मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

क्रेडिट कार्ड से लें मजा





अगर आपके पास किसी भी बैंक का क्रेडिट कार्ड है और आपको इसके सही इस्तेमाल का पता है तो आप मालामाल बन जाएंगे। हम बताते हैं इसका यूज कैसे करें।

सॉफ्टवेयर पेशेवर अस्मिता अपनी कार में पेट्रोल भराने के लिए इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर ही जाना पसंद करते हैं। दरअसल इसकी वजह यह है कि उन्हें अपने सिटीबैंक-इंडियन प्लैटिनम क्रेडिट कार्ड के जरिए 200 रुपये का पेट्रोल भराने पर 4 रुपये का पेट्रोल मुफ्त मिलता है।
कुछ इसी तरह परियोजना प्रबंधक उमेश जिन्हें यात्रा करना बहुत पसंद है, अपने किंगफिशर-ऐमएक्स क्रेडिट कार्ड का जमकर इस्तेमाल करते हैं। अगर वह अपने इस क्रेडिट कार्ड के जरिए हर साल 1.75 लाख रुपये से अधिक खर्च करते हैं तो उन्होंने देश में किंगफिशर के किसी भी रिटर्न टिकट के लिए महज 1,000 रुपये का भुगतान ही करना पड़ता है। वह कहते हैं, मैंने अपने कार्ड के जरिए 3.50 लाख रुपये खर्च किए हैं और अब मुझे 2 टिकट मिलेंगे जिनका इस्तेमाल मैं नवंबर में अपनी भुवनेश्वर यात्रा के दौरान करूंगा।
क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने ग्राहकों को कई तरह के ऑफर उपलब्ध कराती हैं जो छूट, रिवॉर्ड अंकों या फिर कैशबैक के रूप में हो सकते हैं। ये ऑफर आपको शॉपिंग, फोन बिल के भुगतान, होटलों में खाना खाने और मनोरंजन पर मिल सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के रामचंद्र बताते हैं, क्रेडिट कार्ड कंपनियां उत्पादकों के साथ गठजोड़ करती हैं। इन उत्पादकों का सामान खरीदने पर क्रेडिट कार्ड कंपनियां और उत्पादकों के बीच समझौते के आधार पर उपभोक्ताओं को रिवॉर्ड अंक मिलते हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने तकरीबन 1,100 वाणिज्य संस्थानों से गठजोड़ कर रखा है। ऐसे किसी भी पॉइंट ऑफ सेल पर बैंक का क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को दोहरे रिवॉर्ड अंक मिल सकते हैं। सक्सेना बताते हैं कि अगर आपको हर 100 रुपये खर्च करने पर 2 अंक मिलते हैं तो यहां आपको 4 अंक मिलेंगे।
नीतू अपने कार्ड का इस्तेमाल राशन खरीदने, शॉपिंग करने और होटल में खाना खाने के लिए भी कर सकते हैं और इस तरह कुछ अतिरिक्त बचत कर सकते हैं। पेट्रोल के दाम दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं और अगर सालवी अपने कार्ड के जरिए पूरे साल में 1.80 लाख रुपये का खर्च करते हैं तो उन्हें 2,400 रुपये का मुफ्त ईंधन मिलेगा। उन्हें सरचार्ज पर 2.5 फीसदी या पूरे साल भर में 1,200 रुपये (या फिर हर महीने 100 रुपये) की छूट भी मिल सकती है। इस तरह उनकी कुल बचत हो जाएगी 3,612 रुपये। वहीं पात्र एयरटेल बिल के भुगतान पर हर 100 रुपये खर्च कर 12.5 किंग माइल्स कमा सकते हैं। जब आप होटल में खाना खाने जाते हैं या फिर सिनेमा देखने जाते हैं तो अपने कार्ड का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। शोधकर्ता मीतेंद्र नागेश बड़े कैशबैक के लिए कोटक महिंद्रा बैंक के के्रडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। जब उनके क्रेडिट कार्ड का बिल आता है तो कुल बकाये में से कैशबैक की रकम को घटाकर बिल तैयार किया जाता है। मान लीजिए के अगर आप एक बिलिंग साइकिल में 5000 रुपये या इससे अधिक खर्च करते हैं जो कि होटलों में खाने और सिनेमा देखने पर भी हो तो बैंक आपसे केवल 4,500 रुपये का भुगतान करने को कहेगा। कोटक महिंद्रा ट्रम्प गोल्ड कार्ड के जरिए आप 10 फीसदी कैशबैक ऑफर से सालाना 5,000 रुपये या इससे अधिक तक बचा सकते हैं। यह कैशबैक आपको हर महीने पहले 5 बार होटलों में खाना खाने और 5 बार सिनेमा देखने पर मिलेगा। इस तरह आप अधिकतम 600 रुपये तक बचा सकते हैं। अगर आप सिनेमैक्स के जरिए ऑनलाइन सिनेमा टिकट बुक कराते हैं तो आपको 10 फीसदी की छूट मिलेगी। आपको आपके सिनेमा टिकट पर महीने के स्टेटमेंट में अतिरिक्त 10 फीसदी का कैशबैक भी मिलेगा। स्टैंडर्ड चार्टर्ड मास्टरकार्ड प्लैटिनम के उपभोक्ताओं को ईंधन पर खर्च करने पर 5 फीसदी कैशबैक मिलेगा।
रिवॉर्ड अंकों के अलावा उपभोक्ताओं को सीधे मिल रही छूट भी खासा लुभाती है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने पिछले साल रिटेल श्रृंखलाओं जैसे लाइफस्टाइल, क्रोमा और ईजोन के साथ गठजोड़ किया था। ऐसे में ग्राहकों को कार्ड पर सामान्य ऑफर्स का लाभ तो मिलता ही है, साथ ही उन्हें सेल के मौसम में 5 से 10 फीसदी अतिरिक्त छूट भी मिलती है। हफ्ते के दिनों में क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च करने पर जितनी छूट और रिवॉर्ड अंक मिलते हैं, उसकी तुलना में सप्ताहांत यानी शनिवार या रविवार को अधिक ऑफर्स दिए जाते हैं। सिटी टाइटेनियम रिवॉड्र्स क्रेडिट कार्ड हफ्ते के दिनों में हर 200 रुपये के खर्च पर एक अंक देता है जबकि सप्ताहांत इतने ही खर्च पर 5 अंक दिए जाते हैं।
हालांकि इनके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी होती हैं। इंडसइंड बैंक में कार्ड बिजनेस के प्रमुख अनिल रामचंद्रन बताते हैं, इन ऑफर का लाभ उठाने के लिए एक न्यूनतम रकम खर्च करनी पड़ती है और बैंक एक तय सीमा तक ही अधिकतम कैशबैक देते हैं।
वीजा और मास्टरकार्ड जैसे पेमेंट गेटवे भी ग्राहकों को कैशबैक और छूट देने के लिए सीधे गठजोड़ करते हैं। उदाहरण के लिए वीजा ग्राहकों को पिज्जा हट आउटलेट पर 35 फीसदी की छूट मिलती है। वीजा ग्राहकों को बुकमाईशो डॉट कॉम पर भी छूट मिलती है।

डिस्काउंट से रोशन दीवाली!



- राजकुमार सोनी

महंगाई के समय में व्यापारी ग्राहकों को लुभाने के लिए डिस्काउंट के जबरदस्त ऑफर दे रहे हैं। सोने, चांदी की आसमान छूती कीमतों के बीच त्योहारी मौसम में भी ग्राहक भागने लगें तो उन्हें रोकने के लिए नामी गिरामी ज्वैलर्स और आभूषण कंपनियां अनूठी जुगत भिड़ा रही हैं। अब वे ग्राहकों को गोवा की सैर करा रहे हैं, मर्सिडीज बेंज की सवारी करा रहे हैं, हीरे का हार भी सौंप रहे हैं। बस... सोना खरीदने की देर है।

लुभावनी योजनाएं
ग्राहकों को लुभाने के लिए दीवाली के मौके पर तो ज्वैलर्स एक से बढ़कर लुभावनी योजनाएं लाए हैं। आलम यह है कि कुछ जैवलर्स 20 फीसदी कम कीमत पर ही आपको जेवर पहनाने को तैयार हैं। टाटा समूह की कंपनी तनिष्क दीवाली पर 2 लाख रुपये या ज्यादा के जेवरात खरीदने पर 20 फीसदी तक की छूट दे रही है। आपका बजट इतना नहीं है तो भी कंपनी आपको मायूस नहीं करेगी। 10,000 रुपये से अधिक की खरीदारी पर 24 कैरट सोने के पानी वाला लैंप ग्राहकों को दिया जा रहा है। कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक (मध्य प्रदेश) पंकज छाबड़ा के अनुसार, दीवाली पर रियायत देखकर लोग खरीदारी करने आ जाते हैं। हम भी इसी आदत को भुनाना चाहते हैं। तनिष्क किस्तों पर भी जेवर देने को तैयार है। कंपनी की विशेष योजना के तहत आपको 11 महीने तक किस्त देनी होगी। 12वीं किस्त कंपनी खुद देगी।
गीतांजलि जेम्स भी ग्राहकों को लुभाने के लिए तैयार है। अपनी 2 योजनाओं के तहत वह हीरे के आभूषणों पर 20 फीसदी तक की छूट और ग्राहकों से 12 किस्त लेकर 2 किस्त खुद भरने और जेवर देने का ऐलान कर चुकी है। पीसी ज्वैलर्स 12 महीने तक 1,000 रुपये की किस्त ले रही है और 13वें महीने में 14,000 रुपये के गहने ग्राहकों को दे रही है। इस तरह 2,000 रुपये कंपनी अपने पास से डाल रही है। पीसी ज्वैलर्स पर सोने-चांदी के गहने खरीदने पर लकी ड्रॉ में हिस्सा लेने का मौका ग्राहकों को दिया जा रहा है, जिसमें मर्सिडीज बेंज की ई-क्लास कार मिल सकती है। इसके अलावा आभूषण बनवाने के खर्च में भी 15 फीसदी तक की छूट है।
इसमें पेच एक ही है कि खरीदारी दीवाली तक कर लेनी होगी। मिसाल के तौर पर योजनाएं केवल 3 दिन के लिए आई हैं। इसमें आभूषण बनवाने पर 20 फीसदी कम खर्च, रत्नों पर 7 फीसदी छूट और कुल जमा 30 लाख रुपये तक नकद वापसी शामिल हैं। 50,000 रुपये या अधिक के जेवर खरीदने पर गोवा की सैर करा रहे हैं। 50,000 से 1 लाख रुपये तक के जेवर खरीदने पर आपको गोवा में 2 दिन और 3 रात के लिए मुफ्त ठहरने का मौका मिलेगा। हां, हवाई टिकट आपको खुद खरीदने होंगे। अगर आप 1 लाख रुपये से अधिक के जेवर खरीदते हैं तो आपको हवाई टिकट भी ज्वैलर की ओर से ही मिल जाएंगे। कुछ ज्वैलर सोने के भाव में 2 से 3 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी भी कर रहे हैं। हालांकि जानकार इनसे परहेज करने की सलाह ही दे रहे हैं। उद्योग के एक जानकार ने बताया, यह ग्राहकों को बेवकूफ बनाने का तरीका है। ऐसे ज्वैलर बमुश्किल 18 या 19 कैरट सोने के गहने देते हैं, जिनमें सोना बहुत कम होता है। बाजार में हर तरफ डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर्स की बहार है। ऐसे में ग्राहकों को तमाम चीजों पर 30 से 55 पर्सेंट तक का डिस्काउंट मिल रहा है। फेस्टिव सीजन के आखिरी पड़ाव में कस्टमर्स को डायमंड जूलरी, रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रॉकरी, फूड प्रॉडक्ट वगैरह पर भारी छूट मिल रही है।

इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स
सेल के इस सीजन में इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स पर सबसे ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा है। सभी आउटलेट्स में दीवाली धमाका स्कीम जारी है। इसमें आईसीसीआई बैंक के क्रेडिट या डेबिट कॉर्ड से खरीदारी करने पर 5 प्रतिशत का अतिरिक्त डिस्काउंट मिल रहा है, वहीं एक्स सर्विस मैन और सरकारी कर्मचारियों को 6,000 रुपये की शॉपिंग करने पर एक टोस्टर फ्री मिल रहा है। यहां वीडियोकॉन, फिलिप्स, एलजी, सैमसुंग, पैनासोनिक के एलसीडी टीवी सेटों पर खास डिस्काउंट के साथ फ्री गिफ्ट स्कीम भी चल रही है। महाराजा मिक्सर ग्राइंडर 2195 रुपये में खरीदने पर स्टीम प्रेस और इलैक्ट्रिक केटल फ्री मिलेंगी। यहां सोनी का 81 सेमी एलसीडी टीवी 39 हजार रुपये के स्पेशल प्राइस में मिल रहा है। इसी के साथ फिलिप्स का होम थिएटर सेट खरीदने पर 50 पर्सेंट की छूट मिलेगी। इतना ही नहीं, यहां 4 का धमाल स्कीम में आयरन प्रेस, टोस्टर, मिक्सर ग्राइंडर और वैक्यूम क्लीनर का 6625 रुपये का सेट 3495 रुपये के स्पेशल प्राइस में मिल रहा है। वहीं एलजी, व्हर्लपूल वगैरह के आउटलेट्स में इन दिनों एलसीडी टीवी, फ्रिज, डीवीडी प्लेयर और एसी पर फ्री गिफ्ट के अलावा 15 से 20 फीसदी तक का फेस्टिवल डिस्काउंट भी मिल रहा है।

ड्रेसेज और गिफ्ट पैक

विशाल मेगा मॉर्ट और बिग बाजार के सभी आउटलेट्स में रेडीमेड गारमेंट्स पर 15 से 40 फीसदी की छूट मिल रही है। कनॉट प्लेस, साउथ एक्स-2 और पीतमपुरा में दीवाली फेस्टिवल स्पेशल सेल के तहत इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स पर फ्री गिफ्ट के साथ 10 से 25 पर्सेंट की छूट जारी है। यहां कुछ आइटम्स पर एक खरीदो दूसरी मुफ्त पाओ स्कीम चल रही है। ड्रेसेज पर आप 35 से 50 पर्सेंट की छूट ले सकते हैं। विशाल मेगामार्ट के बचत उत्सव में 275 रुपये वाला कुर्ता 195, 450 रुपये वाली साड़ी 275 रुपये, सलवार-सूट की वैरायटी 175 रुपये या इससे ज्यादा कीमत में ले सकते हैं। ग्रेट इंडिया पैलेस, नोएडा स्थित होम टाउन में 599 रुपये वाली बेड शीट खरीदने पर आपको दूसरी बेड शीट फ्री मिलेगी। बॉथ टॉवलों की सारी वैरायटी पर 40 से 50 पर्सेंट की छूट जारी है। 399 रुपये वाले दो पिलो कवर्स का सेट आपको यहां से 225 रुपयों में मिलेगा।

फूड आइटम्स

दीवाली के मौके पर फूड आइटम्स पर 10 से 15 पर्सेंट की छूट मिल रही है। इन दिनों यहां से फ्रूट गिफ्ट पैक आप 30 फीसदी की छूट पर खरीद सकते हैं। फूड चेन 6 टेन ने दीवाली सीजन में कई आकर्षक ऑफर्स पेश किए हैं। 60 रुपये वाली 900 मिली लीटर की रीयल फ्रूट जूस की बोतल यहां से 50 फीसदी की छूट पर मिल रही है। हल्दी राम और बीकानेरी स्वीट्स के गिफ्ट पैक खरीदने पर 10 से 15 फीसदी की छूट मिलेगी। रिलायंस फ्रेश के आउटलेट्स पर दीवाली से पहले 999 रुपये की खरीदारी करने पर आपको तकरीबन 200 रुपये की कीमत का गिफ्ट मिल सकता है। फेस्टिवल सीजन के चलते तमाम बड़े बाजारों में फनिर्शिंग्स पर आकर्षक छूट मिल रही है। नोएडा के ग्रेट इंडिया पैलेस के होम टाउन शोरूम से फर्नीचर खरीदने पर 40 , फनिर्शिंग पर 30 और लाइटिंग प्रॉडक्ट्स पर 20 से 35 पर्सेंट का डिस्काउंट मिल रहा है। यहां से दस हजार रुपये या इससे ज्यादा की खरीदारी करने पर आपको एक हजार रुपये के गिफ्ट वाउचर के साथ एक सरप्राइज गिफ्ट भी मिलेगा।

मोबाइल
रिलायंस और टाटा इंडिकॉम के आउटलेट्स में कलर्ड और एफएम फोन की रेंज 999 रुपये और कैमरा फोन 1999 रुपये की रेंज से शुरू है। टाटा इंडिकॉम द्वारा जारी सोना ऑफर स्कीम में गोल्ड कॉइन जीतने के चांस के साथ आप 1699 रुपये वाले मोबाइल के साथ इतनी ही कीमत का टॉक टाइम पा सकते हैं। हॉट स्पॉट और मोबाइल बाजार के किसी आउटलेट से आइडिया या वोडाफोन का प्रीपेड कनेक्शन लेने पर आपको रिस्ट वॉच, हैंड बैग या नई फिल्म की डीवीडीज में से कोई एक गिफ्ट मिलेगा। इतना ही नहीं, यहां से दस हजार रुपयों या इससे ज्यादा की खरीदारी करने पर फ्री हॉलिडे पैकेज के अलावा कई और गिफ्ट्स भी दिए जा रहे हैं।

फिल्मी दुनिया की रंगीन खबरें



सपनों की प्रेम कहानी
रोमांटिक फिल्मों से बड़े पर्दे पर सफल अभिनेता बनने वाले अभिनेता शाहरुख खान अपनी फिल्म रा.वन को कुछ हटकर बनाना चाहते थे। लेकिन किंग खान का कहना है वह एक बार फिर प्रेम कहानी बना बैठे। फिल्म 26 अक्टूबर को दीवाली पर रिलीज होगी। 45 वर्षीय शाहरुख ने ट्विटर पर लिखा मुझे रा.वन की पहली कॉपी देखकर यह अहसास हुआ की मैंने एक बार फिर से प्रेम कहानी बना दी है। मैं और मेरे सपनों के बीच की प्रेम कहानी। शाहरुख अपनी फिल्म को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में जा रहे हैं।
100 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से बनी इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया है। फिल्म में अर्जुन रामपाल और करीना कपूर मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।


मीका ने हटाया कैटरीना का नाम
बॉलीवुड में इन दिनों सलमान खान की कितनी दबंगई चलती है इसका ताजा उदाहरण हाल ही में गायक मीका ने पेश किया है। मीका को सलमान खान की वजह से उनकी फिल्मों में गीत गाने का मौका मिलता रहा है। उनकी पिछली हिट फिल्मों बॉडीगार्ड, रेडी, दबंग में मीका के गाए गीतों को श्रोताओं ने काफी सराहा था। सिंगर मीका सलमान खान के काफी अच्छे दोस्त हैं। इस समय बॉलीवुड में उनका कैरियर भी अच्छा चल रहा है। सलमान खान नाराज न हों इसलिए उन्होंने अपनी लूट फिल्म में गाए गीत से अभिनेत्री कैटरीना कैफ का नाम हटा दिया है। फिल्म लूट में मीका का एक कॉमेडी लाइट मूड का गाना है- सारी दुनिया मेरे इस पे... इसमें उन्होंने कई नेताओं, एक्टरों का नाम लिया है। इसमें एक लाइन है-सुन मेरी कैटरीना मेरा लंदन जाना चाइना... जब यह गाना रिकार्ड हो गया तो मीका को ऐसा महसूस हुआ कि अगर सलमान खान ने यह गाना सुना और कैट का नाम होने से उन्हें बुरा लगा तो उनका चलता हुआ कैरियर ठप हो जाएगा, जैसा कि हिमेश रेशमिया का हुआ था। इसलिए उन्होंने कैटरीना के बदले जैकलीना कर दिया है। इससे गाने की रिद्म या उसके कॉमेडी-लाइट मूड पर कोई असर नहीं पडता।



द स्टैंड का निर्देशन करेंगे बेन!

अभिनेता बेन एफलेक स्टीफन किंग के उपन्यास द स्टैंड पर आधारित फिल्म का निर्देशन करेंगे। वेबसाइट डेडलाइन डॉट कॉम के मुताबिक द स्टैंड बुराई के खिलाफ अच्छाई की लड़ाई है। यह एक ऐसे समूह की कहानी है जो ईसाई धर्म विरोधी रैंडल फ्लैग जैसे लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ता है। फिल्म में एक साथ कई किरदारों की अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से मिलती-जुलती कहानियां हैं। हैरी पॉटर श्रृंखला की फिल्में बनाने वाले डेविड येट्स इसका निर्देशन करने वाले थे लेकिन अब वह इस फिल्म से बाहर हो गए हैं।




डर्टी इमेज के सीन पर आपत्ति

आने वाली फिल्म 'डर्टी पिक्चरÓ में विद्या बालन ने अपने को-स्टार्स के साथ काफी बोल्ड सीन्स दिए हैं। ऐसे में उनके कथित प्रेमी सिद्धार्थ रॉय कपूर का परेशान होना थोड़ा लाजिमी है। सुनने में आया है कि सिद्धार्थ नहीं चाहते कि विद्या के ये सीन बड़े परदे पर दिखाई दें। उन्होंने इस पर अपनी आपत्ति विद्या को भी दर्ज कराई है और पूछा है कि ऐसे सीन करने को वह कैसे तैयार हो गईं। कहा यह भी जा रहा है कि सिद्धार्थ ने इन सीन्स को काटने और इनकी अवधि कम करने की बात भी निर्देशक से कर दी हैं। फिल्म कि निर्माता एकता कपूर किसी भी सीन को फिल्म से हटाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा। यह फिल्म साउथ की सेक्सी एक्ट्रेस सिल्क स्मिता के जीवन पर बनी है, जो अपनी बोल्डनेस और सेक्स अपील के लिए जानी जाती हैं।



सोनाक्षी- रणवीर एक साथ
कुछ माह पूर्व सम्पन्न हुए आइफा अवार्ड्स के दौरान मीडिया द्वारा उड़ी इस खबर को अब पूरी तरह से विराम लग गया है कि सोनाक्षी सिन्हा और बैंड बाजा बारात से अपना करियर शुरू करने वाले अभिनेता रणवीर सिंह के बीच कुछ चल रहा है या यूं कहें कि दोनों एक दूसरे के साथ रोमांस कर रहे हैं। इन खबरों ने अनुष्का शर्मा और रणवीर सिंह की दोस्ती को जरूर तोड़ दिया था। अनुष्का और रणवीर सिंह बैंड बाजा बारात में एक साथ नजर आए थे। सोनाक्षी सिन्हा ने इन अफवाहों के चलते रणवीर के साथ मिलने वाली फिल्म के प्रस्ताव को ठुकराना शुरू कर दिया था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि सोनाक्षी रणवीर सिंह के साथ उड़ान के निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी के साथ काम करने जा रही हैं। उड़ान ने पिछले साल के कई पुरस्कार समारोहों में जबरदस्त धूम मचाई थी। इस फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किया था। पिछले वर्ष ज्यादातर फिल्म पुरस्कार समारोहों में नए कलाकारों को दिए जाने वाले अवॉर्ड पर सोनाक्षी सिन्हा और रणवीर सिंह ने कब्जा जमाया था। रणवीर भी सोनाक्षी की खूबसूरती और अभिनय से बेहद खुश नजर आएं। इसी बीच चर्चा होने लगी कि सोनाक्षी सिन्हा और रणवीर सिंह एक-दूसरे को पसंद करते हैं और इसीलिए एक-दो फिल्में जिनमें हीरो रणवीर थे, सोनाक्षी ने ठुकरा दी। पहले रणवीर के साथ काम न करने के बारे में सोनाक्षी का कहना है कि, तब रणवीर के साथ फिल्मों के ऑफर इसलिए ठुकरा दिए क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि अफवाहों को बल मिले। सोनाक्षी और रणवीर सिंह के बीच कुछ भी नहीं है और यह मीडिया द्वारा रची गई कहानी है। चूंकि अब इस तरह की चर्चाएं थम गई हैं, इसलिए सोनाक्षी ने रणवीर के साथ फिल्म करना मंजूर कर लिया है।



