बुधवार, 30 नवंबर 2011

एफडीआई पर रार,द्रमुक का यूटर्न



नई दिल्ली। खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर गतिरोध खत्‍म होता नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर हुई कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, गृह मंत्री पी. चिदम्बरम, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा व सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल मौजूद थे।

एफडीआई पर कोर कमिटी में भी नहीं हो सका कुछ फैसला

मल्टी ब्रैंड रीटेल में एफडीआई पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है लेकिन फिलहाल यह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री निवास पर कांग्रेस कोर कमिटी की मीटिंग भी बेनतीजा समाप्त हो गई। इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के अलावा प्रणब मुखर्जी, अहमद पटेल, ए.के. एंटनी और आनंद शर्मा मौजूद थे। खबर है कि शाम 6 बजे फिर से कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की इस बारे में एक बैठक होगी।

इससे पहले पार्टी में जारी घमासान को थामने के लिए प्रणब मुखर्जी ने रीटेल में एफडीआई और मुद्रास्फीति व काले धन पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर पार्टी के सांसदों को जानकारी दी। उन्होंने कांग्रेस सांसदों से कहा कि मल्टी ब्रैंड रीटेल में 51% एफडीआई की इजाजत से मुद्रास्फीति पर काबू पाने और खेत से लेकर खुदरा कीमतों में अंत को पाटने में मदद मिलेगी।

मुखर्जी के बाद वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा कल पार्टी के सांसदों को रीटेल में एफडीआई मुद्दे पर विस्तार से जानकारी देंगे। मुखर्जी ने सांसदों को बताया कि खुदरा में एफडीआई एक ऐसा कदम है जो कीमतों को घटाने में मदद करेगा। इससे चीजों के खेत में दाम और इसके थोक व खुदरा दामों में भारी अंतर को दूर करने में मदद मिलेगी।

सुबह वित्त मंत्री सोनिया गांधी से मिले। 10 मिनट की मुलाकात के बाद वह कांग्रेस सासंदों से मिले।
विपक्ष के दबाव को देखते हुए केंद्र देसी खरीद की सीमा 30 से बढ़ाकर 45 फीसदी कर सकती है। आईबीएन7 संवाददाता के मुताबिक सरकार के भीतर कुछ विषयों पर नीतिया तैयार की जा रही है। इसके तहत एफडीआई के तहत देसी खरदी की सीमा को 30 फीसदी से बढ़ाकर 45 फीसदी की जा सकती है। ताकि गतिरोध दूर हो सके और संसद चल सके।

गतिरोध दूर करने के लिए कांग्रेस कोर कमिटी की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और अहमद पटेल शिरकत कर रहे हैं। बैठक 7 आरसीआर प्रधानमंत्री निवास पर चल रही है।

गौरतलब है कि आज दोपहर 12 बजे जैसे ही राज्यसभा और लोकसभा में कार्यवाही शुरू हुई। विपक्ष ने एफडीआई के मुद्दे पर चर्चा कराने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। जिसके बाद दोनों सदन को कल तक के लिए दोनों सदनो को स्थिगत कर दिया गया।

FDI पर विपक्ष का घमासान, PM-सोनिया की बैठक जारी
इससे पहले आज जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई वैसे ही विदेशी पूंजी निवेश पर चर्चा कराने की विपक्ष ने मांग शुरू कर दी। हंगामे के बाद लोकसभा और राज्यसभा को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

गौरतलब है कि संसद को सुचारू तरह से चलाने और पक्ष और विपक्ष के बीच उपजे गतिरोध को दूर करने के लिए कांग्रेस संसदीयल दल की बैठक हुई। इस बैठक में महंगाई, काले धन, एफडीआई पर चर्चा हुई।

दूसरी तरफ एफडीआई मुद्दे पर बीजेपी संसदीय दल की बैठक भी हुई।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि सरकार संसद में गतिरोध खत्म करना नहीं चाहती। वहीं, बीजेपी नेता एस.एस.अहलुवालिया ने कहा कि मंगलवार को सर्वदलीय बैठक हुई, 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रणब मुखर्जी ने कोई सूचना नहीं दी। जबकि इस मुद्दे पर उन्होंने सर्वदलीय बैठक में कहा था कि वो प्रधानमंत्री से मिलने के बाद फैसले पर सूचना देंगे। विपक्ष संसद चलाना चाहती है। बीजेपी ने नियम के आधार पर चर्चा का नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि संसद का शीतकालीन सत्र सुचारू तरह से चले।

एफडीआई पर सहयोगियों से बात करेंगे पीएम

रिटेल में एफडीआई के मसले पर कांग्रेस कोर समिति की बैठक बिना किसी फैसले के समाप्त हुई। जानकारी के अनुसार, इस बैठक में विदेशी निवेश नीति पर कोई बड़ा फैसला लिए जाने की संभावना थी। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी सरकार के प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और डीएमके से इस मसले पर बात करेंगे और इस मसले का पटाक्षेप करने की कोशिश करेंगे।
रिटेल क्षेत्र (खुदरा व्‍यापार) में विदेशी निवेश पर रणनीति बनाने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री निवास पर कांग्रेस कोर समिति की करीब डेढ़ घंटे तक बैठक चली। इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्‍व में कोर समिति के सदस्‍य शामिल हुए। इस बैठक में कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी, वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी, गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षामंत्री एके एंटनी शामिल हुए। इनके अलावा, केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री आनंद शर्मा और अहमद पटेल भी बैठक में मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी सरकार के प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और डीएमके से इस मसले पर बात करेंगे और इस मसले का पटाक्षेप करने की कोशिश करेंगे। गौर हो कि टीएमसी और डीएमके एफडीआई पर कैबिनेट के फैसले का विरोध कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह भी करीब तय है कि यूपीए सरकार रिटेल सेक्‍टर में 51 फीसदी एफडीआई के अपने फैसले से पीछे हटने के मूड में कतई नहीं है। उधर, केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि एफडीआई के मुद्दे को सुलझाने के लिए राजनीतिक दलों के सुझावों पर सरकार गौर कर रही है और जल्द ही इस पर निर्णय करेगी। शुक्ला ने संसद भवन परिसर में संवाददातापओं से कहा कि हम मुद्दे (संसद में गतिरोध) को सुलझाने के प्रति आशान्वित हैं। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए राजनीतिक दलों के सभी सुझावों पर गौर किया जा रहा है। जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआई की अनुमति दिए जाने के मुद्दे पर विपक्ष और साथ ही संप्रग के कुछ सहयोगी दलों के हंगामें के कारण संसद मे आज भी कामकाज ठप्प रहा। काम नहीं तो वेतन नहीं की कुछ सांसदों की मांग के बारे में पूछे जाने पर शुक्ला ने कहा कि यह विपक्ष है जो संसद को नहीं चलने दे रहा है। यहां तक कि प्रश्नकाल को चलने की भी इजाजत नहीं दी जा रही है।

फिल्मी चाट मसाला


- राजकुमार सोनी


कहानीकार बनी शाहरुख की बेटी
बेटी सुहाना के राष्ट्रीय स्तर के कहानीकारों में शामिल होने से अभिनेता शाहरुख खान बहुत खुश है। उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा कि खुशी की एक बात है सुहाना ने कथा राष्ट्रीय कहानी लेखन प्रतियोगिता में पुरस्कार जीता है। घर में एक और कहानीकार। शाहरुख ने फरहान खान की आगामी फिल्म डॉन 2 के लिए हाल ही में एक विशेष प्रचारक वीडियो की शूटिंग की है। फिल्म 23 दिसंबर को रिलीज होने वाली है। उन्होंने कहा कि डॉन 2 के गाने की शूटिंग में मजा आया, ऐसे लोगों के साथ काम करने में काफी अच्छा लगता है जो आपको प्यार करते हैं।

फिल्मों से समाज नहीं सुधरता
खोसला का घोसला, ओए लकी, लकी ओए और लव सेक्स और धोखा जैसी फिल्मों के निर्देशक दिबाकर बैनर्जी कहते हैं कि फिल्में तो समाज का प्रतिबिम्ब होती हैं और फिल्मों से समाज को सुधारा नहीं जा सकता।
दिबाकर कहते हैं, मैं तो जान-बूझकर अपनी फिल्मों के जरिए कोई संदेश देने की कोशिश नहीं करता। मुझे इस बात पर बिलकुल यकीन नहीं है कि फिल्मों के जरिए कुछ बदला जा सकता है। मैं फि़ल्में बनाता हूं क्योंकि मेरे दिल और दिमाग में कुछ चल रहा होता और फिल्में उसे व्यक्त करने का एक माध्यम हैं।दिबाकर कहते हैं अगर उनकी फिल्मों को देखकर दर्शक उनके साथ एक रिश्ता महसूस करते हैं, उनकी बात को समझ पाते हैं तो उनके लिए उतना ही काफी है।

महाजन खोजेंगे परफेक्ट बैचलर

इमेजिन टीवी पर स्वयंवर रचा कर डिंपल गांगुली के पति बने दिवंगत नेता प्रमोद महाजन के बेटे राहुल महाजन बहुत जल्द टीवी पर वापसी कर रहे हैं। खबर आ रही है कि राहुल महाजन रिएलिटी शो पर्फेक्ट बैचलर को होस्ट करने जा रहे हैं। लेकिन यह शो हिंदी में ना होकर ईटीवी मराठी के लिए होगा। शो के जरिये महाराष्ट्र के परफेक्ट बैचलर को खोजा जायेगा। इस बारे में चैनल वालों का कहना है कि राहुल महाजन उनको इस शो के लिए बेस्ट लगे एक तो वो मराठी अच्छी बोलते हैं दूसरा वो बैचलर लोगों में काफी पॉपुलर भी है। दर्शक भी उन्हें पसंद करते हैं और वे आसानी से उनके साथ जुड़ जाते हैं।
वैसे राहुल महाजन कई विवादों से जुड़े हुए हैं। राहुल के ऊपर उनकी पहली पत्नी की ओर से मारने-पीटने का आरोप लगा था तो उनके बारे में यह भी कहा गया था कि वो ड्रग्स लेते हैं। तो वहीं यह भी खबर थी उन्होंने अपनी मौजूदा पत्नी डिम्पल को बुरी तरह से मार-पीट कर घर से बाहर निकाल दिया था।
यही नहीं राहुल महाजन के संबंध पायल रोहतगी से भी रह चुके हैं। अपने स्वयंवर के बाद राहुल महाजन रिएलिटी शो छोटे मियां और कॉमेडी सर्कस में नजर आ चुके हैं।


मुलगी बनेंगी कैटरीना

कैटरीना कैफ करण जौहर की फिल्म अग्निपथ में लावणी डांस करने वाली हैं। खबर आई है कि वो मराठी गाने के हिंदी रीमिक्स पर जम कर ठुमके लगाने वाली हैं। आपको बता दें कि कैट पहली बार किसी फिल्म के लिए लावणी डांस करने जा रही हैं। वैसे तो आजकल कैट को फिल्मों के चलते सांस लेने की फुरसत नहीं है एक समय में वो आउट डोर शूटिंग कर रही होती हैं तो अगले ही समय में वो भारत में किसी फिल्म के लिए काम करने आ जाती हैं। इन दिनों कैट करण की फिल्म के लिए काम कर रही है। इसके लिए वो पिछले चार दिनों से फिल्म सिटी में डांस की प्रैक्टीस कर रही हैं। इस दौरान कैटरीना ने मनीष मल्होत्रा की डिजाइन की गई ग्रीन साड़ी पहनी, जिसमें खूबसूरत गोल्डन बॉर्डर भी था। अपनी डांस परफॉर्मेंस को परफेक्ट बनाने के लिए कैटरीना कोरियॉग्रफर गणेश हेगड़े द्वारा सिखाए गए स्टेप्स की जमकर प्रैक्टिस कर रही हैं। उन्हें देख कर धक धक गर्ल माधुरी की याद आ गयी जिन्होंने हमको आज कल है।।।। गाने पर डांस कर लोगों का दिल धड़का चुकी हैं।


फिल्म प्रिव्यू
विद्या के बोल्ड सीन
फिल्म : द डर्टी पिक्चर
बैनर : बालाजी मोशन पिक्चर्स, एएलटी एंटरटेनमेंट
निर्माता : एकता कपूर, शोभा कपूर
निर्देशक : मिलन लुथरिया
संगीत : विशाल शेखर
कलाकार : विद्या बालन, नसीरुद्दीन शाह, इमरान हाशमी, तुषार कपूर
रिलीज डेट : 2 दिसम्बर 2011

विजयालक्ष्मी उर्फ सिल्क स्मिता एक बार फिर से एकता कपूर की फिल्म द डर्टी पिक्चर से सबके सामने आ चुकी है। साउथ की इस सुपर स्टार ने एक मेक अप गर्ल के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था, लेकिन जल्दी ही वे बी ग्रेड फिल्मों की टॉप हीरोइन बन गई। एक समय ऐसा आया जब किसी भी फिल्म को लोग सिल्क स्मिता के नाम पर ही देखने लगे। वो जल्द ही सॉफ्ट पोर्न एक्ट्रेस के नाम से मशहूर हो गईं। सिल्क को अचानक ही बहुत बड़ी सफलता मिल गयी थी जिसके चलते उनके कदम लडख़ड़ा गये। आर्थिक संकट और प्यार में मिले धोखे के बाद उनकी लाइफ खराब हो गयी वो इस गम को दूर करने के लिए शराब में डूब गईं। अंतत: वो महज 36 साल की उम्र में वो अपने चेन्नई के अपार्टमेंट में मृत पाई गईं। इनकी मौत की गुत्थी अब तक उलझी हुई है। सिल्क की इसी कहानी को ध्यान में रख कर मिलन लुथरिया ने द डर्टी पिक्चर बनाई है। इस फिल्म में सिल्क की लाइफ और संघर्ष को दिखाया गया है। इसके अलावा बॉक्स ऑफिस पर सिल्क के नाम का डंका बजता था और कैसे लोग फिल्म में केवल सिल्क को ही देखने जाया करते थे। एक तरह से यह फिल्म सिल्क की जि़ंदगी ही है। इस फिल्म में विद्या बालन, नसीरूद्दीन शाह, तुषार कपूर और इमरान हाशमी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।


कुछ खास करने को बेचैन
भले ही सोनाक्षी सिन्हा के खाते में जोकर, रावडी राठौड़, लुटेरा और दबंग 2 जैसी बड़ी फिल्में हैं, लेकिन वे बॉलीवुड में कुछ खास करने के लिए बेचैन हैं। मिली जानकारी के अनुसार वे जल्द ही अपने होम प्रोडक्शन की शुरूआत करना चाहती हैं और होम प्रोडक्शन की पहली फिल्म में ही पिता शत्रुघ्न सिन्हा के साथ स्क्रीन शेयर करने की सोच रही हैं।

पिता शत्रुघ्न भी हैं काफी गदगद : सोनाक्षी का अपने पिता के बारे में कहना है कि वे शानदार एक्टर हैं। उनके साथ परदे पर दिखने के लिए वे लालायित हैं। इधर शत्रुघ्न भी स्वीकार करते हैं सोनाक्षी की फिल्म में अभिनय करना उनके लिए यादगार पल होगा। यूं छोटे परदे पर तो सोनाक्षी और शत्रुघ्न की ट्यूनिंग काफी सराही जा चुकी है। कौन बनेगा करोड़पति के भोजपुरी वर्जन के बानी करोड़पति के एक एपीसोड में सोनाक्षी हॉट सीट पर थीं, तो शत्रुघ्न सिन्हा बतौर होस्ट उनसे सवाल पूछते नजर आए थे। दोनों के बीच हुई बातचीत का दर्शकों ने भरपूर लुत्फ उठाया था। बता दें कि बतौर एक्टर बिहारी बाबू अब ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। पिछले साल रिलीज हुई फिल्म रक्त चरित्र में वे जरूर दिखाई दिए थे, जिसमें उन्होंने एक बार फिर दमदार अभिनेता होने का परिचय दिया था।


धोनी-बिप्स की कुट्टी
जब बिपाशा बसु और जॉन अब्राहम साथ थे तो उनके दोस्त भी दोनों के कॉमन फ्रेंड हुआ करते थे। इनमें से एक हैं टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी। धोनी की इनसे इतनी अच्छी दोस्ती थी कि धोनी की शादी की घोषणा भी बिपाशा ने ही की थी। धोनी इस समय कई दिनों बाद मुंबई में फुरसत के कुछ क्षण बिता रहे हैं। इस दौरान एक बात साफ तौर पर देखी जा रही है कि वह अपने दोस्त जॉन के साथ तो घूम फिर रहे हैं, पर बिपाशा कहीं नजर नहीं आ रहीं। मतलब यह कि लग रहा है कि बिपाशा को धोनी ने बाय-बाय कह दिया है। उनके एक निकट सूत्र के अनुसार धोनी अभी भी जॉन के काफी निकट हैं। बिप्स से उनकी जान पहचान भी जॉन की वजह से ही हुई थी। लेकिन दोनों अलग हो गए हैं, इसीलिए धोनी ने बिप्स से दूरी सी बना रखी है। बिप्स धोनी के इस व्यवहार से काफी अपसेट हैं, पर इस बारे में वह कर भी क्या सकती हैं। क्या धोनी को बिप्स से दूर रहने के लिए जॉन ने कहा है। इसकी कोई जानकारी नहीं है।


