बुधवार, 21 मार्च 2018

मर्यादा पुरुषोत्तम राम: एक ज्योतिषीय परिक्रमा

ब्रह्माण्ड नायक प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव पर
मर्यादा पुरुषोत्तम राम: एक ज्योतिषीय परिक्रमा

पंडित पीएन भट्टअंतरराष्ट्रीय ज्योतिर्विद,
अंकशास्त्री एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ


सृष्टि संचालक विराट महापुरूष की सूर्य व चन्द्रमा के समान ये दोनों आँखें, सम्पूर्ण मानव सभ्यता को प्रेरणा देती रहेंगी। मर्यादा पुरूषोत्तम राम युग-युगांत तक याद किये जायेंगे। भगवान श्रीराम राघवेन्द्र थे। इनका जन्म अयोध्या में हुआ। वे समस्त भारत भू-मण्डल के चक्रवर्ती सम्राट कहलाते थे। सूर्यवंशीय श्रीराम चैत्र शुक्ल, नवमीं, दिन को ठीक 12 बजे अभिजित मुहूर्त में अवतीर्ण हुए।
भगवान श्रीराम की कुण्डली में सूर्य, मंगल, गुरू, शनि उच्च राशिगत् तथा चन्द्र स्वक्षेत्री थे। भगवान राम का जन्म चर लग्न में हुआ। उनकी जन्म पत्रिका के चारों केन्द्रों में उच्च के ग्रह पंच महापुरूष के योग का निर्माण कर रहे हैं। वृहस्पति से हंस योग, शनि से शश योग, मंगल से रूचक योग का निर्माण हो रहा है। लग्नस्थ कर्क राशिगत् गुरु और चन्द्र गज केसरी योग। कर्क लग्न में सप्तमस्थ उच्च राशिगत् मंगल, पंचमेश और राज्येश बनकर प्रबल राजयोग बना रहे हैं। सूर्य उच्च राशिगत् होकर राज्य भाव (कर्म भाव) में होने से भगवान राम चक्रवर्ती बने। उन्होंने युगों तक राज्य किया। भगवान श्रीरामचन्द्र जी की जन्म कुण्डली पर अपनी अल्प बुद्धि से ज्योतिषीय विवेचना का प्रयास किया। विद्वत्जन से आग्रह है त्रुटियों को क्षमा करें। भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर प्रस्तुत है, बड़े विनम्र भक्तिभाव से, यह ज्योतिषीय कलेवर, कौतुकता से इसे निहारें। प्रभु श्रीराम अनंतकाल तक सभी जातकों की रक्षा करें।
भगवान श्रीराम की जन्म कुण्डली
प्रभु श्रीराम की कुण्डली के दसम् भवन में सूर्य उच्च राशि में विराजमान हैं। सूर्य 12 कलाओं में मर्यादित हैं, फलतः श्रीराम का चरित्र मर्यादित है। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम भी कहा गया है। वे सत्य वक्ता थे। उनके मुख से जो वचन निकल गया, वह सत्य होता था, पूर्ण होता था, अमोघ होता था। महाकवि तुलसीदास जी ने रामायण में लिखा है - रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाहि पर वचन नहीं जाही। सूर्य, दसम भवन में राज्य कीर्ति का कारक ग्रह भी है अस्तु, प्रभु राम चाहे वे अयोध्या में रहे हों या अपने विद्याकला में गुरु वशिष्ठ के गुरूकुल में अथवा वन में या चक्रवर्ती सम्राट के रूप में अयोध्या में रहे हों। उनकी यश, कीर्ति, न्याय व्यवस्था मानव सभ्यता में सदैव स्तुत्यनीय तथा अनन्तकाल तक कीर्ति पताका दिग्दिगंत तक फहराती रहेगी।
प्रथम भवन:
दशरथ नंदन श्रीराम की जन्म कुण्डली में चन्द्रदेव स्वक्षेत्री होकर कर्क लग्न में, उच्च राशिगत् देवगुरु वृहस्पति के साथ विराजमान होकर कह रहे हैं कि यह जातक तन, मन से विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न होकर सुदर्शनीय तो होगा ही, साथ ही शील तत्व, स्वभाव, कार्यकुशलता की दृष्टि से एक ऐसे विराट व्यक्तित्व का धनी होगा, जिसे विश्व मानव समाज श्रद्धामयी दृष्टि से अपलक निहारता हुआ राममय हो जायेगा।
द्वितीय भवन:
भरताग्रज श्रीराम की कुण्डली के द्वितीय भवन का स्वामी नवग्रहों का राजा सूर्य विराजमान हैं राज्य भवन में। सूर्य कुलभूषण श्रीराम इक्ष्वाकु वंश की महानता को कल-कल करती गंगा की तरह सदैव यशस्वी बनाये रखेंगे।
ज्योतिषीय ग्रंथों में द्वितीय भवन से जातक के नाक, कान, नेत्र, मुख, दंत, कण्ठ स्वर, सौन्दर्य, प्रेम आदि से जातक के व्यक्तित्व को देखा जाता है। भगवान श्रीराम सौन्दर्य की अद्भुत प्रतिमा तथा प्रेम के अर्थ को समझने के लिए तीनों माताओं के प्रति श्रद्धा, भाईयों के प्रति अगाध स्नेह, सुमंत से लेकर समस्त अयोध्यावासियों के प्रति कर्तव्यपरायणता, सुग्रीव, विभीषण आदि अनगिनत मित्रों के प्रति चिरस्मरणीय स्नेहमूर्ति तथा भार्या जनकनंदिनी सीता जी के प्रति अलौकिक प्रीति से ही उन्होंने लंकापति रावण से युद्ध की अनिवार्यता स्वीकारी थी।
तृतीय भवन:
पवन पुत्र हनुमानजी के इष्ट प्रभु श्रीराम की कुण्डली के तृतीय भवन में कन्या राशिगत् स्वक्षेत्री राहू विराजमान हैं। तृतीय भवन बन्धु, पराक्रम, शौर्य, योगाभ्यास, साहस आदि का मीमांसा का भवन है। भगवान श्रीराम का शौर्य, पराक्रम तो राम-रावण के भीषण युद्ध में परिलक्षित होकर सदैव अविस्मरणीय रहेगा। भ्रात प्रेम में तो प्रभु श्रीराम का भरत प्रेम, जो समस्त प्रेमों की ज्ञान गंगा है।
चतुर्थ भवन:
कौशल्यानंदन श्रीराम की जन्म कुण्डली के चतुर्थ भवन में तुला राशि में उच्च राशिगत् शनिदेव विराजमान हैं, ज्योतिष ग्रंथों में चतुर्थ भवन से व्यक्ति के अन्तःकरण, सुख, शांति, भूमि, भवन, बाग-बगीचा, निधि, दया, औदार्य, परोपकार, मातृ सुख आदि का निरूपण जातक की जीवन-शैली में देखा जा सकता है। प्रभु श्रीराम की कुण्डली का चतुर्थेश शुक्र, भाग्य भवन मंे अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान है। उच्च राशिगत् शनि प्रभु श्रीराम से मर्यादित जीवन के प्रति आग्रहशील हैं। भूमि, भवन का सुख तो चक्रवर्ती राजा के लिए सहज सुलभ है। अन्तःकरण की दृष्टि से सर्वत्र प्रेम का अनुग्रह तथा दया और औदार्यता महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या को श्रापमुक्त कर पाषाण से नारी रूप प्रदान करना तथा शबरी के जूठे बेर खाना, औदार्यता का सुखद पक्ष है। मातृत्रय कैकयी, कौशल्या, सुमित्रा के प्रति मातृ भक्ति सदैव स्तुत्यनीय एवं प्रेरणास्पद रहेगी।
पंचम भवन:
लव-कुश के पिता प्रभु श्रीराम की जन्म कुण्डली में पंचम भवन में वृश्चिक राशि है। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल सप्तम भवन में उच्च राशि में (मकर में) विराजमान है। पंचम भवन से जातक की संतान, स्थावर जंगम्, हाथ का यश, बुद्धि चातुर्य, विवेकशीलता, सौजन्य तथा परीक्षा में यश प्राप्ति से जुड़ी है।
लव-कुश के रूप मंे महान प्रतापी पुत्र तथा स्थावर संपत्ति के रूप में अयोध्या का चक्रवर्ती साम्राज्य एवं अपनी बुद्धि विवेक के बल सीता की खोज में सुग्रीव से मित्रता, लंका विजय में लंकापति रावण के अनुज विभीषण का युद्ध के पूर्व लंकापति बनाने के लिए राजतिलक करना तथा मर्यादा में रहते हुए खर-दूषण, कुम्भकरण, लंकापति रावण से लेकर अनेक आतातायी असुरों का वध कर रामराज्य की स्थापना करना, बुद्धिचातुर्य की रहस्यमयी परिणिता के सिवा और क्या है?
षष्टम् भवन:
असुर विजेता राम - श्रीराम की जन्म कुण्डली षष्टम् भवन धनु राशि अविस्थत है। षष्टम् भवन रोग, शत्रुओं से जातक की कथा-व्यथा का सांकेतिक है। इस भाव से शत्रु कष्ट के अभाव से जुड़े प्रश्नों की रहस्यमयता को उजागर करते हैं।
प्रभु श्रीराम की कुण्डली का षष्ठेश धनु राशि के स्वामी देवगुरु वृहस्पति लग्न भवन में कर्क राशिगत् चन्द्रमा के साथ अपनी उच्च राशि (कर्क) में विराजमान होकर ‘‘गजकेसरी योग’’ बना रहे हैं। जिसका सामान्य भाषा में अर्थ है - वनराज सिंह हाथियों को अपनी एक हुंकार (गर्जना) में भगा देता है। गज याने हाथी, केशरी याने सिंह। गुरु विश्वामित्र से शस्त्र शिद्या में अनेक रहस्यमयी अलौकिक विधाओं का ज्ञान प्राप्त किया, जिसका सर्वप्रथम प्रयोग ताड़का और सुबाहू के वध के रूप में घटित हुआ। श्री रामचन्द्र जी ने जहॉ-जहॉ अपने पग रखे, वहां उन्हें यश मिला। शत्रु विजय सीता स्वयंवर से लेकर खरदूषण तथा वानरराज बालि तथा दशानन रावण तक अनेक शक्तिशाली अपराजेय योद्धाओं का वध किया।
तुलसी की रामचरित मानस में .....
खरदूषण मो सम बलबन्ता, मार सकें न बिनु भगवन्ता।
रावण संहिता में दशानन रावण ने धनु राशिगत् षष्टम् भवन की व्याख्या करते हुए लिखा है - ऐसा जातक शत्रुओं का घमण्ड चूर करने वाला तथा अपने बड़ों को मान देने वाला होता है। त्रेतायुगीन प्रभु श्रीराम ने धरती पर आसुरी शक्तियों का तो नाश किया, साथ ही अपने गुरुओं, ऋषियों-मुनियों को यथेष्ठ सम्मान देकर उनका मान भी बढ़ाया है।
सप्तम् भवन
सीतापति रघुनंदन श्रीराम रघुनन्दन श्रीराम की जन्म कुण्डली के सप्तम भवन में मकर राशि में उच्च राशिगत् भूमि पुत्र मंगल विराजमान हैं। सप्तमस्थ मंगल होने से श्रीराम की कुण्डली मंगली बन गई। मंगल पंचमेश और राज्येश है। गजकेसरी योग की सप्तम दृष्टि दाम्पत्य जीवन को भी प्रभावित कर रही है। जनकनन्दनी सीताजी से उनका विवाह धनुष भंजन के बाद हुआ किन्तु भूमि पुत्र मंगल उच्चासीन होकर कह रहे हैं, जातक को दाम्पत्य जीवन का सुख तो दूंगा, किन्तु अल्पकालीन। सप्तम् भवन से पारिवारिक झगड़े तथा भूत, भविष्य, वर्तमान की स्थिति का सिंहावलोकन भी किया जाता है। मंथरा की षड्यंत्रमयी योजना ने कैकेयी की मति भ्रष्ट की। परिणितीवश श्रीराम को वनगमन, सीताहरण आसुरी शक्तियों का विनाश, लंका विजय के पश्चात् अयोध्या में राजतिलक, वैदेही सीता का त्याग, ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में श्रीसीता राम के पुत्रों लव-कुश का जन्म, जनकनंदिनी सीता का भूमि प्रवेश। ये सारे कथानक सप्तमस्थ उच्च राशिगत् मंगल की चेष्टाओं का फल है।
अष्टम् भवन
रघुनंदन का आयु भवन - श्रीराम जी की कुण्डली में अष्टम् भवन में कुम्भ राशि का स्वामी शनि चतुर्थ भवन में अपनी उच्च राशि तुला में विराजमान है। अष्टमेश शनि जातक की दीर्घायु का परिचायक है किन्तु, सप्तमेश और अष्टमेश शनि बलवान स्थिति में होकर जातक को दीर्घायु तो देता है, वहीं दूसरी ओर दाम्पत्य जीवन में अशुभता भी लाता है। साथ ही मृत्यु स्थान भी यह निर्धारित करता है। अष्टमेश शनि चतुर्थ भवन में होने से पारिवारिक विवाद के कारण वनगमन से सुख की हानि हुई किन्तु, वहां असुरों का विनाश कर यश मिला। रण रिपु अर्थात् युद्ध क्षेत्रों में शत्रुओं का दमन भी किया। पृथ्वी से प्रस्थान के बाद चिरकाल तक यशोगाथा अनेक प्रतीकों में बनी रहेगी। यह भी उनके अष्टमेश उच्च राशिगत् न्याय के देवता शनि की महिमा का फल है।
नवम् भवन:
भाग्य भवनस्थ शुक्र - श्री राघव की कुण्डली का भाग्य भवन कम चमत्कारी नहीं है। भाग्य भवन का स्वामी नवमेश गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में चन्द्रदेव की युति के साथ लग्नस्थ है। भाग्येश गुरु गजकेशरी योग बना रहा है, लग्न भवन में। भाग्य भवन में उच्च राशिगत् शुक्र चतुर्थेश तथा द्वादशेश का स्वामी है। माता से लेकर भूमि, भवन, वाहन (रथ) आदि सभी सुखों से पूरित रहे किन्तु, अपनी सप्तम दृष्टि से पराक्रम भवन को निहारते शुक्र ने पराक्रम के प्रदर्शन का माध्यम नारी जाति को बनाया। शुक्र स्त्री ग्रह है। महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या की मुक्ति, रावण से युद्ध में विजयश्री प्राप्त कर अशोक वाटिका से जनकनंदिनी सीता जी की मुक्ति, बालि बध से सुग्रीव की पत्नि रोमा की मुक्ति, श्रीराम की यशोगाथा का एक पक्ष है। वहीं दूसरी ओर आसुरी शक्तियों का नाश कर ऋषियों तथा जन-जन को निर्भय जीवन दिया, यह प्रभु श्रीराम के भाग्य भवन का पुण्य प्रताप ही तो था।
दसमस्थ:
रघुनंदन श्रीराम की कुण्डली के दसम भाव अर्थात् राज्य भवन में सूर्य के साथ बुध की युति, बुध आदित्य योग तो बना ही रहा है किन्तु, बुध व्ययेश होने से राजतिलक होते-होते 14 वर्षीय वनवास का योग बन गया। व्ययेश बुध ने राजयोग खण्डित किया क्योंकि व्ययेश जिस भवन में विराजमान होता, उसे किंचित सम्मान की हानि तो देता ही है। बुध ने ही उन्हें पिता के सुख से वंचित किया। किन्तु, सूर्य उच्च राशिगत् होकर राजभवन में विराजमान होने से गौरव, ऐश्वर्य एवं नेतृत्व का स्वामी बनाया। पिता की आज्ञा से वन गये। पिता का मान बढ़ाया। आसुरी शक्तियों के विनाश हेतु वानर जाति की सेना का नेतृत्व कर विजयश्री प्राप्त की। अधिकार प्राप्ति के रूप में सम्राट बने अयोध्या के। ईश्वर प्राप्ति भी दसम भवन से देखी जाती है, तो जो स्वयं त्रिभुवनपति हो उसे अपनी भक्ति में लगाकर मोक्ष प्रदान करने में बुध का योगदान महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वादश भवन मोक्ष का भवन भी है। अपनी भक्ति से अनेक साधु, संतों, भक्तों तथा पापियों को भी मोक्षगामी बनाने में पथ-पथ पर प्रेरणा दी। प्रभुता भी दसम भवन का एक गुण है। तो श्रीराम प्रभुता पाकर भी दीनों के प्रति भी सदैव सहृदय बने रहे, यही उनकी अनुग्रहमयी प्रभुता है किन्तु स्मरणीय रहे! चतुर्थ भवन उच्च राशिगत् शनि की सप्तम दृष्टि नीचे राशि पर होने के कारण ही उन्हें वनवास में 14 वर्षीय वनवासी जीवन बिताना पड़ा। भले ही प्रकृति की रहस्यमयता आसुरी शक्तियों के विनाश के रूप में रूपांतरित हो गई हो किन्तु मंगल की चतुर्थ स्वक्षेत्री दृष्टि और सूर्य के उच्च राशिगत् प्रभाव से वनवास की समाप्ति के पश्चात् पुनः राज्यारोहण ग्रहों की अपनी रहस्यमयी कलात्मक शक्तियों की ओजस्वीयता तो स्वीकारी ही जायेगी।
एकादश भवन:
एकादश भवन मूलतः लाभ, सम्पन्नता, वाहन, वैभव, स्वतंत्र चिन्तन के रूप में ज्योतिषीय ग्रंथों में स्वीकारा गया है। जन-जन के प्रभु श्रीराम स्वतंत्र चिन्तन के रूप में नैसर्गिक अर्थात् प्राकृतिक सम्पदाओं से मुक्ति का बोध कराते हैं। भक्तवत्सल प्रभु श्रीराम का मानव से लेकर समस्त जीवों के प्रति उदार भाव तो था ही, किन्तु एकादशेश शुक्र भाग्य भवन मं अपनी उच्च राशि मीन में विराजने से सभी के प्रति करूणा भाव बनाये रखने के प्रति संकल्पित रहे। अवतारी होने के बाद भी अपनी मानवीय मर्यादा में बने रहे। एक पत्नि व्रतधारी होने से उन्होंने सम्पूर्ण नारी समाज को गरिमा प्रदान की। मित्रों को सहोदर की तरह मान दिया। शत्रुओं के प्रति भी मानवीय मूल्यों का क्षरण उन्होंने नहीं स्वीकारा। वचनबद्धता राघव की निष्ठा का अमोघ शस्त्र रही।
द्वादश भवन:
मोक्ष का पर्याय - सीता पति राघव की कुण्डली के बारहवें भवन में मिथुन राशि की स्थापना ने मर्यादा पुरूषोत्तम राम की कथनी, करनी में कहीं भी अवरोध पैदा नहीं होने दिया। द्वादश भवन से ज्ञान तन्तु, स्वभाव, शांति, विवेक, व्यसन, सन्यास, शत्रु की रोक तथा धन-सुख-सम्मान का व्यय आदि का लेखा-जोखा देखा जाता है। द्वादश भवन में मिथुन राशि होने से सीता पति राघव भावुक थे। वैदेही हरण एवं लक्ष्मण को शक्ति लगने पर वे कैसे व्यथित हुए, यह तुलसीकृत रामायण में रोमांचकारी शब्द शैली में अंकित है। वनवास में राजसत्ता से 14 वर्षों तक दूर रहे किन्तु, पिता की आज्ञा को सर्वोपरि माना। सीताहरण में सुख और सम्मान का व्यय हुआ किन्तु अपने विवेक से वानर सेना का नेतृत्व कर शत्रुओं पर रोक ही नहीं लगाई अपितु, उनका नाश भी किया। वनवासी राम ने एक सन्यासी के रूप में 14 वर्ष वनों में बिताये। किसी भी नगर में वनवासी प्रभु श्रीराम ने 14 वर्षों की अवधि में प्रवेश नहीं किया, ऐसे सन्यासी हैं, प्रभु श्रीराम।
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पंडित पीएन भट्टअंतरराष्ट्रीय ज्योतिर्विद,
अंकशास्त्री एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संचालक : एस्ट्रो रिसर्च सेंटर
जी-4/4,जीएडी कॉलोनी, गोपालगंज, सागर (मप्र)
मोबाइल : 09407266609, 8827294576
फोन: 07582-223168, 223159