दबाव में रहीं स्टोन

अभिनेत्री एम्मा स्टोन कहती हैं कि वह द हेल्प में अभिनय के दौरान दबाव महसूस करती रहीं क्योंकि यह फिल्म उनकी मां की पसंदीदा किताबों में से एक किताब पर आधारित है।
स्टोन ने फिल्म में एक पत्रकार यूजेनिया फेलेन की भूमिका निभाई है। यह फिल्म कैथरीन स्टॉकेट के इसी नाम से लिखे गए उपन्यास पर आधारित है। वेबसाइट कांटेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम के मुताबिक स्टोन कहती हैं, किताब बहुत लोकप्रिय है इसलिए मेरे ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारी थी। यह मेरी मां की पसंदीदा किताबों में से एक है इसलिए मेरे ऊपर और भी ज्यादा दबाव था।


गुलाबो- रागेश्वरी बाहर
कलर्स चैनल पर दिखाए जा रहे रियलिटी शो बिग बॉस से मशहूर गायिका और अभिनेत्री रागेश्वरी लूम्बा बाहर हो गई हैं। बिग बॉस से बाहर होने वालों में कालबेलिया नृतकी गुलाबो भी बाहर हो चुकी हैं। उन्होंने भी यही कहा था कि बिग बॉस के घर में तनाव बढ़ता जा रहा है। कमोबेश ऐसा ही कहना है रागेश्वरी का जो हाल ही में बिग बॉस के घर से बाहर हुई हैं। उनका कहना है कि घर के भीतर लोगों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े हो रहे हैं, जिससे तनाव बढ रहा है। बिग बॉस के घर से बाहर होने के बाद रागेश्वरी ने बताया, घर के भीतर तनाव बढ़ रहा है क्योंकि सभी लोग घर में रुकने के लिए कठिन प्रयास कर रहे हैं, जिसकी वजह से वे आपा खो रहे हैं। सफाई और भोजन जैसी छोटी-छोटी बातों पर भी झगड़े हो रहे हैं। रागेश्वरी कहती हैं, इस रिएलिटी शो का ढांचा ही ऐसा है कि लोगों में तनाव बढऩे लगता है। रागेश्वरी को बिग बॉस के घर से उस समय बाहर कर दिया गया था जब वह अपना खुफिया लक्ष्य पाने में नाकाम हो गई थीं।




किताब लिखेंगी लिंडसे की मां

अभिनेत्री लिंडसे लोहान की मां एक किताब लिखेंगी। इस किताब में वह अपनी बेटी लिंडसे के नशीली दवाओं व शराब की लत में डूबे रहने के दौरान की कहानी पेश करेंगी। डीना लोहान ने इस किताब की प्रस्तावना में लिखा है, मैं लिंडसे के बहुत अधिक पार्टियों में शामिल होने के लिए उनके दोस्तों, उनके कैरियर और उनके प्रबंधकों को जिम्मेदार मानती हूं।
मद्यपान, नशीली दवाएं लेना और गैरजिम्मेदाराना बर्ताव लिंडसे की रोजमर्रा की जीवनशैली मे शामिल हो गया था। यह बात मुझे अंदर से परेशान करती थी। वेबसाइट एस शोबीज डॉट कॉम के मुताबिक डीना अपनी इस किताब के प्रकाशन के लिए विभिन्न प्रकाशकों के साथ बैठकें कर रही हैं और उन्हें अपने लेखन का एक छोटा सा नमूना भी दिखा रही हैं।


रेनोल्ड्स ने लाइवली संग मनाया जन्मदिन
अभिनेता रेयान रेनोल्ड्स ने अपना 35 वां जन्म दिन सह-अभिनेत्री लाइवली के साथ बोस्टन में बिताया। दोनों को बोस्टन में एक अपार्टमेंट के बाहर साथ में देखा गया। रेनोल्ड्स बोस्टन में अपनी फिल्म आरआईपीडी की शूटिंग कर रहे हैं। वेबसाइट पीपल डॉट कॉम के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, वे एक जोड़े की तरह दिख रहे है। वे एक-दूजे के साथ वास्तव में बहुत खुश थे। लाइवली का हाल ही में अभिनेता लियोनार्दो डीकैप्रियो से अलगाव हुआ है। दूसरी ओर रेनोल्ड्स का अब भी अपनी पूर्व प्रेमिका स्कारलेट जोहानसन के साथ दोस्ताना रिश्ता है।


आश्चर्यचकित हैं कोल

गायिका निकोला रॉबट्र्स की नई एकल एलबम सिंड्रेलाज आईज से गल्र्स अलाउड बैंड की उनकी साथी चेरिल कोल बहुत आश्चर्यचकित हैं।
एलबम के कुछ गीतों पर कोल ने आश्चर्य व्यक्त किया। वेबसाइट फीमेल फस्र्ट डॉट को डॉट यूके के मुताबिक 26 वर्षीया निकोला कहती हैं, अन्य लड़कियों को यह गीत पसंद आया। मुझे लगता है कि वे मेरे संगीत से थोड़ी आश्चर्यचकित थीं। चेरिल ने मुझसे कहा था कि वह मेरी एलबम को सुनकर हंसी भी, रोई भी और आश्चर्यचकित भी हुईं। मैं यही चाहती थी कि लोग मेरी इस एलबम के गीतों से खुद को जुड़़ा हुआ महसूस कर सकें।

सेहत है तो जहान है



केला खाएं, तंदुरुस्त रहें

भारतीय धर्म और संस्कृति में इसे विशिष्ट दर्जा दिया गया है। मांगलिक कार्यों में तो इसकी विशेष महत्ता है। केले के फल ही नहीं संपूर्ण वृक्ष ही उपयोगी है। अब तो वैज्ञानिकों ने इसमें ऐसे गुणों की खोज की हैं जिससे यह औषधीय गुणों की खान बन गया है। केला एक सर्वप्रिय फल है। शायद आप नहीं जानते, कि यह भारतीय फल नहीं है। सबसे पहले केले का पौधा दक्षिण-पूर्व एशिया इंडोनेशिया के जंगलों से प्राप्त हुआ था। 16वीं शताब्दी में स्पेन के लोग जब अमरीका में जाकर बसे तो वहां उन्होंने केले के पौधे लगाए। इसके बाद तो यह संपूर्ण विश्व में पैदा होने लगा। वैसे गर्म और नम प्रदेशों में केले के पौधे खूब उगते, फलते-फूलते हैं। कच्चे केले को पौधों से तोड़कर गोदामों में कुछ रासायनिक पदार्थों की सहायता से पकाया जाता है उसके बाद ही वह मीठा और स्वादिष्ट होता है। वैसे इसकी 200 से अधिक किस्में होती है। मजे की बात तो यह है कि इसे बीज से नहीं उगाया जाता है अपितु तने के हिस्से को जो जड़ों की गांठों से युक्त होता है, दूसरी जगह लगाकर नया पौधा तैयार किया जाता है। इसके पौधे 20 फुट तक बढ़ सकते हैं। केले के फल गुच्छे के रूप में आते हैं।
पका केला पोषक गुणों से भरपूर होता है। इसके गुदे में 74 प्रतिशत पानी, 20 प्रतिशत चीनी, 2 प्रतिशत प्रोटीन, 1.5 प्रतिशत वसा एक प्रतिशत सेल्यूलोज तथा विटामिन होते हैं। विटामिनों में ए, बी, तथा सी की प्रधानता होती है। खनिज लवणों में कैल्शियम, फास्फोरस, लोह तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। विटामिन केले के छिलके के नीचे होते हैं जो पकने पर गुदे में चले जाते हैं। केले में मौजूद पोषक तत्व एनर्जी और स्टेमिना बढ़ाते हैं।
औषधीय केला महज एक फल ही नहीं है अपितु इसमें अनेक औषधीय गुण भी है। आयुर्वेद में भी इसके औषधीय गुणों की काफी महत्ता बताई गई है।
अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है। कि रोजाना तीन केले खाने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा 21 प्रतिशत तक कम हो सकता है। औसतन एक केला में 500 मिलीग्राम पोटेशियम होता है जो कि शरीर में ब्लड प्रेशर तथा फ्लूयड को नियंत्रित करता है। यदि व्यक्ति एक दिन में तीन केले खाए तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है।
बुजुर्गों के लिए केला बहुत उपयोगी है। बुढ़ापे में दांत और आंत दोनों कमजोर हो जाते हैं। केला ही एक ऐसा फल है जो आसानी से खाया और पचाया जा सकता है। केले में काफी मात्रा में रेशा होता है जो बुजुर्गों को कब्ज से निजात दिलाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए केला काफी लाभदायक है। गर्भावस्था में ऊबकाई आना एक सामान्य समस्या है जिसे केला खाकर दूर किया जा सकता है। इसमें कई खनिज और विटामिन होने की वजह से यह न केवल गर्भवती के लिए अपितु गर्भस्थ शिशु के लिए भी लाभदायक है।
केला खाने से ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम होता है जो ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है।
दस्त लग जाने पर दही में केला मिलाकर खाने से लाभ होता है।
केले में लौहतत्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं अत: जिन्हें रक्त की कमी हो, उन्हें नियमित रूप से केले का सेवन करना चाहिए।
केला खाने से हड्डियां मजबूत होती है क्योंकि इसमें कैल्श्यिम होता है। इसके अलावा इसमें फास्फोरस भी होता है।
जिन लोगों को केला हजम नहीं होता उन्हें केला खाने के बाद एक इलायची खा लेनी चाहिए जिससे केला पच जाता है।
यदि बाल झड़ते हों तो केले के गुदे में नीबू का रस मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
केला खाना पुरुषों के लिए काफी लाभदायक होता है क्योंकि इसमें उनमें प्रजनन क्षमता का विकास होता है। यदि कोई पुरुष एक सप्ताह में कम से कम तीन दिन केले खाए तो उसकी प्रजनन क्षमता बढ़ेगी। केले में उगा स्तर का मेगोशियम होता है जो शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है।
यदि बच्चा कोई नुकीली चीज या सिक्का आदि निगल ले तो उसे केले खिलाना चाहिए ताकि केले में फंसकर शौच के जरिए बाहर निकल आये।
कुष्ठ रोग में इसकी जडों को पीसकर प्रभावित भाग पर लगाना चाहिए।
सुजाक रोग में केले को घी और शक्कर के साथ सेवन करें।
दाद, खाज और खुजली होने पर केले के पत्तों को पीसकर लगाना चाहिए।
पेट दर्द सताए तो केले के फूलों का रस छाछ के साथ पीने से लाभ होता है।
सूजाक जैसे घातक बीमारी में केलों को बारीक काटकर धूप में सूखा लें। सूखने पर पीस लें और उसमें उतनी ही शक्कर मिलाकर चूर्ण बना लें। हर रोज एक चम्मच चूर्ण खाएं तथा ऊपर से एक गिलास दूध पीये लाभ होगा।
रक्त पित्त और पथरी के रोगियों के लिए केले का मुरब्बा लाभदायक रहता है।
आग से शरीर का कोई भाग यदि जल जाए तो उस पर पके केले के गूदे को ठीक से मसलकर लगा दें व पट्टी बांध दें, इससे जलन कम हो जाएगी व फफोले भी नहीं पड़ेगे।
पीलिया में भी केला लाभदायक है।
टीबी या क्षय रोग में रोगी को पका केला खिलाना चाहिए।
सूखी खांसी में केले में पीपल के पल को भरदें व रात भर उसे खुले में रख दें। सुबह इसका सेवन करें। निश्चत लाभ होगा।
सुबह सुबह एक केले के साथ आधा चम्मच शहद खाने से कमजोर हृदय पुष्ट होता है।
आंतों में फोड़ा हो गया हो या सूजन आ गई हो तो रात को सोते समय कगाा केला उबालकर खाएं।
अल्सर होने पर केले की सब्जी लाभदायक होती है। बार-बार शौच की शिकायत में चावल के साथ केले की सब्जी का सेवन लाभप्रद है। बार-बार लघुशंका जाने की शिकायत हो तो हर दो घंटे बाद एक केला खाएं।
कब्ज के मरीज को खाली पेट केला खाना चाहिए।
पेट जलन में पका केला फायदा देता है।
खुजली प्रभावित भाग पर केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर लगाएं।
नाक से खून बहने या नकसीर की शिकायत हो तो कच्ची खांड के साथ प्रतिदिन दो केला खाएं।
दमे में अधपके केले पर सेंधा नमक और काली मिर्च लगाकर खाना चाहिए।
मुंह और जीभ के छालों पर केला, दही और इलायची पीस कर लगावें, फायदा होगा।





सांस के रोगी रहें सावधान

दीपावली यानि धूम धड़ाका पटाखे व रोशनी। दीपावली के त्यौहार पर हर ओर पटाखों की धूम रहती है बच्चे ही नहीं बड़े भी पटाखों को छुड़ाने का मजा लेते हैं। पटाखों से उठने वाले धुएं व धमाके की आवाज को लेकर चिकित्सकों ने लोगों को सतर्क किया है। चिकित्सकों का कहना है कि सांस के रोगी धुएं वालें वाले पटाखे से दूर रहें क्योंकि इससे निकलने वाला धुंआ जानलेवा हो सकता है। दीपावली आते ही सभी मिठाइयों की मिठास व पटाखों की आवाजों में खो जाते हैं। रोशनी के इस पर्व में बच्चों की पहली पसंद फुलझड़ी, अनार व चकरघिन्नी होती है। यही वह पटाखे हैं जिनसे भारी मात्रों में धुंआ निकालता है। माता पिता उपरोक्त तीनों पटाखे बच्चों को बड़ी ही आसानी से ले देते हैं। उन्हें लगता है कि यह पटाखे बच्चों के लिए सुरक्षित हैं क्योंकि इन पटाखे आवाज नहीं करते और बच्चे आसानी से इन्हें जला सकते हैं। बावजूद इसके चिकित्सक कहते हैं कि भले ही यह पटाखे आवाज नहीं करते लेकिन यह आवाज करने वाले पटाखों से कहीं अधिक खतरनाक होते हैं। इन पटाखों से जो धुआं निकलता है वह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है।
चिकित्सक बताते हैं कि इन पटाखों के धुएं के साथ जो कण सांस नली में जाते हैं वह सांस नली को अवरूद्ध कर देते हैं। इससे दमे की समस्या हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि फुलझड़ी आदि तो बच्चे हाथ में लेकर जलाते हैं जिससे धुंआ सीधे नाक में चला जाता है। चिकित्सकों की सलाह है कि दमें, सीओपीडी व सांस की किसी भी अन्य बीमारी के रोगी इस धुएं से बेहद सतर्क रहें क्योंकि इससे उनका रोग बढ़ सकती है। चिकित्सकों का कहना है कहना है कि जिन लोगों को सांस की समस्या है वह तो धुएं वाले पटाखों से दूर ही रहे हैं तथा जिन्हें समस्या नहीं है वह भी पटाखा जलाने में सावधानी बरतें। चिकित्सकों की सलाह है कि यदि पटाखा जलाना ही हो तो नाक व मुंह पर सूती कपड़ा बांधकर पटाखा जलाएं ताकि उठने वाला धुआं सीधा नाक में न जाएं।


मिलावट भारी पड़ सकती है सेहत पर
त्योहार पर मिठाई की मांग और मौके का फायदा उठाने की फितरत का नतीजा है मिलावट जो सेहत पर भारी भी पड़ सकती है। मिलावट के लिए यूरिया, कास्टिक सोडा, डिटर्जेन्?ट आदि का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के लिए अत्यंत नुकसानदायक होते हैं। खाद्य एवं मिलावट विभाग के सूत्रों ने बताया कि मिलावट रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इस पर रोक लगाना काफी मुश्किल है।
मांग और आपूर्ति में अंतर, मौके का फायदा उठाने की कोशिश और लालच के चलते मिलावट का नासूर खत्म होने के बजाय बढ़ता जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की आहार विशेषज्ञ अनुजा अग्रवाल कहती हैं कि त्यौहार करीब आने के साथ साथ बाजार में सिंथेटिक दूध या दूषित मावे से बनी मिठाइयों की बहुतायत हो जाएगी। आम नागरिक इसे आसानी से पहचान नहीं सकता कि यह असली है या नकली।

सिंथेटिक दूध और दूषित मावे में कास्टिक सोडा और यूरिया मिला होता है। यूरिया एक कीटनाशक है। जब इसके इस्तेमाल से कीट मर जाते हैं तो सोचिए कि मानव शरीर पर इसका कैसा दुष्प्रभाव होता होगा। आहार विशेषज्ञ कामिनी बाली ने कहा कि मिठाइयां आकर्षक नजर आएं, इसके लिए तरह तरह के रंगों से उन्हें सजाया जाता है। जरूरी नहीं हैं कि वे रंग अच्छे और हानिरहित हों। सस्ते रंगों से तो शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव ही पड़ेगा। मिष्?ठान पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तेल भी यदि घटिया किस्म का हो तो वह भी हानिकारक ही होता है।

प्रतिरक्षण तंत्र से होती है थकान

दीर्घकालिक थकान सिंड्रोम (सीएफएस) की वजह क्या है, यह अब भी एक अबूझ पहेली बना हुआ है। लेकिन नार्वे में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि इसके लिए स्वेच्छाचारी प्रतिरक्षण तंत्र द्वारा शरीर पर किए गए हमले जिम्मेवार हो सकते हैं।
सीएफएस का इस्तेमाल गंभीर और सतत थकान को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसमें आराम करने के बावजूद थकान से निजात नहीं मिल पाती। इस बीमारी का अब तक इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। बीबीसी के मुताबिक बेरगेन के हौकेलैंड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि कैंसर की दवा को प्रतिरक्षण तंत्र में लगाने से कुछ रोगियों को इससे आराम मिला।
इस दल ने अध्ययन के लिए सीएफएस से संक्रमित 30 रोगियों का चयन किया। इनमें से आधे रोगियों को कैंसर की दवा रिटुक्सिमैब दिया गया, जबकि शेष आधे लोगों का नकली इलाज किया गया। अनुसंधानकर्ताओं के हवाले से पीएलओएस वन ने लिखा है कि दवा लेने वाले लोगों में से 67 प्रतिशत को थकान से राहत मिली। वहीं नकली इलाज कराने वाले लोगों में से मात्र 13 प्रतिशत ने सुधार की बात कही।


उम्र के साथ बदल सकती है बौद्धिक क्षमता

वैज्ञानिकों का कहना है कि किशोरों की बौद्धिक क्षमता में काफी बड़े स्तर पर विकास या पतन हो सकता है। अभी तक यह माना जाता था कि आईक्यू के जरिए मापी जाने वाली बौद्धिक क्षमता में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है।
बीबीसी की खबर के अनुसार यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के अनुसंधानकर्ताओं ने 14 से 18 वर्ष के किशोरों की बौद्धिक क्षमता में विकास और पतन दर्ज किया है। इस अनुसंधान के परिणामों को नेचर पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। लवेलकम ट्रस्ट नाम के इस अनुसंधान के अगुवा प्रोफेसर कैथी प्राइस ने बताया कि हम बच्चों की शैक्षिक क्षमता का काफी शुरुआती उम्र में ही आकलन कर लेते हैं, लेकिन हमने साबित किया है कि उनकी बौद्धिक क्षमता में विकास की संभावना बनी रहती है। कैथी ने कहा कि हमें इस बात के प्रति काफी सतर्क रहना चाहिए कि उम्र के शुरुआती पड़ाव में ही किसी कमजोर क्षमता वाले के तौर पर पहचान नहीं दे देनी चाहिए, क्योंकि अगले कुछ सालों में उसके आईक्यू में और सुधार हो सकता है। इस दल का कहना है कि उनके अनुसंधान के परिणामों से शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रभाव पडऩे की संभावना है।


घुटनों की बीमारी को दूर भगाते हैं अच्छे जूते

ऑस्?ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि अच्छे जूते घुटनों की बीमारी को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। मेलबर्न विश्वविद्यालय के दल के मुताबिक अच्छे जूते, खासकर विशेष प्रकार से बने जूते, घुटनों की तकलीफ ऑस्टियोअर्थराइटिस से जूझ रहे लोगों की पीड़ा को कम कर सकते हैं।
आमतौर पर बनने वाले एथलेटिक जूतों की बजाय अच्छे जूते चलने के दौरान पैरों पर पडऩे वाले वजन को कम कर सकते हैं जिससे घुटनों पर पडऩे वाला दबाव स्वत: कम हो जाएगा। यह प्रभाव स्वस्थ, मोटापे से परेशान लोगों तथा घुटनों के दर्दनाक ऑस्टियोअर्थराइटिस से परेशान लोगों में देखा गया। मोटे लोगों को ऑस्टियोअर्थराइटिस की आशंका अधिक होती है।
घुटनों पर पडऩे वाले दबाव को कम करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घुटनों पर जोर पडऩे से ऑस्टियोअर्थराइटिस होने की आशंका अधिक होती है। साथ ही पहले से ही इस बीमारी से परेशान लोगों में इसके बढऩे का खतरा रहता है।घुटनों का ऑस्टियोअर्थराइटिस आज वयस्कों को प्रभावित करने वाली आम बीमारियों में से एक है। इसमें लोगों को तेज दर्द, शारीरिक विकलांगता, चलने में तकलीफ आदि का सामना करना पड़ता है।
टीम की अगुवा प्रोफेसर किम बेन्नेल ने कहा अच्छे, परिष्कृत जूतों के जरिए घुटनों पर पडऩे वाले दबाव को कम किया जा सकता है और ऑस्टियोअर्थराइटिस के बढऩे की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।

सितारों की दीपावली



दीपावली एक ऐसा त्योहार है, जिसमें सितारे सचमुच जमीं पर उतर आते हैं। ये त्योहार उन्हें अपनी जड़ों का अहसास दिलाता है और अपनी परंपराओं का उत्सव वे बिल्कुल आम आदमी की तरह ही परिवार के साथ मनाते हैं।
सिनेमा भी हमारी संस्कृति का एक अंग ही है। तभी तो दीपावली जैसे उत्सव पर फिल्मी सितारे भी खास से आम हो जाते हैं और उनके घर-आंगन में भी संस्कृति, उत्सव और आस्था का एक संगम देखने को मिलता है। वे भी घर में लक्ष्मी पूजन करते हैं और दीपक जलाकर अपने और अपने परिवार के लिए खुशियों का वरदान मांगते हैं। त्योहार में ये सितारे आम आदमी के रूप में धार्मिक परंपराओं के साथ उसी तरह उत्सव मनाते हैं, जैसे आम घरों में मनता है। बॉलीवुड के सितारों का घर दीपावली के दौरान दीयों, विद्युत झालरों और ऐसी ही सजावट से चकाचौंध रहता है।

घर में आएगा मेहमान
जगमग रोशनी और आतिशबाजी में ये सितारे किसी से पीछे नहीं रहते। अपनी इस बार की दीपावली की तैयारी के बारे में अभिषेक बच्चन उत्साह से बताते हैं, 'पिछले कुछ सालों से हमारे परिवार में दादा और दादी के जाने के बाद और कभी किन्हीं और कारणों से कोई उत्सव नहीं मनाया गया, लेकिन इस बार पूरे बच्चन परिवार के लिए दीवाली कुछ खास है। दीवाली के कुछ दिन बाद ही घर में नया मेहमान आनेवाला है। मैं पापा, पा दादा और मां दादी बनने वाले हैं। दीपावली के दो -तीन दिन पहले पापा भी ऑस्टे्रलिया से वापस आ जाएंगे। मैं भी एक दिन पहले शूटिंग में ब्रेक लेकर राजस्थान से वापस घर लौटूंगा। एक लंबे अंतराल के बाद बच्चन परिवार दीपों के इस पर्व को मिलजुल कर मनाएगा। वैसे हमारे परिवार में शुरू से ही यह परंपरा चली आ रही है कि कोई भी उत्सव हम मिल-जुल कर मनाते हैं, क्योंकि जो आनंद पूरे परिवार के साथ एकत्र होकर त्यौहार मनाने में मिलता है, उससे ज्यादा खुशी कहीं और नहीं मिलती। वैसे भी दीपावली का पर्व, जिसमें हर तरफ रोशनी ही रोशनी की जगमगाहट होती है दूर तक अंधेरे का नामोनिशान नहीं होता, उसमें पूरा परिवार शामिल होकर एक नयी रोशनी बिखेरता है। हां, बचपन में प्रतीक्षा के लॉन में मनाई दीपावली को मैं नहीं भूला हूं। पूरे घर की चहारदीवारी पर मिट्टी के दीयों को जलता देख जो खुशी मिलती थी उसे मैं नहीं भूला हूं। पापा का अनार और रॉकेट छोडऩा मुझे आज भी याद है।Ó

