शनिवार, 24 दिसंबर 2011

बिना दर्द सहे करा सकेंगे दांतों की सफाई



लंदन : क्या आप दंत चिकित्सक के पास जाने से डरते हैं? आपके लिए यह अच्छी खबर हो सकती है क्योंकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दो वर्षों में बाजार में ऐसी तकनीक आ जाएगी जिसकी मदद से दांतों में लगे कीड़ों की सफाई कुछ ही समय में हो सकेगी, वो भी बिना दर्द सहे।



डेली मेल की खबर के अनुसार, मिसौरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक दल का दावा है कि उनका उच्च तकनीक वाला ‘प्लाजमा ब्रश’ केवल 30 सेकंड में सड़े हुए दांतों को साफ कर सकता है और इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को केवल थोड़ी ठंडक जैसा एहसास होगा।



इस तकनीक के तहत प्रभावित दांत को साफ करने से पहले रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करके प्रभावित स्थल को रोगाणु मुक्त बनाया जाता है और वहां एक ऐसा जोड़ बनाया जाता है जो वर्तमान तकनीकों से कहीं अधिक मजबूत होता है।

ये लियोन है या लावा




संजीव कुमार दुबे

राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में कंपकपा देनेवाली सर्दी पड़ रही है। दूसरी तरफ लेह-लद्दाख और कश्मीर का पारा शून्य से 12 डिग्री नीचे जा पहुंचा है। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में तेजी से लुढ़कते पारे ने कुल्फी जमा दी है। सुबह की कंपकपाती ठंड और रात में फिर बिछ जाती है कोहरे की चादर।



हर तरफ सर्दी और ठिठुरती ठंड का आलम है, लेकिन नेट की दुनिया में सनी लियोन अब भी हॉट हैं, हिट हैं जो लगातार सुर्खियां बटोरती जा चली जा रही है। उनके बढ़ते हिट इस बात की तस्दीक करते हैं कि वह सही मायने में नेट की दुनिया में हॉट बन चुकी हैं। आप समझ तो गए ही होंगे कि मैं बात उन्हीं मोहतरमा की कर रहा हूं जो कनाडा की मशहूर पॉर्न फिल्म स्टार है। फिलहाल वह बिग बॉस- 5 सीजन में शामिल होकर लोगों का मनोरंजन कर रही हैं।



सनी लियोन के बारे में मेरी मालूमात बहुत ज्यादा नहीं है। बस इतना ही कि वह नामचीन पॉर्न स्टार हैं। मेरा इरादा उन्हें महिमामंडित करने का नहीं है। मैं सनी को लेकर सिर्फ खबरों की बात करुंगा। खबरों की दुनिया से ही मेरा वास्ता है। खबरें लिखना, खबरों को अपलोड करना मेरी नौकरी का हिस्सा है, यह मुझे रोज करना पड़ता है क्योंकि मैं न्यूज वेब पोर्टल में जो काम करता हूं। सनी पर बनाई गई, उनपर लिखी गई खबरों और तस्वीरों ने जो सनसनी मचाई, तहलका मचाया उसे देखकर मैं भी हैरान हूं। आम तौर पर पोस्ट (अपलोड) की जाने वाली खबरों की रफ्तार लोकल ट्रेन की तरह होती है जो हर स्टेशन और सभी हॉल्ट पर रुकती चलती है। यानी इन खबरों की हिट अर्थात इन्हें पढ़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होती है। गाहे-बगाहे इन खबरों पर हिट थोड़ी बढ़ती है तो चमत्कार सा लगने लगता है।



लेकिन सनी लियोन की खबरों के साथ ऐसा नहीं है। मुझे याद है कि जब बिग बॉस सीजन-5 में अधिकारिक रूप से सनी लियोन के आने की खबर आई तो बॉस ने मुझसे ये खबर बनाने को कहा। उन्होंने कहा- संजीव जी कोई पोर्न स्टार है सिनी लियोन, बिग बॉस में आ रही है, जरा खबर बनाकर डाल दीजिएगा। मैंने वह खबर बनानी शुरू की। बॉस ने फिर कहा, खबर बढ़िया से बनाइएगा गूगल तान देगा। जब खबर बनकर तैयार हुई तब फोटो चुनने की बारी आई।



मैंने गूगल पर सर्च किया। सनी की मादक तस्वीरें ये बता रही थी कि उत्तेजना पैदा करने में इनका कोई सानी नहीं है। मैंने बड़ी मुश्किल से डरते-डरते एक फोटो चूज किया और बॉस को दिखाया भी। बॉस समझ गए कि मैं घबरा रहा हूं। उन्होंने हौसला बढ़ाया और कहा- एकदम लगा दीजिए,कोई दिक्कत नहीं है। अब उसका पेशा ही वहीं है तो हम लोग क्या कर सकते हैं। ऐसी खबरों को लगाने में थोड़ी सावधानी इसलिए बरतनी होती है कि आप जिस तस्वीर को चुन रहे होते हैं उसपर कोई आपत्ति ना जता दें। इन सबका ध्यान खबरों की दुनिया में रखना होता है। मैंने न्यूज लगाई और हेडिंग दी, ‘बिग बॉस-5 में दिखेगा पोर्न स्टार सनी लियोन का जलवा’। बॉस ने खबर देखी और उसे मनोरंजन के सेक्शन में फिक्स करने को कहा। खबर को फिक्स करना यानी अमुक कैटेगरी में वह खबर सबसे ऊपर दिखती रहती है। लिहाजा व्यूअर यानी पाठक सबसे पहले उसी खबर को पढ़ना चाहता है जो सबसे ऊपर लगी होती है।



उसके बाद दूसरी खबरों को एक-एक कर लगाता चला गया और कुछ देर बाद मेरी शिफ्ट का अवसान होने का वक्त आ गया। कंप्यूटर शट डाऊन करने के दौरान यूं ही मन में ख्याल आया- यार जरा ये सनी लियोन को देखूं तो सही कोई पढ़ भी रहा है या नहीं। मैं हैरान रह गया। सनी को एक घंटे के भीतर हजार से भी ज्यादा लोगों ने पढ़ लिया था। फिर मैं गूगल पर गया। गूगल सनी लियोन की उसी खबर को टॉप पर चिपकाए बैठा था जो मैंने लगाई थी। खबर इस कदर हिट हो गई थी कि सेक्शन में वह खबर सबसे ऊपर रातभर रही। अगले दिन मेरी शिफ्ट सुबह ही थी। मैने सुबह आते ही सबसे पहले गूगल देखा। मैं हैरान हो गया। गूगल पर वह स्टोरी वहीं विराजमान थी जहां मैं उसे पिछले शिफ्ट में देखकर गया था। फिर मैंने उस स्टोरी के हिट्स को देखा। वह भी ताबड़तोड़ दूसरी खबरों को पछाड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ती जा रही थी और लोकप्रिय सेक्शन में सबसे ऊपर विराजमान हो गई थी।



मैने सोचा, यार ये तो हद हो गई। मैं खबरों की दुनिया में रहकर भी जिसे नहीं जानता था उसे पढ़ने और देखने के लिए इतने लोग आखिर लालायित कैसे हैं। कुछ दिन बाद ही मेरे एक कलिग ने सनी लियोन की गैलरी लगाई। मैं समझ गया सनी की खबर गूगल पर हंगामा मचाती रहेगी। तस्वीरों से रू-ब-रू होने के इस सेक्शन में लोग सनी को देखने के लिए इस कदर टूट पड़े कि आज की तारीख में सबसे ज्यादा जो तस्वीरों की गैलरी इस न्यूज साइट (zeenews.india.com/hindi) पर देखी गई वह सनी लियोन की गैलरी है। इस गैलरी का नाम सनी लियोन की अदाएं है। कुछ दिनों बाद भी भी सनी लियोन की मुझे एक खबर लगाने को मिली। उस खबर ने भी तहलका मचाया और सभी खबरों को पछाड़ते हुए हिट और व्यूज के मामले में उसने खुद को सबसे ऊपर ला खड़ा किया। गूगल पर भी इस खबर की कई घंटों तक तूती बोलती रही।



इंटरनेट की दुनिया में कई चीजें अनोखी होती है जिससे कई लोग पहली बार रू-ब-रू होते हैं। लेकिन खबरों की दुनिया में सनी लियोन के जरिए ही मैंने जाना कि कैसे सनी सेकेंडों में सौ और मिनटों में हजार के आंकड़े को पार कर अपनी अहमियत दर्ज कराती नजर आती है। सनी लियोन क्या है और उनका पेशा क्या है मैं इस बहस-मुबाहिसे में नहीं पड़ना चाहता। मैं सिर्फ यही कह रहा हूं कि लियोन को जानने, उन्हें देखने और पढ़ने की ललक अजीबो-गरीब है। बिग बॉस में सनी लियोन की जब से एंट्री हुई है, इंटरनेट पर उन्हें सर्च कर उनके वीडियोज देखने वालों की बाढ़ आ गई है| सनी ने गूगल पर सर्चिंग के मामले में बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा ऐश्वर्या राय और कैटरीना कैफ तक को भी पीछे छोड़ दिया है| उन्हें इंटरनेट पर फैंस ने कैटरीना और ऐश्वर्या राय से भी ज्यादा सर्च किया है| गूगल की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि भारत में सनी लियोन के चाहने वालों की सबसे ज्यादा संख्या नोएडा में है। इसके बाद भुवनेश्वर, लुधियाना और भोपाल है। गूगल की सर्च रिपोर्ट कहती है कि मात्र 14 सेकेंड में 1 करोड़ 10 लाख लोगों ने सन्नी को सर्च किया है।



ये आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि सनी नेट की दुनिया में हॉट है। जब वह खबरों की दुनिया में आती है तो सबको पीछे छोड़ जाती है। उनकी चाल राजधानी और शताब्दी जैसी नहीं बल्कि जापान में चलनेवाली बुलेट ट्रेन की तरह है जो पलक झपकते ही मीलों का सफर तय कर लेती है। सनी नेट की दुनिया में छा रही है। बिग बॉस-5 में एंट्री के बाद उनके फैंस करोड़ों में हो गए हैं। लेकिन खबरों के इस सफरनामे में मैं शुक्रगुजार हूं सनी लियोन का, जिनसे जुड़ी खबरों ने तहलका मचाया है। अपनी हिट्स के जरिए पिछले कई कीर्तिमानों को ध्वस्त किया है। इंटरनेट के माध्यम में खबरों के पोपुलर होने का आधार यह होता है कि लोग अमुक खबर को कितना पढ़ रहे हैं। उस खबर पर हिट्स कितनी है यानी व्यूज कितने हैं। सनी लियोन खबरों को पढने के मामले में खरी उतरती है। वह सेंकेंडों में उड़ान भरती है और मिनटों में इंटरनेट और गूगल के आसमान पर छा जाती है। वह खबरों की दुनिया में उस रंग-बिरंगी आतिशबाजी की तरह है जिसके छूटने के बाद आसमान कई घंटों तक रंग-बिरंगी रोशनियों से नहा जाता है।

खतरे का संकेत देता 2012

वर्ष 2012 में 1 जनवरी की सुबह धनु लग्न में सूर्य का उदय हो रहा है। इस दिन सूर्य धनु राशि के 16वें अंश में होगा। चंद्रमा उत्तरभाद्र नक्षत्र मीन राशि के 14वें अंश में होगा। मंगल ग्रह पूर्वफाल्गुनी नक्षत्र सिंह राशि के 27वें अंश में होगा। बुध ग्रह ज्येष्ठा नक्षत्र वृश्चिक राशि के 26वें अंश में होगा। गुरू ग्रह अश्विनी नक्षत्र मेष राशि के 7वें अंश में होगा। शुक्र ग्रह श्रवण नक्षत्र और मकर राशि के 20वें अंश में होगा। शनि ग्रह चित्रा नक्षत्र और तुला राशि के 5वें अंश में होगा। राहु ज्येष्ष्ठा नक्षत्र और वृश्चिक राशि के 19वें अंश में होगा। केतु रोहिणी नक्षत्र और वृष के 19वें अंश में होगा। अन्य ग्रह हर्षल मीन राशि में नेपचून कुंभ राशि में और प्लूटो धनु राशि में संचार करेंगे। ये सभी ग्रह अपनी अपनी शतरंजी गोट फैलाए हुए हैं, जिसमें मंगल, शनि और बृहस्पति ने मोर्चा संभाल रखा हैं। वर्ष 2012 में विक्रम संवत 2069 का राजा और मंत्री दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने संभाल रखा, जो मार्च के बाद अपनी रणनीति को उजागर करेंगे।

भविष्यवक्ताओं व ज्योतिषियों के अलावा विश्व के जाने-माने पर्यावरणविदों, वैज्ञानिको और पृथ्वी पर लगातार नजर रखने वाले अंतरिक्ष अनुसंधानकर्ताओं ने चेताया है कि वर्ष 2012 में अनेक प्राकृतिक घटनाएं घटित होंगी, जिसमें पृथ्वी की स्थिति बदहाल हो जाएगी। इन सभी चेतावनियों पर अगर अभी से ध्यान नहीं दिया गया और सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए गए तो हो सकता है 6 अरब की दुनिया की आबादी में से 1 अरब के करीब मानव काल के शिकार हो जाएंगे।

ग्लोबल वार्मिंग का खतरा
वैज्ञानिकों की लगातार चेतावनी के बावजूद दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में से किसी को चिंता नहीं कि धरती का वातावरण लगातार कितना गर्म होता जा रहा है। अल गोर और लियो डि कैप्रियो ने पिछले काफी समय से चेताया है कि जंगलों को बचाएं। खेती के अस्तित्व को कायम रखें, पानी का कम प्रयोग करें और इसे गंदा नहीं करें। दैनिक प्रयोग की सामग्री को इकोफ्रेंडली वस्तुओं का इस्तेमाल करें। हम जानते है कि इन नियमों पर किसी ने गौर नहीं किया और न ही अमल हो रहा है। अत: परिणाम भुगतने को तैयार रहें।

भूकंप, सुनामी और आंतक बढ़ेगा

सभी जानते है कि पिछले तीन-चार सालों में लगातार दर्जनों भूकंप, समुद्री तूफान, सूनामी, बाढ़ जनित प्रकोप, आतंकवादी आक्रमण और ज्वालामुखी का फटना, जमीन, सड़कों और इमारतो का नीचे धंसना, अनेक नदियों का बेकाबू होना और बादल फटने जैसी घटनाएं ईश्वरीय प्रकोप की चेतावनी हैं। ये हमें बता रही हैं कि प्रकृति के पास सजा देने के पूरे इंतजाम हैं। वर्ष 2012 में इस प्रकार की घटनाएं बड़ी तादाद में होंगी। साल की शुरुआत ही ऐसी किसी जनसंहारक घटना से होगी। यह भारत या दुनिया के किसी भी कोने में भी हो, खतरे में तो मानव समूह ही आएगा। साल में लगने वाले 4 सूर्य/चंद्र ग्रहण भी इसकी चेतावनी दे रहे हैं। हालांकि, इनमें से भारत में एक ही ग्रहण दिखाई देगा बाकी सब यूरोप और अमेरिका में अपना प्रकोप दिखाएगे।

जनता का क्रोध उग्र होगा
हाल के वर्षों व 2011 में मिस्र और अरब देशों ने उन जन आंदोलनों और बगावतों को देखे जिनके चलते वहां पर सालों से काबिज तानाशाहों को उखाड़ फेंका गया या मार डाला गया। लीबिया की जनक्रांति में गद्दाफी का संहार, वॉल स्ट्रीट पर कब्जा जमाने का आंदोलन, लंदन के दंगे, भारत में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन और बाबा रामदेव का ब्लैक मनी के खिलाफ आंदोलन भी उन भयावह जन आक्रोश की चेतावनी दे रहे हैं जो 2012 में एक विस्फोटक रूप ले सकते हैं। इसके चलते आने वाले वक्त में केन्द्र और राज्य सरकारें पलट सकती हैं। इसी तरह 2012 में दुनिया भर में आर्थिक मंदी का कहर, बेरोजगारी, तंगहाली, भ्रष्टाचार और सामाजिक असुरक्षा से जूझ रहे लोगों के बीच कभी भी लावा फूट सकता है बस एक चिंगारी भड़काने की देर है।