किम बच्चे न होने के डर से परेशान
रियल्टी स्टार किम कारदाशियां को इस बात का डर सता रहा है कि वह मां नहीं बन सकती। उन्होंने कहा है कि उन्हें डर है कि शादी टूटने के बाद उनके बच्चे नहीं होंगे। फीमेल फर्स्ट की खबर के मुताबिक, 31 वर्षीय टीवी स्टार ने घोषणा की है कि वह अपने पति क्रिस हम्फ्रीज से अलग हो रही हैं। अक्तूबर में परिणय सूत्र में बंधने वाली किम की शादी केवल 72 दिनों तक ही चल सकी।
उन्होंने कहा है कि मेरा हमेशा से सपना था कि मेरा एक बड़ा परिवार हो लेकिन मैं अब इस बात को लेकर परेशान हूं कि मैं मां नहीं बन पाउंगी और एक अच्छी चाची बन कर रह जाउंगी। किम ने कहा कि मैं हमेशा वही चाहती थी जो मेरे माता-पिता चाहते थे। और पहली बार मैंने तय किया था कि मैं छह बच्चों को जन्म दूंगी। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या कम करने का विचार मन में आता रहा और अब लगता है कि एक भी न हो।

लियोन के वेब पर 20 लाख पेज
किसी ने भी शायद यह अनुमान नहीं लगाया होगा कि पॉर्न स्।टार सनी लियोन बिग बॉस के घर में प्रवास के अपने दूसरे सप्ताह में ही घर से निकाले जाने के लिए नामित की जाएंगी। इस सप्ताह नामांकन प्रक्रिया एक दिलचस्प मामला था। बिग बॉस के घर की सदस्य पूजा बेदी ने जब जूही परमार को सुरक्षित कर दिया और महक को लूप से बाहर रखा गया (पूजा मिश्रा के घर से निकलने के बाद वह कप्तान बनीं) तो अमर, सिद्धार्थ, श्रद्धा, सोनाली, स्काई और सनी लियोन के बीच ही मुकाबला सीमित होकर रह गया।
महक ने अपने कैप्टन होने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आकाश को सीधे मनोनीत कर दिया। बिग बॉस ने एक बड़ा पासा फेंकते हुए घर के सभी लड़कों अमऱ सिद्धार्थ और स्काई को कन्फेशन रूम में बुलाया और उनसे दो नामों को मनोनीत करने के लिए चयन करने संबंधी सवाल किया। स्काई के विरोध के बावजूद, अमर और सिद्धार्थ ने बहुमत वोट के जरिए श्रद्धा और सनी के नामों को अंतिम रूप दिया। जैसी कि उम्मीद थी श्रद्धा परेशान थी और अपने नाम को नामित किए जाने के पीछे की असली कहानी जानना चाहती थी।
हालांकि, सनी की इस खबर पर प्रतिक्रिया एक आश्चर्य के रूप में सामने आई और वह काफी असहज भी दिखीं। जब उसने अपने दोस्त आकाशदीप सहगल उर्फ स्काई से बात की तो उसने अपनी चिंता जाहिर की। सनी ने कहा कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि उस वक्त क्या होगा जब घर के दूसरे सदस्य उसके बीते हुए कल (प्रोफेशन) और असलियत के बारे में जानेंगे। सनी लियोन ने कहा कि उसके नाम से वेब पर 20 लाख पेज हैं, अमेरिका में मेरे काफी प्रशंसक हैं और मैं विवादास्पद रही हूं। मुझे कोई कोई तनाव नहीं है, लेकिन जब घर के सदस्य को मेरे अतीत के बारे में पता चलेगा तब यह एक धमाके के समान होगा। जिस पर आकाश ने सनी से कहा कि इसका जिक्र कहीं और किसी से न करे और कोई भी किसी के अतीत के बारे में बात करने की हिम्मत नहीं करेगा। जैसा कि खेल का नियम भी है कि जहां कोई भी दूसरों के अतीत के बारे में बात नहीं कर सकता है। यह काफी दिलचस्प रहा कि जिस तरह से स्।काई ने यह बात कही, लग रहा था कि तथ्य यह है कि सनी लियोन वाकई पॉर्न सुपरस्टार है। जिस पर सनी भी उलझन में दिखीं, वह इस पर विस्।तार से समझाने के लिए स्।काई को कहने लगीं। सनी के यह पूछने पर कि वह उसके बारे में कया जानता है, स्काई ने कुछ भी नहीं कहा और चुप रहा।

'इंग्लिश विग्लिशÓ में दिखेंगे बिग बी
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन 'इंग्लिश विंग्लिशÓ के कुछ दृश्यों में नजर आएंगे। इस फिल्म से श्रीदेवी बॉलीवुड में वापसी कर रहीं हैं। फिल्म का निर्देशन आर बालाकृष्णन की पत्नी गौरी शिंदे कर रहीं हैं। बालाकृष्णन (बाल्की) के साथ 'चीनी कमÓ और 'पाÓ में काम कर चुके अमिताभ ने कहा कि गौरी के साथ काम करने को लेकर वह बहुत खुश हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह बाल्की के साथ फिर से काम करने के इच्छुक हैं और अपने लिए जल्द ही पटकथा लिखे जाने का इंतजार कर रहे हैं। बच्चन ने ट्वीटर पर लिखा है कि बाल्की की पत्नी गौरी की निर्देशित एक फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिशÓ में एक छोटी सी भूमिका कर रहा हूं। इससे पहले बच्चन ने श्रीदेवी के साथ 1992 में 'खुदा गवाहÓ में काम किया था।


'मैं बोल दूंगा बकवास फिल्म हैÓ
क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि फि़ल्म का नायक ही कहे कि फि़ल्म बकवास है। जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर कहते हैं कि वो अपनी फि़ल्म की ग़लत तारीफ़ नहीं कर सकते। जब नाना पाटेकर से फि़ल्मों की मार्केटिंग के बारे में पूछा गया तो नाना पाटेकर ने कहा "मैं अपनी फि़ल्म की ग़लत तारीफ़ नहीं करता। मुझे तो अपनी फि़ल्म अच्छी ही लगेगी ऐसा नहीं है। अगर फि़ल्म बुरी है तो मै अपने निर्माता को बोल देता हूँ कि फि़ल्म के प्रचार पर मुझे ना बुलाओ, मैं बोल दूँगा कि बकवास फि़ल्म है।"
नाना पाटेकर मानते हैं कि उनकी फि़ल्म शागिर्द काफ़ी अच्छी थी लेकिन खऱाब प्रचार के चलते वो फि़ल्म बॉक्स आफि़स पर चल नहीं पाई।
नाना पाटेकर कहते हैं कि पब्लिसिटी करना मेरा काम नहीं फि़ल्म निर्माता का काम है। " मार्केटिंग तो मैं नहीं कर सकता ना। आप देखते हैं कि कितनी बकवास फि़ल्में हैं लेकिन जिस तरह से ढिंढ़ोरा पीटा जाता है। जिसकी वजह से लोग देखते हैं और बाद में गालियाँ देते हैं। आप चिल्ला चिल्लाकर पहले ही दिन लोगों को बुला सकते हैं लेकिन उसके बाद तो लोग जो बोलेंगें वो ही सही है। "
जब नाना से पूछा गया कि वो अपनी फि़ल्मों का चुनाव कैसे करते हैं तो नाना ने कहा। "मैं सिर्फ निर्देशक का नाम देखकर फि़ल्में साइन नहीं करता, मैं देखता हूँ कहानी क्या है बाकी कलाकार कौन हैं। अगर बाकी कलाकर अच्छे हों तो आधा काम तो हो गया। अगर वो बुरा है तो आप कितना भी अच्छा काम करो वो अच्छा नहीं हो सकता। मैं ये नहीं कहता कि मैं बहुत अच्छा हूँ लेकिन मैं ये कह सकता हूँ कि मैं बुरा नहीं हूँ।



'क्लासिक लीजेन्ड्सÓ जावेद अख्तर
जावेद अख्तर द्वारा होस्ट किया जा रहा यह शो, हिन्दी सिनेमा के लीजेन्ड्स को ट्रिब्यूट देता है। अगर आप भी हमारी तरह ही हिन्दी फिल्मों के दिवाने हैं, और यदि फिल्में ही आपके लिए सब कुछ हैं, तो जी क्लासिक इस सुनहरे युग को अनुभव करने के लिए बिल्कुल सही डेस्टीनेशन हैं। भारत का एकमात्र क्लासिक हिंन्दी फि ल्म चैनल होने के नाते जी क्लासिक के पास खुद की बड़ी लाइब्रेरी हैं, जिसमें डिजीटल री-मास्टर्ड करीबन 500 से अधिक एक्सक्लूसिव टाइटल्स वाली फि ल्में उपलब्ध हैं। जी क्लासिक के पास1940 से 1970 के बीच की सदाबहार भारतीय फिल्मों का कलेक्शन हैं।
यह जी क्लासिक का प्रयत्न सिर्फ इस अद्भूत युग की फि ल्में दिखाना ही नहीं हैं, परंतु हिंदी सिनेपे्रमियों को उन लोगों से परचित करवाना है जिन्होंने इस इंडस्ट्री को यहां तक पहुंचाया हैं। ''क्लासिक लीजेन्ड्सÓÓ जी क्लासिक द्वारा सिनेपे्रमियों को इंडस्ट्री के प्रतिभाशाली दिग्गजों के साथ परचित कराने की एक पहल हैं। अब हमने इस पहल के साथ एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपने दर्शकों के लिए 'क्लासिक लीजेन्ड्सÓएक ऐसे व्यक्ति के साथ लेकर आ रहे हैं, जो खुद एक लीजेन्ड हैं। इन्होंने शानदार काम के द्वारा दुनियाभर में पहचान मिली है, उनका नाम हैं, जावेद अख्तर। जी क्लासिक जावेद अख्तर की मेजबानी में 'क्लासिक लीजेन्ड्सÓ प्रस्तुत कर रहा हैं। यह शो 11 दिसम्बर 2011, रविवार से शाम 7.30 बजे शुरू हो रहा हैं। क्लासिक लीजेन्ड्सÓ पर आपके लिए इस सदाबाहार युग के पीछे की कहानियां लेकर आ रहा है।
जावेद अख्तर द्वारा निर्देशित इस बायोग्राफी में ऐसे लोगों की कहानी हैं, जिन्होंने इस इंडस्ट्री को शानदार फिल्में और संगीत दिया है। 13 सप्ताह की अवधि के दौरान, यह शो हर रविवार शाम को अलग-अलग लीजेन्ड्स- अभिनेता, निर्देशक, लेखक, संगीतकार और गीतकारों के बारे में बताएगा। यह शो 13 सबसे प्रशंसनीय और सम्मान प्राप्त लीजेन्ड्स के काम के बारे में बताएगा। जिनके नाम हैं, राज कपूर, आर.डी. बर्मन, मजरुह सुल्तानपुरी, किशोर कुमार, नर्गिस, बिमल रॉय, विजय आनंद, अशोक कुमार, साहिर लुधियानवी, महबूब खान, मधुबाला, गुरुदत्त और शम्मी कपूरहैं। यह शो इन दिग्गजों के इस इंडस्ट्री के अंदर पर्सनल और प्रोफेशनल अनुभवों के बारे में बताएगा। शो दर्शकों को इन दिग्गजों के जीवन के उस सफर पर ले जाएगा, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को इस मुकाम तक पहुंचाया है। दर्शक उस व्यक्ति से इन लीजेन्ड्स के बारे में जानेंगे, जिन्हें खुद को इन महान लोगों के साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
जी सिनेमा पीएसी के बिजनेस हेड, मोहन गोपीनाथ 'क्लासिक लीजेन्ड्सÓ के बारे में बात करते हुए कहते हैं, ''ऐसे कई शो हैं जो इंडस्ट्री के मौजूदा अभिनेताओं और निर्देशकों के बारे में बात करते हैं। जबकि इस ब्लैक/व्हाइट युग की फिल्मों के डायलॉग्स और गाने जनता के बीच लोकप्रिय हो सकते हैं। परंतु जनता को उस शानदार काम के पीछे के लोगो के बारे में नहीं पता है। ''जब हम भारतीय सिनेमा के इन फाउंडर्स के बारे में बात करते हैं, तो यह उचित है कि हमारे साथ समान रूप से ये प्रतिभाशाली और महान व्यक्तित्व वाले दिग्गज कलाकार हैं।

अपडेट : 4.26 बजे

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

अजय सिंह पर टिप्पणी से सदन में हंगामा


अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा व्यक्तिगत बयान की आग में झुलसकर रह गई। उद्योगमंत्री कैशल विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष पर किए गए कटाक्ष का जवाब कंाग्रेस सदस्यों ने हंगामा मचाकर दिया। विजयवर्गीय के खेद जताने के बाद ही सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।


भोपाल।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दी गई व्यवस्था के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान परिवारजनों को लेकर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लगने का क्रम लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। चर्चा के लिए तय सीमाओं की मर्यादाएं दूसरे दिन भी टूटती रहीं। एेसी ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी पर समूचा विपक्ष ही भड़क गया। इसे लेकर लगभग 15 मिनट तक सदन में शोरगुल की स्थिति बनी रही। आखिरकार जब विजयवर्गीय ने अध्यक्ष के निर्देश पर खेद जताया, तब जाकर कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। इस भाषण के आधार पर उन्होंने अजयसिंह को नेता प्रतिपक्ष ही स्वीकार करने से इंकार कर दिया और कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष की तलाश है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के भाषण को पूरी तरह से सामंती कुंठा से ग्रसित बताया। उन्होंने कहा कि चुरहट लाटरी के पैसे से ये केरवा में कोठी बनायें, लेकिन सीएम के रिश्तेदार दो- चार कमरे का मकान भी नहीं बना सकते, जिस वीरसिंह चौहान को सीएम का साला बताया गया, वह तो गुर्जर है। आरोप लगाया गया कि 90 करोड़ के ठेके दिये, जबकि वास्तव में मात्र चार से साढ़े चार करोड़ का ही ठेका मिला।

रेत पर भाजपा कार्यकाल में बढ़ा राजस्व
प्रदेश में रेत माफिया पनपने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय रेत से 14 करोड़ राजस्व मिलता था, अब 124 करोड़ रुपये मिल रहा है। इस पर कांग्रेस के बृजेन्द्र सिंह राठौर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चुनौती न दें। उनकी इस बात का बसपा सहित कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने भी कड़ा प्रतिरोध किया।

शिवराज जनता के दिल में
विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष की ओर इंगित होते हुए कहा कि आप तीन पीढि़यों से राजनीति कर रहे हैं, लेकिन जनता के बीच नहीं पहुंच पाये, मगर चौहान मात्र पांच साल में ही जनता के दिलों में पहुंच गये। विजयवर्गीय ने अजयसिंह के पुत्र को लेकर एक टिप्पणी कर दी, जिस पर विपक्ष ने घोर नाराजगी जाहिर की, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। आरिफ अकील ने तैश में आकर कहा कि हम भी इसी शैली में जवाब दे सकते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव पर सीएम का आज आएगा जवाब
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में सदस्यों द्वारा लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप और मुद्दे उठाने में काफी समय लग रहा है, जिसे देखते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की समयावधि एक दिन और बढ़ा दी गई है। यानी अब बुधवार दोपहर तक सदन में अविश्वास पर चर्चा होगी और दोपहर 3 बजे से सीएम अपना जवाब देंगे। यह सहमति मुख्यमंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष के बीच बनने पर अध्यक्ष ने नई व्यवस्था दी है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा सदन में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विस अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने पूर्व में 28 एवं 29 नवंबर की तिथि तय की थी, मगर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों तथा उनके रिश्तेदारों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से बौखलाए मंत्रियों ने भी विपक्ष के हमलों का जवाब देना शुरू कर दिया, तो इसमें काफी समय लगने लगा।

यूपी: बच्चों को लगाए एक्सपायरी डेट के एंजेक्शन



बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के सरकारी अस्पताल में मासूम बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ का मामला सामने आया है.

आरोप है कि अस्पताल में बिना देखे ही बच्चों को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाते हैं और अस्पताल प्रशासन आंख मूंद कर सो रहा है.

यहां के सरकारी अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है.

आरोप है कि यहां बच्चों को खुलेआम एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, यानी ऐसा इंजेक्शन जिसे इस्तेमाल करने का तय वक्त खत्म हो चुका है.

यहां दूरदराज के इलाकों से लोग अपने बच्चों का इलाज कराने पहुंचते हैं. हैरानी की बात ये है कि अस्पताल प्रशासन अब तक इससे बेखबर था. मामला सामने आने पर अब वो जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहा है.

सीएमओ पीएल गुप्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में आ गया है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाई की जाएगी.

प्रसिद्ध असमिया लेखिका इंदिरा गोस्वामी नहीं रहीं



गुवाहाटी: प्रसिद्ध असमिया लेखिका इंदिरा गोस्वामी का निधन हो गया है. मंगलवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ.

साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित 70 वर्षिय लेखिका पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं.

प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम यानी उल्फा और केंद्र सरकार के बीच शांति वार्ता शुरू कराने में अहम भूमिका निभाने वाली लेखिका का गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था.

डॉक्टरों का कहना है कि उनके कई महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.

गोस्वामी दिल्ली विश्वविद्यालय के आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में प्राध्यापक थीं.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गगोई ने कहा कि इंदिरा गोस्वामी के निधन से भारत के साहित्यिक परिदृश्य में एक शून्य पैदा हो गया है.

असमिया लेखिका का जीवन विविधताओं से भरा हुआ था. गोस्वामी को उनके मौलिक लेखन के लिए जाना जाता है. उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर काफी लिखा था और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया था.