जो सीखा, उसे सिखाएं
अमिताभ बच्चन दीपावली पर अपने संदेश में कहते हैं, 'कोई भी उत्सव हमें इस बात की याद दिलाता है कि हम जिस मिट्टी में पले-बढ़े हैं, वहां की परंपरा का निर्वाह करें। हमें एक समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा विरासत में मिली है और हमारा अतीत गर्व करने लायक है। जिस समाज में हम रह रहे हैं, वह उत्सवी समाज है। पर्व और त्योहार के दिन छोटे-बड़े से आशीर्वाद लेते हैं। ये सारी बातें किसी को बतानी नहीं पड़ती, न ही ये सिखाई जाती हैं, ना ही किताबों में लिखी हैं। यह अंदर से महसूस की जाती हैं। ये बातें तो अपने आप अंदर से आती हैं। जो बातें मैंने अपने बाबूजी या माता जी से सीखीं, वही मैंने अपने बेटे-बेटी को सिखाईं और मैं चाहता हूं कि वे भी अपने बच्चों को यही बात सिखाएं। Ó

बच्चों के साथ बच्चा बन जाता हूं
अक्षय कुमार हर त्योहार अपने परिवार के साथ मनाने पर जोर देते हैं। अक्षय कहते हैं, 'मैं तो अपने बच्चों और उनके दोस्तों के साथ खूब पटाखे छोड़ता हूं और बेटों के दोस्तों को उपहार भी देता हूं। आज भले ही मैं स्टार हो गया हूं, लेकिन दीवाली के दिन मैं भी बच्चों के साथ बच्चा हो जाता हूं। वैसे मेरा अपना नजरिया है कि दीवाली हो या फिर होली अकेले मनाने की चीज नहीं है। त्योहार में पूरा परिवार, यार दोस्त और रिश्तेदार साथ होते हैं, तभी मजा आता है। छोटे बड़े का आशीर्वाद लें और बड़े उनकी खुशियों में शामिल हों और पूरा परिवार एक साथ पूजा-पाठ करे, तो ही तो त्यौहार का असली मजा आता है।Ó

इंतजार आतिशबाजी का
सितारों की यंग जेनरेशन में मशहूर शाहिद कपूर बताते हैं, 'मैं तो बचपन में दोस्तों के साथ खूब पटाखे छोड़ता था और दीवाली का तो मैं पूरे साल इंतजार करता था। यह मेरा सबसे प्रिय त्योहार है। मेरा मानना है कि हर बच्चा दीवाली का इसलिए इंतजार करता है कि कब वो बड़ा हो और उस पर पटाखे छोडऩे की बंदिश हटे।

जड़ों से जोड़ता यह त्यौहार
आजकल आशुतोष राणा एक साथ तीन फ्लैट लेकर उसे एक करने के काम में जुटे हैं और दीवाली के बाद गृह प्रवेश करने वाले हैं। आशुतोष कहते हैं, 'कोई भी त्योहार हो हम मिलजुल कर उसे मनाएं, तो उससे समाज में एक संदेश जाता है। पूजा-पाठ से एक आत्मबल मिलता है, जिसे आप ईश्वर का वरदान भी कह सकते हैं। क्योंकि ईश्वर में एक बड़ी शक्ति है और यही शक्ति लोगों में विश्वास की भावना उत्पन्न करती है। मैं अपनी पत्नी रेणुका और दोनों बेटों के साथ लक्ष्मी-गणेश की पूजा करता हूं। आज भी मुंबई जैसी भागमभाग वाली जिंदगी में त्यौहार के दिन ही ऐसा लगता है कि हम आज भी अपनी संस्कृति और संस्कार से जुड़े हुए हैं।

कम खाएं मिठाई
हर किसी का दीवाली मनाने का अपना तरीका है यहां। राजू श्रीवास्तव को ही लीजिए। हास्य कलाकार राजू कोई भी मौका हो अपनी बातों से दिल को गुदगुदाने का काम नहीं छोड़ते। इस बार वह दीवाली पर कुछ नया और अनूठा करने का मन बना रहे हैं। वह बताते हैं, 'इस बार मैं सोच रहा हूं कि कंप्यूटर पर लक्ष्मी जी की पूजा करूं और उसी पर एनीमेटेड पटाखे का भी मजा लूं। इससे मैं पर्यावरणवादी हो जाऊंगा। लेकिन एक बात मैं अपने दर्शकों से भी कहना चाहूंगा कि दीवाली पर मिठाई थोड़ा कम खाएं, क्योंकि लोग जमकर मिठाई खाते हैं फिर पूरे साल पार्क में उसे पचाने के लिए मार्निंग वॉक करनी पड़ती है।Ó

उस दिन आम आदमी हूं
हार्टथ्रॉब रणबीर कपूर कहते हैं, 'मेरा तो पूरा परिवार फिल्मी दुनिया से जुड़ा हुआ है। दादा जी तो होली जमकर मनाते थे। लेकिन हम कलाकारों के जीवन में भी कुछ क्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें मैं एक आम आदमी की तरह जीता हूं और भूल जाता हूं कि अब मैं भी एक स्टार हूं। हां, अब थोड़ा सा अंतर यह हो गया है कि पहले की तरह गलियों और सड़कों पर पटाखे नहीं छोड़ता। इस बात का मुझे मलाल होता है, क्योंकि दीवाली घर के अंदर बैठकर मनाने की चीज नहीं होती। लेकिन पूरे कपूर परिवार में जिस तरह होली या गणपति पर रंग,उल्लास और उमंग होती है। वैसी बात दीवाली में नहीं होती है। हम सभी शांति से अपने -अपने घरों में भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार लक्ष्मी पूजन करते हैं, घर को सजाते हैं और आतिशबाजी का लुत्फ उठाते हैं।Ó

फिल्मी दुनिया की ताजा खबरें



शाइनी आहूजा फिर से विवादों में

फिल्म अभिनेता शाइनी आहूजा फिर से विवादों में हैं। इस बार उनकी को-स्टार सयाली भगत ने ही उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है। सयाली का कहना है कि शाइनी फिल्म 'घोस्टÓ के सेट पर उनसे बदतमीजी करते थे। पूर्व मिस इंडिया रह चुकी सयाली ने कहा कि'घोस्टÓशूटिंग के दौरान और बाद में उनकी जिंदगी नरक बन गई थी। शाइनी की बदमाशी को लेकर एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में सयाली ने कहा कि शाइनी ने सेट पर मुझसे र्दुव्?यवहार किया। उसने मुझ पर किसी को कुछ भी न बताने के लिए भी दबाव डाला। कई बार शाइनी ने आते-जाते मुझसे छेडख़ानी की। सयाली ने माना कि यह अफवाह गलत है कि शाइनी ने मेरे नितंब छुए पर यह सच है कि उसने मुझे कई बार यह अहसास करवाया कि मैं 'हॉटÓ रिस्पॉंस नहीं दे रही। उसने कहा कि मुझे उसके नजदीक आना चाहिए तभी फिल्म के सीन में असलियत का फील आ पाएगा। एक बार तो वह उसे उठाकर मेकअप रूम में ले गया और उसके हाथ पकड़ कर उसकी आंखों में देखने लगा। मैंने उसे इग्नोर करना ही बेहतर समझा। क्रू मैंबर्स ने भी उसकी ऐसी बदतमीजियों को नोटिस किया। एक सीन में उसने शाइनी को सब्जियां काटना सिखाना था तो उसने कहा कि कम से कम 10 बार वह ऐसा करेंगे ताकि वह उसकी बांहों की गर्मी महसूस कर सके। सयाली ने बताया कि वह शूटिंग पूरी होने के बाद भी वह उसे तंग करता रहा। वह उसे गलत समय पर फोन करके तंग करता था। मालूम हो कि शाइनी इससे पहले भी नौकरानी के साथ बलात्कार के आरोपों में घिर चुके हैं और उसी मामले में जमानत मिलने के बाद इन दिनों शूटिंग कर रहे हैं।

रा.वनÓ सबसे महंगी फिल्म
बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान ने अपनी आगामी फिल्म 'रा.वनÓ को सफल बनाने के लिए कोई कोर-कसर अधूरी नहीं छोड़ी है। फिल्म का बजट ही अपने आप में एक कहानी बयां करता है। शाहरुख ने अपनी इस फिल्म के निर्माण में 150 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। बजट के लिहाज से यह भारत की तीसरी सबसे महंगी फिल्म है। 'रा.वनÓ बॉलीवुड की तीसरी ऐसी फिल्म है, जिसका बजट 100 करोड़ रुपये को पार कर गया है। फिल्म इतिहासकार एस.एम.एम. औसाजा ने कहा, यह सम्भव है कि यह तीसरी सर्वाधिक महंगे बजट की फिल्म है। इसके पहले वर्ष 2009 में बनी अक्षय कुमार की 'ब्ल्यूÓ पहली ऐसी फिल्म थी जो 129 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई थी जबकि वर्ष 2010 में 190 करोड़ रुपये में बनी रजनीकांत की अति सफल फिल्म 'इंधिरनÓ महंगी फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर पहुंच गई। 'रा.वनÓ की सफलता के लिए खान स्टार प्रचारक के रूप में आठ शहरों का दौरा कर चुके हैं और इस दौरान वह 25 ब्रांड्स के साथ जुड़े। प्राप्त सूचनाओं पर अगर यकीन किया जाए तो खान ने 52 करोड़ रुपये सिर्फ इसके मार्केटिंग पर खर्च किए हैं।
इसके अलावा 100 करोड़ रुपये से कम बजट की फिल्मों में आमिर खान की 'गजनीÓ 65 करोड़, करीना कपूर की 'कम्बख्त इश्कÓ, और हरमन बावेजा की 'लव स्टोरी 2050 में 60 करोड़ रुपये में बनी थी।




रा.वन नहीं, दमादम देखेंगे सलमान खान

सलमान खान ने रा.वन के साथ हाथ नहीं मिलाया वो हिमेश रेशमिया की फिल्म दमादम देखना चाहते हैं। हिमेश ने सलमान की फिल्म 'बॉडीगार्डÓ का म्यूजिक कंपोज किया था, जो काफी पसंद किया गया। इससे खुश होकर सलमान भी हिमेश का साथ दे रहे हैं।
शाहरूख को खुले तौर पर चैलेंज
हिमेश की यह फिल्म शाहरूख खान के रा.वन जैसे बड़े प्रोजेक्ट के साथ ही रिलीज हो रही है। ऐसे में सलमान का साथ मिलना एक तरह से सलमान का शाहरूख को खुले तौर पर चैलेंज दिए जाने के रूप में ही लिया जा रहा है। यहां तक की सलमान हिमेश को उनकी फिल्म प्रमोट करने के टिप्स भी दे रहे हैं।

आमिर को पसंद नहीं आया करीना सीन

रीमा कागती के निर्देशन में बन रही फिल्म धुआं के एक सीन की लंदन में शूटिंग चल रही है, जिसे पूरा होने में काफी वक्त लग रहा है। करीना का इस फिल्म में अंडर वाटर एक्शन का एक जबर्दस्त सीन है। इसी एक सीन के फिल्मांकन में काफी पसीना बहाया जा चुका है। सूत्रों की मानें, तो इस सीन की शूटिंग काफी पहले ही पूरी हो चुकी थी। लेकिन फिल्म के हीरो मि.परफेक्शनिस्ट आमिर खान को यह सीन पसंद नहीं आया और उन्होंने बेबो से इसे दोबारा शूट करने के लिए कह दिया।
कोई कसर नहीं छोड़ेंगे आमिर: अगर इस सीन में सिर्फ करीना ही होतीं, तो शायद आमिर ऐसा नहीं करते। चूंकि यह सीन दोनों अदाकारों से संबंधित है, इसलिए आमिर खान को हस्तक्षेप करना पड़ा। मिली जानकारी के अनुसार यह फिल्म का एक अहम दृश्य है, इसलिए आमिर इसमें कोई कसर नहीं छोडऩा चाह रहे हैं। इस अंडर वाटर सीन की शूटिंग के लिए दोनों ही अदाकार काफी समय से लंदन में हैं।
करीना बड़ी फैन है आमिर की: लोगों को इसी बात का आश्चर्य हो रहा है कि बेबो जैसी तुनकमिजाज हीरोइन ने किसी सीन को दोबारा शूट करने के लिए अनुमति कैसे दे दी? तो इसका जवाब यह है कि करीना आमिर खान की बहुत बड़ी फैन हैं। वे आमिर की किसी बात को टाल नहीं सकतीं। अगर उनकी फिल्म का हीरो कोई और होता, तो शायद ही बेबो री शूट के मामले में चुप बैठतीं। बता दें कि अब इस खास सीन की शूटिंग आमिर के हिसाब से की जा रही है और बेबो को इससे कोई एतराज नहीं है।

हीरोइनों की रेस में करीना आगे
करीना कपूर का कहना है कि उन्हें यह देखकर काफी अच्छा लग रहा है कि उनकी फिल्मों के बीच आपस में ही ज्यादा से ज्यादा कमाई करने का कॉम्पिटिशन चल रहा है। बता दें कि करीना की तीन फिल्में थ्री इडियट्स गोलमाल- 3 और बॉडीगार्ड 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा चुकी हैं। ऐसे में अगर उनकी अगली फिल्म भी सफल होती है , तो वाकई हीरोइनों की रेस में करीना सबसे आगे होंगी। इस बारे में वह कहती हैं ,मुझे काफी अच्छा लग रहा है कि मेरी फिल्में आपस में ही कॉम्पिटिशन कर रही हैं।
ईद के मौके पर रिलीज फिल्म बॉडीगार्ड ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये की कमाई की थी। फिल्मों की सफलता से इतर करीना ने कहा, इस फिल्म इंडस्ट्री में आपकी सफलता आपकी पिछली फिल्म की सफलता के साथ याद रखी जाती है। बॉलिवुड में केवल मनोरंजन बिकता है , जिसे हम बदल नहीं सकते। वैसे , करीना का यह भी कहना है कि एक्टर्स का काम ऑडियंस को एंटरटेन करने का होता है और वह इस बात को कभी नहीं भूल सकतीं कि वह अपने फैंस के लिए काम करने वाली ऐक्ट्रेस हैं।

तुसाद म्यूजियम में लगी ऐश की एक और मूर्ति

मैडम तुसाद म्यूजियम में ऐश्वर्या राय बच्चन की एक और मूर्ति लग गई है। इससे पहले 2004 में भी ऐश्वर्या की मोम की मूर्ति लग चुकी है लेकिन उनकी शोहरत और फैन्स की डिमांड को देखते हुए ऐश्वर्या राय बच्चन की एक और मूर्ति लगाई गई है।

दीप ज्योति नमोस्तुते




- राजकुमार सोनी


शुभम् करोति कल्याणं,
आरोग्यम धन संपदा।
शत्रु बुद्धि विनाशाय,
दीप ज्योति नमोस्तुते।।


भारत वर्ष देवभूमि है,इस धरती पर शक्तियों पर हमेशा से विश्वास किया जाता रहा है,शक्ति ही जीवन है,और जब शक्ति नही है तो जीवन भी निरर्थक है। जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त विभिन्न प्रकार की शक्तियां मानव जीवन के साथ चलती है,शक्तियों के तालमेल से ही व्यक्ति आगे बढता है,नाम कमाता है,प्रसिद्धि प्राप्त करता है,जब शक्ति पर विश्वास नही होता है तो जीवन भी हवा के सहारे की तरह से चलता जाता है,और जरा भी विषम परिस्थिति पैदा होती है तो जीवन के लिये संकट पैदा हो जाते हैं।

किस प्रकार की शक्तियों का होना जरूरी है
हर व्यक्ति के लिये तीन प्रकार की शक्तियों को प्राप्त करना जरूरी होता है,पहली मानव शक्ति,दूसरी है भौतिक शक्ति,और तीसरी है देव शक्ति। मानव शक्ति भी दिखाई देती है,भौतिक शक्ति भी दिखाई देती है लेकिन देव शक्ति दिखाई नही देती है बल्कि अद्रश्य होकर अपना बल देती है।

कौन देवता किस शक्ति का मालिक है?
भगवान गणेशजी मानव शक्ति के प्रदाता है,माता लक्ष्मी भौतिक शक्ति की प्रदाता है और माता सरस्वती पराशक्ति यानी देव शक्ति की प्रदाता हैं,इन्ही तीन शक्तियों की पूजा का समय दीपावली के दिन प्राचीन काल से माना जाता रहा है।
दीपावली का त्यौहार कार्तिक कृष्ण-पक्ष की अमावस्या को ही मनाया जाता है
भारत मे तीन ऋतुओं का समय मुख्य माना जाता है,सर्दी गर्मी और बरसात,सर्दी की ऋतु कार्तिक अमावस्या से चैत्र की अमावस्या तक,गर्मी की ऋतु चैत्र अमावस्या से श्रावण अमावस्या तक,और बरसात की ऋतु श्रावण अमावस्या से कार्तिक अमावस्या तक मानी जाती है।बरसात के बाद सभी वनस्पतियां आकाश से पानी को प्राप्त करने के बाद अपने अपने फ़लों को दीवाली तक प्रदान करती है,इन वनस्पतियों के भण्डारण के समय की शुरुआत ही दीपावली के दिन से की जाती है,आयुर्वेद में दवाइयां और जीवन वर्धक वनस्पतियों को पूरी साल प्रयोग करने के लिये इसी दिन से भण्डारण करने का औचित्य ऋग्वेद के काल से किया जाता है। इसके अलावा उपरोक्त तीनो शक्तियों का समीकरण इसी दिन एकान्त वास मे बैठ कर किया जाता है,मनन और ध्यान करने की क्रिया को ही पूजा कहते है,एक समानबाहु त्रिभुज की कल्पना करने के बाद,साधन और मनुष्य शक्ति के देवता गणेशजी,धन तथा भौतिक सम्पत्ति की प्रदाता लक्ष्मीजी,और विद्या तथा पराशक्तियों की प्रदाता सरस्वतीजी की पूजा इसी दिन की जाती है। तीनो कारणों का समीकरण बनाकर आगे के व्यवसाय और कार्य के लिये योजनाओं का रूप दिया जाता है,मानव शक्ति और धन तथा मानवशक्ति के अन्दर व्यवसायिक या कार्य करने की विद्या तथा कार्य करने के प्रति होने वाले धन के व्यय का रूप ही तीनों शक्तियों का समीकरण बिठाना कहा जाता है। जैसे साधन के रूप में फ़ैक्टरी का होना,धन के रूप में फ़ैक्टरी को चलाने की क्षमता का होना,और विद्या के रूप में उस फ़ैक्टरी की जानकारी और पैदा होने वाले सामान का ज्ञान होना जरूरी है,साधन विद्या और लक्ष्मी तीनो का सामजस्य बिठाना ही दीपावली की पूजा कहा जाता है।

धन का उपयोग करना भी सीखें
धन आज के युग की अनिवार्यता है। लोग धन की होड़ में अंधी दौड़ में शामिल हो गए है। जिस गति से धन दौलत कमाई जा रही है वैसे ही खर्च भी की जा रही है। अधिकांश हिस्सा विलासिता और अनावश्यक चीजों पर खर्च किया जा रहा है। आज की पीढ़ी को धन को निवेश करने के तरीके और उपयोग का सलीका भी आना चाहिए।
यह दौर है धन कमाने की होड़ और दौड़ का। किसी भी धर्म शास्त्र या गुरु ने इसके लिए मना नहीं किया है। हिन्दुओं के अवतारों ने तो सम्पत्ति के सद्पयोग को अपने आचरण से बखूबी बताया है। बुद्ध और महावीर तो बहुत धन देखकर फकीरी में उतरे थे। जीसस ने हमेशा हर तरह की दरिद्रता का विरोध किया था। मोहम्मद ने भी तिजारत के सारे कायदों पर साफ-साफ ख्याल दिए हैं। कुल मिलाकर दौलत को लेकर सबने एक बात तय की है कि इसकी तीन ही गति है-दान, भोग और नाश। धन को लेकर तीनों के अपने अलग-अलग परिणाम हैं। पहले भोग को समझें। हम सामान्यतछसमझते हैं कि जिसे अधिक श्रम करना पड़ता है वह या तो मजदूर, कमजोर वर्ग में है या दुर्भाग्यशाली। इसीलिए कई लोग धन का उपयोग कम शारीरिक श्रम करना पड़े इस हेतु भी करते हैं। यहीं से आलस्य और धन का अपव्यय आरंभ होता है।
यहीं से धन और स्वास्थ्य दोनों का नाश होता है। भोग शुरुआत है धन के नाश की। बीमारी में खर्च, चोरी, नुकसान में गया धन उपरी तौर पर नाश की श्रेणी में आता है। अध्यात्म कहता है कि धन आपको बाहर टिकने के लिए लालच देता है और बिना अपने भीतर उतरे हम पूरे जीवन का ही नाश करते हैं। उम्र के किसी पड़ाव में जब जिनके पास पर्याप्त धन हो जाता है वे अपने समय के उपयोग को लेकर भी भटक जाते हैं। ठीक ठाक धन आ जाए और समय का सद्पयोग न किया जाए तो या तो बीमार होंगे या अवसाद में डूब जाएंगे। इसलिए धन को एक ऐसे श्रम और इतने समय से जोड़े रखें जो बाहरी जीवन में समाज, राष्ट्र के लिए हो जाए तथा भीतरी जीवन में स्वाध्याय घटा दे।

यूं बरसेगा दीवाली पर धन



दीपावली की तैयारियां जोरों पर हैं। आप चाहते हैं कि इस बार देवी लक्ष्मी की पूजा इस तरह की जाएं कि धन की कमी घर में न रहें। आपकी सजावट और पूजा से देवी के खुश होने का सबसे बड़ा फायदा आपके घर को होगा। सही पूजन और तरीकों से देवी खुश होगी और घर में धन की बरसात होगी। ऐसे ही कुछ उपाय और टोटके इस बार धन की देवी लक्ष्मी को खुश करने में सहायक होंगे और आपके घर बरसेगा।

मां लक्ष्मी का करें प्रसन्न
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो लाल फूल, लाल चावल, सिंदूर, लालवस्त्र से मां लक्ष्मी की पूजा कीजिए। इस दौरान ओम नमो पद्मावती पद्मालये लक्ष्मीदायिनी वांछाभूत प्रेत विन्ध्यवासिनी सर्व शत्रु संहारिणी दुर्जन मोहिनी ऋद्घि-सिद्घि कुरू-कुरू स्वाहा। ओम क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम: नामक मंत्र को रात्रि में कमल गट्टे की माला लेकर 108 बार जप करें। इससे आपकी आय दुगनी हो जाएगी और प्रमोशन में आने वाली बाधा भी दूर होगी। इस दिन पूजा के समय नारियल की पूजा जरूर कीजिए ऐसा करने पर आपके वारे न्यारे हो जाएंगे। दरअसल नारियल को संस्कृत भाषा में श्रीफल कहते हैं। श्री का अर्थ है लक्ष्मी। लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है इसलिए लक्ष्मी पूजन के समय नारियल जरूर रखें। नारियल के साथ पूजे जाने पर लक्ष्मी अपनी कृपा जातक पर जरूर करती हैं।

रृंगार सामग्री दान करें
माता लक्ष्मी को श्रृंगार बहुत प्रिय हैं। तभी तो शुक्रवार के दिन महिलाएं माता लक्ष्मी की पूजा करते समय श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं। दीपावली का दिन तो मां लक्ष्मी का खास दिन है। इस दिन घर की सुहागन महिलाएं सुहाग चिन्ह जैसे लाल चूड़ी, बिन्दी, महावर, लाल वस्त्र किसी सुहागन महिला को दान दें। उस महिला को दिए गए गेहूं में से कुछ दाने लेकर लाल वस्त्र में लपेटकर लक्ष्मी माता की प्रतिमा के सामने रखें और फिर पूजन करें। फिर देखिए लक्ष्मी मां आप पर कितनी प्रसन्न होती हैं।

कर्ज से मिलेगी मुक्ति
महंगे कर्ज से परेशान हो चुके हैं इस दीपावली कुछ ऐसा कीजिए कि कर्ज जल्द चुकता हो जाए। दीपावली के दिन पांच गोमती चक्रों को अपने पूजाघर में स्थापित करें और लक्ष्मी माता के साथ इनकी भी पूजा करें। ये पूजा करने के बाद आप पर चल रहे लोन जल्द खत्म हो जाएंगे और आपकी जिंदगी में समृद्धि का वास होगा।