साथ छोड़ेंगे जानमाने

जिस तरह हमने 2011 में दुनिया की कुछ नामी हस्तियों को खोया, वैसी अनेक घटनाएं 2012 में होंगी। हम दुनिया के विकास में क्रांति लाने वाले कुछ लोगों को खो सकते हैं। वर्ष 2011 में स्टीव जॉब्स चले गए। फिल्मी हस्ती देवानंद का निधन हुआ। आध्यात्मिक शख्सियत सत्य साईं बाबा नहीं रहे। नवाब पटौदी नहीं रहे। गजल सम्राट जगजीत सिंह नहीं रहे। एलिजाबेथ टेलर और अन्य कई साहित्य तथा कला जगत ही हस्तियां भी हमें छोड़कर चली गईं। यह भी एक संयोग है कि 2011 में ही कुख्यात ओसामा बिल लादेन मारा गया। लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को विद्रोहियों ने मौत के घाट उतार दिया। उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग इल नहीं रहा। अब 2012 की बारी है जब कुछ अच्छे और बुरे लोग अपनी अंतिम दशा को प्राप्त होंगे।

भविष्यवाणी का गणित

यह बात कोई अजूबा नहीं होगी कि पिछले तीन-चार साल से माया कैलेंडर समेत भारत का वैदिक ज्योतिष, बाइबल और नास्त्रॉदमस महाविनाश की चेतावनी दे रहा है। किसी पाश्चात्य अमेरीकी ज्योतिषी ने भी अभी 2011 में ही अगले एक-दो वर्षों के भीतर धरती के प्रलय अथवा महाविनाश की बात कही है। औरों की बात छोड भी दें तो ज्योतिषी नास्त्रॉदमस की तो द्वितीय विश्व युद्ध 1942, 1947 में भारत की आजादी, 1966 में लंदन अग्निकांड, 2001 मे 9/11 का अमेरीका पर हमला जैसी भविष्यवाणी तो शत-प्रतिशत सही हुई। उनकी किताब में 2012 और 2013 को भी खतरे के निशान पर चिह्नित किया है।

पृथ्वी पर टेड़ी नजर
पृथ्वी के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने वाली अमेरीकी भौतिक और खगोलीय अनुसंधान की संस्था नासा ने 2006 में बताया था कि धरती के चुंबकीय ध्रुव यानी नॉर्थ और साउथ पोल के भीतर धरती की प्लेटें लगातार अपनी जगह से खिसकती जा रही हैं जिसके चलते समुद्रतटीय देश जापान, कोरिया और मध्य पूर्व के देशों में कभी भी भंयकर सूनामी का आक्रमण हो सकता है। इसका प्रमाण वर्ष 2011 में जापान की सूनामी है जिसके कारण हजारों लोगों को समुद्री बाढ़ का कहर झेलना पड़ा। इस बारे में नासा सचेत किया है कि 2012 अथवा 2013 में एक नहीं बल्कि कई प्लेटें खिसकने से प्रलय के नजारे देखने को मिल सकते हैं। नासा लगातार पृथ्वी में वातावरण और आकाशीय उथल-पुथल पर नजर रखे है पर कुछ दुर्घटनाओं की वह सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता लेकिन चेतावनी भी काफी है।

महानगरों पर संकट के बादल
उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम, भूटान, नॉर्थ-ईस्ट के राज्य और अफगानिस्तान में हिंदुकुश की पहाडिय़ां गहन भूकंप जनित क्ष़ेत्र है। इनमें से कहीं वर्ष 2012 में मार्च से लेकर जून और अक्टूबर-नवंबर तक लगातार तीव्र भूकंप आ सकते हैं। इनका दुष्प्रभाव बड़े-बड़े महानगरों की उन अट्टालिकाओं पर पड़ेगा जिनको अंधाधुंध विस्तार के दायरे में लाया गया है।

महंगाई से होगी त्राहि-त्राहि
अगर भारत, चीन जैसे कुछ कृषि प्रधान देष 2012 से आगे तक चलने वाली विश्वव्यापी आर्थिक मंदी को झेल जाएं तो बात अलग है। लेकिन दूसरों के भरोसे रोटी खाने वाले अनेक देशों में आम लोग भीषण महंगाई की मार से त्रस्त रहेंगे। इसके चलते जहां अनेक देशों का विकास कार्य टल जाएगा, परस्पर व्यापार के रास्ते भी रुक जाएंगे। सोना, चांदी सहित मूल्यवान धातुओं पर गाज गिरेगी, तो पानी और पेट्रोल एक ही भाव बिकेंगे। यह सब जनता को उग्र करेगा और लूटपाट व छीना-झपटी आदि बढ़ेंगी। लचर कानून व्यवस्था और कुशासन सभी के लिए कष्टदायक वक्त का परिचायक होगा। आखिर दैत्यगुरु शुक्राचार्य का राज जो होगा।


2013 भी संकटग्रस्त

पश्चिम में 13 को शुभ नहीं माना जाता है। 2013 के निकटवर्ती अंक 2012 को विनाशक चेतावनी का प्रतीक कहा गया है। वैसे, भी सन् 1913 में ही दुनिया में पहले विश्वयुद्ध की नींव पड़ी थी, जो कि 2014 में शुरू हुआ था। दुनिया का कोई भी अमीर और साधन संपन्न देश 2012 से अपने आधुनिक हथियारो को कहीं पर भी आजमाइश के तौर प्रयोग में ला सकता है। सबसे बड़ आक्रामक चीन, पाकिस्तान, अमेरिका या फिर नाटो का कोई भी हो सकता है, जो किसी भी बहाने तीसरे विश्वयुद्ध को दावत दे सकता है। माया कैलेंडर और कुछ अन्य ज्ञात-अज्ञात दैवज्ञ इसकी परिकल्पना करते रहे हैं। 2013 के निकट 2012 है जो अपने ग्रहयोग को धरती की सफाई के लिए साकार कर सकता है।






हाथ की लकीरों में छिपा है भाग्य

गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान रहता है। इसे हस्त रेखा के रुप में जाना जाता है। सामान्यतया 16 वर्ष तक की आयु के बच्चो की हाथों की रेखाओ में परिवर्तन होता रहता है।

सोलह वर्ष की आयु होने पर मुख्य रेखाएं जीवन रेखा, भाग्य रेखा इत्यादि स्थिर हो जाती है तथा कर्मो के अनुसार अन्य छोटे-बडे परिवर्तन होते रहते हैं। तथा ये परिवर्तन जीवन के अंतिम क्षण तक होते रहते हैं। चूंकि हस्त रेखा विज्ञान कर्मो के आधार पर टिका है, इसलिए मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसा ही परिवर्तन उसके हाथ की रेखाओ में हो जाता है । हाथ का विश्लेषण करते समय सबसे पहले हम हाथ की बनावट को देखते हैं तत्पश्चात यह देखा जाता है कि हाथ मुलायम है या सख्त।आम तौर पर पुरुषो का दायाँ हाथ तथा स्त्रियों का बायाँ हाथ देखा जाता है।यदि कोइ पुरुष बायें हाथ से काम करता है तो उसका बायाँ हाथ देखा जाता है। हाथ में जितनी कम रेखा?ं होती हैं, भाग्य की दृष्टि से हाथ उतना ही सुन्दर माना जाता है। हाथ में मुख्यत: चार रेखाओ का उभार स्पष्ट रुप से रहता है।

जीवन रेखा
जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त हो जाती है। यह रेखा भाग्य रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ व्यक्तियो की हथेली में जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में किसी भी बिन्दु पर मिल जाती है।जीवन रेखा तभी उत्तम मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न काट रही हो तथा वह लम्बी हो इसका अर्थ है कि व्यक्ति की आयु लम्बी होगी तथा अधिकतर जीवन सुखमय बीतेगा। रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम एंव जीवन संघर्षमय होगा।



भाग्य रेखा
हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने वाली सीधी रेखा को भाग्य रेखा कहते हैं। स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम भाग्य का घौतक है।यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार की रुकावट नही आती।परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य की हानि होती है।कुछ लोगो के हाथ में जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक ही रेखा होती है।इस स्थिति में वह व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर का भाग्यशाली होता है । ऐसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन कभी नहीं जीता है।


हृदय रेखा
हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते है। यदि हृदय रेखा एकदम सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट बनाती है। यदि हृदय रेखा लहराती हुई चलती है तो वह व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है।यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है।

मस्तिष्क रेखा
हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा कहते हैं। यह आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे छोर तक (हथेली) जायें, यह बीच में ही किसी भी पर्वत की ओर मुड सकती है। यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है। स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम मानी जाती है। कई बार मस्तिष्क रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है। ऐसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।
लाल किताब में सामुद्रिक ज्ञान यानी पामिस्ट्रि के आधार पर व्यक्ति की जन्मकुण्डली का निर्माण होता है, तथा जिन व्यक्तियो को अपनी जन्मतिथि तथा जन्म समय मालूम नहीं उनके लिए लाल किताब बहुत लाभकारी है।


घर में ऊर्जा का प्रवाह

घर के वास्तु के निर्धारण के समय हमें दिशाओं के ऊर्जा स्तर को समझना होगा। वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशा को अधिक ऊर्जा वाली दिशाएं बताया गया है। पूर्व में जहां तेज अधिक है वहीं उत्तर में गति अधिक है। उत्तर-पूर्व को दोनों का लाभ मिलता है। दक्षिण दिशा में तेजी कम लेकिन दाह यानि गर्मी अधिक है। दक्षिण पूर्व में तेज और दाह दोनों होने से यह शुद्ध स्थान बनता है। पश्चिम में रोशनी कम है और गति भी। ऐसे उत्तरी पश्चिमी कोना दक्षिणी पश्चिमी कोने की तुलना में अधिक ऊर्जा रखता है, लेकिन उत्तरी पूर्वी कोने की तुलना में कम। इसे आप हवा के बहाव, रोशनी के आगमन और जल के प्रवाह के रूप में भी देख सकते हैं।

उत्तर पूर्व बच्चों का कोना
ऊर्जा के इस प्रवाह को समझने के बाद हमें घर में ऊर्जा के प्रवाह के अनुसार ही सदस्यों रहने और क्रिया-कलापों के स्थान तय करने होंगे। घर का उत्तरी पूर्वी कोना अधिकतम ऊर्जा वाला स्थान है। यहां उन्हीं लोगों को रखा जा सकता है जो इस ऊर्जा के प्रवाह में सहज रह सकें। घर के बच्चे इस स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। पूर्व और उत्तर से मिल रही सकारात्मक ऊर्जा उन्हें तेजी से विकसित करेगी। दक्षिण पूर्व में रसोई बनाने से हमें दक्षिण से मिल रहे दाह और पूर्व से मिल रहे तेज का लाभ होगा। इस स्थान पर चूल्हा हमेशा जलता रहेगा और स्वादिष्ट भोजन मिलेगा। दक्षिण पश्चिम में घर के बड़े बुजुर्ग रह सकते हैं। उनकी गति कम होती है और ऊर्जा का स्तर भी। वहां वे सहज रहेंगे। घर के उत्तरी पश्चिमी कोने में गृह मालिक को रखा जा सकता है, वे ऊर्जा और न्यायप्रियता के साथ काम कर सकेंगे। इसी तरह बिजली के उपकरणों को दक्षिण की दीवार पर और जल से संबंधित वस्तुओं को उत्तरी क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। यह ऊर्जा की प्रकृति के अनुकूल भी होगा।

ग्रह और उनकी ऊर्जा
वास्तु की संरचना में ग्रहों को वही स्थान दिए गए हैं जैसी उनकी ऊर्जा है। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है। वास्तु का पूर्व सूर्य के पास है। यह तेजोमय है। उत्तर पूर्व पर गुरु का अधिकार है। यह सकारात्मक और तेज है। उत्तर पर बुध का अधिकार है। यह रचनात्मक और सक्रिय है। उत्तर पश्चिम पर चंद्रमा का अधिकार है। यह रचनात्मक लेकिन अधिक विचार करने वाला है। पश्चिम पर शनि का अधिकार है। यह नकारात्मक और धीमा है। दक्षिण पश्चिम पर राहू का अधिकार है। यह नकारात्मक और रहस्य समेटे हुए है। दक्षिण पर मंगल का राज है। यह उग्र और दाह देने वाला है। दक्षिण पश्चिम पर शुक्र का राज है। यह उष्ण और तेजयुक्त है। यह क्षेत्र की ऊर्जा के हिसाब से ही हम उसे काम में लें तो अधिकतम परिणाम हासिल होंगे।

सामान्य उपचार
- कुछ सामान्य उपचार कर ऊर्जा के स्तर को संतुलित रखा जा सकता है। सिंह द्वार (घर का मुख्य दरवाजे) के आगे किसी प्रकार का अवरोध हो तो उसे हटा देना चाहिए, अथवा सिंह द्वार को वहां से हटा देना चाहिए।
-दक्षिणी कोने में पानी का कम से कम उपयोग करें। वहां छोटा मंदिर बनाकर दीपक जलाकर रखें।
-उत्तरी पश्चिमी कोने में पानी के बहने का साधन बनाए। बर्तन धोने का स्थान, वाशिंग मशीन या पेड़ पौधे लगाकर वहां निरंतर पानी गिराया जा सकता है। इससे परिवार में तनाव कम होगा।
-उत्तरी और पूर्वी कोनों में दक्षिणी और पश्चिमी कोनों की अपेक्षा अधिक रोशनी का प्रबंध रखें।
-घर में हवा का बहाव सुनिश्चित करने के लिए एक्जास्ट फैन लगाएं।
-गंदा पानी शुक्र का परिचायक होता है। ऐसे में पूर्व मुखी घरों में घर के दाएं कोने से घर का गंदा पानी निकालने की सलाह दी गई है।
-बाहर से भीतर की ओर शुद्ध जल का प्रवाह उत्तरी क्षेत्रों में हो तो बेहतर है।


ऐसे पैदा होगा गोरा बच्चा

सभी स्त्री-पुरुष - चाहे वे खुद सुंदर हों या न हों पर अपनी संतान को वे सुंदर ही देखना चाहते हैं। सुंदर दिखने और सौन्दर्य बनाए रखने के लिए कोई व्यक्ति अपनी सामथ्र्य से जितना जतन कर सकता है, वह करता है। निम्न वर्ग से लेकर राजे-महाराजाओं सभी में सुंदर बने रहने की इच्छा समान रूप से होती है।

किसी व्यक्ति का स्वरूप उसके व्यक्तित्व का आईना होता है। स्वरूप की लावण्यता मात्र देह के रंग पर ही निर्भर नहीं होती अपितु व्यक्ति की कद-काठी, नाक-नक्श और भाषा व अभिव्यक्ति तथा शिक्षा ये सभी घटक मिलकर सच्चाी सुंदरता प्रदान करते हैं। कुछ लोग से होते हैं जिनको एक बार देखकर अनायास ही बार-बार देखने की जिज्ञासा होती है। व्यक्ति जिस देश, कुल, जाति का हो, उनको ध्यान में रखकर ही स्वरूप का विचार किया जाना चाहिए। विद्वानों को इस विषय में राशि शीलाध्याय और ग्रह गुणाध्याय का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।

लग्न का स्वामी
सबसे पहले यदि हम शारीरिक कद-काठी व नाक-नक्श का विचार करें तो यह कहा जायेगा कि लग्न, नवांश लग्न में शुभ ग्रहों (गुरू, शुक्र, बुध, पूर्ण चंद्र) की राशियां हों और लग्न स्वामी ग्रह बलवान हों। लग्न में स्थित शुभ ग्रह भी शरीर को लावण्यता देते हैं। सूर्य, शनि, मंगल व राहु-केतु अपेक्षाकृत कठोर ग्रह हैं और ये देह को कठोरता व मजबूती तो दे सकते हैं परंतु कोमलता व सौम्यता नहीं दे सकते। बिना कोमलता व सौम्यता के देह विचित्र सी लगती है।जैसे किसी व्यक्ति का उन्नत व विस्तृत ललाट जो कि किसी भी चोट के निशान से रहित हो, उसके भाग्यशाली होने व सूर्य के बलवान होने का स्पष्ट लक्षण है, लेकिन सूर्य जब कुपित मंगल से पीड़त हों तो ललाट पर चोट के निशान पाये जाते हैं।

सूर्य की चमक
जन्मकुण्डली में बलवान सूर्य ललाट पर जोरदार चमक पैदा करते हैं। कुछ व्यक्ति का ललाट इतना अधिक उन्नत होने लगता है कि उनके सिर से बाल भी कम हो जाते हैं। चेहरे की त्वचा का तना हुआ रहना भी बलवान सूर्य का लक्षण है लेकिन चेहरा अपेक्षाकृत थोड़ा सा बड़ा भी हो जाता है। कालपुरूष के सिर व मुख पर सूर्य का अधिकार है। गोल व मोटी आँखें चंद्रमा की निशानी हैं। कालपुरुष के ह्वदय पर चंद्रमा का अधिकार है। ह्वदय की विशालता या मनुष्य की सहजता का अनुमान उसकी आँखों से लगाया जा सकता है। मोटी आँखें जो नीलिमा लिए हों और आद्र्रता भरी हों तो यह चंद्रमा का ही प्रभाव है लेकिन आँखों में गजब की चमक सफेदी लिए हो परंतु आँखों में थोड़ा भेंगा या टेढ़ापन हो तो यह बली शुक्र की निशानी है। शुक्र अभिनय के कारक हैं और जितनी भी सफल अभिनेत्रियाँ या अभिनेता हैं उनकी आँखों में टेढ़ापन देखा जा सकता है, वे जो कि आइटम कलाकार के रूप में ख्यातनाम हुए हैं लेकिन जो चरित्र अभिनेता हुए हैं, उनकी आँखों पर चंद्रमा का प्रभाव रहा।