इंदिरा गोस्वामी एक परिचय

इंदिरा गोस्वामी असमिया साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती गोस्वामी हाल में असम की चरमपंथी संगठन उल्फा यानि युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम और भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की राजनैतिक पहल करने के लिये खासी चर्चा में रही हैं।
इनका जन्म : १४ नवम्बर १९४३ गुवाहाटी असम में हुआ था और इसी गुवाहाटी में उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिक्षा
गुवाहाटी विश्वविद्यालय से असमिया में एम ए तथा 'माधव कांदले एवं गोस्वामी तुलसीदास की रामायण का तुलनात्मक अध्ययन' पर पी एच डी।

सम्प्रति
दिल्ली विश्वविद्यालय के आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहीं।

प्रमुख कृतियां

लघुकथा संग्रह : चिनाकी मरमा कइना हृदय एक नदीर नाम प्रिय गल्पो।
उपन्यास : चिनाबेर स्रोत नीलकंठी ब्रज अहिरोन उने खाओआ हौदा दशरथेर पुत्र खोज तथा संस्कार उदयभारनुर चरित्र आदि तीन समवेत उपन्यास
आत्मकथा : आधा लेख दस्तावेज

सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार १९८३
असम साहित्य सभा पुरस्कार १९८८
भारत निर्माण पुरस्कार १९८९
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सौहार्द्र पुरस्कार १९९२
कमलकुमारी फाउंडेशन पुरस्कार १९९६
अन्तर्राष्ट्रीय तुलसी पुरस्कार फ्लोरिडा यू एस ए १९९९।

अन्य सम्मान
इसके अतिरिक्त "दक्षिणी कामरूप की गाथा" पर आधारित हिन्दी टी वी धारावाहिक तथा उक्त उपन्यास पर असमिया में निर्मित फिल्म "अदाज्य" को राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय ज्यूरी पुरस्कार प्राप्त।



'लेखक को मानवता का साथ देना चाहिए'- इंदिरा गोस्वामी
इंदिरा गोस्वामी असम विवाद में भी मध्यस्थता कर रही हैं 1942 में असम में जन्मी इंदिरा गोस्वामी के लेखन का दायरा कभी सीमित नहीं रहा. असमी भाषा में लेखन की शुरूआत करनेवाली इंदिरा गोस्वामी की कहानियों, उपन्यासों, कविताओं और आलेखों को पूरे देश में सराहा जाता रहा है.

ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी जैसे पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़ी गईं इंदिरा गोस्वामी की कहानियों पर कामयाब फिल्में भी बन चुकी हैं. वो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं ओर उनकी लेखनी आज भी पूरे जोशो-ख़रोश से जारी है. पेश है सूफ़िया शानी के साथ हुई उनकी बातचीत के मुख्य अंश:

मेरा जन्म असम के एक पारपंरिक ज़मींदार परिवार में हुआ था. मेरे जन्म के समय नगर-ज्योतिषी ने कहा था कि ऐसे अशुभ ग्रह में जन्म लेने वाले बच्चे के दो टुकड़े कर ब्रह्मपुत्र में डाल देना चाहिए.

हालांकि मेरे जन्म के समय की यह कहानी मुझे बहुत बाद में मालूम हुई क्योंकि घर में अंधविश्वास और ज्योतिष के लिए कोई जगह नहीं थी.

मेरे माता-पिता पढ़े-लिखे और खुले विचारों के इन्सान थे. मां का उन बातों में बिल्कुल विश्वास नहीं था.

पिता असम राज्य के शिक्षा निदेशक थे. मां की रूचि रवीन्द्र साहित्य और संगीत में थी. पुराना जमींदार परिवार था.

इसलिए घर पर नौकर-चाकर के साथ-साथ आने जाने के लिए हाथी थे. एक हाथी हम भाई-बहन के खेलने के लिए भी था.

बचपन में मुझें असमिया पढ़नी लिखनी नहीं आती थी. लेकिन पिता के ज़ोर देने पर मैंने असमिया सीखी और आगे चल कर इसी भाषा में मैंने अपने लेखन की शुरूआत की.

मेरे लेखन के विषय, मेरे-अपने समाज की समस्याएं ही रहे हैं. जैसे मैंने ब्राह्म्ण विधवाओं की, हर पल परीक्षा से गुज़रने के सघंर्ष और विडबंनाओं को लोगों के सामने लाने की कोशिश की है.

मुझे अपनी सारी रचनाएं प्रिय हैं लेकिन मुझे 'दोतल हातिएर ओईये खोवा हाउदा" से ज्यादा लगाव रहा है.

जहॉ तक सवाल पुरस्कार का है, तो मुझे खुशी है कि मुझे ज्ञानपीठ जैसा सम्मान मिला. लेकिन सम्मान और पुरस्कार के लिए मैंने कभी लिखा नहीं, बल्कि सच यह हैं कि लेखन मेरे लिए ऐसा है जैसे रगो में बहता लहू.

औरत की तस्वीर बदली

अगर क़लम का साथ नहीं मिला होता तो मैं बहुत पहले मर गई होती. पहले के मुक़ाबले, आज की औरत की तस्वीर बदली है. लेकिन आज भी 85 प्रतिशत औरतें दहलीज़ के इस पार ठिठकी हुई हैं.


मैं मानती हूं कि लेखक को राजनीति से नहीं जुड़ना चाहिए. उसे हमेशा मानवता का साथ देना चाहिए. लेकिन मैं अपने राज्य असम को शांत देखना चाहती हूं इसलिए मैंने वहां मध्यस्थ बनना स्वीकार किया.

इंदिरा गोस्वामी

ज़रूरत उन्हें हाशिए से उठाने की है. तब औरत की तस्वीर साफ़ नज़र आएगी. मुझे ख़ुशी है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में कामयाब हो रही हैं. लेकिन आज़ादी की आड़ में फ़ूहड़ नग्नता को अपना अधिकार मान लेना ठीक नहीं है.

ढ़के हुए बदन के साथ भी महिला सैक्सी और आकर्षक लगती है. ज़रूरत है आज आज़ादी और अधिकार को ठीक से समझकर उसे परिभाषित करने की.

मैं मानती हूं कि लेखक को राजनीति से नहीं जुड़ना चाहिए. उसे हमेशा मानवता का साथ देना चाहिए. लेकिन मैं अपने राज्य असम को शांत देखना चाहती हूं इसलिए मैंने वहां मध्यस्थ बनना स्वीकार किया.

मैं रहती दिल्ली में हूं. दिल्ली ने मुझे बहुत कुछ दिया है. लेकिन मेरी आत्मा असम में बसी है.वहां की हर समस्या से मैं जुड़ी रही हूं.

पाकिस्तान की यात्रा एक सुखद अनुभव रहा. मेरा महज़ विश्वास ही नहीं दृढ़ विश्वास है कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते साहित्य और संगीत के ज़रिए भी ठीक हो सकते हैं.

ऐसा अदभुत अनुभव शायद ही किसी को हुआ हो कि आम दुकानदार आपको यह कह कर उपहार दे कि आप उसके वतन के दूसरे हिस्से से आई हैं.मैं तो वहां के लोगों के प्यार और सम्मान से सराबोर हूं.

आजकल मैं अपनी सामान्य व्यस्तताओं के साथ बिखरी हुई उन कविताओं के संग्रह के छपकर आने का इंतज़ार कर रही हूँ जिन्हें मैंने अभी तक प्रकाशित नहीं करवाया था.

कांग्रेस की नीतियां हमेशा जनता के हित में




नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की नीतियां हमेशा जनता के हित के लिए है। साथ ही उन्होंने कहा, यूपीए सरकार ने आम आदमी को राहत दी है।
बीमारी के बाद पहली बार सोनिया गांधी मंच आईं। उन्होंने कहा, पार्टी कार्यकर्ताओं को पार्टी की बुनियाद बताया। भ्रष्टाचार पर बोलते हुए सोनिया कहा, हमने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए आरटीआई के रुप में हथियार दिया। कुछ दिनों में भ्रष्टाचार पर चर्चा हुई है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सरकार ने मजबूत लोकपाल पर काम किया। नए कानून से भ्रष्टाचार खत्म करने में मदद मिलेगी।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मंगलवार को युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों से अपील की कि वे जनता के बीच विश्वास नहीं खोएंगे क्योंकि विश्वास की भावना ही उन्हें सही नेता बनाएगी।राहुल ने युवा कांग्रेस के अधिवेशन बुनियाद में संगठन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिए अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि महात्मा गाधी मंगलवार को एक व्यक्तित्व से उपर उठकर एक विचार और अभिव्यक्ति का अंदाज बन चुके हैं।
राहुल ने कहा कि गांधी जी ने चुनौतियों को स्वीकार किया और हर विचार को पुनर्परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी इस बात के पक्षधर थे कि सभी लोगों को उनके राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले और यही ऐसा विचार था जिसके कारण उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया।
उन्होंने कहा कि गांधी जी ने पहचाना कि कांग्रेस करोड़ों के देश में एक सशक्त माध्यम बन सकती थी। गांधीजी ने पार्टी पर कभी अपना नियंत्रण नहीं चाहा बल्कि इसका नियंत्रण लोगों के हाथों में दिया। राहुल ने अधिवेशन के अंतिम दिन कहा कि आज गांधीजी नहीं हैं, इसलिए हमें संगठन में लोकतांत्रीकरण करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि हम यह तय करायेंगे कि हर दो वर्ष में युवा कांग्रेस में चुनाव हो।
राहुल ने कहा, मेरा मानना है कि हम दुनिया में कुछ भी लेकर नहीं आते। हम सिर्फ लोगों का विश्वास जीतते हैं। गांधीजी ने जनता के इसी भरोसे को जीता था। राहुल ने नवनिर्वाचितों से कहा कि वे कोशिश करें कि ये विश्वास न टूटे। कांग्रेस नेता ने कहा कि अपने विरोधियों की बात सुनें क्योंकि ये ही आपको मजबूत बनायेंगे। सच को जानना और उसके लिए लड़ना सीखें। दूसरों का नेतृत्व करने से पहले खुद का नेतृत्व करना सीखें।

आर्कटिक में रिकॉर्ड स्तर तक पिघली बर्फ़




संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में तापमान बढ़ने का लंबे समय से चला आ रहा सिलसिला जारी है जबकि आर्कटिक समुद्र में इस वर्ष बर्फ़ रिकॉर्ड स्तर तक पिघल गई है.

मौसम विज्ञान से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठन (आईएमओ) की ओर से जेनेवा में ये रिपोर्ट जारी की गई है.


इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1850 से मौसम का रिकॉर्ड रखना आरंभ किया गया था और रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2011 अब तक का दसवाँ सबसे गर्म वर्ष रहा है.

उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ़्रीका में मौसम परिवर्तन पर भविष्य की रुपरेखा तैयार करने के लिए दो सप्ताह का एक सम्मेलन चल रहा है जिसमें 192 सदस्य किसी नतीजे पर पहुंचने का प्रयास करेंगे.
रिपोर्ट

आर्कटिक को वैज्ञानिक सबसे संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं और आईएमओ का कहना है कि यह एक तरह से भविष्य का बैरोमीटर है.

इस वर्ष आर्कटिक में बर्फ़ पिघलने का रिकॉर्ड है और इससे पहले सिर्फ़ एक ही बार इससे अधिक बर्फ़ पिघली थी.

"वैज्ञानिक प्रमाण पुख़्ता हैं और स्पष्टरूप से साबित करते हैं कि दुनिया गर्म हो रही है"

आरडीजे लेंगोसा, आईएमओ के उपनिदेशक

आईएमओ के उपनिदेशक आरडीजे लेंगोसा ने सम्मेलन स्थल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये वर्ष पिछले 15 वर्षों में 13वाँ सबसे गर्म साल रहा है.

लेंगोसा ने कहा, "वैज्ञानिक प्रमाण पुख़्ता हैं और स्पष्टरूप से साबित करते हैं कि दुनिया गर्म हो रही है."

उनका कहना था कि मानवीय गतिविधियाँ ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार उन्होंने कहा, "मौसम परिवर्तन वास्तविक है और हम पूरी दुनिया में हो रहे मौसम परिवर्तन से इसे महसूस कर रहे हैं."

ये रिपोर्ट वर्ष के पहले दस महीनों के आधार पर तैयार की गई है.

संस्था ने कहा है कि वर्ष 2011 अति वाले मौसम का वर्ष रहा है.

पूर्वी अफ़्रीका में जहाँ सूखे की वजह से दसियों हज़ार लोग मौत के शिकार हो गए वहीं एशिया में बाढ़ का बड़ा प्रकोप रहा. अमरीका में 14 से अधिक मौसमी त्रासदियों का सामना करना पड़ा जिससे निपटने के लिए अमरीका को हर त्रासदी में एक अरब डॉलर से अधिक की राशि ख़र्च करनी पड़ी.

स्रोत: बीबीसी हिन्दी

ओबामा-मोदी माशेबल अवार्ड 2011 के लिए नामित






नई दिल्‍ली।
गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के साथ विश्‍व प्रतिष्ठित पुरस्‍कार माशेबल अवार्ड 2011 के लिए नामित किया गया है। यह अवार्ड उन राजनेताओं को दिया जाता है, जो अनुसरण के योग्‍य हों यानी मस्‍ट फॉलो पॉली‍टीशियन को। इस अवार्ड के लिए नामित नेताओं में नरेंद्र मोदी एक मात्र गैर-अमेरिकी व्‍यक्ति हैं।

उल्‍लेखनीय है कि नियमित रूप से सोशल नेटवर्किंग के माध्‍यम से नरेंद्र मोदी सीधे जनता से जुड़े रहते हैं, जिसकी वजह से पूरे विश्‍व का ध्‍यान उनकी ओर गया। वो नियमित रूप से फेसबुक पेज को अपडेट करते हैं, साथ ही लगातार ट्वीट करते रहते हैं। वो भी अपने निजी ट्विटर अकाउंट से। अपने ब्‍लॉग पर अपने विचार लिखने से भी मोदी कभी नहीं चूकते हैं।
Read: In English
बराक ओबामा के साथ मोदी को इस अवार्ड के लिए नामित किया गया है। अवार्ड के विजेताओं की घोषणा 19 दिसंबर को की जायेगी। अवार्ड के लिए वोटिंग फेसबुक और ट्विटर के माध्‍यम से जारी है। कोई भी व्‍यक्ति वोट कर सकता है।

माशेबल एक ऑनलाइन समाचार वेबसाइट है, जो डिजिटल संस्‍कृति और सोशल मीडिया एवं तकनीकी को बढ़ावा देने में खासा योगदान रखती है। माशेबल अवार्ड कंपनियों, लोगों और परियोजनाओं को मान्‍यता देता है। डिजिटल दुनिया का यह सबसे बड़ा अवार्ड है।

बेंगलूरु सर्वश्रेष्ठ शहर: सर्वेक्षण





नयी दिल्ली।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे चार महानगरों को पीछे छोड़ते हुए दक्षिण भारत का बेंगलूर शहर देश में रहने के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ शहर के रूप में उभरा है। एक वैश्विक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। वैश्विक एचआर सलाहकार कंपनी मर्सर के सर्वेक्षण क्वालिटी आफ लिविंग सर्वे-वर्ल्‍डवाइड रैंकिंग 2011 के अनुसार बेशक बेंगलूर देश का रहने के लिए सर्वश्रेष्ठ शहर है, पर वैश्विक स्तर पर 221 शहरों की सूची में यह काफी नीचे यानी 141वें पायदान पर है।

सर्वेक्षण में वियना को रहने के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन शहर करार दिया गया है। इस सूची में 5 भारतीय शहर बेंगलूर (141), नयी दिल्ली (143), मुंबई (144), चेन्नई (150) और कोलकाता (151) शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर वियना के बाद सूची में ज्यूरिख,ऑकलैंड, म्यूनिख, डसलडोर्फ, वैंकुवर, फै्रंकफर्ट, जिनीवा, कोपनहेगन और बर्न आता है।

व्यक्तिगत सुरक्षा मापदंड के हिसाब से दुनिया के बेहतरीन शहरों की एक अन्य सूची में लग्जमबर्ग को शीर्ष पर रखा गया है। उसके बाद बर्न, हलेसिंकी, ज्यूरिख, वियना, जिनीवा और स्‍टॉकहोम का नंबर आता है। इस सूची में भारतीय शहरों में बेंगलूरु 117वें स्थान पर है। उसके बाद दिल्ली और कोलकाता 127वें, मुंबई 142वें स्थान पर है। इसके अलावा सूची में चेन्नई भी शामिल है।
updet: 6.37 pm

लोकपाल के दायरे में हो बड़े एनजीओ: अरविंद केजरीवाल



टीम अन्‍ना के अहम सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि जितने भी बड़े एनजीओ हैं उन्‍हें लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए. साथ ही केजरीवाल ने सीबीआई को भी लोकपाल के दायरे में लाए जाने की बात कही.

राजधानी दिल्‍ली में मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि वर्तमान समय में भ्रष्‍टाचार ने मीडिया में भी अपनी घुसपैठ कर ली है और इसे दूर करने के लिए एक अलग तरह के कानून को बनाने की जरुरत है. केजरीवाल ने मीडिया को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की बात को नकार दिया.

इससे पहले केजरीवाल ने किरण बेदी के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के खिलाफ गबन के आरोपों को बकवास करार दिया है और कहा कि यह प्रभावी लोकपाल की उनकी मांग का नतीजा है.

दिल्ली पुलिस द्वारा बेदी के खिलाफ अपने एनजीओ को कॉरपोरेट जगत से मिले अनुदान के गबन के आरोप में दर्ज प्राथमिकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केजरीवाल ने कहा कि कोई गबन नहीं हुआ है। बेदी इस मौके पर मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने अपने बचाव में कुछ नहीं कहा.

रिटेल में एफडीआई से होगा फायदा: मनमोहन



रिटेल क्षेत्र में एफडीआई लाने के फैसले के बाद ससंद और उसके बाहर चौतरफा आलोचना झेल रही केंद्र सरकार का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि एफडीआई से किसानों को फायदा मिलेगा.