ऐसे लौट आएगा धन
दीपावली पर कर्ज लेने वाला ही नहीं देने वाला भी परेशानी से मुक्त हो जाएगा। अगर आपने किसी को कर्ज दिया है और वो व्यक्ति लौटा नही रहा तो इस पूजा से आपका दिया हुआ कर्ज भी जल्द वापस मिल जाएगा। रात में किसी चौराहे पर एक छोटा-सा गड्ढा खोदें। फिर जिस व्यक्ति से धन वापस पाना है उसका नाम लेते हुए उसमें एक गोमती चक्र दबा दें। कुछ ही समय में वह व्यक्ति आपका धन वापस लौटा देगा। यदि उस गड्ढे पर एक नींबू का रस निचोड़ दें, तो ज्यादा बेहतर होगा।

कमलगट्टा की माला
लक्ष्मी की पूजा के समय कमलगट्टा बड़ा की चमत्कारी माना जाता है। माता लक्ष्मी को कमलगट्टा बहुत प्रिय है क्योंकि यह कमल के फूल से निकलता है। आप ऐसा करें कि लक्ष्मी पूजा से पहले कमलगट्टे की माला बना लें। कुछ कमलगट्टे के फूलों को लक्ष्मी जी के आसन पर बिछा दें। जब लक्ष्मी पूजन करें तो कमलगट्टे के माला पहन कर पूजन करें। कमल गट्टा कमल के पौधे में से निकलते हैं व काले रंग के होते हैं। यह बाजार में आसानी से मिल जाते हैं।

पीली पताका लहराएं
दीपावली के दिन पीला त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मन्दिर में ऊँचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएँ कि वह लहराता हुआ रहे, तो आपका भाग्य शीघ्र ही चमक उठेगा। झंडा लगातार वहाँ लगा रहना चाहिए। यह अनिवार्य शर्त है।

लक्ष्मी जी की ऐसे करें पूजा
सोने या चांदी की लक्ष्मी प्रतिमा का पूजन कर के धन स्थान पर रखें। माता से सफेद कपड़े में चावल और चांदी का सिक्का लेकर धन स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी प्रस्रन्न होगी और आपके घर में धन की बरक्कत होगी। भोजपत्र पर लाल चंदन से श्रीं: लिख कर उसकी पूजा करें। सुगंधित सफेद फूल महालक्ष्मी जी को चढ़ाएं। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी को शुद्ध गाय के घी का दीपक लगाएं फिर देखिए धन ही धन बरसेगा आपके घर आंगन में।

लाल चंदन करेगा कमाल
चंदन भी देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिय है। यूं तो आप पूजा के समय चंदन जरूर इस्तेमाल करेंगे लेकिन चंदन का एक और उपयोग करके देखिए। रात को पूजन से पहले लाल चंदन और केसर घिसकर उससे रंगा हुआ सफेद कपड़ा अपनी तिजोरी या धनस्थान पर बिछा दीजिए। ऐसे घर में धन की कमी नहीं होगी और धन की बरक्कत बनी रहेगी।
इन उपायों से करें दरिद्रता दूर
प्रत्येक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा धन कमाने का हरसंभव प्रयास करता है। इन प्रयासों में कुछ व्यक्ति सफ हो जाते हैं और कुछ सफल नहीं हो पाते। जो सफल नहीं हो पाते वे और प्रयास करते हैं। हम आपको यहां कुछ ?से सरल उपाय बता रहें जिनकों करने से फल अवश्य प्राप्त होगा।
1. प्रत्येक गुरूवार को तुलसी के पौधे में दूध अर्पित करने से आर्थिक संपन्नता में वृद्धि होती है।
2. शुक्लपक्ष की पंचमी को घर में श्रीसूक्त की ऋचाओं के साथ आहुति देने से भी दरिद्रता दूर होती है।
3. भोजन करने से पहले गाय, कुत्ते या कौवे के लिए एक रोटी निकाल दें। ?सा करने से आपको कभी भी आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पडेगा।
4. महीने के पहले बुधवार को रात में कच्चाी हल्दी की गांठ बांधकर भगवान कृष्ण को अर्पित करें। अगले दिन उसे पीले धागे में बांधकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।
5. गूलर की जड को कपडे में लपेटकर, चांदी के कवच में डाल के गले में पहनने से भी आर्थिक संपन्नता आती है।
6. अपनी तिजारी में 9 लक्ष्मीकारक कौडिय़ां और एक तांबे का सिक्का रखने से आपकी तिजोरी में धन हमेशा भरा रहेगा।
7. नियमित रूप से केले के पेड़ में जल अर्पित करने और घी का दीपक जलाने से दरिद्रता दूर होती है।
8. शनिवार को अपने पलंग के नीचे एक बर्तन में सरसों का तेल रखें। अगले दिन उस तेल में उड़द की दाल के गुलगुले बनाकर कुत्तों और गरीबों को खिलाने से गरीबी दूर होती है और लक्ष्मी का आगमन होता है। ये उपाय श्रद्धापूवक करने पर आपको कुछ ही समय में इसके अच्छे परिणाम मिलने लग जाएंगे।

गृहस्थों के लिए पूजन मुहूर्त
26 अक्टूबर 2011 को दीपावली है। इस दिन 05.42 मिनट पर सूर्यास्त होगा। इसके बाद 2 घंटे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। गृहस्थ चाहते हैं कि जो धन आए वह घर में ठहरे इसलिए प्रदोष काल में स्थिर लग्न में पूजा करना इनके लिए उत्तम रहता है। इस वर्ष प्रदोष काल और स्थिर लग्न 6 बजकर 46 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक है। अगर इस समय तक पूजा नहीं कर पाते हैं तो गृहस्थ लोग शुभ चौघडिय़ा में 7 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 58 मिनट तक दीपावली पूजन कर सकते हैं।


अपनों को दें खास गिफ्ट

आज दिवाली का त्योहार है। बाजार, दुकानें, मॉल आदि सभी सजे हैं और लोग दिवाली की खरीददारी कर रहे हैं। लोग अपने घर की साज-सज्जा के लिए सामान के साथ-साथ दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए तोहफे भी खरीद रहे हैं। दिवाली पर हर साल आपके सामने यही समस्या पेश आती है कि इस बार अपने अपनों को क्या खास तोहफा दिया जाए। आइए जानें, आपके सामने क्या हैं विकल्प।

सूखे मेवे बन रहे हैं लोगों की पहली पसंद
वैसे तो कोई भी त्योहार बिना मिठाइयों के अधूरा ही माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में मावा में मिलावट की खबरों के कारण मिठाई कारोबार में काफी मंदी आ गई है। अब लोग मिठाइयों की बजाए सूखे मेवों को तोहफे के रूप में देने पर अधिक जोर दे रहे हैं।

घर को रोशन करते दीये
न केवल आपके अपनों के घर बल्कि उनके जीवन को रोशन करने की कामना के साथ आप खूबसूरत कैंडिल आदि भी गिफ्ट कर सकते हैं। बाजार में रंग-बिरंगे दीये और कैंडिल सिंगल से लेकर बारह तक के पीस में खूबसूरत पैकिंग के साथ मौजूद हैं। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, शंख और सीपियों से सजे दिए बाजार की रौनक में चार चांद लगा रहे हैं। इसके अलावा हार्ट शेप, डॉल शेप और भी खूबसूरत आकृतियों में ग्लास, ग्लिटर और खुशबूदार दीये और कैंडिल्स की भरमार है।

गिफ्ट्स पैक की बढ़ रही है मांग
आजकल लगभग हर त्योहार, उत्सव और मौकों के लिए गिफ्ट पैक्स की डिमांड काफी बढ़ रही है। चॉकलेट, फल, मिठाई, नमकीन का पैकेट्स के साथ फूल और सिल्वर प्लेटेड सिक्कों का गिफ्ट पैक दिवाली का खास आइटम है। पटाखों का पैकेट, कई तरह के कॉम्बो इलेक्ट्रॉनिक आइटम, खूबसूरत शो पीस और मूर्तियों के गिफ्ट पैक भी बाजार में उपलब्ध हैं। कुकीज, कुरकुरे, बिस्किट, नमकीन और ड्राई फ्रूटस के कई साइज में उपलब्ध गिफ्ट पैक 150 से 500 रुपये तक मिल जाते हैं। मोमबत्ती होल्डर, डिजाइनर आईने आदि तोहफे में दिए जा सकते हैं। दिवाली के मौके पर गिफ्ट गैलरीज में लक्ष्मी-गणेश और बुद्घ के शोपीस की वेरायटी की भरमार है। कॉरपोरेट मग, एनिमल डिजाइन वाले मग भी काफी अच्छे लगते हैं। बांस, टेराकोटा और नारियल की लकड़ी जैसे पंचतत्वों से निर्मित पर्यावरण के अनुकूल शोपीस भी तोहफे का बेहतरीन विकल्प हैं। इसके अलावा हैंडमेड पैड, डायरी, ग्रिटिंग्स, सॉफ्ट टॉयज आदि भी गिफ्ट किए जा सकते हैं।

अपनों को दें कुछ सेहतमंद उपहार
इस दिवाली अपने दोस्तों को कुछ सेहतमंद उपहार भी दे सकते है। हर्बल साबुन, खुशबूदार और हर्बल लोशन, मसाज के लिए तेल और उबटन आदि के गिफ्ट पैक्स दिवाली पर दोस्तों को दिए जा सकते हैं। इसके अलावा आप अपनों की सुबह सेहतमंद बनाने के लिए हर्बल चाय भी गिफ्ट कर सकते हैं। अलग-अलग स्वाद की हर्बल
चाय को भी आप दिवाली गिफ्ट के रूप में भेंट कर सकते हैं।

अपने हाथों से सजाकर दें थाली प्रेम वाली
आप अपने प्रियजनों को इस दिवाली पर अपने हाथों से थाली सजाकर दे सकते हैं। स्टील, चांदी, वुडन, कांसे या मार्बल की थालियों को अपने खुद घर पर ही डेकोरेट करके उनमें रखकर गिफ्ट करें। आप थाली को जरूरी पूजन सामग्री जैसे रोली, मोली, चावल, कपूर, धूप, अगरबत्ती आदि से सजाकर भी गिफ्ट कर सकते हैं। थाली को सजाने के लिए आप हैंडमेड पेपर या खूबसूरत कपड़े से कवर करके उस पर छोटे शोपीस, कलश, स्वरोस्की, फूलों और लेस आदि से सजा सकते हैं।

पैकिंग भी हो कुछ खास
जब त्योहार इतना खास है तो इस खास त्योहार पर दिए जाने वाले गिफ्ट्स की पैकिंग भी खास ही होनी चाहिए। चमकीले कागज के साथ आजकल बाजार में मैटेलिक, हैंडमेड, और बंधेज डिजाइन के खूबसूरत पैकिंग पेपर मौजूद है। साथ ही हार्ट, फ्लावर, स्टार, राउंड, स्केवयर आदि शेप्स में खू़बसूरत एंटीक बॉक्स की भी अच्छी वैरायटी बाजार में उपलब्ध है। इसके अलावा आप पाउच में अपना तोहफा पैक करके दे सकती हैं। रंग-बिरंगे पोटलीनुमा ये पाउच आपके तोहफे की शोभा को दोगुनी कर देंगे। अगर आपके पास कम समय है तो आप इंटरनेट के जरिए भी तोहफे आर्डर कर सकते हैं।

कुछ अलग हटके उपहार
अगर आप कुछ हटके गिफ्ट करना चाहते हैं तो अपने संगीतप्रेमी मित्रों को आप उनके पसंद के संगीत का क्लेक्शन गिफ्ट कर सकते हैं। अगर आपके प्रियजन प्रकृतिप्रेमी हैं तो आप चंपा, लैंवेंडर या इसी तरह के खुशबूदार फूलों के पौधे या हर्बल पौधे भी दिवाली के तोहफे के तौर पर दे सकते हैं।


रंगोली से सजाएं घर

रंगोली का अर्थ रंगों के जरिए भावों को अभिव्यक्त करना है। जाहिर है, बिना रचनात्मकता के इसे बना पाना आसान नहीं है। दिवाली के दौरान लगभग हर राज्यों में रंगोली से घर सजाने का रिवाज है। विवाह, स्त्री-पुरूष, बच्चों, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी विशेष रूप से इन कलाकृतियों के विषय होते हैं।

आयताकार और त्रिकोण प्रकृति के प्रति प्रेम और तादात्मय दर्शाते हैं। आध्यात्मिक चित्र के मूल में आयात अवश्य होता है। घेरा सूर्य और चंद्रमा को प्रकट करता है। त्रिकोण पर्वत और पेड़ को दर्शाते हैं। कमल का फूल, इसकी पत्तियां, आम, मंगल कलश, मछलियां, तोते, हंस, मोर, मानव आकृतियां और बेलबूटे लगभग संपूर्ण भारत की रंगोलियों में पाए जाते हैं।

पूजा स्थल
पूजा-स्थल की वेदी में दो त्रिभुज, षट्कोण की आकृति बनाते हुए दोहरी रेखाओं से बना मंडल लक्ष्मी पीठ कहलाता है। हर कोण को कमल की पंखुडिय़ों के समान आपस में रेखांकित कर जोड़ दिया जाता है। बीच में स्वस्तिकया पग चिह्न् बनाए जाते हैं, जिसे लक्ष्मी पीठ के नाम से जाना जाता है। देवी लक्ष्मी यश और समृद्धि का प्रतीक है और ये मान्यता है कि दीपावली के दिन इन पग चिह्नें से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।

गेरू से पोतें
लक्ष्मी पगों की रचना गेरू से पोत कर उस पर सफेद चूने से की जाती है। इस दिन रसोईघर की दीवारों पर लक्ष्मी नारायण बनाए जाते हैं। इस चित्र में लक्ष्मी नारायण चित्रित कर तीन देवियां बनाकर साथ में अनाज की बालियां दर्शाई जाती हैं।

फूलों से सजाएं रंगोली
आजकल रंगोली पानी पर भी बनाया जा रहा है। भरे हुए पानी पर फूलों की पंखुडिय़ों और दियों की सहायता से भी रंगोली बनाई जाती है। पानी की सतह पर रंगों को रोकने के लिए चारकोल की जगह डिस्टेंपर या पिघले हुए मोम का भी प्रयोग किया जाता है।

कुछ रंगोली पानी के भीतर भी बनाई जाती हैं। इसके लिए एक कम गहरे बर्तन में पानी भरा जाता है फिर एक तश्तरी या ट्रे पर अच्छी तरह से तेल लगाकर रंगोली बनाई जाती है। बाद में इसपर हल्का सा तेल स्प्रे कर पानी के बर्तन की तली में रख दिया जाता है।

पूजा की थाली से करें लक्ष्मी-गणेश को प्रसन्न

दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश जी के पूजन का बड़ा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना से मां लक्ष्मी व भगवान गणेश प्रसन्न होकर आपके घर में सुख सौभाग्य और धन संपदा की बरसात करते है। पूजा के महत्व को देखते हुए हम पूजा की सामग्री का पूर्ण ध्यान रखना होता है। पूजा की थाली पूजा की सार्थकता में बहुत बड़ा स्थान रखती है। पूजा की थाली में पूजा से संबधित सभी सामग्रियों को समावेश होता है। आप चाहे तो अपने घर पर ही बहुत खूबसूरत पूजा थाली को आसानी से बना सकते है। आइये हम आपको क्रियटिव व आसान पूजा-थाली बनाने के तरीके बनाते है।
वेलवेट पूजा-थाली
एक प्लेन स्टील थाली लीजिए, किसी भी रंग के वेलवेट कपड़े से इसे कवर करें, अपनी सभी आवश्यक पूजा सामग्री को इसमें रखें। गोल्डन कलर से एक दिये को सजाएं और उसे थाली में रखें। आपके पास एक सराहनीय स्टाइलश पूजा थाली तैयार है।

लेस से सुसज्जित पूजा थाली
एक प्लेन स्टील थाली को अलग-अलग रंगीन पेपर चिपकाकर पूरी तरह से कवर करे। उसके बाद थाली के किनारों पर झालर वाली गोल्डन लेस लगाएं फिर छोटे-छोटे कांच से सजावट करें। थाली में लक्ष्मी जी-गणेश जी की प्रतिमा रखना न भूलें।

मिरर मोसिक पूजा-थाली
एक सिरमिक प्लेट या तिंपल स्टील थाली लें। विभिन्न आकार के छोटे-छोटे कांच के टुकड़ों से थाली में दीये व स्वास्तिक डिजाइन बनाकर चिपकाएं। प्रत्येक कांच में 1 एमएम की दूरी अवश्य रखें। करीब 5-6 घंटे के लिए सूखने दें। प्लासटर ऑफ पेरिस का पेस्ट बनाकर सभी खाली जगहों को भरें। आपके पास एक बहुत ही खूबसूरत मिरर मोसिक पूजा-थाली तैयार है।

पानी से भरी आर्कषक थाली
किसी भी प्लेन थाली के बॉर्डर को कलर, लेस व गोटे से कलरफुल डिजाइन बनाकर सजाएं। थाली में थोड़ा पानी भरे (ध्यान रहें कि पानी ओवर फ्लो नहीं होना चाहिए)। अब इसमें कुछ गुलाब की पत्तियां डालें थाली के बीच में एक दीया रखकर जलाएं। दो छोटी कटोरी में चावल व रोली रख कर थाली में रखें। आपकी पूजा-थाली तैयार है। इन आसान तरीकों को अपनाकर आप भी एक आर्कषक थाली के साथ मॉं लक्ष्मी जी व गणेश जी को प्रसन्न कर सकते हैं।

अजब दुनिया, गजब लोग

पुरुषों से ज्यादा महिलाएं कामयाब

क्या आपको पता है कि पुरुषों से अधिक महिलाएं आजकल कामयाब हो रही हैं। एक नए शोध में पता चला है कि लडकियां सॉफ्ट हार्टेड भले ही हों लेकिन वे अपने इरादों की भी पक्की होती हैं। एक बार अगर कुछ करने की ठान लें तो उनके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है।

एक महिला अपनी संवेदनाओं के जरिए न केवल सर्वश्रेष्ठ कृति का निर्माण करती है बल्कि उन्हीं संवेदनाओं, भावनाओं, अहसासों और फिर के जरिए ही वह हर क्षेत्र में कामयाब हो सकती है। अगर आप पुरुषों के कार्यक्षेत्र में पदार्पण कर रही हैं तो जरूरी नहीं कि उन्हीं के नक्शे-कदम पर चलें, वैसा ही आचरण करें। आप अपने व्यक्तित्व के अनुरूप व्यवहार कर अपने गुणों का इस्तेमाल कर भी बेहतर कार्य कर सकती हैं। आज समाज में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आ गया है, अब वे पढ़-लिखकर अपनी पहचान बनाने को आतुर हैं। शिक्षक और डॉक्टर जैसे सुरक्षित समझे जाने वाले पदों के अलावा वे व्यापार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। जिन पारंपरिक व्यापार-व्यवसायों में अब तक पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था, उनमें भी उनका आना प्रारंभ हो गया है। आमतौर पर चूंकि व्यापार-व्यवसाय को पुरुषों का कार्य-क्षेत्र माना गया है, अत: समझा जाता है कि इस क्षेत्र में सफल होने के लिए आपमें पुरुष-सुलभ गुण होना जरूरी हैं। लेकिन अब मार्केंटिंग के जानकारों ने सिद्ध कर दिया है कि महिलाओं के प्रकृति-प्रदत्त गुण बिजनेस में सफलता दिलाने में भी कारगर होते हैं। अत: यदि आप भी कोई बिजनेस शुरू करने जा रही हैं, तो अपने स्त्री-सुलभ गुणों को दबाए नहीं, बल्कि उन्हें सफलता की सीढ़ी बनाएं।

नहीं रहें लापरवाह
अपनों की परवाह करने का गुण महिलाओं में ईश्वर प्रदत्त है। तो बस, आप अपने शेयर होल्डर्स, साझेदारों और ग्राहकों की भी इसी भांति परवाह करें। इनके प्रति लापरवाह रहकर कोई बिजनेस सफल नहीं हो सकता।

धैर्यवान महिलाएं
महिलाएं धैर्यवान होती हैं, तभी वे मां बनने के पहले नौ माह का लंबा समय आसानी से गुजार देती हैं। इसी तरह व्यापार में भी आप धैर्य से काम लें, अपने संगठन को भली-भांति समझें। यह कदापि न सोचें कि धैर्य से काम लेंगे तो काम की रफ्तार कम हो जाएगी या बिक्री कम हो जाएगी। धैर्यपूर्वक सोच-समझकर लिया गया निर्णय आपके बिजनेस को फायदा ही पहुंचाएगा।

करती हैं कॉम्प्रोमाइज
टकराव और समस्याएं सुलझाने के मामले में महिलाओं में गजब का माद्दा होता है। घर-परिवार में अक्सर पति व बेटे के बीच टकराव में महिलाएं ही सुलह कराती हैं। यह गुण अपना बिजनेस चलाने में बहुत काम आता है। कोई भी दफ्तर चलाते वक्त वैचारिक अथवा अहमके टकराव से दो-चार होना ही पडता है। महिला होने के नाते आप ऐसे टकराव से बेहतर तरीके से निपट सकती हैं।

नेटवकिंग व्यवसाय जगत में नेटवर्किंग का बड़ा महत्व है। अब जरा गौर करें, आप अपने पारिवारिक संबंधों को लेकर भी गंभीर होती हैं, सामाजिक संबंधों में दिलचस्पी भी लेती हैं और इन्हें लंबे समय तक कायम भी रखती हैं। इसी भांति अपने एम्पलाई, शेयर होल्डर और कस्टमर से संबंध बनाएं और उन्हें कायम रखें। उल्लास घर में कोई भी उत्सव हो, धार्मिक अनुष्ठान हो या छोटी-सी बर्थडे पार्टी ही क्यों न हो, सबके लिए महिलाएं हमेशा उल्लासित रहती हैं और पूरे जोशो-खरोश के साथ उसे सफल बनाने में जुट जाती हैं। अपनी कंपनी के ब्रांड को लेकर इसी भांति उल्लासित रहना कामयाब बिजनेस वूमन बनने की आवश्यक शर्त है।



पीजिए ओस की बूंदे


देश के एक युवा छात्र ने ओस की बूंदों को सहेजने और उसे शुद्ध करने की तकनीक इजाद की है।

तकनीक को 'लीफÓ नाम दिया गया है। जो प्रतिदिन 20 लीटर पीने योग्य पानी का उत्पादन कर सकता है। इस तकनीक को एक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। एमआईटी पुणे के छात्र अनुराग शारदा ने देखा कि उसकी मोटर साइकिल के ऊपर ओस की बूंदे पड़ी हैं। उसके मन में ख्याल आया कि क्यों न इस प्राकृतिक देन का सदुपयोग किया जा सकता है। यहीं से प्रेरणा लेकर इंजीनियरिंग के छात्र अनुराग ने कृत्रिम पत्ते के आकार का यूनिट तैयार किया है। यह डिजाइन 18 फीट लंबा है। इस पत्ते के ऊपर एक सौर पैनल लगा है, जो सूरज की किरणों से बिजली बनाकर पैनल को ठंडा करता है ताकि ओस की बूंदें वाष्प बनकर उड़ न जाएं। रात को इस पत्ते पर गिरी ओस की बूंदें पैनल से नीचे उतरेंगी।

कंठ में रखा बालू
पैनल के कंठ में बालू रखा गया है जहां वह फिल्टर होगा और आखिर में पैनल के नीचे बर्तन में साफ फिल्टर पानी जमा हो जाएगा। यह यूनिट एक दिन में 20 लीटर पीने का पानी तैयार कर सकता है। लेकिन यह केवल आद्र्रता वाले प्रदेशों में उपयोग में लाई जा सकती है।

सूखे और गर्म प्रदेश पर असर नहीं
सूखे और गर्म प्रदेशों में ओस नहीं पड़ती, इसलिए वहां यह तकनीक काम नहीं करेगी। अनुराग को इस कार्य के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 'टाइम्स टू केयर सस्टेनेबल डिजाइन अवॉर्डÓ प्रदान किया गया है। स्विट्जरलैंड की कंपनी विक्टोरिनोक्स स्विस आर्मी की तरफ से आयोजित इस डिजाइन प्रतियोगिता में वि भर के शीर्ष डिजाइन स्कूलों की तरफ से अपने-अपने डिजाइन प्रस्तुत किए गए थे। विक्टोरिनोक्स के आर्मी चाकू (15-20) एक ही चाकू में होते हैं) दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। अनुराग ने कहा, 'मेरे लिए पानी की उपलब्धता एक प्रमुख समस्या है। मैं एक टिकाऊ डिजाइन का निर्माण करना चाहता था। उसने पानी रहित टॉयलट की भी कल्पना की है। वह कहते हैं कि प्रत्येक घरों में 30 प्रतिशत पानी टॉयलट में बहाया जाता है। एक बार फ्लश करने पर 13 लीटर पानी बहता है।