आकर्षण का प्रभाव
जिन जातकों की कुण्डली में सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बलवान होते हैं और जन्म लग्न पर उनका प्रभाव होता है, उनमें शानदार आकर्षण होता है। चेहरे पर चमक सूर्य देव प्रदान करते हैं। आंखों में आकर्षण चंद्रमा व शुक्र दोनों ही ला सकते हैं और त्वचा का गुलाबीपन व लावण्यता मंगल के कारण आती है।

तीन ग्रह हों बलवान
ये तीन ग्रह जिनकी कुण्डली में बलवान होते हैं वे बिना शंृगार या मेकअप के भी सौंदर्य छटा बिखेर देते हैं। शरीर की लंबाई और गर्दन व अंगुलियों की लंबाई भी सूर्य के अधीन होती है क्योंकि सूर्य अस्थियों के कारक हैं। सुंदरता की आधारशिला व्यक्ति की लंबाई व उसका मोटापा होता है। सूर्य प्रधान व्यक्ति मोटापे का शिकार अपेक्षाकृत कम ही होते हैं।
सूर्य व चंद्रमा बलवान होकर जहाँ शुद्धता व स्वच्छता की मात्रा बढ़ाते हैं तो शुक्र स्वास्थ्य व देह की देखभाल के प्रति सतत प्रयोग करते रहने की मानसिकता देते हैं। जिनकी कुण्डली में शनि बलवान होते हैं वे ब्यूटी कॉम्पटीशन्स में सफलता नहीं पा सकते परंतु जहाँ चरित्र व कर्मगत सौन्दर्य या अनुशासन की प्रतियोगिता होती है वे वहाँ सफल हो जाते हैं लेकिन शनि का चंद्रमा या शुक्र से संबंध हो तो व्यक्ति ब्लैक ब्यूटी का उदाहरण बन जाता है।
स्मिता पाटिल ऐसी ही थी। शनिदेव साधारण जीवन जीने की मनोवृत्ति को जन्म देते हैं, जहाँ दिखावे और आडम्बर को कोई स्थान नहीं मिलता। शनि जिनके ऊपर प्रभावी रहते हैं वे अक्सर शेविंग करने में भी लापरवाही बरतते दिखाई दे जाते हैं। अक्सर उन लोगों की दाढ़ी बढ़ी हुई मिलती है। चाल-ढाल और व्यवहार में साधारणता देखी जाती है। जिनके मंगल बलवान होते हैं वे अपनी देह को कठोर से कठोर बना सकते हैं। बॉडी मेकिंग कर सकते हैं, योगासन में दक्ष हो सकते हैं और शारीरिक सौष्ठव के माध्यम से अंग-प्रदर्शन कर नाम कमा सकते हैं परंतु कोमलता दूर तक नहीं मिलती। यदि कुण्डली में बलवान शुक्र को थोड़ा सा मंगल का सहयोग मिले तो रूप में जो लालिमा आती है वह अद्भुत होती है। कितनी ही सुन्दर मूरत हो, आँख, नाक और होंठ व दाँत व ललाट ठीक-ठाक अनुपात में नहीं हों तो सारा रूप धरा रह जाता है।

भाल की विशालता
भाल की विशालता और नाक का उभार सूर्य के अधीन है तो होठों की लालिमा और अंग सौष्ठव चंद्रमा व शुक्र के अधीन हैं। बलवान शुक्र यदि शनि के दृष्टिक्षेत्र में हों या शनि के नवांश में हों तो होंठों के पास काले तिल या मस्से का निशान मिल जायेगा, जो सौंदर्याकर्षण बढ़ायेगा परंतु सा तभी होगा, जबकि चंद्रमा बलवान हों अन्यथा होठों पर लालिमा की जगह थोड़ी कालिमा दिखाई देगी। दैहिक आकर्षण के कर्ता-धर्ता तो सूर्य, शुक्र व चंद्रमा ही है परंतु अन्य ग्रहों का संबंध होने पर रूप में परिवर्तन आ जाता है जैसे बुध यदि बलवान हों और जन्म लग्न व चंद्रमा पर बुध या बुध की राशि का प्रभाव हो तो उन व्यक्तियों का वर्ण गेहँुआ हो जायेगा। नाक-नक्श अनुपात के होंगे। होठों का आकार सामान्य रहेगी, परंतु गेहँुए वर्ण की देह पर हरी-हरी नसें स्पष्ट दिखाई देंगी, जो सौंदर्याकर्षण में बाधक भी लगेंगी।

सूर्य-चंद्रमा
सूर्य-चंद्रमा व दूसरे या बारहवें भाव पर राहु का प्रभाव जब पड़ता है तो आँखें थोड़ी भूरी हो जाती हैं। रेटिना तो थोड़ी नीलिमा लिए होगा पर हीरा थोड़ा भूरा हो जायेगा। हीरा जब भूरा हो जाता है तो आँखों के वास्तविक सौंदर्य पर ग्रहण लगा देता है लेकिन सा व्यक्ति चतुर बहुत होता है। सूर्य व शुक्र बली होने पर जातक के शरीर पर केश या रोम भी अपेक्षाकृत कम होते हैं परंतु शनि बलवान हों तो शरीर पर केश या रोम बहुतायत में होते हैं।

घुंघराले वालों का राज
बाल जब घुंघराले होते हैं तो सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। घुंघराले बाल बलवान शुक्र की निशानी होते हैं। जैसाकि पूर्व में कहा है सुंदरता कई घटकों का सम्मिश्रण होती है लेकिन मानव शरीर के जिन अंगों पर सूर्य-शुक्र व चंद्रमा का अधिकार होता है वे अंग किसी व्यक्ति को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उच्चा राशि या सिंह राशिगत सूर्य कुण्डली के दु:स्थानों (6, 8, 12) में हों या राहु या शनि से दृष्ट हों तो से व्यक्तियों के गालों पर झाइयाँ पड़ने का डर रहता है। महिलाओं में यह रोग अधिक पाया जाता है। केल्शियम की कमी होने का डर रहता है। उन व्यक्तियों को अपने शरीर में केल्शियम की मात्रा का अनुपात जाँच कराते रहना चाहिए और जब कभी कम हो तो केल्शियम की दवाइयों के साथ सूर्य देव की भी आराधना करें। इस स्थिति में किसी दुर्घटनावश फे्रक्चर होने या अंग-विकृति आने का भी डर बराबर रहता है, जिसे सावधानी पूर्वक पार करना चाहिए।

इन बातों का आप भी रखें ध्यान
1. बालक की सुंदरता बढ़ाने में माता का महत्वपूर्ण योगदान होता है। गर्भावस्था के दौरान यदि महिला अपने खान-पान और रहन-सहन पर ध्यान दें तो उनके बच्चो गौर वर्ण के और सुंदर पैदा होते हैं। गर्भावस्था के दौरान कच्चो नारियल की गिरी खाने से बच्चा सुंदर तो होगा ही साथ ही उस शिशु की अस्थियाँ भी मजबूत होती हैं।

2. इसी तरह गर्भवती महिला को प्रतिदिन केसर मिश्रित दूध पीना चाहिए, इससे बच्चा गोरा पैदा होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भवती महिला को अपने तन-मन व विचारों की शुद्धता व स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। महिला जैसा सोचती है, विचारती है वैसी ही उसकी संतान पैदा होती है। साथ ही माता-पिता जैसा जीवनयापन करते हैं, संतान भी तदनुरूप ही आचरण करती है।

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

डांस इंडिया डांस सीजन 3 में राजकुमार सोनी

चित्रों में राजकुमार सोनी


5 दिसंबर 2011 को फिल्म अभिनेता मिथुन क्रवर्ती, एंकर सौम्या टंडन के डांस इंडिया डांस सीजन 3 मे भाग लेते राजकुमार सोनी।



5 दिसंबर 2011 को फिल्म अभिनेता मिथुन क्रवर्ती, एंकर सौम्या टंडन के डांस इंडिया डांस सीजन 3 मे एंकर सौम्या टंडन के साथ राजकुमार सोनी


फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती पत्रकारों से चर्चा करते हुए।


सिनेमा अपडेट

अक्षय ने छीना कोलावरी डी
अक्षय कुमार के तेज दिमाग ने शाहरुख खान को पीछे छोड़ दिया। बात दरअसल ऐसी है कि कोलावरी डी गीत की लोकप्रियता को कैश कर इसका हिंदी वर्जन बनाने के लिए जब शाहरुख खान ने रजनीकांत से संपर्क साधा तो पता चला कि गीत के अधिकार अक्षय उर्फ अक्की पहले ही खरीद चुके हैं। इस गीत का आइडिया रजनीकांत के दामाद धनुष का था। एक सूत्र के मुताबिक, कोलावरी की दीवानगी शुरू हुई ही थी कि अक्की ने इसे खरीद लिया। जब शाहरुख को पता चला कि उनके हाथ से मौका फिसल चुका है तो वे उदास हो गए। तमिल भाषा में होने के बावजूद देशभर में लोकप्रिय हो रहे इस गीत का हिंदी रीमेक कितना फेमस होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है।

छोटे कपड़ों से परहेज

फिल्म मर्डर 2 में कम कपड़ों के दम पर जलवा बिखेर चुकी जैकलीन फर्नांडिस को अब छोटे कपड़ों से परहेज हो रहा है। इस परहेज का कारण है उनके ब्वॉयफ्रेंड साजिद खान, वह नहीं चाहते कि जैक अब पर्दे पर कम कपड़ों में नजर आए। फिल्म हाउसफुल 2 की शूटिंग कर रही श्रीलंकाई सुन्दरी जैकलीन फना्र्रंडीस को छोटे कपड़े पहनने पड़ रहे हैं, इसके चलते उनसे साजिद काफी नाराज रह रहे हैं। मजे की बात यह है कि साजिद ही इस फिल्म के डायरेक्टर हैं। वो हर सीन में उनके कपड़ों की लंबाई बढ़ाने पर ही जोर दिया करते हैं। हो सकता है अब साजिद जैक को लेकर कुछ ज्यादा ही पॉजीसिव हो गये हैं, लेकिन जैकलीन तो कुछ और ही सोचती हैं। जब साजिद से इस बड़े कपड़ों के राज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे बकवास बताया। जैकलीन ने तो इस बात से इंकार किया और ना ही इकरार।

नील बनेंगे बाजीगर
एक हिट फिल्म के लिए तरस रहे नील नितिन मुकेश के लिए हो सकता है कि आने वाला साल कुछ अच्छा हो, क्योंकि उन्होंने हाल ही में अब्बास मस्तान के साथ तीन फिल्में साइन की हैं। इसमें भी एक बड़ी खबर यह है कि ये जोड़ी नील को लेकर ब्लॉकबस्टर बाजीगर का रीमेक बनाना चाहते हैं। जिसमें वो नील को शाहरुख खान बनाना चाहते हैं। अब नील बाजीगर के बैड ब्वॉय बनने की तैयारी भी करने लगे हैं। साथ ही वो अपने इस नये कैरेक्टर के बारे में भी सोचने लगे हैं। बस प्रॉब्लम अब शाहरुख के हामी भरने की है। जैसे ही शाहरुख इस फिल्म के लिए अनुमति दे दें, इस फिल्म का काम भी शुरू कर दिया जाएगा।

सोनाली बिग बॉस से बाहर
रिएलिटी शो बिग बॉस के घर से मॉडल और एक्ट्रेस सोनाली नागरानी बाहर हो गई हैं। इनके साथ अमर उपाध्याय का नाम भी नॉमिनेट हुआ था, लेकिन शनिवार को सोनाली को बिग बॉस से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। स्वभाव बेहद ही शांत दिखने वाली सोनाली का झगड़ा इस घर में पूजा मिश्रा, सिद्धार्थ

भारद्वाज और आकाश दीप सहगल के साथ ही हुआ। ये हमेशा ही किसी भी तरह की लड़ाई से पूरे शो के दौरान बचती ही रही। खुद को किसी के साथ भी इनवॉल्व होने नहीं दिया। बीच में इनकी और सिद के अफेयर की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन बाद में फिर सिद के साथ भी सोनाली का झगड़ा हो गया। सोनाली बिग बॉस के घर से बेघर होने वाली 11वीं प्रतियोगी हैं। अब तक इस कार्यक्रम को 10 सप्ताह पूरे हो चुके हैं।

घर छोड़ेंगी एडले
हाल ही में अपने गले की सर्जरी कराने वाली गायिका एडले लंदन ने लंदन छोड़ किसी अन्य स्थान पर बसने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि प्रदूषण से अपनी आवाज को किसी भी तरह के होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वह लंदन छोड़ रही हैं। 23 वर्षीय गायिका वेस्ट ससेक्स में अपना नया घर लेने की सोच रही हैं, ताकि गले के ऑपरेशन के बाद इससे उबरने में उन्हें मदद मिल सके। उनका ऑपरेशन अच्छा रहा, लेकिन उन्हें अभी खुद की अच्छी देखभाल करने की जरूरत है। इसलिए उन्हें जब शहर से बाहर जाने की सलाह दी गई तो वह तुरंत मान गईं। सूत्र की माने तो एडेले अपने लिए 20 से 30 लाख पाउंड का घर खोज रही हैं।



आगे बढ़ रहे रितेश


युवा अभिनेता रितेश देशमुख बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में से एक हैं, जिनकी फिल्में उतने बड़े स्तर पर तो नजर नहीं आतीं, लेकिन दर्शकों के बीच उनकी पहचान खास जरूर बन जाती है।

रितेश की पृष्ठभूमि राजनेता घराने से, लेकिन उन्होंने नेतागिरी करने की बजाय अभिनेता बनने का रास्ता चुना, जो वाकई बहुत साहसी कदम था। जिसमें वह महारात भी हासिल कर चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे रितेश का जन्म महाराष्ट्र के लातूर में 17 दिसंबर, 1978 को हुआ था।

कैरियर की शुरुआत
रितेश की पहली फिल्म तुझे मेरी कसम 2003 में रिलीज हुई, लेकिन वह कुछ ज्यादा कमाल नहीं दिखा सकी। इसके बावजूद रितेश की एक्टिंग को लोगों ने काफी सराहा। निर्माता-निर्देशकों ने इसके दम पर क्या कूल हैं हम, अपना सपना मनी-मनी और धमाल जैसी फिल्मों में लिया और रितेश ने भी उन्हें निराश नहीं किया। आज रितेश को एक प्रकार से हरफनमौला कलाकार के रूप में जाना जाता है, लेकिन वह हास्य अभिनय में अपनी खास छाप छोड़ते हैं। खास बात यह है कि वह अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। फालतू, हाउसफुल, रण और धमाल में अपनी खास पहचान छोडऩे में कामयाब

रहे हैं। मुंबई हमले के दौरान उन पर आरोप लगा था कि वह निर्देशक रामगोपाल वर्मा को ताज होटल में फिल्म बनाने के मकसद से ले गए थे। हालांकि रितेश ने इससे साफ इनकार किया।

डिसूजा का चक्कर
जेनेलिया डिसूजा और रितेश नए साल में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। फिल्म जगत में यह यंग कपल किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहा है। 2003 से दोनों एक दूसरे के साथ डेटिंग कर रहे थे, लेकिन अब ये खिचड़ी शादी में तब्दील होने वाली है। तुझे मेरी कसम की शूटिंग के दौरान ही दोनों एक-दूसरे को दिल बैठे थे। हालांकि रितेश देशमुख का नाम जैकलीन फर्नांडिस के साथ भी जोड़ा गया। लेकिन अब साफ हो चुका है कि रितेश तो सिर्फ जेनेलिया के ही रहेंगे। स्वभाव से शर्मीले रितेश ने मीडिया में कभी भी अपने निजी पहलुओं को खुलकर पेश नहीं किया है। रितेश और जेनेलिया दोनों नॉन फिल्मी फैमिली से हैं और यही वजह है कि रिलेशनशिप को ओपन करने में थोड़ी हेजिटेशन रही।