दिल्‍ली में युवा कांग्रेस सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने रिटेल में एफडीआई को लाने का फैसला बहुत ही सोच विचार के बाद लिया है. इसमें सरकार की तरफ से कोई जल्‍दबाजी नहीं की गई है. उन्‍होंने बढ़ती महंगाई के बारे में भी अपने विचार रखते हुए कहा कि तेल कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण ही महंगाई आसामान छू रही थीं.

प्रधानमंत्री ने एक बार फिर जनता को वादा दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ही देश की तरक्‍की के लिए सबसे बेहतर है. उन्‍होंने देश की जनता को भरोसा दिलाया की महंगाई पर जल्‍द ही काबू किया जाएगा.

करीना-इमरान से सेक्स के सवाल पर सेंसर भड़का



सेक्स एजुकेशन भले ही आजकल स्कूलों में पढ़ाई जाने लगी हो, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन को अभी भी यह एक गंदा शब्द लगता है। इसी वजह से पिछले सप्ताह डेब्यू डायरेक्टर शकुन बत्रा को अपनी फिल्म ' एक मैं और एक तू ' के ट्रेलर के लिए सेंसर बोर्ड के अधिकारियों के गुस्से का शिकार होना पड़ा।

इमरान खान और करीना कपूर की इस फिल्म को करन जौहर और यूटीवी मोशन पिक्चर्स ने प्रड्यूस किया है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को यू सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है, क्योंकि इस फिल्म में सेक्स शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यू और यू / ए सर्टिफिकेट नहीं मिलने इसे नैशनल टेलिविजन पर भी नहीं दिखाया जा सकता।

आपत्तिजनक सीन के बारे में एक सूत्र ने मुंबई मिरार को बताया, 'इसके एक सीन में एक कैरक्टर करीना और इमरान से पूछता है कि क्या उन्होंने सेक्स किया है। इस पर करीना जवाब देती हैं ' हां ' और इमरान कहते हैं ' नहीं ' । इस पर एतराज बेतुका है। हाल ही में आईं और कई फिल्मों के ट्रेलर्स में आपत्तिजनक डायलॉग और सीन्स को मंजूरी दी गई हैं। '

कहने की जरूरत नहीं है कि करन और शकुन सेंसर बोर्ड के इस फैसले से दंग रह गए हैं। सूत्र के मुताबिक, 'हालांकि करन और शकुन ने इसे मान लिया है और वे अब नए वर्जन बनाने पर काम कर रहे हैं।'

ट्रेलर पर दोबारा काम करने का मतलब है बजट और बढ़ जाना। लेकिन करन और शकुन दोनों ही फिल्म की पब्लिसिटी के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। सूत्र ने बताया, 'वे ट्रेलर को ए के बजाए यू सर्टिफिकेट दिलवाना चाहते हैं और ज्यादा से ज्याद फिल्मों के साथ चलाना चाहते हैं।'

करन जौहर से संपर्क करने पर उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि ' सेक्स ' शब्द की वजह से ट्रेलर को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया, ' फिलहाल इस ट्रेलर को ' द डर्टी पिक्चर ' के साथ चलाने जा रहा हूं, जिसे पहले ही ए सर्टिफिकेट मिल हुआ है।'

उन्होंने कहा कि इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि सेंसर बोर्ड के फैसले पर मेरा बोलना ठीक नहीं होगा। कानून को मानने वाला फिल्ममेकर होने के नाते मैं वही करना पसंद करूंगा जो मुझे कही गया है। मुझे उम्मीद है कि वे हमें दूसरे ट्रेलर के लिए सहयोग करेंगे। '

अपनी हद में रहे पाकिस्तान

वॉशिंगटन।। नाटो हमले के बाद पाकिस्तान के कड़े तेवर पर अमेरिकी अखबार ने उसे चेतावनी दी है। एक अमेरिकी डेली ने मंगलवार को पाकिस्तान के टॉप नेताओं आगाह किया कि वे हद में रहें। अखबार ने कहा कि इससे पहले कि चीजों पर नियंत्रण न रहे पाकिस्तान के नेता अपने बयानों पर संयत बरतें।

न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा, ' इससे पहले की चीजें हाथ से बाहर चली जाएं पाकिस्तान के नेताओं को चाहिए कि वे इस मुद्दे को और तूल न दें।' अखबार ने आगे लिखा है कि
जो कुछ हुआ उसका पता लगाने तथा यह तय करने के लिए कि ऐसा दोबारा नहीं होगा , अमेरिका के साथ काम करना देश के हित में है।'

उसने कहा, 'पाकिस्तान के नेता काफी खतरनाक खेल कर रहे हैं।' सोमवार को उनके प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने सीएनएन को इंटरव्यू में कहा था कि 'अब रिश्ते पहले जैसे नहीं रहेंगे। '

अखबार ने कहा कि कई सवालों के जवाब दिए जाने हैं। मसलन, किसने पहले अमेरिकी और अफगानी सैनिकों पर हमला किया? क्या लड़ाके पाकिस्तानी चौकियों के पास डेरा डाले थे?

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नाटो सैनिकों के हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। तभी से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है।

भारत को 212 रनों का टारगेट

कटक।। कटक के बाराबाती स्टेडियम में खेले जा रहे पहले वनडे मैच में वेस्ट इंडीज ने भारत के सामने 212 रनों का टारगेट रखा है। वेस्ट इंडीज की तरफ से ब्रावो ने 60 रनों की पारी खेली।

टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी वेस्ट इंडीज की टीम को पहला झटका 18 रन के स्कोर पर लगा, जब एड्रियन बराथ आउट हुए। एड्रियन बाराथ को 17 रन पर विनय कुमार ने विकेट के पीछे पार्थिव पटेल को कैच कराया। बाराथ ने 13 गेंदों पर तीन चौके लगाए जबकि दूसरा विकेट मॉर्लन सैम्युल्स (10) को वरुण आरोन ने बोल्ड कर दिया। वेस्ट इंडीज की तरफ से धुआंधार बैटिंग कर रहे एल. सिमंस को उमेश यादव ने 19 रन पर आउट कर दिया। सिमंस ने 30 गेंदों में 2 चौके और एक छक्का लगाया।

इसके बाद ब्रावो और हयात ने वेस्ट इंडीज की पारी को आगे बढ़ाया। दोनों ने संभल कर बैटिंग की। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 75 रनों की पार्टनरशिप की। यह जोड़ी भारत के लिए खतरा बनती जा रही थी, तभी हयात रन आउट हो गए। हयात 31 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद ब्रावो भी हाफ सेंचुरी बनाकर चलते बने। उन्होंने 60 रनों की पारी खेली। इसके बाद पोलार्ड और सैमी भी जल्दी-जल्दी आउट हो गए।

भारत की ओर से उमेश यादव और वरुण आरोन ने 2-2 विकेट लिए जबकि अश्विन, रैना और जडेजा ने 1-1 विकेट लिए।

सोमवार, 28 नवंबर 2011

शिवराज सिंह के सफलतम 6 साल




लाड़ली लक्ष्मी और बेटी बचाओ योजनाओं से प्रदेश का नाम विश्व में रोशन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के छह वर्षों के दौरान मध्यप्रदेश के व्यक्तित्व और छवि, दोनों में निखार आया है। सरकार का संस्कारी, आत्मीय, सेवाभावी व संवेदनशील व्यक्तित्व बना है। वह हर गरीब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है, तो विकास चक्र को गतिशील बनाने के लिए समाज भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। किसी समय बीमारू कहे जाने वाले राज्य ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास में राष्ट्रीय औसत से अधिक की वृद्धि दर अर्जित की है। 10.06 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर आश्चर्यजनक ही कही जाएगी, क्योंकि आज से पांच वर्ष पूर्व जब प्रदेश के आर्थिक विकास की दर के लक्ष्य का निर्धारण किया गया था, तब किसी को नहीं लगता था कि प्रदेश इतनी विकास दर अर्जित कर पाएगा।
यही कारण था कि प्रदेश की 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए विकास दर का लक्ष्य 7.6 प्रतिशत तय किया गया था, पर प्रदेश ने हासिल कर ली है, 10.06 प्रतिशत की विकास दर। यही एक उपलब्धि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व के करिश्मे को स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। प्रदेश की अग्रता आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है। राज्य की प्रगति अन्य क्षेत्रों में भी हुई है। पर्यटन व उद्योगों को बढ़ावा देने की बात हो या फिर खेलों को प्रोत्साहन देने या ई-गवर्नेंस की कोशिशें हों, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के नवाचार हों, बुनियादी सुविधाओं के विकास के काम अथवा सामाजिक क्षेत्र में सरकार की भागीदारी और मानव मूल्यों के प्रति उसका समर्पण, इन सभी दिशाओं में प्रदेश की चमकदार छवि बनी है।




अनेक अवसरों पर केंद्र सरकार और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पुरस्कार और सराहना के द्वारा इसे अभिव्यक्त भी किया है। कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया से प्रदेश को बेस्ट ई-गवर्नड स्टेट का दर्जा मिला है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को 34 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2009-10 में भारत सरकार द्वारा कुल स्थापित छह गोल्डन आइकॉन पुरस्कार में से तीन मध्यप्रदेश को मिले हैं। इसी प्रकार, राष्ट्रीय टूरिज्म अवार्ड वर्ष-2009-10 में प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो की नगरपालिका को सर्वश्रेष्ठ नागरिक सेवाओं के प्रबंधन वाले स्थल का पुरस्कार मिला है। वर्ष-2010 के लिए राज्य को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया है। पुरस्कार में कहा गया है कि प्रदेश में विभिन्न खेलों में नई ऊर्जा भरने के प्रयासों से अन्य राज्यों को प्रेरणा लेनी चाहिए। वहीं, सामाजिक क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण के प्रयासों और सामाजिक क्षेत्र में बजट का 38 प्रतिशत व्यय करने के लिए विश्व बैंक की प्रबंध संचालक ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भूरि-भूरि सराहना की है। दरअसल, शिवराज सरकार के छह वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश का संस्कारित व्यक्तित्व निखरा है।



'आओ बनाए अपना मध्यप्रदेशÓ अभियान ने प्रदेश में विकास की दौड़ में जिद, जुनून और जज्बे के साथ प्रयास करने की जन और तंत्र, दोनों को नई दिशा दी है। मध्यप्रदेश गीत और गान ने एकजुटता का नया भाव बनाया है। प्रदेश में जनता और सरकार के संबंधों में भी बदलाव आया है। जहां सरकार के निर्णयों, योजनाओं और कार्यक्रमों के नीति-नियोजन में जनता की भागीदारी बढ़ी है, तो वहीं जनता के उत्सवों और सामुदायिकता में सरकार की सहभागिता भी बढ़ी है। यह भी पहली बार हुआ, जब आमजन के साथ मिलकर उत्सव मनाने के लिए मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी खुले हैं, वह भी बिना किसी भेदभाव के। जिस उत्साह से रोजा इफ्तार का आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर होता है, वैसा ही क्षमावाणी का कार्यक्रम भी होता है। हिंदू हों, सिख या क्रिश्चियन, सभी के उत्सवों में प्रदेश की जनता का मुखिया जनता के उल्लास व उत्साह में शामिल होता है। इससे मुख्यमंत्री का जनता से सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। इन छह वर्षों में महिला व किसान पंचायतों सहित 21 पंचायतों का आयोजन विभिन्न वर्गों के साथ मुख्यमंत्री निवास पर हुआ है। विचार-विमर्श से आए निष्कर्षों के सुपरिणाम भी प्रदेश में दिख रहे हैं।
सरकार आज पीडि़त मानवता की सेवा के लिए सदा तत्पर रहती है, फिर चाहे वह परिवार के सदस्य की बीमारी हो, जन्म, विवाह अथवा शिक्षा-दीक्षा। सरकार ने जन्म से लेकर मृत्यु तक के अवसरों पर आर्थिक मदद की योजनाएं संचालित की हैं। उसने शिक्षा के मार्ग की हर बाधा को भी दूर किया है। गरीबों के बच्चों के लिए पहली कक्षा से 50 रुपए छात्रवृत्ति, 12वीं कक्षा तक नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें, छात्राओं को दो जोड़ी गणवेश और छात्राओं के साथ ही छात्रों को भी इस वर्ष से साइकिलें उपलब्ध कराई जा रही हैं। गरीब बच्चों को विदेशों में अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी है।
परिवार के भरण-पोषण के लिए अन्नपूर्णा योजना द्वारा सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने, प्रसव से पहले और बाद में महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही उचित आराम, आहार और पोषण में सहयोग, साथ ही लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान व अटल बाल आरोग्य मिशन जैसे अनेक प्रयासों से गरीबों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों के सदस्यों को नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था के लिए शुरू की गई दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के साथ ही कमजोर वर्ग के ऐसे रोगियों को, जिनको कहीं और से सहायता नहीं मिलती है, उन्हें भी आर्थिक सहायता दी जाने लगी है। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का बजट बढ़ाकर 20 करोड़ कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री की पहल पर लागू बाल हृदय योजना में छोटे बच्चों के दिल के ऑपरेशन के महंगे उपचार की व्यवस्था हो गई है। इस योजना के लिए राशि जुटाने हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा अपने स्मृति-चिन्ह समृद्ध वर्ग में बांट दिए गए हैं। यानी, सारांश यह है कि घरेलू कामकाजी बहनों, हाथठेला, रिक्शा चालक, मंडी हम्माल व तुलावटी, नि:शक्तजन, खेतिहर मजदूरों सहित अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग, महिलाओं और किसान जैसे कमजोर और वंचित तबकों तक स्वतंत्र भारत में आजादी का फल उनके कल्याण की योजनाओं के रूप में पहुंचाने का प्रयास मध्यप्रदेश में इन छह वर्षों में हुआ है।
मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य है, जहां लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून द्वारा यह व्यवस्था की गई कि आमजन को सरकार की सेवाओं के लिए याचना की जरूरत न रहे। इस कानून से व्यवस्था का स्वरूप ही बदल गया है। सेवा में देरी पर संबंधित शासकीय सेवक को अर्थ दंड से दंडित करने और नागरिक को दंड राशि क्षति-पूर्ति के रूप में देने की व्यवस्था है। केंद्र सरकार के अनुमोदन के लिए लंबित विशेष न्यायालय विधेयक इस दिशा में दूसरी क्रांतिकारी पहल है। इन प्रयासों का जनता ने स्वागत ही किया है।

अजय वर्मा

रविवार, 27 नवंबर 2011

8 लाख की डकैती एक को गोली मारी


मुरैना की इस्लामपुरा व सिंघल बस्ती में हुई वारदात, एक की मौत


मुरैना।
इस्लामपुरा व सिंघल बस्ती पर हमलाकर डकैत आठ लाख रुपए लूट ले गए। इस दौरान डकैतों ने एक की गोली मार कर हत्या कर दी और करीब 11 लोगों को घायल कर गए। डकैतों ने पहले शिवसिंह नाम व्यक्ति के घर धावा बोला और शिवसिंह व उसके किराएदार भगवान सिंह जाटव, खोड्ू को चाकुओं से जख्मी कर दिया। इसके बाद बदमाश, इंद्रजीत जाटव के घर में घुसे और इंद्रजीत, और उसके पत्नी गुड्डीदेवी, पुत्र सतीश व दीपू को लाठियों व सरियों से पीटा और घर में रखा तीन-चार लाख रुपए का जेवर अपने कब्जे में ले लिया। मौका पाकर इंद्रजीत छत पर चढ़ गया और मोहल्लेवालों को पुकारने लगा तो बदमाशों ने उसके सिर में गोली मार दी। इधर डकैती की सूचना मिलने पर दो सिपाही घटना के वक्त ही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जब बदमाशों को ललकारा तो उन्होंने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। जबाव में पुलिस ने भी फायर किए।

घर में घुस कर लूटा
इधर इस्लामपुरा निवासी नत्थीलाल के घर रात्रि एक बजे एक दर्जन सशस्त्र बदमाशों ने धावा बोल दिया। घटना के वक्त नत्थीलाल घर में नहीं थे। उनकी पत्नी शांतिदेवी बदमाशों की आहट पाकर जाग गईं। शांतिदेवी के बाहर निकलते ही रिवाल्वर, कट्टा, कुल्हाड़ी व लाठियों से लैस आधा दर्जन बदमाशों ने शांतिदेवी की मारपीट शुरू कर दी। घर में मौजूद परिजनों से मारपीट कर एक किलो चांदी, सोने के आभूषण, 50 हजार रुपए नगदी सहित ढाई लाख रुपए का माल समेटकर ले गए।

अगवा कर लाए गए 14 बच्चे मुक्त




मुसाफिरों की सजगता से बच गए दर्जनभर मासूम, मानव तस्कर गिरोह के दो बदमाश गिरफ्तार


पठानकोट एक्सप्रेस के मुसाफिरों की सजगता ने आज 14 गरीब बच्चों को रईसों की मंडी में जाने से बचा लिया। बिहार से बंधक बनाकर लाए गए इन बच्चों को कथित रूप से बंधुआ मजदूरी के लिए तमिलनाडु ले जाया जा रहा था, लेकिन मुसाफिरों की खबर पर विदिशा पुलिस और जीआरपी ने बड़ी कार्रवाई करके बच्चों को बदमाशों के चंगुल से मुक्त करा लिया।

जीआरपी, आरपीएफ, पुलिस और यातायात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में रविवार सुबह रेल्वे स्टेशन पर पठानकोट एक्सप्रेस से भोपाल की ओर जा रहे 14 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया। साथ ही इन बच्चों की तस्करी में लगे दो युवकों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। बताया जा रहा है कि ये बच्चों को बिहार के मोतिहारी जिले से तमिलनाडू के सेलम में बाल मजदूरी के लिए लेकर जा रहे थे। जानकारी के अनुसार तमिलनाडू के सेलम में फैक्ट्रियों और अन्य स्थानों पर बाल मजदूरी के लिए दो युवक लक्ष्मण कुमार और अमर किशोर निवासी मोतिहारी ग्राम बहराटपुर बिहार अपने साथ 14 नाबालिग बच्चों को लेकर जा रहे थे।