बाहरवालियों को सबक सिखाएंगी पत्नियां
चीन में अब पत्नियां अपने पतियों की प्रेमिकाओं के दिमाग ठिकाने लगाने की तैयारी मे है। चीन में पुरुषों का दूसरी महिलाओं से संबंध रखना अब एक आम सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इससे पत्नियों में काफी नाराजगी है। पतियों की बेवफाई से त्रस्त पत्नियों ने एक समूह बना लिया है। नाराज पत्नियों का यह समूह जहां बेवफा पतियों के दूसरी औरतों के साथ संबंधों की समस्या से निपटेगा। लिउ झिक्जियान नाम की महिला ने इस समूह की स्थापना की है। यह समूह परेशान पत्नियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है जिसका मकसद उनकी मदद करने तथा उनके परिवार बचाने का है।

अभी दस शादियां और करूंगा

व्यक्तियों में कई तरह की सनक होती है। एक व्यक्ति को शादी करने की सनक है। इस व्यक्ति ने पहले से ही 90 शादियां कर रखी है। अब इस व्यक्ति की सनक है कि यह 100 शादियां करेगा। बिदा शहर निवासी 87 वर्षीय बेलो मसाब का कहना है कि उसने ये शादियां अल्लाह के निर्देश पर की हैं। साथ ही उसने यह भी कहा कि वह 10 शादियां और करना चाहता है। गौरतलब है कि नाईजीरिया में बहु विवाह की इजाजत है। मसाब की इन 90 पत्यिों से 200 बच्चे थे लेकिन उनमें से 55 बच्चों की मौत हो गई।

लेजर से पता चलेगा डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ की ताजगी

अब लेजर उपकरण पता लगा सकेगा कि डिब्बा बंद ब्रेड, जूस एवं अन्य खाद्य पदार्थो को ताजा बनाए रखने के लिए गैस है या नहीं। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा लेजर उपकरण विकसित किया है, जो यह पता लगा सकेगा कि डिब्बा बंद ब्रेड, जूस एवं अन्य खाद्य पदार्थो को ताजा बनाए रखने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली गैस पर्याप्त मात्रा में डिब्बों में है या नहीं। इसी गैस के कारण खाद्य पदार्थ कई दिनों तक ताजा बने रहते हैं।
बाजार में बिक रहे प्रत्येक डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने के लिए एक विशेष तरह की गैस का इस्तेमाल किया जाता है, लेकि न डिब्बे में सही मात्रा में गैस भरी गई है या नहीं इस बात का पता लगाने के लिए कोई बढिय़ा पद्धति नहीं थी।

समस्या हो जाएगी दूर
अब यह समस्या दूर होती दिख रही है क्योंकि शोधकर्ताओं ने जिस लेजर यंत्र को विकसित करने का दावा किया है, उसके माध्यम से खाद्य पदार्थो के ताजेपन की जांच की जा सकेगी। स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञानी मार्ता लिवेंडर ने बताया, नए उपकरण से हम डिब्बा को खोले बिना या फिर उसकी सील तोड़े बिना यह पता लगा सकेंगे कि उसमें सही मात्रा में गैस भरी गई है या नहीं। इससे उत्पाद की बंद पैकेजिंग में ही गैस का माप लिया जा सकेगा और समय-समय पर गैस की मात्रा का माप लिया जा सकेगा।
रोक सकते हैं फेंकने से
उन्होंने बताया कि इस यंत्र के जरिये लोगों को बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ फेंकने से भी रोका जा सकेगा क्योंकि वो डिब्बे में बंद खाद्य पदार्थ की जांच करने में सक्षम होंगे। इस नये लेजर यंत्र का उपयोग एयरटाइट पैकेजिंग में सुधार लाने के लिए भी किया जा सकेगा। गैस प्रोक्स कंपनी में मुख्य तकनीकी अधिकारी के तौर पर कार्यरत मार्ता ने यह तकनीक अपने शोध में विकसित की है। यह कम्पनी इस लेजर उपकरण का विपणन करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यंत्र सर्दियों के बाद तक बाजार में आ जाएगा।

कामकाजी महिलाओं में तनाव ज्यादा

बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाएं बड़े पैमाने पर तनाव की शिकार हो रही हैं इनमें कामकाजी महिलाओं की तादाद कहीं ज्यादा है। एक अध्ययन के मुताबिक, घरेलू महिलाओं की तुलना में कामकाजी महिलाएं तनाव का दोगुना शिकार होती हैं। यह अध्ययन एक मनोचिकित्सक ने किया है। जयारोग्य चिकित्सालय, ग्वालियर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. कमलेश उदैनिया ने महिलाओं में तनाव की स्थिति जानने के लिए 200 महिलाओं को चुना।

घरेलू तनाव अधिक
इनमें 100 घरेलू थीं, जबकि 100 कामकाजी। अध्ययन में पाया गया कि इन कामकाजी महिलाओं में से 50 तनाव की शिकार हैं। इनमें से 25 गम्भीर रूप से तनावग्रस्त हैं, जबकि 12-15 महिलाओं में तनाव का स्तर मध्यम है और 25 में तनाव की शुरुआत हुई है। वहीं, घरेलू महिलाओं में तनाव तुलनात्मक रूप से कम है। 100 में सिर्फ 25 महिलाएं ही तनाव की शिकार पाई गईं। इनमें से तीन-चार महिलाओं में ही तनाव का स्तर गम्भीर पाया गया। पांच-सात महिलाओं में तनाव मध्यम स्तर तक और 10-15 फीसदी महिलाओं में तनाव का स्तर कम पाया गया। डॉ. उदैनिया के मुताबिक, तनाव की मूल वजह असुरक्षा की भावना है। घरेलू महिलाओं को जहां केवल घर के वातावरण से तनाव होता है, वहीं कामकाजी महिलाओं में तनाव घरेलू एवं बाहरी दोनों कारणों से होता है। यही वजह है कि वह अधिक तनाव में रहती हैं। उन्होंने कहा, कामकाजी पुरुष अक्सर विरोध दर्ज कराकर अपनी भावना व्यक्त कर देते हैं, लेकिन महिलाएं आम तौर पर ऐसा नहीं कर पातीं। ऐसे में उनके बीच अंतर्द्वद्व चलता रहता है और वह तनाव की शिकार हो जाती हैं।

कब समाप्त होगी अमावस्या की काली रात ?




हम भारतीय सचमुच बड़े ही धार्मिक हैं। बारह महीनों में हजारों पर्व मनाते हैं। करें भी क्या ? तैंतीस करोड़ तो हमारे देवी-देवता ही हैं। ऐसा पृथ्वी के और किसी हिस्से में नहीं होता। धर्म निरपेक्ष हमारे देश में असंख्य धर्म के कोटि-कोट देवताओं की पूजा, हम वर्ष भर कई-कई रूपों करते रहते हैं। देश में हो रहे संप्रदायवाद के तांडव और अलगाववाद की गर्जनाओं के बाद तो अपने-अपने धर्म के सभी संवेदनशील पहलू हमें छूने लगे हैं, सिवाय मानव धर्म के। धर्म जानने की, करने चीज थी। हमने अपने-अपने धर्म को कट्टर रूप में केवल मानना शुरू कर दिया। हमारा राजनैतिक धर्म भी धराशायी हो गया है। तभी तो हम कटोरा लेकर कभी हांगकांग कभी अमेरिका और कभी थाईलैंड पहुंच जाते हैं। देश-विदेश से पैसा बटोरकर भ्रष्टाचार करते हैं। अपना और स्विस बैंकों का पेट भरते हैं। कहीं भी हमें अपमान का, स्वाभिमान का बोध नहीं होता और जो इसका बोध कराए उस पर सभा में चप्पल फेंकते हैं।

सत्ता और धर्म का लोभ

अपने-अपने धर्म के देवी-देवताओं को छाती से चिपकाकर हम धार्मिक पहचान तो बनाते रहे परंतु धर्म के नाम पर अपने भाइयों का गला काटने से भी नहीं चूके। यदि हम वास्तव में धार्मिक हो गए हैं तो सत्ता और धर्म का लोभ हमसे क्यों नहीं छूट रहा है? धार्मिक व्यक्तियों को सत्ता, अर्थ, लोभ, मोह से क्या मतलब? परंतु हमने धर्म को नहीं, धर्म के मुखौटे को अंगीकार कर लिया है। तभी तो कुर्सी दिखी नहीं कि सब धर्म गायब। रुपया दिखा नहीं कि सब धर्म गायब। दिखना कुछ चाहते हैं, करना कुछ। धर्म हमें नरम, लचीला, विनयशील, करुणामय बनाता है। लेकिन हो रहा है बिलकुल उल्टा कि हम कट्टरपंथी बनते जा रहे हैं। मजाल कि कोई हमारे धर्म का एक कंकर भी इधर से उठाकर उधर रखा दे। मजाल कि कोई हमारे धार्मिक दायरे की सीमा रेखा में अपने पांव तो रख दे और यदि किसी इस या उस ने कुछ ऐसा-वैसा कर दिया तो कत्ले आम मच जाएगा पूरे देश में। हमने कभी नहीं सोचा कि देश तरक्की की मंजिल पर पहुंचे। देश धन-धान्य से परिपूर्ण हो। कोई भूखा न सोए और जब जागे तो काम मिले। शिक्षा-चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो, ऐसा कुछ नहीं सोचते। सोचते हैं तो केवल यह कि हमारे धार्मिक झंडों का रंग और गहरा कैसे हो? हमारे धार्मिक नारों में तीव्रता कैसे आए? हमारे धार्मिक संवाद धारदार कैसे बनें? और इसी तरह की विसंगतियों के साथ आ जाते हैं त्यौहार। दारिद्रय से भरपूर, शंकित मन से परंपराओं का निर्वाह करने के लिए मजबूर हो जाते हैं हम। सुरसा सी बढ़ती महंगाई ने तो वैसे ही त्यौहारों का रंग फीका कर दिया है परंतु देश के दहशत भरे माहौल ने तो त्यौहारों को बिलकुल औपचारिक ही बना डाला है। संप्रदायवाद,अलगाववाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार के प्रचण्ड दावानल के समक्ष नन्हा दीप जलाकर दीपावली मनाना औपचारिकता नहीं है तो क्या?

पूजा में भक्ति का अभाव
वैसे भी आज की पूजाओं में धर्म नहीं होता, भक्ति नहीं होती, होता है हुल्लड़ और मजाक और मजा। एक जमाने में गले में गमछा लपेट कर विनम्रता से चंदा लिया जाता था, अब थोड़ी उन्नति हुई है, छुरी-छुरे और गाली-गलौच का खेल खेला जाता है। रास्ते में गाड़ी रोककर चंदा वसूला जाता है। थाने और पुलिस वाले कहते हैं, डरने की जरूरत नहीं हम किसलिए हैं? जबरदस्ती चंदा वसूलने की कोशिश करने पर हमें इत्तिला दीजिए, हम आपकी रक्षा करेंगे। परन्तु कौन किसलिए है और कहां है, कोई नहीं जानता। दीवाली का सबसे बड़ा मजा है शोर-शराबे और धूम-धड़ाके का। पटाखों और बमों की आवाज से मुहल्ले के कुत्ते कांपते हैं, पेड़ पर बैठै पक्षी भाग जाते हैं। रोगियों के कान फटने लगते हैं। राहगीर घायल होकर अस्पताल भागते हैं। उत्पात बढ़ता ही जा रहा है। आदमी के संयम का वाल्व ही बेकार हो गया है। विदेशी हमें देखकर हंसते हैं और हम अपने आप को देखकर हंसते हैं। सिर्फ एक प्रश्न अपने से बार-बार पूछते हैं कि शास्त्रों में कहा गया है कि आहार निद्रा भय मैथुनच:। सामान्य येतत पशुर्भिर्नराशाम्। धर्मोहि तेषर्मेधि को विशेषे। ना: पशुभि: समाना। आहार, निद्रा, भय और मैथुन पशुओं में भी है और मनुष्य में भी। तब मनुष्य और पशु में क्या अंतर रह जाता है? अंतर रहता है सिर्फ धर्म का, विवेकशील धर्म का, ज्ञानशील धर्म का।

आशा और विकास की किरणें

दीपावली आती है अमावस्या की काली, अंधकार की चादर ओढ़े। दहशत और मायूसी के आजम में बाहर द्वार पर दीप जला नहीं सकते। भीतर अन्तस् का दीप जलाना तो और कठिन है। उसके लिए साधक चाहिए, साधना चाहिए, उपासना चाहिए। देश के विध्वंसक माहौल में सब साधनाएं समाप्त हो गई हैं। सिर्फ बची रह गई है तो शव-साधना। रोज-रोज के बम विस्फोटों और बारूदी सुरंगों के फटने से प्राप्त लाशों की जलती चिताओं की लपटों में हम आशा और विकास की किरणें ढूंढ रहे हैं। धधकती चिताओं के धुंए में हम भाग्य और भविष्य देख रहे हैं और इस सबके बावजूद आकाश छूती चिता की लपटों के समक्ष एक नन्हा दीपक जलाकर त्यौहार मनाने को भी बाध्य हैं हम।

चारों ओर चीत्कार
आज साधकों के गोत्र बदल गए। समाज अब सहजिया संप्रदाय के हाथ में है। निर्माण की शक्ति है, ध्वंस की शक्ति भी शक्ति है, बिगाडऩे की शक्ति भी शक्ति है। चारों तरफ यह उल्लासित चीत्कार सुनाई देता है, जला दो, नष्ट कर दो, उड़ा दो। रहनुमाओं की नजरें बदल गईं। समाज नीली-पीली टोपी वालों की मुद्रा में कैद हो गया है। जिनके पास शक्ति है, पैसा है, रसूख है, धार्मिक अंध-विश्वासों के जरिए समाज को बरगलाने की ताकत है, उनकी दीवाली है, बाकी सबका दीवाला। यह हमारे देश में ही संभव है कि कुछ मु_ी भर लोग अरबों रुपए, रोटी, कपड़े, मकान और रोजगार के लिए तरसते करोड़ों लोगों की उदास आंखों के सामने बम, फटाखे, फुलझड़ी में उड़ा देते हैं।

चारों ओर अंधकार

चारों ओर अंधकार फैला हुआ है। गांव-गांव अंधकार फैला हुआ है। फसल भरे खेतों में राजनैतिक दलों के कौआ हांकने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही है। बाढ़ आती रहती है और जब वह नहीं आती तो आता है सूखा। थोड़े से पैसे के लोभ में दलालों के निर्देश के मुताबिक गांव का आदमी शहर में राजनैतिक जुलूस में भाड़े का टट्टू बन जाता है। पटरियों पर बैठ कर ट्रेनें रोक दी जाती हैं। हड़तालें और देश बंद करके हम खुश होते हैं। पंचायतें राजनीतिबाजों का अड्डा बन गई हैं। हत्यारे, लुटेरे घूम रहे हैं सड़कों पर। बहु-बेटियों का सड़कों पर घूमना बंद हो गया है। लुटेरे चैन झपट रहे हैं। पत्नी के साथ सोए पति को काट-काट कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाता है।

कहां गया आनंद और उल्लास
दीपावली एक समय गांव का उत्सव होता था, फसल का उत्सव था यह, प्राचुर्य का उत्सव था। गांव को दीपकों से सजाया जाता था और दीवाली के पहले दिन दारिद्रय को भगाया जाता था ताकि अगले दिन प्रचुरता की देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके। लेकिन अब गांव में आनंद-उल्लास कहा है? वे सब तो भाग कर शहर चले गए हैं और शहर का धर्म ही है कि वह हर चीज की आत्मा को मार डालता है, उसे कुरूप बना देता है। आजाद देश की सरकार गरीब आदमी को इतना भी मिट्टी का तेल नहीं दे पाई कि वह चिमनी ही जला सके। प्रकाश और प्राचुर्य का उत्सव तो अब शहरों में चला गया है। गरीब के काई लगे खपरैल के घर में तो चिमनी ही टिमटिमाती रहती है। दीपावली अब दीपकों से नहीं सजती। इस यंत्र-तंत्र युग में भी एक सेंटीमीटर वाली मोमबत्ती ही प्रकाश स्तंभ बनी हुई है। पैसे वालों के मकानों की दीवारें बिजली की झालरों से झिलमिलाती हैं, तरह-तरह की आकृति वाले दीपदानों में प्रकाश की बाढ़ उमड़ती रहती हैं। उनके घरों में दीपवली तो क्या, पूरे साल अंधकार का प्रवेश वर्जित रहता है। ये धनी लोग दीपावली की रात आकाश को आतिशबाजियों से आलोकित करने की क्षमता रखते हैं, जबकि गरीब के अंधेरे में डूबे हुए घरों में चूल्हा तक नहीं जलता।

भूखा पेट, काम की जुगाड़

दिनभर की मेहनत के बाद घर लौटा आदमी सख्त जमीन पर भूखे पेट उकड़ूं पड़ा अंधकार में पूरी रात काट देता है। उसके आश्रय स्थल को रोशनी से जग-मग कर दे इसका कोई साधन उसके पास नहीं है। भूखा पेट लिए सुबह काम की जुगाड़ की कोशिश करता यह आदमी रोज ही अमावस्या की रातें भुगतता है। उसके जीवन में कब आएगी पूर्णिमा या कहें जग-मग दीपों वाली रात? कह नहीं सकते। कौन देख रहा है उसकी ओर? कौन सोच रहा है उसकी? उसके जीवन से सदा-सदा के लिए कब खत्म होगी अमावस्या की काली रात?
मूर्खों के देश में धूर्तों का राज
बहुत युगों से धर्म तो बहुत हुआ। असंख्य मंदिर हैं। तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का नाम, जाप और कीर्तन चल रहा है पर तब भी मनुष्य की यह दशा क्यों? लगभग पशु जैसी उसकी स्थिति है। सारे देश में छछूंदर कीर्तन हो रहा है। मूर्खों के देश में धूर्तों का राज है। इसका मतलब यही है कि धर्म का लोप हो गया है। चारों और प्रकाश की जगमगाहट है, बैंड बज रहे हैं, बम फूट रहे हैं, आकाश आतिशबाजी से चकाचौंध है, भाषण हो रहे हैं, योजनाएं बन रही हैं। और इधर धर्महीन मनुष्य के जिम्मे सिर्फ दो कर्म रह गए हैं- आहार (यदि जुटे), निद्रा (यदि आए)।

- अरविंद शीले

सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

तिहाड़ में मनेगी दिग्गजों की दिवाली



नई दिल्ली। अदालत ने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में आरोपी द्रमुक सांसद कनिमोझी सहित पांच लोगों की जमानत याचिकाओं पर फैसला तीन नवंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। सीबीआई ने इन पांचों की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया लेकिन शाहिद बलवा और आरके चंदोलिया की जमानत पर आपत्ति जताई। अदालत ने इनकी जमानत पर सुनवाई 31 अक्तूबर को तय करते हुए सभी का फैसला तीन नवंबर को सुनाने को कहा है।

जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा
सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश ओपी सैनी ने शनिवार को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा सहित सभी 17 अभियुक्तों के खिलाफ अभियोग तय किए थे। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने कनिमोझी, कलंइयर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार, कुसेगांव फ्रूट्स एंड वेजीटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, फिल्म निर्माता करीम मोरानी की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा।

बलवा और चंदोलिया की याचिका का विरोध
सीबीआई की ओर से पेश विशेष अभियोजन अधिकारी यूयू ललित ने कहा कि यदि अदालत कनिमोझी सहित पांच अभियुक्तों को जमानत दे देती है तो जांच एजेंसी को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी। अगर अदालत अपने विवेकाधिकार के तहत इसे जमानत के लिए उपयुक्त मामला मानती है तो जमानत दे सकती है। बहरहाल, अदालत स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा और ए राजा के पूर्व निजी सहायक चंदोलिया की जमानत याचिका पर दलीलों की सुनवाई करेगी क्योंकि सीबीआई ने दोनों की अर्जियों का विरोध किया है।
ललित ने कहा, मैं अदालत से अनुरोध करता हूं कि पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विचार किया जाए। मैं नहीं जानता कि हर एक आरोपी ने कितना वक्त हिरासत में बिताया है, लेकिन उन्होंने कम से कम पांच से छह महीने गुजारे हैं। यह अदालत उनकी जमानत अर्जियों पर विचार कर सकती है, लेकिन अदालत को कुछ शर्तें लगाते हुए यह सुनिश्चित कराना चाहिए कि सुनवाई के दौरान वे मौजूद रहें।

सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान

वहीं, ललित ने शाहिद बलवा और चंदोलिया को जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इन अभियुक्तों के खिलाफ लगे आरोप में सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है अतः इनके मामले और अन्य में फर्क है। ललित ने कहा कि कनिमोझी पर लगी कुछ धाराओं को छोड़ दें तो उन पर लगे विशिष्ट आरोपों में उन्हें अधिकतम पांच साल की सजा हो सकती है। इसलिए सीबीआई ने उनकी जमानत का विरोध नहीं किया।

महिलाओं को जमानत देने के विशेष प्रावधान
इससे पूर्व कनिमोझी के अधिवक्ता अल्ताफ अहमद ने तर्क रखा कि उच्चतम न्यायालय के 22 जून के आदेश के मुताबिक कनिमोझी और शरद कुमार के मामले में उन्हें आरोप तय होने के बाद विशेष अदालत के सामने जमानत अर्जी दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई थी। अहमद ने यह भी दलील दी कि कनिमोझी को उनके महिला होने के चलते जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि कानून में महिला आरोपियों को जमानत देने के विशेष प्रावधान है। उन्होंने कहा कि विशेष अदालत उनकी जमानत के लिए जो चाहे वह शर्त लगा सकती है।

येदियुरप्पा को नहीं मिली हाईकोर्ट से राहत
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की दिवाली भी जेल में ही मनेगी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई 28 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी। 68 वर्षीय येदियुरप्पा ने अपनेखिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े पांच मामलों में से दो में जमानत की अर्जी लगाई थी। येदियुरप्पा ने 15 अक्तूबर को विशेष लोकायुक्त अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

सोने की चमक में नहीं टिकी महंगाई




नई दिल्ली।
उपभोक्ताओं की जेब पर लंबे समय से कुंडली मारकर बैठी महंगाई डायन की धनतेरस पर एक नहीं चली। सोमवार को खरीददारी के मुहूर्त पर देशभर में उपभोक्ताओं ने सोने और चांदी की जमकर खरीददारी की। न सिर्फ महानगरों, बल्कि कस्बों में भी धनतेरस के बहाने लोगों ने दिल खोलकर सोना खरीदा।

उपभोक्ताओं में सोना खरीदने का भारी जुनून
पिछले साल के मुकाबले तकरीबन 27 फीसदी ऊंची कीमतों के बावजूद देशभर में देर शाम तक सोने का थोक कारोबार 50 टन को पार कर गया था जिसकी कीमत 135 अरब रुपये से ज्यादा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मानें तो ब्रांडेड सोने के सिक्कों में उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि से सोने की खपत नया रिकॉर्ड रचेगी। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के मुताबिक ऊंचे भावों के बावजूद थोक और खुदरा कारोबार में सोने की मांग 10 से 15 फीसदी तक बढ़ी है। महानगरों, छोटे-बड़े शहरों के अलावा कस्बों में भी सोना खरीदने का जुनून उपभोक्ताओं के सिर चढ़कर बोल रहा है।

धनतेरस पर सोने की बिक्री 40 फीसदी बढ़ी
दिल्ली बुलियन एंड ज्वैलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल बताते हैं कि पिछले सप्ताह के मुकाबले धनतेरस पर सोने की बिक्री 40 फीसदी तक बढ़ी है। पिछले तीन साल से भावों में 30 फीसदी तक की सालाना बढ़ोतरी का असर यह है कि 27100 रुपये प्रति दस ग्राम के रिकॉर्ड भावों पर भी सोने की मांग अच्छी है। थोक कारोबार में देश भर से मिली खबरों के मुताबिक देर शाम तक 50 टन से ज्यादा सोने की बिक्री हो चुकी है। वायदा और स्पॉट मार्केट में भी लगभग 1000 करोड़ के सौदे हुए।