रितेश की फिल्में
2003- तुझे मेरी कसम
2003- आउट ऑफ कंट्रोल
2004- मस्ती
2004- बर्दाश्त
2004- नाच
2005- क्या कूल हैं हम
2005-मिस्टर या मिस
2005- होम डिलिवरी
2005- ब्लफमास्टर
2006- अपना सपना मनी मनी
2006- मालामाल वीकली
2006- डरना जरूरी है
2007- नमस्ते लंदन
2007- कैश- लकी
2007- हे बेबी
2007- धमाल
2008- दे ताली
2010- अलादीन
आने वाली फिल्में - तेरे नाल लव हो गया।

जोश में हैं ब्रिटनी स्पीयर्स
पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स गत वर्ष से अपने ब्वायफ्रेंड जैसन ट्रैविक से विवाह की घोषणा के बाद जोश से भरी हुई हैं।

कांटैक्ट म्यूजिक के अनुसार ब्रिटनी ने अपने एजेंट एवं ब्वायफ्रेंड ट्रैविक से

विवाह करने के फैसले के बारे में घोषणा गुरुवार को की थी। वह लास वेगास में कई पार्टियों में हिस्सा लेकर अपने विवाह की घोषणा का अभी भी जश्न मना रही हैं। ब्रिटनी ने ट्विटर पर कहा कि मैं अभी भी जोश से भरी हुई हूं। शातो नाइट क्लब में ट्रैविक के लिए जन्मदिन पार्टी आयोजित करने के साथ अन्य सभी तरह के कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहती हूं। ब्रिटनी इससे पहले भी दो बार विवाह कर चुकी हैं। उन्होंने पहला विवाह 55 घंटों के लिए अपने बचपन के मित्र जैसन अलेंक्जेंडर और दो वर्ष के लिए डांसर केविन फेडरलीन से किया था। ब्रिटनी ने इसके साथ ही फेसबुक पर अपनी रिलेशनशिप स्थिति भी बदल दी है।

अप्रैल में सगाई करेंगे जॉन

नौ साल पुरानी लिव-इन रिलेशनशिप के बाद अलग हुए बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम शादी करने जा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में बिपाशा बसु से उनके ब्रेकअप के बाद उनकी जिंदगी में आई लड़की हैं प्रिया रुंचाल। जॉन प्रिया को लेकर काफी सीरियस हैं और जल्द ही उनके साथ अपनी शादी का ऐलान कर सकते हैं। जॉन के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह अगले साल अप्रैल की शुरुआत में सगाई रचा सकते हैं। इसके बाद वे दोनों 2012 साल के अंत तक शादी कर लेंगे। 38 साल के जॉन का जब बिपाशा से ब्रेकअप हुआ था, तब से यह चर्चा थी कि जॉन बिपाशा के साथ वफादार नहीं रहे और उन्हें अचानक ब्रेकअप का झटका दे दिया। इन सब खबरों से परेशान जॉन अब बता देना चाहते हैं कि वह शादी करना चाहते हैं और सेटल होने के लिए तैयार हैं। वैसे जॉन की नई गर्लफ्रेंड पेशे से फाइनेंशल एनालिस्ट हैं और 26 साल की हैं। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि जॉन वाकई शादी रचाना चाहते हैं या फिर इस रिश्ते का अंजाम भी कुछ खास नहीं होने वाला है।

शशि को पसंद करती थी

साल 1964 में आई शम्मी कपूर स्टारर हिट फिल्म कश्मीर की कली से बॉलीवुड में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली शर्मिला टैगोर का कहना है कि वे शम्मी से ज्यादा शशि कपूर को पसंद करती थीं। शार्मिला के मुताबिक शम्मी साहब के साथ काम करने के बाद वो उनकी भी प्रशंसक बन गईं।
उन्होंने कहा, हालांकि जब मुझे कश्मीर की कली का प्रस्ताव आया था तो मैं शम्मी के साथ काम करने को लेकर उत्साहित थी, लेकिन मैं उनकी इतनी बड़ी प्रशंसक नहीं थी। मैंने उनका बहुत ज्यादा काम भी नहीं देखा था। मैं शशि कपूर से ज्यादा प्रभावित थी।
शम्मी कपूर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शर्मिला ने कहा, मेरा मानना है कि उन दिनों हर लड़की उन पर (शशि) मर-मिटती थी। मुझे याद है कि एक दिन शशि फिल्म के सेट पर आए और मैं काम नहीं कर पाई... शूटिंग रोक दी

गई, क्योंकि मेरा ध्यान बंट गया था। इसके बाद निर्देशक शक्तिसामन्त को उनसे सेट छोड़कर जाने के लिए कहना पड़ा। हालांकि कश्मीर की कली के दौरान शर्मिला ने शम्मी कपूर से काफी कुछ सीखा। वह (शम्मी) काफी हाजिर जवाब और जिंदादिल थे। उनके स्वभाव के बारे अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था... वह सेट पर कभी समय से नहीं आते थे, लेकिन अपना काम खत्म करके ही जाते थे। मैं ऊपर वाले को धन्यवाद देना चाहती हूं कि मुझे अपनी पहली ही फिल्म में उनके जैसे महान अभिनेता के साथ काम करने का मौका मिला और मैं आज जो कुछ भी हूं उनकी ही बदौलत हूं। उन्होंने मुझे सेट पर सहज बनाया और हमेशा प्रेरित करते रहते थे। उनके साथ काम करना सम्मान की बात है। 65 वर्षीय शर्मिला ने शम्मी कपूर के साथ फिल्म एन ईवनिंग इन पेरिस में भी काम किया है। उनका कहना है कि खराब सेहत के बावजूद भी वह आम जिंदगी जीते थे। गौरतलब है कि शम्मी कपूर का इसी साल 14 अगस्त को निधन हो गया था।

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

पुरुष रहें दूर ये है वुमेन सोशल नेटवर्किंग साइट ‘लूलूवाइस’



सोशल नेटवर्किंग साइटों का क्रेंज इतना बढ़ चुका है कि हर कोई इनसे जुड़ना चाहता है। वैसे तो अभी तक सभी सोशल नेटर्किंग साइटों का प्रयोग पुरूष और महिला दोनों कर सकते है मगर कनाडाई वूमेन अलेक्‍जेंड्रा चांग के दिमाग में एक अनोखा ख्‍याल आया कि क्‍यों न महिलाओं के लिए एक अलग सोशन नेटवर्किंग साइट बनाई जाए फिर देर किस बात की थी अलेक्‍जेंड्रा चांगन ने खास महिलाओं को ध्‍यान में रखते हुए लूलूवाइस नाम से एक ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट बना डाली जिसका प्रयोग केवल महिलाएं ही कर सकती है।

साइट को ज्‍वाइन करने के दो तरीके है या तो इसे आप डायरेक्‍ट अपने फेसबुक से कनेक्‍ट कर ज्‍वाइन कर सकतीं है या फिर इसमें एक नया एकांउट क्रिऐट करें। दो दिन पहले लांच की गई इस नई सोशल नेटवर्किंग साइट में 69 देशों के 1000 से ज्‍यादा यूजर बन चुके है। इस साइट को बनाने वाली अलेक्‍जेंड्रा चांग ने बताया साइट को फेसबुक से कनेक्‍ट करने पर यूजर से जुड़ी सारी जानकारी अपने आप साइट में लोड हो जाएगी जिससे यूजर को साइट रजिस्‍ट्रेशन करने में आसानी रहेगी।

अगर आप पुरुष है तो भूल कर भी इस साइट को ज्‍वाइन करने की भूल मत करियेगा क्‍योंकी आपसे पहले भी कई पुरुषों ने फेक एकाउंट के जरिए साइट ज्‍वाइन करने की कोशिश की थी मगर वे कामयाब नहीं हो सके। तो फिर देर किस बात की अगर आप महिला है तो आप भी लुलुवाइस को ज्‍वाइन करके ढेर सारे दोस्‍त बना सकतीं हैं।

पाक अभिनेत्री वीना मलिक लापता



पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक के अचानक लापता हो गई हैं. वीना 16 दिसंबर की सुबह साढ़े छ बजे के बाद से लापता है.

वीना के गायब होने की जानकारी मीडिया को वीना मलिक के बिजनेस मैनेजर प्रतीक मेहता और फिल्ममेकर हेमंत मधुकर ने दी है. इन दोनों का कहना है कि वीना 16 दिसम्बर की सुबह से गायब है, उनका फोन भी स्विच ऑफ है और ना ही उन्होंने किसी को कोई एसएमएस किया है.

दरअसल वीना मलिक शुक्रवार को एक फिल्म की शूटिंग कर रही थी. उन्होंने सुबह पांच बजे फिल्म का एक शॉट भी दिया लेकिन उसके बाद वो सेट पर दिखायी नहीं दीं. हालांकि उनके मैनेजर का कहना है कि वीना सेट पर काफी अपसेट दिखायी दे रही थी.

फिल्ममेकर हेमंत का कहना है कि सेट पर एक काले रंग की कार आयीं जिसमें वीना बैठकर किसी को बिना कुछ बताये कहीं चली गयीं. उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है. ना तो उनकी कोई खबर है और ना ही उन्होंने किसी को कुछ कहा है. वीना ने कोई एसएमएस भी नहीं छोड़ा और अब तो उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है.

गौरतलब है कि वीना मलिक इन दिनों अपने न्यूड फोटो को लेकर चर्चा में हैं. जिसके बाद से उनकी लगातार आलोचना हो रही थी. अपने इस कारनामें की वजह से उन्हें अपने पिता की जिंदगी औऱ जायदाद से बेदखल होना पड़ा है.

वैसे वीना बहुत जल्द कई फिल्मों में आयटम नंबर करते नजर आने वाली है इसके साथ ही वीना का इमेजिन टीवी पर स्वयंवर भी होने वाला है. वीना ने बॉलीवुड में कदम बिग बॉस 4 से रखा था. तब से वो यहीं पर पांव जमाने की कोशिश कर रही हैं.

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

हमारी सोच से कहीं अधिक चतुर होते हैं कौवे





कौवे हमारी सोच से कहीं अधिक चतुर होते हैं. उनमें सीखने और नए साधनों का इस्तेमाल करने की समझ होती है.

यही कारण है कि जब आप उन पर बंदूक से निशाना लगाने की नकल भी कर रहे हों तो वे छतों और खम्भों से उड़ जाते हैं.

विज्ञान पत्रिका 'पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) और कैम्ब्रिज (ब्रिटेन) विश्वविद्यालयों के शोध से पता चला है कि कौवे नए उपकरणों से सीखने की प्रक्रिया में सतत लगे रहते हैं.

एक बहुत पुरानी कहानी के मुताबिक एक प्यासा कौवा मटके में पानी का स्तर उपर लाने के लिए उसमें तब-तक पत्थर डालता रहता है जब-तक कि पानी का स्तर उसकी पहुंच में नहीं आ जाता.

उस वक्त कौवा पानी का स्तर ऊपर लाने के लिए छोटे पत्थरों मटके में डालता है न कि बड़े पत्थर.

विश्वविद्यालय के एक बयान के अनुसार कुछ प्रयोगों से पता चला है कि कौवों का प्रदर्शन सीखने की साधारण प्रक्रिया पर आधारित नही होता है.

कौवों में दरअसल यह समझने की शक्ति होती है कि वास्तव में कोई भी काम किस तरह से किया जा सकता.

इसी वजह से अध्ययन के सह-लेखकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि कौवे के सरल साहचर्य के पीछे उनकी संज्ञानात्मक प्रक्रिया होती है जिससे वे नये साधनों या फिर उपकरणों की जानकारी जुटाने में सक्षम होते हैं.

सिर्फ 2500 रुपये में आपका होगा 'आकाश'



दुनिया के सबसे सस्‍ते टैबलेट का इंतजार खत्‍म हो गया है। ‘आकाश’ नाम का यह टैबलेट 2500 रुपये में उपलब्‍ध है। इस टैबलेट को बनाने वाली कंपनी ‘डेटाविंड’ ने करीब 30 हजार टैबलेट ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया। इसकी डिलिवरी सात दिनों के भीतर हो जाएगी। ऑनलाइन खरीदारी पर पेमेंट डिलीवरी के वक्त ही करना होगा।

अगर इस टैबलेट को तुरंत आर्डर करना चाहते हैं तो वेबसाइट www.akashtablet.com पर जाकर लॉग इन करें। आकाश टैबलेट में ढेरों फीचर्स हैं। इस 7 इंच के टचस्क्रीन टैबलेट में एंड्रॉयड 2.2 (फ्रायो) ओएस सपोर्ट है। इसमें 256 एमबी की रैम है और इसका वजन 350 ग्राम है। ये टैबलेट 366 मेगाहर्ट्ज माइक्रोप्रोसेसर पर चलेगा और इसमें 2100 एमएएच बैटरी है। इसमें केवल वाई-फाई नेटवर्क सपोर्ट है।

डेटाविंड के संस्‍थापक और सीईओ सुनीत सिंह तुली के मुताबिक कंपनी के पास करीब चार लाख टैबलेट के ऑर्डर आए थे लेकिन सीमित खरीदारों के लिए अभी यह टैबलेट उपलब्‍ध है। टैबलेट की भारी मांग को देखते हुए ऑनलाइन बिक्री के लिए कंपनी को उपभोक्‍ता सेवा से जुड़ी समस्‍याओं से जूझना पड़ सकता है क्‍योंकि ‘आकाश’ सीमित संख्‍या में ही ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्‍ध है।

अपडेटेड वर्जन अगले महीने
आकाश टैबलेट का अपडेटेड वर्जन 'यूबीस्‍लेट 7' अगले माह यानी जनवरी में बाजार में आ जाएगा। यह वर्जन 700 मेगाहर्टज प्रोसेसर पर काम करेगा। इसमें अपडेटेड एंड्रायड 2.3 ओएस है। जबकि बैटरी 3200 एमएएच की होगी। ये वाई-फाई के अलावा जीपीआरएस नेटवर्क पर भी काम करेगा। इसकी कीमत महज 2,999 रुपये होगी।

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

हेलिकॉप्टर वाली माया क्या जाने गरीबों का दर्द: राहुल



लखनऊ।। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी एक बार फिर यूपी के अपने चुनावी दौरे पर निकल गए हैं। नवगठित जिलों भीमनगर और बदायूं से अपने दौरे की शुरुआत करते हुए राहुल ने लोगों से कहा कि अब समय आ गया है, उठो, जागो और यूपी की तकदीर बदल दो। मायावती पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर दौरों से गरीबों का दर्द नहीं समझा जा सकता।

राहुल दिल्ली से सीधे बबराला पहुंचे और भारी तादाद में जमा लोगों को संबोधित करते हुए बोले कि मैं भी यूपी से हूं और मैंने यूपी को देश में सबसे बेहतर जगह बनाने का संकल्प लिया है, आपको हमारा साथ देना है। मैं बराबर आपके बीच इसीलिए आ रहा हूं।

राहुल ने कहा कि जब तक आप जागोगे नहीं, उठोगे नहीं और लड़ोगे नहीं, तब तक पिछड़ते ही रहोगे। हम यहां आएंगे, दुर्दशा देखेंगे, गुस्सा-दुखी होंगे, लेकिन हमारे हाथ भी बंधे होंगे।

इसलिए चुनाव में अपने मतों को सोच-समझकर डालो और उसी की सरकार बनाओ जो आपके हित की बात करे और उस पर पूरी तरह खरा उतरे। अगर इस बार भी आप खामोश रहे तो यूपी की तकदीर बदलने में हम भी कुछ नहीं कर पाएंगे और चंद लोग जाति-धर्म के नाम पर यूपी को लूटते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में किसानों को खुशहाल रखने के बजाय उनकी जमीनों को जबरन छीना जा रहा है। मनरेगा का पैसा जिस पर सिर्फ आपका हक है, वह मंत्रियों-अफसरों एवं दबंगों की जेब में जा रहा है।

कब तक आप इस तरह का तमाशा देखते रहोगे? इसलिए यहां गरीब-कमजोरों की सरकार बनाकर यूपी को तरक्की के रास्ते ले चलें। सभा में बीएसपी पर कटाक्ष करते हुए वह बोले कि मायावती के दौरे में पैसों की बर्बादी हो रही है, क्योंकि हेलिकॉप्टर में बैठे-बैठे गरीबों के दर्द को नहीं समझा जा सकता।

राहुल बोले कि मैं गांवों-गरीबों के बीच इसलिए जाता हूं कि उन लोगों का दर्द नजदीक से जान सकूं और उनकी तरक्की के लिए कुछ कर सकूं। उन्होंने कहा कि यूपी में बदलाव लाने में युवाओं की भूमिका काफी अहम है। इसलिए उन्हें भी आगे बढ़ना होगा।

राहुल पुराने भाषण को दोहराते हुए कहा कि मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि अगर आपने हमारा साथ दिया तो हम अगले दस सालों में यूपी का भविष्य बदल देंगे। राहुल के भाषण को लोगों ने ध्यान से सुना और हाथ उठाकर उनका साथ देने का संकल्प लिया।

राहुल गुन्नौर में तो यहां तक कह गए कि यूपी में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो आपको मुंबई-दिल्ली अथवा हरियाणा जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वहां के लोग यहां पर रोजगार की तलाश में आएंगे। यूपी देश को विकास का रास्ता दिखाएगा। बस आप सभी को मन बनाना होगा तथा जाति-धर्म की राजनीति से उबरना होगा।

राहुल बोले कि यूपी में मनरेगा के अरबों रुपये इधर से उधर करने के साथ ही एनआरएचएम में तीन हजार करोड़ रुपए खा लिए गए, जिन्हें आपके के लिए ही केंद्र ने भेजे थे। इस तरह के घोटाले आप ही रोक सकते हैं। इसलिए स्वयं को मजबूत कीजिए।

राहुल आज जोश में थे। उन्होंने बीएसपी-एसपी एवं बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह दल पब्लिक को सिर्फ वोट बैंक ही समझते हैं। इसका प्रमाण है कि भट्टा पारसौल-टप्पल में किसान मारे जा रहे थे और यह दल सिर्फ तमाशा देखते रहे।

किसी को मायावती ने जाने से रोक दिया तो कोई बीच से ही बयानबाजी करके लौट आया। लेकिन मैं दोनों जगह पहुंचा। उन्होंने पब्लिक के बीच सवाल दागा कि आखिर मुझे क्यों नहीं रोका गया? इससे साफ हो जाता है कि कांग्रेस के अलावा अन्य किसी दल को किसानों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है।

नई दिल्ली की निर्माण गाथा



नई दिल्ली का औचपारिक उद्घाटन जनवरी 1931 में हुआ.अब से सौ साल पहले बारह दिसम्बर 1911 को, किंग जॉर्ज और क्वीन मेरी ने शाहजहांनाबाद के उत्तर की तरफ जल्दबाजी में एक जगह चुनकर भारत की नयी राजधानी की नींव रख दी. कलकत्ता के व्यापारिक घरानों ने इसका विरोध किया, लार्ड कर्जन ने इसे फिजूलखर्ची बताया और गांधी जी का भी यह यही मत था. उस वक्त शाहजहांनाबाद के चारों ओर खंडहरनुमा सात शहर थे, इसलिए यह अंधविश्वास भी जागा कि ‘दिल्ली तमाम राजवंशों की कब्रगाह’ रही है, लेकिन लॉर्ड हार्डिग ने सारी आपत्तियां दरकिनार कर दीं.

