ढंग से नित नई ऊंचाईयां छूने में सामथ्र्यवान होता है किन्तु अपने अहंकार के कारण आपदाओं को निमंत्रण भी देता रहता है। कुछ व्यक्तिगत सलाह है, आपके लिए, जो कि अनुकूलता देगी, आपको- चालाकी एवं बदले की भावना त्यागें। दूसरों का सहयोग लें और उन्हें यथा शक्ति सहयोग देने का प्रयास करें।सत्य कह देना अच्छी बात है, एक गुण है। परन्तु समय-असमय कटु सत्य कह देना अनुकूल नहीं कहा जा सकता। इसी कारण शत्रु पक्ष प्रबल रहता है। अत: स्वभाव में परिवर्तन लाएं - शत्रु की अपेक्षा मित्र बनाये। सबकी बातें ध्यान में सुने, मनन करें, फिर जो अनुकूल हो, वैसा करें। शुभ वार - रविवार, सोमवार, शनिवार भी शुभ है। शुभ तारीखें - 4, 13, 22, 31 साथ ही 1, 10, 19, 28 शुभ रंग - क्रीम कलर, भूरा मिश्रित खाकी, नीला चटकीला रंग। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67, 76 आदि।
मूलांक 4 के जातक : फकरूद्दीन अली अहमद (पूर्व राष्ट्रपति)-13 मई, मोहन लाल सुखाडिय़ां (पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान)-31 जुलाई, पं. रविशंकर शुक्ल (मुख्यमंत्री म.प्र.) 31.7.1877, फील्ड मार्शल मानकशा-4.4.1914, जार्ज वाशिंगटन (पूर्व प्रेसीडेंट: यूएसए)-13 अप्रैल, लार्ड वायरस-22 जनवरी, पिं्रस चार्ली -31 दिसम्बर, सर इसाक पिटमेन (शार्ट हेण्ड के आविष्कारक)-4 जनवरी, जार्ज इलियट-22 नवम्बर, कुईन आफ हॉलेण्ड-31 अगस्त।


मूलांक 5
जिन्दगी एक उत्सव है। मूलांक 5 में जन्में अनेक व्यक्तित्वों में से एक थे आजाद हिन्द फौज के संस्थापक, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचन्द्र बोस, जिनका का मूलांक 5 है। उनका उद्बोधन था तुम मुुझे खून दो- मैं तुम्हें आजादी दूंगा। पूरी मानव जाति की स्वाधीनता का आव्हान किया था, उन्होंने। मूलांक 5 वाले जातक गौरवपूर्ण, गरिमामय व्यक्तित्व के कारण लोगों का उनके प्रति खिंचाव रहता है। वे आपसी संबंध बनाने को आतुर रहते हैं। स्वस्थ्य शरीर, सदृढ़ कद काठी, तर्क बुद्धि, विलक्षण सूझबूझ के धनी, बुद्धि ज्ञान से सम्पन्न, पाण्डित्य दर्शाता स्वभाव, तेज तर्रार आभापूर्ण व्यक्तित्व इनकी प्रमुख विशेषता होती है। शान्ति दूत पं. जवाहर लाल नेहरू लगभग 17 वर्षों तक देश के प्रथम प्रधानमंत्री रहे। दूसरों के दिल की थाह पाने और गुप्त भेदों का पता लगाने में चतुर होते हैं। ये शान्त होकर बैठ नहीं सकते। ये आत्म विश्वासी और साहसी भी होते हैं। त्वरित निर्णय लेना इनकी विशेषता है। किसी बात पर अधिक सोच और पश्चाताप नहीं करते। सच्चे मित्रों की कमी इनके जीवन में कभी नहीं होती। मुगल सल्तनत के बादशाह अकबर महान का भी मूलांक 5 था। आय से अधिक साधन होते हंै । पाश्चात्य ज्योतियों के अनुसार 21 मई से 23 जून तक और 21 अगस्त से 23 सितम्बर तक बुध का प्रभाव विशेष रूप से रहता हैै। इस कारण यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त अवधि में पैदा हुआ हो और उनके जन्म की तारीख का मूलांक 5 हो, तो उस पर बुध का प्रभाव विशेष रूप से रहेगा।
रोग और मूलांक 5 : अस्वस्थ्य होने पर प्राय: निम्न रोगों से प्रभावित हो सकते हैं- जैसे - आंत संबंधी, चर्म रोग, जुकाम, नजला, फेफड़े या स्नायु रोग। मूलांक 5 वालों पर बुध का प्रभाव विशेष रूप से पड़ता है। बुध, मानसिक शक्ति का संचालन करता है। मूलांक 5 वाले मानसिक शक्ति से संबंधित कार्य इतना अधिक करते हैं कि अधिक आयु में मानसिक रोग (छमतअवने इतमंा कवूद) मूच्र्छा आदि रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण इनके स्वभाव में जल्दीबाजी, चिड़चिड़ापन, शीघ्र क्रोध आने की प्रकृति आदि के लक्षण पाये जाते है। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष : 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59, 68 तथा 77 वाँ वर्ष महत्वपूर्ण होता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार 32 वें वर्ष में बुध अपना पूर्ण प्रभाव दिखाने लगता है।
सावधानियां : आपमें तीक्ष्ण बुद्धि है, परन्तु उसका प्रयोग आप उचित समय पर और उचित जगह पर नहीं करते। ये भी आपके व्यक्तित्व को चोट पहुंचाता है। हद से ज्यादा शक्की होना, हर बात पर शक करना अच्छी आदत नहीं। कभी-कभी आपके शक्कीपन के कारण गृह कलह हो जाती है। भूल कर भी अपना भेद किसी अन्य को न दें। अपने क्रोध पर नियंत्रण रखकर विनम्र, बनने का प्रयास करें। शुभवार - बुधवार, रविवार, शुक्रवार। शुभ तारीखें - 5, 14, 23 इन तारीखों में बुधवार हो तो विशेष शुभ। 1, 10, 19, 28 इन तारीखों में रविवार हो तो विशेष शुभ। शुभ रंग - हरा, श्वेत, भूरा, कत्थई। शुभ दिशा - उत्तर पूर्व एवं उत्तर पश्चिम।
मूलांक 5 के जातक : मुगल बादशाह अकबर महान -23.11.1542, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री सुभाष चन्द्र बोस-23.1.1897, पं. जवाहर लाल नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री)-14.11.1889, भैरो सिंह शेखावत (पूर्व उपराष्ट्रपति)-23.10.1923, जुलफिकार अली भुट्टो (पाकिस्तान)-5.1.1928, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक-23.7.1856, डॉ. भीमराव अम्बेडकर (संविधान निर्माता)-14.4.1892, फुटबाल का बादशाह पेेले-23.10.1940, काल माक्र्स (साम्यवाद का प्रणेता) -5.5.1918, अलवर्ट आइंस्टीन (प्रसिद्ध गणितज्ञ)-14.3.1879।


मूलांक 6
अंक 6 का प्रतीक और स्वामी ग्रह शुक्र है। मूलांक 6 के व्यक्ति वे माने जाते हैं, जिनका जन्म किसी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ हो। शुक्र ग्रह को ज्योतिष में दैत्य गुरु की पदवी मिली है। मुख्यत: यह भोग का कारक है। पाश्चात्य ज्योतिषियों के मतानुसार जिनका जन्म 20 अप्रैल से 24 मई अथवा 21 सितम्बर से 24 अक्टूबर तक हो और उनका मूलांक 6 हो तो ऐसे व्यक्ति अत्याधिक आकर्षक होते हैं। उनमें दूसरे व्यक्तियों को आकर्षित करने का विशेष गुण होता है। जो भी व्यक्ति उनके अधीन होते हैं, वे उनसे प्रेम ही नहीं करते, अपितु उनकी पूजा भी करते हैं। 6 मूलांक वाले व्यक्ति बहुधा लोकप्रिय होते हैं। इनमें आकर्षण शक्ति और मिलानसरिता प्रचुर मात्रा में होती है। ऐसे व्यक्ति अपनी योजनाएं पूरी करने के लिए बहुत दृढ़ इरादे वाले होते हैं। किसी के प्रति प्रेमभाव रखने में वे हठ की सीमा तक पहुंच जाते हैं। प्रेम के मामलों में वे रोमान्टिक और आदर्श समझे जाते हैं। इसलिए वे सभी सुन्दर वस्तुओं से प्रेम करते हैं। उनके घर बहुत आकर्षक रूप से सजे होते हैं तथा उन्हें समृद्ध रंगों, चित्रकला और संगीत से प्रेम होता है। शुक्र, चंूकि मुख्यत: भोग का ग्रह है अत: कामवासना भी इनमें विशेष होती है। रति पण्डित इन्हें कहें, तो असत्य नहीं होगा। भोजन और वस्त्रों का इन्हें जन्मजात शौक होता है। वादा करके निभाना कोई इनसे सीखे। धनी होने पर मूलांक 6 वाले व्यक्ति कला और कलाकारों के लिए उदारता से धन खर्च करते हैं। वे अपने मित्रों के स्वागत-समारोहों तथा आथित्य के लिए सदा तैयार रहते है। पूर्णत: भौतिक सुखों में आस्था रखते हुए - ये जीवन का सही आनंद उठाते हैं। किन्तु विशेष नक्षत्रों में जन्मेंं मूलांक 6 वाले जातक विराट व्यक्तित्व के धनी होते हैं- इन्हें युग पुरूष की श्रेणी में रखा जा सकता है। सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरू श्री नानक देवजी, तिब्बत के धर्मगुरू श्री दलाई लामा जी सरीखे विराट व्यक्तित्व के धनी सदैव वन्दनीय रहेंगे। नेपोलियन वोनापार्ट, यूरोप का प्रथम और अन्तिम सम्राट भी मूलांक 6 में ही जन्म थे। मूलांक 6 वाले व्यक्तियों में दूसरों को प्रभावित करने की अद्भुत क्षमता होती है। इनका सुडौल और आकर्षक शरीर, नम्रवाणी, मोहक व्यक्तित्व तथा चेहरे की सौभ्यता इन्हें सफलता दिलाने में सहायक होती है। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60 69 वां वर्ष महत्वपूर्ण है। रोग और मूलांक : जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी, आपको फेफड़ों से संबंधित रोग, स्नायु दुर्बलता, सीने की कमजोरी, मूत्र रोग, कफ जनित रोग, कब्जियत व जुकाम जैसे रोगो से पीडि़त हो सकते हैं। शुभवार - मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ तारीखें - 6, 15, 24 सहयोगी तारीखें 3, 9, 12, 18, 21, 27 एवं 30 शुभ रंग - गहरा नीला रंग, गुलाबी रंग, अशुभ रंग काला और बैगनी। शुभ दिशा - उत्तर पूर्व अथवा उत्तर पश्चिम शुभ रत्न - सौभाग्यशाली रत्न फिरोजा, पन्ना।
मूलांक 6 के जातक : महारानी विक्टोरिया- 24.5.1819 (इंग्लैण्ड : महान शासिका : 63 वर्षों तक शासनाध्यक्ष), नेपोलियन वोनापार्ट (सम्राट : यूरोप) - 15.8.1769,किंग जार्ज प्रथम - 24 दिसम्बर, गुरु नानक देव-15.4.1469, दलाई लामा (धर्मगुरु : तिब्बत)- 6 जून, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णान (पूर्व राष्ट्रपति)- 6.9.1888 पूर्व राष्ट्रपति राट (अमेरिका)-15 सितम्बर, वारेन हेस्टिंग्स-6 दिसम्बर, मेक्स मूलर-6 दिसम्बर, फ्रेडरिक महान-24 जनवरी।


मूलांक 7
मूलांक 7 के व्यक्तियों का प्रतीक और स्वामी ग्रह नेपच्यून यानी वरूण है। जो व्यक्ति किसी भी महीने की 7, 16, 25 को जन्मा हो, उसका मूलांक 7 होता है। कुछ पाश्चात्य ज्योतिषियों के मतानुसार जिनका जन्म 21 जून से 25 जुलाई के मध्य हुआ हो और उनका मूलांक 7 हो तो उन पर इस ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है। यह जल तत्व प्रधान ग्रह है। सूर्य की प्रदक्षिणा करने में इस ग्रह को 165 वर्ष लगते हैं- अर्थात यह एक राशि पर 13 वर्ष 9 माह रहता है। जल तत्व प्रधान होने के कारण समुद्रपार की यात्रा, विदेशी व्यापार अथवा जहाज संबंधी कार्यों का यह कारक माना जाता है। 7 अंक वाले व्यक्तियों के लिये चन्द्रमा से संबंध रखने वाले 2, 11, 20, 29 तारीखों में पैदा हुए व्यक्तियों से दोस्ती करना शुभ रहेगा। किसी भी महीने की 7, 16, 25 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति स्वतंत्र और मौलिक विचार वाले होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का व्यक्तित्व अपने आप में विशिष्ट होता है। हर क्षेत्र में परिवर्तन पसन्द करते हैं। यात्रा करना तथा नये नये स्थान देखने का, इन्हें बहुत शौक होता है। कल्पनाशीलता के साथ ऐसे व्यक्ति प्राय: अच्छे लेखक, चित्रकार और कवि भी होते हैं। परन्तु इनके कार्यों में एक विशेष प्रकार का दार्शनिक दृष्टिकोण पाया जाता है। मूलांक 7 वाले व्यक्ति धर्म के संबंध में अपने विशिष्ट विचार रखते हैं। वे पुरानी परम्पराओं को पसन्द नहीं करते। धर्म के प्रति उनका अपना दृष्टिकोण होता है। इन व्यक्तियों को कभी-कभी बहुत अद्भुत सपने आते हैं तथा तंत्र-मंत्र विधाओं की ओर उनका झुकाव होता है। भविष्य में घटने वाली बातों को भाँप लेने का उन्हें अन्तज्र्ञान होता है। इनके आकर्षक व्यक्तित्व का दूसरों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। मूलांक 7 सहृदय, सहिष्णु एवं सहयोगी भावना का प्रतीक है। आप में मूलत: तीन विशिष्ट गुण है। पहला गुण- मौलिकता, दूसरा गुण - स्वतंत्र विचार और तीसरा प्रधान गुण : विशाल व्यक्तित्व। आपका परिचय क्षेत्र विस्तृत होगा और आपके स्तर से ऊंचे अधिकारी भी आपसे परिचित होंगे। यद्यपि आप नम्र होंगे, परन्तु आप किसी की धौंस में नहीं रह सकेंगे। आपकी अद्भुत प्रतिभा ही आपको उच्च स्थान पर आसीन करने में सहायक होगी। मित्रों से आपको हमेशा भरपूर सहयोग मिलेगा। साहसिक कार्यों में आपकी रूचि बराबर बनी रहेगी तथा कुछ ऐसा कर गुजरने को आतुर होंगे, जो आपको चमका दे, ऊंचा उठा दे, प्रसिद्धि दिला दे। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 7, 16, 25, 34, 43, 52 और 61 वां वर्ष आपके जीवन में महत्वपूर्ण होगें। इन वर्षों में आप अवश्य सफलता प्राप्त करेंगे। मित्रांक वर्ष 2, 4, 11, 13, 20, 22, 29, 31, 38, 40, 47, 49, 58 एवं 67 वां वर्ष भी लाभकारी हो सकता है। रोग और मूलांक : जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी तब आपको पेट दर्द, छूत के रोग, पसीने की अधिकता, आमाशय दोष, कब्जियत, नींद न आना, भूख न लगना, गुप्तांग संबंधी रोग, वात व गठिया इत्यादि रोग हो सकते हैं। शुभवार - रविवार, सोमवार और बुधवार, शुभ तारीखें - 7, 16, 25, एवं 2, 11, 20 एवं 29, शुभ रंग - हल्का नीला, आसमानी, कपूरी, हरा, श्वेत, गुलाबी
मूलांक 7 के जातक : जीजस क्राइस्ट (प्रभु यीशु)- 25 दिसम्बर, गुरु रवीन्द्र नाथ टेगोर (बंगला साहित्य के गौरव)-7.5.1861, रूसो (फ्रेंच कवि) शिक्षाविद् -16 अप्रैल, विलियम वड्र्सवर्थ (कवि)-7 अपै्रल, अटल बिहारी बाजपेयी (पूर्व प्रधानमंत्री)-25 दिसम्बर, लू शुन: (चीनी सांस्कृतिक क्रान्ति का अग्रदूत) -25.9.1881, हेमा मालिनी (फिल्मी नायिका)-16.10.1948, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई-16.11.1834, लार्ड ब्राऊनिंग(कवि)-7 मई. पाब्लो पिकासो (20वीं सदी का शीर्षस्थ चित्रकार)-25.10.1881।