सोमवार, 19 मार्च 2018

भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री संगीता तिवारी ने किया शार्ट फिल्म ब्लैकमेल के पोस्टर का विमोचन


भोपाल। किरायेदार रखने से पूर्व मकान मालिकों को क्या-क्या सावधानी रखनी चाहिए इस उद्देश्य को लेकर राजधानी के कलाकारों ने एक संदेश परक शार्ट मूवी ब्लैकमेल का निर्माण (शूटिंग) झीलों की बेस्ट लोकेशन में किया जिसमें वरिष्ठ कलाकार सुनील सोन्हिया , अपूर्व शुक्ला, जिया राजपूत, राजकुमार सोनी, अशोक दुबे, भगवान सिंह पवार तथा कविता ने दमदार अभिनय किया। कैमरा,डबिंग, एडिटिंग ऋषि गुप्ता ने की।
गत दिवस भोपाल में एक निजी कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देने आईं प्रसिद्ध भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री संगीता तिवारी ने शार्ट मूवी फिल्म ब्लैकमेल को देखा और कलाकारों की बेहद प्रशंसा की। 


शक की सुई में अभिनय करेंगी
झीलों की नगरी भोपाल में घूमने के बाद यहां के सौन्दर्य, हरियाली, आकर्षक इमारतों, सरकारी भवनों यहां के लोगों की मिलनसारिता की उन्होंने तारीफ की। उन्होंने वरिष्ठ कलाकार सुनील सोन्हिया, अपूर्व शुक्ला, अशोक दुबे, जिया राजपूत आदि कलाकारों के साथ बन रही नई शार्ट मूवी शक की सुई में अभिनय करने की सहमति भी दी जो कि अप्रैल माह में इसकी शूटिंग करेंगी।