लंदन काउंटी काउंसिल के सदस्य कैप्टन स्टीवन की अध्यक्षता वाली कमेटी को नयी दिल्ली स्थल निरीक्षण का काम मिला. ‘रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स’ को नगर की रूपरेखा के लिए वास्तुविदों के नाम सुझाने को कहा गया. सरकार ने लटयंस के साथ एक अन्य सहकर्मी- हर्बर्ट बेकर का नाम स्वीकार कर लिया. 1912 में लटयंस ने पहले चुनी हुई जगह नामंजूर कर दक्षिण की तरफ की रायसीना नाम की ढलवां चट्टानी बंजर जमीन की सिफारिश की जिसे हार्डिग ने मंजूरी दे दी.

लॉर्ड हार्डिग चाहते थे वायसराय पैलेस, सचिवालय तथा संसद भवन आदि पारंपरिक भारतीय शैली में ही बनें. मुगल वास्तुकला से प्रभावित सम्राट भी यही चाहते थे. लटयंस और बेकर ने इसके लिए सांची के बौद्ध स्तूप, दक्षिण भारत के मंदिर, आगरा का ताजमहल, बीकानेर और मांड़ के राजमहल आदि देखे. वह इनसे प्रभावित तो हुए किन्तु टिप्पणी कि ‘इनमें खालिस हिंदुस्तानी वास्तुकला या ऐसी कोई महान परंपरा जैसी चीज है ही नहीं. यह सब विभिन्न भारतीय राजवंशों के व्यक्तिगत उद्गारों के प्रतीक मात्र हैं.’

बहरहाल प्रस्तावित नगर का खर्च संबंधी लटयंस का अनुमान ज्यों-ज्यों बढ़ रहा था, हार्डिग का उत्साह ठंडा हो रहा था. फिर लटयंस ने लेडी हार्डिग को प्रभाव में लिया और कुछ वष्रो तक वह भावी नगर की संरक्षक बनी रहीं.

नयी दिल्ली का ब्लूप्रिंट तैयार होते ही कई परेशानियां शुरू हो गयीं. सचिवालय और वायसराय पैलेस की ऊंचाई और दोनों सचिवालयों के बीच के रास्ते (राजपथ) की ढलान को लेकर लटयंस और बेकर के बीच खासी तकरार हुई और लंबे समय तक दोनों के बीच बातचीत तक बंद रही. लटयंस की राय में देश के शासक का निवास उसके प्रशासनिक अधिकारियों (सचिवालय) की अपेक्षा ऊंचा होना चाहिए पर बेकर ने कहा कि लोकतांत्रिक धारणा के मुताबिक वायसराय पैलेस और सचिवालयों की ऊंचाई समान होनी चाहिए, जीत अंतत: बेकर की हुई.

कच्चे माल की पूर्ति एक और समस्या बनी. क्योंकि पहाड़ी का पत्थर इमारतों के निर्माण लायक नहीं था. अंतत: धौलपुर से सफेद और भरतपुर से लाल पत्थर और मकराना, अलवर, जैसलमेर, बड़ौदा तथा अजमेर से संगमरमर मंगाया गया. योजना पर करीब एक करोड़ पौंड खर्च होने का लटयंस का अनुमान ठीक निकला लेकिन यह उसने भी नहीं सोचा था कि इसे बनने में पूरे सोलह वर्ष लग जाएंगे.

नई दिल्ली का औचपारिक उद्घाटन जनवरी 1931 में हुआ. वायसराय पैलेस में उद्घाटन के बारे में लटयंस ने लिखा- ‘समारोह चल रहा था...एक विशेष संकेत पर पैलेस का द्वार खोल दिया गया (द्वार की कोई चाबी नहीं थी, क्योंकि उस पर कोई ताला नहीं था. उन्होंने महल में प्रवेश किया और सत्रह वष्रो में पहली बार मुझे बाहर छोड़कर द्वार बंद कर दिया गया.’

लेकिन विभिन्न स्मारकों पर लिखे जाने वाले अभिलेखों के संबंध में लटयंस की राय अनेक बार मांगी गयी. उन्होंने कहा कि जयपुर के खंभे लिखा जाए- ‘अपने विचारों में विश्वास लाओ, कर्म में साहस, और जीवन में त्याग, ताकि दुनिया देखे, भारत की महानता.’ लार्ड इर्विन ने संक्षिप्त रूपांतर कर खंभे पर इसे यूं लिखवाया- ‘इन थाट फेथ, इन र्वड विजडम, इन डीड करेज, इन लाइफ सर्विस, सो मे इंडिया बी ग्रेट (विचारों में विश्वास, वाणी में विवेक, कर्म में साहस, जीवन में सेवा अथ भारत बने महान)

बेकर निर्मित इमारतों की काफी आलोचना हुई किन्तु लटयंस के काम को भरपूर सराहना मिली. लटयंस निर्मित वायसराय पैलेस (आज का राष्ट्रपति भवन) वास्तुकला का उत्कृष्ट प्रतीक माना जाता है. दोनों सचिवालयों के बीच राजपथ पर ऊपर की ओर बढ़ते आलों में गड़े पीले पत्थरों के शिलापट्टों पर वास्तुविदों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के नाम अंकित हैं लेकिन उन 30,000 मजदूरों के नाम कहीं नहीं मिलते जो उत्तर-भारत के विभिन्न भागों से पत्थर तोड़ने, गारा मिलाने और सीमेंट तथा ईट ढोने के लिए यहां आये थे.

अकुशल मजदूरों में सबसे ज्यादा ‘बांगड़ी’ यानी राजस्थानी मजदूर थे. पुरुषों को प्रतिदिन आठ आना और औरतों को छह आना मजदूरी मिलती थी. वे कुली कैंपों में रहते थे. जहां उन्हें पीने का पानी, शौचालय तथा चिकित्सा सहायता आदि मुफ्त सुलभ थी. अकुशल मजदूरों का दूसरा जत्था पंजाब का था, जो ‘बंधानी’ कहलाते थे. मिर्जापुर और भरतपुर से आये संगतराश उन कारीगरों के वंशज थे, जिन्होंने मुगलों के स्मारक बनाये थे. नयी दिल्ली बनाने के ठेके जिन्हें मिले, उनमें से कुछेक को छोड़ सब अनपढ़ थे या थोड़े-बहुत साक्षर. पर सबने धीरे-धीरे टूटी-फूटी अंग्रेजी और निर्माण व्यवसाय संबंधी गुर सीख लिये. अचानक जमीन के दाम बढ़ने के कारण लोग रातोंरात लखपति बन बैठे. इन नवधनिकों में से अधिकतर के बच्चे उनके समान ही अनपढ़ बने रहे लेकिन इतना जरूर हुआ कि उन्हें कपड़े पहनने का सलीका आ गया था और वे मोटरकारों में घूमने-फिरने लगे. जब ये बेचारे रायसीना की पहाड़ी पर अपना पसीना बहा रहे होते, तो उनके बेटे चावड़ी बाजार में नाचने-गानेवालियों पर कुर्बान हुआ करते थे.

शुरू के ठेकेदारों में सिंधियों का नाम प्रमुख था. सुकर निवासी रायबहादुर फतेहचंद ने ‘मेटकॉफ हाउस’ के पास पुराना सचिवालय बनाया था पर नयी दिल्ली के निर्माण में इसका कोई खास हाथ नहीं था. लेकिन एक अन्य सिंधी खान बहादुर सेठ हरुन की राष्ट्रपति भवन के निर्माण में खास भूमिका रही. संसद भवन का अधिकतर भाग बनाने वाले लछमन दास भी सिंधी थे जो अपनी ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध रहे. आयकर के मामले में इन्होंने कभी हेराफेरी नहीं की और आखिरकार टैक्स के कारण ही उनका भठ्टा बैठा. लक्षमन दास सब छोड़छाड़ कर हरिद्वार चले गये.

पंजाबियों ने सिंधियों से बाजी मारी. पंजाबी ठेकेदार नारायण सिंह ने राष्ट्रपति भवन की नींव भरने का काम किया. बाद में उन्हें राय बहादुर का खिताब मिला. नई दिल्ली बनाने वाले तमाम ठेकेदारों में सुजान सिंह और उनके बेटे शोभा सिंह को विशेष श्रेय जाता है. जब रायसीना वीरान चटटानों और कीकर के पेड़ों का जंगल था, उन्होंने खुली नीलामी में बेशुमार जमीन खरीद ली. अपने सहकर्मियों की तरह शोभा सिंह ने भी अंग्रेजी सीखी. वह नई दिल्ली म्युनिसिपिल कमेटी के प्रेसीडेंट और काउंसिल ऑफ स्टेट के सदस्य भी रहे. बाद में ब्रिटश सरकार ने उन्हें सर की उपाधि से नवाजा.


खुशवंत सिंह
लेखक वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार/साहित्यकार

चेल्सी क्लिंटन बन गयी टीवी रिपोर्टर



अभी तक सार्वजनिक तौर पर कैमरे के सामने आने से बचती रही चेल्सी क्लिंटन अब टीवी रिपोर्टर के रूप में नजर आ रही हैं.

चेल्सी को लगता है कि टीवी रिपोर्टर बनने से उन्हें एक मंच मिलेगा जिससे वो एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सकती हैं.

चेल्सी एनबीसी चैनल के देर रात आने वाले कार्यक्रम ‘रॉक सेंटर विद ब्रायन विलियम्स’ में पत्रकार के तौर पर नजर आएंगी. इसमें वो एनैट डोव नाम की महिला की कहानी पेश करेंगी जो असहाय बच्चों के लिए अपने गृहराज्य अरकांसस में आफ्टरस्कूल प्रोग्राम चलाती हैं.

अपनी इस नयी भूमिका के बारे में चेल्सी ने कहा कि यह बहुत ही उद्देश्यपूर्ण काम है क्योंकि इसमें प्ररेणादायी व्यक्तित्वों की कहानियां दिखायी जाती हैं. ऐसे लोग जो अपने देश और समाज की बेहतरी के लिए संघर्ष कर दूसरों को पेरित करते हैं.

डोव पर 20 मिनट का यह कार्यक्रम ‘मेकिंग अ डिफरेंस’ कड़ी के अतंर्गत प्रसारित किया गया.

इसमें क्लिंटन को किचन में डोव की मदद करते दिखाया गया.

चेल्सी ने कार्यक्रम के संचालक विलियम से कहा कि वह अभी तक अपनी निजी जिंदगी में मग्न रही हैं. यह पहली बार है जब वह सार्वजनिक तौर पर किसी कार्यक्र म में नजर आ रही हैं.

चेल्सी ने कहा कि इस तरह के काम के लिए उनकी दिवंगत दादी उन्हें प्रेरित करती थी जो कहती थी कि उन्हें कुछ उद्देश्यपूर्ण काम करना चाहिए.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और वर्तमान अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की बेटी चेल्सी ने कहा, ‘मुझे हमेशा से अपने माता-पिता पर गर्व रहा है. मुझे उनके निजी, पेशेवर और शैक्षणिक उपलब्धियों पर गर्व है.’’

चेल्सी इस हफ्ते पीबीएस चैनल के कार्यक्रम ‘द नटक्रैकर’ की संचालक के तौर पर भी नजर आएंगी.

चेल्सी स्टैनफोर्ड और कोलंबिया विविद्यालयों की छात्रा रह चुकी हैं. वर्तमान में वह ऑक्सफोर्ड से डाक्टरेट की पढ़ाई कर रही हैं और किलंटन फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं. पूर्व में उन्होंने वित्तीय कंपनी मैकिन्से में भी काम किया है.

चेल्सी अपने पति मार्क के साथ न्यूयार्क में रहती हैं.

भ्रष्टाचार की जंग जारी रहेगी : अन्ना हजारे



खाली नहीं छोड़ेंगे कोई जेल
लोकपाल को लेकर सरकार से मोर्चा थामे अन्ना हजारे ने रविवार को जंतर-मंतर पर 27 दिसंबर से रामलीला मैदान में होने वाले घमासान का शंखनाद किया। पिछली दफे भी इस गांधीवादी ने अपनी लड़ाई इन्ही दो मोर्चों पर लड़ी और जीती थी। रविवार के सांकेतिक अनशन ने सरकार और टीम अन्ना दोनों को यह अनुमान लगाने के लिए वक्त दिया है कि अगले आंदोलन की शक्ल और उसका आकार कैसा हो सकता है। लखनऊ के कलाकारों ने अन्ना के मंच से समां बांधा। देशभक्ति का जज्बा लिए पहुंचे उदय मित्र के कलाकारों ने मेरा रंग दे बंसती चोला...गाना शुरू किया तो पूरा जंतर-मंतर देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। चारों तरफ तिरंगा लहराने लगा। क्या युवा क्या बुजुर्ग सभी झूमने लगे। झारखंड के साहिब गंज से आया अशोक बंसल जंतर-मंतर पर लगभग दो घंटे तक सूर्य से लगातार आंखें मिलाए हुए खड़ा रहा। उसने बताया कि अन्ना के प्रति उसकी बेहद निष्ठा और समर्पण जंतर-मंतर तक खींच लाई है। इस तरह से वह आंदोलन को तेज दे रहा है।

जनता-जनप्रतिनिधियों के साथ से हुए सबल
जनता और आठ विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी से गदगदाए अन्ना ने जंतर-मंतर से ऐलान किया कि अगर सरकार मजबूत जन लोकपाल नहीं लाएगी तो ऐसा आंदोलन होगा कि देश की कोई भी जेल खाली नहीं रह जाएगी। सरकार को हर हाल में सशक्त जन लोकपाल बिल लाना पड़ेगा। मंच साक्षा करने आए विपक्षी दलों के नेताओं से अन्ना ने कहा, ‘राजनीति में सब लोग बुरे नहीं होते, उसमें भी कुछ अच्छे लोग होते हैं। हालांकि राजनीति में पनपता भ्रष्ष्टचार राजनीति और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। हम आंदोलन इसलिए तो कर रहे हैं। हम मिलकर आगे बढ़ेंगे। अगर आंदोलन के बाद भी सरकार नहीं मानती तो रास्ते पर हमारे साथ आप भी उतरो।’ हजारे ने जनता से मुखातिब होते हुए कहा कि उन्हें जेल भरो आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। कानून बनाने वालों का कर्तव्य है कि वह आम लोगों के लिए काम करें, जिन्होंने उन्हें चुना है। हर बार की तरह इसबार भी अन्ना ने उन्हें समर्थन देने आई जनता को धन्यवाद दिया।