नेशनल स्पॉट एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक अंजनी सिन्हा का कहना है कि महंगाई के बावजूद उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी है। खासकर सोने की खरीददारी में आई उछाल के पीछे इस पर अच्छा रिटर्न मिलना है। एक साल में सोने की कीमतों में तकरीबन 6200 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। पिछले पांच साल से लगातार सोने पर किए गए निवेश से उपभोक्ताओं को 20 से 30 फीसदी तक का लाभ मिल रहा है। इसके चलते न सिर्फ मध्यम वर्ग बल्कि आम आदमी की सोने के आभूषण, सिक्के या अन्य जरूरी सामान की खरीद बढ़ी है।

धनतेरस पर यूं चमका सोना
-50 टन पार हुआ देर शाम तक देशभर में सोने का कारोबार
-135 अरब रुपये आंकी गई है 50 टन सोने की कीमत
-40 फीसदी बिक्री बढ़ी धनतेरस पर पिछले हफ्ते के मुकाबले
-6200 रुपये प्रति दस ग्राम कीमत बढ़ी है पिछले एक साल में
-20 से 30 फीसदी तक का लाभ मिल रहा है निवेशकों को

महंगाई के बावजूद उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी है। सोने की खरीददारी में आई उछाल के पीछे इस पर अच्छा रिटर्न मिलना है।
-अंजनी सिन्हा, प्रबंध निदेशक, नेशनल स्पॉट एक्सचेंज


रिकॉर्ड ऊंचाईयों को छू रही कीमतों ने सोने के छोटे सिक्कों की चमक बढ़ा दी है। त्योहार पर सोना खरीदने की आम आदमी की ललक को पूरा करने के उद्देश्य से इस बार बाजार में आधा ग्राम के सिक्कों का पर्दापण हुआ है। न सिर्फ निजी क्षेत्र, बल्कि राष्ट्रीयकृत बैंक भी छोटे सिक्कों के जरिये सोने के कारोबार को गति देने के लिए मैदान में हैं। इससे उपभोक्ताओं को गणेश-लक्ष्मी, सतिया, शुभ-लाभ के अलावा रुपसे के प्रतीक चिह्न के साथ ही लक्ष्मी व कुबेर के यंत्र-मंत्र वाले भी सोने के सिक्के उपलब्ध होंगे।

कीमत 1,650-1,700 रुपये प्रति नग
व्यापारियों के मुताबिक आसमान छू रही कीमतों के बावजूद आम आदमी का सोना खरीदने का सपना साकार करने के लिए इस बार आधा ग्राम के आकर्षक सिक्के बाजार में उतारे गए हैं। इनकी कीमत 1,650 से 1,700 रुपये प्रति नग है। इसके साथ ही एक ग्राम का सिक्का भी 3,000 से 3,100 रुपये प्रति नग पर उपलब्ध है। इन सिक्कों में उपभोक्ताओं को डिजाइन के ढेरों विकल्प भी मुहैया कराए गए हैं। बैंको ने भी सोने के सिक्कों के कारोबार को भुनाने के लिए आधे ग्राम के सिक्के पेश किए हैं। हालांकि इन सिक्कों की शुद्धता को लेकर निर्माताओं की ओर से साफ-साफ दावा नहीं किया जा रहा है।

आम ‌आदमी के लिए सौगात
दिल्ली बुलियन एंड ज्वैलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल के मुताबिक इस बार दीपावली पर सर्वाधिक बिक्री व प्रतिस्पर्धा आधे ग्राम से दो ग्राम वाले सोने के सिक्कों में रहेगी। क्योंकि ऊंची कीमतों के चलते आम आदमी दो ग्राम से अधिक वजन वाले सिक्कों की खरीद नहीं कर सकता। इसी कारण बैंकों ने भी आधे ग्राम के सिक्के पेश किए हैं। छोटी कंपनियां भी बतौर गिफ्ट के लिए सोने के छोटे सिक्कों की खरीद कर रही हैं। कुछ चुनिंदा कंपनियों ने आधे, एक और दो ग्राम के सिक्कों को अपने प्रतीक चिह्न में बनाने के ऑर्डर दिए हैं।

वजन - मूल्य (रुपये प्रति नग)
आधा ग्राम - 1,650 से 1,700
एक ग्राम - 3,000 से 3,100
दो ग्राम - 5,500 से 6,000
पांच ग्राम - 13,500 से 14,000
आठ ग्राम - 20,500 से 21,000

ऊंची कीमतों के बावजूद एशिया में सोने की मांग

सिंगापुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड तेजी पर पहुंची कीमतें उतरने के साथ ही आगे तीज त्यौहार तथा शादी ब्याह का मौसम रहने से भारत समेत समूचे एशियाई क्षेत्र में सोने की मांग मजबूत रहने की संभावना है।
सोने के सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत में भी तीज त्योहार का मौसम नजदीक आने के साथ इसकी खरीदारी लगातार बढ़ने लगी है। यहां सोना सिर्फ एक कीमती धातु भर नहीं, बल्कि धर्म-संस्कृति और सामाजिक रीति-रिवाजों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ऊंची कीमतों के बावजूद अनुष्ठानों के लिए इसकी खरीदारी की जाती है।

जापान में पुराना सोना बेचने पर आकर्षक छूट
बढ़ती मुद्रास्फीति और शेयर बाजारों में तेज गिरावट से भी सोने की मांग को बल मिल रहा है, क्योंकि निवेशक इसे एक सुरक्षित निवेश मानकर इसकी जमकर खरीदारी कर रहे हैं। चीन में अक्तूबर में आने वाले लंबे अवकाश के कारण भी सोने की खरीदारी रफ्तार पकड़ रही है। जापान में पुराना सोना बेचने पर आकर्षक छूट दी जा रही है, जिससे लोग स्वर्ण आभूषणों की अदला-बदली कर रहे हैं। इससे भी सोने की मांग तेज हो रही है।

(अमर उजाला)

सीओएसओसी का सदस्य बना भारत




सीओएसओसी का सदस्य बना भारत
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के नए सदस्य के रूप में भारत को सोमवार को चुन लिया गया। भारत के अलावा 17 अन्य नए देशों को इसमें शामिल किया गया है। ईसीओएसओसी में शामिल होने वाले नए सदस्यों में भारत के अलावा बेलारुस, ब्राजील, बर्किना फासो, क्यूबा, डोमीनिकन रिपब्लिक, अल सल्वाडोर, इथोपिया, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, आयरलैंड, जापा, लीबिया, नाइजीरिया, स्पेन और तुर्की शामिल हैं। परिषद में शामिल किए गए ये नए सदस्य एक जनवरी 2012 से तीन साल का अपना कार्यकाल शुरू करेंगे। ईसीओएसओसी संयुक्त राष्ट्र में अर्थिक और सामिजिक कार्यों से जुड़ी संस्था के रूप में काम करती है। इससे जुड़े सदस्य नीतिगत मामलों और उसकी सिफारिशों पर चर्चा करते हैं। उल्लेखनीय है कि ईसीओएसओसी परिषद में 54 देश शामिल हैं।

रविवार, 23 अक्तूबर 2011

लक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र

दीपावल‍ी के अद्‍भुत तांत्रिक प्रयोग




दीपावली पर्व पर आपके लिए खास तांत्रिक प्रयोग प्रस्तुत है। इस प्रयोग से किसी तरह की हानि नहीं होती। यह सभी साधारणजन के लिए असरकारी और आसान तांत्रिक प्रयोग है। इस सरल तांत्रिक प्रयोग को पूर्ण शुद्धता से करने पर लाभ अवश्य मिलता है। लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नीचे दिए गए मंत्र की पहले 108 बार माला करें।

महालक्ष्मी मंत्र -
'ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:'


आसान वि‍धि :

* चाँदी की एक छोटी-सी डिबिया लें। अगर चाँदी की उपलब्ध नहीं हो तो किसी और शुद्ध धातु की डिबिया भी आप ले सकते हैं।

* इस डिबिया को आप ऊपर तक नागकेशर तथा शहद से भरकर बंद कर दें।

* दीपावली की रात्रि को इसका पूजन-अर्चन करके इसे अपने लॉकर या दुकान के गल्ले में रख दीजिए।

* रखने के बाद इसे खोलने की जरूरत नहीं है और ना ही और कुछ उपाय करने की।

* फिर अगली दीपावली तक इसे लॉकर या गल्ले में रखी रहने दें। दिनों दिन बढ़ती लक्ष्मी का चमत्कार आप स्वयं देखेंगे।


लक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र :

ऊँ पहिनी पक्षनेत्री पक्षमना लक्ष्मी दाहिनी वाच्छा
भूत-प्रेत सर्वशत्रु हारिणी दर्जन मोहिनी रिद्धि सिद्धि कुरु-कुरु-स्वाहा।


इस मंत्र को पढ़कर गुगल गोरोचन छाल-छबीला कपूर काचरी, चंदन चुरा मिलाकर एवं अष्टमी या शनिवार को लाल फल के साथ।

नोट : मंत्र 108 बार पढ़ना है।

विशेष : इस प्रकार आप लाभ ले सकते हैं एवं अपने जीवन के लक्ष्य को पूर्ण कर सकते हैं। जितने प्रयोग दिए गए हैं। पूर्ण शुद्धिकरण से एवं विद्वानों से विचार करके करें। कार्य सिर्फ नि:स्वार्थ भाव से करें एवं परोपकार के लिए अवश्य पूर्ण होंगे।

श्री गणेश के सिद्ध मंत्र

लम्बोदर के प्रमुख चतुर्वर्ण हैं। सर्वत्र पूज्य सिंदूर वर्ण के हैं। इनका स्वरूप व फल सभी प्रकार के शुभ व मंगल भक्तों को प्रदान करने वाला है। नीलवर्ण उच्छिष्ट गणपति का रूप तांत्रिक क्रिया से संबंधित है। शांति और पुष्टि के लिए श्वेत वर्ण गणपति की आराधना करना चाहिए। शत्रु के नाश व विघ्नों को रोकने के लिए हरिद्रा गणपति की आराधना की जाती है। गणपतिजी का बीज मंत्र 'गं' है। इनसे युक्त मंत्र- 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। षडाक्षर मंत्र का जप आर्थिक प्रगति व समृद्धि प्रदायक है।

ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌
किसी के द्वारा नेष्ट के लिए की गई क्रिया को नष्ट करने के लिए, विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए उच्छिष्ट गणपति की साधना करना चाहिए। इनका जप करते समय मुँह में गुड़, लौंग, इलायची, पताशा, ताम्बुल, सुपारी होना चाहिए। यह साधना अक्षय भंडार प्रदान करने वाली है। इसमें पवित्रता-अपवित्रता का विशेष बंधन नहीं है।

उच्छिष्ट गणपति का मंत्र

ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा

आलस्य, निराशा, कलह, विघ्न दूर करने के लिए विघ्नराज रूप की आराधना का यह मंत्र जपें -

गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:

विघ्न को दूर करके धन व आत्मबल की प्राप्ति के लिए हेरम्ब गणपति का मंत्र जपें -

'ॐ गं नमः'

रोजगार की प्राप्ति व आर्थिक वृद्धि के लिए लक्ष्मी विनायक मंत्र का जप करें-

ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

विवाह में आने वाले दोषों को दूर करने वालों को त्रैलोक्य मोहन गणेश मंत्र का जप करने से शीघ्र विवाह व अनुकूल जीवनसाथी की प्राप्ति होती है-

ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।


इन मंत्रों के अतिरिक्त गणपति अथर्वशीर्ष, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणेशकवच, संतान गणपति स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र, गणेश चालीसा का पाठ करने से गणेशजी की कृपा प्राप्त होती है।

पैसा कमाना है तो लक्ष्मी को मनाएं

आर्थिक संपन्नता के लिए किसी भी माह के प्रथम शुक्ल पक्ष को यह प्रयोग आरंभ करें और नियमित 3 शुक्रवार को यह उपाय करें।

प्रत्येक दिन नित्य क्रम से स्नानोंपरांत अपने घर के पूजा स्थान में घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी को मिश्री और खीर का भोग लगाएं।

मंत्र : ॐ श्रीं श्रीये नम:

इस मंत्र का मात्र 108 बार जप करें। तत्पश्चात 7 वर्ष की आयु से कम की कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं। भोजन में खीर और मिश्री जरूर खिलाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी अवश्य प्रसन्न होगीं। आर्थिक परेशानी खत्म होगी।

हर शुक्रवार लाल या सफेद परिधान पहनें। हाथ में चांदी की अंगूठी या छल्ला धारण कर उसी समय चावल और शकर का किसी योग्य ब्राह्मण को दान करें।

एस्ट्रो टिप्स : जब भी कोई रत्न पूजन कर के धारण करें उसी समय उस रत्न से संबंधित सामग्री का दान करना चाहिए।
इससे रत्न संबंधी ग्रह की शुभता बढ़ती है।

धन के लिए लक्ष्मीजी की कृपा कैसे पाएं

गुरु-पुष्य नक्षत्र में करें धन प्राप्ति के जतन


गुरु-पुष्य नक्षत्र के दिन अपने घर के पूजा स्थान में श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी के श्रीविग्रह के सामने चौमुखा घी का दीपक जलाकर पंचोपचार पूजन करने के उपरांत 108 पाठ करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी शीघ्र ही प्रसन्न होती हैं।

गुरु-पुष्य के शुभ संयोग वाले दिन अपने पूजा स्थान में पूर्व दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। स्वच्छ पात्र में 7 लौंग फूल सहित, 7 कपूर की डली रख दें। मां गायत्री का ध्यान करते हुए कपूर और लौंग को जला लें।

साथ ही गायत्री मंत्र का जाप करते रहें। फिर तिलक लगा लें। सफलता जरूर मिलेगी।

व्यापार चल निकलेगा :

अगर आपको कारोबार में नुकसान हो रहा हो तो रवि-पुष्प योग के दिन श्रद्धापूर्वक अमलतास के वृक्ष का पूजन करें।

घी का दीपक जलाएं और संकल्प करें कि कल मैं इस वृक्ष की जड़ ले आऊंगा। जड़ लाकर उसे सोने के ताबीज में गढ़वा लें।

आपकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा और आपका व्यापार चल निकलेगा।

धन कमाने के सरल तंत्र-मंत्र


दीपावली पर करें धन के लिए तांत्रिक प्रयोग



धन कमाने के लिए खास तांत्रिक प्रयोग प्रस्तुत है। इस प्रयोग को दीपावली के रात में किया जाता है। इस प्रयोग से किसी तरह की हानि नहीं होती। यह सभी साधारणजन के लिए असरकारी और आसान तांत्रिक प्रयोग है।

इस सरल तांत्रिक प्रयोग को पूर्ण पवित्रता से करने पर लाभ अवश्य मिलता है। लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धन की वर्षा होती है। रूका पैसा तो मिलता ही है आय के नए-नए साधन भी जुटने लगते हैं। सबसे पहले पूरी शुद्धता से नीचे दिए गए मंत्र की पहले 108 बार माला करें।

महालक्ष्मी मंत्र -
'ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:'

सरल वि‍धि :
* चांदी की एक छोटी-सी डिबिया लें। अगर चांदी की उपलब्ध नहीं हो तो किसी और शुद्ध धातु की डिबिया भी आप ले सकते हैं।


* इस डिबिया को आप ऊपर तक नागकेशर तथा शहद से भरकर बंद कर दें।

* दीपावली की रात्रि को इसका पूजन-अर्चन करके इसे अपने लॉकर या दुकान के गल्ले में रख दीजिए।

* रखने के बाद इसे खोलने की जरूरत नहीं है और ना ही और कुछ उपाय करने की।

* फिर अगली दीपावली तक इसे लॉकर या गल्ले में रखी रहने दें। दिनों दिन बढ़ती लक्ष्मी का चमत्कार आप स्वयं देखेंगे।

शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

मध्यप्रदेश विकास के आइने में


मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने का अभिनव पहल


लाखों लोगों के जीवन में होगा बेहतर उजाला
- दिनेश मालवीय

लाइटिंग ए बिलियन लाइव्स
पूरी दुनिया में 1 अरब 40 करोड़ से अधिक लोगों को बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इनमे से लगभग 25 प्रतिशत लोग भारत में हैं। टीईआरआई वैश्विक सतत् विकास के लिये अपनी प्रतिबद्वता और दृष्टि के अनुरूप काम कर रहा है। इसका उद्देश्य बेहतर कल के लिये नवाचारी समाधान उपलब्ध कराना है। इस उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में एक अरब ग्रामीण लोगों के जीवन में उजाला लाने के लिये लाइटिंग ए बिलियन लाइव्स (एलएबीएल) के नाम से अभिनव पहल की गयी है। इसके अंतर्गत केरोसिन और पेराफिन लालटेनों की जगह सौर ऊर्जा से जलने वाली विद्युत लालटेने उपलब्ध कराकर गांव में स्वच्छ और प्रदूषण राहित रोशनी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जहां बच्चों को पढऩे के लिये बेहतर रोशनी मिलेगी, वही गृहणियों को केरोसिन का धुंआ रहित वातावरण भी मिलेगा और वे अपने गृह कार्य ज्यादा सुविधाजनक रूप से कर सकेंगी। इसके अलावा, व्यक्तिगत और ग्राम स्तर पर आजीविका के अवसर भी निर्मित होंगे। एलएबीएल शुल्क लेकर अथवा किराये के आधार पर सेवाएं प्रदान करता है। जिन जगहों पर ये सेवाएं प्रदान करता है, वहां सेंट्रलाइज्ड सौलर चार्जिंग स्टेशन बनाये जाते हैं जिनके माध्यम से लालटेनों को चार्ज किया जाता है तथा लालटेनों को किराये के आधार पर रोजाना घरों तथा उद्यमों को उपलब्ध कराया जाता है। एक सौलर चार्जिंग स्टेशन में 50 सौलर लालटेन होती हैं और 5 सौलर पैनल्स् तथा जंक्शन बाक्स होते हैं।

इस अभियान से स्थानीय रूप से उद्यमिता का विकास होता है और गांव में रहने वाले लोगों को सौर ऊर्जा से जलने वाली लालटेने मिल जाती हैं। वर्तमान में गांवों में ईधन के रूप में केरोसिन ही मुख्यत: उपयोग में लाया जाता है। न केवल घरों में बल्कि दुकानों, स्थानीय बाजारों, ट्यूशन और कोचिंग सेटरों तथा कुटीर उद्योगों जैसे छोटे उद्यमों को यह सुविधा प्राप्त होती है। इस अभियान के अंतर्गत सरकार, निजी क्षेत्र और दानदाता एजेंसियों द्वारा इस दिशा में किये जा रहे कार्यों के साथ समन्वय रखा जाता है जिससे शुद्ध ऊर्जा का उपयोग कर सामाजिक-आर्थिक विकास को तीव्र किया जा सकें ।

अभी तक प्रगति यह अभियान अभी तक भारत के 16 राज्यों के 640 गांवों में क्रियान्वित किया गया है । 25 जून 2011 तक इन गांवों में लगभग 35 हजार लालटेनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इससे इन 640 गांवों के एक लाख 75 हजार लोगों के जीवन में बेहतर रोशनी आई है। एलएबीएल का क्रियान्वयन विभिन्न राज्यों के लगभग 50 मैदानी सहभागियों तथा 25 टेक्नालॉजी पार्टनर्स की मदद से संभव हो सका है। उनके सहयोग से ही सौलर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये गये हैं। इस अभियान के तहत अभी तक चार्जिंग स्टेशन उद्यमियों के रूप में 650 से अधिक लोगों को हरित रोजगार (ग्रीन जॉब्स) मिला है। इस अभियान से आदिवासी आवासीय स्कूलों में पढऩे वाले लगभग 1500 बच्चों को सौर ऊर्जा के माध्यम से प्रदूषण रहित और बेहतर रोशनी मिली है।

मध्यप्रदेश में लाइटिंग ए बिलियन लाइव्स


इस अभियान को मध्यप्रदेश के 10 जिलों में स्थित 108 गांवों में लागू किया गया है, जिससे 27000 लोगों को प्रदूषण रहित सौर ऊर्जा से निर्मित रोशनी मिली है। इनमें से 50 से अधिक आदिवासी गांव हैं और 22 गांव संरक्षित क्षेत्रों में स्थित हैं। मध्यप्रदेश में इस अभियान से अभी तक 5 हजार 500 घर रोशन हुए हैं। साथ ही 100 से अधिक हरित रोजगर निर्मित हुये हैं और 70 ग्राम स्तरीय समितियों तथा संस्थाओं को मज़बूत किया गया है। यह कार्य विभिन्न संगठनों की सहभागिता से संपन्न हो सका है, जिनमें मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम, डीपीआईपी, राज्य शिक्षा केन्द्र जैसी सरकारी एजेंसियां कार्बेट फाउण्डेशन, डब्लूडब्लूएफ इंडिया, टुवर्ड्स एक्शन एंड लार्निंग तथा दीनदयाल शोध संस्थान जैसे गैर-शासकीय संगठन शामिल हैं।

एलएबीएल का उद्देश्य मध्यप्रदेश के 20 सूत्री कार्यक्रम से जुड़कर हाशिये पर रहने वाले समुदायों पर अपने प्रयासों को केन्द्रित करना है। इससे स्थायी प्राकृति के सामाजिक उद्यम संचालित हो सकेंगे और आजीविका सृजन, शिक्षा और नवकरणीय ऊर्जा जैसे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करके हरित अर्थव्यवस्था (ग्रीन इकोनॉमी) का विकास किया जा सकेगा। इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर टीईआरआई ने मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम, डीपीआईपी, मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र तथा मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम से हाथ मिलाया है।


गैर शासकीय संस्थाओं को भूमि आवंटन नीति मंजूर

(मंत्रि-परिषद के निर्णय)
कॉलोनी संबंधी नियमों में आंशिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में गैर शासकीय संस्थाओं को विभिन्न प्रयोजनों के लिये भूमि आवंटित करने की सुस्पष्ट नीति को मंजूरी दी गई।

भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, उपक्रमों, मंडी बोर्ड, मंडी समितियों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल, प्राधिकरण, भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालय, शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं एवं अन्य शासकीय संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों आदि को भूमि उपलब्ध करवाने के मामलों में प्रक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

औद्योगिक विकास केन्द्रों की स्थापना के लिये जिला कलेक्टर अपने स्तर से ही उद्योग विभाग को भूमि हस्तांतरित करेंगे।

औद्योगिक विकास केन्द्रों के बाहर भूमि आवंटन के मामलों में औद्योगिक संस्था द्वारा उद्योग विभाग में भूमि आवंटन के लिये आवेदन किया जायेगा। उद्योग विभाग आवेदन का परीक्षण और न्यूनतम आवश्यक भूमि का आकलन कर भूमि हस्तांतरण करने के लिये जिला कलेक्टर को मांग प्रस्तुत करेगा। कलेक्टर प्रकरण तैयार कर आयुक्त के माध्यम से प्रस्ताव राजस्व विभाग को भेजेंगे। राजस्व विभाग द्वारा उद्योग विभाग को भूमि हस्तांतरण की अनुमति दी जायेगी। भूमि हस्तांतरण के बाद उद्योग विभाग अपनी प्रचलित नीति के अनुसार आवेदक संस्था को भूमि लीज पर आवंटित करेगा।

ऊर्जा उत्पादन के लिये पावर प्लांट की स्थापना के लिये भी शासकीय भूमि का आवंटन किया जायेगा। ऐसे प्रकरणों में उद्यमी द्वारा ऊर्जा विभाग में भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किया जायेगा। ऊर्जा विभाग भूमि हस्तांतरण एवं आवंटन की शेष प्रक्रिया उपरोक्तानुसार करेगा।

राज्य के आर्थिक विकास के लिये निजी निवेश को आकर्षित करने के लिये लागू अन्य नीतियों यथा- उद्यानिकी नीति, पर्यटन नीति, गैर पारम्परिक ऊर्जा नीति आदि के अंतर्गत निजी परियोजनाओं के लिये भूमि आवंटन हेतु उद्यमी संबंधित विभाग को आवेदन करेगा। आवेदन का परीक्षण एवं भूमि हस्तांतरण तथा आवंटन की प्रक्रिया यथास्थिति उपरोक्तानुसार की जायेगी।

हस्तांतरित भूमि के प्रीमियम एवं भू-भाटक का निर्धारण तथा शर्त भंग एवं उद्योग स्थापित नहीं होने की दशा में भूमि की वापसी अथवा अन्य उपयोग के संबंध में संबंधित विभाग की नीति में विद्यमान प्रावधान अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।