संगीता की 10 सालों में 20 भोजपुरी फिल्में
उल्लेखनीय है कि संगीता तिवारी ने पिछले 10 वर्षों में 20 भोजपुरी फिल्मों में काम कर चुकी हैं जिसमें देवरजी, बलम परदेशी, औरत खिलौना नहीं, पागल प्रेमी, धुरंधर, अम्मा की बोली, हुश्न बेवफा आदि प्रमुख हैं। संगीता तिवारी ने भोजपुरी अभिनेता रवि किशन, मनोज तिवारी ,संजय मिश्रा, राज खन्ना के साथ बेस्ट फिल्में की हैं।

बॉलीवुड में होगी एंट्री
संगीता तिवारी ने बताया कि वे जल्द ही बॉलीवुड फिल्मों में एंट्री करेंगी। इसके लिए बॉलीवुड निर्माता-निर्देशकों से बातचीत चल रही है। जैसे ही हमारे मुताबिक स्क्रिप्ट अच्छी लगेगी हम तुरंत हां कर देंगे। संगीता तिवारी ने भोजपुरी फिल्मों के अलावा साउथ के कलाकारों के साथ कई हिट फिल्में की हैं।

भोपाल सबसे खूबसूरत है
संगीता तिवारी ने कहा कि अक्सर हम भोपाल किसी न किसी प्रोग्राम में आते रहते हैं यहां की लोकेशन वाकई खूबसूरत है। भोपाली लोगों को मैं तहेदिल से शुभकामनाएं देता हूं व बधाई देता हूं कि कला-संस्कृति में भोपाल का कोई शानी नहीं।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
सुनील सोन्हिया - 9131103491
अपूर्व शुक्ला - 9752530679
Rajkumar soni - 8827294576





























 

गुरुवार, 15 मार्च 2018

साहित्य के क्षेत्र में प्रथम जेसीबी पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित





भारतीय लेखकों की प्रतिभाओं को सम्मानित करने और भाषायी बाधाओं को दूर कर साहित्य का जश्न मनाने के लिए भारत के सर्वाधिक मूल्यवान साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा
नई दिल्ली. साहित्य के क्षेत्र में प्रथम जेसीबी प्राइज़ के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की जा रही हैं। देशभर के प्रकाशकों को इस पुरस्कार के लिए उपन्यासों को भिजवाने तथा लेखकों को देश के सर्वाधिक मूल्यवान साहित्यिक पुरस्कार के तहत् 25 लाख रु जीतने का अवसर दिलाने हेतु प्रविष्टियां मंगवायी जा रही हैं। यह सालाना पुरस्कार भारतीय लेखकों के उल्लेखनीय फिक्शन (गल्प लेखन) को सामने लाने तथा उसका जश्न मनाने के मकसद से शुरू किया गया है। साथ ही, यह पुरस्कार विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य के बीच मौजूद दूरियों को मिटाते हुए समकालीन भारतीय साहित्य को हर जगह पाठकों के लिए प्रदर्शित करेगा।
भारत में अग्रणी अर्थमूविंग एवं कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट निर्माता जेसीबी इंडिया लिमिटेड द्वारा पुरस्कार के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है तथा इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी जेसीबी लिटरेचर फाउंडेशन ने संभाली है। पुरस्कार के लिए 31 मई, 2018 तक प्रविष्टियां आमंत्रित हैं।
प्रकाशक अंग्रेज़ी में प्रकाशित कृतियों तथा अन्य भाषाओं से अंग्रेज़ी में अनूदित कृतियों के लिए अलग से प्रविष्टियां भिजवा सकते हैं। यदि विजेता पुस्तक अनूदित होगी तो अनुवादक को 5 लाख रु पुरस्कारस्वरूप दिए जाएंगे। भारत में साहित्यिक परंपराओं के मद्देनज़र, जेसीबी प्राइज़ फाॅर लिटरेचर का मकसद भविष्य में अनुवाद (अंग्रेज़ी तथा भारतीय भाशाओं के बीच) को प्रोत्साहित करना है और इस प्रकार यह पुरस्कार सही मायने में पाठकों तक भारतीय साहित्य को पहुंचाएगा।
लार्ड बैमफोर्ड, चेयरमैन, जेसीबी ने कहा, ’’भारत में जेसीबी के परिचालनों के क्षेत्र में 40 वर्षों का उल्लेखनीय मुकाम पूरा होने जा रहा है और ऐसे में जेसीबी प्राइज़ फार लिटरेचर शुरू करने का यह बेहतरीन समय है। मेरा मानना है कि ये पुरस्कार, ज्यादा से ज्यादा लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे और साथ ही इस अभूतपूर्व देश में इनसे लेखकों एवं प्रकाशकों को भी फायदा मिलेगा।‘‘
पुरस्कार प्राप्त उपन्यासकार एवं निबंधकार राणा दासगुप्ता इस पुरस्कार के लिटरेरी डायरेक्टर हैं तथा वे इस पुरस्कार को सर्वोच्च साहित्यिक मानकों के अनुरूप बनाए रखने का दायित्व संभाल रहे हैं। हर साल, लिटरेरी डायरेक्टर एक जूरी को नियुक्त करेंगे जिनका दायित्व सभी प्रविष्टियों को पढ़ने के बाद एक लाॅन्गलिस्ट (सितंबर में), एक शार्टलिस्ट (अक्टूबर में) तैयार कर अंत में एक विजेता (नवंबर में) का चयन करना है। इस जूरी में, अलग-अलग क्षेत्रों के उत्कृष्ट लोगों को शामिल किया जाएगा जो समकालीन जीवन के विविध अनुभवों को लेकर आएंगे।
इस वर्श की जूरी में, पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्देशक दीपा मेहता (चेयर), मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी आॅफ इंडिया के संस्थापक रोहन मूर्ति, येल यूनीवर्सटी की एस्ट्रोफिजिसिस्ट और लेखक प्रियंवदा नटराजन, उल्लेखनीय उपन्यासकार विवेक शानबाग तथा लेखिका एवं अनुवादक अर्शिया सत्तार शामिल हैं।
जूरी द्वारा चुनी गई पुस्तकों को विज़री पब्लिसिटी कैम्पेन के जरिए प्रमोट किया जाएगा जिससे न सिर्फ इन महत्वपूर्ण कृतियों की तरफ अधिकाधिक पाठकों का ध्यान जाएगा बल्कि यह साहित्य की प्रतिष्ठा और दृश्यता को भी बढ़ाएगा। सभी शाॅर्टलिस्ट किए गए लेखकों को 1 लाख रु (प्रत्येक) का पुरस्कार दिया जाएगा।
लिटरेरी डायरेक्टर राणा दासगुप्ता ने कहा, ’’भारत जैसे बहुभाषी देश में, जहां अनेक और विशिष्ट साहित्यिक परंपराएं हैं, कोई भी केवल उनकी अपनी भाषा में रचे गए साहित्य को पढ़ने भर से संपूर्ण भारतीय साहित्यको जानने का दावा नहीं कर सकता। इस पुरस्कार से हमें उम्मीद है कि भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद प्रक्रिया को बल मिलेगा और साथ ही लोगों को यह पता चलेगा कि देश में दूसरे लोग क्या सोच रहे हैं और क्या कह रहे हैं।‘‘
लिटरेरी डायरेक्टर को जेसीबी लिटरेचर फाउंडेशन की परामर्श परिषद् का सहयोग हासिल होगा। इसकी अध्यक्षता भारतीय उद्योग परिसंघ के प्रमुख संरक्षक तरुण दास कर रहे हैं तथा उनके साथ हैं लेखक अमिताव घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी साहित्य के प्रोफेसर डा हरीष त्रिवेदी और कला इतिहासकार तथा पर्यावरणविद फिरोज़ा गोदरेज।
तरुण दास ने कहा, ’’अमरीका एवं ब्रिटेन में पुरस्कारों से ख्याति प्राप्त करने वाले लेखकों को छोड़कर, भारत में साहित्यिक उपलब्धियों की तरफ बहुत कम ध्यान दिया गया है। जेसीबी प्राइज़ फाॅर लिटरेचर पुस्तकों, लेखकों और भारत में पढ़ने की परंपराओं पर केंद्रित विमर्श षुरू करेगा तथा हर साल पाठकों के लिए देष में प्रकाशित उत्कृष्ट कृतियों को सामने लाएगा।‘‘
पुरस्कार के बारे में तथा इसकी चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी के लिए देखें  www.thejcbprize.org