35 हजार लोगों के लिए बने अच्छी व्यवस्था
अन्ना टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल संसद में बैठने वाले राजनेताओं से जन लोकपाल के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा कराना चाहते थे, लेकिन नेताओं ने मना कर दिया। केजरीवाल ने एनसीआरपीआई के निखिल देव की लोकपाल व्यवस्था को चलाने के लिए 35 हजार लोगों की नियुक्ति पर उठाए गए प्रश्न का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और स्थायी समिति ने हमारी बातें नामंजूर कर दी हैं जो लोकपाल में 35 हजार लोग आने हैं उसके लिए अच्छी व्यवस्था बनानी होगी। आज की सरकारी व्यवस्था सड़ी गली है। देश में ईमानदार ढूंढेंगे तो 50 लोग मिलने भी मुश्किल हो जाएंगे। व्यवस्था अच्छी होगी तो लोग ईमानदार बन जाएंगे।

राजधानी की सौंवी वर्षगांठ रही हजारे के नाम
राजधानी ने सौ साल पूरे कर लिए हैं। इन सौ सालों का आखिरी दिन दिल्ली वालों के लिए ऐतिहासिक और यादगार रहा। खासकर उन मासूमों को जिनके गालों पर तिरंगा था। उन युवाओं के लिए जिनके हाथ में तिरंगा था। हजारों लोग जंतर-मंतर पर भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ जुटे थे। बीते सौ सालों में दिल्ली कई बड़े आंदोलनों औैर बदलावों की गवाह बनी है। आजादी के पहले और बाद के आंदोलन ने देश को एक नई दिशा दी है। ऐसे में अगर देश की जनता अन्ना हजारे की अपील को आत्मसात करती है तो यह आंदोलन देश के राजनीतिक चेहरे को भी फेस लिफ्ट करेगा। सौ सालों में दिल्ली बूढ़ी नहीं, बल्कि जवान हुई है। दिल्ली-आसपास का सामाजिक तानाबाना और परिवेश बदला है। लिहाजा, बदल रही दिल्ली में युवा शक्ति सूत्रधार बनी है और उसका नेतृत्व ७४ सालों के बुजुर्ग के हाथ में है।

प्रधानमंत्री-सीबीआई लोकपाल के दायरे में हों: माया




लखनऊ: 'मजबूत' और 'प्रभावी' लोकपाल की मांग कर रहे अन्ना हज़ारे के समर्थन में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती भी कूद पड़ी हैं. हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री और सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने की वकालत करते वक्त अन्ना हज़ारे या टीम अन्ना का जिक्र तक नहीं किया.

मायावती ने मंगलवार को कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार के ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारी और सीबीआई लोकपाल के दायरे में आने चाहिए."

लोकपाल के मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों में जारी असहमति को दूर करने के लिए बुधवार को सर्वदलीय बैठक होनी है और इससे पहले मायावती के इस ऐलान से सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी की सिर दर्द बढ़नी तय है.

मायावती ने केंद्र सरकार के जरिए सीबीआई के दुरुपयोग को रोकने की वकालत करते हुए कहा कि इसे लोकपाल के दायरे में होना चाहिए.

उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं भी ताज कॉरिडोर मामले में सीबीआई के दुरुपयोग का शिकार हूँ."

मायावती का कहना था कि लोकपाल जैसे ही भ्रष्टाचार पर नजर रखना शुरू करेगा, राजनीति का अपराधीकरण खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा.

हालांकि, लोकपाल में सभी समुदायों के प्रतिनिधित्व के सवाल पर मायावती अपनी धुर विपक्षी पार्टी सपा से सहमत दिखी. मायावती ने कहा कि लोकपाल में सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए.

कालेधन मामले में कांग्रेस के टालमटोल रवैए का जिक्र करते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि सरकार 'मजबूत' और 'कारगर' लोकपाल लाने के लिए गंभीर नहीं है.

'कृष 3' की शूटिंग के दौरान घायल हुए ऋतिक रोशन





मुंबई
: बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन एक बार फिर से जख्मी हो गए हैं. ऋतिक 'कृष 3' की शूटिंग के दौरान राकेश रोशन को फिल्मीस्तान स्टूडियो में असिस्ट कर रहे थे, तभी अचानक गिर पड़े और उनके हाथ में चोट लग गई.

वहां मौजूद फिल्‍म यूनिट के एक सदस्‍य के मुताबिक, 'चोट लगने के बाद ऋतिक ने पहले तो स्टूडियो में फर्स्ट एड बॉक्स के जरिए जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें लगा कि चोट ज्‍यादा लगी है और इसके लिए किसी डॉक्‍टर को दिखाना पड़ेगा. उनका हाथ काफी छील गया था. इसलिए उन्होंने शूट से थोड़े समय के लिए ब्रेक ले लिया. सेट पर हर किसी को उनकी चिंता हो रही थी, लेकिन उन्‍होंने चोट की वजह से शूटिंग प्रभावित नहीं होने दी. '

यह घटना पिछले हफ्ते की है. इससे पहले अक्टूबर में 'अग्निपथ' की शूटिंग के दौरान रितिक की पीठ में चोट लगी थी. तब उन्हें इलाज के लिए ब्रीच कैंडी अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा था.

शराब और रफ्तार की शर्त ने लील लीं चार जिंदगियां

मुंबई। मुंबई से सटे नवी मुंबई के सबसे महंगे और पाश इलाके पाम बीच रोड पर शनिवार की रात नशे और रफ्तार के कहर ने चार नौजवान दोस्तों की जान ले ली। चारों दोस्तों ने जमकर शराब पी थी। साथ ही उन्होंने ये शर्त लगाई थी कि कौन-कितनी जल्दी 10 किमी लंबे एक्सप्रेस वे को पार करता है। कार की तेज रफ्तार का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार के टकराने के बाद पेड़ तने से टूटकर जमीन पर आ गिरा।

दरअसल इस कार में चार दोस्त सनी रमेश शर्मा(22), करणदीप हरजीत सिंह संधू(18), नीलेश भट्ट(21) और राजेश चव्हाण(21) बैठे थे। चारों दोस्त बीते शनिवार की रात नवी मुंबई के किलर वे माने जाने वाले पाम बीच रोड पर होंडा अकॉर्ड कार में जा रहे थे। इसी रोड पर इनकी कार हादसे का शिकार हुई और चारों की दर्दनाक मौत मौके पर ही इसी कार में हो गई। लेकिन इस हादसे के लिए कोई और नहीं वो चारों दोस्त खुद जिम्मेदार थे। पुलिस के मुताबिक जब ये हादसा हुआ तो चारों दोस्त कार में शराब पी रहे थे। कार से बरामद शराब की बोतलें पुलिस की बात की तस्दीक करती हैं कि चारों कार में शराब पी रहे थे। यही नहीं शराब के साथ रफ्तार की भी मिलीभगत थी। पुलिस के मुताबिक इनकी कार 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही कार ने अपना संतुलन खो दिया और कार हाइवे किनारे लगे एक पेड़ से जा टकराई और चारों दोस्त मौत के आगोश में समा गए।

पुलिस जांच में जो जानकारी निकलकर आई है उससे ये पता चलता है कि शराब, रफ्तार और एक शर्त ने चारों दोस्तों की जान ले ली। पुलिस के मुताबिक चारों दोस्त शराब के नशे में चूर थे। वो गाड़ी के अंदर ही बीयर पी रहे थे। पुलिस तफ्तीश में पता चला है कि जब उनकी गाड़ी शिवड़ी से वाशी की ओर जाने वाली पाम बीच रोड पर पहुंची तो उनमें एक शर्त लगी। चारों दोस्तों में शर्त लगी कि कौन कितनी जल्दी 10 किलोमीटर लंबे हाइवे को पार करेगा। हारने वाला दोस्त बाकी दोस्तों को बियर की पार्टी देने वाला था। कार को सबसे पहले राकेश चव्हाण ने चलाना शुरू किया। राकेश ने कार का क्लच दबाया और गियर बदला। इस खूबसूरत पाम बीच रोड पर कार की रफ्तार बढ़ती गई। 120 किलोमीटर प्रति घंटे के ऊपर कार ने अपनी रफ्तार को पार कर लिया। इस बीच उसके दोस्त उसे हौसला देते रहे। उसे कार की रफ्तार और बढ़ाने को उकसाते रहे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि असल में वो अपनी मौत को दावत दे रहे हैं। शराब और रफ्तार ने राजू पर अपना असर दिखाया। राकेश का संतुलन कार की स्टेयरिंग से छूट गया। कार बेकाबू हो गई और आगे एक तीखे मोड़ पर कार सड़क किनारे एक पेड़ से गोली की रफ्तार से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के धक्के से पेड़ टूटकर बिखर गया। हादसा इतना भयानक था कि ड्राइविंग सीट पर बैठे राकेश के पेट में स्टेयरिंग जा घुसी। बाकी तीनों दोस्तों के शरीर में कांच के शीशे जा घुसे। मौके पर ही चारों की मौत हो गई। चार दोस्त में से तीन कॉलेज में पढ़ते थे और एक नौकरी करता था। पुलिस के मुताबिक ये चारों दोस्त एक पार्टी से वापस लौट रहे थे। पार्टी में भी इन्होंने शराब पी थी। पार्टी से निकलते वक्त तो ये साधारण रफ्तार से कार चला रहे थे। लेकिन पाम बीच एक्सप्रेस वे पर पहुंचते ही इनके बीच शराब और रफ्तार का नशा इस कदर छाया कि इनकी जान ही चली गई। उन चारों दोस्तों ने तीन बड़ी गलती की।

पहली गलती

चारों दोस्तों की पहली गलती तो यही थी उन्होंने रेस लगाने की बचकानी शर्त लगाई। 10 किलोमीटर लंबे हाइवे को कम से कम वक्त में पार करने वाले विजेता को बियर की पार्टी देनी थी। ऐसी शर्त अक्सर मौत की शर्त होती है। रफ्तार की शर्त आपको चंद पलों का रोमांच तो दे सकता है लेकिन जिंदगी नहीं। रफ्तार का रोमांच उनकी जिंदगी पर भारी पड़ा।

दूसरी गलती


120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी फॉर्मूला वन जैसे रेसिंग ट्रैक पर चलाई जाती है। आम सड़क या हाइवे पर नहीं है। इतनी तेज रफ्तार को घातक बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। आम कारें इतनी तेज रफ्तार के लिए नहीं बनी होती हैं। इतनी तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के लिए काफी ट्रेनिंग की जरूरत होती है जो इन दोस्तों में नहीं थी।

तीसरी गलती

तीसरी सबसे बड़ी गलती उन्होंने ये कि उन्होंने शराब पी रखी थी। गाड़ी चलाते हुए शराब पीना गैर-कानूनी तो है ही, अपनी मौत को दावत भी देना है। इनकी कार के अंदर विस्की और बियर की कई बोतलें बरामद हुई हैं। इससे जाहिर होता है कि चारों दोस्तों ने काफी शराब पी थी। शराब पीकर गाड़ी चलाना अक्सऱ जानलेवा होता है। इतनी रफ्तार से गाड़ी चलाने के लिए मानसिक संतुलन का बने रहना काफी जरूरी होता है जो शराब के नशे में नहीं हो सकता।

पुलिस के मुताबिक चारों दोस्त पार्टी कर जब अपने-अपने घर लौट रहे थे। वीक एंड में उनकी छुट्टी थी। ऐसा भी पता चला कि किसी एक दोस्त या उसकी मंगेतर का जन्मदिन भी था। जिस पाम बीच रोड पर हादसा हुआ है वो बेहद चौड़ा और पुणे एक्सप्रेस वे की तरफ खूबसूरत और साफ रहता है। इस रोड़ पर 12 ऐसे खतरनाक मोड़ जिसपर जरा सी लापरवाही से कार हादसे का शिकार हो जाती है। पाम बीच रोड पर जहां ये हादसा हुआ है वहां के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक नवी मुंबई में इसी साल यानी 2011 में इस रोड पर अब तक 22 लोगों की मौत सड़क हादसे के चलते हो चुकी है और ज्यादतर घटनाओं में मरने वाले लोग नौजवान थे। यही नहीं, ज्यादातर हादसों में ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चला रहा था। भारत में सालाना करीब एक लाख 40 हजार सड़क हादसे होते हैं इनमें से 90 फीसदी मामले में ड्राइवर को ही दोषी माना जाता है और मुकदमा चलता है। सिर्फ आठ फीसदी मामलों में वाहन मालिकों को दोषी ठहराया जाता है। सड़क दुर्घटना में बढ़ती घटनाओं के बावजूद दोषियों को सजा का प्रतिशत मात्र दो हैं जिससे तेज गति से और शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले लोगों के मन में कानून का खौफ नहीं होता।

हमारे देश में शराब के साथ रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए कानून मौजूद हैं लेकिन ऐसा लगता है कि उस कानून का कोई खौफ नहीं है। इसकी वजह है इस कानून का बेहद कमजोर होना। मोटर वेहिकल एक्ट के तहत नशे में गाड़ी चलाने वाले दोषी की सजा मात्र 6 महीने की कैद या दो हजार रुपए जुर्माना है। दोबारा दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द हो जाता है। कुछ मामलों में पुलिस ने दुर्घटना के दोषियों पर आईपीसी की धारा 304 के तहत मामला तो दर्ज किया है। लेकिन ऐसे मामलों को कोर्ट में साबित कर पाना मुश्किल होता है। आईपीसी की धारा 279 यानी सार्वजनिक स्थल पर रफ्तार से गाड़ी चलाने में भी अधिकतम 6 महीने की सजा है और इसमें आरोपी को जमानत भी आसानी से मिल जाती है। आईपीसी की धारा 338 यानी जीवन को खतरे में डालकर नुकसान पहुंचाना या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने में भी दो साल की सजा का प्रावधान है और आरोपी को जमानत मिल जाती है।

इससे पहले भी तेज़ रफ्तार कारों ने क़हर बरपाया है।

10 सितंबर, 2008

दिल्ली के लाजपत नगर में एक BMW कार ने दो बाइक सवारों को टक्कर मार दी। आरोप लगा कि उद्योगपति नरेंद्र भसीन का बेटा उत्सव भसीन शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था। उसे जमानत मिल गई। हादसे के वक्त कार में उत्सव के अलावा उसकी एक महिला मित्र भी मौजूद थी।

9 अप्रैल 2006

बाइक और रफ्तार के शौकीन फिल्म अभिनेता जॉन अब्राहम का यही शौक उनके लिए महंगा पड़ गया। जॉन ने अपनी यामाहा बाइक से दो साइकिल सवारों को टक्कर मारी। टक्कर के वक्त जॉन उल्टी दिशा में मोटरसाइकिल चला रहे थे। दुर्धटना में दोनों लोगों को काफी चोटें आई। इस दुर्घटना को लेकर जॉन पर लापरवाही से गाड़ी चलाने का मुकदमा दर्ज किया गया।

10 दिसंबर 2005

सैफ अली खान ने भी अपनी कार से एक बच्चे को टक्कर मारी थी। इस हादसे में बच्चे की टांग टूट गई। लेकिन सैफ बच्चे को उठाकर खुद अस्पताल ले गए। और पुलिस स्टेशन में जाकर खुद जुर्म कबूल किया। सलमान पर गैर जिम्मेदार ढंग से गाड़ी चलाने का मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन अदालत ने सैफ को 5000 रुपए की जमानत पर छोड़ दिया।

28 सितंबर 2002

लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में सबसे बुरी तरह फंसे सलमान खान। रात 11 बजे के करीब सलमान अपनी लैंड क्रूसर कार में जा रहे थे। तेज रफ्तार गाड़ी सड़क के किनारे पटरी पर सो रहे लोगों पर चढ़ गई। इस हादसे में एक आदमी की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

10 जनवरी 1999

दिल्ली के लोधी कॉलोनी में देर रात एक बीएमडब्लू कार छह मासूम लोगों को कुचलती हुई निकल गई। कहा जाता है कि शराब के नशे में चूर कार चलाने वाला कोई और नही पूर्व नौ सेना अध्यक्ष एडमिरल एस एम नंदा का पोता संजीव नंदा था। संजीव को कुछ दिन जेल में गुजराने पड़े, और फिर अदालत के चक्कर काटते काटते इस केस ने ही एक तरह से दम तोड़ दिया। सभी गवाह एक के बाद एक अपने बयान से मुकरते चले गए। इस केस का अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।