सतर्कता ने बचाया:

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब इन बच्चों को झांसी से दादर से अमृतसर जाने वाली पठानकोट एक्सप्रेस में बिठाया गया तो उस डिब्बे में बैठे ह्यूमन राईट्स के कार्यकर्ताओं को बच्चों की स्थिति संदिग्ध लगी। उन्होंने बच्चों पर निगाह रखने के साथ ही पुलिस और प्रशासन को इस बात की जानकारी दी, जिससे विदिशा रेलवे स्टेशन पर सुबह 11 बजे कार्रवाई कर अमृतसर एक्सप्रेस से उन्हें उतारा गया। फिलहाल उतारे गए बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजने की कवायद चल रही है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि बच्चों की यह तस्करी पहले से चल रही है।

नौकरी और पैसों का लालच

14 नाबालिग बच्चों को नौकरी और काम के साथ पैसों का लालच देकर बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था। ट्रेन से जा रहे इन बच्चों को छुड़ाने के लिए ह्यूमन राईट्स के कार्यकर्ताओं के अलावा विदिशा जीआरपी, आरपीएफ, सिविल लाइन थाना, कोतवाली पुलिस, यातायात पुलिस के साथ स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए।

दोनों आरोपियों के खिलाफ बाल श्रमिक अधिनियम 1986 की धारा 3/14 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सोमवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं बच्चों को न्यायालय के आदेश के बाद उनके गृह नगर भेजे जाने की व्यवस्था की जाएगी।
विजय खंडालकर, थाना प्रभारी जीआरपी विदिशा

शनिवार, 26 नवंबर 2011

कालसर्प योग - विश्व रंगमंच : व्यक्तियों की विलक्षण कर्मभूमि

कालसर्प योग - विश्व रंगमंच : व्यक्तियों की विलक्षण कर्मभूमि

पौराणिक संदर्भों में ईश्वरीय सत्ताएं कहीं न कहीं सर्पों (नागों) से आवद्ध रहीं। भगवान श्रीमन्न नारायण शेष शैय्या पर समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं। भगवान साम्ब सदा शिव आभूषणों के रूप में वासुकी आदि नागों को शरीर पर धारण किए हुए हैं। जैन धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार 23वें तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ के सिर पर जो छत्र है वह नागों का है। उन्हें नागकुमार भी कहा गया है। ज्योतिष के आदि ग्रंथों के श्लोकों में कालसर्प योग की विशद विवेचना की गई है।
कौटिल्य, आचार्य चाणक्य, जो स्वयं काल सर्प योगी थे, ने ईसा पूर्व तीसरी सदी में अपनी कूटनीति से विश्व विजय का सपना लेकर आए सिकन्दर को व्यास नदी की तट सीमा पर ही रोक कर यूनानी सेना को (स्वदेश) वापस जाने को बाध्य किया तथा चन्द्रगुप्त मौर्य को विशाल आर्यावर्त का सम्राट बनवाया।
इतिहास साक्षी है, नवमी सदी तक जैन, बौद्ध तथा हिन्दु धर्मावलम्बी कापालिकों (तांत्रिक, मांत्रिक, बलिप्रथा) के कर्मकाण्डों से प्रभावित होकर अपनी धार्मिक मान्यताओं को विस्मृत करने लगे थे तथा आचार-विचारों से पतनोन्मुखी हो गए तभी दसवीं शताब्दी में केरल में नम्बूदिरिपाद ब्राह्मण आचार्य विद्याधर के धर्मात्मा पुत्र शिवगुरु के यहां शंकर ने जन्म लिया। उनकी कुंडली में भी कालसर्प योग था, जो आगे चलकर आदिगुरु शंकराचार्य के नाम से विख्यात हुए। उन्होंने वैदिक धर्म की धर्मध्वजा फहरायी और हिन्दू धर्म को पुनर्जाग्रत कर चार धामों (केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम्) की स्थापना कर कापालिकों को निष्प्रभावी कर भारतीय जनजीवन में धार्मिक आस्थाओं को जीवन्त किया।
युद्धोन्मादी चंगेज खां, एडोल्फ हिटलर और मुसोलिनी सरीखे जातकों की कुंडली में भी कालसर्प योग था। मुगल बादशाह अकबर, राष्ट्रपति अय्यूब खां, सद्दाम हुसैन, श्रीमती भंडार नायके, सर हेरोल्ड विल्सन, श्रीमती मारग्रेट थैचर तथा स्वतंत्र भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारत के प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, पी.वी.नरसिंहराव, अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहीम लिंकन, बिल क्लिंटन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल, फिल्मी दुनिया से अशोक कुमार, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, खेल जगत से मेजर ध्यानचंद (हाकी), सचिन तेंदुलकर आदि सभी व्यक्तियों की जन्म कुंडलियां कालसर्प योग से प्रभावित रही हैं। शब्दों का सौदागर, वाणी का जादूगर आचार्य रजनीश भी कालसर्प योगी थे।
मेरी दृष्टि में जो जानकारी आई- कालसर्प योग से प्रभावित व्यक्तियों की वह तो सूक्ष्मतम् है। मेरा मकसद मात्र इतना है कि जिन व्यक्तियों की कुंडली कालसर्प योग से प्रभावित हो, वे संघर्ष करें, विचलित न हों, अपने-अपने इष्ट की मनसा, वाचा-कर्मणा से साधना करें। विद्यार्थीगण 12 से 16 घंटे प्रतिदिन अपने अध्ययन, मनन में अध्ययनरत रहें, मेरा विश्वास है कि सफलताएं उनके कदम चूमेंगी।
भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन के साथ ही पूरी करें। राष्ट्र सेवा सदैव ईमानदारी से करें। यथा संभव गरीबों की मदद करें। मानवीय संवेदनाएं आपके व्यक्तित्व को सजीवता प्रदान करेगी। पद का अंहकार कभी न करें अन्यथा पद से च्युत होते ही मानव समाज हिकारत की नजर से देखती है। वे कुर्सियां, वे लाल-पीली बत्तियां, वे मनुहार करते लोगों की भीड़ न जाने कहां गुम हो जाती हैं। यकीन न हो तो देखिये- वे राजनैतिक, प्रशासनिक चेहरे जो पदों से जैसे ही मुक्त हुए, समाज में रहते हुए भी वानप्रस्थ की मानसिकता में जी रहे हैं। प्रस्तुत है कालसर्प की विस्तृत व्याख्या और सभी को संदेश देने वाली आज की कवर स्टोरी।

मानव एक चिन्तनशील प्राणी है। वह अपने अतीत, वर्तमान अैर भविष्य के संबंध में निरन्तर चिन्तनशील रहता है। हमारा जीवन किन अज्ञात बिन्दुओं पर थिरकाता है? क्या कोई ऐसा अदृश्य नियन्ता है, जो हमारे जीवन को संचालित करता है? और भविष्य में झांकने का प्रथम प्रयास किया होगा, हमारे ऋषि मुनियों ने अपने ज्ञान अैर तपस्या के बल पर।
'योग वशिष्ठÓ नामक ग्रंथ के रचयिता भगवान श्रीराम के गुरु वशिष्ठ हैं। इस ग्रंथ के मूल में गुरु और शिष्य का संवाद है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने जब अपने गुरु से पूछा कि क्या आप सरीखे गुरु वशिष्ठ और मुझे सरीखे राम पूर्व में और भी जन्म ले चुके हैं? तब गुरुदेव ने उत्तर दिया - जिस तरह समुद्र में लहरें बनती हैं, उठती हैं औद समुद्र में ही विलीन हो जाती है, उसी प्रकार सरीखे पूर्व में 14 राम और मुझे सरीखे 14 वशिष्ठ जन्म ले चुके हैं। इसी प्रकार महर्षि बाल्मीकी ने भगवान राम का चरित्र बाल्मीकी रामायण में घटनाओं का विधिवत् चित्रण पूर्व में ही लिख दिया था। निरन्तर वैज्ञानिक शोधों और अविष्कारों के बल पर अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस पृथ्वी पर जो प्रकाश दिखाई दे रहा है। वह केवल सूर्य का नहीं अपितु इस प्रकाश में अन्य सैकड़ों ग्रहों का प्रकाश भी मिला हुआ है। उन ग्रहों से निरन्तर प्रकाश आता रहता है और वे प्रकाश रश्मियां मानव जीवन को प्रेरित करती रहती हैं। तात्पर्य यह है कि ये रश्मियां मानव को आंदोलित करती हैं, परन्तु किस ग्रह की रश्मियों ने मानव को कितना प्रभावित किया, इसकी जानकारी के लिए ज्योतिष का सहारा लिया जाता है।
ज्योतिष और काल निर्णय अपने आप में एक महत्वपूर्ण कृति है। समय का चक्र निरन्तर चलता रहता है। आज तक संसार में जितने भी महाबलि विद्वान, योगी, तांत्रिक और मंत्री शास्त्री पैदा हुए हैं, उन सभी ने काल को बांधने की चेष्टा की है, परन्तु अपने इस उद्देश्य में कोई भी व्यक्ति पूर्णत: सफल नहीं हो सका।
महर्षि पाराशर एवं वराह मिहिर जैसे प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने काल सर्प योग को माना है। महर्षि भृगु, कल्याण वर्मा, बादनारायण, महर्षि गर्ग, मणित्थ आदि आचार्यों ने अपने-अपने ग्रंथों में इसका जिक्र किया है। जैन ज्योतिष में काल सर्प योग की व्याख्या है।
वास्तव में राहु-केतु छाया ग्रह है। राहु का नक्षत्र 'भरणीÓ है एवं इसका देवता 'कालÓ है। केतु का नक्षत्र 'अश्लेषाÓ है एवं इसके देवता 'सर्पÓ हैं। 'काल सर्प योगÓ के प्रभाव के कारण जातक के जीवन में संघर्षों की अनवरत धारा प्रवाहित होती रहती है किन्तु कुण्डली में बैठे अन्य शुभ योग जातक को आश्चर्यजनक सफलायें दिलाकर उन्हें पौराणिक नायक, स्वतंत्रता का जनक अथवा तानाशाहों का शहंशाह बना देता है।
जन्म कुण्डली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हों, तो ऐसी स्थिति में जातक की कुण्डली में कालसर्प योग बनता है। राहु केतु की बजाय, केतु-राहु के बीच फंसे ग्रह ज्यादा कष्ट दायक देखे गए हैं। इनको हम राहुमुखी कुण्डली और केतुमुखी भी कह सकते हैं।
केतु मुखी काल सर्प योग वाली कुण्डली के जातक अत्यन्त कष्ट भोगने के बाद भी राज योग को भोगते हैं। 27 नक्षत्रों में से रोहणी एवं मृगशिरा नक्षत्रों की योनियां भी सर्प योनियां मानी जाती गई हैं। योग शास्त्र के अनुसार मूलधार चक्र में पीठ की रीढ़ के पास प्रारम्भ में कुण्डलिनी का आवास है, जो सर्प की भांति कुण्डली मारे बैठी है।
मनुष्य की वैज्ञानिक पूर्णता इस कुण्डलिनी के ज्ञान से ही होता है। इसलिए कुण्डलिनी या सर्प दोनों अवस्थाएं एक समान हैं। भगवान श्री रामचन्द्र जी के चौदह वर्ष तक वनवास में साथ देने वाले लक्ष्मण जी शेष नाग के अवतार थे। भगवान शिव, देवों के देव महादेव हैं। ज्ञान और मोक्ष उनके ही आधीन है। सम्पूर्ण तंत्र शास्त्र पर भगवान महादेव का अधिकार है, उनका शरीर नागों से लिपटा हुआ है। जैन सम्प्रदाय के 23वें तीर्थंकर, जिनकी दिव्य चेतना, पे्ररणा आज भी अस्तित्व में है, शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान श्री पाश्र्वनाथ जी का नाम नागकुमार, धरणेन्द्र के साथ ही लिया जाता है। फन वाले नाग का मस्तक छत्र भगवान पाश्र्वनाथ की पहचान है।
नाग सम्पत्ति का प्रतीक है, दुनिया की तमाम धन सम्पत्तियों पर नागों का ही अधिपत्य है, जो व्यक्ति धन सम्पत्ति की लालसा से मुक्त होते हैं, उनकी कुण्डलिनी जाग्रत होकर उन्हें इस नागपाश से पूर्णतया मुक्त कर देती है। राहु-केतु के नागपाश से केवल महपुरुष ही मुक्त होकर समय को अपने वश में कर लेते हैं।

राहु के गुण-अवगुण
राहु के गुण-अवगुण शनि जैसे हैं। शनि की तरह राहु भी आध्यात्मिक चिन्तन, दीर्घ विचार एवं गणित के साथ आगे बढऩे का गुण अपने पास रखता है। राहु मिथुन में उच्च तथा कन्या राशि में स्वगृही कहलाता है। राहु के मित्र शनि, बुध और शुक्र हैं। सूर्य, चन्द्र और मंगल उसके शत्रु ग्रह हैं। गुरु उसका सम ग्रह है।
केतु में मंगल के गुण धर्म हैं। मंगल, शुक्र-केतु के मित्र हैं। चन्द्र, बुध, गुरु उसके सम ग्रह हैं। सूर्य और शनि उसके शत्रु हैं। जातक का 'भाग्य-प्रवाहÓ राहु-केतु (कालसर्प) अवरुद्ध अवश्य करते हैं, परिवार में कलह, वैवाहिक जीवन में कटुता या अलगाव रहता है किन्तु जातक के भाग्य का निर्णय करने में राहु-केतु का बड़ा योगदान है। दक्षिण भारत में राहु काल सभी शुभ कार्यों में निषिद्ध माना गया है। राहु भाग्य कारक है एवं केतु मोक्ष कारक है। केतु और शनि की युति फलदायक होती है।
कालसर्प योग कब नहीं बनता
सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य में हों, यदि एक ग्रह भी अलग हो तो कालसर्प योग नहीं बनता। राहु-केतु की महादशा, अन्तर्दशा एवं गोचर भ्रमण का फल कथन महत्वपूर्ण है।
खण्डित काल-सर्प योग
जन्म कुण्डली में राहु केतु के मध्य सातों ग्रहों के आ जाने पर काल सर्प योग बनता अवश्य है किन्तु शेष पांच भावों में से एक भी भवन ग्रह रहित होगा, तो खण्डित कालसर्प योग होगा।

काल सर्प योग की विशेषताएं
इस योग की खासियत है कि काल सर्प योगियों का जन्म निश्चित रूप से कर्म-भोग के लिए है। किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए अवतरित आत्मा की सन्तान भी कालसर्प योगी ही होगी। सूक्ष्म दिव्य संचालन राहु केतु करते हैं। अब्राहिम लिंकन एवं पंडित जवाहर लाल नेहरू इस योग के अच्छे उदाहरण हैं। मान लीजिए किसी दम्पत्ति को बाल बच्चा नहीं हो रहा है। ऐसे प्रसंग में किसी सिद्ध ब्रह्मनिष्ठ संत के आशीर्वाद से उन्हें बाल-बच्चा हो गया तो वह बालक भी काल सर्प योग का ही होगा। पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म से भी ऐसी किवदंती जुड़ी है कि पंडित मोतीलाल नेहरू को एक ब्रह्मनिष्ठ साधु ने आशीर्वाद दिया था, फलस्वरूप काल सर्प योगी पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ।
'काल सर्पÓ योग व्यक्ति, सामान्य व्यक्ति से कुछ अलग होते हैं। इसके अलावा इस योग के सकारात्मक फल भी होते हैं। साथ ही नकारात्मक फल भी इस योग में अन्य ग्रहों के कारण बनते हैं।

स्वतंत्र भारत की कुण्डली
कालसर्प योग सकारात्मक हो तो जन्म के समय के राहु पर से गोचर में राहु का जब भ्रमण होगा तब या राहु की अठारह वर्षों के दशाकाल में श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। रिलायंस इण्डस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का जन्मांक इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। वहीं दूसरी ओर कालसर्प योगी हर्षद मेहता रंक से राजा और राजा के रंक बनकर मृत्यु को प्राप्त हुआ।
पैसे से समृद्ध लोगों में काल सर्प के साथ राहु चन्द्र की युति या अंशात्मक केन्द्र योग राहु की महादशा में या गोचर राहु के भ्रमण काल में कंगाल योग भी बना देती है। ऐसे प्रसंगों में नाग देवता का पूजन काफी हद तक समाधान कारक होता है।
जन्म कुण्डली में द्वादश भवन में बैठा शुक्र बेशुमार सम्पत्ति का स्वामी बनाता है, यदि अन्य ग्रह अनुकूल हों। किन्तु काल सर्प योग में धनेश एवं भाग्येश व्यय स्थान में होने से रंक (दरिद्र) का योग बना देता है।
स्वतंत्र भारत की कुण्डली में कालसर्प योग है। इस कालसर्प योग से भारत को स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू के रूप में पहला प्रधानमंत्री भी काल सर्प योग प्राप्त हुआ। काल सर्प योग की कुण्डलियों में सदैव बुरे फल नहीं मिलते। अपवाद स्वरूप कुछ ग्रही योगों के कारण अच्छे फल भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं। काल सर्प योग वाली कुण्डली के किसी भाव में सूर्य और चन्द्र की युति हो तो व्यक्ति उन्नति के लिए अथक परिश्रम करते हैं, मुसीबतों से सामना करते हैं और अन्तोगत्वा सफल जीवन बिताते हैं।
कालसर्प योग की कुण्डली में चन्द्रमा से केन्द्रस्थ गुरु, बुध से केन्द्रस्थ शनि हो तो ऐसे जातक पर्याप्त में ऐश्वर्य भोगते हैं।