गुरुवार, 8 मार्च 2018

राजकुमार सोनी के कुछ बेस्ट फोटो

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भोपाल के सबसे श्रेष्ठ पाटीदार स्टूडियों ने राजकुमार सोनी के कुछ बेस्ट फोटो अपने कैमरे में कैद किए।



मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

पहली नजर का पहला प्यार-नीलम-संजय विजयवगीय


यदि मुहब्बत इतनी रहस्यमय न होती तो क्या मिर्जा गालिब 'इस इश्क के कायदे भी अजब हैं गालिब, करो तो बेहाल हैं, न करो तो बेहाल' जैसा शेर लिखते? आपने कभी गौर किया है कि इस प्रेम, प्यार जैसे शब्दों को लेकर कितने विवाद रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह तो एक भावना है, जिसका एहसास धीरे-धीरे ही होता है, लेकिन कुछ तो बिलकुल प्रूफ के साथ कहते हैं, यह तो पहली नजर का प्यार है जो बस एक बार देखते ही हो जाता है। यह एक तीर है जो दिल के पार हो जाता है।
यह मुहब्बत का तीर है, जिगर के पार हो जाता है पता भी नहीं चलता, न जाने कब प्यार हो जाता है इस बारे में एक बात तो तय है कि दुनिया चाहे कुछ भी बोलती रहे, प्यार करने वाले इस बेकार के विवाद में नहीं फँसते कि प्यार और पहली नजर में कोई रिश्ता होता है या नहीं? प्रेमी युगल तो प्यार में डूबते हैं और उन अनमोल क्षणों को बाँधकर, सहेजकर रखने के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। और फिर बताइए इसमें गलत भी क्या है? प्यार तो ईश्वर का प्रसाद ही है, बशर्ते आप उसे गलत जगह, गलत तरीके से इस्तेमाल न करें।

नीलम-संजय विजयवगीय

हमारी अरेंज्ड मैरिज थी और शादी के 23 खूबसूरत साल का सफर तय कर लिया है। हमारी लव स्टोरी की शुरुआत तब हुई जब ये मुझे देखने आये। वो पहली नजर का प्यार था। जब रिश्ता तय हो गया तो धीरे-धीरे फोन पर बातें शुरू हुईं और लव-लैटर आने-जाने लगे, तब एक दूसरे को जानने की शुरुआत हुई। और शादी के प्यारे बंधन में बंध गए। हमारी प्यार रूपी बगिया में हमारे बच्चों ने और खूबसूरत रंग भर दिए हैं । समय के साथ आपसी समझ और प्यार रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं । खट्टी-मीठी नोक-झोंक रिश्ते को खूबसूरत बना रही है। उनका मेरे लिए केयरिंग होना सबसे अच्छा लगता है । वैसे तो गिफ्ट्स कभी भी मिले अच्छे लगते हैं लेकिन करवा चौथ और वेलेंटाइन डे दिन मिलने वाले गिफ्ट्स की बात ही कुछ और है।