मूलांक 8
अंक ज्योतिष में मूलांक 8 को विश्वास का अंक कहा गया है। इसका स्वामी ग्रह शनि है। किसी भी माह की 8, 17, 26 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्तियों का मूलांक 8 होता है। शनि मंद गति से सूर्य की एक परिक्रमा 30 वर्षों में करता है। ये एक राशि पर लगभग 2 वर्ष 6 माह रहता है। यह क्रूर और पापी ग्रह माना गया है। किन्तु न्याय का देवता होने से धर्मात्मा बनाने में भी सहयोग करता है। पाश्चात्य ज्योतिषियों के मतानुसार जिन जातकों का जन्म 21 दिसम्बर से 26 फरवरी के मध्य हुआ हो और उनका मूलांक 8 हो, तो अति शुभ। इस मूलांक वाले व्यक्तियों के प्रति प्राय: लोगों की गलत धारणाएं होती हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत दृढ़ विचार के होते हैं। इनमें अपने व्यक्तित्व की शक्ति होती है। यह जीवन के रंगमंच पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जिसे प्राय: भाग्य से संबंधित माना जाता है। ऐसे व्यक्ति प्राय: दूसरों के लिए सौभाग्यशाली सिद्ध होते हैं। आपका स्वभाव सहयोगी है। जब तक आप किसी के मित्र और सहयोगी हैं, प्रत्येक रूप में आप उसे सहायता पहुंचाते रहेंगेे, परन्तु जब आप किसी पर क्रोधित हो जाते हैं या किसी से शुत्रता कर लेते हैं, तब आपका रूप प्रचण्ड हो जाता है और हर प्रकार से आप उसे नष्ट करने पर तुल जाते हैं। यह आपका ही सबल-सजग व्यक्तित्व है कि इतने उतार चढ़ाव देखकर टूटे नहीं है, आप। आपका व्यक्तित्व सही शब्दों में लचीला है, जो परिस्थिति के अनुसार अपने आपको ढाल लेने की क्षमता रखता है। आपका व्यक्तित्व सेवाभावी है। आपके मन में करूणा है और विचारों में शान्ति का सन्देश। दूसरे लोगों को यथा सम्भव प्रसन्न बनाए रखना या दूसरों की सेवा करते रहना, आपका लक्ष्य होगा। आपका स्वभाव ही है कि किसी भी कार्य में आप लग जाते हैं, उस पर जमकर काम करते हैं और अंतत: आप उसमें सफल भी हो जाते हैं। यदि मूलांक 8 के व्यक्तियों में कोई महत्वाकांक्षा जाग्रत हो जाये तो वे सामाजिक जीवन अथवा किसी महत्वपूर्ण सरकारी अथवा उत्तरदायित्वपूर्ण पद की आकांक्षा रखते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत अधिक ऊंचे पदों पर आसीन होते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। सांसारिक दृष्टिकोण से मूलांक 8 सौभाग्यशाली अंक नहीं माना जाता और इस मूलांक वाले व्यक्ति को बड़ी कठिनाइयाँ, हानि और अनादर सहन करना पड़ता है। संघर्षों के पश्चात् चमत्कृत कर देने वाली शक्ति के अभ्योदय से महानायक बनते देखा गया है, इन्हें।
रोग और मूलांक : आपके जीवन में जब भी रोग की स्थिति आवेगी तब आपको वायु रोग, वात रोग, शारीरिक क्षीणता, अंध रोग, हृदय की कमजोरी, रक्त की कमी, कब्जियत, रक्तचाप, सिर की पीड़ा, कुष्ठ रोग, मूत्र रोग, गंजापन तथा कान-नाक में पीड़ा हो सकती है। इनके जीवन में अकस्मात द्रव्य प्राप्ति के कई एक अवसर आते हैं। इन्हें सट्टे, लाटरी, रेस, शेयर्स अथवा किसी अज्ञात ढंग से अचानक द्रव्य लाभ के प्रबल योग बन सकते हैं ? इस मूलांक वाले जातक या तो सर्वोच्च पद पर अथवा मामूली पद रहते हैं। भविष्य के प्रति ये सदैव सजग रहते हैं। जो भी कार्य करेंगे, सोच-समझकर करेेंगे। आपमेें कुछ कमियां हैं- उन्हें दूर करें - वासनामय प्रेम व चिन्तन अच्छी बात नहीं। घर गृहस्थी और परिवार से आपका उपेक्षा भाव ठीक नहीं मादक द्रव्यों का सेवन हानिकारक, कृपया इससे बचें। अनावश्यक मानसिक तनाव न लादें, अपने प्रियजन से अपनी पीड़ा व्यक्त करें। जुए, सट्टे, रेस, लॉटरी आदि से कई दफा धन की प्राप्ति हो सकती है, परन्तु इनसे बचे अवश्य। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 8, 17, 26, 35, 44, 53, 62, 71 आदि वर्ष शुभ हैं इन आयु वर्षों में जीवन की अनुकूलता रह सकती हैं। मित्रांक वर्ष 4, 13, 22, 31, 40, 49 भी शुभ हो सकते हैं। शुभवार - शनिवार एवं बुधवार। शुभ तारीखें - 8,17, 26। शुभ रंग - गहरा नीला, काला, हरा एवं भूरा मिश्रित बैंगनी। शुभ दिशा - दक्षिण, दक्षिण पूर्व एवं दक्षिण पश्चिम।
मूलांक 8 के जातक : डॉ. जाकिर हुसैन-8 फरवरी, सी. राजगोपालचार्य -8 दिसम्बर, संत तुकाराम स्वामी -17.3.1608, देवानंद (अभिनेता)-26 दिसम्बर, बादशाह हैदरअली-8 दिसम्बर, इंग्लैण्ड की रानी मेरी प्रथम-17 फरवरी, बैल्जियम के सम्राट अलबर्ट- 8 अप्रैल,स्पेन सम्राट अलफांजो तेरहवां -1

मूलांक 9
मूलांक 9 का प्रतीक और स्वामी ग्रह मंगल है। इस मूलांक का प्रभाव उन व्यक्तियों पर होता है, जो किसी भी माह की 9, 18 या 27 तारीख को पैदा हुए हों। यह प्रभाव उस समय और भी बढ़़ जाता है, जब व्यक्ति 21 मार्च से 26 मार्च एवं 21 अक्टूबर से 27 नवम्बर के मध्य पैदा हुआ हो- और उनका मूलांक भी 9 हो, उसमें मंगल के गुण विशेष पाये जाते हैं। मूलांक 9 के जातक साहसी होते हैं। ये ही वे वीर होते हैं, जो अपने अद्भुत एवं चुनौती भरे कारनामों से अपना नाम अमर कर जाते हैं। यद्यपि ये व्यक्ति ऊपर से प्रचंड, कठोर एवं विस्फोटक होते हैं, परन्तु दिल से कोमल होते हैं। अनुशासन को जीवन में सर्वोपरि मानते हैं और जिस किसी भी कार्य की स्वीकृति दे देते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। आस्ट्रेलिया का क्रिकेट सम्राट डोनाल्ड ने इग्लैण्ड के विरूद्ध 1930 में 334 रनों की पारी खेली थी। 52 टेस्ट में 29 शतक जिसका औसत 99:94 था। इनका मूलांक भी 9 था। इनका प्रभाव ग्रह मंगल है, जो कि युद्ध का देवता है। हार कर, परास्त होकर या नीचा देखकर ये जीने वाले नहीं हैं। धीरे धीरे धुंआ छोड़ती हुई लकड़ी की तरह ये जिन्दगी व्यतीत करना नहीं जानते, अपितु बारूद की तरह भभक कर जीना और जलना जानते हैं। जो क्षण भर के लिए ही सही पर उस एक क्षण में ही दुनियां को चकाचैंध कर देने में विश्वास रखते हैं।
अंक 9 के संबंध मेें कुछ रोचक तथ्य : प्राचीन काल में मृत व्यक्तियों को 9 वें दिन दफनाया जाता था। सूली पर चढ़ाये जाने के 9 घंटे बाद ईसा के प्राण निकले। पुरातन हिबू्र लेखन में यह बताया गया है कि प्रभु ने 9 बार इस पृथ्वी पर जन्म लिया। यहूदियों के पहले और दूसरे दोनों मंदिर 9 तारीख को ही नष्ट किये गये। इसलिए इस माह की 9 तारीख को कुछ विशेष धार्मिक चिन्ह सूर्य के अस्त होने तक धारण नहीं किये जाते। बाईबिल में 9 के अंक को मानव का अंक माना गया है। मूलांक 9 के व्यक्ति यदि अपने क्रोध और हिंसा पर अधिकार और नियंत्रण रख सके, तो उनके लिए मूलांक 9 सौभाग्यशाली सिद्ध होगा। मनुष्य का प्रतिनिधित्व करने वाला 9 का अंक शारीरिक और भौतिक क्षेत्र में शक्ति, ऊर्जा और युद्ध में संहार के गुणों से युक्त माना गया है। फ्रीमेशन सिद्धांत को मानने वाले लोग 9 सरदारों अथवा मुखियों में विश्वास करते हैं और क्रिया रूप में 9 गुलाबों के फूलों, 9 दीपकों, और 9 बार खटाखटाने के रूप में विश्वास करते हैं। प्राचीन जातियां 9 के अंक और उनके गुणनफलों से भयभीत रहती थी।
रोग और मूलांक: जब भी आपके जीवन में रोग की स्थिति आयेगी तब आपको क्रोध, झल्लाहट दुर्घटना, चोट, अंग शैथिल्य, हृदयरोग, रक्तचाप आदि पीड़ा देंगे।
सुखद भविष्य के लिए कुछ कमिया दूर करें - मितव्ययता एक अच्छा गुण है, किन्तु हर क्षेत्र में खासकर रोग एवं शिक्षा के लिए मितव्ययी होना सुखद नहीं। सत्य और स्पष्ट कहना अच्छी बात है। परन्तु आज के समाज में कटु सत्य कहना अच्छा नहीं माना जाता। यह ठीक है कि मंगल की कृपा आप पर है और इन्हीं की कृपा के कारण आप जान जोखिम में डाल देते हैं। व्यर्थ के दुस्साहस से जीवन लीला की इतिश्री हो सकती है- अथवा धन हानि और आत्म सम्मान को ठेस लग सकती है। जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष - 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72, 81 आदि। शुभवार - मंगलवार, गुरूवार एवं शुक्रवार। शुभ रंग - गुलाबी, गहरा लाल, सफेद या पीला। शुभ दिशा - पूर्व, उत्तर पूर्व, उत्तर पश्चिम।
मूलांक 9 के जातक : स्वामी रामकृष्ण परमहंस-18 फरवरी, महाप्रभु चैतन्य -18 फरवरी, गुरु गोविन्द सिंह -18 दिसम्बर, डोनाल्ड बे्रडमेन (आस्ट्रेलिया : क्रिकेट सम्राट)-27.8.1908, महर्षि महेश योगी-18.10.1911, उमर खैयास (शायर)-18 मई, मदर टेरेसा (करूणा की साकार मूर्ति)-27.8.1910, गुरू गोलवर कर-18 फरवरी, सम्राट एडवर्ड सप्तम -9 नवम्बर, बिलियम गिलबर्ट ग्रेस (इग्लैण्ड : क्रिकेट का पितामह)-18.6.1848।

बुधवार, 4 जनवरी 2012

वार्षिक राशिफल-2012


ज्योतिष एक तिलस्म है : परामानसिक जगत का अध्येता है

साक्षात्कार करें वर्ष 2012 में आपका भविष्य कैसा रहेगा?