कालसर्प योग में राजयोग
जातक की कुण्डली में काल सर्प योग भी बन रहा है। किन्तु सप्तम भवन का स्वामी कर्म भवन में स्थित हो और कर्मेश अपनी उच्च राशि में स्थित होकर भाग्येश के साथ हो तो श्री नाग योग बनेगा। इस योग वाले जातक राजयोग तो भोगेंगे ही।
काल सर्प योग वाला यह जातक केन्द्रीय मंत्री बना। राजभवन में गज केसरी योग। हवाला काण्ड में अभियुक्त बना, परन्तु केतु में लग्नेश की अन्तर्दशा में आरोपों से बरी हो गया। यह विषधर कालसर्प योग वाली कुण्डली है। यह सुनिश्चित है कि काल सर्प योग वाला जातक (स्त्री+पुरुष) कितने भी समृद्ध अथवा गरीब परिवार मेें जन्म लें-संघर्षों की वेदना का अहसास तो उसे करना ही होगा, किन्तु शुभ योगों के चमत्कार से युगपुरुष बन सकता है। जातक को, फिर चाहे चाणक्य रहे हो या महात्मा गांधी या पंडित नेहरू अथवा सरदार बल्लभ भाई पटेल या अनगिनत काल सर्प योगी स्त्री-पुरुष।

अनिष्ट निवारण :-
जनश्रुतियों के अनुसार काल सर्प से अरिष्ट निवारण हेतु भगवान आशुतोष (शिव) के मंदिर में सवा लाख ऊँ नम: शिवाय का जाप करें। पाठोपरान्त रुद्राभिषेक करवाने का विशेष महत्व है। साथ ही शिवलिंंग पर चांदी का सर्प युगल नाग स्त्रोत, नाग पूजनादि करके चढ़ाना शुभ होगा।
नाग गायत्री मंत्र
(1) ऊँ नव कुलाय विदमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।
(2) प्रत्येक शनिवार एक नारियल को तेल एवं काले तिल का तिलक लगाकर मौली लपेटकर अपने सिर पर से तीन बार घुमाकर 'ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:Ó मंत्र कम से कम तीन बार पढ़कर बहते पानी (नदी) में बहा देवें, ऐसा कम से कम पांच शनिवार करें।
(3) घर के चौखट द्वार पर स्वास्तिक चिन्ह बनाकर लगाएं।
(4) शांति के अन्य विधान भी हैं। ज्योतिषत तंत्र में अन्य उपाय भी बताएं गए हैं।

रत्न धारण :-
जन्म कुण्डलियों के अनुसार यदि राहु अथवा केतु की दशा चल रही हो तो राहु के लिए 'गोमेदकÓ एवं केतु के लिए 'लहसुनियाÓ विधि-विधान से धारण करें।
जैन सम्प्रदाय :-
जैन धर्म की मान्यता से जुड़े व्यक्ति भगवान पाश्र्वनाथ की विधि-विधान से पूजन करें।

कालसर्प वाले जातकों की कुंडलियां

एक व्यक्ति, जो कालसर्प योग की गति को पहचान कर चलने लगा है?
अरुण सहलोत, सीएमडी (राज ग्रुप, भोपाल)
जन्म दिनांक : 4 जुलाई 1964, जन्म समय : 5.30 शाम, जन्म स्थान : अकोला (राजस्थान)
प्रस्तुत कालसर्प योग वाली कुंडली में वर्गोत्तम ग्रह बुध एवं स्वक्षेत्री शुक्र तथा चतुर्थ भवन का स्वामी शनि जन समर्थन का प्रतीक होकर मूलत्रिक राशि में पदस्थ है। राहु-केतु भी मूलत्रिक राशि में पदस्थ है। गजकेसरी योग, शश योग,मालव्य योग, केन्द्र त्रिकोण योग, सरल योग, स्व-अर्जित धन योग, कर्मजीव योग, मंगल-शुक्र योग, बुध-आदित्य योग, प्रबल राजयोग तथा अखण्ड साम्राज्य योग बन रहा है।
जातक के जीवन में 30 जनवरी 1992 से भाग्य की महादशा का आगमन हुआ। ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि एक तो भाग्येश की महादशा जीवन में आती ही नहीं, और जिन्हें आ जाती है वह रंक से राजा और राजा से महाराजा बनता है। जातक को गजकेसरी योग के साथ भाग्येश (चन्द्रमा) की महादशा आई, जो 30 जनवरी 1992 से 30 जनवरी 2002 तक रही। भाग्येश की महादशा ने इस जातक को 'फर्श से अर्सÓ तक पहुंचाया, किन्तु कालसर्प योग कहां मानने वाला था। भूमि-भवन, वाहन की महादशा-मंगल की आई, सात वर्षों के लिए। 30 जनवरी 2002 से 30 जनवरी 2009 तक भूमि-भवन के निर्माण तथा विक्रय एवं दैनिक राजएक्सप्रेस का स्वामी बनकर यह जातक राजनीतिज्ञों तथा प्रशासन तंत्र से जुड़े व्यक्तियों की छत्र-छाया में विकास का एक नया अध्याय रचने में सफल हुआ। अब आई राहु की महादशा- सब कुछ ठीक चल रहा था, किन्तु राहु में राहु का अन्तर तथा सूर्य और चन्द्र के प्रत्यन्तर ने 7 अप्रैल 2011 से 13 अक्टूबर 2011 तक जो ग्रहण योग बनाया उस समय आपदाओं का एक ऐसा दौर चला कि बाहरी व्यक्तियों ने समझा कि यह व्यक्ति तो तहस-नहस हो गया है, दोष किसी का नहीं? राहु ने इस जातक को अभिमानी बनाया और जिसकी परिणिति सुखदायी नहीं रही। किन्तु कालसर्प योगी यह जातक अपने अद्म्य साहस से पुन: राजनैतिक सामंतों का प्रिय पात्र बनने में सफल होता जा रहा है। अप्रिय अन्तर-प्रत्यन्तर दशाएं कालातीत हो चुकी हैं।
यक्ष प्रश्न मौन खड़ा है? राजयोग और अखण्ड साम्राज्य योग कब और कैसे बनेगा? राजनीति के जानकार इस प्रश्न का उत्तर साधारण रूप में दे सकते हैं। यथा, नवम्बर 2013 में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव तथा अप्रैल 2014 में लोकसभा के चुनाव हैं। जातक आर्थिक दृष्टि से समृद्ध है, एक बड़े दैनिक समाचार पत्र राजएक्सप्रेस का मालिक है। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष को भी हर प्रकार से सहयोग की आतुरता तो रहेगी ही? राज्यसभा से सांसद बनने का योग भी राजनीतिज्ञ देख सकते हैं।
किन्तु, मैं एक ज्योतिषी हूं। कालसर्प योग वाला व्यक्ति अद्भुत आंतरिक शक्तियों का स्वामी होता है। जातक के जीवन में राहु में गुरु का अन्तर 7 मार्च 2014 तक चलेगा, साथ ही सिद्धा की महादशा 28 मई 2012 से 29 मई 2019 तक चलेगी। राजनीति के किस शिखर बिन्दु पर यह जातक पहुंचेगा, आज यह बात कहना समयोचित नहीं? प्रतीक्षा कीजिये और देखिये जातक की कालसर्प योग वाली कुंडली में 'राजयोगÓ एवं 'अखण्ड साम्राज्य योगÓकब, कैसे फलीभूत होता है?

महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की कुण्डली
महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की कुण्डली में इसी प्रकार का कालसर्प योग था। इन्हें प्राचीन काल में गुप्त साम्राज्य का संचालक और बिना ताज का बादशाह माना जाता रहा है। राहु-केतु सदैव पीछे (वक्री) की ओर चलते हैं। ग्रह जब अपनी नैसर्गिक गति से आगे की राशि को पार करते हैं, वहीं उल्टी (वक्र गति) चाल से चलता हुआ राहु-केतु उन सभी ग्रहों को बीधता रहता है। एक अजीब बिडम्बना है कि जब राहुल की छाया से सभी ग्रह एक बार गुजर जाते हैं तो जातक की पुन: कालसर्प योग की दशा आरम्भ हो जाती है।
काल सर्पयोग एक सत्त अनुसंधान का विषय है। इसमें कुल मिलाकर सैकड़ों किस्म के कालसर्प योग पैदा होते हैं और इतने विपरीत 'राजयोगÓ भी कालसर्प योग के कारण बनते बिगड़ते रहते हैं।

आदिगुरू शंकराचार्य
प्रस्तुत जन्म कुण्डली में भाग्येश गुरू, शनि की राशि कुम्भ में तथा शनि गुरू की राशि में अंतर महायोग बना रहा है। अर्थात् षष्ठेश गुरू का अष्टमेश शनि से राशि परिवर्तन आध्यात्मिक योगी का सूचक है। पंचमेश मंगल भाग्य भवन में तथा पंचम में उच्च राशिगत केतु के ऊपर लग्नेश चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि पडऩे से ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक नींव रखने वाला शिव शक्ति का उपासक होता है।
कुम्भ राशिस्थ गुरू अष्टम् भवन में होने से ऐसा जातक पूर्वजन्म का योगी होता है। आत्मज्ञानी महापुरुष ही फिर इस पृथ्वी पर जन्म लेता है।
यह काहल योग से प्रभावित कालसर्प योग वाली कुण्डली है। ऐसा व्यक्ति दृढ़ चरित्र, बलिष्ठ शरीर, साहसिक कार्यों में ज्यादा रूचि, सेना में उच्च पद। चंगेज खां ने विश्व विजय का सपना देखा था। खतरनाक कार्यों एवं युद्धोन्माद में ही असीम आनंद प्राप्त करता था, परन्तु पतन भी उसकी असफल नीतियों से हुआ।

विषधर कालसर्प योग : अकबर महान (मुगल बादशाह)
जन्म 23.11.1542, समय 4.30 शाम (अमरकोट) पाकिस्तान
राज्य भवन के अधिपति चंद्रदेव की भाग्य भवन पर पूर्ण दृष्टि। पंचमेश-चतुर्थेश शनि अपनी उच्च राशि तुला में लग्नेश शुक्र के साथ विराजमान है। चतुर्थ भवन (जन भावनाओं का प्रतीक) में उच्च राशिगत मंगल राज्य भवन को निहार रहा है। यह सर्वविदित है कि मुगल साम्राज्य में अनेक बादहशा हुए मगर बादहशाह अकबर को ही इतिहास में अकबर महान कहा गया है।

शेष नाग काल सर्प योग : पण्डित जवाहर लाल नेहरू (प्रधानमंत्री)
जन्म 14.11.1889 समय 2.30 रात्रि (इलाहाबाद)
पंडित जवाहरलाल नेहरू की कुण्डली के कालसर्प योग में सभी ग्रह केतु मुखी गोचर के हैं। यहां पर राहु अपनी मित्र क्षेत्रीय राशि मिथुन में बैठा होने से बलवानहै तथा शत्रु भवन में बैठे केतु को स्वक्षेत्री गुरू का बल मिला है, जो प्रबल शत्रुहन्ता योग बना रहा है। शत्रुहल्ता योग प्रबल होने से कामकाज योजना के माध्यम से तत्कालीन राजनैतिक दिग्गजों को सत्ता के सिंहासन से राजनैतिक वन-गमन का योग चरितार्थ वन-गमन का योग चरितार्थ करवा दिया। स्वक्षेत्री चन्द्र, शुक्र, गुरू तथा द्वितीयस्थ शनि की तृतीय दृष्टि उच्च राशि (चतुर्थ भवन तुला) में होने के कारण जन-जन का उन्हें समर्थन मिला। एक दर्शनीय बात यह भी है कि अनेक संघर्षों के बाद एक दिन वह सफलता को प्राप्त कर ही लेता है। जिसा प्रकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष करते रहे, अनेक बार जेल गए, पुलिस की लाठियों की मार झेली ओर संघर्षों के बाद एक दिन वह सफलता को प्राप्त कर ही लेता है। जिस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष करते रहे, अनेक बार जेल गये, अनेक बार जेल गये, पुलिस की लाठियों की मार झेली और संघर्ष करते-करते 60 साल की आयु में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और लगभग 17 वर्षों तक (जीवनपर्यन्त) विशाल भारत के प्रधानमंत्री रहे। क्या यह योग चक्रवर्ती राजा के समान नहीं है।

शेष नाग कालसर्प योग : डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (राष्ट्रपति)
जन्म 6.9.1888, समय 6.00 प्रात: (मद्रास)
डॉ. सर्वपल्ली राधा कृृष्णन का लग्नेश सूर्य जो शासन का प्रतिनिधित्व करता है, लग्न में लग्नेश बनकर बैठा है। धनेश और लाभेश अपनी उच्च राशि बुध में द्वितीय भवन में विराजमान है। लग्नस्थ चन्द्रदेव से चतुर्थ भवन में बैठकर पंचमेश गुरू गजकेसरी योग बना रहे हैं। कर्मेश जो स्वयं पराक्रमेश भी है।
ऐसा शुक्र प्रवल राजयोग भी बना रहा है। भाग्येश मंगल चतुर्थ भवन में अपनी राशि में पदस्थ होकर राज्य भवन को देख रहा है। गजकेसरी योग ने उन्हें विश्वस्तरीय दार्शनिक बनाया तथा प्रबल राजयोग में उन्हें 10 वर्षों तक उपराष्ट्रपति तथा 5 वर्षों तक स्वतंत्र भारत का द्वितीय राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य प्रदान किया।

शेषनाग कालसर्प योग : सरदार वल्लभ भाई पटेल (प्रथम गृहमंत्री : भारत)
जन्म 30.10.1875 समय 5.25 सांय (गुजरात)
लौह पुरूष के नाम से ख्याति प्राप्त सरदार वल्लभ भाई पटेल की कुण्डली में पंचमेश और भाग्येश स्वक्षेत्री सप्तमेश के साथ सप्तम भवन में विराजमान है। परमोच्च लग्नेश (मंगल) अष्टमेश होकर स्वक्षेत्री शनि केसाथ अपनी उच्च राशि मकर में राज्य भवन में विराजे हैं। शेष नाग कालसर्प योग का यह जातक स्वतंत्र भारत को एक ऐसा दुर्धस्थ राजनयज्ञ था, जिसने तत्कालीन सभी राजाओं और नबावों को भारत में विलय के संधि पत्रों में हस्ताक्षर करवाये।
निजाम ओर बूंदी के नबाव सहज में सहमत नहीं थे तो उन्हें किस तरह सहमत करवाया। अनेक किवदंतियां मशहूर हैं- दूसरे शब्दों में कहें कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। मात्र एक विवाद शेष रहा, जो आज भी सिर दर्द बना है - कश्मीर समस्या? नेहरू जी कश्मीर के मसले पर अति संवेदनशील थे। उन्हीं के आग्रह पर सरदार पटेल चुप हो गये। दुर्भाग्यवश उनकी सत्ता की भागीदारी लम्बी नहीं चली और उनका देहान्त हो गया। सरदार पटेल, नेहरू जी से 14 वर्ष बड़े भी थे।

वासुकी काल सर्प योग : एडोल्फ हिटलर (जर्मन)
जन्म 20.4.1889, समय 19.30 जर्मनी
लग्नेश की लग्न में दृष्टि, पराक्रमेश एवं दसमेश की युति साथ ही यह युति गजकेसरी योग बना रही है। भाग्य भवन में जन समूह का समर्थन, पंचमेश अर्थात् वाणी का अधिपति शनि भाग्य भवन में पदस्थ होकर पराक्रम भवन तथा शत्रु भवन को निहार रहा है। उच्च राशिगत सूर्य, स्वेक्षेत्री मंगल और गुरू मित्र क्षेत्रीय भाग्यस्थ राहु और केतु पराक्रम भवन में होने से जातक को कलह प्रिय बनाता है। वासुकी काल सर्प योगी एडोल्फ हिटलर जर्मन का एक ऐसा शासन बना, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध का पुरोधा कहा जाता है। किन्तु इतिहास के गर्भ में 1914 से 1919 के मध्य चला प्रथम विश्व युद्ध था, जिसने जर्मन के विरूद्ध वारसा की संधि थोप दी। शरीर कमजोर, दृष्टि में भी कमजोर एक युवक ने अपने अद्म्य साहस से सैनिक फिर जर्मन के चॉसलर का ओहदा प्राप्त किया तथा सम्पूर्ण विश्व को झकझोर दिया। द्वितीय विश्वयुद्ध में लगभग 4 करोड़ मानव प्रभावित हुये थे- यूरोप तो लहुलहूान हो गया। 10 लाख पौलेण्ड वासी मारे थे? इसलिए कहा जाता है कि किसी का इतना अपमान मत करो कि वह बदला लेते समय पागलपन की सीमा लांघ जाये।

मुसोलिनी इटली : शेष नाग कालपर्स योग
प्रस्तुत कुण्डली द्वितीय विश्वयुद्ध में एडोल्फ हिटलर के प्रमुख सहयोगी रहे इटली के तानाशाह मुसोलिनी की है। इस कुण्डली में राहु अपनी मित्र राशि में है। राज्य भवन का अधिपति सूर्य का भवन में तथा भाग्येश परमोच्च होकर, चतुर्थेश और पराक्रमेश शनि तथा लग्नेश मंगल के साथ सप्तम भवन में विराजमान है। इसलिए सम्राट योग बना रहे हैं। शत्रुहन्ता मंगल (पराक्रमेश) शनि से युक्त होकर कू्रर शासक बनाते हैं।