सीआरपीएफ के 5 हजार से अधिक जवान एड्स से पीडि़त

दिल्‍ली। सरकार ने आज कहा कि देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ के पांच हजार से अधिक जवानों के विभिन्न रोगों से ग्रस्त होने की खबर मिली है जिसमें एड्स और कैंसर जैसे रोग शामिल हैं। लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सीआरपीएफ की 200 से अधिक बटालियन में तीन लाख पुरूष एवं महिला कर्मी कार्यरत हैं जिसमें इस वर्ष 175 जवानों की मौत की खबर मिली है।

मंत्री ने कहा कि बल में 5,404 जवानों के त्वचा, हृदय, मानसिक रोग, अवसाद, उच्च रक्तचाप, एड्स, कैंसर जैसे रोगों से ग्रस्त होने की जानकारी मिली है जिसमें 136 महिलाएं हैं। असम राइफल्स के,177 जवान, सीआईएसएफ के 472 जवान, एसएसबी के 375 जवान, आईटीबीपी के 161 जवान, बीएसएफ के 27 जवान और एनएसजी के आठ जवानों के रोगग्रस्त होने की सूचना मिली है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2011 के दौरान विभिन्न रोगों के कारण सीआरपीएफ के 175 जवानों की मौत हुई जिसमें तीन महिलाकर्मी शामिल है जबकि सीआईएसएफ के 69 कर्मी, असम राइफल्स के 35 जवान, बीएसएफ के 31 जवान, आईटीबीपी के 17 जवान और एसएसबी के तीन जवान विभिन्न रोगों की चपेट में आकर मरे। मंत्री ने बताया कि इस संबंध में सरकार ने 180 गोपनीय परामर्श एवं जांच केंद्र स्थापित किये है और विभिन्न बलों में समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
Topics: सीआरपीएफ, एड्स, लोकसभा, crpf, aids, lok sabha

अगर अन्ना नहीं सुधरे तो अंजाम बहुत बुरा होगा: राहुल टीम




हैदराबाद। रविवार को अन्ना हजारे ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ बयान बाजी क्या की, राहुल खेमे में आग लग गयी। ऱाहुल गांधी के समर्थकों ने खुलकर अन्ना और अन्ना टीम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल के समर्थक और आंध्र प्रदेश में राजनीति में बड़ा ओहदा रखने वाले हुनंमत राव ने कहा कि अगर अन्ना हजारे ने अपनी जबान नहीं संभाली तो अंजाम बहुत बुरा होगा। वही इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि अन्ना हजारे भाजपा के समर्थन पर कूद रहे हैं जो कि उचित नहीं है। भाजपा समेत अन्ना टीम राहुल गांधी फोबिया की शिकार हो गयी है।

राहुल के खिलाफ बयानबाजी से गुस्साये राहुल के समर्थकों में इस समय अन्ना हजारे को लेकर काफी रोष है। मंत्रियों ने अन्ना पर पैसे लेकर अनशन करने का आरोप लगाया हैं। उनका कहना है कि देश में और भी तो परेशानियां है अगर वो सही समाजसेवी हैं तो उन चीजों के लिए भी अनशन करें। वो उस समय कहां थे जब मुंबई में धमाके हुए थे और मासूम जनता मौत की शिकार। अपने जनलोकपाल बिल के लिए जिद पर अड़े अन्ना हजारे को अशोभनिय बातें शोभा नहीं देती है। उन्होंने लोकपाल को बहस और मजाक का मुद्दा बना दिया है।

जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो अन्ना समेत सभी विरोधी दलों को 'राहुल फोबिया' हो गया है तभी तो वो उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा को भी पता है कि एक बार राहुल अगर पीएम बने तो उसी बैंड बज जायेगी इसलिए वो अन्ना और अन्ना की टीम के साथ मिलकर राहुल गांधी के खिलाफ आग उगल रहे हैं। गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने अपने अनशन के एक दिन पहले मीडिया में कहा था कि अगर राहुल गांधी जैसे लोग पीएम बनते हैं तो देश अधंकार में चला जायेगा।

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

Saumya Tandon



Saumya Tandon

Saumya Tandon (3 November 1984)[1] is an Indian actress. Recently she co-hosted Zor Ka Jhatka: Total Wipeout (Based on the Wipeout format) with Shah Rukh Khan in 2011.[2][3][4] She was the host for Dance India Dance. She starred in the Imtiaz Ali directed movie Jab We Met, starring Shahid Kapoor and Kareena Kapoor, where she plays the role of Kareena's sister, Roop. She is also known for her role in the Sony TV aired soap Aisa Des Hai Mera, where she plays the role of a half-Brit girl named Rusty.

Early life
This article needs additional citations for verification. Please help improve this article by adding citations to reliable sources. Unsourced material may be challenged and removed. (February 2010)

She was born on 3 November 1984 and studied until fifth standard in Delhi before completing her schooling at St. Mary's convent in Ujjain. Her father, Dr. B. G. Tandon, was a Professor and Head of the Department of English at Vikram University in Ujjain and was an authority on Shakespearean literature who wrote 17 books on different branches of English literature. She is a poet and collection of self composed poems was published in the form of a book called "Meri Bhavnayein" which was nominated for Modi young writer national award.[5]

Career Modelling and soaps

Saumya took up modelling assignments early in her career. She has done ad films and have been the first runner-up at a Femina Cover Girl contest. She auditioned for the role of Rusty in Aisa Des Hai Mera in 2005 and got it in early 2006.She is now anchoring a popular reality show on Zee TV called Dance India Dance.

Saumya is also the on ground host of the show Zor Ka Jhatka, which premiered on 1 February 2011. It is the Indian version of one of the biggest international game shows called Wipeout, hugely successful in US and UK. The show is being shot in Buenos Aires with a bunch of Indian television and sports “personalities”. Shahrukh Khan anchors the show from the confines of a closed studio, while Saumya Tandon holds the fort on-location.

Now she is hosting the next edition of comedy circus named comedy circus ke taansen.Which will be judged by Archana Puran Singh and Daler Mehndi.

Movies

Saumya made her movie debut in the Imtiaz Ali directed romantic movie Jab We Met, starring Kareena Kapoor and Shahid Kapoor. She plays the role of Roop, Kareena's sister. She also acted in a 30 minute festival film produced by a Canadian production house Maya, where she has as her co-star Khalid Siddiqui, who acted in the movie Joggers' Park. Currently she is working in a Punjabi film Welcome to Punjab starring Sarabjit Cheema.

Dance India Dance - seasons one and two
Saumya's appearance as a host of the best ever dancing show Dance India Dance in the history of Indian Tele Industry till year 2010 has rocked the show. Her expressions and humor are just the perfect blend of beauty and mind. Recently she was awarded best anchor on Indian television for 2010.

Saumya Tandon is an Indian television actress and was also seen in Jab We Met by Imtiaz Ali where she played the role of Kareena Kapoor’s sister Roop.

Basics

Saumya Tandon was born on 3rd November 1979. Her father Dr B.G.Tandon was a professor of Vikaram University in Ujjain and is also the Head of the English Department. He has written many English Literature books on different branches. She finished her schooling from St.Mary's convent,Ujjain. and loves Jagjit Singh's music and loves poetry.

Television Saumya Tandon was noticed in her soap Aisa Des Hai Mera where she played a half British girl Rusty who visits her hometown in India. She has also played a negative role in Meri Awaz Ko Mil Gayi Roshni on Star Plus as Ria. She recently hosted a dance show on Zee TV, Dance India Dance, with co-host Jai Bhanushali.Geet (Kareena Kapoor) pairs Roop (Saumya Tandon), her younger sister with Aditya Kashyap (Shahid Kapoor) but destiny has a different game plan for all three. Saumya flaunted a without makeup look in this blockbuster hit of 2007. The whistle blowing Roop who danced with no holds bar on the song Nagada made a memorable impact.

Celebrity Details
Name: Saumya Tandon
Birthday: Saturday, Nov 03 1984
Star Sign: Scorpio
Parents:
Sisters:
Brothers:
Address: -
First Film: Jab We Met
Nature:
Clothing Style:
Plus Points:


Biography

Saumya Tandon is an Indian actress. She is known for her role in the Sony TV aired soap Aisa Des Hai Mera, where she plays the role of a half-Brit girl named Rusty. Recently she starred in the Imtiaz Ali directed movie Jab We Met, starring Shahid Kapoor and Kareena Kapoor, where she plays the role of Kareena's sister, Roop. She is currently a host for Dance India Dance. Her official website is saumyatandon.net Saumya did her 5th Standard Education in Delhi. Her dad Dr.B.G.Tandon was a Professor and Head of the Department of English in Vikaram University in Ujjain and was a learned speaker and an authority on Shakespearean Literature.He wrote 17 books on different branches of English Literature. She is an ardent Jagjit Singh fan and Poet writer .She was born on 3 November 1979.She completed her schooling from St.Mary's convent,Ujjain. Saumya took up modelling assignments early in her career. She has done ad films and have been the first runner-up at a Femina Cover Girl contest. She auditioned for the role of Rusty in Aisa Des Hai Mera in 2005 and got it in early 2006. She also shot for a music video, titled Barsaat (composed by Pravin Bharadwaj) and shall also be seen in the soap Meri Awaz Ko Mil Gayi Roshni on Star Plus as Ria. She is now anchoring a popular reality show on Zee TV called Dance India Dance. This is the highest rated non-fiction show on Indian television right now.


She has also acted in a short movie by a Canadian production house opposite Khalid Siddiqui.

Saumya Tandon Movies as Actor

Jab We Met (2007) - Roop Dhillon

कमेंट्स नहीं सुन सकती : सौम्या टंडन

अगर हम नाम सौम्या टंडन का लेंगे, तो शायद आप उन्हें न पहचान पाएं। लेकिन 'जब वी मेट' में करीना कपूर की कजिन रूप और सीरियल 'ऐसा देश है मेरा' की रस्टी व 'मेरी आवाज को मिल गई रोशनी' की रिया की बात होगी, तो आपको सौम्या का प्यारा-सा चेहरा जरूर याद आ जाएगा। एक्टिंग में अपना टैलंट दिखाने के बाद सौम्या इन दिनों जीटीवी का डांस शो 'डांस इंडिया डांस' होस्ट कर रही हैं। बेशक यहां भी वह अपने सहजता भरे अंदाज के लिए खूब पसंद की जा रही हैं। वैसे, बताते चलें कि सौम्या मॉडलिंग और विडियो अलबम्स में भी काम कर चुकी हैं।

अब सौम्या इतना कुछ ट्राई कर चुकी हैं, लेकिन इन सब चीजों में से उन्हें सबसे ज्यादा क्या पसंद है? वह कहती हैं, 'मेरी पहली पसंद हमेशा से ऐक्टिंग रही है और इसके लिए मैंने मेहनत भी खूब की है। मैं बचपन से ही ऐक्टिंग के बारे में सोचा करती थी, हालांकि मेरी पढ़ाकू इमेज के चलते इस बात को लेकर कभी कोई सीरियस ही नहीं हुआ।' दरअसल, सौम्या को किताबों से बहुत लगाव है, जो उन्हें अपने पापा से मिला है।

बॉलिवुड की एक फिल्म में छोटा लेकिन अहम रोल करने के बाद अब उनके इरादे क्या हैं? इसके जवाब में वह कहती हैं, 'फिल्मों में काम करके पहचान बनाना कौन नहीं चाहता। अगर कोई अच्छा ऑफर आएगा, तो जरूर करूंगी, लेकिन बेकार के रोल करने से बेहतर मैं और रास्ते खोजना चाहूंगी। 'जब वी मेट' के बाद मेरे पास कुछ ऑफर्स थे, लेकिन मुझे कुछ पसंद नहीं आया। फिर 'डांस इंडिया डांस' को एंकर करने का मौका मिला और अब इसे खूब एंजॉय कर रही हूं। मैंने अपने लिए तमाम नए रास्ते खोल रखें हैं। जहां मुझे अच्छा चांस मिलेगा, वह जरूर करूंगी।'

हालांकि सौम्या फिलहाल डांस शो के लिए एंकरिंग कर रही हैं, लेकिन ऐसे किसी शो में हिस्सा लेने का अभी तक उनका कोई इरादा नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें डांस का शौक तो है, लेकिन इस हद तक नहीं कि वह दूसरों के सामने परफॉर्म कर सकें और ना ही उनमें अपनी परफॉर्मेंस को लेकर कमेंट्स सुनने की हिम्मत है। छोटे पर्दे पर रियलिटी शोज के क्रेज के बारे में पूछने पर उनका कहना है, 'ऐसे शोज में बहुत सारे फैक्टर्स होते हैं, जो दर्शकों को लुभाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे शोज उन युवाओं के लिए लकी साबित होते हैं, जिनमें टैलंट तो होता है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के रास्ते नहीं होते।'

वापसी से खुश सौम्या टंडन

ज़ी टीवी के डांस शो लक्स डांस इंडिया डांस का हश्र जो चाहे रहा हो पर उसमें एंकर बनी अभिनेत्री सौम्या टंडन टीवी पर अपनी वापसी से खासी खुश हैं। इससे पहले वे सोनी के ऐसा देस है मेरा में रस्टी की मुख्य भूमिका में दिखाई दी थीं और उसके बाद इम्तियाज अली की जब वी मेट में करीना की बहन की भूमिका में। उनका मानना है कि चाहे टीवी हो या फिल्म वे बस काम करना चाहती हैं। हालांकि शो के दौरान उनके सहएंकर जय भानुशाली और एक प्रतियोगी टेरेंस लुइस के साथ दोस्ती से आगे तक की कुछ खबरें भी आती रहीं पर सौम्या कहती हैं, ‘जब हम ऐसे क्षेत्र में काम करते हैं तो ऐसी बेबुनयादी खबरों का आना जाना लगा रहता है। पर इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी से पे्रम कर रहे है । यह दोस्ती का मामला भी हो सकता है ना। ’

मैं खुश हूं अपने काम से: सौम्या टंडन



सीरियल ऐसा देश है मेरा से अपने करियर की शुरुआत करने वाली सौम्या टंडन चर्चा में आई शाहिद कपूर-करीना कपूर अभिनीत फिल्म जब वी मेट में करीना की बहन का रोल करके। इन दिनों वे छोटे पर्दे पर बेहद सेक्सी अंदाज में जी टीवी के चर्चित रियलिटी शो डांस इंडिया डांस की ऐंकरिंग कर रही हैं। इसके पहले भाग में भी वे ही ऐंकर थीं। बातचीत सौम्या से..

काफी गैप के बाद आप चर्चा में आई हैं?

चर्चा में आना तभी अच्छा लगता है, जब आपके पास अपने काम के बारे में कहने के लिए कुछ हो। मैं खुश हूं अपने काम से।

टीवी सीरियल के बाद फिल्में, वीडियो एलबम और ऐंकरिंग करने के पीछे कोई रणनीति है क्या?

रणनीति बहुत बड़ी बात है। दरअसल, प्लानिंग में मेरा कभी विश्वास नहीं रहा। बस, मोटे तौर पर हमें यह पता होना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं और किस लिए कर रहे हैं, यही बहुत है। मैं मेहनत करने में विश्वास करती हूं और अच्छे रिजल्ट की उम्मीद करती हूं। बाकी सब ईश्वर पर छोड़ देती हूं। दूसरी बात, काम हमेशा काम होता है, इसलिए सीरियल, फिल्म, वीडियो या ऐंकरिंग के आधार पर मेरी सोच नहीं बदलती। मैं विश्वास के साथ काम करती हूं।

ऐसा देश है मेरा के बाद आपको सीरियलों में कई ऑफर मिले, लेकिन..?

उनमें मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा, इसलिए मैंने करने से मना कर दिया। हालांकि इसी बहाने कुछ वक्त अपनी फैमिली के साथ रहने का मौका मिल गया, जो नहीं मिल रहा था। इससे एक ताजगी का अहसास हुआ। अब मैं फिर से अपने काम में व्यस्त हूं।

फिल्म जब वी मेट में आप करीना की बहन के रोल में दिखीं, जबकि आप सुंदर हैं..?

तो क्या हुआ? बहन का रोल करना कोई गलत बात है क्या..? मैंने इम्तियाज अली की फिल्म सोचा न था देखी थी। वह मुझे बहुत अच्छी लगी। जब इस रोल के लिए उन्होंने फोन किया, तो मुझे अच्छा लगा। सभी जानते हैं कि फिल्म में मेरा बहुत लंबा रोल नहीं था, लेकिन दिलचस्प जरूर था। मुझे यह रोल करने में मजा आया। ऐसा इसलिए, क्योंकि मैं इम्तियाज के साथ काम करना चाहती थी।

हीरोइन की बहन का रोल करने से लोगों में आपकी इमेज क्या बनेगी, इस बारे में तब नहीं सोचा?