हमारा जीवन किन अज्ञात बिन्दुओं पर थिरकता है। क्या कोई अदृश्य नियन्ता है, जो हमारे जीवन को संचालित करता है? भारतीय मनीषियों ने निरंतर शोधों, व्यावहारिक कार्यों एवं फलित तथ्यों के आधार पर, जो निष्कर्ष किये, वे ज्योतिष के आधार बिन्दु बने। इस पृथ्वी पर जो प्रकाश दिखाई दे रहा है, वह केवल सूर्य का ही प्रकाश नहीं है, अपितु इस प्रकाश में अन्य सैकड़ों ग्रहों का प्रकाश मिला हुआ है और वे प्रकाश रश्मियां मानव जीवन को प्रेरित करती रहती हैं। ज्योतिषीय सुविधा की दृष्टि पूरे आकाश मंडल को 360 भागों में बांट लिया है। जन्म पत्रिका में जो मानव की कुंडली बनी होती है, वह भी आकाश मंडल का ही एक रूप है। अध्ययन की सुविधा के लिए 360 को 12 भागों में बांट दिया और 30 बिन्दुओं की एक राशि मान ली गई। इन बारह राशियों में पूरा आकाश मंडल समाहित है।
यह जीवन एक लहर है। पूरा अस्तित्व लहरों से बना है। समस्त जीव और उनका जीवन अनुकरण की प्रवृत्ति ही तो है किन्तु जन चेतना राम से लेकर बुद्ध तक और बुद्ध से लेकर कबीर तक तथा कबीर से लेकर गांधी तक के ऐतिहासिक पृष्ठों में हम झांकें तो सभी वेद, वेदांग, संहिताएं, पौराणिक गाथाएं, बाइबिल और कुरान आदि सभी आध्यात्मिक ग्रंथ ग्रहों के इर्द-गिर्द घूमते नजर आएंगे। यदि हम बीसवीं सदी के एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक, शिल्पी फ्रायड को देखें, उसकी लेखनी के संदर्भ में तो फ्रायड का साया (स्द्धड्डस्रश2)एडलर से लेकर अनेक मनोवैज्ञानिकों की लम्बी कतारें नजर आएंगी, आपको।
वस्तुत: फ्रायड एक द्वार है, जो अपने अज्ञात का, वर्जित अवचेतना का। हर आदमी के भीतर एक तिलस्म है। परामानसिक जगत के प्रति जो जबरदस्त आकर्षण है, उसे वह पूरा करता है। ज्योतिष क्या है? एक तिलस्म ही तो है। हां, ज्योतिष चमत्कारों के जादुई सपने नहीं दिखाता, किन्तु निराशा के क्षणों में संजीवनी का काम तो अवश्य करता है। ज्योतिष आपको जगाता है। तुम्हारी जरा सी झपकी लगी कि जगा देता है। हार को विजयश्री में बदल देता है। अशुभ समय का अलार्म बजाकर आपको सावधान कर देता है। ज्योतिष जीवन में घटने वाले शुभ-अशुभ के विराट सत्य का दर्शन करा देता है। ज्योतिष, आपकी चेतना का वातायन है और आपकी राशि का आईडेन्टिटी कार्ड है। आपकी राशि आपकी आंखें हैं, आपके शरीर के ताप का थर्मामीटर है। आइये जानते हैं बारह राशियों का वर्ष 2012 में किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मेष (चु, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

इस राशि की गणना पुरुष श्रेणी में है। इसका अधिपति स्वामी ग्रह के देवता विघ्न विनायक श्री गणपतिजी हैं। इस राशि के स्वामी मंगल को सौरमंडल के मंत्रीमंडल में सेनापति का स्थान प्राप्त है। इसका इंद्रिय ज्ञान नेत्र है। इसका वेद सामवेद है। यह सत्वगुणी है। रत्न इसका मूंगा है। स्वाद तिक्त है। ऋतु ग्रीष्म है। सूर्य, चंद्र, बृहस्पति इसके मित्र हैं। बुध, इसका परम शत्रु है। शुक्र और शनि से इसकी साधारण मैत्री है। महाभारत के कर्ण पर्व में इसकी विशेष चर्चा है। यह ग्रह पृथ्वी पर मानव के लिए विशेष महत्व रखता है। इस ताम्रवर्णी ग्रह और पृथ्वी में अनेक समानताएं हैं।
आयु: इस राशि के व्यक्ति की आयु यदि देवयोग पक्ष में रहता है तो प्राय: दीर्घायु माना गया है। दुर्घटना अथवा चोट के भय से इसकी मृत्यु संभव है।
स्वभाव: इस राशि का जातक अस्थिर स्वभाव का होता है। इसे बहुत शीघ्र गुस्सा आता है, पर ठंडा भी शीघ्र हो जाता है। इस राशि का जातक हृदय का बड़ा कोमल होता है। इसे तिक्त पदार्थ बहुत पसंद होते हैं। यह डरपोक और कायर नहीं होता। सत्वगुणी होने के कारण सच्चरित्र, दृढ़ निश्चयी और संकल्प को पूरा करने वाला व्यक्ति होता है। इसका तत्व अग्नि होने के कारण उग्र स्वभाव का होता है। नेतृत्व के गुण अधिक होते हैं। चतुष्पदी राशि होने के कारण यह बार-बार गिरने पर भी उठकर शीघ्र खड़ा हो जाता है। यह बहुत कामुक होता है। हरियाली, पेड़-पौधे इसे पसंद होते हैं।
स्वास्थ्य : अपनी प्रकृति रूप के कारण इसका स्वास्थ्य नरम-गरम बना रहता है। गर्मी, विष, प्रभाव, चोट, घाव, नेत्र पीड़ा, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग, हड्डियों पर चोट, गर्दन पीड़ा जैसी बीमारियां होती हैं। पुरुष का शरीर एक न एक बार जरूर जलता है। आप्रेशन की संभावनाएं एक से अधिक बार जीवन में सुनिश्चित हैं।
विवाह : इनका विवाह प्रेम, मेष वृषभ, तुला राशि की स्त्री से होने पर सुखमय एवं सफल रहता है। वृश्चिक, मकर राशि के सामान्य सुखी। मिथुन, कन्या राशि से होने पर प्राय: क्लेशपूर्ण रहता है।
जीवन निर्वाह : इस राशि का जातक जीवन निर्वाह- डॉक्टर, संगठनकर्ता, व्यापारी, वकील, दवा विक्रेता, निर्माण कार्य एवं राजनीतिज्ञ रूप में प्रख्यात होता है। इस जातक के लिए पूर्व, उत्तर-पूर्व, दक्षिण दिशाएं विशेष शुभ होती हैं।
शुभ माह एवं दिन : सोमवार, मंगलवार, गुरुवार आदि दिन अधिकतम शुभ रहते हैं। जनवरी, मार्च, अक्टूबर एवं सितंबर माह प्राय: शुभ होते हैं।

वार्षिक भविष्यफल
नववर्ष आपको मंगलमय हो। राशि स्वामी मंगल अपनी राशि मेष से 5वें गोचर में भ्रमण कर रहे हैं। 21 जून 2012 को रात्रि 10 बजकर 59 मिनट पर राशि परिवर्तन करेगा। कहने का अर्थ है कि यदि मेष राशि के विद्यार्थी अपनी नियमित पढ़ाई के साथ किसी प्रतियोगी परीक्षा यूपीएससी, पीएससी, पीएमटी, पीईटी आदि किसी परीक्षा हेतु प्रतिदिन 12 से 14 घंटों की पढ़ाई कर परीक्षा देंगे, तो सफलताएं उन्हें मिल सकती है। बैंकिंग क्षेत्र में भी सफलताएं आपको नौकरी के दरवाजे खोल सकती हैं। शासकीय/अशासकीय विभागों में कार्यरत मेष राशि के जातकों के लिए यह वर्ष पदोन्नति के अवसर भी प्रदान कर सकता है। विवाह योग्य जातकों के जीवन में दाम्पत्य जीवन के सुख मिलने के योग गुरु बना रहा है। 17 मई, 2012 को प्रात: 9.59 बजे को गुरु वृष राशि में प्रवेश करेगा। योग अच्छे बन रहे हैं। परिवार में मांगलिक कार्य सुखद और सहज रूप में सम्पन्न होंगे। शुक्र कह रहा है - जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल अथवा जून में विवाह की शहनाई बज सकेगी, शुक्र विदेश यात्राओं का भी सुयोग बनाता है। चौकिये मत, हनीमून मनाने भी जा सकते हैं, अमेरिका या यूरोप के टूर पर। मंगलदेव इस वर्ष आप पर मेहरवान भी हो सकते हैं। भूमि, प्लाट अथवा फ्लेट खरीदने में हो सके, तो बैंक लोन लेकर ही सही मकान या प्लाट के मालिक तो बन ही जाइये। बैंकों से कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध होगा।
खबरदार, प्रेम प्रसंगों में मंगल दंगल भी करा सकता है। पर स्त्री प्रसंग आपके लिए जेल या अस्पताल के दरवाजे भी दिखा सकता है। गृहस्थ जीवन, आमोद-प्रमोद से बीतेगा। समझौतावादी दृष्टिकोण अपनाएं। वाहन चालन में सावधानी आपके जीवन में खुशियों के इन्द्रधनुषी रंग बिखेरेगा। इस राशि के जातकों खासकर इंजीनियर्स, सर्जन अथवा कम्प्यूटर विशेषज्ञों के लिए देश-विदेश में नौकरी के अवसर अवश्य मिलेंगे। सड़क, पुल, भवन आदि निर्माण कार्यों से जुड़े जातक सावधान रहें, इस क्षेत्र में मंदी आने के पूरे-पूरे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। व्यापार जगत से जुड़े जातक थोड़े सावधान रहें, शेयर बाजार हो या सोने, चांदी का वायदा बाजार काफी उतार-चढ़ाव रहेगा। पूंजी बचाकर रखिये। 8 फरवरी 2012 बुधवार को दिन 3.33 बजे शनि वक्री होगा। शेयर बाजार में सुधार के लक्षण दिख रहे हैं। तेल, लोहा, रियलटी, बैंक एवं पावर से जुड़े शेयर्स में लाभ कमा सकते हैं। यदि डीमेट एकाउन्ट में कम से कम 2-3 सालों को रखकर भूल जों, तो अच्छा लाभ मिलेगा। यात्राओं के आयोजन बनेंगे। राजनीतिज्ञ सावधान रहें? विवादों की इबारत लिखी जा सकती है। इस वर्ष मेष राशि वाली गर्भवर्ती महिलाएं, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। पुत्र/पुत्री में भेद न करें। मातृत्व का सुख उटाएं. शत्रु पक्ष प्रबल रहेगा। न्यायालयीन परिसर को दूर से ही सलाम करें, तो धन और सम्मान की दृष्टि से बेहतर होगा।
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी-12,13,18,19,20,28,29, फरवरी-6,7,8,15,16,24,25,मार्च-4,5,6,13,14,22,23, अप्रैल-1, 2, 9, 10, 11, 18, 19, 20, 28, 29, मई-7,8,16,17,25,26,27, जून- 3,4,12,13,14,22,23,30, जुलाई-1,2,7,8,9,19,20,21,28,29, अगस्त- 6,7,8,16,17,24,25, सितम्बर- 2,3,12,13,21,22,29,30, अक्टूबर- 1,9,10,18,19,27,28, नवंबर- 5,6,7,14,15,23,24, दिसंबर-3,4,12,13,20,21,29,30।

वृषभ (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे वो)
वृषभ राशि या वृष राशि का दूसरा स्थान है। इसका शाब्दिक अर्थ बैल, इसका उद्गम पृष्ठोदय है। इसकी दिशा पूर्व है। राशि स्वामी शुक्र है, जिसे शास्त्रों में असुरों का गुरु माना गया है। यह बसंत ऋतु का स्वामी है। इसकी अधिपति देवी लक्ष्मी है। विज्ञान की दृष्टि से शुक्र को पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी माना गया है। यह ग्रह सौर मंडल की अपेक्षा सूर्य के अधिक निकट है। ज्योतिष शास्त्रों में शुक्र वृषभ व तुला राशि का स्वामी है। हस्तरेखा में इसकी गणना शुक्र पर्वत के रूप में की जाती है।
रूप-रंग : जातक के जन्म लेने के समय इस राशि का उपस्थित होना ही कहा जा सकता है कि शरीर स्थूल, काले बाल, गेहुंआ रंग। ऐसे जातक हृष्ट-पुष्ट, अच्छे डीलडोल वाले, कर्मठ, आकर्षक, चुम्बकीय व्यक्तित्व के धनी, अधिकांश का वर्ण गौर होता है।
स्वभाव : इस राशि के जातकों का स्वभाव घमंडी और क्रोधी होता है। यह सबको प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। अपने कार्य के लिए पूर्णत: समर्पित होते हैं। मेहनत लगन में कोई कमी न आने देते हैं। विपरीत परिस्थितियों में बी नहीं घबराते। यह कला प्रेमी होते हैं।
दाम्पत्य जीवन : इनका दाम्पत्य जीवन सुख-दु:ख मिश्रित होता है। इनका यौवनकाल एवं वृद्धावस्था सुखमय होती है। अपने अहम और घमंडी स्वभाव के कारण पत्नी से खटपट रहती है। मिथुन, मकर, कुंभ राशि स्त्रियों से या पुरुषों से विवाह संबंध उत्तम रहता है। सिंह, कर्क, वृश्चिक राशि वालों से विवाह संबंध कलहप्रिय होते हैं। मेष, वृष तथा धनु राशि वाले से संबंध सामान्य रहते हैं।
स्वास्थ्य : इनका स्वास्थ्य सामान्यत: यौवनकाल तक ठीक रहता है। यौवनकाल के उपरांत इनकी स्वयं की लापरवाही से स्वास्थ्य बिगड़ता है। प्राय: पथरी, सांस में कष्ट, नेत्र या चेहरे की पीड़ा इन्हें डाक्टरों के समीप ले जाती है। उदर संबंधी रोगों से ऐसे जातकों को सावधान रहना चाहिए।
जीवन निर्वाह : इस राशि वाले जातकों को पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व दिशाएं शुभ रहती हैं। वकील, लेखक, डॉक्टर, भूमि, भवन, सड़क मार्ग के निर्माण से लेकर अन्य कार्य क्षेत्रों में सफलता अर्जित कर लेना, इनकी मुख्य विशेषता है। राजनैतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े इस राशि के जातक यदकदा अपने आचरणों से विवादास्पद न बनें, इसलिए इन्हें सामाजिक सुचिता का ध्यान रखना, इसकी गरिमा के लिए अपरिहार्य है। आयु : आयु की दृष्टि से 60 वर्ष के बाद ऐसे जातकों के स्वास्थ्य में गिरावट आ जाती है। यदि यौवनावस्था से ध्यान रखा जाए, तो जिन्दगी का उत्तरार्ध चलते-फिरते दूसरे श्बदों में साठा सो पाठा की उक्ति को चरिताथ करता है।
रत्न-रंग : इस राशि का शुभ रंग नीला और सफेद है। मोती, हीरा एवं सफेद हकीक शुभ रत्न हैं। अनामिका या कनिष्ठा में इनको विधि-विदान से धारण करना विशेष लाभप्रद रहेगा।