अब्राहम लिंकन (राष्ट्रपति अमेरिका)
पराक्रमेश मंगल अपनी सप्तम दृष्टि से पराक्रम भवन को निहार रहा है तथा अष्टम दृष्टि से सुख भवन को। सप्तमेश (सूर्य) एवं पंचमेश (बुध) लग्न में युत होकर केन्द्र त्रिकोण योग के साथ गुध आदित्य योग बना रहे हैं। लग्नेश दसम भवन में दिग्बली होकर बलवान स्थिति में विराजमान है। कालसर्प योग की इस कुण्डली ने जातक को राष्ट्रपति का योग बना।

श्रीमती मारग्रेट थैचर (पूर्व प्रधानमंत्री, इंग्लैण्ड)
प्रस्तुत कुण्डली बिट्रेन की प्रधानमंत्री रह चुकी श्रीमती मारगे्रट थैचर की है।यह भी कालसर्प योगी है। लग्नेश मंगल राज्य भवन के स्वामी सूर्य के साथ लाभ भवन में विराजमान है। जो प्रबल योग कारक है सूर्य तो स्वयं राज्य कृपा का कारक है। शनि, तुला राशि में उच्च का होकर स्थित है और गुरू स्वराशि का होकर द्वितीय भवन में स्थित है।
जन शक्ति का स्वामी शनि उच्च शाशिगत, पंचम स्थान बुद्धि, द्वितीय स्थान वाणी, और शासन करने की योग्यता का स्वामी होकर स्वराशि गुरू अपनी नवम दृष्टि से राजभवन को देख रहा है, जहां भाग्येश चन्द्रमा भी विराजमान है।
श्री अय्युब खांन : शेष नाग काल सर्प योग
प्रस्तुत कुण्डली में राहु अपनी मित्र राशि तुला में है। चतुर्थेश शनि जो पराक्रमेश भी है। स्वराशि होकर पराक्रम भवन में विराजमान है। पंचम अर्थात् विद्या बुद्धि-विवेक तथा नवम भवन (भाग्य भवन) तथा द्वादश भवन को निहार रहे हैं। लग्न भवन में सप्तमेश एवं लग्नेश की युति प्रबल राजयोग कारक है, साथ में बुध आदिपत्य योग भी राजयोग बना रहा है।
पंचमेश गुरू एवं भाग्येश चन्द्र पूर्ण बली होकर गजकेसरी योग के साथ महाप्रतापी सम्राट योग बना रहे हैं।
शंखपाल कालसर्प योग - सद्दाम हुसैन (राष्ट्रपति : इराक) की कुण्डली
धनेश सूर्य राज्य भवन में उच्च राशिस्थ पदस्थ है। भाग्य भवन में गुरू एवं भाग्येश गुरू स्वयं विराजमान है साथ्ज्ञ जनमानस का प्रतिनिधित्व करने वाले चतुर्थ भवन के स्वामी जो लग्नेश भी है अर्थात् शुक्र भाग्य भवन में अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान हैं। शत्रु भवन के स्वामी गुरू भी भाग्येश होकर भाग्य भवन में बैठा है।
अत: ऐसा जातक अनुशासन प्रिय तथा प्रबल राज्य योग प्राप्त कर जीवन पर्यन्त विश्व शक्तियों के समक्ष नहीं झुका।

कुलिक कालसर्प योग : पीवी नरसिंहराव (पूर्व प्रधानमंत्री)
जन्म : 28 जून 1921, जन्म समय : दोपहर 1 बजे, जन्म स्थान : करीम पट्टी (आंध्रप्रदेश)
प्रस्तुत कुंडली में गुरु सप्तमेश एवं चतुर्थेश होकर पंचमेश एवं षष्ठेश के साथ बारहवें भवन में बैठकर शत्रु भवन को पूर्ण दृष्टि से निहार रहे हैं। गुरु और शनि शत्रु भवन के कारक ग्रह हैं।
ज्योतिषी चमत्कार देखिये : प्रधानमंत्री राजीवगांधी ने नरसिंहराव को राज्यसभा का टिकट भी देने से मना कर दिया था। सन् 1991 के चुनावी समर में तमिलनाडु की एक चुनावी सभा में मानव बम से राजीव गांधी की हत्या हो गयी। हत्या से उपजी सहानुभूति ने कांग्रेस को सत्ता के करीब लाकर खड़ा कर दिया। भाग्यवश चौधरी अजीत सिंह के लोकदल के सहयोग से पीवी नरसिंहराव प्रधानमंत्री बन गए। कांग्रेस में शत्रु दलन का जो खेल नरसिंहराव ने खेला वह कम चमत्कारिक नहीं था। माधवराव सिंधिया तथा अर्जुनसिंह सत्ता और पार्टी से अलग कर दिए गए। श्रीमती सोनिया गांधी 10 जनपथ तक सीमित रह गईं। स्मरणीय रहे, किन्तु तत्कालीन समय में अर्जुन सिंह ही भारतीय राजनीति में चाणक्य की भूमिका में सफल हुए और 10 जनपथ उस समय से आज भी भारतीय राजनीति का सिरमौर बना हुआ है किन्तु कुलिक कालसर्प योग वाले पीवी नरसिंहराव ने शतरंज की ऐसी चाल चली कि कांग्रेसी दिग्गज उनके शासनकाल में अपनी राजनीतिक काया को तलाशते रहे।

श्रीमती भंडार नायके (प्रधानमंत्री, श्रीलंका)
प्रस्तुत कुंडली में लग्नेश शनि एवं सप्तमेश सूर्य दोनों में दिग्बली ग्रह शुभ ग्रह चंद्रमा से युत होकर राज्य भवन में स्थित है। इसलिए यह कालसर्प योग वाली महिला श्रीलंका की प्रधानमंत्री रहीं। भाग्येश स्त्री ग्रह है। भाग्येश और पंचमेश बुध की युति के कारण इनकी पुत्री भी श्रीलंका की राष्ट्रपति रहीं।

मोहनलाल सुखडिय़ा (पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान)
प्रस्तुत कुंडली राजस्थान के उस मुख्यमंत्री की है जो 17 वर्षों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। कालसर्प योग वाली कुंडली में पंचमेश मंगल दिग्बली होकर राज्य भवन में विराजमान होकर लग्न, चतुर्थ और पंचम भवन में स्थित लग्नेश गुरु को देख रहे हैं।

माधवराव सिंधिया (महाराजा, ग्वालियर)
भाग्येश चंद्र धन भवन में स्थित है। लग्नेश मंगल उच्च राशिगत होकर पराक्रम भवन में विराजमान है और अपनी अष्टम दृष्टि से राज्य भवन को निहार रहे हैं। लाभेश बुध नीच राशि का होकर पंचम भवन में पदस्थ है। राज्येश सूर्य चतुर्थ में बैठकर अपनी पूर्ण दृष्टि से राज्य भवन को निहार रहे हैं। चौथा भवन जनता का भाव भी है। अत: जन्म से तो श्रीमंत महाराजा थे, जनता द्वारा ये चुनावी समर में जीवन पर्यन्त विजयी रहे। कथन यह है कि कालसर्प योग में जन्मा यह विशिष्ट व्यक्ति हंसमुख और जन प्रिय नेता के रूप में सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

जमशेद टाटा
सुखेश और लाभेश उच्च राशिगत होकर (शुक्र) भाग्य भवन में विराजमान हैं। कुंडली गज केसरी योग तथा चंद्र मंगल की युति प्रबल धन योग बनाती है। सप्तमेश शनि पंचम भाव में स्थित होकर सप्तम, आय एवं लग्न भवन को निहार रहा है। यह काल सर्प योग वाली कुंडली भी देश में अग्रणी उद्योगपति टाटा ग्रुप के संस्थापक की है।

फिल्म अभिनेता अशोक कुमार
जन्म : 16 सितंबर 1911, समय : रात्रि 8 बजे, स्थान : कलकत्ता
फिल्म अभिनेता अशोककुमार की कालसर्प योग वाली इस कुंडली में मेष लग्न से लेकर सप्तम भवन तक सभी सातों ग्रह राहु के मध्य विराजमान हैं। चंद्र, मंगल योग वाला धनवान होता है तथा अर्थ संचय में प्रवीण होता है। अनेक स्त्रियों से उसका संपर्क रहता है। इस कालसर्प योग वाला जातक दीर्घायु, धनवान, भोगी और ऐशो-आराम में जीवन बिताने वाला होता है।

फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार
सुखेश चंद्रदेव केंद्र भवन में बैठकर अपने स्वगृही स्थान चतुर्थ भवन को देख रहे हैं। लग्नेश सप्तमस्थ होकर लग्न को देख रहे हैं। सूर्य बुध की युति से बुधादित्य योग बना रहा है। भाग्येश भाग्य स्थान में पदस्थ होकर धनेश शुक्र के साथ षष्टम भवन में स्थित है। पंचमेश गुरु व्यय भवन में स्थित होकर सुखेश (जनता) शनि एवं भाग्येश चंद्रमा को अपनी पूर्ण दृष्टि से निहारते हुए गजकेसरी योग भी बना रहे हैं। राज्य भवन का स्वामी सूर्यदेव पराक्रम में बैठकर भाग्य भवन को निहार रहे हैं। इसलिए कालसर्प योग धारी गजकेसरी योग से प्रभावित यह जातक अमेरिका का राष्ट्रपति बना।

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर
जन्म दिनांक : 8 सितंबर 1929, समय : 9.55 बजे, इंदौर (मप्र)
कुंडली विश्वविख्यात स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की है। इस कुंडली में व्यय स्थान से छठे स्थान तक सभी ग्रह होने के कारण शेषनाग कालसर्प योग बन रहा है। इस योग के कारण वे आजीवन वैवाहिक सुख से वंचित रहीं। वाणी का स्वामी बुध त्रिकोण पंचम भाव में चतुर्थेश सूर्य के साथ बुधादित्य योग बना रहा है। इसी कारण जातक की सुरीली, मधुर आवाज ने उन्हें विश्व की सर्वश्रेष्ठ गायिका बना दिया। नाम और पैसा बहुत मिला, जीवन पर्यन्त कभी विवादास्पद नहीं रहीं। उन्होंने अपना सारा जीवन संगीत साधना में लगा दिया।

वासुकी कालसर्प योग : शब्दों का सौदागर आचार्य रजनीश
यह जन्मकुंडली महान वक्ता, दार्शनिक और तर्क शास्त्री आचार्य रजनीश की है, जिसने अपने तर्कों से सदियों से चले आ रहे रीति-रिवाजों, परंपराओं और आदर्शों पर अपने विचार रखे। उन्होंने संभोग से समाधि तक मानव को ले जाने वाले सूत्र पर अपने सारगर्भित अकाट्य और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करके आधुनिक समाज को झकझोर दिया। अष्टम भवन में पंचग्रही योग ने जातक को पराशक्ति से सम्पन्न बनाया। रजनीश से ओशो बने इस कालसर्प योगी ने विश्वख्याति अर्जित की।

विश्वप्रसिद्ध रामकथाकार मुरारी बापू
जन्म दिनांक 25 सितंबर 1946
विश्वप्रसिद्ध रामकथाकार मुरारी बापू की जन्म कुंडली में भाग्य भवन में राहु एवं तृतीय भवन में केतु के मध्य अन्य सभी ग्रह स्थित हैं। शंखचूड़ कालसर्प योग वाली यह कुंडली लोकप्रिय कथाकार की है। जो पूरे देश में भ्रमण कर रामायण का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। कन्या लग्न की जन्म कुंडली में बुध के साथ, मन का कारक चंद्रमा और आत्मा का कारक सूर्य भी लग्नस्थ है। इन तीनों की युति के कारण वे मन, वचन और आत्मा से पूर्णतया राममय हो गए हैं। स्वक्षेत्री शुक्र के कारण मधुर वाणी में भजन, चौपाइयां एवं शास्त्रीय ज्ञान की शक्ति प्राप्त है। शनि त्यागमय प्रवृत्ति का ग्रह है। वह एकादश भवन में बैठकर सादा जीवन और उच्च विचार का संदेश दे रहा है।



कालसर्प योग की कुंडलियों में विशिष्ट ग्रह स्थिति
कालसर्प योग की सभी कुंडलियों में सदैव बुरे फल नहीं मिलते। अच्छे ग्रह योगों के फल स्वरूप ऐसे व्यक्ति हर क्षेत्र में अपनी धाक जमा लेते हैं। असंभव लगने वाला कार्य भी सफलता पूर्वक सम्पन्न करा लेते हैं। ऐसे व्यक्ति धुन के पक्के और रसिक मिजाज तथा किसी कला के विशेषज्ञ होने के कारण समाज में लोकप्रिय हो जाते हैं।
कालसर्प योग के साथ किसी भाव में सूर्य-चन्द्र की युति हो तो जातक उन्नति के लिए अथक प्रयत्न करते हैं, अन्ततोगत्वा सफलता के शिखर को छू लेते हैं। सूर्य के साथ शनि और चन्द्र के साथ बुध की युति हो तो कालसर्प योग वाले जातक धनवान, ख्यातिमान एवं धार्मिक होते हैं। चतुर्थ भवन का स्वामी, जो जनता का प्रतिनिधित्व करता है, स्वक्षेत्री, उच्च राशिगत अथवा वर्गोतम हो तो विधायिका (संसद/विधानसभा) में अपनी उपस्थिति से सत्ताधीशों को चकित कर देता है।

राहु प्रधान व्यक्ति के गुण
जन्म कुंडली में राहु शुभ योग में हो तो व्यक्ति मायावी, किसी भी कार्य को गुप्त रखने वाला, सोच विचार कर कार्य करने वाला, स्वाभिमानी, सम्मानप्रेमी, बोलने से ज्यादा प्रत्यक्ष कर गुजरने वाला तेजस्वी, एक मार्गी, स्वतंत्र रूप से व्यवसाय करने वाला, अपने काम में दूसरों का हस्तक्षेप सहन न करने वाला, अन्याय का मुकाबला करने वाला, सामाजिक और राजकार्यों में कूटनीतिज्ञ, भाग्यवान, चतुर, व्यवहार में दक्ष तथा शत्रुओं का दमन करने वाला होता है। 0 से 20 अंश में राहु अच्छा फल देता है। 20 से 30 अंश में राहु हो तो मिश्रित फल देता है। राहु-केतु के संबंध में ऋग्वेद, अमर कोष, महाभारत, याज्ञवलक्य, स्मृति, अथर्ववेद और जैन ज्योतिष तथा नाड़ी ग्रंथों में विशद् विवेचना की गई है। राहु-केतु का अस्तित्व वेदकालीन होने से फलादेश में उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है।
ज्ञातव्य : किसी जातक की जन्म कुंडली में गुरु पंचम भाव या नवम् भाव में होने से जातक के ऊपर बुजुर्गों का साया हमेशा मदद करता रहता है। ऐसे व्यक्ति माया के त्यागी एवं संत समान विचारों से ओत-प्रोत रहते हैं। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों जातक ब्रह्माज्ञानी बनता चला जाता है। ऐसे व्यक्ति की श्राप भी अच्छा असर डालती है। कालसर्प योग वाले जातक दूसरों के लिए जीते हैं। 'स्वान्त: सुखायÓ जीने के लिए ही अपना जीवन है- ऐसा मानने वाले को 'कालसर्पÓ योग दु:खदायी सिद्ध नहीं होगा। जातक के भाग्य का निर्णय करने में राहु-केतु का बड़ा योगदान है। आप पुरुषार्थ करें पर उसकी फलश्रुति राहु-केतु के द्वारा होती है। जातक के पूर्व संचित कर्मों के भोगों की लगाम राहु-केतु के हाथों में है। राहु-केतु की महादशा, अन्तर्दशा एवं गोचर भ्रमण पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

12 प्रकार के कालसर्प योग
प्राचीन विद्वानों ने 12 प्रकार के 'कालसर्पÓ योगों का विश्लेषण किया है और इन योगों को 1. अनंत कालसर्प योग 2. कुलिक कालसर्प योग 3. वासुकी कालसर्प योग 4. शंखपाल कालसर्प योग 5. पदमकाल कालसर्प योग 6. महापदम कालसर्प योग 7. तक्षत कालसर्प योग 8. कर्कोटक कालसर्प योग 9. शंखचूड़ कालसर्प योग 10. घातक कालसर्प योग 11. विषधर कालसर्प योग 12. शेषनाग कालसर्प योग।

ये है महत्वपूर्ण
- राहु से प्रारंभ होने वाला कालसर्प योग ज्यादा खतरनाक होता है। जातक पद, प्रतिष्ठा व पराक्रम प्राप्ति हेतु संघर्षरत रहता है।
- केतु से प्रारंभ होने वाला कालसर्प योग ज्यादा खतरनाक नहीं होता। पद प्रतिष्ठा व पराक्रम थोड़े से संघर्ष में ही फलीभूत हो जाने की संभावना बनी रहती है।


कालसर्प योग के अन्य प्रकार
दृश्य गोलाद्र्ध कालसर्प योग
राहु बारहवें स्थान में एवं अन्य ग्रह 11,10,9,8 स्थानों में होना चाहिए। तभी दृश्य गोलाद्र्ध काल सर्प योग बनता है। इस योग में अच्छी नौकरी, उत्तम कारोबार, धार्मिक ज्ञान और धर्म के प्रति जातक में रुचि रहती है। किन्तु दुर्घटना के योगों का डर बना रहता है। अचानक खर्चा अथवा अन्य किसी कारण नुकसान होता है। आशीर्वादों का प्रभाव भी जातक के जीवन को सुरक्षित रखता है।