कॉलोनाइजरों के लिये तीन विकल्प

मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया कि कॉलोनाइजरों को वर्तमान विधिक प्रावधानों के तहत अपनी आवासीय परियोजना में ईडब्ल्यूएस तथा एलआईजी के भूखंड/आवास उपलब्ध करवाने की अनिवार्यता से छूट नहीं दी जाये। अपरिहार्य स्थितियों में इसके बदले शहरों के नियोजित विकास के लिये प्रचलित विधिक प्रावधानों में संशोधन कर कॉलोनाइजरों को तीन विकल्प देने का निर्णय लिया गया। पहला विकल्प यह है कि वह निर्माणाधीन आवासीय परियोजना (कॉलोनी/अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग) में ही निर्धारित आकार एवं संख्या के ईडब्ल्यूएस तथा एलआईजी के भूखंड/आवास उपलब्ध करवायें। दूसरा विकल्प यह है कि उस नियोजन क्षेत्र, जिसमें कि प्रश्नाधीन आवासीय योजना प्रस्तावित है, में ईडब्ल्यूएस तथा एलआईजी के निर्धारित आकार एवं संख्या के आवास/भूखंड उपलब्ध करवायें। तीसरा विकल्प यह है कि जहाँ मास्टर प्लान के तहत छोटे प्लाट उपलब्ध करवाने की अनुमति नहीं, जहाँ छोटे प्लाट उपलब्ध नहीं है और जहाँ कालोनियाँ बहुत छोटी हैं, ऐसी स्थिति में कॉलोनाइजरों को ईडब्ल्यूएस तथा एलआईजी भवन/भूखंड की एवज में निर्धारित दर पर शैल्टर टैक्स का भुगतान करने का विकल्प दिया जा सकेगा।

कॉलोनाइजर को किन परिस्थिति में तथा किसी रीति के अनुसार उपरोक्त विकल्प उपलब्ध होंगे, इसका विस्तृत प्रावधान नियमों में किया जायेगा। मंत्रि-मंडलीय उप-समिति यह निश्चित करेगी कि किस आवासीय परियोजना में कितने ईडब्ल्यूएस/एलआईजी भूखंड/आवास रहेंगे, कहाँ कैसा विकल्प दिया जायेगा और इससे संबंधित अन्य निर्णय भी इस मंत्रि-मंडलीय उप-समिति द्वारा लिये जायेंगे।

इस मंत्रि-मंडलीय उप-समिति में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर, आवास मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा, पर्यावरण मंत्री श्री जयंत मलैया और वित्त मंत्री श्री राघवजी शामिल हैं।

अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने खांडसारी उद्योग के अनुरोध पर विचार कर यह निर्णय लिया कि चूँकि वर्ष 2007 तक कर निर्धारण प्रकरणों में कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है, अत: 1 अक्टूबर 2003 से 31 मार्च 2006 तक खांडसारी पर देय वाणिज्यिक कर यथावत रहेगा। लेकिन इस अवधि में जिन व्यवसाइयों द्वारा कर जमा नहीं किया गया, उन पर ब्याज एवं शास्ति अधिरोपित नहीं की जायेगी। यह सुविधा 31 दिसंबर 2011 तक देय कर की राशि जमा करने पर ही उपलब्ध रहेगी।

मंत्रि-परिषद ने रीजनल वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन, इंदौर के पक्ष में एम्पलाइज स्टेट इंश्योरेंस कारपोरशन द्वारा निष्पादित किये जाने वाले दान स्वरूप दी गई भूमि के दान-पत्र पर स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन फीस से छूट देने का निर्णय लिया। इसके फलस्वरूप राज्य शासन को एक करोड़ 51 लाख 55 हजार रूपय से ज्यादा की राजस्व हानि संभावित है, लेकिन इस संस्थान की स्थापना से प्रदेश के श्रमिकों को लाभ मिलेगा।

मंत्रि-परिषद ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (सिविल) से अधीक्षण यंत्री(सिविल) के पद पर पदोन्नोति के लिये अर्हकारी सेवा में तीन वर्ष की शिथिलता देने का भी निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने मछली पालन विभाग के अधीनस्थ जिला कार्यालयों में 117 विभिन्न संवर्गों के रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासन/वित्त विभाग की सहमति प्राप्त कर पूरी करने का निर्णय लिया। विभाग में 336 पद स्वीकृत हैं। इनमें से बेकलॉग के मत्स्य निरीक्षक के 18 पद छोड़कर विभिन्न संवर्गों के सहायक मत्स्य अधिकारी, मत्स्य निरीक्षक, अनुसंधाता तथा सांख्यिकी लिपिक के 117 पद सीधी भर्ती से भरे जा सकेंगे। इससे शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा तथा मत्स्य-पालन से संबंधित योजनाओं का विकास होगा।

एमराल्ड उद्योग समूह द्वारा प्रदेश में 1085 करोड़ रुपये पूँजी निवेश के लिये एम.ओ.यू.


वाणिज्य, उद्योग और रोजगार मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में मेसर्स एमराल्ड ग्रुप ऑफ कम्पनीज, कोलकाता द्वारा प्रदेश में दो परियोजनाओं में पूँजी निवेश के लिये एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किये गये।

एमराल्ड ग्रुप के अधीन कई कम्पनियाँ हैं जिनमें प्रमुख- एमराल्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड रियल इस्टेट प्रा.लि. इंडिया, एमराल्ड कोक प्लान्ट प्रा.लि. इंडिया, एमराल्ड कोमेक्स इम्पेक्स प्रा.लि. इंडिया, एमराल्ड लॉजिस्टिक्स प्रा. लि. इंडिया, एमराल्ड ओवरसीज प्रा.लि. सिंगापुर, एमराल्ड एग्जिमफिल कार्पोरेशन, फिलीपीन्स शामिल हैं।

एमराल्ड ग्रुप ऑफ कम्पनीज का मुख्य व्यवसाय इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, रियल इस्टेट एवं सर्विस से संबंधित गतिविधियाँ संचालित करना है। इस ग्रुप के डायरेक्टर श्री जावेद सुल्तान, श्री अल्हज माजिद रफीक, सुश्री अनीसा जैनब, मो. माजिद सुल्तान हैं।

कम्पनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध संचालक श्री एम.जे. सुल्तान द्वारा ट्रायफेक के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किया गया। कम्पनी द्वारा प्रदेश में दो परियोजनाओं में निवेश किया जायेगा। इनमें एमराल्ड मिनरल्स एक्जिम प्रा.लि. में 1044 करोड़ 24 लाख रुपये का निवेश किया जायेगा। आयरन ओर पेलेटाइजेशन संयंत्र 1.2 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का होगा। दूसरा आयरन ओर क्वालिटी इन्हेंसमेंट प्लांट है जिसमें 41 करोड़ रुपये का पूँजी निवेश किया जायेगा।


मध्यप्रदेश में "अबला" अब बन रही सबला
दिनेश मालवीय

हमारे देश में सदियों से महिलाओं की कमज़ोर स्थिति के कारण उन्हें "अबला" कहा जाता रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि स्त्री सचमुच अबला है, सिर्फ उसे आगे बढ़कर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिला। उसकी क्षमता का तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता, वरना ऋषि नारी को अनंत शक्तिरूपा क्यों कहते।

सवाल सिर्फ अवसर उपलब्ध कराने का है। इसी को आधानिक भाषा में महिला सशक्तिकरण कहा जा रहा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश में बीते पाँच वर्षों में अभिनव प्रयास किये गये हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और प्रदेश की महिलाओं में अभूतपूर्व आत्मविश्वास जागा है।

लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान योजना, नि:शुल्क गणवेश और सायकल प्रदाय, बालिका शिक्षा, गांव की बेटी, प्रतिभा किरण, बालिका भ्रूण हत्या रोकने के कानून का कड़ाई से पालन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की बड़ी संख्या में भर्ती, महिला नीति का क्रियान्वयन जैसे काम तो पहले से ही चल रहे थे, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर इस वर्ष से 15 जिलों में "सबला" योजना भी शुरू की गयी है। यह योजना किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए है।

"सबला" योजना के तहत 11 से 18 वर्ष आयु की किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाया जाएगा। इस वर्ष इस योजना पर 40 करोड़ रूपए खर्च किये जायेंगे।

श्री चौहान ने महिला सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित किया है। यही वजह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट को लगातार बढ़ाया गया है। इस वर्ष इसमें 177 करोड़ 71 लाख रूपए की बढ़ोत्तरी की गयी है। फलस्वरूप इस वर्ष इस विभाग के लिए 1564 करोड़ 31 लाख 93 हजार रूपए बजट में रखे गये हैं।

बेटियों के साथ भेदभाव और उनके जन्म को अभिशाप मानने की प्रवृत्ति लंबे समय से हमारे समाज में व्याप्त रही है। कन्या जन्म को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा "लाड़ली लक्ष्मी" जैसी अभिनव योजना शुरू की गयी है। इससे निश्चित ही समाज की सोच में बदलाव की शुरूआत हुयी है। इसे न केवल राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, बल्कि अनेक राज्यों ने भी इसे अपनाया है। अभी तक छह लाख से ज्यादा कन्याओं को इसका लाभ मिल चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस योजना को इन बालिकाओं की शिक्षा से भी जोड़ा गया है।

वर्तमान सरकार ने समस्याओं की तह में जाकर उनका व्यवहारिक समाधान करने की सोच के साथ लगातार ऐसे कार्य किये हैं, जो ऊपर से देखने में छोटे भले ही लगें, लेकिन उनके परिणाम बहुत दूरगामी हैं। सायकल की बात ही लें। प्रदेश के गाँवो में ऐसी हज़ारां बालिकाएं थीं, जो आठवीं तक पढऩे के बाद सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ देती थीं कि नवमीं से पढऩे के लिए स्कूल दूसरे गांव में थे। इतनी दूर पैदल जाना कठिन और असुरक्षित भी था। इसका समाधान उन्हें नि:शुल्क सायकल उपलब्ध कराकर किया गया। फलस्वरूप आज प्रदेश के गांवों में 14 लाख से ऊपर कन्याएं अपनी सायकल पर बैठकर सुविधा और सुरक्षा से आठवीं से आगे की पढ़ाई जारी रखे हुये हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति की बालिकाओं को कक्षा सातवीं में प्रवेश पर ही यह सुविधा मिल जाती है। आठवीं तक अध्ययनरत कन्याओं को एक जोड़ के स्थान पर दो जोड़ी शाला गणवेश भी नि:शुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

शिक्षा ही व्यक्ति और समाज के विकास का मूल है। इस तथ्य को ध्यान में रखकर सरकार ने गाँव की लड़कियों तथा शहरों की गरीब परिवारों की लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये सुविधाएं प्रदान की हैं। गाँव की लड़कियां बारहवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने के अमूमन पढ़ाई छोड़ देती हैं क्यों कि गाँव में महाविद्यालय नहीं होता और उनके परिवार भी महाविद्यालय की पढ़ाई का खर्च उठाने में या तो समर्थ नहीं होते या अनिच्छुक होते हैं। इसके मद्देनजऱ सरकार ने गाँव की बेटी नाम से अभिनव योजना शुरू की। इसके अंतर्गत बारहवीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने वाली गाँव की सभी लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिये प्रतिमाह 500 की छात्रवृत्ति दी जाती है। तकनीकी व चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाली बालिकाओं को 750 रूपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जाती है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के गरीबी रेखा से के परिवारों के बालिकाओं के लिये भी प्रतिभा किरण योजना चलाई जा रही है। उन्हें भी 500 रूपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जाती है।

बेटियों का विवाह समाज के गरीब परिवारों के लिये एक बड़ा कठिनाईपूर्ण कार्य होता है। इसके लिये वे परिवार कर्ज लेते हैं। इसे देखते हुये मुख्यमंत्री श्री चौहान की पहल पर निर्धन परिवार की बेटियों के विवाह हेतु मुख्यमंत्री कन्यादान योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत अभी तक एक लाख 40 हजार से अधिक गरीब कन्याओं के विवाह सम्पन्न हो चुके हैं। विवाह के लिये पहले साढ़े सात हजार रूपये दिये जाते थे जिसे बढ़ाकर अब दस हजार रूपये कर दिया गया है।

बालिकाएं यदि कम उम्र से ही स्वस्थ और सुपोषित हो तों उनका भविष्य उज्जवल होगा। इसके लिये मध्यप्रदेश सरकार ने कन्याओं को संतुलित आहार, प्राथमिक स्वास्थ्य की देखभाल आदि की समुचित व्यवस्था की है। आंगनवाड़ी केन्द्र में दर्ज किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य की जाँच के साथ-साथ उन्हें जरूरत के मुताबिक उपचार और मुफ्त दवाएं भी दी जाती हैं।

महिलाएं समाज के कार्य में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान कर सकें इसके लिये उन्हें अवसर प्रदान करने के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में अग्रणी रहा है। स्थानीय निकायाओं और पंचायतों में महिलाओं के लिये 50 प्रतिशत पद आरक्षित सबसे पहले मध्यप्रदेश में किये गये। उत्साहवर्धक बात यह है कि इन 50 प्रतिशत पदों पर महिलाएं चुनकर आई ही हैं, साथ ही अन्य स्थानों पर भी महिलाओं ने विजय प्राप्त की है। आज बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाएं अपने पदों का दायित्व पूरी दक्षता से निभा रही है। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर मिले तो वे हर एक जिम्मेदारी को पुरूषों की तरह ही निभा सकती हैं।


आम को खास बनाने के प्रणेता है शिवराजसिंह चौहान

- अजय वर्मा

शिवराजसिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की बागडोर उस समय सम्हाली जब राजनीतिक ज्वार-भाटे ने प्रदेश के सरकार रूपी जहाज को किनारे का रूख करने को विवश कर दिया था। राजनैतिक उठा-पठक का वातावरण और प्रशासनिक अनुभवहीनता के ठप्पे की आशंकाओं के मध्य मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान फूलों का सिंहासन नहीं था। विधानसभा निर्वाचन की चुनौती भी दूर नहीं थी। यह चुनौतियाँ आज पीछे मुड़कर देखने पर ये मामूली या आसान प्रतीत होती है इतिहास गवाह है ऐसी चुनौतियों ने कई दिगगजों को धराशायी किया है।

श्री शिवराजसिंह चौहान ने न केवल प्रशासनिक आशंकाओं और राजनीतिक अटकलों को विराम दिया, वहीं प्रदेश की जनता को संवेदनशील और आत्मीय शासन-प्रशासन का अहसास भी कराया। शासन सूत्रों के संचालन की स्थापित मान्यताएँ और प्रचलित औपनिवेशिक धारणाओं को अपनी सहज सादगी और दिल की बोली "मैं हूँ ना " से नया स्वरूप देने का कार्य सफल किया है। उन्होंने पिछले पांच साल में प्रशासन के फोकस में आम आदमी को खास बनाने का गैेरमामूली कार्य बिना किसी शोर-शराबे और आत्म वचना के कर दिखाया है।

श्री शिवराजसिंह चौहान ने आम को खास बनाने के लिये पूरी सर्तकता और सहजता के साथ लोक सेवा प्रदान गांरटी विधेयक के रूप में वो करिश्मा कर दिखाया है जिसने आम आदमी को कलम के कुछ शब्दों से याचक से दाता का दर्जा दिला दिया है।

आम आदमी को मिलने वाले सेवाओं के विभागों की 26 सेवाओं की गारंटी देकर शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश प्रत्येक नागरिक को "मैं हूँ ना " का भरोसा दिया है। निश्चित समय में सेवा नहीं देने वाले सरकारी सेवक को अपने वेतन से विलंब की क्षतिपूर्ति के रूप में राशि देनी होगी। यह राशि 250 रूपये प्रतिदिन के मान से 5 हजार रूपये तक हो सकती है। विशेषता यह है कि जुर्माने की यह राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं होती बल्कि कार्य में विलंब से पीडि़त आवेदक को ही दे दी जाती । "मैं हूँ ना " के भरोसे का यह स्वप्रमाणित उदाहरण है। पहले बाबू साहेब के पास आय-प्रमाण पत्र के लिये अनुनय विनय के या फिर परिजन की मौत से जीवन पर लगे प्रश्न चिन्ह में आर्थिक सहायता की गुहार करते मृतक के परिजन ऐसे दृश्य शासकीय कार्य की दिनचर्या में आसानी से दिखाई देतेे थे। वर्षों से स्थापित यह व्यवस्था मध्यप्रदेश में खत्म हो गई है बिना किसी क्रांति और करतब के। श्री शिवराजसिंह चौहान के जमीनी हकीकतों से जुड़े होने और मानवीय गुणों को समझने की अद्भुत क्षमता ही इस उपलब्धि का एकमात्र और अंतिम कारण है। सबको लेकर चलने की कला के पारखी शिवराज ने लोक सेवाओं की निश्चित समय में पूर्ति की गारंटी से प्रदेश के प्रशासनिक संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन की ऐसी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है जिसमें सही मायने में जनता के हाथों में राजसत्ता सौंपने की करिश्माई कामयाबी श्री चौहान को मिली है।

जन को जर्नादन और तंत्र को सेवक की बात नहीं बल्कि दर्जा ही मध्यप्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बन गया है। आम को खास बनाने के लिए श्री शिवराजसिंह चौहान की कार्यशैली "मैं हूँ ना" और आम आदमी के साथ आत्मीय संबंधों पर आधारित शासन सूत्र संचालन की व्यवस्था है। बच्चों के मामा, बहनों के भाई और माताओं के बेटे ने जमीनी अनुभवों से नौकरशाहों को जनता या यूँ कहें कि आम आदमी का सेवक बना दिया है जिसे जनता के आदेशों का पालन समय-सीमा में करना होगा अन्यथा जुर्माना देना पड़ेगा।

आम आदमी को व्यवस्था में खास का दर्जा दिलाने की श्री शिवराजसिंह की कार्यशैली में अन्त्योदय मेलों के आयोजन की व्यवस्था एक और दूरगामी पहल है। समय-सीमा में कार्यों की गारंटी से एक कदम आगे की व्यवस्था अन्त्योदय मेले है। आम आदमी को सरकार की सेवाओं और योजनाओं के लाभों के लिए किसी के चक्कर नहीं काटने पड़े। सरकार की सहायता और अनुदान की पात्रता और उपयुक्तता के लिए खोजने-बीनने का काम नहीं करना पड़े इस व्यवस्था का नाम ही अन्त्योदय मेला है। इसमें शासकीय सेवक विभिन्न योजनाओं के पात्र व्यक्तियों को चिन्हित कर आगे बढ़कर लाभान्वित कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश में अभी तक लगे 15 अन्त्योदय मेलो में 9 लाख 63 हजार 155 हितग्राहियों को 462 करोड़ रूपये की अनुदान और सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। आम को खास बनाने की नीयत के साथ नजरिए में भी बदलाव श्री शिवराजसिंह चौहान ने किया है। मेलों की आयोजन व्यवस्थाओं में आम आदमी को खास व्यक्ति का स्थान मिले, आयोजकों का व्यवहार शालीन और अनुशासित हो, मेलों की आयोजन व्यवस्थाओं के लिए आयोजकों को "हिकमतअमली" या 'जुगाड़' का जतन नहीं करना पड़े, इसलिए 15 करोड़ रूपये का बजट में प्रावधान किया गया है। इस बात की बारीक पकड़ श्री शिवराजसिंह चौहान की प्रशासनिक समझदारी और जमीनी हकीकतों से वाकिक निजाम की काबिलियत दिखाती है।

व्यवस्था में खास आदमी या अमीर तो हर जगह एडजस्ट होते हैं या हो जाते हैं। सरकार की सबसे अधिक जरूरत आम आदमी या गरीब को होती है। इसी "फन्डे" पर चलते हुए श्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश के गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए संचालित किए जाने वाले कार्यक्रमों-योजनाओं को सतत स्वरूप देने और उनके लिए राशि की कमी नहीं हो इसकी पुख्ता व्यवस्था कर दी है। इस वर्ष बजट में 50 प्रतिशत राशि गरीबों के लिए आरक्षित रखने का उचित निर्णय किया है। वहीं छात्रवृत्ति, राहत आदि के रूप में दी जाने वाली राशि के निर्धारण के लिए उसे बाजार मूल्य सूचकांकों से जोड़ कर दिए जाने की व्यवस्था कर सहायता और छात्रवृत्ति को समसामयिक स्वरूप दे दिया है।

आम आदमी को खास बनाने के श्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यों की श्रंखला काफी लंबी है। एम.पी. ऑन लाइन, परख के कार्यक्रमों के द्वारा आम को खास बनाने के कार्य को गति मिली है। आम को खास बनाने में शिवराजसिंह चौहान की प्रशासनिक क्षमता भी शामिल है उत्कृष्ट प्रबंधक के रूप में उन्होंने विकास की योजनाओं के लिए धन राशि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही बेहतर वित्तीय प्रबंधन द्वारा मध्यप्रदेश की वृद्धि दर को विगत दो वर्षों में 8.67 प्रतिशत और 8.49 प्रतिशत रखने की उपलब्धि हासिल की है, इसमें विशिष्ट तथ्य यह है कि राज्य की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

श्री शिवराजसिंह का "मैं हूँ ना " का भरोसा आमजन को विकास की धारा में शामिल करने और तंत्र को भी प्रबंधन कौशल से सजग और सक्रिय कर वित्तीय चिंताओं से मुक्त रखने में सफल रहा है। यही कारण है कि श्री चौहान ने मुख्यमंत्री के रूप में समाज के कमजोर निर्धन वर्ग के लिए प्रसूति, बच्चों की पढ़ाई, बीमारी, आकस्मिक दुर्घटना, विवाह और अन्त्येष्टि जैसे सभी शुभ-अशुभ कार्यों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, भवन संन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल की निर्माण श्रमिक योजनाओं, मण्डी हम्माल एवं तुलावटी कल्याण योजना, शहरी घरेलू कामकाजी बहनों के कल्याण की योजना और हाथ ठेला तथा रिक्शा चालक कल्याण योजना का संचालन शुरू किया है। हाल ही में उन्होंने शहरों में रैनबसेरों में रहने वाले गरीबों को मात्र 5 रूपये की दर पर भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी राम-रोटी योजना में कर दी है।

आम को खास बनाने के श्री चौहान के प्रयासों का यह अंत नहीं आरंभ है। अभी और कई तीर उनकी तरकश मे हैं जिनमें भ्रष्टाचारी की सम्पत्ति को राजसात करने, आधुनिक निजी शिक्षण संस्थाओं में गरीबों के लिए स्थान का आरक्षण आदि शामिल है। गरीबों की आशाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिये -

"बड़ी-बड़ी बातें नहीं मैं हूँ ना, बस ये शब्द ही काफी हैं

बदलाव के लिए, बहुत नहीं, बस शिवराज ही काफी है"

लोकशक्ति को लोक समृद्धि में बदलने वाले शिवराज

- अवनीश सोमकुवर

जननेता का सबसे बड़ा गुण यही है कि वह लोक शक्ति में अटूट विश्वास करता है। लोक शक्ति एक अमूर्त वस्तु है। लोकतंत्र में इसका प्रदर्शनकारी स्वरूप समय-समय पर प्रकट और अभिव्यक्त होता रहता है। कभी शहर बंद हो जाते हैं, कभी यातायात रूक जाता है। इसके विपरीत विशाल देश के किसी भू-भाग पर चंद लोग मिलकर मृत नदी को जीवित कर देते हैं। बंजर भूमि पर हरियाली बिछा देते हैं। रचनात्मक और नकारात्मक दोनों स्वरूप देखने को मिलते हैं। मुख्यमंत्री का पद सम्हालने के बाद श्री शिवराजसिंह चौहान ने जो निर्णय लिये उनमें स्पष्ट रूप से यह रेखांकित होता है कि वे विकास के लिये जनशक्ति का रचनात्मक उपयोग करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में जनता की सोच, समझ, विवेक और सार्मथ्य पर अटूट विश्वास रखने वाले शिवराज सिंह को जन्म दिन की बधाइयाँ।

आज राज्य सरकार और समाज एक दूसरे के करीब आये हैं और विकास पथ पर साथ-चल रहे हैं तो यह श्री शिवराज सिंह चौहान की कार्य शैली और उनके व्यक्ति का करिश्मा है। ऐसा नहीं कि अब तक जो मुख्यमंत्री हुए हैं उन्होंने लोक शक्ति पर भरोसा नहीं किया या उनमें समझ की कमी थी। अंतर यह है कि श्री चौहान ने यह बताया है कि लोक समृद्धि के लिये लोकशक्ति का उपयोग प्रायोगिक और व्यावहारिक तौर पर कैसे किया जा सकता है। विकास योजनाओं को जन आंदोलन कैसे बनाया जा सकता है और सेवाओं तक आम लोगों की आसान पहुंच कैसे बनाई जा सकती है चाहे वह जन-संचालित हो या फिर कानून द्वारा संचालित हो। सरकारी तंत्र, नीति निर्माताओं और रणनीतिकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होते हुए भी उनकी अपनी सीमाएँ हैं। जन सहयोग और सामुदायिक भागीदारी के बिना अच्छी नीतियों का परिणाम भी शून्य होता है।