वार्षिक भविष्यफल
हे वृषभ राशि के जातको दिनांक 3 फरवरी 2012 को प्रात: 8 बजकर 4 मिनट से शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में जा रहा है। विवाह योग जातकों के लिए सुन्दर, सलौनी, सलौना वर-वधु प्रतीक्षा सूची में मत रखिये। चट-मंगनी, पट विवाह कर डालिये। शुक्र की देवी आतुर है, आपके शयनागार में प्रवेश के लिए। भाग्य की देवी का स्वागत कीजिएगा। वृषभ राशि वाले जातक थोड़े दिल फेंक होते हैं- सावधान अन्यथा। अपमानजनक स्थिति बन सकती है। मियां। काबू में रखों, अपने दिल को। शनिदेव भी शुक्र की तुला राशि में भ्रमण कर रहे हैं- काली कमाई करने से बाज आइएगा, अन्यथा छापे में घर की जमा पूंजी भी चली जाएगी। इस राशि के भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी वर्ग पर लोकायुक्त अथवा आयकर विभाग का छापा भी पड़ सकता है? नए जन्में अथवा गर्भस्थ शिशु बीमारी से पीडि़त हो सकते हैं। कृपया समुचित चिकित्सा व्यवस्था का ध्यान क्िरएगा। व्यावसायिक गति उतार-चढ़ाव वाली रहेगी। शनिदेव 19 मई 2012 दिन को 2 बजकर 26 मिनट पर कन्या राशि में वक्री होकर राजनैतिक जीवन में काफी नाटकीय मोड़ ला सकते हैं। राजनीतिज्ञ सावधान रहें? बारतीय राजनीति के शीर्षस्थ पदों पर कुछ नए समीकरण बनेंगे। 13 फरवरी 2012 से लेकर 14 मार्च 2012 के मध्य चुनावी समर में कूदने वाले जातक, यदि स्थितियां अनुकूल रहीं, तो विधान सभाओं में शपथ लेकर अपनी राष्ट्रीय भूमिका निभा सकते हैं? वृषभ राशि की महिला सुश्री उमा भारती हैं, अस्तु राज्यसभा की सीट से चयनित होकर सांसद बन सकती हैं। यह योग अप्रैल या मई 2012 में बन रहा है। नौकरीपेशा वालों के जीवन में यह वर्ष काफी उथल-पुथल का रहेगा। स्थानांतरण, पदोन्नति तथा आकस्मिक रूप ससे अस्वस्थ होने की संभावना बन सकती है। भूमि, भवन, वाहन का सुख, आपको मिलेगा अवश्य, जरा मुस्कराएं तो।
विद्यार्थी समुदाय उच्च राशि में ब्रमणरत शनिदेव की कृपा से अपने शैक्षणिक स्तर में सुधार कर सकते हैं। उच्च शिक्षा अध्ययन हेतु इच्छुक विद्यार्थियों को विदेश गमन के अवसर मिल सकेंगे। शुक्र और शनि की कृपा से छात्रों की अपेक्षा छात्राएं उच्च पदों हेतु चयन प्रक्रिया में सफलता के नए शिखर छू सकती हैं, बशर्ते अध्ययन में समर्पण का बाव रहे। व्यापारी वर्ग चिंतित न हों, अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक संकट इस वर्ष के मध्य में टल जाएगा। मंहगाई कम होगी। ब्याज दरें वर्ष 2-3 बार घटेगीं। उत्पादन बढ़ेगा। फसल अच्छी आएगी। बेरोजगारों को रोजगार के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। व्यर्थ की यात्रा से बचें। बचत करें। ऋण अति आवश्यक होने पर ही, लें।
नीचे लिखी तारीखें आपके जीवन में हलचल न मचा दें, इसलिए सावधान रहें?
(जनवरी 2012) 3, 4, 12, 13, 21, 22, 30, 31
(फरवरी 2012) 8, 9, 10, 17, 18, 26, 27, 28
(मार्च 2012) 7, 8, 15, 16, 17, 25, 26
(अप्रैल 2012) 3, 4, 12, 13, 21, 22, 30
( मई 2012) 1, 2, 9, 10, 18, 19, 20, 28, 29
(जून 2012) 5, 6, 15, 16, 24, 25
( जुलाई 2012) 3, 4, 12, 13, 22, 23, 30, 31
(अगस्त 2012) 8, 9, 18, 19, 27, 28
(सितंबर 2012) 4, 5, 6, 14, 15, 23, 24
( अक्टूबर 2012) 2,3, 11, 12, 13, 20, 21, 29
(नवंबर 2012) 8, 9, 16, 17, 25, 26, 27
(दिसंबर 2012) 5, 6, 14, 15, 23, 24

मिथुन राशि ( का, की, कू,घ, ड़, के, की हा)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन राशि का स्वामी यह बुध माना गया है, जो बुध्दि और विद्या का देने वाला है। इसका अंक 5 है। इसका तत्व आकाश है। यह राशि पृष्ठोदय, शीर्षोदय दोनों प्रकार से उदय होने के कारण उभयोदय मानी गई है। पुरुष राशि, यह दक्षिण-पूर्व दिशा की स्वामिनी। रंग हरा है। इसका निवास गांव या शयनकक्ष माना गया है। जातक का कद लम्बा, यह राशि ऋतु की स्वामिनी है। सौरमंडल में इसको राजकुमार का पद प्राप्त है। इसका आकार त्रिकोण के समान है। इसका अयन दो मास का है।
रंग-रूप : निथुन राशि के जातकों का रूप रंग और भविष्य एकदम स्पष्ट हो जाता है। इस राशि के जातकों का व्यक्तित्व आकर्षक होता है। यह स्वस्थ व हृष्टपुष्ट होते हैं। इनमें बातचीत करने का बड़ा सफल एवं चित्ताकर्षक गुण होता है।
स्वभाव : आकाश तत्व रहने के कारण यह कल्पनाओं में बने रहते हैं तथा प्राय: हवाई महल हबनाते रहते हैं। राशि उभयोदय होने के कारण यह किसी बात पर अटल नहीं रहते। वैसे यह बहुत ईमानदार होते हैं।
स्वास्थ्य : सामान्यत: स्वास्थ्य उत्तम रहता है। जीवन में कफ, नाक, गला, एवं वायु से संबंधित रोग घेरे रहते हैं। कई बार शल्य चिकित्सा की भी आवश्यकता रहती है।
विवाह : इस राशि के जातक प्रेम के मामले में प्राय: असफल रहते हैं। जीवन में प्रेम प्रसंग चलते हैं, पर यदाकदा प्रेम प्रसंग विवाह में परिणित होते देखे गए हैं, किन्तु यह भी किसी सीमा तक सत्य के नजदीक है कि प्रेम विवाह सफल होते रहे हैं। स्त्रियों के प्रति आकर्षण रखते हैं, पर कलंकित होने से डरते भी हैं। कुल मिलाकर मिथुन राशि के जातक का जीवन साधारणतय:उतार-चढ़ाव भरा पर अंतत: सुखमय होता है।
जीवन निर्वाह : वैसे इस राशि के जातक सेवा क्षेत्र में या राजनीति में अपने बौध्दिक चातुर्य से यश, धन,दोनों कमा लेते हैं। चिकित्सा और वकालत के क्षेत्र में ऐसे जातक धन और सम्मान अर्जित करने में सफल होते हैं। जिस भी क्षेत्र में कार्यरत रहते हैं सफलताएं इनकी अनुगामिनी बनती हैं, किन्तु व्दिस्वभाव इनकी विश्वसनीयता सदैव प्रश्न चिह्न बनी रहती है? झूठ बोलने में और जानमानस को विश्वास लेने में ये महाथी होते हैं।
शुभ माह : शुभ दिन बुधवार होता है। बुधवार का प्रथम प्रहर अधिक लाभप्रद है। माह मई, जुलाई और अगस्त भी शुभ है। शुभ दिशा उत्तर-पूर्व या उत्तर- पश्चिम होती है।

वार्षिक भविष्यफल :
वर्ष का पूर्वार्ध रहेगा। मिथुन राशि से तीसरे भाव में मंगल भ्रमण कर रहा है, जो पराक्रम भाव है। पराक्रम भवन में मंगल 21 जून 2012 तक रहेगा। इस दरम्यान मिथुन राशि के जातक राजनीतिक, प्रशासनिक तथा व्यापारिक दृष्टि से सुखद महसूस करेंगे। कृषक समुदाय भी भरपूर फसल होने से धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा।
उच्च राशिगत शनि देश की प्रगति में खनिज सम्पदा से जुड़े व्यवसाय में विकास की नई इबारत लिखने को आतुर हैं।
न्यायालयीन मुकदमों, आयकर से जुड़े प्रकरणों में अनुकूलता परिलक्षित होगी। वर्ष के प्रारंभ में निर्यातक थोड़े कष्ट का अनुभव कर सकते हैं, किन्तु 8 फरवरी 2012 को प्रात: 9 बजकर 33 मिनट से जैसे ही वक्री होंगे, बैंकों की ब्याजदर में गिरावट तथा शासन की उदार निर्यात नीति का लाभ भारतीय उद्योग जगत को मिलना प्रारंभ हो जाएगा। शेयर बाजार अपनी चमक वर्ष के उत्तरार्ध में पुन: पा लेगा। सोने, चांदी, में काफी उतार चढ़ाव बना रहेगा।
जातक संयम रखें, अधिक दुस्साहसी न बने। परिवार में मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। नवीन कार्यों का श्रीगणेश किया जा सकता है। अवरोध दूर होकर लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा। सेवारत जातक पदोन्नति आदेश पाने में सफल होंगे।
आलस्य, परेशानी, थकावट, अस्वस्थता के मनोरोगी मत बनिए। उत्साहित होकर आगे बढ़ें, भाग्य की देवी आपके स्वागत के लिए आतुर है, कृपया उसका स्वागत करें। जब बी मन उदास हो अपने इष्टदेव का स्मरण करें। आत्मीयजनों से अपनी परेशानी बांटें, सारा तनाव चकनाचूर हो जाएगा। अब उन्नति के योग बन रहे हैं। यात्राओं के आयोजनों में सम्मिलित हो जाइएगा। आमोद-प्रमोद के अवसर आएंगे आपके नजदीक । चित्त प्रफुल्लित रखें।
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश पाने वाली युवा शक्ति, अपनी शक्ति को पहचाने, सफलता बस, थोड़ी ही दूर होगी।
अध्ययन रहें, सपने बड़े देखें आईएफएस, आईएएस, आईपीएस के पदों पर भी इस बार मिथुन राशि वाले जातक चुने जा सकते हैं। बस, आवश्यकता है अनवरत प्रस्न्नचित्त होकर 12 से 16 घंटे प्रतिदिन अध्ययनरत रहने की।
चुनावी दंगल या प्रशासनिक फेरबदल के लिए तैयार रहें, मेहनत रंग लाएगी। जोखिम के कार्यों से दूर रहें। वृश्चिक राशि वालों से थोड़ा सावधान रहें। रोमांस पक्ष उज्जवल हो सकता है। यदि प्रेम विवाह में बदल जाए, अन्यथा........?
मान-सम्मान, धन, पराक्रम में वृध्दि, स्वास्थ्य पक्ष निर्बल न रहे, इसके लिए समय- समय पर इसका परीक्षण कराते गहें। भूमि- भवन के कारोबार से जुड़े व्यक्ति मंदी के भय से प्रभावित होंगे। गुप्त शत्रुओं से सावधान। राशि रत्न पन्ना धारण करें, विधि विधान से विवाह योग्य जातक तैयार रहें, शहनाई की गुंज सुनाई दे सकती है उनके निवास पर।


कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डी, डू, डे,डो)
कर्क स्त्री राशि है। आकाश में इसकी आकृति केकड़े के समान है। स्वभाव इसका शुभ्र है। चर राशि और इसका उदय पृष्ठोदय है। दक्षिण दिशा की स्वामिनी अंक है। स्वामी चंद्रमा है। रंग गुलाबी और कीट-पतंगों में गणना है। जाति ब्राह्मण। हृदय पर इसका स्थान है। ऋतु वर्षा है। रत्न, मोती, स्वाद लवण (नमकीन), धातु इसकी अस्थि और चर्म है। आकार गोल है। इस राशि की अधिदेवी मां पार्वती जी हैं। इसकी गणना श्रावण मास है। चंद्रमा के बारे में आज का विज्ञान पूर्णत: विज्ञ है। चंद्रमा पृथ्वी के निकट सबसे पास का ग्रह है। चंद्रमा का सीधा संबंध मन और मस्तिष्क से है।
स्वभाव, रंगरूप : इस राशि के जातक भावुक चंचल एवं रसिक होते हैं। हथेलियों पर इसका स्थान कनिष्ठा के नीचे माना गया है। काव्यात्मक प्रवृत्ति वाले जातक स्त्री-पुरुष दोनों सुन्दर होते हैं। उनके नेत्र बड़े और सजल होते हैं। वाणी बड़ी मधुर होती है। रंग प्राय: गौर वर्ण होता है। चेहरा चंद्रमा के समान गोल और वदन सुडौल होता है। भावुकता के कारण छोटी सी बात भी इनको चुभ जाती है। उसका बुरा मान लेते हैं। इनका शरीर कोमल पर पंजा मजबूत होता है। यह तुनक मिजाज और गर्वीले होते हैं। स्मरण शक्ति बहुत तेज होती है। उदार हृदय के होने के कारण, इनके शत्रु भी कम होते हैं।
दाम्पत्य जीवन : इनका दाम्पत्य जीवन साधारणत: सफल ही रहता है। स्वभाव नरम-गरम रहता है। अपनी पत्नी और संतान पर इनका अनुशासन कम ही होता है। घूमने-फिरने का इन्हें बहुत शौक होता है। परिवार में इनका मान-सम्मान जीवन भर बना रहता है। बावुक होने से अनावश्यक मानसिक पीड़ाएं भी भोगतते हैं। पति-पत्नी में गहरा प्रेम होता है।
स्वास्थ्य : संवेदनशील होने के कारण मानसिक व्यथाएं अवश्य झेलते हैं किन्तु स्वस्थ भी रहते हैं। सामान्यत: वृद्धावस्था में ये जातक नीरस जीवन जीते हैं। संतानों से अत्यधिक प्रेम होने के कारण वृद्धावृस्था में जब उपेक्षा झेलना पड़ती है, तो दु:खी और मनोरोगी भी हो सकते हैं? हृदय संबंधी रोगों के अलावा किडनी, केंसर आदि से प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। आपरेशन तो होंगे ही इस राशि के जातकों के, क्योंकि उम्र भी लम्बी पाते हैं। अगर ग्रहीय योग अनुकूल रहें तो भूमि, भवन, वाहन का सुख यथोचित मिलता है, तीर्थ यात्राएं भी इनके लिए वरदायनी हैं।
व्यवसाय : तेल अथवा द्रव्य पदार्थों का व्यवसाय, पत्रकार, नर्तक, साहित्यकार, फिल्मी नायक, खलनायक, कारखानों के संचालन में प्रवीण, जलीय क्षेत्रों के उद्योग तथा कृषि से जुड़ा व्यवसाय भी इस राशि के जातकों को लाभप्रद है। प्रशासनिक क्षेत्र/न्यायालयीन सेवा क्षेत्रों में बड़े प्रभावी तथा यशस्वी जीवन यापन करते हैं।
शुभ माह एवं वर्ष
शुभ दिन - सोमवार, मंगलवार एवं शुक्रवार। शुभ माह- फरवरी, अप्रैल, जून, सितम्बर और नवम्बर तथा शुभ वर्ष - 28,35,40,46,55,64 है।