पहली नजर का पहला प्यार



यदि मुहब्बत इतनी रहस्यमय न होती तो क्या मिर्जा गालिब 'इस इश्क के कायदे भी अजब हैं गालिब, करो तो बेहाल हैं, न करो तो बेहाल' जैसा शेर लिखते? आपने कभी गौर किया है कि इस प्रेम, प्यार जैसे शब्दों को लेकर कितने विवाद रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह तो एक भावना है, जिसका एहसास धीरे-धीरे ही होता है, लेकिन कुछ तो बिलकुल प्रूफ के साथ कहते हैं, यह तो पहली नजर का प्यार है जो बस एक बार देखते ही हो जाता है। यह एक तीर है जो दिल के पार हो जाता है।
यह मुहब्बत का तीर है, जिगर के पार हो जाता है पता भी नहीं चलता, न जाने कब प्यार हो जाता है इस बारे में एक बात तो तय है कि दुनिया चाहे कुछ भी बोलती रहे, प्यार करने वाले इस बेकार के विवाद में नहीं फँसते कि प्यार और पहली नजर में कोई रिश्ता होता है या नहीं? प्रेमी युगल तो प्यार में डूबते हैं और उन अनमोल क्षणों को बाँधकर, सहेजकर रखने के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। और फिर बताइए इसमें गलत भी क्या है? प्यार तो ईश्वर का प्रसाद ही है, बशर्ते आप उसे गलत जगह, गलत तरीके से इस्तेमाल न करें।

नीलम-संजय विजयवगीय


हमारी अरेंज्ड मैरिज थी और शादी के 23 खूबसूरत साल का सफर तय कर लिया है। हमारी लव स्टोरी की शुरुआत तब हुई जब ये मुझे देखने आये। वो पहली नजर का प्यार था। जब रिश्ता तय हो गया तो धीरे-धीरे फोन पर बातें शुरू हुईं और लव-लैटर आने-जाने लगे, तब एक दूसरे को जानने की शुरुआत हुई। और शादी के प्यारे बंधन में बंध गए। हमारी प्यार रूपी बगिया में हमारे बच्चों ने और खूबसूरत रंग भर दिए हैं । समय के साथ आपसी समझ और प्यार रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं । खट्टी-मीठी नोक-झोंक रिश्ते को खूबसूरत बना रही है। उनका मेरे लिए केयरिंग होना सबसे अच्छा लगता है । वैसे तो गिफ्ट्स कभी भी मिले अच्छे लगते हैं लेकिन करवा चौथ और वेलेंटाइन डे दिन मिलने वाले गिफ्ट्स की बात ही कुछ और है।

कामना गौर


मैं रायपुर की हूं और मेरे हसबैंड भोपाल के। हमारी पहली मुलाकात एक होटल में हुई जहां परिवार के और सदस्य भी मौजूद थे। वहां ज्यादा बातचीत नहीं हुई लेकिन मुझे पहली नजर का प्यार हो गया और हमारी शादी हो गई। शुरुआत में नये परिवार में आकर कुछ डर लगता था लेकिन उनका मेरी हर बात को समझना मुझे उनके और करीब लाता गया। शादी के बाद मेरे जन्मदिन को फूलों और काडस देकर यादगार बना दिया। ये वेलेंटाइन हमारे रिश्ते को और मजबूत बना देगा।


नीलम-गिरीश मनचंदा


वह दिन था 14 फरवरी का जिस दिन वह मुझे देखने आए और हमने एक दूसरे की आखों मैं देखा। देखते ही ऐसा लगा कि वो मेरे लिए मैं उनके लिए बनी हूं । नशा था उनके प्यार का जिसमें हम खो गए। उन्हें भी पता न चला कि हम कब उनके हो गए; फिर क्या था हमारी शादी हुई, शादी भी उस दिन जिसे सब मनाते है (31 दिसंबर) आज हमारी शादी को 20 साल हो गए है ... लेकिन एसा लगता ही कल ही हमारी शादी हुई हो मुझे ऐसा जीवन साथी मिलेगा जिसकी मैने कल्पना भी न की थी ... बस यही कहूंगी....हम उनके हमसफर क्या बने , हम खुदको भूल गए। जमाना क्या याद रहता , जब हम खुदा को भूल गए मै यही दुआ करती हूं हर जन्म मैं यही हम सफर मिले












 राखी विजयवर्गीय


प्यार का सिलसिला एक-दूसरे को देखने के बाद ही शूरू हुआ । पहली बार देखने के बाद ही महसूस हुआ कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं । सगाई और उसके बाद शादी ने हमारे रिश्ते को और मजबूत बना दिया। ऑफिस जाते समय बाय करके जाना अच्छा लगता है । ये प्यार का रिश्ता इतना खूबसूरत है कि चाहूंगी हर जन्म मे हम दोनों ही एक-दूसरे के जीवन साथी हो

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

110 साल से एक परिवार भटक रहा है जमीन के हक के लिए



कलेक्टर-तहसीलदार से निराश पागनीस परिवार शासन की शरण में

कोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड भी दे चुका जमीन के बदले जमीन देने का आदेश, लेकिन अभी तक नहीं मिला न्याय