दर्शन-शास्त्र में गहरी रूचि रखने वाले श्री शिवराज सिंह को मनोविज्ञान की गहरी समझ है। आम लोगों से लगातार संवाद करते हुए वे सामाजिक समस्याओं का विश्लेषण करते रहते हैं। सामुदायिक अभिरूचियों के आधार पर ही कार्ययोजनाएं बनाने के निर्देश देते हैं। श्री चौहान इतने विनम्र हैं कि वे योजनाओं के मूल विचार का श्रेय लोगों को देने से नहीं चूकते। लोक-संवाद को वे विचारों का पालना मानते हैं। कई बार उन्होंने कहा कि विवेक और ज्ञान पर विशेषाधिकार केवल नीति निर्माताओं के पास नहीं होता। रोजाना जीवन से संघर्षशील आम लोग भी विवेक रखते हैं। यही विनम्रता उन्हें लोगों का अपना मुख्यमंत्री बनाती है और लोगों से दूरी मिटाकर उन्हें उनके नजदीक या दिलों तक ले जाती है।

सरल और विनम्र स्वभाव के कारण लोग श्री चौहान से मिलने को आतुर रहते हैं। हर उम्र और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे लोग उनसे मिलना पसंद करते हैं। बच्चे, वयस्क, विद्यार्थी, व्यापारी, कलाकार, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, धर्मशास्त्री सभी उन्हें सम्मान देते हैं। उनके व्यक्ति में दया, करूणा, शालीनता, विनम्रता जैसे मूल्यों की बहुलता है। गुस्सा सिर्फ अन्याय के विरूद्ध आता है। न्याय के लिये संघर्ष करने के लिये वे हमेशा तैयार रहते हैं। कई सार्वजनिक भाषणों में उन्होंने कहा है कि अन्याय के विरूद्ध संघर्ष में देरी अन्याय का साथ देने के समान है। गुस्सा उन्हें तब आता है जब उन्हें पता चलता है कि सरकारी तंत्र की ढिलाई के कारण गरीब परिवार के साथ न्याय नहीं हुआ। समाधान ऑन लाइन और गांव के भ्रमण के दौरान कई ऐसे अवसर आये जब उन्होंने गैर जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे निलंबित कर दिया।

राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सूक्ष्म अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि कल्याणकारी योजनाएं 'शिव दृष्टि' से ओत-प्रोत हैं। इन योजनाओं की संरचना में चार बिंदु प्रमुख रूप से रेखांकित होते हैं - गरीबों की समृद्धि के लिये प्रतिबद्धता, युवा शक्ति का विकास, वर्तमान में विश्वास और भविष्य में आस्था। गरीब परिवार की बेटियों के विवाह की संस्थागत व्यवस्था मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का ही परिणाम है। इस योजना का महत्व नव-धनाढय लोग भले ही ना समझ पायें लेकिन गरीब बिटिया के माता-पिता और परिजन अच्छी तरह समझते हैं। बेटियों के जन्म को सुखद अवसर बनाने और इससे आगे बढ़कर उत्सव मनाने तक सामाजिक बदलाव लाने की पहल के पीछे शिवराज जी की अपनी सोच है। समाज ने भी उनकी पहल में भरपूर योगदान दिया है। लाड़ली लक्ष्मी, गांव की बेटी, स्कूल जाने वाली बेटियों को साइकिलें, गणवेश, छात्रवृतियां देने, नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयासों की सर्वत्र सराहना हुई है।

मध्यप्रदेश बनाओ अभियान की शुरूआत करने के पीछे भी श्री चौहान की यही सोच थी कि मध्यप्रदेश के पुनर्निर्माण में लोकशक्ति के अवदान के रूप में सभी का योगदान और सहयोग होना चाहिये।

मध्यप्रदेश एक सांस्कृतिक-धार्मिक विविधता से समृद्ध प्रदेश है। यहाँ की युवा शक्ति में आगे बढऩे की क्षमता और प्रतिभा है। यह कला-पारखियों, उद्भट विद्वानों का प्रदेश है। सीमित संसाधनों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने वाले समुदाय हैं। थोड़े से प्रशिक्षण से असाधारण कार्य करने वाला आदिवासी समुदाय है। यदि सब एक साथ आ जायें तो मध्यप्रदेश के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया और तेज हो जायेगी। मध्यप्रदेश किसी एक व्यक्ति, समुदाय या दल का नहीं है। प्रदेश के हर नागरिक को "अपना मध्यप्रदेश" का बोध जरूरी है। श्री शिवराज सिंह का यही दर्शन और संदेश अब प्रदेश की सीमाएं पार कर अन्य प्रदेशों में गूंज रहा है। प्रदेश में विकास के विभिन्न क्षेत्रों जैसे जल संवर्धन, वनीकरण, स्कूल चलें अभियान, परिवार नियोजन अभियान में सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हो रहे हैं। जनादेश का आदर करते हुए अब सरकार स्वयं लोगों के पास पहुंच रही है। अंत्योदय मेलों का आयोजन श्री चौहान की लोक सेवा की ललक का ही विस्तारित रूप है। जन सेवक मुख्यमंत्री को जन्म-दिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।


मध्यप्रदेश के पुनर्निर्माण के अविराम पथिक हैं शिवराज

- सुरेश गुप्ता

मौका होठों को गोल कर सीटी बजाने का है और ऐसा हो भी क्यों नहीं। आखिर तो शिवराजसिंह चौहान मध्यप्रदेश के राजनैतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोडऩे में कामयाब हुए हैं। यह नया अध्याय है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अलावा किसी अन्य राजनैतिक दल के मुख्यमंत्री के रूप में निरन्तर पाँच साल की कालावधि पूरा करना सिर्फ इतना ही नहीं शिवराजसिंह चौहान अपने दल में भी यह गौरव हासिल करने वाले पहले व्यक्ति हैं।

जहाँ तक बात होठों को गोल कर सीटी बजाने की है तो शिवराजसिंह चौहान का विकास के लिये संकल्प और लगन आम लोगों को विश्वास दिलाता है कि सुनहरा भविष्य प्रतीक्षा कर रहा है। उनकी मंजिल है स्वर्णिम "मध्यप्रदेश"। ऐसा प्रदेश जो देश का अग्रणी प्रदेश हो। जहाँ हर हाथ को काम, हर खेत में पानी, हर घर में बिजली और हर बच्चे को शिक्षा मिले।

असल में शिवराजसिंह चौहान को जानने वालों और नहीं जानने वालों को यह बिल्कुल स्पष्ट समझ लेना चाहिये कि वे दिन गिनने वाले लोगों में से नहीं, काम करने वालों में है। उन्होंने काम को प्रधानता दी। यह वही कर पाता है जो पद के आने-जाने की चिन्ता से मुक्त हो। जिसका लक्ष्य पद पाना या उस पर बने रहना नहीं होता बल्कि पद के अनुरूप दायित्वों के निर्वहन में प्रयत्नों की पराकाष्ठा करना होता है। शिवराजसिंह चौहान मध्यप्रदेश में ऐसा ही कर रहे हैं। वे ऐसा महज पिछले पाँच साल में मुख्यमंत्री के रूप में ही कर रहे हो ऐसा भी बिल्कुल नहीं है। अब तक का उनका जीवन-क्रम बताता है कि आपातकाल के दौर में अपनी कच्ची उम्र में ही वे लोकतंत्र की रक्षा के उद्देश्य से कारावास जा चुके हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में अपने गृह ग्राम जैत में मजदूरों को पूरी मजदूरी दिलाने के लिये गाँव भर में जुलूस निकाल चुके हैं। इसके बाद विद्यार्थी परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा में विद्यार्थियों और युवाओं के लिये काम उन्हें अपरिमित राजनैतिक अनुभव देता है। सन् 1990 में अल्प समय के लिये विधायक और फिर विदिशा से लगातार पाँच बार लोकसभा चुनाव जीतकर 14 वर्ष तक की संसद सदस्यता ने उन्हें जो राजनैतिक परिपक्वता दी वह उन्हें कर्मठ जननेता और जनसेवी बना चुकी है।

यह सब दोहराने का आशय यह है कि वे पद की चिन्ता किये बगैर अपने दायित्वों के निर्वहन के लिये समर्पित रहे हैं। विकास कार्यों के लिये प्रतिबद्वता के चलते उन्हें लगातार महत्वपूर्ण दायित्व मिलते रहे। यह भी समझने की बात है कि पद या दायित्व प्रतिभासम्पन्न को ही मिलते हैं। अन्यथा पद अगर जोड़-तोड़ से मिल भी जाये तो उसे धारण करने वाला जल्दी ही बियाबान में खो जाता है। फिर श्री चौहान का दल भारतीय जनता पार्टी है, जिसमें एक पद की कसौटी हजार हैं।

श्री चौहान का यह स्पार्क ही उन्हें बिरला बनाता है। चाहे संगठन का काम हो या मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासन का। वे अपने को प्रशासक नहीं जनता का विनम्र सेवक मानते हैं। उनकी अपरिमित ऊर्जा और कुछ करने की तड़प, धारा को विपरीत दिशा में मोडऩे का माद्दा और असंभव को संभव बनाने वाली जिद का सफर उदाहरण है उनका मुख्यमंत्री तक का सफर। पाँव-पाँव वाले भैया के लिये इस सफर में जैसा मैंने पहले लिखा कुछ भी अनूठा नहीं है। वह तो लोकसेवा और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का अविराम पथिक है। पथ कितना ही काँटों भरा हो, शिवराजजी के शब्दों में वे जनता के पाँवों में काँटे नहीं आने देंगे। खुद तो उन्हें चुनेंगे ही, लोगों को भी प्रेरित करेंगे, प्रदेश के विकास की बाधाओं रूपी काँटों को हटाने के लिये।

पाँच साल का निरन्तर कार्यकाल पूरा करने वाले भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं बल्कि आज प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता के रूप में इस जन्म-दिवस पर आज अगर उनसे सीटी बजाने की उम्मीद की जाती हैं तो यह उम्मीद बेमानी भी नहीं है। एक ऐसे देश और प्रदेश में जहाँ एक बार पद पर पहुँचने को ही जीवन भर की उपलब्धि मानकर जश्न मनाये जाते हो, वहाँ श्री चौहान की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय ही कही जायेंगी। यह उपलब्धियाँ तब और विशिष्ट हो जाती है जब अपने नेतृत्व में, अपनी नीतियों के आधार पर जीतकर दोबारा सरकार बनायी गयी हो। सरकार बनाना भी उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना इस अरसे में प्रदेश के पुनर्निर्माण के कामों को निरंतरता और सफलता देना है।

शिवराजसिंह चौहान ने जब प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला था तो वह एक तरह से काँटों का ताज था। एक तरफ भारी जनाकांक्षाओं का बोझ था, जिसके चलते दस वर्ष पुराने शासन को जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था दूसरी तरफ प्रशासनिक अनुभवहीनता का टैग था। तीसरी तरफ अपने ही दल के पूर्व मुख्यमंत्रियों की चुनौती और विधायक दल का सच्चे अर्थों में सर्वमान्य नेता बनकर उभरने की चुनौती थी तो चौथी तरफ पार्टी में बिखराव रोककर प्रदेश के विकास का अपना एजेण्डा लागू करना था। अभिमन्यु के समान विकट स्थिति थी। केवल चक्रव्यूह भेदना ही नहीं विजेता बनकर सुरक्षित भी निकलना था। इस राजनैतिक-प्रशासनिक महाभारत में श्री चौहान सभी तरह के चक्रव्यूहों को भेदकर पाँच साल पूरा कर निरंतर और निरंतर आगे बढ़कर 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुने जा रहे हैं तो इस जन्म दिन पर उनसे सीटी और उनके साथियों से ढ़ोल-ताशे बजाने की उम्मीद बेजा नहीं है। लेकिन वे फिर भी सीटी नहीं बजायेंगे। क्योंकि सीटी उल्लास का और जो सोचा था उसे हासिल करने के भाव का बोध कराती है और श्री चौहान का हासिल स्वर्णिम प्रदेश है, महज बीमारू की श्रेणी से प्रदेश को बाहर लाना नहीं।

प्रदेश के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को पूरे पाँच साल निर्विघ्न चलाने और महज अपने तीन साल के कामकाज के आधार पर दोबारा जनादेश पाने वाले शिवराजसिंह मिथकों को तोडऩे के बाद भी सीटी नहीं बजायेंगे। अब अगर इसकी वजह जानना ही चाहते हैं तो वह यह है कि सत्ता उनका कभी लक्ष्य रहा ही नहीं है। उनका लक्ष्य सत्ता से बड़ा है। सत्ता उनके लिये अपने प्रेरणा-स्त्रोत पं. दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम आदमी के दुख-दर्द दूर करने का एक जरिया भर है। उनका लक्ष्य एक समरस विकसित प्रदेश के निर्माण के साथ राष्ट्र के पुनर्निर्माण का है। राजनीति को छल, फरेब, दुरभि-संधियों और जाति और धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठाकर विकासपरक बनाने का है। तभी तो मध्यप्रदेश में उनके कार्यकाल की योजनाओं और कार्यक्रमों में जाति-धर्म की बंदिशें नहीं हैं। "सर्वे भवन्तु सुखिन:" की भारतीय संस्कृति की भावना के अनुरूप वे राजनैतिक दल बन्दी, मत-मतान्तर, धर्म-जाति, वर्ग और समुदाय से परे सबके मंगल, सबके कल्याण, सबके निरोगी होने के कार्य के कठिन व्रत को पूरा करने में जुटे हैं।

इस सबके बावजूद श्री चौहान को इस जन्म दिन पर तो होंठों को गोल कर सीटी बजाना ही चाहिये। वंचितों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिये समर्पित शिवराजसिंह जी के लिये कोई भी वर्ग भूला-बिसरा नहीं रहा। उन्होंने प्रदेश में राजनीति की धारा इस अरसे में बदल दी। अब प्रदेश में राजनीति तुष्टीकरण की नहीं विकास की ही होगी। जो ऐसा नहीं करेगा वह हाशिये पर खड़ा होगा और सत्तारूपी कारवां जारी रहेगा।

सरकार में जनता के विश्वास की वापसी के प्रयास में आज श्री चौहान ने वनवासी अंचल को नापा है। किसानों के दुख-दर्द को दूर करने के लिये हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, सरकार और समाज को विकास के कामों में साथ ला रहे हैं। यह प्रक्रिया भविष्य में समृद्ध प्रशासनिक परम्परा बनेगी। अपनी कथनी-करनी को एकात्म कर आज प्रदेशवासियों की आशा और विश्वास के प्रतीक बने श्री चौहान को जन्म दिवस की बधाई के साथ।




मध्यप्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिये संभावनाएं

- प्रतीष पाठक

मध्यप्रदेश में 1.5 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य उपजाऊ भूमि और 11 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं। सर्वाधिक वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता, भरपूर वर्षा और अनाज, दाल, उद्यानिकी फसलों की बहुलता में संपन्न यह प्रदेश, देश का अग्रणी कृषि राज्य बन चुका है।

सोयाबीन, दाल, चना, लहसुन के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर रहते हुए मध्यप्रदेश ने गेहूँ , मिर्ची, लहसुन और रामतिल के उत्पादन में भी देश के पांच प्रथम उत्पादक राज्यों में स्थान प्राप्त किया है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में मालवा में उगाई जाने वाली गेहूँ की शरबती किस्म अपनी अपनी मिठास और चमक के लिये विशेष रुप से पहचानी जाती है और उच्च कोटि के ब्रांडेड आटा उत्पादकों की पहली पसंद है। गेहूँ की देशी किस्मों में से मुख्य रुप से शरबती गेहूँ में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। इसी क्षेत्र में आलू उगाये जा सकते हैं जिससे बनाये जाने वाले चिप्स बेहद लोकप्रिय हैं। इसके अलावा स्थानीय सुगंधित चावल, डयूरम गेहूँ, कोटा-कुटकी की विभिन्न किस्में, केला, संतरा और आम जैसे मौसमी फल और वनोत्पादों ने मिलकर मध्यप्रदेश के लिये प्रकृति की ओर से सुंदर गुलदस्ता तैयार किया है।

प्रदेश में कृषि गतिविधियों की बहुलता, जनसंख्या की सघनता राष्ट्रीय स्तर से कम होने और कृषि कार्यों में लोगों की आसान उपलब्धता के कारण डेयरी, बकरी, भेड़, शूकर, दुधारु पशुपालन और मुर्गीपालन जैसी कृषि से संबंधित गतिविधियों को प्रदेश में स्वाभाविक रुप से प्रोत्साहन मिला। प्रदेश में सामान्य वर्षा 1100 मिलीमीटर होती है। नदियां, झील, बांध, ग्राम स्तरीय जल संरचनाएं मत्स्य पालन की गतिविधियों को ठोस आधार देती हैं।

कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों पर 70 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका निर्भर है। कृषि क्षेत्र को राजनैतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी नीतिगत समर्थन मिला है। पिछले कुछ सालों में सर्वाधिक राजस्व व्यय जल संसाधनों के निर्माण और विकास पर हुआ है। प्रदेश में 33 प्रतिशत क्षेत्र में सिंचाई की अच्छी सुविधा उपलब्ध है। प्रत्येक वर्ष सिंचाई का अतिरिक्त क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। विश्व बैंक से सहायता प्राप्त जल क्षेत्र पुनर्निमाण परियोजना के अंतर्गत वर्तमान नहर संरचना को जीवित करने, पक्की नहर, वितरण व्यवस्था में सुधार, जल उपभोक्ता संस्थाओं को खड़ी करने और जल उपयोग को बढ़ावा देने के कार्य किये जा रहे हैं।

पिछले तीन सालों में नई ताप और जल विद्युत निर्माण क्षमता तेजी से बढ़ी है। कृषि क्षेत्र में विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता और अवधि दोनों बढ़ी हैं। अगले दो सालों में यह और बढ़ेंगी। केन्द्र सरकार से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मिली धनराशि से मध्यप्रदेश ने बेहतर काम करते हुए 30070 किलोमीटर से ज्यादा बारहमासी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया है।

प्रदेश सरकार ने कृषि को विस्तार देने वाली कई सेवाएं भी उपलब्ध कराई हैं। खेती-किसानी से जुड़े सत्तर लाख परिवारों को प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह सलाह के लिये 11 हजार लोगों का मैदानी अमला उपलब्ध है और 48 जिला स्तरीय कृषि विज्ञान केन्द्र परस्पर सहभागिता के आधार पर अनुसंधान का काम कर रहे हैं। यह केन्द्र क्षेत्र विशेष के लिये उपयुक्त फसलों का चयन करते हैं। पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्रों में भी अनुसंधान चल रहा है।

जबलपुर में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय है जो कृषि के क्षेत्र में किये गये प्रयासों को तकनीकी सहयोग प्रदान करता है। यह विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण पर भी निगरानी रखता है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख अकादमिक संस्थान है जो सार्वजनिक निजी क्षेत्रों की परस्पर भागीदारी से संयुक्त अनुसंधान, बीज के व्यावसायिक उत्पादन और अनाज दालों के आधार बीज उत्पादन में अग्रणी है। इसके अलावा प्रदेश में एक ओर कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है जो ग्वालियर में है।

प्रदेश के कृषि उत्पादकों के लिये 90 प्रदर्शन प्रक्षेत्र, 308 उद्यानिकी नर्सरी द्वारा गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री तैयार की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर मान्य स्वतंत्र प्रमाणीकरण एजेंसियां बीज उत्पादन पर गुणवत्तापूर्ण नियंत्रण रखती है। प्रदेश में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था भी है।

मध्यप्रदेश में 4500 से ज्यादा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों ने चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान अब तक 40 लाख से ज्यादा सदस्यों को लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की धनराशि अल्पकालीन कृषि ऋण के रूप में उपलब्ध कराई है।

पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश ने कृषि विपणन सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। कृषि विपणन सुधार की प्रक्रिया ई-चौपाल द्वारा किसानों से सीधे उपज खरीदने के लिये आईटीसी कंपनी को रियायत देने के साथ शुरू हुई थी। प्रदेश में 235 मंडियों का नेटवर्क है। इनमें से सौ से ज्यादा मंडियां कम्प्यूटर के माध्यम से आपस में जुड़ी हैं ताकि कृषि उपज का नवीनतम मूल्य और बाजार सुविधाओं और सेवाओं की त्वरित जानकारी किसानों तक पहुँच सके।

मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां लगभग सभी प्रकार की फसलों में संविदा खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विपणन में और भी सुधार प्रस्तावित हैं जैसे उपज विशेष के लिये निजी मंडियों की स्थापना और उत्पादकों को प्रदेश के बाहर उपलब्ध बाजारों से जोडऩा शामिल है।

कृषि क्षेत्र ग्रामीण आजीविका के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीकी का उपयोग करते हुए विभिन कृषि जलवायु क्षेत्रों और मानव संसाधन की उपलब्धता का लाभ लेते हुए कृषि क्षेत्र को मूल्य संवर्धित क्षेत्र बनाना चाहती है।

मध्यप्रदेश सहकारी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर के बाजारों के साथ जुड़कर शरबती गेहूँ, आलू, मसालों, सुगंधित चावल जैसे उत्पादों की ब्रांडिंग, साख सुविधा, वित्तीय सेवाओं, जोखिम से बचने की प्रबंधन सेवाओं तक किसानों की आसान पहुँच बनाकर उनके खेतों के पास खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन इकाइयों की सुविधा देकर कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना चाहती है।



मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री

क्रमांक नाम अवधि
1 श्री रविशंकर शुक्ल 01.11.1956 से 31.12.1956
2 श्री भगवन्त राव मण्डलोई 01.01.1957 से 30.01.1957
3 श्री कैलाश नाथ काटजु 31.01.1957 से 14.04.1957
4 श्री कैलाश नाथ काटजु 15.04.1957 से 11.03.1962
5 श्री भगवन्त राव मण्डलोई 12.03.1962 से 29.09.1963
6 श्री द्वारका प्रसाद मिश्रा 30.09.1963 से 08.03.1967
7 श्री द्वारका प्रसाद मिश्रा 09.03.1967 से 29.07.1967
8 श्री गोविन्द नारायण सिंह 30.07.1967 से 12.03.1969
9 श्री राजा नरेशचन्द्र सिंह 13.03.1969 से 25.03.1969
10 श्री श्यामाचरण शुक्ल 26.03.1969 से 28.01.1972
11 श्री प्रकाश चन्द्र सेठी 29.01.1972 से 22.03.1972
12 श्री प्रकाश चन्द्र सेठी 23.03.1972 से 22.12.1975
13 श्री श्यामाचरण शुक्ल 23.12.1975 से 29.04.1977
राष्ट्रपति शासन 30.04.1977 से 25.06.1977
14 श्री कैलाश चन्द्र जोशी 26.06.1977 से 17.01.1978
15 श्री विरेन्द्र कुमार सखलेचा 18.01.1978 से 19.01.1980
16 श्री सुन्दरलाल पटवा 20.01.1980 से 17.02.1980
राष्ट्रपति शासन 18.02.1980 से 08.06.1980
17 श्री अर्जुन सिंह 09.06.1980 से 10.03.1985
18 श्री अर्जुन सिंह 11.03.1985 से 12.03.1985
19 श्री मोती लाल वोरा 13.03.1985 से 13.02.1988
20 श्री अर्जुन सिंह 14.02.1988 से 24.01.1989
21 श्री मोती लाल वोरा 25.01.1989 से 08.12.1989
22 श्री श्यामाचरण शुक्ल 09.12.1989 से 04.03.1990
23 श्री सुन्दरलाल पटवा 05.03.1990 से 15.12.1992
राष्ट्रपति शासन 16.12.1992 से 06.12.1993
24 श्री दिग्विजय सिंह 07.12.1993 से 01.12.1998
25 श्री दिग्विजय सिंह 01.12.1998 से 08.12.2003
26 सुश्री उमा भारती 08.12.2003 से 23.08.2004
27 श्री बाबूलाल गौर 23.08.2004 से 29.11.2005
28 श्री शिवराज सिंह चौहान 29.11.2005 से 12.12.2008
29 श्री शिवराज सिंह चौहान 12.12.2008 से अब तक