वार्षिक भविष्यफल
कर्क राशि पर शनि का 14 नवम्बर 2011 से अढैय़ा प्रारंभ हो चुका है। मिथ्या कलंक लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, अत: अपनी जीवन शैली में सुचिता, शालीनता तथा व्यवहारिक जीवन में पारदर्शिता बनाएं रखें। स्वास्थ्य की दृष्टि से 21 जून तक सावधान रहें, क्योंकि सिंह राशि में भ्रमण करता मंगल अस्वस्थता की स्थिति में आपरेशन अथवा गहन चिकित्सा की स्थिति में जातक को चिकित्सकों की शरण में ले जा सकता है? अस्तु, अस्वस्थता की स्थिति में चिकित्सीय परामर्श समय-समय पर लेते रहें। खर्च की अधिकता एवं आय में गिरावट आपके परिवार का बजट बिगाड़ सकती है। कृपया, अनावश्यक खरीदी में रुचि न लें, अन्यथा ऋण और ब्याज आपकी आर्थिक व्यवस्था को गड़बड़ा सकता है। परिवार में मांगलिक आयोजन सम्पन्न होंगे। जिन जातकों की कुंडली में शनि, गुरु, मंगल अथवा बुध स्वक्षेत्री उच्चराशि या वर्गोत्तम हैं तो ऐसे शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है। यूपीएससी अथवा पीएससी या बैंकिंग के साथ निजी क्षेत्रों की कंपनियों में सर्विस मिलने के शुभ संकेत हैं। कृपया ध्यान रखें- भाग्य के साथ कर्म करना अनिवाय है। मेहनत सफलताओं के द्वार पर खड़ा कर सकती है। विवाह योग्य जातक दाम्पत्य जीवन में प्रवेश के सुखद अनुभव का अहसास कर सकेंगे। गर्भवती महिलाएं सुकुमार, सुन्दर शिशुओं की जननी बनने का सौभाग्य प्राप्त करेंगी। इस राशि के जातकों को भ्रमण हेतु विदेश यात्राओं के सुयोग तो बनेंगे ही, साथ ही उच्च शिक्षा हेतु कर्क राशि के अनेक छात्र विदेशों में विद्याध्ययन के लिए प्रस्थान करते भी नजर आएंगे। चेष्टारत रहें, स्वास्थ्य नरम, हल्की दुर्घटना से बचें, संतान पक्ष से चिंतित रहने वाले जातक सतर्क रहें। यथा संभव प्रयास करें कि बच्चों के मनोबल न गिरें अपितु, उत्साहवर्धन करते रहें। नेत्र पीड़ा, पाचन संस्थान में गड़बड़ी से प्रभावित होने पर चिकित्सीय सलाह में देरी सुखद नहीं रहेगी।
भूमि, भवन, सड़क निर्माण आदि क्षेत्रों से जुड़े व्यवसायी कार्य करवाने में सावधानी रखें, अन्यथा जांचों के दायरे आपकी प्रतिष्ठा के लिए घातक हो सकती है। राजनैतिक क्षेत्र से जुड़े जातक सावधान रहें। व्यर्थ की मृगमारिचिका में न पड़ें। शनि का अढ़ैया आयकर विभाग या लोकायुक्त अथवा पुलिस की वक्र दृष्टि से आपका हाजमा बिगाड़ सकता है। सेवारत अधिकारी, कर्मचारी स्थानांतरण के द्वारा अपनी पदस्थापना को बदलते नजर आएंगे। मोती रत्न विधि विधान से धारण करें। वर्ष का उत्तरार्ध व्यापार जगत के लिए शुभ होगा।
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी- 7,8,9,16,17,18,25,26। फरवरी- 4,5,13,14,21,22,23। मार्च - 2,3,11,12,20,21,30,31। अप्रैल- 8,9,16,17,18,26,27। मई- 5,6,13,14,15,23,24। जून- 1,2,10,11,20,21,29,30। जुलाई- 7,8,17,18,26,27। अगस्त- 3,4,5,13,14,22,23,30,31। सितम्बर- 10,11,19,20,27,28। अक्टूबर- 7,8,16,17,24,25,29। नवंबर - 3,4,12,13,21,22,30। दिसंबर- 1,9,10,11,18,19,28,29।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
भारतीय ज्योतिष के अनुसार सिंह पांचवीं राशि है। इस राशि का स्वामी तेजस्वी ग्रह सूर्य है। सूर्य के अधिपत्य देवता रुद्र अर्थात भगवान शिव हैं। सूर्य ग्रह के चारों ओर सभी ग्रह नृत्य करते नजर आते हैं। सूर्य ही ब्रह्माण्ड का नियंत्रण कर्ता है। इसलिए यह राशि समस्त राशियों में सर्वोपरि है। आकृति के समान पुरुष राशि, क्षत्रिय वर्ण अंक एक स्थिर राशि। इस राशि की गणना शीर्षोंदय तथा अग्नि तत्व है, रंग भूरा और चतुष्पदी राशि है। प्रकृति मित्र है, दिशा पूर्व है। ऋतु इसकी ग्रीष्म है। रत्न माणिक्य, स्वाद कटु, इंद्रिय ज्ञान नेत्र हैं। सौर मंडल में यह राजा है।
स्वभाव : इस राशि के जातकों का कंधा चौड़ा तथा शरीर सुदर्शन होता है। इनके पंजे मजबूत होते हैं। शेर के समान स्फूर्ति तथा छल-बल होता है। नजर बड़ी तेज होती है। शीर्षोदय राशि होने के कारण मुंह पर ही सब कुछ कह डालते हैं। एक नम्बर के लड़ाकू और बहादुर होते हैं। इस राशि का जातक दबकर नहीं रहता। क्रोध, अंहकार तथा शूरता इनका विशेष गुण होता है। इनकी चाल बड़ी अकड़ भरी (शेर के समान) होती है। अपने उत्तेजक स्वभाव और दबंग होने के कारण वह परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लेते हैं।
दाम्पत्य जीवन : इस राशि के व्यक्ति प्रबल भोगी होते हैं। संतान सुख इन्हें मिलता अवश्य है किन्तु इनके स्वभाव के कारण सम्मान और स्नेह देने वाली संतान भी इनसे दूर भागती है। वैसे सिंह राशि वाले जातकों का दाम्पत्य जीवन पूर्वाद्र्ध की अपेक्षा उत्तरार्ध में कलहपूर्ण रहता है। परिवार में अपना अधिकार जमाने की दृष्टि से इनकी तुनकमिजाज प्रकृति कष्टकारी होती है। जीवन साथी सुन्दर और परिवार को सुव्यवस्थित रखने में प्रवीण होता है।
व्यवसाय : इस राशि के जातक उत्तम राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, राजदूत, तानाशाह नेता किन्तु स्वभाव से उदारवादी होने से कुटिल प्रवृत्ति के व्यक्तियों द्वारा ठगे भी जाते हैं।
स्वास्थ्य : इस राशि के जातकों को उदर संबंधी रोग, उच्च रक्तचाप, जोड़े में दर्द, यदाकदा हृदयरोग से पीडि़त जातक भी देखे जाते हैं। इनकी रसना (जीभ) काने की आदत से लाचार होती है। अत: मधुमेह को भी दावतनामा दे आते हैं।
शुभदिन-शुभ माह : रविवार, बुधवार और शुक्रवार शुभ दिन हैं। जनवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर शुभ वर्ष हैं।

वार्षिक भविष्यफल
शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति वर्ष मनाने में सिंह राशि वाले जातकों को थोड़ा धैर्य रखना होगा। क्योंकि मंगल इस राशि में भ्रमण कर रहा है। 24 जनवरी 2012 को शाम 7.11 बजे से वक्री होते ही सिंह राशि वालों को राहत मिलेगी। इस राशि के जातक अपेक्षित लाभ प्राप्त करेंगे। शीघ्र ही, शुभ ग्रहों के ग्रहीय योगों के कारण भाग्य साथ देगा। ऋण वसूली के लिए यह वर्ष उत्तम रहेगा। भूमि, भवन, वाहन खरीदी के योग सिंह राशि के जातकों के लिए शुभ रहेंगे। व्यवसायिक क्षेत्र में पूंजी निवेश की संभावना बढ़ेगी। जिसके लाभकारी परिणाम तत्काल भले ही न मिलें, किन्तु आने वाले वक्त में लाभ ही लाभ नजर आएगा। 19 मई 2012 को दोपहर 2.26 बजे से समय का पलटवार ऐसा होगा कि इस राशि के जातक अपने अपने क्षेत्रों में सफलता के नए परचम लहराएंगे। सेवारत कर्मचारी, ्धिकारी पदोन्नति, स्थानांतरण से लाबांवित होंगे। विद्यार्थी समुदाय मेहनत से की गई पढ़ाई के पुरुस्कार स्वरूप प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर हर्षोल्लास के साथ नई नौकरियों को पाने में सफल होंगे। पांच राज्यों में जहां विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, फरवरी 2012 में, सिंह राशि के जातकों को उनकी ग्रहीय अनुकूलताएं विजयश्री प्राप्त कराने में अवसर दे सकती हैं। 13 अप्रैल को रात्रि 8.46 बजे से राशि स्वामी सूर्य जैसे ही अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि के जातकों के लिए विदेश यात्राएं, फिर चाहे टूरिज्म के अन्तर्गत हो या विदेश में अध्ययन के लिए जाना हो - सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे। 3 फरवरी 2012 से शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करते ही आके एकांकी जीवन में सुन्दर, सलोने जीवन साथी की कल्पना साकार हो सकती है, तैयार रहें। वे विवाह योग्य जातक जिन्हें सर्विस करने वाला जीवन साथी चाहिए, भी मिल सकता है। 23 सितंबर 2012 को मंगल जैसे ही वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा मकान नहीं तो प्लाट खरीदने की योजना बना लीजिए। सपनों का महल प्रतीक्षा सूची में डाल दीजिएगा। आशातीत सफलताएं प्राप्त हो सकेंगी। पर रोग और दुश्मन को कम न समझें। बैंकिंग व्यवस्थाएं अनुकूल नजर आएंगी। ब्याज दरें 3 फरवरी 2012 के बाद घटना शुरू हो जाएंगी। वाहन खरीदने की योजना बना डालिए। शेयर बाजार फिर से अगड़ाइयां लेने वाला है। अच्छी कंपनी के शेयर खरीद लीजिए। खासकर चुनिंदा बैंकिंग स्टाक या फार्मा सेक्टर 6 माहों में ज्यादा नहीं तो 25 से 30 फीसदी मुनाफा बनाएं रखें। भाग्यवृद्धि पत्नी के सहयोग से संभव है। लाभ मार्ग प्रशस्त होगा। जीवन में संतुलन बनाए रखें। मनोविनोद का भाव लिए शत्रुओं को भी क्षमा करें। यह वर्ष चमत्कारी रहेगा। स्वास्थ्य के विषय में सावधान रहिए। अन्यथा डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ सकता है। इस राशि के अधेड़ और उम्रदराज जातक आंखें सेकने की आदत से बाज आएं अन्यथा प्रतिष्ठा के साथ शरीर में अस्थि भंजन का सुयोग बन सकेगा। अधिकारी हो या कर्मचारी अथवा नेतागण काली कमाई से दूर रहें, इस राशि के जातकों के लिए यह वर्ष उपहारों से भरा रहेगा।
इन राशियों से सावधान रहें : जनवरी- 1,10,11,25,26,27। फरवरी- 6,7,8,15,16,24,25। मार्च- 4,5,6,13,14,22,23,24। अप्रैल- 1,2,9,10,11,18,19,28,29। मई- 7,8,16,17,26,27। जून- 3,4,12,13,14,22,23। जुलाई- 1,2,9,10,11,19,20,28,29। अगस्त- 6,7,16,17,24,25,31। सितम्बर- 2,3,4,12,13,21,22,29,30। अक्टूबर- 1,9,10,18,19,27,28। नवंबर- 5,6,7,14,15,23,24। दिसंबर- 3,4,12,13,20,21,22,30,31।