अदृश्य गोलाद्र्ध कालसर्प योग
गोलाद्र्ध कालसर्प योग में छठे स्थान में राहु और बारहवें स्थान में केतु रहता है। 5,4,3,2,1 इन स्थानों में अन्य ग्रह होते हैं। यह योग स्वयं एवं परिवार के लिए अनिष्ट फल देने वाला होता है। किन्तु जीवन के उत्तरार्ध में सफलताएं चरण चूमती हैं।
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सत्यवादी, सात्विक एवं सत्कर्म करने वालों को यह योग अनिष्ट फल प्रदान नहीं करता। हम जो भी सत्कर्म करते हैं वह भविष्य के अच्छे भाग्य की नींव है। लेकिन कर्म सिद्धान्त के अनुसार जो हमारा पूर्व कर्म है, वह तो हमें भोगना ही पड़ेगा। 12 वां शुक्र संपत्ति का लाभ व्यक्ति को देता है।


जन्मकुंडली के भावों में राहु की स्थिति
जन्मकुंडली में राहु की स्थिति के आधार पर बनने वाले कालसर्प योग का नामकरण

जन्म कुंडली में स्थित राहु नामकरण
1. प्रथम भवन, लग्न में राहु अनंत कालसर्प योग
2. द्वितीय भवन धनभाव में राहु कुलिक कालसर्प योग
3. तृतीय भवन पराक्रम भाव में राहु वासुकि कालसर्प योग
4. चतुर्थ भवन सुख भाव में राहु शंखपाल कालसर्प योग
5. पंचम भवन विद्या, संतान भाव में राहु पद्म कालसर्प योग
6. षष्ठम भवन रोग, शत्रु भाव में राहु महापदम कालसर्प योग
7. सप्तम भवन दाम्पत्य भाव में राहु तक्षक कालसर्प योग
8. अष्टम भवन आयु भाव में राहु कर्कोटक कालसर्प योग
9. नवम भवन भाग्य भवन में राहु शंखचूड़ कालसर्प योग
10. दसम भवन राज्य भवन में राहु पातक कालसर्प योग
11. एकादश भवन आय भवन में राहु विषाक्त कालसर्प योग
12. द्वादश भवन व्यय भवन में राहु शेषनाग कालसर्प योग

राहुकाल देखने का तरीका
दक्षिण भारत में तो 'राहुकालÓ को सभी शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। सप्ताह के दिनों में कौन सा समय 'राहुकालÓ है। इस तालिका से देखें-
दिन राहुकाल
सोमवार प्रात: 7.30 से 9.00 बजे तक
मंगलवार दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक
बुधवार दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक
गुरुवार 1.30 बजे से 3.00 बजे तक
शुक्रवार प्रात: 10.30 बजे से 12.00 बजे तक
शनिवार रात्रि 9.00 बजे से 10.30 बजे तक
रविवार सायं 4.30 बजे से 6.00 बजे तक


लाल किताब में कालसर्प योग
कालसर्प योग अत्यन्त ही चर्चित विषय है। इस विषय में सही जानकारी एवं ज्ञान रखने वाले ज्योतिषी अत्यन्त ही सीमित संख्या में हैं। कालसर्प योग इतना प्राचीन है कि 'लाल किताबÓ जैसी पुस्तक में भी इसके निवारण के उपाय मिलते हैं। कालसर्प योग मूलत: सर्पयोग का ही परिष्कृत स्वरूप है। किसी भी जातक के भाग्य का निर्णय करने में राहु-केतु का बहुत योगदान रहता है। इसी कारण विंशोतरी महादशा में अठारह वर्ष और अष्टोत्तरी महादशा में बारह वर्ष राहु दशा मानी गई है।

कालसर्प योग का निवारण
- गले में चांदी का चौकोर ठोस टुकड़ा धारण करें।
- 108 कोयले के टुकड़े बुधवार को जल में प्रवाहित करें।
- केसर का तिलक प्रतिदिन मस्तक पर लगाएं।
- रात को सोते समय 'जौÓ सिरहाने रखें और सुबह होते ही पक्षियों को खाने के लिए डाल दें।
- वैवाहिक जीवन में बाधा आती हो तो अपनी पत्नी के साथ दुबारा फेरे लें।
- 108 दिनों तक नित्य पांच पाठ के हिसाब से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- चांदी की डिब्बी में शहद भरकर घर में रखें।

कालसर्प योग दूर करने के विशिष्ट उपाय
- शिवलिंग पर तांबे का सर्प प्राण-प्रतिष्ठा करके, विधि-विधान पूर्वक चढ़ाएं।
- कालसर्प योग का शांति विधान योग्य विद्वान से करवायें।
- 'ऊँ नम: शिवायÓ का मानसिक जाप हर समय करते रहें।
- घर तथा कार्यलय में मोर पंख स्थापित करें।
- राहु रत्न (गोमेद) की अंगूठी मध्यमा अंगुली में विधि-विधान से धारण करें।
- घर पर 'सिद्ध कालसर्प योग शांति यंत्रÓकी स्थापना करें और उसका नित्य पूजन, दर्शन करें।
- चंदन की लकड़ी के छोटे चौकोर टुकड़े पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर जड़वा लें और वह ताबीज गले में धारण करें।
- कुंडली में कालसर्प योग के साथ चन्द्र-राहु, चन्द्र-केतु, सूर्य-राहु, सूर्य-केतु इनमें से एक भी ग्रह योग होने पर केतु रत्न लहसुनिया मध्यमा अंगुली में चांदी में जड़वाकर धारण करें।

पंडित पीएन भट्ट
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिर्विद,
अंकशास्त्री एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संचालक : एस्ट्रो रिसर्च सेंटर
जी-4/4,जीएडी कॉलोनी, गोपालगंज, सागर (मप्र)
मोबाइल : 09407266609

बुधवार, 23 नवंबर 2011

100 गुना मुनाफे का झांसा देकर तीन अरब की लूट




जयपुर:
लोगों की रकम महज डेढ़ साल में 100 गुना करने का वादा करने वाली गोल्ड सुख कंपनी के कर्ता धर्ता ग़ायब हो गए हैं.

गोल्ड सुख के दफ्तरों के बाहर निवेशक अपने पैसों की ख़ातिर जमा हैं और हंगामा कर रहे हैं.

एक अनुमान के मुताबिक दो लाख लोगों ने करीब 300 करोड़ रूपए गोल्ड सुख के पास जमा कराए थे, लेकिन अब इसके चार डायरेक्टर भाग गए हैं.

चिटफंड कंपनियों की सूची में एक बड़ा नाम और उभर कर आया है और ये कंपनी गोल्ड सुख है, जिसका मुख्यालय राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है.

कंपनी सोने में निवेश की बात कह डेढ़ साल में रकम पर करीब 100 गुना मुनाफ़े तक का झांसा देती थी.

कंपनी ने अपना असली कारोबार तो सोने की ख़रीद फ़रोख्त बता रखा था, लेकिन ये तो सिर्फ कहने के लिए है. कंपनी लोगों से पैसा लेकर उन्हें सिर्फ डेढ़ साल में 100 गुना रकम वापस लौटाने का वादा करती थी.

इस कंपनी की ठगी का आलम ये है कि इसने अब तक हजारों लोगों को उनकी मूल रकम ही नहीं लौटाई है.

स्टार न्यूज़ ने जब इस गोरखधंधे की परते खोलना शुरू किया तो कंपनी से जुड़े लोग बजाय अपने कारोबार और कार्य प्रणाली के बारे में सफाई देने के सीधे सीधे सौदेबाज़ी पर उतर आए. जिस तरह से गोल्ड सुख ने ये सौदे बाज़ी करनी चाही उससे साफ़ है कि ये कंपनी भी लोगों के पैसे का इस्तेमाल चिटफंड के कारोबार में कर रही है.

कैसे दिखाए जाते थे सपने

गोल्ड सुख कंपनी ने अपने यहाँ पैसे जमा करवाने वाले लोगों के लिए चार प्लान तय कर रखे हैं. सभी प्लान में रकम को सिर्फ डेढ़ साल में डेढ़ सौ गुना करके वापस लौटाने का वादा किया जाता है.

प्लान-1: ग्राहक से लिए एक मुश्त 6000 रूपए- हर 45 दिन में एक चेक देने का वादा किया जाता है पहला चेक होगा 40 रूपए का और अगला चेक होगा दोगुना यानी अस्सी रूपए का. कुल 18 महीनों में यानी डेढ़ साल में निवेशक को दिए जायेंगे 12 चेक. यानी हर चेक पिछले से दोगुना होगा तो आख़िरी चेक की राशि होगी 88 ,000 रूपए. इस तरह निवेशक को मिलेंगे कुल 1 ,63 800 रूपए.

प्लान-2: निवेशक जमा करवाए 22 ,920 रूपए. 45 दिन बाद पहला चेक मिलेगा 640 रूपए का. 12 चेक होगा 13 ,10 , 720 रूपए का. कुल जो पैसा डेढ़ साल बाद देने का वादा कंपनी करती है वो होगा :26 ,20 , 800 रूपए.

प्लान -3: निवेशक को देगा 1 ,20 ,480 रूपए. 45 दिन बाद कंपनी उसे देगी 4320 रूपए का पहला चेक. हर चेक पिछले चेक से दो गुना होगा और 12 वां चेक होगा 1 ,76 ,90 ,400 रूपए का . वो भी सिर्फ 18 महीनों में.

प्लान -4: ग्राहक को देने होंगे 6 ,03 ,356 रूपए और 45 दिन बाद पहला चेक दिया जायेगा. ग्राहक को जो 12 वां चेक दिया जाएगा उसकी रकम होगी 5 करोड़ रूपए और कंपनी के नियम के मुताबिक ऐसे ग्राहकों को कुल रकम मिलेगी 10 करोड़, 15 लाख 56 हज़ार रूपए.

लेकिन इस कंपनी ने जो कुल डेढ़ लाख से ज्यादा संतुष्ट ग्राहकों का दावा करती है, सिर्फ ढाई साल में केवल 11 हज़ार लोगों को ही उनकी मूल राशि लौटाई है.

स्रोत: स्टार न्यूज बुलेट

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

अमीर देशों के दुखी बच्चे




समृद्ध देशों में बड़ी संख्या में बच्चे अकेलेपन और तिरस्कार के शिकार हैं

दुनिया भर में अत्याचार और हिंसा के शिकार बच्चों की बात करने पर अफ्रीकी या दक्षिण एशियाई बच्चों की तस्वीर दिमाग़ में उभरती है मगर अमीर देशों के बच्चों की हालत कोई बहुत अच्छी नहीं है.

दुनिया के अनेक देशों में बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन चलाने वाली संस्थाओं के संगठन 'चाइल्ड हेल्पलाइन इंटरनेशनल' का कहना है कि मानव विकास सूचकांक में शीर्ष पर आने वाले देशों में बड़ी संख्या में बच्चे दुखी और परेशान हैं.


'चाइल्ड हेल्पलाइन इंटरनेशनल' का कहना है कि मानव विकास सूचकांक के नौ अग्रणी देशों में अत्याचार और प्रताड़ना के बाद बच्चों के हेल्पलाइन से संपर्क करने का मुख्य कारण मानसिक समस्याएँ हैं.

चाइल्ड हेल्पलाइन इंटरनेशनल के नीति एवं शोध विभाग के प्रमुख रवि प्रसाद कहते हैं कि "बेहतर समझी जाने वाली जीवनशैली और मनोरंजन की बीसियों सुविधाएँ होने के बावजूद बच्चे ख़ुद को तिरस्कृत महसूस करते हैं और वे अक्सर हेल्पलाइनों को फ़ोन करके बताते हैं कि वे बोर हो रहे हैं या उनकी परवाह करने वाला कोई नहीं है".

चाइल्ड हेल्पलाइन इंटरनेशनल ने हेल्पलाइनों पर आने वाले फ़ोन कॉल्स के आधार पर जो आंकड़े जमा किए हैं उनसे पता चलता है कि न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका, आयरलैंड, नीदरलैंड्स, कनाडा, स्वीडन और जर्मनी में हर साल हज़ारों बच्चे अपनी समस्याओं के बारे में बात करने के लिए हेल्पलाइन पर फ़ोन करते हैं.

"हमने ढाई लाख से ज्यादा फ़ोन कॉल्स के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले हैं जो काफ़ी चौंकाने वाले हैं, इन देशों में तमाम सुविधाओं के बावजूद कहीं न कहीं बड़ी सामाजिक गड़बड़ी है जिसकी ओर हमारी रिपोर्ट इशारा करती है"

रवि प्रसाद, चाइल्ड हेल्पलाइन इंटरनेशनल

रवि प्रसाद कहते हैं, "हमने मानव विकास सूचकांक के नौ अग्रणी देशों में किए गए ढाई लाख से ज्यादा फ़ोन कॉल्स के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले हैं जो काफ़ी चौंकाने वाले हैं, इन देशों में तमाम सुविधाओं के बावजूद कहीं न कहीं कोई बड़ी सामाजिक गड़बड़ी है जिसकी ओर हमारी रिपोर्ट इशारा करती है."

चाइल्ड हेल्पलाइन को फ़ोन करने वाले कई बच्चे आत्महत्या करने के बारे में बातें करते हैं, नौ अग्रणी देशों में मानसिक समस्या की वजह से फ़ोन करने वाले बच्चों में बहुत सारे ऐसे होते हैं जिनमें आत्महत्या की प्रबल प्रवृत्ति दिखाई देती है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में जितने बच्चों ने हेल्पलाइन को फ़ोन किया उनमें से 30 प्रतिशत से अधिक बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति देखी गई.

मसलन, पिछले वर्ष न्यूज़ीलैंड में लगभग 20 हज़ार और अमरीका में करीब 14 हज़ार बच्चों ने चाइल्ड हेल्पलाइन को फ़ोन करके आत्महत्या करने की इच्छा के बारे में बात की.

इसी तरह ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने वाली हरकतें करने के मामले में नौ अग्रणी देशों के बच्चे काफ़ी आगे हैं, इन देशों में बड़ी संख्या में बच्चों ने फ़ोन करके शराब पीने, ड्रग्स लेने की समस्या के बारे में बात की.

हम भी अगर बच्चे होते...



दर्शील कहते हैं हर बच्चे को अपनी पढाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए.

बचपन के साथ एक शब्द जो अपने आप ही जुड़ जाता है वो है शरारत. आपने हमने सभी ने अपने बचपन में ढेरों शरारतें की हैं, कुछ में पकड़े गए तो कुछ शरारतों को करने के बावजूद बाल-बाल बच गए.

यूं तो बचपन की शरारतों को याद करने का कोई एक दिन या कोई एक पल नहीं हो सकता लेकिन बाल दिवस के मौके पर बीबीसी ने बात की टीवी और फिल्मों से जुड़े़ कई नन्हें कलाकारों से और जाना कि किस शरारत को करने के बाद वो बाल-बाल बच गए.

'तारे ज़मीन पर' से लोकप्रियता के आसमान को छूने वाले बाल कलाकार दर्शील सफारी ने बीबीसी के साथ बाटीं अपनी एक शरारत. दर्शील कहते हैं, ''एक बार मैं और मेरे दोस्त पटाखे छोड़ रहे थे, और मैंने के रॉकेट उड़ाया, वो रॉकेट पड़ोस के एक घर में जा घुसा. घर में से एक आंटी ने झाका और वो पूछने लगी कि ये रॉकेट किसने छोड़ा है. हम सब बच्चे वहां से भाग गए. अगर उस दिन वो हमें पकड़ लेती तो ज़रूर मेरे घर में मेरी शिकायत पहुंच जाती. उस दिन सच में मैं बाल-बाल बच गया.''

बाल दिवस के मौके पर दर्शील बाकि बच्चों से कहते हैं, ''जितनी भी शरारत करनी है करो लेकिन आपकी शरारत से किसी को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए. पढ़ाई मन लगा के करो क्योंकि भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है. और आनेवाले सालों में भारत को पढे़-लिखे लोगों की ज़रुरत होगी. और हम अपनी पढ़ाई से देश की प्रगति में भागी बन सकते हैं.''

साथ ही दर्शील ये भी कहते हैं कि अपने आस-पास के वातावरण को शुद्ध और हरा-भरा रखें.

दर्शील जिनती ही लोकप्रिय हैं बालिका वधु से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली आनंदी यानी के अविका गौड़. अब टीवी पर भले ही अविका जिनती भी गंभीर और संवेदनशील भूमिका निभाती हो लेकिन असल ज़िन्दगी में वो भी एक आम बच्चे की ही तरह हैं. अविका कहती हैं उनके दोस्त उन्हें किसी स्टार के नज़रिए से नहीं देखते और न ही किसी टीचर से उन्हें इसलिए छुट मिलती है कि वो टीवी पर आती हैं.

अपनी एक शरारत को याद करते हुए अविका कहती हैं, ''एक बार मैंने स्कूल में एक टीचर को बड़ा ही सताया. मैंने उनकी टेबल के आस-पास, उनकी कुर्सी पर यहां तक कि जिस डिब्बे में चौक रखते हैं उसमे भी कीड़े मरने की दावा छिड़क दी थी. टीचर बड़ी परेशान हो रही थी, क्योंकि उनके आस-पास की हर जगह से, उनके हाथों से उस दावा की बदबू आ रही थी. लेकिन टीचर को ये नहीं पता था कि ये शरारत किसकी है. उस दिन तो मैं बाल-बाल बच गई.''

ऐसी ही एक शरारत की ‘कृष’ और टचैन खुली की मैं खुली’ जैसी फ़िल्मों में अभिनय कर चुके ज़ैन खान ने भी. ज़ैन कहते हैं, ''एक बार क्लास में सब बच्चे मिलकर टीचर को चिड़ा रहे थे, ये बात टीचर को पता चल गई, लेकिन उन्हें ये नहीं पता चला कि असल में इसकी शुरुआत किसने की है. अगर उस दिन हमारी शरारत पकड़ी जाती तो पक्का हम सब को सज़ा मिलती.''

बाल दिवस हर साल 14 नवंबर को भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिन पर मनाया जाता है.