- दो फरवरी को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई


इंदौर। क्या आप यकीन करेंगे कि शहर भर में अतिक्रमण हटा रहा नगर निगम का अपना मुख्यालय शहर के पागनीस परिवार की जमीन पर बना है और कोर्ट व रेवेन्यू बोर्ड के आदेश के बावजूद उस परिवार को न तो बदले में जमीन दी गई है और न ही मुआवजा। पिछले 110 वर्षों से परिवार अपने हक की लड़ाई के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। 7.75 एकड़ जमीन पर नगर निगम मुख्यालय के अलावा मराठी स्कूल बना हुआ है। वर्तमान में जमीन की कीमत लगभग 250 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।

क्या था मामला
वर्ष 1908 में तत्कालीन होलकर रियासत ने कृष्णराव पागनीस ईमानदार से 7.75 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी, जिस पर वर्तमान में नगर निगम मुख्यालय खड़ा है और पास में मराठी स्कूल चल रहा है। बदले में पागनीस परिवार को वर्ष 1926 में भमोरी में अनूप टॉकीज के पीछे की जमीन दी गई, लेकिन बाद में पता चला कि उक्त जमीन सेठ कस्तूरचंद की है। पागनीस परिवार रेवेन्यू बोर्ड में गया। करीब 26 वर्ष तक चले केस के बाद बोर्ड ने फैसला दिया कि उक्त जमीन सेठ कस्तूरचंद की है और अब पागनीस परिवार को किसी अन्य स्थान पर जमीन दी जाए, जो कि वह खुद पसंद करें। 8 साल बाद तहसीलदार ने उक्त जमीन पर कस्तूरचंद को कब्जा सौंप दिया। इसके तीन साल बाद जिला प्रशासन की ओर से पागनीस परिवार को पत्र लिखे गए और इच्छित जमीन बताने की अपील की। परिवार ने अनूप नगर की जमीन बताई, लेकिन बाद में प्रशासन ने यह कहते हुए जमीन देने से इंकार कर दिया कि वह जमीन कांकड़ की है। फिर 7 साल गुजर गए और वर्ष 1970 में कृष्णराव पागनीस के निधन के बाद उनके पुत्र विनायक राव ने प्रमुख सचिव राजस्व से मुलाकात कर जमीन देने की मांग की। उन्होंने इंदौर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस मामले का जल्द से जल्द निराकरण करें। मामला नहीं निपटा और 20 वर्ष और गुजर गए। 1990 में विनायक राव का निधन हो गया। 1995 में उनके बेटे रामचंद्र पागनीस ने एक बार फिर इस मामले को उठाया और जिला कोर्ट में केस दायर कर जमीन मांगी। कोर्ट ने कहा कि यदि जिला प्रशासन जमीन देने से इंकार कर रहा है तो फिर कोर्ट में उसके खिलाफ केस लगाएं। पागनीस के परिजन जिला प्रशासन के अधिकारियों के चक्कर काटने लगे और 12 वर्ष बाद सन् 2007 में रामचंद्र की मृत्यु के बाद उनके भाई नारायण पागनीस ने मोर्चा संभाला और कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत की। कोई नतीजा नहीं निकला तो वर्ष 2013 में पागनीस परिवार की ओर से बसेरा कंस्ट्रक्शंस के मो. अली उस्मानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। एक वर्ष बाद कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि 6 माह के भीतर हर हाल में प्रकरण का निराकरण करें, लेकिन कुछ समय पश्चात तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने पागनीस परिवार का आवेदन खारिज करते हुए कहा कि 1954 में रेवेन्यू बोर्ड द्वारा दिए गए जमीन के बदले जमीन देने के आदेश का पालन नहीं हो सकता, क्योंकि पागनीस परिवार 1954 से 1966 तक नहीं आया और 12 वर्ष बाद यानी 1966 में दावा करने आया था। 12 वर्ष बाद आने से जमीन का दावा नहीं बनता। कलेक्टर के इस निर्णय को मो. अली ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिस पर 2 फरवरी 2018 को सुनवाई होगी। इस याचिका में मांग की गई है कि निगम मुख्यालय के लिए 1908 में ली गई जमीन वापस देने और जिस जमीन पर स्कूल संचालित है, इस जमीन का किराया सरकार से वसूल कर पागनीस परिवार को दिया जाए। अभी तक हाईकोर्ट में सरकार ने अपनी ओर से कोई जवाब पेश नहीं किया है। अली ने बताया कि यदि यहां नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू हुआ तो सरकार को करीब 500 करोड़ रुपए या इतनी ही कीमत की जमीन पागनीस परिवार को देना होगी। जमीन के 80 की उम्र के 9 बारिस हैं।

प्रमुख सचिव राजस्व ने फिर दिया आवश्वासन
इस मामले में कुछ दिनों पूर्व याचिकाकर्ता मो. अली उस्मानी के साथ पागनीस परिवार के सदस्य भोपाल जाकर राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से मिले और उन्हें पूरा मामला बताया। उनसे निवेदन किया कि वे हस्तक्षेप करें ताकि पागनीस परिवार को न्याय मिल सके। उन्होंने भी परिजनों को आश्वासन दिया है।

जमीन वापस पागनीस परिवार को दी जाए
पागनीस परिवार से जुड़े संजय जीनवाल ने बताया कि नए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत वरिष्ठ एडवोकेट एके सेठी ने 2015 में नए भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 24 (2) के अनुसार 2015 में उच्च न्यायालय में मांग रखी है कि अगर मुआवजा देने में सरकार सक्षम नहीं है तो जिस भूमि पर इंदौर नगर निगम व मराठी स्कूल बना है, वही जमीन वापस पागनीस परिवार को दी जाए।

इनका कहना है
इस संबंध में मुझे अभी कोई जानकारी नहीं है। पता करके एक-दो दिन में बता सकता हूं।
श्रीकांत शर्मा, तहसीलदार, इंदौर