कन्या राशि ( टो, पा, पी, यू, ष, ण, ठ, पे, पो)
कन्या राशि का स्वामी बुध है। कुछ ग्रहों का प्रभाव इतना होता है कि वे दो राशियों को घेर लेते हैं। बुध भी एक ऐसा ही ग्रह है जिसने मिथुन और कन्या राशि का क्षेत्र प्रभावित कर रखा हैं।
आकृति : हाथ में दीप लिए कन्या के समान है। इसका तत्व पृथ्वी हैं। शीर्षोदय राशि हैं। दक्षिण दिशा की स्वामिनी हैं। इसका निवास हरियाली या पीली भूमि है। शरीर में इसका स्थान अमर हैं। यह व्दिस्वभाव राशि है।
रूप-रंग : इस राशि के जातक ग्रहों के प्रभाव से गौर अथवा गेहुंए वर्ण के होते हैं। इनका शरीर बहुत कोमल होता है। पुरुष जातक में स्त्री तत्व के गुण अवश्य होते हैं और स्त्रियों में पुरुषतत्व के। इस राशि के जातकों की कमर बड़ी लचीली होती है। चेहरा लम्बोदरा, नाक सुडौल और सुन्दर होती है। पुरुष जातक कला क्षेत्र में माहिर होते हैं। बौध्दिक दृष्टि से दूसरों को प्रभावित करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
स्वास्थ्य : इनका स्वास्थ्य सामान्यत: गड़बड़ ही रहता है। अधिक नाजुक मिजाज होने के कारण जरा सा कष्ट भी इन्हें बैचेन कर देता है। त्वचा संबंधी रोग भी अधिक होते हैं। सोचने की आदत या अधिक कल्पनाशील होने के कारण मस्तिष्क संबंधी रोग होने की संभावना भी प्रबल होती है। इनमें सहनशीलता गजब की होती है।
दाम्पत्य जीवन : व्दिस्वभाव, व्दिपद, पृथ्वीतत्व, निवास हरियाली या गीली भूमि तथा ऋतु शरद होने के कारण इनका दाम्पत्य जीवन सामान्यत: सुखमय होता है। बुध्दिजीवी होने के कारण जीवन में समझौतावादी दृष्टिकोण अपना कर गृहकलह से बच निकलने में प्रवीण होते हैं। व्दिस्वभाव राशि होने के अपनी कुटनीतिक चालों से परिवारजनों को भ्रमित कर यथासमय परिवार में संतुलन बनाए रखने में सफल हो जाते हैं, किन्तु कभी-कभी गृह कलह
की भीषणता भी इनके व्यक्तित्व को कलुषित कर देती है।
व्यवसाय : इस राशि के जातक अध्यापनक्षेत्र में कुशल होते हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी कुटिल नीति से दूसरों के कोपभाजन से बच निकलने में दक्ष होते हैं। चिकित्सा एवं वकालत के क्षेत्र में सामान्यत: सफल होते हैं, किन्तु व्यापार में कभी-कभी अपनी पूंजी भी खो देते हैं। ऋणी होने क ी स्थिति में आर्थिक संकट को दावतनामा भी देते रहते हैं।
रंग और रत्न : इस राशि का हरा और काला रंग प्रिय है। रत्न इनका पन्ना, ओनेक्स एवं हरा हकीक भी है। यह रत्न अपनी कनिष्ठा अंगुली में विधि विधान से धारण करें।
शुभ अंक, शुभ दिशा : अंक ज्योतिष की सूक्ष्म गणना से इस राशि का अंक 5 है। दिशा उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम शुभ है।
भविष्य फल : शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण आपके लिए नये वर्ष में कुछ नई सौगात लायेगा। आप सोचेंगे, सौगात क्या हो सकती है। यदि आप विवाह योग्य अविवाहित हैं, तो जीवन साथी का सौभाग्यकारी स्पर्श पा सकेंगे। यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा में प्रवेश की तैयारी में हैं तो सफलता के साथ नौकरीरूपी रूपसी का स्वागत कर सकेंगे। यूपी एसएससी, पीएससी की परीक्षा में उत्तीर्ण होते ही राज्य प्रशासनिक अथवा पुलिस प्रशासनिक सेवा से जुडऩे का सौभाग्य आपको मिल सकता है। लालबत्ती के सपने साकार करने में जुट जाइए प्राणपण से। सफलता की गारंटी शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण तो देगा ही आपको। राहु की 11 दृष्टि राशि के जातकों के लिए आय के नये-नये स्रोत बी प्रदान करायेगी।
अप्रत्याशित ढंग से पदोन्नति, परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न होने के सुयोग। कारोबार का विस्तार आपकी आर्तिक सम्पन्नता का पथ प्रशस्त करेगा।
हज यात्रा आपको हाजी बनाएगी। पुण्य लाभ कमा लें, उस दो जहां के मालिक की इबादत से। वह सब मिलेगा,जो आपकी दिली ख्वाहिश है।
तीर्थयात्री भी बनें, मन को सुकून मिलेगा। आरजुओं की फेरिस्त मत बढ़ाए, यह वर्ष सफलताओं की इबारत को लिखने को आतुर नजर आयेगा।
यदि आप उद्योग जगत से जुड़े हैं तो यह वर्ष गत वर्ष की अपेक्षा आपके लिए ज्यादा लाभप्रद रहेगा। आपके व्यापार, व्यवसाय में तरक्की होगी। निर्माण क्षेत्र अर्थात भवन, सड़क, पुल या संस्थागत इमारतों के निर्माण कार्य से जुड़ें। यदि आपका संस्थान है तो विश्वास रखिएगा, आपको नए ठेके मिलेंगे। लागत में कमी आएगी। व्यापार के लिए क्या ऋण चुकाने में भी वर्ष 2012 अनुकूलता प्रदान कराएगा।
भाग्योदय लेकर आया है : यह वर्ष आपका, मन की खिन्नता को दूर भगाइए, नीरसता सरसता में बदल दीजिएगा। संतान अपने अध्ययन में मन लगाएं, ऐसी व्यवस्था कीजिएगा। दुस्साहस न कर, धैर्य से काम लें, लाभ होगा। पैतृक सम्पत्ति से जुड़ा कोई विवाद है आपका तो मिल बैठकर सुलझाएं। ऋण लेने या देने में सावधानी बरतें। नवीन सहयोगी बनेंगे। तामसी वृत्ति त्यागें। अनावश्यक व्यय न करें, आमदनी बढ़ेगी। परिजनों से मनमुटाव को आपसी समझ से आत्मीयता के रूप में विकसित कीजिएगा। धन संचय अवश्य करें। गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य शिशु को जन्म देंगी। जननी बनने पर प्रभु वरदान स्वीकारें। प्रसन्न रहेंगे, तो रोग, शोक छूमन्तर हो जाएगा। हल्का संगीत सुनें। थोड़ा योग भी मन और तन को मुस्कान देगा।
निम्न तारीखों से सावधान रहें- जनवरी 2012 - 2, 3, 4, 12, 13, 21, 30. 31, फरवरी 2012 - 9, 10, 17, 18, 26, 27, 28, मार्च 2012- 7, 8, 16, 17, 25, 26, अप्रैल 2012- 3, 4, 12,13, 21, 30, 32, मई 2012- 1, 2, 9, 10, 18, 19, 20, 26, 27, जून 2012- 6, 7, 15, 16, 24, 25 जुलाई,2012- 3,4, 15, 16, 22, 23, 30, 31, अगस्त- 8,9,10,18,19,26,27। सितंबर- 4,6,15,16,23,24। अक्टूबर- 2,3,12,13,20,21,29,30। नवंबर-8,9,14,15,25,26,27। दिसंबर - 5,6,7,14,15,23,24।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
यह राशि भी वृषभ से संबंध रखती है। शुक्र इस राशि का स्वामी ग्रह है। आकाश मंडल में इसकी विभाजन आकृति तराजू के समान है। इसी कारण इसका नाम तुला राशि पड़ा। आकाश तत्व, शीर्षोंदय राशि, पश्चिम दिशा की स्वामिनी। निवास स्थान बाजार, हाट। द्विपद राशि। शरीर में इसका स्थान नाभि है। प्रकृति वात और कफ है। ऋतु बसंत, स्वाद अम्ल। सौर मंडल के मंत्री परिषद में मंत्री पद से संबंधित है। इन्द्रिय ज्ञान स्वाद है। आकार अष्टकोण है।
रंग रूप और स्वभाव: इस राशि के जातक न्याय और आदर्श को बहुत महत्व देते हैं। धार्मिक परंपराओं और समाज के रीति-रिवाजों का यह उल्लंघन नहीं करते हैं। इनका कद प्राय: मध्यम होता है। वाकपटु होते हैं। नाक-नक्श औसतन आकर्षक होते हैं। ललाट सुन्दर और आंखें बड़ी सौम्य होती हैं। इनका शरीर निर्माण बड़ा संतुलित होता है। वणिक प्रवृत्ति के कारण अपना स्वार्थ हर काम में देखते हैं। इनका हर क्रिया-कलाप नपा तुला होता है।
दाम्पत्य जीवन : इनका दाम्पत्य जीवन बड़ा संतुलित होता है। अगर जीवनसाथी की वृष तथा तुला राशि नहीं है तो भी दाम्पत्य जीवन को संतुलित रखने की चेष्टा, ऐसा जातक अवश्य करता है। प्यार, मनुहार में इनका दाम्पत्य जीवन न अधिक प्यार, न ही अति मन मुटाव, दूसरे शब्दों में कहें तो इस राशि के लोग संभव आदर्श दम्पत्ति होते हैं, सीमित संतान। बड़ा संतुलित परिवार। इस राशि के जातक सामान्यत: भाग्यवान होते हैं। दु:खों में भी सुख के क्षण खोज लेते हैं। जीवन में अधिकांश जातक सफलतम होते देखे गए हैं।
व्यापार: व्यापारी मानसिकता में इस राशि के जातक जीते हैं। चाहे वे व्यापारी हों या वकील अथवा चिकित्सक, राजनीतिज्ञ हों या सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति हों, धन के अपव्ययी नहीं होते। आय साधन भले ही काली या सफेद कमाई के हों, धन संग्राहक होते हैं। संचय करने का तरीका फिक्स डिपाजिट हो, शेयर्स हो, भूमि भवन या स्वर्णाभूषण। ऐसे जातक अपनी सामथ्र्यतानुसार जोडू तो होते ही हैं, साथ ही यशस्वी भी होते हैं।
रत्न, रंग, स्वास्थ्य : इन्हें सभी रंग पसंद होते हैं। मूलत: ये रंगीन तबियत के होते हैं फिर भी नीला और सफेद रंग इन्हें विशेष रूप से पसंद है। हीरा पहनने की ललक अवश्यक रखते हैं, असली डायमंड न पहन पाएं तो अमेरिकन डायमंड से काम चला लेते हैं। कामुकता इनकी अंतरंगता की पहचान है। यदि स्वास्थ्य के प्रति असावधान रहे तो गुप्तरोग, मूत्ररोग, मधुमेह, गुर्दों से संबंधित रोग, नेत्र रोग से भी प्रभावित हो सकते हैं।
शुभ दिन, शुभ माह : सोमवार, मंगलवार, गुरुवार। फरवरी, अप्रैल, मई, जून, नवंबर। शुभ वर्ष : 25,30,34,42,51,63,66।

वार्षिक भविष्यफल
शनिदेव की साढ़े साती का द्वितीय चरण और गोचर में उच्च राशिगत शनिदेव आपकी राशि तुला में ही पदस्थ हैं। अत: स्पष्ट है आपकी राशि पर, जो भी घटित होगा वह शुभ ही होगा। किसी भी व्यवसाय की शुरुआत करें, शनिदेव की कृपा से अनुकूल होगा। किन्तु स्मरण रहे, भाग्य के साथ कर्म का योगदान कभी भी विस्मृत न करें। यदि आप पार्टनरशिप में कोई उद्योग प्रारंभ करना चाहते हैं, तो सारे पार्टनरों की कुंडली मिलवालीजिए- यदि ग्रह और गुण योग मिल रहे हों, तभी श्रीगणेश कर दीजिए। नए व्यवसाय, नई कम्पनी का, नए भवन में निवास या ऑफिस खोलने का अवसर मिल सकता है। आत्म विश्वास को फौलादी बनाएं। सेवारत कर्मचारी, अधिकारी जो पदोन्नति की स्थिति में प्रतीक्षारत हैं, वे तैयार रहें। नई पदस्थापना के लिए ग्रह योग अनुकूल हुए, तो वर्ष 2012 आपको करिश्माई सिद्ध होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश के इच्छुक जो पीईटी, पीएमटी या आईआईटी में सफलता के लिए चिंतित हैं, बेफिक्र रहें, 12 से 16 घंटे अध्ययन में तन्मयता से जुटे रहे। इस राशि के जातकों को इंजीनियर या डाक्टर्स बनने की तमनन्ना अवश्य पूरी होगी। अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी सफलता की सौगात लेकर आएगी- आपके द्वार पर- बस तैयारी में जुट जाएं- सफलताएं आपके सपने साकार कर देगी। उम्र बढ़ती जा रही, विवाह की। पर या तो कुंडली नहीं मिल रही - या दहेज पर मामला अटका है। मंगली कुंडली शुभ होती है, कालसर्प योग वाले जातक ऊंचाई छूते हैं। दहेज की नहीं, भाग्यवान कुंडली को देखिये, भाग्य की ताकत से इतनी सम्पन्नता आएगी कि सम्हाले नहीं सम्हाली जाएगी। चट मंगनी-पट विवाह की कहावत चरितार्थ कर लें।
3 फरवरी 2012 को शुक्र अपनी उच्च की राशि मीन में प्रवेश करेगा। शहनाई बजने दीजिए-जीवन साथी के साथ प्याह मोहब्बत का लुफ्त उठाइये। यात्रा पर निकल जाइये। विवाह जोड़े उम्र को न देखें, अपने जीवन साथी को प्यार से तो निहारें। काम धंधे वाले- पैसा तो कमा लेते हैं परन्तु स्नेह की परिभाषा, आत्मीयता से भरा रोमांचकारी स्पर्श जीवन का आनंद पैसा नहीं, कोठिया भी नहीं है। न भारी भरकम पद। न बैंक बैलेंस- सब धरा रहता है। तुला राशि वाले जातक नेता हो या व्यापारी अथवा अधिकारी परिवार में तलाशें- आत्मीयता से भरी स्नेहिल मुस्कान। इस राशि के जातक इस वर्ष उपलब्धियों की दास्तान लिख सकेंगे, कैसी? यह आपकी जीवन शैली पर निर्भर है।
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी- 5,6,7,14,15,16,23,24। फरवरी- 1,2,3,11,12,19,20,29। मार्च- 9,10,17,18,19,28,29। अप्रैल- 6,7,14,15,23,24,25। मई- 3,4,11,12,21,24,30। जून- 7,8,9,18,19,26,27। जुलाई- 5,6,14,15,16,24,25। अगस्त - 1,2,11,20,21,29,30। सितम्बर- 7,8,16,17,25,26। अक्टूबर- 4,5,14,15,22,23,31। नवंबर- 1,10,11,18,20,28,29। दिसंबर- 7,8,16,17,25,26।


वृश्चिक राशि (तो, न, नी, नू, ने, नो, या यि, यू)
इस राशि का अंक 9 है। यह राशि स्थिर राशि है। तत्व जल, शीर्षोंदय तथा पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। विप्र जाति, स्त्री संज्ञक। निवास वृक्ष तथा दिनबली है। कटि प्रदेश के नीचे के अंग इस राशि से प्रभावित हैं। सौर मंडल में इसका आकार डंक उठाये बिच्छू के समान है, इस कारण इसका नाम (बिच्छू) वृश्चिक है।
रंग-रूप : इस राशि के जातक अधिकांश श्याल होते हैं। सामान्य कद काठी के होते हैं। स्वभाव कुटिल होता है तथा बदला लेने का भाव अवश्य रहता है। इस राशि के कुछ जातक स्वस्थ हृष्ट-पुष्ट तथा मोटे होते हैं। चेहरा तेजस्वी होता है। बहुत साहसी और क्रोधी होते हैं।
स्वभाव : इस राशि के जातक बहुत अवसरवादी होते हैं। समय पडऩे पर पैर छूना और काम निकल जाने पर आंखें दिखाना इनके लिए साधारण बात है। अपने रिश्तेदार तथा मित्रों को भी डंक मारने में नहीं चूकते। व्यंगबाण छोडऩा, दूसरों की हंसी उड़ाना इनका विशेष स्वभाव होता है। गजब की चालाकी और फुर्ती इनमें होती है। यदि इस राशि का जातक अपराधी प्रवृत्ति का होगा, तो शीघ्र पकड़ में नहीं आ पाएगा, फिर चाहे साधारण अपराधी हो अथवा राजनीतिज्ञ या प्रशासनिक क्षेत्र की बड़ी आसंदी पर बैठा आदमी हो।
दाम्पत्य जीवन: इस राशि का जातक अपने जीवन साथी पर भी व्यंगात्मक वाणी का उपयोग करता है। ऐसा जातक विवाहित महिलाओं के जीवन में प्रवेश पाने की कला में माहिर होता है किन्तु इसी राशि की महिलाओं से ऐसे जातक घबराते बी हैं। संतान सुख मिलने न मिले किन्तु संतानें होती अवश्य हैं। कुल मिलाकर दाम्पत्य जीवन कलहमय होता है।
व्यवसाय: इस राशि के जातक व्यंग शैली के अच्छे साहित्यकार होते हैं, सेना, पुलिस, औषधि निर्माता, चिकित्सकों में सर्जन, खदानों के व्यवसाय के साथ विल्डर्स भी सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हैं। फिल्मी दुनिया में इस राशि के जातकों की भरमार है।
रत्न व रंग : रत्नों में मूंगा, लाल हकीक इसके विशेष रत्न हैं। काला, लाल रंग शुभ है।
शुभ दिन, माह और वर्ष : सोमवार, मंगलवार और गुरुवार, मार्च अप्रैल, जून, जून, जुलाई और नवम्बर। वर्ष : 25,40,45,56,63।