मैंने इस बारे में कभी नहीं सोचा। मुझे विश्वास था कि इसमें मुझे सफलता जरूर मिलेगी। वैसे भी इमेज को लेकर मैं कभी परेशान नहीं होती, क्योंकि यकीन इस बात में है कि लोगों को काम पसंद आना चाहिए, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो।

फिल्मों में आगे भी ऐसे ही रोल करेंगी या..?


ऐसे ही मतलब..? वही रोल करूंगी, जो मुझे लगेगा कि करना चाहिए। अगर मैं सोचूं कि मुझे हीरोइन वाले लीड रोल मिल जाएं, तो यह सोच अच्छी नहीं होगी। मेरा मानना यही है कि यदि रोल दिलचस्प हो, तो लेंथ नहीं देखूंगी। बाकी ऐसे मामलों में दिमाग खुला होना चाहिए। वैसे, रोल जो ऑफर होगा, सुनकर ही फैसला करना ठीक होता है।

आप नया और क्या कर रही हैं?


लोगों को पता होगा कि मैं पिछले दिन चाइना गई थी एक ब्यूटी प्रोडक्ट को लॉन्च करने। यह काम किसी भारतीय ऐक्ट्रेस ने अभी तक नहीं किया था। इस काम के लिए मैं पहली ऐक्ट्रेस हूं, जो चाइना गई। एक पंजाबी फिल्म भी पिछले दिनों मैंने साइन की है। इसकी शूटिंग जुलाई-अगस्त में शुरू होगी और शूटिंग इंडिया के साथ ही लंदन और कनाडा में भी होगी। फिल्म के बारे में मैं विस्तार से अभी नहीं बता सकती।

निजी जिंदगी में कोई हलचल। कोई एंट्री?

फिलहाल दिल विच किसी की एंट्री नहीं हुई है। मैं सिंगल ही हूं। वैसे, किसी की दिल में एंट्री के लिए सोचना नहीं पड़ता। जब होना होगा, किसी से भी पलक झपते हो जाएगा और लोगों को पता भी नहीं चलेगा।

सौम्या टंडन: चकित करती है सुंदरता



सीरियल ऐसा देश है मेरा से अपने करियर की शुरुआत करने वाली सौम्या टंडन अपने म्यूजिक वीडियो को लेकर भी चर्चा में रहीं। उन्होंने शाहिद -करीना अभिनीत फिल्म जब वी मेट में करीना की बहन का रोल किया था। वे एक शॉर्ट फिल्म में भी दिखीं। अब सौम्या छोटे पर्दे पर बेहद सेक्सी अंदाज में दिख रही हैं। वे जी टीवी के चर्चित रियलिटी शो डांस इंडिया डांस की ऐंकरिंग कर रही हैं। पिछले दिनों सौम्या से बात हुई फैशन को लेकर। वे बता रही हैं फैशन के बारे में अपना नजरिया..

फैशन के बारे में आप दूसरों से प्रेरित होती हैं?

नहीं, मैं हमेशा वही पहनती हूं, जो मुझे अच्छा लगता है। लोग यह कहते जरूर हैं कि खाओ अपने मन का और पहनो दूसरों के अनुसार, लेकिन मैं इस बात में यकीन नहीं करती।

किसी ड्रेस को पहनने के लिए खुद निर्णय लेती हैं?

बिल्कुल। मैं वैसी ही ड्रेसेज पहनती हूं, जिन्हें पहनकर कम्फर्टेबल महसूस करूं।

कैसी ड्रेसेज में आप खुद को कम्फर्टेबल महसूस करती हैं?

नॉर्मल ड्रेसेज में। मैं ज्यादातर जीन्स-टॉप पहनकर कम्फर्ट फील करती हूं।

क्या आप भी नए फैशन की ओर आकर्षित होती हैं?

हां, देखती हूं कि किसी ड्रेस में कोई यदि अच्छा लग रहा है, तो मैं भी अच्छा कहती हूं।

आपकी नजर में फैशन क्या है?

जिसे पहनने के बाद इंसान अच्छा लगे, वही फैशन है। किसी ड्रेस को पहनकर यदि कोई अच्छा नहीं लगता, तो उसे फैशन कहना ठीक नहीं होगा।

ड्रेसेज में आपको कौन सा रंग भाता है?

हल्के गुलाबी रंग। मेरे पास ज्यादातर ड्रेसेज इसी रंग के हैं।

किसी को बढि़या पहनावे में देखकर आपका मन क्या कहता है?

वाह, कितना सुंदर लग रहा है या लगी रही है। सुंदरता है ही ऐसी चीज। यह लोगों को चकित कर देती है।

व्यक्तित्व को संवारने में पहनावा कितनी भूमिका निभाता है?

हां, पर्सनैल्टी निखारने में ड्रेसेज की भी अहम भूमिका होती है। तभी इंसान खूबसूरत दिखता है।

आपको छोटे और तंग ड्रेसेज अच्छे लगते हैं?


नहीं, लेकिन कभी-कभी ऐसा करना जरूरी हो जाता है, तो पहन लेती हूं।

फैशन के नाम पर अंग प्रदर्शन करना सही है?

नहीं, लेकिन हम जिस फील्ड में हैं, यदि सीन की मांग है, तो हमें एक कलाकार के नाते वैसा करना ही चाहिए, लेकिन एक सीमा तक..।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

लालकृष्ण आडवाणी बनेंगे प्रधानमंत्री





लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 में प्रात: 9.16 बजे पाकिस्तान में हुआ। उनके जन्म के समय आश्विनी नक्षत्र चल रहा था। इस प्रभाव से आडवाणी भाग्यशाली, कुशल, सफल एवं आर्थिक संपन्न है। भारी शरीर भी नक्षत्र का ही असर है।

आडवाणी की पत्रिका के अनुसार जन्म के समय चंद्र की स्थिति भागदौड़ कर लाभ कमाने वाला बनाती है। साथ ही लोभी स्वभाव का भी बनाती है। मंगल की स्थिति के कारण ही लालकृष्ण प्रबल पराक्रमी होते हुए भी कार्यों की विफलता के कारण दुखी एवं चिंतित रहते हैं।

जन्म के समय में गुरु मीन राशि पर परिभ्रमण कर रहा था। गुरु के कारण आडवाणी आज पार्टी के विशेष पद पर विराजमान है।

कुंडली में बैठे शुक्र क‍ी स्थिति हर सुख प्रदान करती है। यही स्थिति क्रीड़ा कौतुक पसंद करने वाला भी बनाती है। शुक्र के कारण ही कई बार आडवाणी अपने बयानों के कारण विवादों में आ जाते हैं। अपने गुण व कीर्ति का ह्रास करते है, पार्टी के खास और नज‍दीकी लोगों को अपना बैरी बना लेते हैं। अत: आडवाणी को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

कुंडली में शनि की स्थिति आडवाणी को कटुभाषी बनाती है। राहु का प्रभाव आपको वायु एवं रक्त संबंधी तकलीफ दे सकता है।

लालकृष्ण आडवाणी को वर्तमान में शनि की महादशा चल रही है। इसकी अवधि 19 वर्ष है। यह 20-10-2009 से आरंभ हुई है और 20-10-2028 तक रहेगी। शनि की महादशा में वर्तमान बुध की अंतर्दशा 19-9-2011 से 20-5-2014 तक रहेगी। इसके बाद केतु की अंतर्दशा भी 20-5-2014 से 6-6-2015 तक रहेगी।

लालकृष्ण आडवाणी के लिए शनिवार का दिन विशेष शुभ है। शनिवार को लालकृष्ण आडवाणी सर्वोच्च कार्य करें तो सफलता दिलाएगा। नवंबर-दिसंबर का माह ठीक रहेगा। जनवरी 2012 से मार्च तक आपत्तिवाला समय रहेगा। विपक्षी दल एवं स्वयं की पार्टी का विरोध हो सकता है। अप्रैल 2012 में स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। मई-जून ठीक रहेगा। जुलाई, अगस्त, सितंबर अच्छा रहेगा।

Horoscopes of LK Advani
Shri Lal Krishna Advani was born on 8th November 1927 At 9.16am. The Planetary Position At The Time Of Birth Is Chandra In Mesha, Rahu In Vrushaba, Sukra In Kanya, Ravi, Budha And Kuja In Tula, Lagana Vruschica With Combination Of Saturn And Ketu And Guru In Meena Rasi. Shri Advani Is Right Now Running A Very Favourable Guru Mahadasa And Sub Dasa Is Chandra Up to 30.04.2005. A Well Placed Planetary Position And Excellent Guru Dasa And Antar Dasa Will Bring Laurels To Him. Despite His Good Period Running Caution Is Advised On Health Front. It Is Very Indicative That The Day Is Not Too Far For Him To Reach The Highest Position Of The Country. In My Personal Analysis That More Favourable Things Will Take Place Only From 31st March 2003.

रविवार, 4 दिसंबर 2011

8 नए ग्रहों का पता लगा


वाशिंगटन :
खगोलविदों ने ब्रह्मांड में 18 नए ग्रहों का पता लगाने का दावा करते हुए कहा है यह सूर्य से विशाल तारों के इर्दगिर्द पाए जाने वाले सबसे बड़े ग्रह हैं।



केलीफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाले एक दल ने ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल सप्लीमेंट सिरीज’ में इनका उल्लेख किया है। दल के अगुआ जान जानसन ने कहा, ‘‘केपलर मिशन की खोज के बाद यह सूर्य से विशाल तारों के इर्दगिर्द कक्षा में पाये जाने वाले ग्रहों के बारे में सबसे बड़ी घोषणा है।’’ हवाई में केक बेधशाला टेक्सास में मैक्डोनाल्ड बेधशाला और एरीजोना में फेअरबार्न बेधशाला के इस्तेमाल से खगोलविदों ने करीब 300 तारों का निरीक्षण कर यह पता लगाया।



उन्होंने अपना ध्यान सूर्य से डेढ़ गुना से भी विशाल तारों पर केन्द्रित किया जिन्हें ‘रिटायर्ड ’ ए-टाइप नाम दिया गया । इन तारों ने अभी अभी अपने जीवन का मुख्य चरण पूरा किया है लिहाजा उन्हें ‘रिटायर्ड ’ संज्ञा दी गई।


दल का दावा है कि जो 18 ग्रह नजर आए हैं उनका द्रव्यमान बृहस्पति के बराबर है। जानसन के अनुसार इस खोज से विशाल तारों की परिक्रमा करने वाले ज्ञात ग्रहों की संख्या में 50 प्रतिशत इजाफा हुआ है। जानसन ने कहा कि इन खोजों से यह जानने में मदद मिलती है कि ग्रह और हमारा खुद का सौर मंडल कैसे बनता है । इससे उस सिद्धान्त को बल मिलता है कि नवजात तारे के आसपास की गैस और धूल कणों से ये विकसित होना शुरू करते हैं।

भारतीयों के पास 950 अरब डॉलर का सोना





नई दिल्ली : भारतीयों का सोने से लगाव जगजाहिर है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों के पास 950 अरब डॉलर (49,400 अरब रुपए) मूल्य का सोना है। वैश्विक अनुसंधान फर्म मैकक्वैरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना रखना देश की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीन का नंबर उसके बाद आता है।



रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों के पास 18,000 टन सोना है, जो सोने के वैश्विक भंडार का 11 प्रतिशत है और मौजूदा मूल्य के हिसाब से यह 950 अरब डॉलर का बैठता है।यह सोना डॉलर मूल्य में भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत है। मैकक्वैरी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2009-10 में भारतीयों परिवारों की कुल बचत 329 अरब डॉलर थी। इसमें से सात से आठ फीसद निवेश सोने में किया गया था। सोने को श्रृंगार से अधिक सम्पत्ति रखने का साधन के रूप में देखा जाता है। इस वजह से इस समय सोने के दाम बढ़ने से भारतीय परिवारों की इस अनुमानित स्वर्ण संपत्ति का मूल्य भी बढ़ा है।



रिपोर्ट में यह शब्द इसलिए इस्तेमाल किया गया है क्योंकि आम भारतीय परिवार संकट के समय भी सोने के आभूषण या सोना नहीं बेचते, क्योंकि ऐसा किए जाने को वे सही नहीं मानते। दिलचस्प बात यह है कि जनवरी, 2010 से सितंबर, 2011 के बीच देश में सोने की कीमतों में 64 फीसद का इजाफा हुआ है। इसके बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 की पहली तीन तिमाहियों में सालाना आधार पर सोने की खपत में पांच फीसद का इजाफा हुआ है। 2010 में सालाना आधार पर सोने की मांग 72 प्रतिशत बढ़ी थी।



हालांकि, सितंबर, 2011 को समाप्त तिमाही में मात्रा के हिसाब से सोने की मांग पिछले साल की तुलना में 23 फीसद कम रही है। इसकी मुख्य वजह रुपये में गिरावट है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सोने की खपत बढ़ना रुपये में गिरावट की मुख्य वजह है। मैकक्वैरी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2007-08 से 2010-11 के दौरान अकेले सोने के आयात ने ही देश के चालू खाते के घाटे (सीएडी) में 1.3 प्रतिशत वृद्धि में 0.4 से 1.3 प्रतिशत का योगदान किया है।



कच्चे तेल और पूंजीगत सामान के बाद देश के आयात के मामले में सोना तीसरे नंबर पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2010 में देश में 92 फीसद सोने की आपूर्ति शुद्ध आयात से पूरी की गई और शेष रीसाइकिल्ड गोल्ड और अन्य स्रोतों से की गई। भारत में रुपये में कमजोरी की एक मुख्य वजह बड़ा चालू खाते का घाटा है। वहीं अन्य एशियाई देशों में चालू खाते के अधिशेष की स्थिति है। मैकक्वैरी ने कहा, 2011-12 में देश का चालू खाते का खाता उच्च स्तर जीडीपी के 2.8 प्रतिशत पर रहेगा।

चला गया हिंदी सिनेमा का ‘गाइड’




मुंबई: बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देववानंद का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले में 26 सितंबर, 1923 को हुआ था। उनका बचपन का नाम देवदत्त पिशोरीमल आनंद था। बचपन से ही उनका झुकाव अपने पिता के पेशे वकालत की ओर न होकर अभिनय की ओर था। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपनी स्नातक की शिक्षा 1942 में लाहौर के मशहूर गवर्नमेंट कॉलेज से पूरी की।



क्लर्क से शुरू हुआ करियर
देव आनंद को अपनी पहली नौकरी मिलिट्री ऑफिस में एक लिपिक के तौर पर मिली जहां उन्हें सैनिकों द्वारा लिखी चिट्ठियों को उनके परिवार के लोगों को पढ़ कर सुनाना पड़ता था। इस काम के लिए देव आनंद को 165 रूपये मासिक वेतन के रूप में मिला करता था। लगभग एक वर्ष तक मिलिट्री सेन्सर में नौकरी करने के बाद वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास मुंबई आ गए। चेतन आनंद उस समय भारतीय जन नाटय संघ इप्टा से जुड़े हुए थे। उन्होंने देव आनंद को भी अपने साथ इप्टा में शामिल कर लिया।



‘हम एक हैं’ से फिल्मी करियर की शुरुआत
देव आनंद को पहला ब्रेक 1946 में प्रभात स्टूडियो की फिल्म ‘हम एक हैं’ से मिला लेकिन इस फिल्म के असफल होने से वह दर्शकों के बीच अपनी पहचान नहीं बना सके। वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म जिद्दी देव आनंद के फिल्मी कॅरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई। इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया और नवकेतन बैनर की स्थापना की। वर्ष 1954 में देव आनंद ने उस जमाने की मशहूर अभिनेत्री कल्पना कार्तिक से शादी कर ली।



मील का पत्थर साबित हुई ‘गाइड‘

देव आनंद ने हॉलीवुड के सहयोग से हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में फिल्म गाइड का निर्माण किया जो देव आनंद के सिने कॅरियर की पहली रंगीन फिल्म थी। इस फिल्म के लिए देव आनंद को उनके जबर्दस्त अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया। वर्ष 1970 में फिल्म प्रेम पुजारी के साथ देव आनंद ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गई बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद वर्ष 1971 में फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का भी निर्देशन किया जिसकी कामयाबी के बाद उन्होंने अपनी कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। इन फिल्मों में हीरा पन्ना, देश परदेस, लूटमार, स्वामी दादा, सच्चे का बोलबाला, अव्वल नंबर जैसी फिल्में शामिल हैं।

देव आनंद को अपने अभिनय के लिए दो बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। देव आनंद को सबसे पहला फिल्म फेयर पुरस्कार वर्ष 1950 में प्रदर्शित फिल्म काला पानी के लिए दिया गया। इसके बाद वर्ष 1965 में भी देव आनंद फिल्म गाइड के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए। वर्ष 2001 में देव आनंद को भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 2002 में उनके द्वारा हिन्दी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।