वार्षिक भविष्यफल
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह वर्ष हंगामेदार हो सकता है। आपकी जीवन शैली और आपकी कार्यप्रणाली निश्चित करेगी कि आन मिलो सजना। हड़बड़ाइये मत। चैतन्य अवश्य हो जाइयेगा। शनि की साढ़े साती का शुभारंभ हो चुका है। शनि देव तो न्याय के देवता हैं। यदि आप शालीन, सुचितापूर्ण जीवन शैली के जातक हैं- तो शनिदेव का अनुग्रह आपको रंक से राजा बना सकता है। अर्थात् सफलताओं के प्रवेश द्वार खोल देंगे और यदि आप कुत्सित विचारों वाले या भ्रष्टाचार में लिप्त मानव हैं, तो सम्हल जाइयेगा? शनिदेव का न्याय दण्ड आपके अस्तित्व को मटियामेट कर सकता है। भूमि, भवन अथवा निर्माण कार्यों से जुड़े जातकों के लिए भूमि पुत्र मंगल की कृपा आशातीत सफलताएं दिला सकती है। परिवार में मांगलिक कार्यों के सुयोग बनेंगे। वर्षों से दिल में चाहत लिए वे जातक जो सोचते होंगे- मकान नहीं तो प्लाट ही खरीद लें? मेरा सोच है कि शनिदेव का अनुग्रह और मंगल देव की कृपा से आपके लिए अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने का सुयोग अवश्य मिलेगा। वृश्चिक राशि के जातक उच्च शिक्षा की प्राप्ति हेतु विदेश जाने की योजना के लिए प्रयासरत रहे, सफलता संभव है। संतानपक्ष की ओर से शुभ संकेत देने वाला वर्ष रहेगा। पारिवारिक मनमुटाव को आप अपने बौद्धिक चातुर्य से अपनत्व में बदलें, आपके ग्रह योग आपके साथी बने रहेंगे। स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें। अन्यथा आपरेशन की नौबत भी आ सकती है। जीवन संयमित रखें। वाद-विवाद को सुलह में बदलें, जोखिम के कार्यों से बचें। फरवरी, मार्च में जोड़ों का दर्द, 11 मई 2012 के बाद रक्तचाप अथवा फेफड़ों संबंधी समस्या उभर सकती है। सावधानीपूर्ण जीवन जियें, रोगों को दावतनामा न दें। कहने का अर्थ है खानपान, नियमित दिनचर्या, योगासन, उम्र के अनुसार व्यायाम प्रात: घूमने की आदत तथा घी-तेल से तली चीजों से परहेज करें तो मेडीकल स्टोर्स देखने की नौबत नहीं आएगी। जब भी अवसर मिले ठहाका मारकर हंसिये। बच्चों को प्यार दीजिएगा। जीवन साथी की भावनाओं की कद्र कीजिएगा। परिवार के बुजुर्गों के साथ कुछ पल बिताने तथा उनसे बात करने से आशीष मिलेगी। वह सभी को सुखमय होगी।
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी- 8,9,16,17,25,26। फरवरी- 4,5,13,14,22,23। मार्च - 2,3,4,11,12,20,21,30। अप्रैल- 7,8,9,16,17,26,27। मई- 5,6,13,14,15,24,25। जून- 1,2,10,11,20,21,29,30। जुलाई- 8,9,17,18,26,27। अगस्त - 3,4,5,13,14,22,23,30,31। सितंबर- 8,9,10,19,20,27,28। अक्टूबर- 6,7,8,16,17,25,26। नवंबर- 3,4,12,13,21,22,30। दिसंबर - 1,2,9,10,11,18,19,28,29।

धनु (ये, यो, भ, भू, ध, फ, ढ, भे)
यह राशि वर्ग की 9वीं राशि है और इसका सभी राशियों में नौ के कारण महत्व है। इस राशि का अधिदेवता गुरु (वृहस्पति) को काल पुरुष में ज्ञान के स्थान पर माना गया है। इस ग्रह के विषय में कहा गया है कि यह शरीर से सामंत है, नेत्र शहद के समान हैं, गौर वर्ण और श्याम केश तथा लम्बे कद का है।
द्विस्वभाव राशि, पृष्ठोदय, तत्व अग्नि है। उत्तर-पश्चिम दिशा की स्वामिनी। इसका निवास युद्ध स्थान माना गया है। इसका प्रथम भाग द्विपद और पिछला भाग चतुष्पद माना गया है। एक यही राशि है जो आधी द्विपद और आधी चतुष्पद है। शरीर में इसका स्थान जांघ और नितम्ब में माना गया है। इसकी हेमंत ऋतु है। रंग सुनहरा सत्वगुणी। विज्ञान के अनुसार इस ग्रह का आकार इतना विशाल है कि सौर मंडल में सभी ग्रहों के आकार के दूने से अधिक है। पृथ्वी से कई गुना बड़ा है।
रंग, रूप, स्वभाव : इस राशि के जातक अच्छे खासे डील-डौल वाले और आकर्षक होते हैं। इनकी आकृति प्राचीन आर्यों के समान तथा यूनानी से लगते हैं। खासतौर पर इश राशि के जातक की जांघें बड़ी, सुडौल होती हैं। नेत्र सुन्दर, सीना प्राय: चौड़ा होता है। यह शानदार ढंग से चलते हैं। सामान्य रूप से इस राशि के जातक सुदर्शन होते हैं। भिन्नता के बावजूद इनमें चुम्बकीय आकर्षण होता है। इनका स्वभाव क्रोधी होता है। अपने मान-अपमान का ध्यान रखते हैं।
स्वास्थ्य : प्राय: हृदय रोग का भय, बायीं आंख, सीना, किडनी, कान की बीमारी इनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। अत: स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने से जातक निरोगी बी रह सकता है। विशेषकर जांघों में तथा शरीर के जोड़ों में दर्द का अहसास इन्हें, अपनी लापरवाही से असहनीय भी हो सकता है।
दाम्पत्य जीवन, जीविका : व्यवसाय के साथ ऐसे जातक कृषि कार्यों, चिकित्सा, एडवोकेट्स तथा बड़ी प्राइवेट कंपनियों में भी ये सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं। लेखक, अध्यापन कार्य, उच्च पदाधिकारी, वायुयान चालक आदि सेवाओं में ये सम्मान प्राप्त करते देखे गए हैं। इनका दाम्पत्य जीवन सुखी होता है। अपने द्विस्वभाव होने के कारण कभी-कभार पारिवारिक कलह की संभावना भी बनती है। संतान को नियंत्रण में रखते हैं। संतान सुख उत्तम रहेगा। प्रारंभिक जीवन साधारण होता है किन्तु 35 वर्ष के बाद उन्नति के शिखर की ओर बढ़ते-बढ़ते 45वें, 50 वें वर्ष में स्थायित्व आ जाता है। वृद्धावस्था प्राय: सुखद होती है।
शुभ दिशा : दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण पूर्व शुभ दिशाएं हैं।
शुभ दिन : रविवार, मंगलवार और गुरुवार।
शुभ माह : मार्च, मई, जुलाई, अक्टूबर और दिसंबर।
शुभ वर्ष : 3,12,21,30,35,45,46,55,56,61।

वार्षिक भविष्यफल
धनु राशि का स्वामी मेष राशि में बैठकर अपनी नवमीं दृष्टि से धनुराशि को निहार रहा है। गुरु की स्वक्षेत्री दृष्टि इस राशि के जातकों के लिए अत्यंत लाभप्रद है। व्यवसायिक दृष्टि से यह वर्ष उत्साहजनक रहेगा। बौद्धिक एवं शारीरिक श्रम आपके व्यक्तित्व और आपकी ऊर्जा को चमत्कारी परिणाम दिलाने में समर्थ होगा। यदि आप सेवारत कर्मचारी अथवा अधिकारी है, तो पदोन्नति के अवसर आपकी पद प्रतिष्ठा बढ़ाने में सफल होंगे। अध्ययनरत विद्यार्थी परीक्षाओं में सफलता के नित नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले जातक अपनी अध्ययन शैली की बदौलत सेवा क्षेत्र में प्रवेश पाने में सफल होंगे। यदि उनकी कुंडलियों में अच्छे ग्रहों की महादशा/अन्तर्दशा चल रही होगी तो इस राशि के जातक पीएससी एवं यूपीएससी अथवा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकेंगे। इस राशि के जातकों के लिए गुरु (वृहस्पति) की नवम् दृष्टि स्वास्थ्य सुधार में अनुकूलता प्रदान करेगी। ऐसे जातक, जो विवाह के सात फेरे लेने को वर्षों से प्रतिक्षारत हैं, उनकी मुराद पूरी होने का समय अब गया है। आपकी भावुकता आपके स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक बना सकती है। दिनचर्या संयमित एवं नियमित रहे- अन्यथा लीवर में खराबी, अपच गैस अथवा उच्च रक्तचाप के कारण कष्टप्रद हो सकता है। पैरों में पीड़ा, जोड़ों में दर्द से निजात पाने के लिए चिकित्सकों की शरण में जाना पड़ सकता है। 17 मई 2012 को प्रात: 9.25 पर गुरु का वृष राशि में प्रवेश आपके जीवन में हलचल मचा सकता है। सतर्क व सावधान रहें। आपकी लापरवाही आपको दु:खदायी परन्तु आपकी सतर्कता तथा जीवनशैली और विवेकपूर्ण सोच, दु:खों के गलियारों से आपको सकुशल सुरक्षित बाहर ला सकता है। 19 मई 2012 को अपरान्ह 2 बजकर 26 मिनट से वक्री शनि कन्या में प्रवेश कर जाएगा, जो मिश्रित फल देगा। सेवारत जातकों के स्थानांतरण के योग तो बन सकते हैं किन्तु धनु राशि के जातक सावधान रहें- लोकायुक्त, आयकर विभाग की दृष्टि आप पर रह सकती है? ईमानदारी से जीवनयापन करें- जो प्रभु ने दिया है उसी में संतोष रखें। अन्यथा विनाश की कहानी आप स्वयं लिखेंगे?
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी- 1,2,10,11,18,19,20,28,29। फरवरी- 6,7,15,16,24,25। मार्च- 4,5,6,13,14,22,23। अप्रैल- 1,2,8,9,10,19,20,28,29। मई - 7,8,16,17,26,27। जून- 3,4,12,13,22,30। जुलाई- 1,10,11,19,20,21,28,29। अगस्त- 6,7,15,16,17,25,26। सितम्बर- 2,3,12,13,21,22,29,30। अक्टूबर- 1,9,10,18,19,27,28। नवम्बर- 5,6,7,14,15,23,24। दिसंबर- 2,3,4,12,13,20,21,30,31।

मकर राशि : (भो, ज, जी,खी, खू, खे, खो, ग, गी)
इस राशि का आकार मगरमच्छ बतलाया गया है, ज्योतिष शास्त्रों में। इस राशि का स्वामी सौरमंडल का सबसे अधिक रहस्यमय ग्रह शनि है। इसका अंक 8 है। शनि मामले में पुरातन धारणा है कि शनि क्रूर एवं पाप ग्रह है, किंतु पौराणिक ग्रंथों में इसे न्याय का देवता भी कहा गया है। मकर राशि चर है। तत्व पृथ्वी तथा पृष्ठोदय तथा उत्तर दिशा की स्वामिनी है, इस राशि का फ्रथम भाग चतुष्पद है, निवास वन, जहां पर्याप्त जल है। शनि के अधिपति भगवान शिव हैं। इसका इंद्रिय ज्ञान स्पर्श है। शनि सौरमंडल में सबसे सुंदर ग्रह है। इसके चारों ओर नीले किंकण बराबर घूम रहे हैं। नीला रंग। यह गृह उतना विशाल है कि इसमें 700 पृथ्वी समा सकती हैं।
रंग, रूप, स्वरूप : मकर राशि के जातक प्राय: दुबले-पतले तथा सामान्य स्वास्थ्य वाले होते हैं। इसके बावजूद इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है। वैसे इनका व्यवहार व जीवन बड़ा रहस्यमय होता है। अपने बारे में यह किसी को जल्द बतलाते नहीं या इनके विषय में प्राय: रहस्य फैला रहता है। वैसे इनमें आत्म विश्वास गजब का होता है। वाणी मधुर और प्रभावशाली होती है। इस राशि के जातक धर्म को मानते हैं। यह बड़े उर्वरक मस्तिष्क के होते हैं। दृढ़ता और आत्मबल इनमें बेहद होता है। इनमें अहंकार भी खूब होता है। बुरी संगति में पड़कर ये अपना जीवन नष्ट कर सकते हैं। किन्तु अच्छी संगति इन्हें समाज एवं कार्यक्षेत्र में सफल बनाती है। चित्त इनका अस्थिर रहता है। दूसरों की आलोचना करने का अवगुण इनकी प्रगति में रोड़े अटकाता है।
दाम्पत्य जीवन : इनका पारिवारिक जीवन प्राय: मिश्रित सुख देने वाला होता है। पति-पत्नी की पटरी कम बैठती है। इनकी चंचलता, अस्थिरता बाधक होती है। अपने अहंकारी स्वभाव के कारण जुबान पर इनकी लगाम नहीं होती। इसके कारण इनके शत्रुओं की संख्या भी अधिक होती है।
स्वास्थ्य : इस राशि के जातक का स्वास्थ्य साधारण तौर पर अच्छा रहता है, पर जोड़ों में दर्द, उदर विकार, दिमागी परेशानी तथा लड़ाकू प्रवृत्ति होने के कारण चोटें, वृध्दावस्था में असहनीय पीड़ा के कारण बन सकती है।
कार्यक्षेत्र : इनका कार्यक्षेत्र इंजीनियर, पुलिस सेवा, सेना, लोक प्रशासन, वकालत, भवन, सड़क, पुल आदि निर्माण कार्यों के क्षेत्रों में सफलताएं। राजनेता के रूप में इस राशि के जातक भाग्यशाली हो सकते हैं।
रत्न, शुभ दिन, शुभ वर्ष : रत्नों में नीलमणी, नीलम अथवा नीला हकीक धारण करने से लाभ हो सकता है। शुभ दिशा दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व हैं।
शुभ दिन- बुधवार, गुरुवार और शनिवार है।
शुभ माह- जनवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त, सितंबर, दिसंबर हैं।
शुभ वर्ष- 15, 35, 45, 51, 55 आदि हैं।
वार्षिक भविष्यफल
मकर राशि वालों के यह वर्ष विशेष लाभप्रद रहेगा। व्यापारिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े जातक विशेष लाभ प्राप्त करेंगे इस वर्ष। भवन, सड़क, पुल आदि के निर्माण कार्यों से जुड़े जातकों के लिए मंगल, धनु राशि से अष्टम (मारक) होने तथा 24.1.2012 को रात्रि 7.11 बजे से सिंह राशि में वक्री एवं दिनांक 14.4. 2012 को रात्रि 10.59 बजे प्रवेश करते ही मकर राशि के जातकों के लिए आर्थिक पक्ष निर्बल तथा शत्रु प्रबल होंगे। उतावली न करें। बिगड़े काम स्वत: बन जाएंगे। मकर राशि वाले जातक चाहें वे प्रशासनिक क्षेत्र में हो या राजनीतिक क्षेत्र में जांच एजेंसियों यथा लोकायुक्त अथवा आयकर विभाग से सावधान रहें। उनका स्वयं का पुरुषार्थ ही काम आयेगा। गुप्त शत्रुओं की चालों से सावधान रहने की आवश्यकता है। दिनांक 14.4.2012 से मंगल जैसे ही मार्गी होगा, शासकीय सेवारत जातक पदोन्नति एवं स्थानान्तरण के लिए तैयार रहें। दिनांक 14.4.2012 से 21.6.2012 के मध्य विवाह जातकों को दाम्पत्य सूत्र में बंधने के योग बन सकते हैं। गर्भवती महिलाएं जिनकी कुंडली में पुरुषार्थ ग्रह की दशा चल रही होगी, उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति का सुयोग बनेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षार्थी श्रम का मेवा चखेंगे। विभिन्न स्तरीय सेवाओं में चयन के योग संभावित हैं। मकर राशि का स्वामी शनि वर्तमान में उच्च राशि तुला में भ्रमण कर रहा है। किन्तु 8.2.2012 को प्रात: 9.33 से वक्री हो जाने तथा 19.5.2012 को अपरान्ह 2.26 से वक्रगति से कन्या राशि में प्रवेश कर जाएगा। तत्पश्चात 1.8.2012 को प्रात: 9 बजकर 37 मिनट से पुन: तुला राशि में आ जाएगा। तात्पर्य यह है कि 8.2.2012 से 1.8.2012 के मध्य का समय मकर राशि के जातकों के उत्थान या पतन की ऐसी इबारत लिखेगा जो अकल्पनीय होगी। जिनकी जन्म कुंडली में शनि उच्च राशि या स्वक्षेत्री होगा, उन्हें लाभप्रद रहेगा। कुंडली में शुभ ग्रहों की महादशा नये वाहन, भूमि, भवन की खरीद के संकेत भी दे रहे हैं। भगवान शिव और शनि देव की आराधना मंगलकारी रहेगी। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। यात्रा में सतर्क रहें। सजगता और सतर्कता संकटों से निजात दिलाएगी।
इन तारीखों से रहें सावधान
जनवरी 2012- 3, 4, 12, 13,21, 22, 30, 31 फरवरी- 2012-8, 9, 10, 17, 18, 26, 27 मार्च- 7, 8, 15, 16, 25, 26 अप्रैल 2012- 3, 4, 5, 12, 13, 21, 22, 30 मई 2012- 1, 2, 9, 10, 18, 19, 20, 28, 29 जून 2012- 5, 6, 7, 14, 15, 16, 24, 25 जुलाई 2012- 3, 4, 12, 13,21, 22, 23, 30, 31 अगस्त 2012- 8, 9, 18, 19, 26, 27, 28 सितंबर 2012- 4, 5, 6, 14, 15, 23, 24 अक्टूबर 2012- 2, 3, 11, 12, 13, 20, 21, 29, 30 नवंबर 2012- 8, 9, 16, 17, 18, 25, 26 दिसंबर 2012- 6, 7, 14, 15, 23, 24, 29, 30।

कुंभ राशि : (गू, गे, गो, स, सी, सू, से, सो, द)

सौर मंडल में दो घड़े के समान दिखाई पड़ता है, वह कुंभ राशि का भाग है। राशि स्वामी शनि। ज्योतिष अंक में इसका अंक 4 माना गया है। शीर्षोदय और स्थिकर राशि उत्तर दिशा की स्वामिनी है। मानव शरीर में इसका स्थान घुटना माना गया है। इसका निवास कुंभ या चाक अथवा मटका माना गया है।
रूप, रंग, स्वास्थ्य : इस राशि के जातक कृशकाय और आकर्षक व्यक्तित्व के होते हैं। उनका शरीर विशेष मोटा नहीं होता। दुबलापन इनमें होता है। इनकी वाणी में बड़ी मिठास तथा दूसरों पर प्रभाव डालने में ये सफल होते हैं।
स्वभाव : इस राशि के जातक बहुत आत्मविश्वासी होते हैं और बड़ी लगन के साथ अपना कार्य पूरा करते हैं। समय के पाबंद, वाकपटु और ईमानदार होते हैं। इनमें दार्शनिक प्रवृत्ति अधिक होती है। इनके स्वभाव में शक की मात्रा भी अधिक होती है। अपने इस स्वभाव के कारण यह मित्र को भी शत्रु बना लेते हैं।
दाम्पत्य जीवन : इस राशि वाले जातकों का दाम्पत्य जीवन सामान्यत: सुखदायी रहता है। ऐसे जातक बदनामी और अपमान से डरते हैं। स्वभाव से समझौतावादी होने के कारण प्रेम के मामले में असफल होते हैं। संतान सुख इन्हें उत्तम मिलता है। कुल मिलाकरल इनका दाम्पत्य व पारिवारिक जीवन सुखमय होता है।
व्यवसाय : इस राशि के जातक के जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहते हैं। जीवन का प्रारंभिक काल संघर्षमय होता है। विवाहोपरान्त भाग्योदय होता है। फिर चाहे व्यापार का क्षेत्र हो या सेवाक्षेत्र अथवा राजनैतिक क्षेत्र, सभी में ऊर्जावान सहयोगी मिलते हैं और नित नई ऊंचाइया प्राप्त होती हैं। वैसे अध्यापक, लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, ज्योतिष, पत्रकार, सिविल सेवा से जुड़े पद, न्यायालयीन क्षेत्र, फित्मी दुनिया, रेल्वे, वायुसेवा, टूरिज्म आदि क्षेत्रों में इन जातकों को प्रगति के पथ पर उन्नति करते देखा जा सकता है।
शुभ दिशा, शुभ दिन : इस राशि की शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम है। सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार शुभ दिन है। फरवरी, अप्रैल, जून, अगस्त, सितम्बर इनके शुभ माह हैं। 8, 17, 26, 44, 53, 60 आदि शुभ वर्ष हैं।

वार्षिक भविष्यफल
शनि का राशि स्वामित्व हितकारी रहेगा। सिंह राशि में पदस्थ मंगल आपकी मनोकामना पूर्ण करने में सहयोगी होगा। यह वर्ष मेष रासि स्थित गुरु से 11वां राशि है। लाभ ही लाभ के योग बनेंगे।वर्ष का पूर्वार्ध इस रासि के जातकों के लिए शुभ रहेगा। गुरु की कृपा से परिवार में मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। भूमि, भवन, वाहन, खरीदने के योग बन रहे हैें। विचारिए, आपकी क्रय शक्ति जहां तक साथ दें, वहीं तक आगे बढि़ए। शनि देव की अनुकम्पा आपको पदोन्नति की स्थिति में नवीन पदस्थापना से पुरस्कृत करेगी। कुंभ राशि के जातक विदेश यात्राओं का सुखद आनंद पा सकते हैं अथवा पर्यटन की दृष्टि से उन्हें विदेश यात्रा का सुयोग्य मिलेगा, इच्छा हो तो उड़ जाइए। कारोबारी जगत से जुड़े जातक कृपया सावधान रहें, मंदी की चोटआपको प्रभावित कर सकती है। इस वर्ष परिवार के वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। रक्त संबंधों में किसी प्रियजन के बिछोह से मन व्यथित हो सकता है। नौकरियों की तलाश का क्र म इस वर्ष आपको संतुष्टि दे सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि शनि देव की आशीषें आपको वरदायिनी सिध्द हो सकती हैं। अध्ययनरत छात्र मनोयोग के अध्ययनरत रहें, सफलताएं परीक्षा परिणामों की शक्ल में आईपको तथा परिवार जनों को आनंदित कर सकती हैं।
न्यायालयीन प्रकरण कुछ राहत का आहसास भले करा दें? कृषि क्षेत्र से जुड़े जातक हर्षोल्लास मनमा सकेंगे, क्योंकि इस वर्ष फसल अच्छी होगी। वर्ष के उत्तरार्ध में मन कुछ अशान्त रह सकता है। अपने अपने इष्टदेव की साधना, पूजा, अर्चना से आत्मबल अवश्य बढ़ेगा। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने की शक्ति भी मिलेगी। इस राशि के जातक रक्तचाप, चर्मरोग, एलर्जी, उदर विकार तथा पुरानी व्याधियों से वेदना का अहसास करेंगे। योग्य चिकित्सक से समय समय पर जांच कराते रहें, अन्यथा अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है। व्यय सावधानी से संभल कर करें, अन्यथा कर्जदार बनने से फिर कौन रोक सकता है।
यह वर्ष आपके लिए सुखद तथा सफलताओं से पूर्ण रहेगा, किन्तु सावधानी तथा सतर्कता आवश्यक है।

इन तारीखों से सावधान रहें
जनवरी-2012- 5, 6, 15ु, 16, 23, 24 फरवरी- 2, 3,11, 12, 19, 20, 28 मार्च- 9, 10, 17, 18, 19, 28, 29 अप्रैल- 5, 6, 7, 14, 15, 23, 24, 29 मई- 3, 4, 11, 12, 21, 22, 30, 31 जून- 8,9, 15, 16, 26, 27, 28, जुलाई- 5,6,15, 16, 24, 25 अगस्त- 1, 2, 10, 12, 20, 21, 28, 29 सितम्बर- 7, 8, 16, 17, 18, 25, 26 अक्टूबर- 4,5, 6, 14, 15, 22, 23, 31 नवम्बर- 1,10, 11, 19, 20, 28, 29. दिसंबर- 7, 8. 9, 16, 17, 25, 26.


मीन (दी, दू, थ, क्षे, त्र, दे, दो च, ची, झ)
ज्योतिष की इस 12वीं और अंतिम राशि का आकार सौर मंडल में तैरती हुई दो मछलियों के समान है। ये मछलियां एक दूसरे की विपरीत दिशा में तैरती हैं। इस राशि का महाधिपति वृहस्पति और केतु माना गया है। अंक ज्योतिष में इसका अंक 7 है। द्विस्वभाव, तत्व, जल, पृष्ठोदय उत्तर दिशा की स्वामिनी स्त्री संज्ञक, विप्र वर्ण राशि है। इसका निवास जल है। शरीर में पैरों का तलुवा इसका स्थान है।
रंग, रूप, स्वभाव: इस राशि का जातक साधारण रंगरूप, सुंदर और चंचल स्वभाव के होते हैं। हमेशा कुछ न कुछ उधेड़बुन में पड़े रहते हैं। बहमी और शक्की स्वभाव के होते हैं। कुल मिलाकर इनका व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली होता है तथा इनकी चाल में फुर्ती होती है। खासतौर से ांखें मछलियों के समान जलज और नासिका मत्स्याकार होती है। अस्थिरता, चंचलता इनका विशेष स्वभाव होता है। छिछोरापन पसंद नहीं करते, एकान्त पसंद करते हैं। अधिक हंसी-मजाक इस राशि के जातकों को पसंद नहीं बहुमुखी प्रतिभा के धनी ऐसे जातक देश की विरासत को सम्हालने में अग्रणी रहते हैं।
स्वास्थ्य : इस राशि के जातक फेफड़े, बुखार, आंख, पेट में गैस आदि बीमारियों से ग्रसित रहते हैं पर शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ ले लेते हैं। यदि इनका मनोदशा भमित रही, तो इनको प्राय: रहस्यमयी बीमारियां हो सकती हैं।
दाम्पत्य जीवन : इनका पारिवारिक जीवन सामान्य रहता है। जीवन साथी से खटपट होती है, समझौता की मुद्रा में भी शीघ्र आ जाते हैं। इनसे प्रेम संबंध स्थाई और पक्के होते हैं। संतान की तरफ से सामान्य सुख ही मिलता है। जीवन साथी के साथ इनका सफर लम्बा रहता है।
व्यवसाय : यात्रा नियोजन, डेयरी कार्य, मछली पालन का व्यवसाय, कृषि गुप्तचर विभाग, राजनीति, सर्जन, प्रशासनिक पद धारी, अध्यापन कार्यों से जुड़े जातक शैन: शनै: अपने लक्ष्य को पा ही लेते हैं। व्यापार में इन्हें अधिक सफलता मिलती है। निर्माण कार्यों से जुड़े व्यवसायी उन्नति के शिखर छू लेने में कामयाब रहते हैं। इस राशि के जातक अपने परिश्रम, बुद्धि विवेक से जीवन में ऊपर उठते हैं अर्थात् स्वनिर्मित जीवन इनको प्रिय है।
शुभ दिशा : उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम शुभ है।
शुभ दिन: वृहस्पतिवार, बुध वार और शनिवार शुभ है।
शुभ माह : जनवरी, फरवरी, मई, जुलाई, तिसम्बर, अक्टूबर और दिसंबर शुभ है।
शुभ वर्ष : 2 5,30,45,55,60 व 65 वां वर्ष।

वार्षिक भविष्यफल
मीन राशि के महारथियों, 14 नवम्बर से शनि का अढैया आपकी जीवनदायिनी शक्ति बनकर आ गया है। उलझनें घटेगी। उच्च राशिगत शनि आपको न्यायालयीन अथवा विभागीय उलझनों से राहत दिलाएगा। 8 फरवरी 2012 को प्रात: 9.33 से 19 मई 2012 के मध्य शनि की बक्र गति आपकी पीड़ाओं का हरण करेगी। 2 फरवरी 2012 को प्रात: 8.40 बजे शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेगा। सुखों की सुगंध आपके अन्तर्मन को महका देगी। आपकी रौशि का स्वामी गुरु भी आपकी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता नजर आएगा। अधिकार सम्पन्न व्यक्तियों का व्यवहार मीन राशि के जातकों के प्रति अनुकूल प्रतीत होगा। पदोन्नति के आकांक्षी जातक तैयार रहें। पदोन्नति के सुअवसर बनने लगे हैं। मई और अक्टूबर के मद्य आपकी कामना पूर्ति अवश्य होगी- ऐसे ग्रहीय योग बन रहे हैं। नई सम्पत्ति की खरीद के मौके त्यागिये मत, भवन नहीं तो प्लाट ही खरीद लें। शहनाइयों की गूंज आपके जीवन में कर्मप्रिय लगेगी, तैयार हो जाइयेगा। जीवन साथी के सानिध्य के लिए। 3 फरवरी 2012 अथवा 12 जून 2012 से 8 जुलाई 2012 के मध्य जीवन साथी से मिलन के योग बनते नजर आएंगे। आपके लिए 15 मई 2012 से 28 जून 2012 के मध्य का समय सर्तकता तथा सावधानी पूर्ण होना चाहिए। अप्रत्याशित घटनाएं घट सकती हैं, जो सुखद अथवा दु:खद हो सकती हैं। कारण हर व्यक्ति के जीवन में सुख-दु:ख की परिणिती, उसकी जन्म कुंडली के आधार पर घटित है। विद्यार्थी समुदाय के लिए यह वर्ष श्रेष्ठ रहेगा। क्योंकि राशि का स्वामी गुरु और उच्च राशि गत शनि का अढैया दोनों मित्र ग्रह हैं। अत: वे जातक जो पीएससी, यूपीएससी, पीईटी, पीएमटी या आईआईटी में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठेंगे, यदि उन्होंने प्रतिदिन 12 से 16 घंटे अपने अध्ययन में लगाए, तो सफलताएं उनके स्वागत को आतुर रहेंगी। कृपया स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। व्यापार जगत और राजनीति से जुड़े व्यक्ति अपने आत्म विश्वास को फौलादी बनाकर आगे बढ़ें। सफलता सुनिश्चित है।
इन तारीखों से सावधान रहें : जनवरी- 8,9,17,18,25,26, फरवरी- 4,5,13,14,21,22,23, मार्च- 2,3,11,12,20,12,29,20, अप्रैल- 7,8,9,16,17,20,27, मई- 5,6,13,14,15,23,24, जून- 1,2,10,11,20,21,28,29, जुलाई- 7,8,17,18,26,27, अगस्त- 3,4,5,13,22,23,31, सितंबर- 9,10,11,18,19,20,27,28, अक्टूबर- 6,7,8,16,17,25,26, नवंबर- 3,4,12,13,21,22,30, दिसंबर- 1,2,9,10,11,18,19,28,29।

पंडित पीएन भट्ट
ज्योतिषाचार्य, हस्तरेखा विशेषज्ञ एवं अंकशास्त्री
जी-4/4, जीएडी कॉलोनी, गोपालगंज, सागर (मप्र)-470002
फोन: 07582-227159, 223168, मोबाइल : 09407266609